Ambedkar jayanti Special| दलित को सम्मान अंबेडकर की प्रथम प्राथमिकता थी

UttarPradesh| आज पूरा भारत संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती मना ( 14 अप्रैल) रहा है। भारत के इतिहास में अंबेडकर का काम गाढ़े रंग से मुद्रित है। अंबेडकर ने अपने अथक प्रयास से दलितों के अधिकार के लिए खूब संघर्ष किया और उन्हें समाज मे बराबरी का दर्जा दिलाने के लिए कदम उठाए थे। 

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर वह व्यक्ति थे जिन्होंने भारत के पहले कानून मंत्री के पद की जिम्मेदारी संभाली और भारत को एक नई दिशा देने का प्रयास किया। इन्होंने अपना पूरा जीवन शोषित के अधिकारों के लिए लड़ने और जाति व्यवस्था को जड़ से खत्म करने में गुजार दिया। यह हमेशा चाहते थे समाज मे सभी नागरिकों को एक समान अधिकार व सम्मान प्राप्त हो। 

आखिर क्यों इतने बड़े पैमाने पर मनाई जाती है अंबेडकर जयंती:- 

अगर हम अंबेडकर जयंती की बात करे तो यह सिर्फ इसलिए नहीं मनाई जाती की इस दिन भीम राव अंबेडकर का जन्म हुआ था। बल्कि इसका महत्व इसलिए बढ़ गया क्योंकि अंबेडकर ने दलित समाज के लिए समान अधिकार की बात की ओर समाज मे परिवर्तन लाने की हर सम्भव कोशिश की। उन्होंने भारत को लिखित संविधान ही नहीं दिया बल्कि भारत के प्रत्येक नागरिक को कुछ अधिकार दिए। 
वही यह अपने पूरे जीवन शोषित के लिए लगे रहे और जाति व्यवस्था का विरोध करते हैं। इन्होंने अपने जीवन काल मे दलितों के हक के लिए कठोर लड़ाई लड़ी। दलित को सम्मान इनकी प्रथम प्राथमिकता रही। बता दें अंबेडकर को दो बार राज्यसभा से सांसद के रूप में चुना गया. डॉ. भीमराव अंबेडकर का निधन 6 दिसंबर 1956 को हुआ था. सन् 1990 में, बाबासाहेब को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

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