तापसी पन्नू ने बॉलीवुड में आयुवाद (Ageism) और हीरोइनों के सीमित अवसरों पर खुलकर बात की!
क्या आप जानते हैं कि बॉलीवुड में हीरोइनों के करियर कितने सीमित होते हैं? एक समय के बाद उन्हें नई नई अभिनेत्रियों से बदल दिया जाता है! तापसी पन्नू ने हाल ही में एक इंटरव्यू में इस मुद्दे पर चर्चा की और बताया कैसे बॉलीवुड में आयुवाद (Ageism) की समस्या का सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं पूरी कहानी…
बॉलीवुड में आयुवाद (Ageism): तापसी पन्नू का चौंकाने वाला खुलासा
तापसी पन्नू ने बताया कि कैसे बड़े हीरो के साथ काम करने के बाद उन्हें युवा अभिनेताओं द्वारा नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने बताया कि उन्हें कई बार कहा गया कि अब वो बड़ी हो गई हैं और अब उन्हें युवा हीरो के साथ काम करने के अवसर नहीं मिलेंगे। यह एक ऐसा भेदभाव है जिसका कई महिला अभिनेत्रियों को सामना करना पड़ता है।
‘नो’ कहने की कीमत
तापसी ने कहा कि अगर कोई अभिनेत्री अपनी राय रखती है या निर्माताओं या निर्देशकों को ‘नो’ कहती है तो उन्हें काम मिलने की संभावना कम हो जाती है। उन्हें ऐसे किरदार नहीं मिलते हैं जिसमें उन्हें कोई खास रोल करना हो। कई बार उन पर दबाव बनाया जाता है कि वे उन भूमिकाओं को स्वीकार कर लें जो उन्हें पसंद नहीं हैं।
आयुवाद का प्रभाव
बॉलीवुड में आयुवाद केवल महिला अभिनेत्रियों को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि यह पुरुष कलाकारों को भी प्रभावित करता है, हालाँकि इस मुद्दे को कम उजागर किया जाता है। तापसी ने इस बारे में बताया कि उनका मानना है कि हर कलाकार को अपने अभिनय कौशल पर गर्व होना चाहिए, चाहे उनकी उम्र कुछ भी हो। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि इंडस्ट्री अपने फैसलों को केवल उम्र के आधार पर नहीं लेती, बल्कि प्रतिभा के आधार पर अवसर प्रदान करती है।
हीरोइनों के सीमित अवसर: एक कड़वी सच्चाई
तापसी ने खुलासा किया कि बॉलीवुड में हीरोइनों के करियर सीमित होते हैं। उन्होंने कहा कि एक समय के बाद नई अभिनेत्रियाँ आ जाती हैं और पुरानी अभिनेत्रियों को काम कम मिलने लगता है। इस प्रकार बॉलीवुड एक ऐसी जगह है जहाँ केवल उतनी ही सफलता मिल सकती है जितनी उम्र का दायरा तय करता है।
अपनी पोजिशन कैसे बनाएं?
तापसी के अनुसार, एक अभिनेत्री को अपनी पहचान बनाने और अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए ऐसे किरदार चुनने चाहिए जो उसके अनुरूप हों। उन्होंने कहा कि अगर अभिनेत्री अपनी योग्यता का प्रदर्शन करती हैं तो वह लंबे समय तक काम में बनी रह सकती हैं। ऐसे किरदार चुनना बेहद जरुरी है जो उनकी प्रतिभा को उजागर करे और उन्हें एक ऐसी पहचान दिलाये जो उन्हें दूसरे अभिनेत्रियों से अलग दिखाए।
एक सीज़न के बाद?
तापसी का मानना है कि ज्यादातर हीरोइनों के करियर में 3-4 साल का समय एक सीज़न जैसा होता है। फिर बाद में उन्हें उसी भूमिका में काम मिलता है जो उनके लिए बने ही किरदारों की परिभाषा के अंदर है। तापसी खुद के लिए इस तरह का एक बेहतर रास्ता खुद बनाना चाहती हैं ताकि उन्हें लंबे समय तक काम मिल सके।
बॉलीवुड में बदलाव की जरूरत
तापसी पन्नू की बातें बॉलीवुड में एक महत्वपूर्ण बहस को उजागर करती हैं। इंडस्ट्री को आयुवाद और महिलाओं के प्रति भेदभाव पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। तापसी का मानना है कि इंडस्ट्री में प्रतिभा को उम्र से ऊपर रखकर सभी कलाकारों को समान अवसर दिए जाने चाहिए। यह सुनिश्चित करना बड़ा कदम होगा कि प्रत्येक अभिनेता अपनी योग्यता के आधार पर काम कर पाए।
समावेशी फिल्म इंडस्ट्री का निर्माण
एक समावेशी फिल्म उद्योग बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है जहाँ सभी कलाकारों के पास अपने हुनर दिखाने और अपनी प्रतिभा दिखाने के समान अवसर हों, उनकी उम्र या लिंग की परवाह किए बिना। सभी कलाकारों को समान स्तर पर काम करने और उनकी कला को सराहा जाना चाहिए।
Take Away Points
- बॉलीवुड में आयुवाद एक गंभीर समस्या है जिसका कई अभिनेत्रियों को सामना करना पड़ता है।
- हीरोइनों के करियर अक्सर सीमित होते हैं और उन्हें नए कलाकारों से बदल दिया जाता है।
- बॉलीवुड में बदलाव की जरूरत है ताकि सभी कलाकारों को समान अवसर मिल सकें।
- अभिनेत्रियों को अपने आप को बेहतर ढंग से प्रदर्शित करने और चुनिंदा भूमिकाओं में काम करके अपने करियर को लंबा बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए।

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