दिल्ली की प्रदूषित हवा से बचाव के आयुर्वेदिक तरीके

दिल्ली की हवा में सांस लेना हुआ मुश्किल! सर्दी का मौसम आते ही बढ़ा प्रदूषण का स्तर, जानिए बचाव के आयुर्वेदिक उपाय

दिल्ली में सर्दियों की आहट के साथ ही हवा की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई है। नवंबर के मध्य में ही धुंध की एक मोटी चादर दिल्ली पर छा गई है, जिससे लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। प्रदूषण का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ रहा है, और आने वाले दिनों में स्थिति और भी बिगड़ सकती है। लेकिन घबराने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि आज हम आपके लिए कुछ आसान और कारगर आयुर्वेदिक उपाय लेकर आए हैं जो इस प्रदूषण से आपकी रक्षा करेंगे। आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में विस्तार से…

हल्दी वाला दूध और गरारे – प्रदूषण से बचाव का आसान तरीका

क्या आप जानते हैं कि एक कप गर्म हल्दी वाला दूध आपकी इम्यूनिटी को बढ़ाने में कितना कारगर है? सोने से पहले गर्म हल्दी वाला दूध पीना आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने का एक सरल और प्रभावी तरीका है। हल्दी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण श्वसन तंत्र को शांत करते हैं और प्रदूषित हवा से होने वाली जलन से राहत दिलाते हैं। इसके अलावा, हल्दी वाले गर्म पानी से गरारे करने से गले की खराश कम होती है और प्रदूषण के कारण होने वाली सूजन से भी राहत मिलती है। हल्दी में ऐसे कई तत्व हैं जो प्रदूषण से होने वाली तकलीफों से बचाते हैं। यह सर्दी के मौसम में संक्रमण से बचाव में भी मददगार है।

हल्दी के अद्भुत फायदे

हल्दी केवल एक मसाला नहीं है, बल्कि एक औषधि भी है। इसके एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण प्रदूषण के दुष्प्रभावों से लड़ने में अद्भुत काम करते हैं। नियमित रूप से हल्दी का इस्तेमाल करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

आंवला जूस – विटामिन सी का पावरहाउस

सर्दियों का मौसम आंवले का मौसम भी होता है। आंवला विटामिन सी का खज़ाना है। आंवले में भरपूर मात्रा में मौजूद विटामिन सी, शरीर को प्रदूषण के नुकसानदेह प्रभावों से बचाता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। आंवला जूस पीना या रोजाना एक आंवला खाना, आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, सांस लेने में आसानी करता है और आपकी त्वचा को प्रदूषण के नुकसान से भी बचाता है।

आंवले से बढ़ाएं इम्यूनिटी

आंवले में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी मिलकर प्रदूषण से होने वाले नुकसान को कम करते हैं। यह सर्दी-खांसी से भी बचाने में मददगार है।

ऑयल पुलिंग – मुंह के प्रदूषण से बचाव

ऑयल पुलिंग एक प्राचीन आयुर्वेदिक तरीका है, जिसमें लगभग 5 मिनट तक नारियल या तिल के तेल की थोड़ी मात्रा को मुंह में घुमाया जाता है। यह तकनीक मुंह में एक सुरक्षात्मक परत बनाती है, जो प्रदूषित हवा से आने वाले टॉक्सिन्स और एलर्जी को आपके शरीर में जाने से रोकती है। तेल एक प्राकृतिक अवरोधक की तरह काम करता है और प्रदूषक तत्वों को आपके सिस्टम में प्रवेश करने से रोकता है, साथ ही मुंह को साफ भी रखता है।

ऑयल पुलिंग के और भी फायदे

ऑयल पुलिंग से मुंह की सफाई के साथ ही दांतों और मसूड़ों की सेहत भी बेहतर होती है। यह मुंह के संक्रमण से भी बचाता है।

नीम का पानी – त्वचा और बालों की देखभाल

नीम के पानी को रोजाना इस्तेमाल करने से त्वचा और बालों से प्रदूषक तत्व हटाने में मदद मिलती है। नीम में शक्तिशाली एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो त्वचा और बालों को प्रदूषक तत्वों के बुरे प्रभावों से बचाते हैं। नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर ठंडा करें और नहाने के लिए इसका इस्तेमाल करें।

नीम के अद्भुत गुण

नीम एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक है। इसके कई स्वास्थ्य लाभ हैं जिनमें त्वचा और बालों की देखभाल, इम्यूनिटी बढ़ाना और संक्रमण से बचाव शामिल हैं।

अनुलोम-विलोम – फेफड़ों की सफाई

अनुलोम-विलोम एक सरल लेकिन प्रभावी प्राणायाम है जो फेफड़ों को मजबूत करता है, इम्यूनिटी बढ़ाता है और सांस की नली को साफ करने में मदद करता है। रोज़ाना 10-15 मिनट तक अनुलोम-विलोम करने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और सांस लेने में सुधार होता है। यह फेफड़ों को टॉक्सिन्स को प्रभावी ढंग से छानने में भी मदद करता है।

प्राणायाम से लाभ

अनुलोम-विलोम जैसे प्राणायाम शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। यह तनाव कम करता है और श्वसन तंत्र को स्वस्थ रखता है।

Take Away Points

दिल्ली जैसे प्रदूषित शहरों में रहने वालों को इन आयुर्वेदिक उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना बेहद ज़रूरी है। ये उपाय न सिर्फ प्रदूषण से बचाते हैं बल्कि शरीर को स्वस्थ भी रखते हैं।

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