क्या आप जानना चाहते हैं कि हाल ही में रिलीज़ हुई तमिल फिल्म ‘कंगुवा’ (Kanguva) कैसी है? इस लेख में हम इस महाकाव्य एक्शन फिल्म की समीक्षा करेंगे, जिसमें सूर्या (Suriya) जैसे सुपरस्टार हैं, और बताएँगे कि क्या यह पैन इंडिया फिल्म के तौर पर सफल रही या नहीं। क्या इसके जबरदस्त विज़ुअल और एक्शन सीक्वेन्स दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं या फिर यह बस एक और हाइप फिल्म बनकर रह गई है? आगे जानिए!
एक शानदार शुरुआत लेकिन…
‘कंगुवा’ की शुरुआत काफी रोमांचक और इंट्रिगिंग है। 2024 से 1070 ईस्वी की यात्रा, सुपरपावर्स वाले बच्चे की खोज, और एक भयंकर बाउंटी-हंटर का किरदार – ये सारी चीज़ें फिल्म में एक जबरदस्त उत्साह पैदा करती हैं। लेकिन यहां से फिल्म थोड़ी लड़खड़ाती हुई नजर आती है। कहानी ज़रूर दिलचस्प है, पांच द्वीपों की दुनिया, रोमन सेना का हमला, कंगुवा का बलिदान, और उस बच्चे से उसका अनोखा नाता – लेकिन यह सब स्क्रीन पर उतना प्रभावशाली नहीं दिख पाता जितना होना चाहिए।
क्या पसंद आएगा?
एक बात जो ज़रूर तारीफ के काबिल है वह है इस फिल्म का विज़ुअल स्पेक्टेकल। प्राचीन द्वीपों की दुनिया खूबसूरती से बनाई गई है, हरे-भरे जंगल, ऊंचे पहाड़, और विशाल समुद्र दृश्य, आपको रोमांचित करने के लिए पर्याप्त हैं। फिल्म के एक्शन सीक्वेन्स भी बड़े ही धमाकेदार और दमदार हैं।
क्या नही पसंद आएगा?
दूसरी ओर, फिल्म की सबसे बड़ी कमज़ोरी है इसका स्क्रीनप्ले। कहानी कई जगहों पर अटक जाती है, और कुछ सीन तो बेहद उबाऊ लगते हैं। कई सारे दृश्य एकदम अनावश्यक लगते हैं। और डायलॉग्स, खासकर हिंदी डबिंग में, बहुत ही खराब हैं। वही, सूर्या की जबरदस्त एक्टिंग के बाद भी फिल्म अपने हीरो को निराश करती है।
शानदार एक्शन लेकिन बेहद धीमी गति
फिल्म में बहुत सारे एक्शन सीन हैं, लेकिन उनका स्केल और प्रभाव इतना अधिक होने की वजह से कुछ जगह वे ऊबाऊ लगने लगते हैं। मगरमच्छ के साथ लड़ाई का सीन ज़रूर यादगार है। इसके अलावा कई रोमांचक एक्शन सीक्वेंस दर्शकों का मनोरंजन करते हैं। लेकिन, ये लंबे और एकाएक खत्म हो जाते हैं।
बॉबी देओल का रोल
बॉबी देओल का किरदार उतना प्रभावशाली नहीं है जितना होने की उम्मीद की जा सकती थी। उनका लुक बेहद दमदार है, पर उनका किरदार थोड़ा कमज़ोर लिखा गया है।
क्रिएटिव विचारों की कमी नहीं, लेकिन राइटिंग में है खामी
फिल्म में कुछ क्रिएटिव आईडियाज ज़रूर हैं, लेकिन उन्हें अच्छे ढंग से प्रस्तुत नहीं किया गया है। फिल्म की दुनिया और सेट डिजाइन ज़रूर शानदार हैं, और इस पर ज़्यादा काम किया गया लगता है, पर पूरी फिल्म कमज़ोर राइटिंग की चपेट में आ जाती है।
एक अनोखी दुनिया लेकिन कहानी अधूरी
कंगुवा एक अनोखी और अलग दुनिया दिखाने में कामयाब हो जाती है लेकिन, पूरी कहानी ही अधूरी लगती है। ज़रूरी हिस्सों में बहुत जल्दबाजी दिखाई देती है, जिससे फिल्म की संपूर्णता को नुकसान पहुंचता है।
टेक अवे पॉइंट्स
- ‘कंगुवा’ में शानदार विज़ुअल्स और एक्शन हैं लेकिन कहानी और स्क्रिप्ट बेहद निराशाजनक हैं।
- फिल्म के एक्शन सीक्वेन्स बहुत लंबे लगते हैं।
- डायलॉग्स बेहद कमज़ोर हैं, खासकर हिंदी डबिंग में।
- फिल्म का मुख्य किरदार जितना मज़बूत है उतना ही किरदार निभा पाने में यह फिल्म नाकामयाब रही।
- अगर आप बेहतरीन एक्शन के दीवाने हैं, और ज़्यादा एक्सपेक्टेशन नहीं रखते, तब जाकर आप इसे देखने जा सकते हैं।

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