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  • आपने तंदूरी रोटी तो खाई होगी लेकिन क्या कभी ‘तंदूरी चाय’ पी है ?

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    आपने चाय तो बहुत तरह की पी होगी जैसे- लेमन टी, ग्रीन टी, ब्लैक टी आदि। मगर, क्या कभी आपने तंदूरी चाय पी है? आप कहेंगे कि तंदूरी रोटी तो खाई है लेकिन अब भला ये तंदूरी चाय क्या है। तो हम आपको बता दें कि पुणे में खास तरह से बनी तंदूरी चाय बिकती है।
    दरअसल, पुणे में मिलने वाली इस खास चाय को एक बार पीने के बाद आप इसके टेस्ट को भुला नहीं पाएंगे। पुणे में रहने वाले 29 वर्षीय अमोल दिलीप राजदेव ने इस नई तरह की चाय को लोगों के लिए पेश किया है।

    पुणे में चाय ला, द तंदूर टी नाम के साथ उनकी एक छोटी सी दुकान है, जहां वह तंदूर में चाय बनाते हैं, जिसका स्वाद लेने के लिए लोग काफी दूर-दूर से आते हैं। तंदूर चाय के बारे में बताते हुए अमोल ने कहा कि यह चाय बनाने की एक अद्वितीय प्रक्रिया है। यहां हम पहले एक पहले से गर्म किए गए तंदूर में कुल्हण को गर्म करते हैं।

    इसके बाद आधी पकी हुई चाय को गर्म कुल्हड़ में डालते हैं। इससे चाय के बुलबुले बनने लगते हैं और वह उबलकर कुल्हड़ से बाहर निकलने लगती है। इस तरह से बनी चाय में स्मोकी फ्लेवर आ जाता है। मार्च 2018 में शुरू किए गए इस टी स्टाल में तंदूर में बने हुए 20 तरह के पेय पदार्थों को बेचा जाता है।

    इसमें तंदूर चाय, तंदूर कॉफी, ब्लैक कॉफी, मसाला चाय, नींबू चाय, ब्लैक टी, अदरक चाय और हल्दी वाला दूध शामिल है। तंदूर चाय की कीमत 20 रुपये है। साभार: www.outlookhindi.com

  • दो जून की रोटी, आज सोशल मीडिया पर दो जून की रोटी एक हास्य व्यंग्य के रूप में सक्रिय नही दिखा हैं।

    उपेन्द्र कुशवाहा

    दो जून की रोटी, आज सोशल मीडिया पर दो जून की रोटी एक हास्य व्यंग्य के रूप में पिछले वर्ष सक्रिय था लेकिन इस वर्ष कही नही नजर नही आया । लेकिन, वास्तिवता में दो जून की रोटी का बहुत बड़ा महत्व है। 38 डिग्री सेल्सियस तापमान पर काम करने वाले एक मजदूर से दो जून की रोटी का महत्व पूछा जाए, तो इसकी मार्मिकता सामने आ जाएगी। इसलिए आज दो जून है और दो जून की रोटी जरूर खाइएगा।
    ……..
    सोशल मीडिया पर वायरल संदेश

    सोशल मीडिया पर आज दो जून की रोटी को लेकर संदेशों का आदान प्रदान होता था । पिछले वर्ष सोशल मीडिया पर लिखते हैं कि रोज हम 2 जून की रोटी पकाते हैं, आज 2 जून की रोटी हमें पका रही है। वहीं ऐसे कई लोग व्हाट्सएप और फेसबुक पर संदेश डाल रहे थे कि आज दो जून है रोटी समय से खा लें। वहीं कुछ संदेश आता था कि दो जून की रोटी बड़े नसीब बालों को मिलती है।

    मुहावरों में है जवाब

    आज दो जून, 2018 है। ये एक तारीख है। वहीं दो जून का अ​र्थ दोनों टाइम यानि सुबह और शाम से भी होता है। दो जून की रोटी का मतलब है दो समय की रोटी। दो बार भोजन। किसी ने एक पुस्तक लिखी, दो जून की रोटी। तभी से यह मुहावरा प्रचलन में आ गया।
    …..
    हंसने का भी बहाना

    पडरौना के डॉक्टर राजेश सिंह  का कहना है कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग हंसना भूल गए हैं। व्हाट्सएप और फेसबुक पर चल रहे ये संदेश लोगों को हंसाने में थोड़ा सी मदद कर रहे हैं।

  • दो जून की रोटी, आज सोशल मीडिया पर दो जून की रोटी एक हास्य व्यंग्य के रूप में सक्रिय नही दिखा हैं।

    उपेन्द्र कुशवाहा

    दो जून की रोटी, आज सोशल मीडिया पर दो जून की रोटी एक हास्य व्यंग्य के रूप में पिछले वर्ष सक्रिय था लेकिन इस वर्ष कही नही नजर नही आया । लेकिन, वास्तिवता में दो जून की रोटी का बहुत बड़ा महत्व है। 38 डिग्री सेल्सियस तापमान पर काम करने वाले एक मजदूर से दो जून की रोटी का महत्व पूछा जाए, तो इसकी मार्मिकता सामने आ जाएगी। इसलिए आज दो जून है और दो जून की रोटी जरूर खाइएगा।
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    सोशल मीडिया पर वायरल संदेश

    सोशल मीडिया पर आज दो जून की रोटी को लेकर संदेशों का आदान प्रदान होता था । पिछले वर्ष सोशल मीडिया पर लिखते हैं कि रोज हम 2 जून की रोटी पकाते हैं, आज 2 जून की रोटी हमें पका रही है। वहीं ऐसे कई लोग व्हाट्सएप और फेसबुक पर संदेश डाल रहे थे कि आज दो जून है रोटी समय से खा लें। वहीं कुछ संदेश आता था कि दो जून की रोटी बड़े नसीब बालों को मिलती है।

    मुहावरों में है जवाब

    आज दो जून, 2018 है। ये एक तारीख है। वहीं दो जून का अ​र्थ दोनों टाइम यानि सुबह और शाम से भी होता है। दो जून की रोटी का मतलब है दो समय की रोटी। दो बार भोजन। किसी ने एक पुस्तक लिखी, दो जून की रोटी। तभी से यह मुहावरा प्रचलन में आ गया।
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    हंसने का भी बहाना

    पडरौना के डॉक्टर राजेश सिंह  का कहना है कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग हंसना भूल गए हैं। व्हाट्सएप और फेसबुक पर चल रहे ये संदेश लोगों को हंसाने में थोड़ा सी मदद कर रहे हैं।

  • इस बीस साल की खूबसूरत लेडी डॉन के आतंक से लोगों कांपती है रूह !

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    उसके होठों पर डार्क लिप्स्टिक, अदा से संवरी जुल्फें, आंखों में गहरा काजल और आंखों के ऊपर काला चश्मा लगाकर ये घूमती नजर आती है। उसका नाम अस्मिता गोहिल उर्फ डीकू उर्फ भूरी है। उसे देखने वाले देखते ही रह जाते हैं लेकिन इस खूबसूरत चेहरे के पीछे एक बड़े खौफ का आतंक छिपा है। गुजरात के सूरत में इस है। आम लोगों से लेकर बिजनेसमैन तक उसकी दहशत में जीते हैं लेकिन उसका खूबसूरत चेहरा देख आपको इस बात पर यकीन ही नहीं होगा।

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    आपको अंदाजा भी नहीं हो पाएगा कि बला की खूबसूरत और किसी मॉडल जैसी दिखने वाली यह लड़की दरअसल एक बहुत बड़ी डॉन है। इस लेडी डॉन की उम्र सिर्फ 20 साल है। यह लेडी डॉन जब गुजरात के सूरत की गलियों में निकलती है तो दुकानदारों की रूह कांपने लगती है कि पता नहीं अब किसका नंबर आने वाला है। सूरत के वराछा इलाके में इस हसीन लेडी डॉन का आतंक है।

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    भूरी का खौफ सूरत में इस कदर है कि वहां कोई भी उसके खिलाफ बोलने को तैयार नहीं है। यह खूबसूरत लेडी डॉन सिर्फ गुंडागर्दी ही करती है बल्कि फेसबुक पर भी काफी एक्टिव है। फेसबुक पर अस्मिता उर्फ लेडी डॉन के 13 हजार से भी ज्यादा फॉलोअर्स हैं। वह अपने फेसबुक अकाउंट पर अपनी खूबसूरत तस्वीरें पोस्ट करती रहती हैं। इन तस्वीरों को देखकर लगता है कि वह कोई सुपर मॉडल है।

    किसी तस्वीर में वह बंदूक लिए नजर आती हैं तो किसी तस्वीर में क्रूजर बाइक पर सवार रहती हैं। फेसबुक में मौजूद जानकारी के मुताबिक अस्मिता मूल रूप से गुजरात के ही उना की रहने वाली है। आपको बता दें कि लेडी डॉन भूरी की सूरत में दुकानदारों से गुंडई के तीन वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए थे। हालांकि इन वीडियोज में वह मॉडलिंग करती नहीं बल्कि गुंडागर्दी करती नजर आ रही हैं। एक वीडियो में वह सूरत के वराछा इलाके में मौजूद एक एम्ब्रॉयडरी के कारखाने में अपने एक दोस्त के साथ तलवार लेकर आतंक मचा रही हैं।

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    वहीं दूसरे वीडियो में वह वराछा इलाके की वर्षा सोसायटी में स्थित एक पान की दुकान वाले को अपने हाथ में तलवार लेकर धमका रही हैं। उससे जबरन पैसे छीन रही है। लेडी डॉन अपने एक साथी के साथ वहां मोटरसाइकिल से आती है। पान वाला अपनी जेब में रखे रुपये निकालकर लेडी डॉन को सौंप देता है।

    इससे पहले होली पर अस्मिता गोहिल उर्फ भूरी की सरेराह तलवार लहराती नजर आई थी। वह अपने साथियों के साथ सड़क पर सरेआम छुरे और तलवारें लहराती नजर आई थीं। उसकी इस करतूत का एक वीडियो भी वायरल हुआ था। उसने होली के दिन हाथों में छुरा लेकर सड़क पर जमकर तांडव किया था। बाद में पुलिस ने भूरी को गिरफ्तार कर लिया था लेकिन वह कुछ दिन बाद जमानत पर छूटकर बाहर आ गई थी।

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    पुलिस ने इस संबंध में भूरी और उसके दोस्त के खिलाफ दंगा फैलाने का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने भूरी के साथ-साथ उसके दो साथियों को भी गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक अस्मिता उर्फ भूरी के खिलाफ सूरत समेत कई जिलों के अलग-अलग थानों में 9 आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि भूरी के खिलाफ इतने मामले हैं कि उसके परिवार वाले भी उससे मिलने नहीं आते हैं। पुलिस का कहना है कि लेडी डॉन कोई नशा नहीं करती मगर गुंडों के साथ घूमना उसका शौक है।

  • महिलाओं ने लगाया अनोखा भंडारा, जिसे देख आप हो जायेंगे हैरान, देखें वीडियो !

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    यह भण्डारा सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो के साथ तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो किसी भंडारे का नजर आ रहा है। अनोखी बात ये है कि भंडारों में जहां प्रसाद के रूप में पूरी-सब्जी-हलवा इत्यादि वितिरत किया जाता है तो वहीं यहां शराब और चिकन बंटता नजर आ रहा है।

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    जी हां, यही वजह है कि ये वीडियो सोशल मीडिया पर सनसनी का कारण बना है। दूसरी चैंकाने वाली बात यह नजर आई कि इस भंडारे में एक भी आदमी नहीं नजर आ रहा बल्कि भंडारा चखने वालों से लेकर भंडारा खिलाने वाला तक सभी महिलाएं हैं।

    वीडियो में आप पाएंगे कि महिलाएं बीयर की बोतल और खाली पत्तल लिए लाइन से जमीन पर बैठी दिखाई दे रही हैं। वहीं एक महिला उन्हें चिकन परोसती प्रतीत हुई। यह वीडियो कब और कहां शूट किया गया है फिलहाल यह बात साफ नहीं हुई है। बता दें वीडियो व्हाट्स एप पर वायरल हो रहा है। तमाम लोग इसे आपस में शेयर कर रहे हैं। वीडियो के साथ में मैसेज में लिखा है बहुत से भंडारे देखे होंगे पर ऐसा कहीं भी नहीं देखा होगा।

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    इसके अलावा 26 मई को वीडियो यूट्यूब पर भी अपलोड किया गया है। शेयरकर्ता का नाम श्री जी है। यहां वीडियो के साथ मजाकिया अंदाज में पंच जोड़ा गया है, जिसमें लिखा है भण्डारे तो बहुत देखे होंगे, पर ऐसा भण्डारा नहीं देखा होगा… ये है असली मानव सेवा।

  • यह जानकर आप हैरान होगें कि यहां लड़कियां अपना जिस्म सौंप देती हैं सिर्फ एक सैंडविच के लिए

    दुनिया में कोई भी इंसान गलत काम खुशी से नहीं करता है. कुछ लोग गलत काम मजबूरी में करते हैं तो वहीँ कुछ लोग पेट पालने के लिए ऐसा काम करते हैं. इसी तरह दुनिया में एक ऐसी जगह है जहां लड़कियां सैंडविच के लिए सेक्स तक करने को तैयार हो जाती हैं. सुनकर चैक गए न.. लेकिन यह सच है.

    ये तो हम सभी जानते हैं कि पूरी दुनिया में देहव्यापर का कारोबार सदियों से चला आ रहा है, लेकिन आज के समय में यहाँ की लड़कियां ऐसा जीवन जीने को मजबूर है जिसके बारे में आप कल्पना नहीं कर सकते हैं. आपने ये सुना होगा पैसों के लिए लड़कियां अपने आप को दूसरे के हवाले कर देती हैं. लेकिन एक सैंडविच के लिए ऐसा करना. हैरान कर देने वाली बात है.

    जिस्मफरोशी की दलदल में फंसी यहां की लड़कियां पैसे के लालच में ये सब नहीं करती, बल्कि इनकी हालत इतनी बुरी है कि ये ऐसा करने को मजबूर हैं. जी हां, एक सैंडविच के लिए ग्रीस की लड़कियां अपना जिस्म बेचती हैं. 2015 में जब ग्रीस आर्थिक संकट से जूझ रहा था तो वहां के हालात कुछ ऐसे ही बन गए थे. आज तक ग्रीस की वेश्याएं इससे उभर नहीं पाई हैं.

    इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अपनी कुछ जरूरतों की चीजों के लिए यहां लड़कियां अपने जिस्म का सौदा कर देती हैं. एक सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक ग्रीस में रहने वाली लड़कियां सिर्फ सैंडविच की खातिर अपने जिस्म को दूसरों को सौंप देती हैं. दूसरी चैंकाने वाली बात यह सामने आई है कि यहां की महिलाएं देह व्यापार के धंधे में सबसे आगे चल रही हैं.

    एथेंस की एक यूनिवर्सिटी में समाजशास्त्र के प्रोफेसर ग्रेगोरी लेक्सोस की टीम ने जब इस मामले पर शोध किया तो पाया कि लड़कियां एक वक्त के खाने के लिए अपने जिस्म का सौदा कर रही हैं. इस देश में पेट की भूख मिटाने के लिए पैसों की जरूरत है लेकिन इनके पास पैसे के नाम पर कुछ भी नहीं है. इसलिए मजबूरन अपना पेट पालने के लिए इस रास्ते पर चलना पड़ रहा है.

  • ईद-उल-फ़ित्र : यह त्योहार मिटाता है अमीर -गरीब का भेद

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    इस्लामिक कैलेंडर में दो ईद मनाई जाती हैं। दूसरी ईद जो ईद-उल-जुहा या बकरीद के नाम से भी जानी जाती है। ईद-उल-फ़ित्र  का यह त्योहार रमजान का चांद डूबने और ईद का चांद नज़र आने पर नए महीने की पहली तारीख को मनाया जाता है।  रमज़ान के पूरे महीने रोजे रखने के बाद इसके खत्म होने की खुशी में ईद के दिन कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं। सुबह उठकर ईदगाह और मस्जिदों में नमाज अदा की जाती है और ख़ुदा का शुक्र अदा किया जाता है कि उसने पूरे महीने हमें रोजे रखने की शक्ति दी।  इस दिन इस्लाम को मानने वाले का फर्ज होता है कि अपनी हैसियत के हिसाब से जरूरतमंदों को दान दें। इस दान को इस्लाम में जकात और फितरा भी कहा जाता है।

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    ईद-उल-फितर’ अथवा ‘ईद’ का त्योहार मुस्लिम समुदाय का मुख्य त्यौहार है जो रमजान माह की समाप्ति पर चाँद दिखने पर मनाया जाता है.मुस्लिमों के लिए रमजान का महीना विशेष धार्मिक अहमियत रखता है. दरअसल यह माह उनके लिए आत्म शुद्धि का पर्व माना जाता है .रमजान के माह में मुस्लिम श्रद्धालु रोज़े रखते हैं. सुबह सेहरी के बाद शाम को रोज़े खोले जाते हैं. इस दौरान पानी का एक घूंट भी नहीं पीते हैं. हालाँकि इस्लाम में कुछ असहाय, बीमार तथा लाचार व्यक्तियों को रोज़े नहीं रखने की छूट मिली हुई है . सुबह पाँच बजे निश्चित समय पर खुदा को ‘नमाज’ अदा करते हैं तथा अपने व सभी परिजनों के लिए दुआ करते हैं.पूरे महीने सभी मुस्लिम सूर्यास्त के पश्चात् ही भोजन व जल ग्रहण करते हैं. इसे इफ्तार कहा जाता है.

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    रमजान महीने के अंतिम दिन सभी मुस्लिम चाँद दिखाई देने के पश्चात् ही दूसरे दिन ‘ईद’ मनाते हैं. इस साल की ईद का चाँद सम्भवतः कल दिखाई दिया तो परसों शुक्रवार को ईद मनाई जा सकती है.सभी मुसलमान ईद को बड़ी धूम-धाम से विशेष तैयारी के साथ मनाते हैं. ईद के त्योहार में संपूर्ण वातावरण एकरस हो जाता है . अमीर और गरीब का भेद भी मिट जाता है. सभी अपनी शक्ति , सामर्थ्य एवं रुचि के अनुसार नए कपडे , नए आभूषण, जूते, चप्पल व अन्य सामग्री खरीदते हैं .फलों व मिठाइयों की दुकानों पर भीड़ उमड़ने लगती है.

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    ईद के दिन का उत्साह देखते ही बनता है.ईद के दिन सुबह बच्चे, युवा , बूढ़े सभी नए कपड़ों में ईदगाह में पंक्तिबद्‌ध होकर ‘नमाज’ अदा करते है .हजारों की संख्या में एकत्रित हुए लोगों के हाथ जब दुआ के लिए उठते हैं तो ऐसा लगता है जैसे सभी आपस में भाई-भाई हैं जिनमें आपस में दुश्मनी की कोई जगह नहीं है.नमाज अदा करने के बाद सभी लोग एक-दूसरे को गले लगाते हैं तथा ईद की मुबारकबाद देते हैं .

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    सभी लोग अपने मित्रों व सगे-संबंधियों , दोस्तों के घर जाकर उन्हें ईद की मुबारकबाद देते हैं. इसके साथ ही दावतों का सिलसिला शुरू हो जाता है .कई स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ़ उठाया जाता है. दरअसल ईद का यह त्यौहार एक-दूसरे से प्रेम करने की नसीहत देता है.

  • एक्ट्रेस माहिका शर्मा के अफरीदी के साथ रात बिताने वाले बयान ने सबको कर दिया हैरान , देखें Photos

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    पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद अफरीदी को लेकर विवादित बयान देकर बिग बॉस फेम अर्शी खान ने खूब सुर्खियां बटोरीं। अर्शी तीन साल पहले ट्वीट करते हुए कहा था कि उन्होंने अफरीदी के साथ शारीरिक संबंध बनाए हैं। हालांकि हाल ही में उन्होंने इस बात को नकार दिया था।

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    अब एक और टीवी एक्ट्रेस ने शाहिद अफरीदी को लेकर बोल्ड बयान दिया है। ये एक्ट्रेस अफरीदी के साथ रात बिताने को भी तैयार हैं। टीवी सीरियल ‘रामायण’ और ‘FIR’ में अपनी शानदार एक्टिंग से टीवी की दुनिया में पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस माहिका शर्मा के अफरीदी के साथ रात बिताने वाले बयान ने सबको हैरान कर दिया है।

    मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक माहिका ने अफरीदी के प्रति अपनी दीवानगी दिखाते हुए कहा- मैं शाहिद को तब से पसंद करती हूं, जब वो 13 साल के थे। मैं उनकी फोटो सामने रखकर उसे किस किया करती थी।

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    माहिका यहीं नहीं रुकी उन्होंने आगे कहा- शाहिद अफरीदी को लेकर मैं इतनी पागल हूं कि मैं उनके साथ शारीरिक संबंध बनाने को तैयार हूं। उन्होंने कहा कि आज के समय में शारीरिक संबंध बनाना कोई बड़ी बात नहीं है। इस चीज को लेकर जब लड़के अपनी इच्छा बता सकते हैं तो लड़कियों को किस बात की लक्ष्मण रेखा का ख्याल रखना चाहिए।

  • ध्यान, योग और प्रार्थना पर विश्वास रखने वाले जीते हैं 4 साल ज्यादा

    लंदन. अमेरिका में एक दिलचस्प अध्ययन हुआ। जिसमें पाया गया है कि भगवान पर विश्वास रखने (आस्तिक) वाले नास्तिकों की अपेक्षा चार साल ज्यादा जीते हैं। अध्ययनकर्ताओं ने अमेरिका के विभिन्न राज्यों के अखबारों में छपे करीब 1,000 मृत्युलेखों का अध्ययन किया। उनका मानना है कि इस परिणाम का एक कारण आस्तिकों का सामाजिक कार्यों में व्यस्त रहना हो सकता है। लेकिन उन्होंने पाया कि इस वजह से अधिकतम 1 वर्ष ज्यादा जीवनकाल के प्रमाण मिलते हैं।
    ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए अध्ययन के सह-लेखक डॉ बाल्डविन वे का कहना है कि, हो सकता है नास्तिकों को यह बात बकवास लगने लगे। लेकिन इसके पीछे एक संबंध है, जिसे वह झुठला नहीं सकते।

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    अध्ययन में अगस्त 2010 से अगस्त 2011 के मध्य अमेरिका के 42 बड़े शहरों के अखबारों में छपे 1,096 मृत्युलेखों का अध्ययन किया गया। जिसमें मृत व्यक्ति के आस्तिक या नास्तिक होने की बात कही गई। पहले इसमें पाया गया कि नास्तिकों की अपेक्षा आस्तिक का जीवनकाल 5.64 वर्ष ज्यादा है। लेकिन जब मृत लोगों की लिंग और वैवाहिक स्थिति पर भी विचार किया गया तो यह अंतर घटकर 3.82 (करीब 4 साल) ज्यादा दिखा।

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    डॉ वे के अनुसार जीवनकाल के इस अंतर का एक बड़ा कारण धार्मिक लोगों की जीवनशैली के नियम व मानदंड हो सकते हैं। जो कि उन्हें अस्वस्थ खानपान और गतिविधियों के लिए मना करते हैं। उनके अनुसार धार्मिक लोग धूम्रपान और शराब का सेवन नहीं करते हैं, जिससे उनका स्वास्थ्य दूसरों के मुकाबले बेहतर रहता है। इसके साथ ही उनके द्वारा किया गया ध्यान, योग और प्रार्थना तनाव व अवसाद को दूर करने में मदद करता है। जिससे वह मानसिक तौर पर ज्यादा मजबूत रहते हैं।

  • जापानी लोगों में कम हो रही है. ‘सेक्स’ में दिलचस्पी !

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    क्या जापान में सेक्स संकट का दायरा भयावह रूप ले रहा है? क्या एक दिन ऐसा आएगा जब जापान खाली हो जाएगा? जापानी लोगों को ज्यादा सेक्स करने की जरूरत क्यों बताई जा रही है. तोहोकु यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इन्हीं निष्कर्षों के बाद डूम्जडे क्लॉक (प्रलय के दिन का अंदाजा लगाना) बनाई है।

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    इसके मुताबिक जापान में वर्तमान सेक्स संकट का मतलब है कि 16 अगस्त 3766 को जापान में केवल एक शख्स बच जाएगा. यह अनुमान देश में घटती प्रजनन दर और बूढ़ों की आबादी पर आधारित है. ब्रिटेन में भी 1920 के दशक की पीढ़ी की तुलना में लाखों लोगों की सेक्स में दिलचस्पी कम हुई है।

    जापान फैमिली प्लानिंग असोसिएशन के सर्वे में बताया गया है कि 16 से 24 साल की उम्र वाली 45 फीसदी जापानी महिलाओं को यौन संबंध में कोई दिलचस्पी नहीं है. एक तिहाई से ज्यादा पुरुष भी इस बात से सहमत हैं।

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    तोहोकु यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि स्थिति काफी गंभीर है. शोधकर्ताओं ने बताया कि वह वक्त भी आएगा जब जापान बिल्कुल अकेला महसूस करेगा क्योंकि तब यहां सिर्फ एक शख्स होगा।

    ब्रिटेन में भी सेक्स को बढ़ावा देने के लिए डेटिंग ऐप्स की शुरुआत की गई फिर भी ब्रिटिश युवा कम सेक्स कर रहे हैं. सेक्स में कमी की एक बड़ी वजह ज्यादा वक्त इंटरनेट पर खर्च करना है। साभार: बीबीसी हिन्दी