धनतेरस 2023: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

धनतेरस, हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण और शुभ त्यौहार है, जो हिंदू कैलेंडर के आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष यह 29 अक्टूबर, मंगलवार को पड़ रहा है। ‘धनतेरस’ नाम दो संस्कृत शब्दों, ‘धन’ (धन) और ‘तेरस’ (त्रयोदशी) के योग से बना है। इस दिन लोग भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा करते हैं। माना जाता है कि इस पूजा से पूजक को अच्छा स्वास्थ्य, ऊर्जा और समृद्धि प्राप्त होती है। धनतेरस के दिन खरीदारी करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है, लेकिन यह शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए।

धनतेरस की शुभ मुहूर्त

एक ज्योतिषी ने धनतेरस पर खरीदारी के लिए शुभ समय बताया है। देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषी पंडित नंदकिशोर मुदगल ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि धनतेरस का त्योहार हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन खरीदारी करना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इससे माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और धन तेहर गुना बढ़ता है। यह महत्वपूर्ण है कि ये खरीदारी शुभ मुहूर्त में की जाए।

धनतेरस पर शुभ मुहूर्त:

पंडित नंदकिशोर मुदगल के अनुसार, ऋषिकेश पंचांग के अनुसार, धनतेरस पर सोना, चांदी, आभूषण, बर्तन, अचल संपत्ति आदि खरीदने के लिए तीन शुभ मुहूर्त हैं:

  • पहला शुभ मुहूर्त: सुबह 7:50 बजे से 10:00 बजे तक, जो वृश्चिक लग्न में है। यह समय स्थिर और अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • दूसरा शुभ मुहूर्त: दोपहर 2:00 बजे से 3:30 बजे तक, जो कुंभ लग्न में है। यह समय भी स्थिर और शुभ माना जाता है।
  • तीसरा और सबसे अच्छा शुभ मुहूर्त: शाम 6:36 बजे से 8:32 बजे तक प्रदोष काल में। इनमें से किसी भी समय खरीदारी करना अत्यंत लाभदायक माना जाता है।

धनतेरस का ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व

धनतेरस का ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत गहरा है। यह तीन मुख्य पौराणिक कारणों से महत्वपूर्ण और मनाया जाने वाला त्योहार है।

धन्वंतरि अवतार:

पहला कारण यह है कि इसी दिन भगवान धन्वंतरि, आयुर्वेद के देवता, क्षीरसागर से कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस कलश में अमृत था, जिससे मनुष्य को जीवनदायी शक्ति और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। इसलिए, इस दिन स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना के साथ पूजा की जाती है।

माँ लक्ष्मी का आगमन:

दूसरा कारण, इसी दिन माँ लक्ष्मी, धन की देवी, क्षीरसागर से प्रकट हुई थीं और अपने साथ सोने से भरा कलश लायी थीं। माता लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी के रूप में पूजा जाता है और इस दिन उनकी पूजा से घर में सुख-समृद्धि आती है।

कुबेर का महत्व:

तीसरा महत्वपूर्ण कारण कुबेर का इस पर्व से जुड़ा होना है। कुबेर धन के देवता हैं और उनके आशीर्वाद से घर में समृद्धि आती है। धनतेरस के दिन इन तीनों देवताओं की पूजा करने से लोगों को स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है।

धनतेरस पर खरीदारी का महत्व

धनतेरस के दिन खरीदारी करना बहुत शुभ माना जाता है। यह माना जाता है कि इस दिन की गई खरीदारी से धन में वृद्धि होती है। यह खरीदारी धातु, बर्तन, या वाहन जैसी चीजों तक सीमित नहीं है; घर, जमीन, और अन्य निवेश भी शुभ माने जाते हैं।

खरीदारी के प्रकार और महत्व:

यह माना जाता है कि इस दिन सोना, चांदी, या अन्य धातुओं की खरीदारी करना विशेष रूप से शुभ होता है। ये धातुएं धन और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती हैं। इसके अलावा, बर्तन, नया वाहन, और घर जैसे महत्वपूर्ण खरीद भी इस दिन की जाती हैं।

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि खरीदारी शुभ मुहूर्त में की जानी चाहिए ताकि इसका पूर्ण लाभ उठाया जा सके। ज्योतिषी द्वारा सुझाए गए मुहूर्त के अनुसार खरीदारी करने से धन में अधिक वृद्धि होने की मान्यता है।

निष्कर्ष

धनतेरस एक महत्वपूर्ण हिंदू त्यौहार है जो धन, समृद्धि, और स्वास्थ्य से जुड़ा है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माँ लक्ष्मी और कुबेर की पूजा की जाती है, और शुभ मुहूर्त में खरीदारी करने से धन में वृद्धि का आशीर्वाद मिलने का विश्वास है। धनतेरस का पौराणिक महत्व, साथ ही इसकी वर्तमान महत्व से हम इस त्योहार की आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक महत्व को समझ सकते हैं।

टेक अवे पॉइंट्स:

  • धनतेरस आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है।
  • इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा की जाती है।
  • धनतेरस पर खरीदारी करना शुभ माना जाता है, खासकर सोना, चांदी, आदि।
  • खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना आवश्यक है।
  • धनतेरस का ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत गहरा है।

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