ब्रिटिश एक्टर टॉम हार्डी की हॉलीवुड फिल्म Venom के ट्रेलर ने रिलीज होते ही यूट्यूब पर तहलका मचा दिया है। इसके ट्रेलर को अब तक 1 करोड़ 72 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है। फिलहाल ट्रेलर यूट्यूब पर दूसरे नंबर पर ट्रेंड कर रहा है।
ट्रेलर में साफ देखा जा सकता है कि टॉम हार्डी एक रिपोर्टर एडी ब्रोक का किरदार निभा रहे हैं। एडी ब्रोक एक एलियन के संपर्क में आ जाता है। ट्रेलर में इतना साफ है कि यह एक इंसान के अंदर के दो किरदारों की कहानी है। एक चेहरा आम इंसान है तो दूसरा विलेन है।
आपको बता दें कि वेनम के किरदार को मारवेल कॉमिक्स ने साल 1988 में बनाया था।फिल्म में टॉम हार्डी नेगेटिव किरदार निभा रहे हैं। आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, हार्डी ने कहा था, मेरा बेटा वेनम का बहुत बड़ा प्रशंसक है और इस फैसले के पीछे उसका प्रभाव रहा है कि मुझे खास तौर से वेनम का किरदार क्यों निभाना चाहिए। मैं कुछ ऐसा करना चाहता था, जिसे मेरा बेटा देख सके।
फिल्म ‘वेनम’ में वूडी हैरलसन, रिज अहमद, मिशेल विलियम्स, जेनी स्लेट और स्कॉट हेज जैसे कलाकार भी हैं। यह फिल्म 5 अक्टूबर 2018 को रिलीज होगी।
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के लोग इन दिनों डर के साये में जी रहे हैं। समंदर किनारे सैर-सपाटा लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। दरअसल मुंबई के समुद्री तटों पर ब्लू बॉटल जेलीफिश देखी जा रही है जिसके डंक से 150 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। इन घटनाओं को देखते हुए सरकार ने एडवाइजरी जारी कर दी है।
जेलिफिश के डंक से घंटो तक दर्द प्रशासन ने शहर के जुहू, अक्सा और गिरगां बीचों पर लोगों को न जाने की हिदायत दी है। जेलिफिश के डंक से घंटो तक दर्द और खुजली होती है। इनका डंक मछलियों की जान भी ले लेता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार हर साल मॉनसून के वक्त समुद्री किनारों पर जेलिफिश आ जाती हैं। यह उनका रीप्रोडक्शन का समय होता है।
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इनके संपर्क में आने पर दर्द का अनुभव होता है और जिस बॉडी पार्ट के टच में आते हैं वो सुन्न हो जाता है। कई केस में इनके टच की वजह से बहरेपन की भी शिकायत मिली है। विशेषज्ञों की सलाह है कि लंबे वक्त तक दर्द रहने पर मेडिकल सहायता मुहैया करानी चाहिए।
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कैसे करें बचाव जुहू बीच स्थित एक दुकानदार ने बताया कि जब ये फिश किसी को चोट पहुंचाती हैं, तो उस जगह पर हम नींबू लगा देते हैं। इससे लोगों को राहत मिलती है। अक्सा, वर्सोवा और गिरगांव बीच से भी ऐसी ही शिकायत मिल रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जेलफिश हर साल अगस्त सितंबर में मुंबई के तटों पर दिखाई देती हैं लेकिन इस बार इनकी संख्या बहुत ज्यादा है।
इन दिनों हर देश की पुलिस सोशल मीडिया पर एक दूसरे को चैलेंज देने क ट्रेंड से काफी परेशान है.। जहां दुनियाभर में किकी चैलेंज का सवार भूत अभी उतरा भी नहीं है कि एक और परेशान करने वाला खतरनाक चैलेंज सामने आ गया है। जिसका नाम है ड्रैगन ब्रेथ। इस चैलेंज में जान जाने का खतरा है जिसे लेकर कई देशों में वॉर्निंग भी जारी की गई है।
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चैलेंज ‘ड्रैगन ब्रेथ’
इस चैलेंज में पहले लिक्विड नाइट्रोजन में डूबी हुई स्वीट कैंडी खानी होती है, फिर ड्रैगन की तरह नाक से धुआं निकालना होता है। जब तक कैंडी पूरी खत्म नहीं होती तब तक आप मुंह नहीं खोल सकते। कैंडी खत्म होने के बाद ही यह चैलेंज खत्म होता है।
सोशल मीडिया पर लोग इसको खाते हुए वीडियो अपलोड कर रहे हैं। इंस्टाग्राम, ट्विटर और फेसबुक पर इसे काफी शेयर किया जा रहा है। सुफॉक काउंटी हेल्थ डिपार्टमेंट ने सोशल मीडिया पर चेतावनी जारी करते हुए लिखा कि लिक्विड नाइट्रोजन का इस्तेमाल करने से मुंब, घुटकी और पेट को नुकसान पहुंचा सकता है।
वहीं फ्लोरिडा में यह चैलेंज लेने पर एक बच्चे की तबीयत खराब हो गई। बच्चे की मां रेचल रिचर्ड मैक्केनी ने अपने फेसबुक पेज पर वॉर्निंग शेयर की है। उनका कहना है कि इसे खाकर मेरे बच्चे को अस्पताल जाना पड़ गया था। इसे कोई भी ट्राय करने की कोशिश न करें। सबसे बड़ी बात लोग इसके घातक प्रभाव को जानते हुए भी इसे अपना रहे हैं और अपने वीडियो पोस्ट कर वाहवाही लूट रहे हैं।
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने इंदौर नगर निगम के एक बेलदार (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) के घर सोमवार सुबह छापा मारकर करोड़ों की संपत्ति का पर्दाफाश किया। बेलदार का वेतन महज 18 हजार रुपये महीना है। उसका अब तक का कुल वेतन ही करीब 18 लाख रुपये होता है, लेकिन उसके घर से 25 लाख रुपये नकद और करोड़ों की संपत्ति मिली। इनमें एक किलो से अधिक वजनी सोने की ईट और एक किलो सोने के जेवर भी हैं।
लोकायुक्त एसपी दिलीप सोनी ने बताया कि शिकायत मिली थी कि अशोका कॉलोनी में रहने वाले असलम खान ने नगर निगम में बेलदार के पद पर रहते हुए करोड़ों की अवैध संपत्ति जुटा ली है। इसके बाद जब कार्रवाई की गई तो छापे में घर से करोड़ों की संपत्ति सहित कई गहने, प्रॉपर्टी के दस्तावेज और ऊंची कीमतों के बकरे मिले।
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अधिकारियों के मुताबिक असलम के अशोका कॉलोनी में चार मकान हैं, जिसमें उसके भाई भी रहते हैं। उसका एक भाई इकबाल निगम में ही चीफ सैनिटरी इंजीनियर है। दूसरा भाई एजाज ठेकेदार है। उसकी संपत्ति परिजन के नाम पर भी है। उसकी एक बेटी एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है, जबकि दो बेटियां स्कूल में अध्ययनरत हैं।
अधिकारियों के मुताबिक असलम के यहां मिले दस्तावेजों में उसके बिल्डरों से संबध होने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। उसने बिल्डिंग की परमीशन दिलवाने के नाम पर जमकर पैसा कमाया। 1998 में नौकरी में आए असलम का शुरुआती वेतन महज तीन हजार रुपये था। ऐश-ओ-आराम के शौकीन असलम ने अपने घर की ऊपरी मंजिल पर एक होम थिएटर भी बना रखा है।
नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने पर सरकार वाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम समेत सभी तरह के मोबाइल एप को ब्लॉक करने की संभावनाएं तलाश रही है। इसका रास्ता तलाशने के लिए सरकार ने टेलीकॉम ऑपरेटरों और इंटरनेट सर्विस प्रदाता (आइएसपी) कंपनियों से तकनीकी जानकारी देने को कहा है। इस संबंध में दूरसंचार विभाग ने सभी संबंधित पक्षों को पत्र लिखा है।
सरकार मान रही है कि बीते कुछ समय से देश में अफवाहों को फैलाने में वाट्सएप और फेसबुक जैसे सोशल मंचों का इस्तेमाल किया जाता है। सरकार काफी समय से इन सोशल मंचों के जरिये अफवाहों को रोकने का प्रयास कर रही है। इस संबंध में फेसबुक और वाट्सएप को सरकार नोटिस भी दे चुकी है। लेकिन साथ ही सरकार इस बात की संभावनाएं भी तलाश रही है कि इस तरह की परिस्थितियां उत्पन्न होने पर इंटरनेट पर इन मोबाइल एप का संचालन कैसे बंद किया जा सकता है।
पिछले महीने की 18 तारीख को दूरसंचार विभाग ने इन सभी ऑपरेटरों को एक पत्र लिखकर आइटी अधिनियम की धारा 69ए के नियमों के तहत इन एप्स को ब्लॉक करने पर अपनी राय देने को कहा है। अपने पत्र में दूरसंचार विभाग ने कहा है कि सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और पुलिस व अन्य जांच एजेंसियों ने कुछ मोबाइल एप को ब्लॉक करने की बात उठायी है।
चार जुलाई को हुई ऐसी एक बैठक का हवाला देते हुए दूरसंचार विभाग ने सभी ऑपरेटरों और एसोसिएशनों से तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।आइटी अधिनियम की धारा 69ए सरकार को यह अधिकार देती है कि वह राष्ट्रहित में इंटरनेट पर प्रसारित होने वाली सूचनाओं को ब्लॉक करने के निर्देश दे सकती है। सरकार खासतौर पर वाट्सएप के उपयोग को लेकर चिंतित है क्योंकि इससे अफवाहें फैलने में बेहद कम समय लगता है।
हालांकि वाट्सएप ने पिछले दिनों कुछ कदम उठाकर अपने संदेशों को फारवर्ड करने की सुविधा को सीमित कर दिया है। लेकिन उसने संदेश के स्त्रोत का पता लगाने की कार्रवाई पर अपनी असहमति जता दी है। दूरसंचार विभाग की इस पहल को उद्योग जगत से जुड़े संगठन एसोचैम ने अतिवादी, अनावश्यक और देश की प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाला करार दिया है।
नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने पर सरकार वाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम समेत सभी तरह के मोबाइल एप को ब्लॉक करने की संभावनाएं तलाश रही है। इसका रास्ता तलाशने के लिए सरकार ने टेलीकॉम ऑपरेटरों और इंटरनेट सर्विस प्रदाता (आइएसपी) कंपनियों से तकनीकी जानकारी देने को कहा है। इस संबंध में दूरसंचार विभाग ने सभी संबंधित पक्षों को पत्र लिखा है।
सरकार मान रही है कि बीते कुछ समय से देश में अफवाहों को फैलाने में वाट्सएप और फेसबुक जैसे सोशल मंचों का इस्तेमाल किया जाता है। सरकार काफी समय से इन सोशल मंचों के जरिये अफवाहों को रोकने का प्रयास कर रही है। इस संबंध में फेसबुक और वाट्सएप को सरकार नोटिस भी दे चुकी है। लेकिन साथ ही सरकार इस बात की संभावनाएं भी तलाश रही है कि इस तरह की परिस्थितियां उत्पन्न होने पर इंटरनेट पर इन मोबाइल एप का संचालन कैसे बंद किया जा सकता है।
पिछले महीने की 18 तारीख को दूरसंचार विभाग ने इन सभी ऑपरेटरों को एक पत्र लिखकर आइटी अधिनियम की धारा 69ए के नियमों के तहत इन एप्स को ब्लॉक करने पर अपनी राय देने को कहा है। अपने पत्र में दूरसंचार विभाग ने कहा है कि सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और पुलिस व अन्य जांच एजेंसियों ने कुछ मोबाइल एप को ब्लॉक करने की बात उठायी है।
चार जुलाई को हुई ऐसी एक बैठक का हवाला देते हुए दूरसंचार विभाग ने सभी ऑपरेटरों और एसोसिएशनों से तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।आइटी अधिनियम की धारा 69ए सरकार को यह अधिकार देती है कि वह राष्ट्रहित में इंटरनेट पर प्रसारित होने वाली सूचनाओं को ब्लॉक करने के निर्देश दे सकती है। सरकार खासतौर पर वाट्सएप के उपयोग को लेकर चिंतित है क्योंकि इससे अफवाहें फैलने में बेहद कम समय लगता है।
हालांकि वाट्सएप ने पिछले दिनों कुछ कदम उठाकर अपने संदेशों को फारवर्ड करने की सुविधा को सीमित कर दिया है। लेकिन उसने संदेश के स्त्रोत का पता लगाने की कार्रवाई पर अपनी असहमति जता दी है। दूरसंचार विभाग की इस पहल को उद्योग जगत से जुड़े संगठन एसोचैम ने अतिवादी, अनावश्यक और देश की प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाला करार दिया है।
सहारनपुर(उत्तर प्रदेश): शाहजहांपुर चौकी क्षेत्र के गांव झरौली के एक किसान के खेत से मिले डायनासोर आकार के मृत जीव को देखने के लिए लोगों का तांता लगा रहा। बाद में वन विभाग की टीम मृत विचित्र आकृति वाले जीव को फोरैंसिक जांच के लिए अपने साथ ले गई।गुरुवार को झरौली गांव में किसान विश्वास चौधरी के खेत में करीब 18 इंच का एक जानवर मृत अवस्था में मिला। उसकी आकृति फिल्मों में दिखाए गए डायनासोर के आकार की थी। उसको देखने के लिए गांव वालों तथा आसपास के लोगों का तांता लगा रहा।
[object Promise]झरौली गांव में किसान विश्वास चौधरी के खेत में करीब 18 इंच का एक जानवर मृत अवस्था में मिला
प्राप्त जानकारी के अनुसार सहारनपुर जिले के सरसावा थाना क्षेत्र स्थित झरौली गाव में बीते रोज एक डायनासोर जैसा जीव यमुना नदी के पानी में बहकर आया और नदी किनारे खेत मे अटक गया। नदी किनारे शौच करने गए एक ग्रामीण की नजर इस विचित्र जीव पर पड़ी। जिसकी जानकारी उसने अन्य ग्रामीणों को दी। जिसके बाद ये खबर आग की तरह पूरे क्षेत्र में फैल गयी। लोगों को कहते सुना जा रहा था कि नदी के पानी मे डायनासोर बहकर आया है। इस बारे में पूछे जाने पर ग्रामीणों ने बताया कि यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से आई बाढ़ में पहाड़ों से बहकर यह डायनासोर का बच्चा गाँव में बहकर आया है। डायनासोर जैसे दिखने वाले मृत जानवर को देखने के लिये खेत में स्थानीय लोगों का जमावड़ा लगा रहा।
सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुँची और डायनासोर जैसे जीव के मृत शरीर को अपने कब्जे में लेकर साथ ले गयी। अटकलें लगायी जा रही हैं कि अगर ये विचित्र जीव डायनासोर की प्रजाति का ही निकला तो ये विज्ञान के लिए एक सनसनीखेज खबर और खोज साबित होगी। फिलहाल इस जानवर का परीक्षण किया जा रहा है।
Gujrat . भगवान शिव के मंदिरों में लोग पूजा करने के लिए तो जाते ही हैं वहीं कुछ मंदिर ऐसे हैं जो अपनी अनोखी खासियत की वजह से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. इन मंदिरों को देखने के लिए देशी और विदेशी पर्यटकों का तांता लगा रहता है. हम आपको यहां इन्हीं में से एक खास मंदिर के बारे में बता रहे हैं जहां लोग पूजा करने के साथ ही इन मंदिर की अनोखी खासियत की वजह से यहां आते हैं. विदेशी पर्यटकों को तो ये मंदिर बहुत पसंद आता है. गुजरात के वड़ोदरा से कुछ दूरी पर जंबूसर तहसील के कावी कंबोई गांव में भगवान शिव का यह मंदिर दिन में दो बार गायब हो जाता है.
स्तंभेश्वर महादेव के इस मंदिर को लोग गायब होने वाले मंदिर के नाम से पहचानते हैं. जो पर्यटक यहां घूमने के लिए आते हैं वे ये देखकर हैरान रह जाते हैं कि कैसे सुबह और शाम कुछ पलों के लिए दिन में ये मंदिर देखते ही देखते उनकी आंखों से ओझल हो जाता है. कुछ समय बाद ये वापस उसी स्थान पर नजर आने लगता है.
स्तंभेश्वर महादेव का मंदिर गुजरात राज्य के भरूच जिले की जम्बूसर तहसील के कवि कम्बोई नामक गांव में स्थित हैं. यह स्थान गुजरात के वडोदरा से लगभग 60 कि.मी. दूर हैं. कवि कम्बोई नामक गांव में स्थित स्तंभेश्वर महादेव का मंदिर रहस्यमयी हैं. मंदिर के मुख्य पुजारी के अनुसार इस मंदिर में स्थित शिवलिंग का समुद्र दिन में दो बार जलाभिषेक करता हैं. ये परम्परा सदियों से चली आ रही हैं.
स्तंभेश्वर महादेव के मंदिर में 4 फीट लम्बा और 2 फीट व्यास वाला शिवलिंग स्थित हैं. ये मंदिर अरब सागर में खंभात की खाड़ी के किनारे कैम्बे तट पर स्थित हैं.
शिवपुराण में उल्लेख
भगवान शिव से जुड़े इस तीर्थस्थल का उल्लेख ‘शिवपुराण’ के रुद्रसंहिता भाग द्वितीय के अध्याय ग्यारह में भी मिलता हैं. इस मंदिर की खोज लगभग 150 साल पहले की गयी थी. तब से लेकर आज तक यहाँ पर हर दिन हजारों श्रद्धालु आते हैं. मंदिर के पीछे की तरफ अरब सागर होने की वजह से इस मंदिर के सौन्दर्य में चार चाँद लग जाते हैं. मंदिर हर दिन 2 बार लगभग समुद्र में गायब ही हो जाता हैं.
पौराणिक कथा
स्कंध पुराण के एक वृतांत अनुसार जन्म के छ दिन बाद भगवान शिव के बड़े बेटे कार्तिकेय को देवसेना के सेनापति के रूप में नियुक्त कर दिया गया. ये वो समय था जब देव, ऋषि-मुनि, आमजन और देवसेना ताड़कासुर नामक राक्षस के आतंक से भयभीत थे. जब ये बात कार्तिकेय को पता चली तो उन्होंने ताड़कासुर का वध कर दिया. ताड़कासुर के वध के बाद कार्तिकेय को ज्ञात हुआ कि ताड़कासुर भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था. इससे उनका मन व्यथित हो गया. उन्होंने भगवान विष्णु को अपने मन की पीड़ा सुनाई तो विष्णु जी ने सलाह दी कि वधस्थल पर भगवान शिव का मंदिर बना दो. कार्तिकेय ने ऐसा ही किया. समस्त देवतागणों ने महिसागर संगम तीर्थ पर विश्वनंदक स्तंभ की स्थापना की. पश्चिम भाग में स्थापित स्तंभ में स्वयं भगवान शिव विराजित हुए. तब से ही इस तीर्थस्थल को स्तंभेश्वर कहा जाता हैं. इसी जगह पर नदी महिसागर का संगम अरब सागर से होता हैं.
गायब होने का रहस्य
कहानी के अनुसार इस मंदिर में स्वयं भगवान शिव रहते हैं तो उनका जलाभिषेक समुद्र स्वयं करता हैं. इस समुद्र में दिन में दो बार ज्वार आता हैं. ज्वार आने के समय सम्पूर्ण मंदिर लगभग गायब हो जाता हैं. ज्वार उतरने के बाद मंदिर फिर से दिखाई दे जाता हैं. मंदिर के पुजारियों के अनुसार उन्होने पर्चे बँटवा दिए हैं जिनमे ज्वार के आने का वक्त लिखा हैं. ऐसे में आने वाले श्रद्धालुओं को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता हैं. स्तंभेश्वर महादेव मंदिर में सागर द्वारा किया जाने वाला शिवशंभु का जलाभिषेक भी अलौकिक हैं.
सांप या अजगर का जिक्र होते ही कई लोगों की हालत पस्त हो जाती है। चिड़ियाघर या राष्ट्रीय उद्यान तक तो ठीक है, मगर वे घर या गार्डेन में दिख जाएं, तो रूह तक कांप जाती है। मगर शौक भी ऐसा-वैसा नहीं, इस लड़की ने अपने घर में 16 खतरनाक प्रजाति के सांप पाल रखे हैं।
वेटनरी नर्स की ट्रेनिंग ले रही इस लड़की का नाम जी है। 21 साल की इस लड़की को सांप और अजगर पालने का शौक है। सांपों के प्रति इसका आकर्षण तब से है जब यह महज छह साल की थी। 14 साल की उम्र में इसने पहला पाइथन खरीदा। इसके लिए उसके भाई ने भी अपने पैसे दिए। अब इस खूबसूरत बाला के पास ब्लड पाइथन, बो कंस्ट्रिक्टर, रॉयल पाइथन और बरमीस पाइथन हैं।
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21 साल की इस लड़की को सांप और अजगर पालने का शौक
सबसे हैरानी वाली बात यह है यह सभी सांपों को यह अपने बेडरूम में रखती है। हफ्ते में कम से कम एक सांप तो इसे डसता ही है। कई बार तो खून तक निकल जाता है। मगर इस लड़की को यकीन है कि इसके पालतू सदस्य इस पर गुस्से में कभी हमला नहीं करेंगे।
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21 साल की इस लड़की को सांप और अजगर पालने का शौक
अगर आप सांप से डरते हैं और अचानक इस महिला के अपार्टमेंट में दाखिल होंगे तो बेशक आपको सदमा लग जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि दिन में ये सभी सांपों को उनके डब्बों से निकालकर पूरे फ्लैट में रेंगने-घूमने के लिए छोड़ देती है। कई बार ये रेंगकर दीवार पर पहुंच जाते हैं। कई दफा इन्हें वापस पकड़ने के लिए फायर ब्रिगेड तक को बुलाना पड़ा है।
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21 साल की इस लड़की को सांप और अजगर पालने का शौक
बारक्रॉफ्ट की रिपोर्ट के अनुसार जी बड़े अजगरों को महीने में एक बार करीब तीन से छह किलो का खरगोश खिलाती है। यह डाइट उनके लिए काफी होता है। वहीं छोटे सांपों को वह चिकेन या चूहे खिलाती है।
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21 साल की इस लड़की को सांप और अजगर पालने का शौक
वाराणसीः आज हम आपको वाराणसी में बने एक अनोखे ‘भारत माता मंदिर’ के बारे में बताने जा रहे हैं जहां दुनिया भर से ऐसे मंदिर को जिसे जानने और समझने के साथ दर्शन पूजन के लिए पर्यटक और श्रद्धालु आते हैं जहां संगमरमर पर अविभाजित भारत का नक्शा बना हुआ है। यह मंदिर विदेशियों को बहुत आकर्षित कर रहा है।राष्ट्र रत्न बाबू शिवप्रसाद गुप्त को 1913 में करांची से लौटते हुए मुम्बई जाने का अवसर मिला था। वहां से वह पुणे गए और धोंडो केशव कर्वे का विधवा आश्रम देखा।
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‘भारत माता’ 123
आश्रम में जमीन पर ‘भारत माता’ का एक मानचित्र बना था, जिसमें मिट्टी से पहाड़ एवं नदियां बनी थीं। वहां से लौटने के बाद शिवप्रसाद ने इसी तरह का मंदिर बनाने का विचार किया। उस समय के प्रख्यात इंजीनियर दुर्गा प्रसाद इस मंदिर को बनवाने के लिए तैयार हो गए। इस मंदिर को शिवप्रसाद ने 1918 से 1924 के बीच बनवाया था। इसका उद्घाटन 25 अक्तूबर,1936 को महात्मा गांधी ने किया था।
इस मंदिर का निर्माण 30 मजदूर और 25 राजमिस्त्री ने मिलकर किया, जिनके नाम दीवार पर उकरे हुए हैं। इस मंदिर के मध्य में मकराना संगमरमर पर अफगानिस्तान, बलूचिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, बर्मा (अब म्यामांर) और सेलोन (अब श्रीलंका) समेत अविभाजित भारत का एक मानचित्र है। मानचित्र की खासियत ये है कि इसमें करीब 450 पर्वत श्रृंखलाओं, चोटियों, मैदानों, जलाशयों, नदियों, महासागरों और पठारों समेत कई भौगोलिक ढांचों का बारीकी से नक्शा बनाया गया है। मंदिर के नीचे ऐसी भी एक जगह है जहां से इस मानचित्र पर उकेरी गई पर्वत श्रृंखला और नदियों को आसानी से देखा और महसूस किया जा सकता है।
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‘भारत माता’ 123
इस अनोखे मंदिर के गेट पर ही भारतीय संस्कृति और देश प्रेम की झलक देखने को मिलती है। जब हम मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचते है तो सबसे पहले भारत का राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ लिखा दिखता है। भारत माता मंदिर में राष्ट्र कवि मैथलीशरण गुप्ता ने एक कविता भी लिखी थी जो मंदिर में अभी भी नजर आती है। इस कविता का सार देशवाशियों को एकता के धागे में पिरोना है। देश के एकमात्र भारत माता मंदिर में पुरानी लिपियां भी बनाईं गई हैं जो देश के गौरवशाली इतिहास को दर्शाती हैं। इस अनोखे मंदिर के दर्शन के लिए देश ही नहीं विदेश से भी भारी संख्या में पर्यटक आते हैं।
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‘भारत माता’ 124
टूरिस्ट गाइड बताते हैं कि जब वह भारत माता मंदिर सैलानियों को जाने के लिए कहते हैं तो उन्हें लगता है हम किसी देवी या देवता के मंदिर घुमाने ले जा रहे हैं। लेकिन जब वह यहां आते हैं तो इस मंदिर को देखते ही आकर्षित हो जाते हैं। इतना ही नहीं वह मंदिर की खूब सराहना करते हैं। ऐसे में हम लोगों को भी बहुत गर्व महसूस होता है।