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  • महामारी बन चुके ‘कोरोना वायरस’ से बचने के लिए लोग अपना रहे अजीबों-गरीब उपाय, तस्वीरें देख आ जाएगी हंसी

    महामारी बन चुके ‘कोरोना वायरस’ से बचने के लिए लोग अपना रहे अजीबों-गरीब उपाय, तस्वीरें देख आ जाएगी हंसी

    नई दिल्ली। कोरोना से बचाव के लिए लोग नए-नए तरीके निकाल रहे हैं और उनकी तस्वीर व वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। भीड़ से बचने के लिए कोई कुत्तों को साथ ले कर चल रहा है तो कोई अपने शरीर पर कार्ड-बोर्ड की चकती पहन कर घूम रहा है।ऐसे में लोग इनके अनोखे एक्सपेरिमेंट को खूब पसंद कर रहे हैं।

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    सोशल प्लैटफॉर्म पर इन वीडियो को बहुत पसंद किया जा रहा है और शेयर किया जा रहा है।महामारी बन चुके कोरोना वायरस (COVID-19) से बचने के लिए लोग अजीबों-गरीब उपाय अपना रहे हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर कई सारी मीम्स शेयर की जा रही हैं।

    कुछ तस्वीरों को शेयर कर बताया जा रहा है कि कोरोना वायरस संक्रमित लोगों के संपर्क में ना आने के लिए लोग अनोखे उपाय अपना रहे हैं। ऐसे में एक तस्वीर में आप देख सकते हैं कि एक इंसान कई सारे पालतू कुत्तों के साथ घर के बाहर निकला हुआ है। कुत्ते उस इंसान को चारों तरफ से घेरकर चलते दिखाई दे रहे हैं ।

     

  • चालीस सालों से नंगा घूम रहा है ये 45 वर्षीय किसान

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    कोई इंसान अगर पिछले 40 सालों से बिना कपड़े के घूम रहा हो, तो आप शायद उसे पागल समझेंगे। लेकिन इसके पीछे अगर एक ठोस वजह बताई जाए तो सुनने में अजीब लग सकता है। जी हां वेस्‍ट बंगाल के एक गांव में रहने वाला किसान 40 सालों से नंगा घूम रहा है, क्‍योंकि उसे कपड़ों से एलर्जी है।

    वेस्‍ट बंगाल के राजपुर गांव में रहने वाले 45 वर्षीय सुबल बरमन की जिंदगी आम इंसानों जैसी नहीं है। वह एक ऐसे शख्‍स हैं जो नागा साधु न होते हुए भी नग्‍न घूम रहे हैं। दरअसल बरमन को कपड़ों से एलर्जी है। वह बताते हैं कि जब 5 वर्ष के थे, तो उन्‍हें इस बीमारी का पता चला। जैसे ही वह कपड़े पहनते थे, उनका शरीर हीट करने लगता था और इचिंग शुरु हो जाती थी। सरबन को यह मुसीबत जिंदगी भर झेलनी पड़ी क्‍योंकि उनके पास इसका इलाज कराने के न तो पैसे थे और न ही ऊपरी खर्चा वहन करने की हिम्‍मत।

    सरबन बताते हैं कि, जब वह छाटी उम्र में नंगा रहना उनके लिए कोई मुश्‍किल वाला काम नहीं था। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती गई और वयस्‍क होते ही उन्‍हें काफी शर्मिंदगी हुई। हालांकि धीरे-धीरे उन्‍हें यह एहसास होने लगा कि, वह अन्‍य इंसानों की तरह नहीं है। और उन्‍हें इस हकीकत को समझना पड़ा। इसके बाद जिंदगी नॉर्मल हो गई। सरबन बताते हैं कि, वह शादी, पार्टियों में भी ऐसे ही नग्‍न जाते हैं और अब उन्‍हें कोई शर्म नहीं आती।

    जब कोई इंसान हमेशा नंगा घूमता है, तो कोई भी बाप ऐसे आदमी को अपनी लड़की कभी नहीं देगा। यह कहना है सरबन का। वह बताते हैं कि, उनके लिए तो यह एक बीमारी है लेकिन बाहरी व्‍यक्‍तयों को यह काफी अजीब लगता है। ऐसे में उनकी मां-बाप की मृत्‍यु के बाद वह अकेले रह गए। उनकी शादी भी नहीं हो पाई। वैसे सरबन को भीषण सर्दी और चिलचिलाती गर्मी में भी काफी दिक्‍कतें आती रहती हैं।

  • कोरोना की दहशत : महिला ने स्टोर में घुसते ही छींका, स्टोर मालिक ने 26 लाख का सामान दिया फेंक

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    कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में कोहराम मचा रखा है। इसकी दहशत का अंदाजा इस कदर लगाया जा सकता है कि एक मॉल में एक महिला कुछ सामान लेने पहुंची थी। इसी बीच उसको छींक आ गई। जैसे ही उसने छींका, तुरंत मॉल से 26 लाख का सामान बाहर फेंक दिया गया। हालांकि महिला की बाद में गिरफ्तारी हो गई।

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    कोरोना की दहशत : महिला ने स्टोर में घुसते ही छींका, स्टोर मालिक ने 26 लाख का सामान दिया फेंक

    दरअसल, यह पूरी घटना अमेरिका के पेन्सिल्वेनिया की है। न्यूज एजेंसी सीएनएन ने पुलिस के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया है कि यहां के एक मॉल में 35 हजार डॉलर यानी करीब 26 लाख के खाने का सामान फेंक दिया गया। कारण यह कि महिला ने मॉल के एक हिस्से में छींक दिया।

    स्टोरकीपर के मुताबिक, महिला ने स्टोर में घुसते ही छींक मारनी शुरू कर दी। उसने स्टोर में सामने रखे बेकरी के सामान और मीट पर छींकना शुरू कर दिया। तुरंत स्टोर मालिक ने सारे सामान फेंक डाले. पुलिस को बुलाया गया और उस महिला को हिरासत में भेज दिया गया।

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    कोरोना की दहशत : महिला ने स्टोर में घुसते ही छींका, स्टोर मालिक ने 26 लाख का सामान दिया फेंक

    मालिक को इस बात का डर था कि कहीं ये महिला कोरोना पॉजिटिव तो नहीं थी। इसके बाद उसने तत्काल पुलिस को फोन कर दिया। हालांकि पुलिस ने बताया कि महिला ने जान-बूझकर ऐसा किया है। अब इस महिला पर आपराधिक मामले का केस चलेगा।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि महिला कोरोना वायरस पॉजिटिव नहीं थी। लेकिन पुलिस ने कहा है कि उसका टेस्ट कराया जाएगा। इस मामले पर दुकान के मालिक का भी बयान सामने आया है। घटना के बाद उन्होंने पूरे मॉल की साफ़ सफाई कराई गई है।

    बता दें कि कोरोना वायरस के कंफर्म मामलों में अमेरिका अब चीन से भी आगे निकल गया है। अमेरिका में अब तक 83,500 से अधिक मामले सामने आए हैं।

  • Coronavirus : पादरी ने भगवान का आदेश बताकर लोगाें को कोराेना से बचाने के लिए पिला दिया डिटॉल, 59 लोगों की हो गई मौत 

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    चीन के वुमान से निकला कोरोना वायरस (CoronaVirus) दुनिया भर में फैलता जा रहा है। इसके चलते इटली समेत कई देशों में लॉकडाउन (lockdown) कर दिया है। ऐसे में इससे बचने के लिए लोग भी तरह तरह की दवाए तलाश कर रहे हैं। इसबीच दक्षिण अफ्रीका से बहुत ही चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जहां एक चर्च के पादरी से लोगों को कोरोना वायरस से बचाने के लिए दवा के नाम पर डिटॉल पिला दिया। इससे लोगों की हालात बिगड। इतना ही नहीं कुछ ही देर में 59 लोगों ने दम तोड दिया है। वहीं पांच इलाज जारी है। पादरी ने चर्च पहुंचे लोगाें को जताया यह भरोसा दरअसल दक्षिण अफ्रीका में स्थित एक चर्च में रुफस फला पादरी है।

    उसने कथित तौर पर चर्च की सेवा करने के उद्देश्य से वहां मौजूद लोगों को डिटॉल पिला दिया। उसने बताया कि यह ऐसी दवा कोरोना वायरस का खात्मा कर देगी। इतना ही नहीं उसने दावा किया कि इस दवा के पीने से कभी कोरोना नहीं होगा। इस पर लोगों को विश्वास जितकर पादरी ने सभी डिटॉल पिला दिया। इसकी वजह से 59 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चार अन्य की हालत गंभीर बनी हुई है। इसका पता लगते ही पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। पहले से ही कई बीमारियों के चपेट में थे लोग मीडिया रिपोर्ग्स के अनुसार पैगंबर के अनुयायियों को यह विश्वास था कि डिटॉल उन्हें घातक बन चुकी बीमारी कोरोना वायरस से बचा सकता है।

    इतना ही नहीं यह उसे सभी बीमारियों से दूर रखेगा। ऐसे में पहले ही दूसरी बीमारियों से पीड़ित लोगों को पादरी से डिटॉल पिला दिया। जिसे पीते ही 59 लोगों की मौत हो गई। जबकि चार की हालत गंभीर बनी हुई है। वहीं लोगों को कीटाणुनाशक पीने के लिए डिटॉल देने वाले पादरी रुफस ने कहा कि उसे भगवान ने यह आदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि इसे पिलाने से सभी बीमारी ठीक हाे जाएगी। इतना ही नहीं पादरी ने कहा कि ‘मुझे पता है कि डेटॉल हानिकारक है, लेकिन भगवान ने मुझे इसका इस्तेमाल करने का निर्देश दिया था।

  • यहाँ हजारों लड़कियां कपड़े उतार सो गई सड़क पर 

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    मध्य लंदन सहित कई स्थानों पर, जब खून से लथपथ नग्न लड़कियां सड़कों पर पड़ी हुई हैं, देखने वाले कांप रहे हैं। यह विरोध करने का एक बहुत ही अजीब तरीका है। ये विरोध पेटा (पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स) के लोगों द्वारा पूरी दुनिया में जानवरों की खाल से बने जानवरों के उत्पादों और मीट के इस्तेमाल को रोकने के लिए किया जाता है।

    ये लोग दुनिया के कई हिस्सों में नग्न होकर खुद को नकली खून से ढक लेते हैं, ताकि वे जानवरों के प्रति क्रूरता दिखा सकें, इस प्रदर्शनी में विभिन्न स्थानों पर लाखों लोग शामिल हैं।

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    यहाँ हजारों लड़कियां कपड़े उतार सो गई सड़क पर

    उनका कहना था कि जानवर अपना खाना बनाने के लिए लोगों को क्रूरता से मारते हैं, जबकि कुछ लोग उन्हें सामान बनाकर बेचते हैं, जो सही नहीं है। इसलिए हमने भी अपने शरीर के सारे कपड़े उतार दिए ताकि लोगों को उनके दर्द का एहसास हो सके।

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    यहाँ हजारों लड़कियां कपड़े उतार सो गई सड़क पर

    आपको बता दें कि अगले हफ्ते से, थाईलैंड शाकाहारी भोजन को बढ़ावा देने और नॉन-वेज को खत्म करने के लिए एक शाकाहारी महोत्सव का आयोजन करेगा।

  • अपने बॉयफ्रेंड का खून पीती है यह लड़की, वजह जानकर रह जाओगे हैरान

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    आजतक आपने वैम्पायर को केवल फिल्मों मे ही देखा होगा, आप उनसे खौफ भी खाते होंगे। मगर आज हम आपको रियल लाइफ की वैम्पायर वुमैन के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि अपने बॉयफ्रेंड का खून पीती है।  लेकिन क्या कभी रियल लाईफ के वैम्पायर के बारे में सुना है या देखा है। अगर नहीं सुना तो यहां जानिए। दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इंसानों का खून पीने का शौक रखते हैं।

    इन्हीं में से एक हैं, दुनिया में आकर्षण का केंद्र बनी ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड की रहने वाली 38 वर्षीय जॉर्जिया कॉन्डन जिसे दुनिया, रियल लाइफ वैम्पायर के तौर पर जानती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इंसानों का खून पीना उसकी मजबूरी नहीं बल्कि शौक और आदत है। वो बताती हैं कि जब वे 17 साल की थी तब उसने पहली बार इंसानी खून का स्वाद चखा था बस फिर क्या था तब से ही उसे इंसानी खून पीने की आदत लग गई।

    शुरुआत में तो उसे एक लड़की मिली जिसने उसे कई दिनों तक अपना खून पिलाया। बता दें कि जॉर्जिया को ये खून पीने का चस्का वैम्पायर फिल्में ट्विलाइट, वैम्पायर डायरी जैसी फिल्में देखकर आई। वो बताती हैं कि ब्रिसबेन में उसकी मुलाकात उसके बॉयफ्रेंड जमाएल से हुई जिससे उसने खून पीने की इच्छा जताई। हैरानी की बात ये है कि उनकी ये बात सुन कर वे बिल्कुल भी चौंके नहीं बल्कि इस पर वे फौरन मान भी गए।

    इसके बाद से वे हर सप्ताह उसे अपना खून पिलाते हैं। हालांकि जॉर्जिया कई लोगों के खून पीने के बाद एनीमिया और थैलीसिमिया जैसी कई बीमारियों से ग्रसित हो चुकी हैं। इसी कारण से उन्हें खून का टेस्ट अच्छा लगता है। इतना ही नहीं वैम्पायर की तरह धूप में भी जाने से उन्हें तकलीफ होती है।

     

  • VIDEO : लॉकडाउन में पुलिस से बचने के लिए लोग अजीबो-गरीब बहाने बना रहे हैं, वीडियो देख नहीं रोक पायेंगे हंसी

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    लॉकडाउन के दौरान पुलिस की सख्ती के बावजूद भी लोग घरों से काम का बहाना लेकर सड़क पर घूमने निकल जा रहे हैं। कभी सड़क किनारे खड़े होकर गप्पे लड़ाते हैं, तो कभी गली मुहल्लों में उन्हें एक जगह भीड़ लगाकर खड़े होता देखा जाता है।

     

  • चीन लोग हर साल 1 करोड़ कुत्ते खा जाते हैं , यहां हर साल आयोजित होता है ‘डॉग मीट फेस्ट’

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    चीन में लोग चिकन-मटन नहीं, बल्कि कुत्ते-बिल्ली एक मांस खाना पसंद करते हैं। चीन कई प्रमुख बीमारियों का गढ़ रहा है। कोरोना से पहले इस देश से ही सार्स की शुरुआत हुई थी। वो भी ऐसे ही वेट मार्केट से शुरू हुआ था। इसके अलावा भी चीन से कई और संक्रमित बीमारियां फ़ैल चुकी हैं।चीन ( China ) में चमगादड़, सांप, ऊंट के अलावा 31 तरह के जानवरों का मांस खाया जाता है। कोरोना के कारण दुनियाभर में जमकर किरकिरी होने के बाद अब चीन के मिनिस्ट्री ऑफ़ एग्रीकल्चर ने कुत्तों को खाने वाले जानवरों की लिस्ट से हटाने का फैसला किया है।

    दुनियाभर में कोरोना की वजह से भयंकर तबाही मची हुई है। इसलिए कई देश कोरोना वायरस के फैलने की वजह चीन को मान रहे है। विश्व के कुछ देशों का मानना है कि चीन ने कोरोना के रूप में मौत बांटी है क्योंकि ये जानलेवा वायरस वुहान से शुरू हुआ था।

    चीन के दावे के मुताबिक वुहान ( Wuhan ) के मीट मार्केट में बिकने वाले जानवर के मांस से ही ये वायरस इंसानों में आया। जबकि इसके इतर कई लोगों का कहना है कि वुहान के लैब में इस वायरस को तैयार कर फैलाया गया। खैर असलियत चाहे जो हो लेकिन चीन हमेशा से ही अजीबोगरीब जानवरों का मांस खाने के लिए पूरी दुनिया में मशहूर रहा है।

     

    मिनिस्ट्री ने कहा कि कुत्ते कंपेनियन एनिमल्स ( Animals ) कैटेगरी में शामिल हैं। इस कारण उन्हें खाने वाले जानवरों की लिस्ट से हटाया जा रहा है। लेकिन मिनिस्ट्री के दूसरे स्टाफ का कहना है कि भले ही कुत्तों को लिस्ट से हटा दिया जाए, लेकिन लोग फिर भी इसे खाना बंद नहीं करेंगे।

     

    चीन के लोगों को कुत्ते का मांस काफी पसंद है। यही वजह है कि यहां हर साल डॉग मीट फेस्ट भी आयोजित होता है। एक अनुमानित आंकड़े के मुताबिक चीन के युलिन डॉग मीट फेस्ट ( Dog Meat Fest ) में प्रत्येक साल करोड़ों कुत्ते काटकर खा लिए जाते हैं। मिनिस्ट्री ऑफ़ एग्रीकल्चर ने चीन में 18 जानवरों के मांस की बिक्री करने की परमिशन दी है। इसमें सुअर, गाय, भेड़, बकरी, घोड़ा, गधा, ऊंट, खरगोश, चिकन, बत्तख, हंस, टर्की, कबूतर और क्वेल शामिल हैं। चीन में सिका हिरन, रेड डियर, रेनडियर, ऑस्ट्रिच, रेड फॉक्स सहित कई दुर्लभ जानवर भी खाए जाते हैं।

  • लाकडाउन: इन अस्थियों को है मोक्ष का इंतजार

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    चंडीगढ़। कोरोना के चलते पूरे देश में लागू किये गये लॉकडाउन का असर सभी वर्गों को पड़ा है। वहीं इसका असर उन लोगों के मोक्ष पर भी पड़ा है, जिनकी मृत्यु इस दौरान हुई है. देश भर के श्मशानगृहों के लॉकर में अस्थियां लॉकडाउन खुलने के इंतजार में कैद हैं, कई जगह लॉकर फुल हो गये तो वहां के पेड़ों पर अस्थियों को कपड़े में बांधकर लटका दिया गया है। उन्हें इंतजार है मोक्ष का और यह संभव होगा लॉकडाउन खुलने के बाद।

    कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगे क?र्फ्यू के कारण श्मशान घाटों में अंतिम संस्कार तो हो रहे हैं, लेकिन यहां से अस्थियां प्रयागराज व हरिद्वारमें गंगा तक प्रवाह के लिए नहीं पहुंच रही हैं. पिछले 15 दिन से यह स्थिति बनी हुई है। चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली के सभी श्मशान घाट के लॉकर फुल हो चुके हैं। ऐसे में अब संस्कार के बाद अस्थि कलश श्मशान घाट में लगे पेड़ से लटकाया जा रहा है।

    जो कि कर्फ्यू खुलने का इंतजार कर रही है, जबकि कई लोगों ने अपने परिजनों के संस्कार के बाद अस्थियां अपनी कार की डिक्की में रख ली हैं, जबकि कुछ लोग मंदिर के पास लगे पेड़ों पर अस्थियां कलश में डालकर लटकाकर लॉकडाउन खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में संस्कार के बाद परिजन पर समय पर अपनी रीति रिवाज पूरे नहीं कर पा रहे हैं। कई लोग हरियाणा के पिहोवा में भी अस्थियों का विसजर्न करते हैं, उन्हें भी इसी तरह दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. ट्राईसिटी में सबसे बड़ा श्मशान घाट सेक्टर-25 में है।

    इस घाट के प्रमुख पंडित गुलशन कुमार का कहना है कि उनके यहां पर 100 से ज्यादा अस्थियां रखने के लिए लॉकर है जो कि पूरी तरह से भर चुके हैं। इस समय किसी को भी उत्तराखंड में हरिद्वार जाने की मंजूरी नहीं है। चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से अस्थियां हरिद्वार में विसर्जन के लिए कर्फ्यू पास भी दे रही है, लेकिन इसके बावजूद लोग हरिद्वार नहीं पहुंच पा रहे हैं. कई लोग उत्तराखंड के बॉर्डर से मायूस वापस लौटे हैं। ऐसे में पेड़ों पर ही अस्थि कलश लटकाए जा रहे हैं।

    यह है मान्यता

    हिदू रीति रिवाज में यह मान्यता है कि अंतिम मुक्ति के लिए अस्थियों का गंगा में विसर्जन होना जरुरी है, जबकि सिख समुदाय में अधिकतर लोग कीतरपुर साहिब में अस्थियों का विसर्जन करते हैं, जबकि पंजाब में होने के कारण यहां पर पहुंचना मुश्किल नहीं है. चंडीगढ़ के मनीमाजरा के श्मशान घाट में भी कोई लॉकर खाली नहीं बचा है. मनीमाजरा में पंचकूला के लोग भी मरने के बाद अपने परिजनों का संस्कार करने के लिए पहुंचते हैं. मनीमाजरा श्मशान घाट के पंडित अश्विनी कुमार का कहना है कि इस समय सारे लॉकर पूरी तरह से भर चुके हैं. इसलिए कुछ अस्थियों को आसपास के श्मशान घाटों में भी कुछ दिनों के लिए रखवाने के लिए भेजा जा रहा है.

  • ममता बनर्जी सरकार ने लॉकडाउन तिथि 40 अप्रैल तक बढ़ाई, चैनल की गलती पर लोग ले रहे चुटकी!

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    नई दिल्ली: एक निजी टीवी चैनल की गलती ने लोगों को चुटकी लेने पर मजबूर कर दिया। दरअसल महिला एंकर ने जानकारी दी कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार ने चालीस अप्रैल तक लॉकडाउन बढ़ाने का फैसला किया है। हालांकि टीवी एंकर को अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन तब तक तीर कमान से निकल चुकी थी। इसके बाद तो सोशल मीडिया पर लोग हंसी मजाक के मूड में आ गए। किसी ने लिखा सचमुच दुनिया खत्म होने वाली है इसलिए लोग सठियाने लगे हैं।

    एक अन्य कमेंट में एक शख्स ने कहा कि 40 अप्रैल को संयोग दिवस या प्रयोग दिवस के तौर पर मनाया जाना चाहिए। मजे की बात ये कि कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर चालीस अप्रैल वाला कैलेंडर भी जारी कर दिया। #40_अप्रैल हैश टैग से ट्विटर पर इस बारे में खूब कमेंट्स आ रहे हैं।