इंडोनेशिया में ‘मज़े की शादियां’: एक सनसनीखेज सच्चाई

इंडोनेशिया में ‘मज़े की शादियां’: एक सनसनीखेज सच्चाई

क्या आप जानते हैं इंडोनेशिया के कुछ इलाकों में ऐसी शादियां हो रही हैं, जिनमें युवा लड़कियां पैसे के लिए बूढ़े पुरुषों से शादी कर रही हैं? यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि एक कड़वी सच्चाई है, जिससे इंडोनेशिया के पहाड़ी इलाकों में रहने वाली कई महिलाएं जूझ रही हैं। यह लेख आपको इन ‘मज़े की शादियों’ या ‘कॉन्ट्रैक्ट मैरिज’ की दिल दहला देने वाली कहानियों से रूबरू कराएगा, जो गरीबी, सामाजिक कुरीतियों और कानूनी कमियों का एक दर्दनाक नतीजा हैं। इन शादियों में लड़कियों का शोषण, उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन और महिलाओं के प्रति घोर अनादर शामिल है। क्या आप इस सच्चाई का सामना करने के लिए तैयार हैं?

कहाया की कहानी: एक 17 साल की लड़की का संघर्ष

कहाया (बदला हुआ नाम) की कहानी इन ‘कॉन्ट्रैक्ट मैरिज’ की दर्दनाक सच्चाई का एक उदाहरण है। 17 साल की उम्र में, उसने एक 50 साल के सऊदी पर्यटक से शादी की, सिर्फ पैसे के लिए। यह शादी इंडोनेशियाई कानून के विवादित प्रावधानों के तहत हुई, जिससे एक भयावह नतीजा सामने आया। पांच दिनों की शादी के बाद, उसे ‘तीन तलाक’ दे दिया गया, और उसने अपनी ज़िंदगी के सबसे बुरे दिनों का सामना किया। यह सिर्फ उसकी पहली ‘कॉन्ट्रैक्ट मैरिज’ नहीं थी। उसने बताया कि उसने ऐसे ही लगभग 15 विवाह किए हैं, जिससे पता चलता है कि वह कितनी बड़ी पीड़ा से गुज़री हैं।

‘तलाकशुदा महिलाओं के गांव’

इंडोनेशिया के पुंकाक इलाके के कुछ गांवों को अब ‘तलाकशुदा महिलाओं के गांव’ के रूप में जाना जाता है, जहाँ ‘निकाह मुताह’ या अस्थायी शादियां आम हो गई हैं। इन गांवों में, कई महिलाएँ अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए ऐसी शादियों में शामिल हो जाती हैं। कहाया के अनुसार, उसके ही गांव में सात महिलाएँ ऐसी हैं जो इसी तरह से अपनी जीविका चलाती हैं। यह प्रथा, हालांकि गैरकानूनी है, फिर भी धड़ल्ले से चल रही है, जिसमें बिचौलियों और अधिकारियों का एक व्यापक नेटवर्क शामिल है।

कॉन्ट्रैक्ट मैरिज का उदय और कारण

1980 के दशक में थाईलैंड और सऊदी अरब के रिश्तों में तनाव के बाद, सऊदी पर्यटक थाईलैंड से इंडोनेशिया की ओर बढ़े। इंडोनेशिया की विशाल मुस्लिम आबादी ने उन्हें अधिक सहज महसूस कराया। पुंकाक का कोटा बुंगा क्षेत्र इन पर्यटकों के लिए एक पसंदीदा स्थान बन गया, जहाँ अस्थायी विवाह का चलन तेज़ी से बढ़ा। शुरुआत में, परिवार के सदस्य या परिचित ही लड़कियों को पर्यटकों से मिलवाते थे, लेकिन समय के साथ बिचौलिए इस व्यवसाय में शामिल हो गए, और उन्होंने इसे एक लाभकारी उद्योग बना दिया है। गरीबी और आर्थिक संकट इंडोनेशिया में इन ‘कॉन्ट्रैक्ट मैरिज’ के पीछे सबसे बड़े कारणों में से एक हैं।

कानूनी पहलु और सामाजिक प्रभाव

इंडोनेशिया में विवाह के लिए न्यूनतम कानूनी उम्र 19 वर्ष है, लेकिन कई धार्मिक विवाह सरकारी निगरानी से बच जाते हैं, जिससे युवा लड़कियों का शोषण होता है। इंडोनेशियाई उलेमा काउंसिल ने अस्थायी कॉन्ट्रैक्ट विवाह को गैरकानूनी घोषित कर दिया है, लेकिन इसे लागू करना एक चुनौती है। कानूनी कमियों और सामाजिक दबावों के कारण, लड़कियों को इन शादियों में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता है। कहाया की कहानी इसकी एक भयावह मिसाल है। सऊदी अरब में, उसका शोषण किया गया और उसे एक गुलाम की तरह रखा गया। उसे भागने के कई असफल प्रयासों के बाद, वो अंततः अपनी जान बचाकर इंडोनेशिया वापस आ गई।

निसा की कहानी: एक और पीड़ित की आवाज

निसा (बदला हुआ नाम) एक और महिला है जिसने कई ‘कॉन्ट्रैक्ट मैरिज’ किए। उसके पिता ने उसे इन विवाहों के लिए मजबूर किया। वह पहले बार में शराब परोसने और नृत्य करने का काम करती थी। निसा ने लगभग 20 कॉन्ट्रैक्ट शादियां की, लेकिन अब वह इस चक्र से बाहर निकल चुकी है और एक सामान्य जीवन जी रही है। उसकी कहानी भी इंडोनेशिया में इन प्रथाओं के दुष्परिणामों को दर्शाती है।

टेक अवे पॉइंट्स

  • इंडोनेशिया में ‘मज़े की शादियां’ या ‘कॉन्ट्रैक्ट मैरिज’ एक गंभीर समस्या है जो गरीबी, सामाजिक कुरीतियों और कानूनी कमियों का परिणाम है।
  • ये शादियाँ युवा लड़कियों के शोषण का एक भयावह रूप हैं, जहाँ उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जाता है।
  • इस समस्या से निपटने के लिए कठोर कानून और जागरूकता अभियान आवश्यक हैं।
  • इन महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने और उन्हें पुनर्वास देने के लिए सरकार और सामाजिक संगठनों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।
  • हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम इन महिलाओं की आवाज़ बनें और इस समस्या को दुनिया के सामने लाएँ।

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