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  • 61 साल की हॉटनेस मॉडल की तस्वीरें आपको बना देंगी दीवाना

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    उम्र का तकाजा है और कुछ नहीं साहेब। ये बात हमने कई बार सुनी है, हम सभी जानते है उम्र के साथ साथ लोगो की स्किन का ग्लो कम हो जाता है और लोग बूढ़े दिखाई देने लगते है।

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    61 साल की मॉडलयाजमीना 

    ऐसे में कुछ लोग ऐसे भी होते है जो अपने बुढ़ापे को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते है और खुद को फिट रखते है। जी हाँ कई ऐसे लोग होते है जो बूढ़े होते है लेकिन अपने बुढ़ापे को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते है।

    आज हम बात कर रहें है 61 साल की मॉडल याजमीना रॉसी की जो बहुत ही हॉट है और बोल्ड है और अपने फिगर की वजह से जानी जाती है। याजमीना अक्सर ही अपनी हॉटनेस की वजह से सुर्खियों में रहती है और कई फोटोशूट्स करवाती है।

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    61 साल की मॉडलयाजमीना 

    याजमीना स्विमवेयर के विज्ञापनों के लिए फोटोशूट्स करवाती है साथ ही हाइपर-सेक्शुअलाइज्ड थीम से कुछ अलग करने की चाह रखती है। याजमीना अपने आपको हमेशा ही फिट रखती है और हमेशा ही आकर्षक दिखती है।

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    61 साल की मॉडलयाजमीना 

    ये अपने आपको फिट रखने के लिए ऑर्गैनिक फूड खाती है और अपनी ग्लोइंग स्किन का क्रेडिट ऑर्गैनिक फूड को ही देती है इनकी तस्वीरें लोगो को दीवाना बना देती है।

  • Superman अब आप भी बन सकेंगे, सुपरमैन की खास शक्ति को हकीकत में बदलने के करीब वैज्ञानिक

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    लंदन । कॉमिक्स और हॉलीवुड फिल्मों में आपने सुपरमैन की अद्भुत शक्तियां तो देखी ही होंगी। उसकी आंखों से निकलने वाली लेजर रोशनी दर्शकों को हैरत में डाल देती है। भले ही यह किरदार और इसकी शक्तियां काल्पनिक हों, लेकिन वैज्ञानिक इसकी इस खास शक्ति को हकीकत में बदलने के करीब पहुंच गए हैं। दरअसल, वैज्ञानिकों के एक दल ने एक ऐसा खास कॉन्टेक्ट लेंस विकसित करने में सफलता हासिल कर ली है, जिससे हमारी आंखों से भी रोशनी की किरण निकल सकेगी।

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    Superman

    ब्रिटेन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट एंड्रयूज के शोधकर्ताओं का दवा है कि उनके द्वारा तैयार लेजर कॉन्टेक्ट लेंस को पहनने से हमारी आंखों से भी रोशनी की किरणें निकलने लगेंगी। विशेषज्ञों ने बेहद बारीक स्टिकर तैयार किए हैं, जिन्हें कॉन्टेक्ट लेंस पर लगाया जा सकेगा।

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    यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट एंड्रयूज के प्रोफेसर माल्टे गैदर के मुताबिक, प्राचीन ग्रीस में दार्शनिक प्लेटो का मानना था कि आंखों की बीम दृश्य धारणा की मध्यस्थता करती हैं। इन बीम के जरिये पर्यावरण की जांच की जा सकती है। प्लेटो की इस थ्योरी को आगे बढ़ाते हुए इस किरदार को रचा गया और उसे यह शक्ति दी गई। इसी को आधार बनाकर हमने अपना प्रयोग किया। आंखों में पहने जा सकने वाले इस उपकरण की मदद से शख्स आंखों से लेजर बीम छोड़ सकेगा।

    यह लेजर तकरीबन 20 इंच दूर तक जा सकती है। इस रोशनी को डिजिटल वन और जीरो के साथ एनकोड किया जा सकता है। जिससे रोशनी आधारित बारकोड में तब्दील किया जा सकता है, जिससे सुरक्षा स्कैनर जांच सकते हैं। इस तकनीक का इस्तेमाल तकरीबन एक साल पहले बैंक नोट पर किया जा चुका है।

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    superman_

    इन कॉन्टेक्ट लेंस में इस्तेमाल की गई फिल्म स्मार्टफोन स्क्रीन की तरह है, जो रोशनी का संपर्क होते ही उसके पिक्सेल को सक्रिय कर देती है। कॉन्टेक्ट लेंस स्टिकर के पॉलिमर तेज रोशनी पड़ते ही फ्लूरोसेंस की तरह चमकने लगते हैं, जिससे लेजर को रोशनी मिल जाती है। यह अध्ययन नेचर कम्यूनिकेशंस नामक जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

  • मुकेश अंबानी के दामाद बनने जा रहे हैं आनंद पीरामल, जानिए ये हैं कौन ?

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    भारत के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी के बेटे आकाश अंबानी की सगाई ने हाल ही में खूब सुर्खियां बटोरी। अब एक बार फिर इस परिवार में शादी की खबरें आ रही हैं। दरअसल नीता और मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी इस साल दिसंबर में आनंद पीरामल से शादी करेंगी।

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    Mukesh Ambani’s daughter Isha

    आनंद पीरामल बड़े उद्योगपति पीरामल इंटरप्राइजेज के मालिक अजय पीरामल के बेटे हैं। आनंद यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया से इकोनॉमिक्स में स्नातक हैं। इसके अलावा उन्होंने हार्वड बिजनेस स्कूल से एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स की है। आनंद हाल ही में अपने दो स्टार्टअप को लेकर चर्चा में आए थे।

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    Isha Ambani

    उनका पहला स्टार्टअप पीरामल ई-हेल्थ है, जो आज 40,000 से ज्यादा रोगियों का इलाज कर रही है। इसके अलावा दूसरा स्टार्टअप है रिएल्टी। यह एक रियल एस्टेट का स्टार्टअप है। आनंद ने एक कार्यक्रम में कहा था कि उन्होंने मुकेश अंबानी द्वारा प्रेरित किए जाने के बाद बिजनेसमैन बनाने का फैसला किया।

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    isha

    आनंद नेआगे कहा कि जब मैंने मुकेश से पूछा कि मैं बैंकिंग सेक्टर में काम करूं या फिर कंसल्टेंसी में। इस पर उन्होंने मुझे कहा कि कंसल्टेंट बनते हो तो यह वैसा होगा जैसे आप क्रिकेट देख रहे हो, लेकिन बिजनेस करते हो तो यह क्रिकेट खेलने जैसा होगा। तुम्हें बिजनेस करना चाहिए और आज से ही शुरू हो जाना चाहिए। आनंद और ईशा की शादी भारत में ही होगी। बता दें कि आनंद की तरह ही ईशा बिजनेस वुमन हैं। उन्होंने येल विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान और साउथ एशियन स्टडीज में स्नातक किया है। 

  • 33 सालों से सारे ऐशो आराम छोड़कर झोपड़ी में रहते हैं आईआईटी के प्रोफेसर, जानिये क्यों जी रहे हैं ऐसी लाइफ

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    Delhi, आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग। फिर अमेरिका के फेमस ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी से PHD की पढ़ाई। यही नहीं, RBI के गवर्नर रहे रघुराम राजन तक को पढ़ाया। यहां बात हो रही हैआईआईटी के प्रोफेसर रहे आलोक सागर की, जो बीते 33 सालों से मध्य प्रदेश के दूरदराज गांवों में आदिवासी जीवन जी रहे हैं। लेकिन जिंदगी के सारे ऐशो आराम छोड़कर वे ऐसा क्यों कर रहे हैं, आइए जानते हैं इसके बारे में।

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    आदिवासियों के बीच रह रहे आलोक सागर

    क्या आप सोच सकते हैं कि आईआईटी दिल्ली जैसे बड़े संस्थान में प्रोफेसर की नौकरी छोड़कर कोई शख्स आदिवासियों की तरह उनके ही बीच झोपड़े में रह सकता है। तमाम विदेशी और भारतीय भाषाओं के साथ आदिवासियों की बोली-बानी जानने-समझने और बोलने वाला यह शख्स उस समय सुर्खियों में आया, जब बैतूल जिले के शाहपुर में उसे जेल में डालने की धमकी दी गई। प्रोफेसर आलोक सागर नामक इस शख्स ने भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन को पढ़ाया है और अपनी कई डिग्रियों को छिपाकर रखा है। आलोक सागर ने 1973 में आईआईटी दिल्ली से एमटेक किया था।

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    आदिवासियों के बीच रह रहे आलोक सागर

    वर्ष 1977 में ह्यूस्टनयूनिवर्सिटी टेक्सास से शोध की भी डिग्री ली थी। इसी विश्वविद्यालय से डेंटल ब्रांच में पोस्ट डॉक्टरेट और समाजशास्त्र, डलहौजी विश्वविद्यालय कनाडा में फेलोशिप की। बहरहाल, वे  जंगल को हरा-भरा करने के अपने मिशन में लगे हुए हैं। प्रोफेसर सागर कहते हैं कि योग्यता छिपाने का मकसद इतना ही है कि वे दूसरों से अलग नहीं दिखना चाहते हैं। अपने जीवन का 67वां बसंत देख चुके आईआईटी दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर आलोक सागर ने अपनी पूरी जिंदगी आदिवासियों को उनका हक दिलाने में खपा दी। चेहरे पर लंबी सफेद दाढ़ी, सफेद हो चुके बाल, बदन पर खादी का कुर्ता और धोती। पहली नजर में देखने पर आलोक सागर किसी आम आदिवासी जैसे ही दिखते हैं। आलोक सागर के पास डिग्रियों का अंबार है।

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    आदिवासियों के बीच रह रहे आलोक सागर

    प्रतिभा ऐसी कि कभी अमेरिका ने भी उन्हें शोध के लिए बुलाया था। सिर्फ हिंदी और अंग्रेजी ही नहीं, कई विदेशी भाषाओं का ज्ञान होने के बाद भी वे आदिवासियों से उनकी भाषा में ही बात करते दिख जाएंगे। आलोक का जन्म वर्ष 1950 में हुआ था। आईआईटी दिल्ली में इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग के बाद अमेरिका और कनाडा के विश्वविद्यालयों में शोध और पोस्ट डॉक्टोरल शिक्षा-शोध के बाद वे स्वदेश लौटे और आईआईटी दिल्ली में ही प्रोफेसर बन गए। लेकिन उनका मन नहीं लगा। वे कुछ अलग करना चाहते थे, इसलिए नौकरी छोड़कर आदिवासियों के बीच मध्य प्रदेश चले गए।

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    Padma-Award-Alok-Sagar-Betul

    तबसे लगातार आलोक सागर आदिवासियों के सामाजिक, आर्थिक और अधिकारों की लड़ाई लड़ते हैं। इसके अलावा गांव में फलदार पौधे लगाते हैं। अबतक हजारों फलदार पौधे लगाकर आदिवासियों में गरीबी से लड़ने की वे उम्मीद जगा रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर चीकू, लीची, अंजीर, नींबू, चकोतरा, मौसंबी, किन्नू, संतरा, रीठा, मुनगा, आम, महुआ, आचार, जामुन, काजू, कटहल आदि के पेड़ लगाए हैं। टायर से बनी चप्पलें पहनने वाले प्रोफेसर सागर का हुलिया देखकर कोई नहीं कह सकता कि वे टेक्सास यूनिवर्सिटी से शोध कर चुके हैं और आईआईटी दिल्ली में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन तक के शिक्षक रह चुके हैं। उनके उलझे हुए बाल, बढ़ी हुई दाढ़ी और कंधे पर लटका झोला देखकर वैसे भी कोई प्रभावित नहीं होता था। निर्धन लोगों की तरह एक झोपड़े में जैसे-तैसे गुजारा करने वाले प्रोफेसर सागर का हुलिया गरीब आदिवासियों की तरह ही है। वे इसीलिए आदिवासियों में रम गए हैं।

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    आदिवासियों के बीच रह रहे आलोक सागर1

    आदिवासियों को जिंदगी में परिवर्तन कराना सिखा रहे हैं, लेकिन वे अपनी पहचान छिपाकर रखते रहे हैं। जहांतक पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात है तो प्रोफेसर सागर के भाई और बहन भी उच्च शिक्षित हैं। उनके पिता सीमा व उत्पाद शुल्क विभाग में नौकरी करते थे। छोटा भाई अंबुज भी आईआईटी दिल्ली में प्रोफेसर है, जबकि एक बहन कनाडा में है तो दूसरी जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी नई दिल्ली में हैं। दरअसल, अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर आदिवासियों के बीच काम कर रहे प्रोफेसर आलोक सागर का भेद तब खुला, जब पुलिस ने उन्हें जेल में डाल देने की धमकी देकर थाने पर बुला लिया। समाजवादी जनपरिषद के अनुराग मोदी के मुताबिक, बैतूल जिले के शाहपुर ब्लॉक के कोचामऊ में  गुमनामी की जिंदगी जी रहे आईआईटी के पूर्व प्रोफेसर आलोक सागर को पुलिस ने जेल में डालने की धमकी दी, क्योंकि पुलिस ने उन्हें उपचुनाव संपन्न होने तक गांव छोड़ देने को कहा था और वे नहीं माने।

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    आदिवासियों के बीच रह रहे आलोक सागर1

    पुलिस की धमकी के कारण प्रोफेसर सागर जेल जाने के लिए दो जोड़ी कपड़े लेकर शाहपुर थाने पहुंच गए। लेकिन जब थाने में उन्होंने अपने बारे में बताया तो वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह गए। बाद में शाहपुर थाने के टीआई राजेंद्र धुर्वे ने सफाई दी कि चुनाव को लेकर ब्लॉक स्तरीय मीटिंग के दौरान कुछ लोगों ने एक बाहरी व्यक्ति के लंबे समय से गांव में होने की सूचना दी थी। हमने केवल जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से उन्हें बुलवाया था कि वे कौन हैं और क्यों यहां रह रहे हैं। उनसे परिचय प्राप्त करने के बाद उन्हें वापस भेज दिया गया।

  • Alert : अगले 48 घंटे रहे सावधान, आयेगा गरम हवाओं का तूफान, मोबाइल और टीवी हो जाएंगे बंद

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    वाशिंगटनं। आने वाले 48 घंटे कुछ समय के लिए ब्लैक आऊट की स्थिति पैदा कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार पृथ्वी से सोलर स्टॉर्म टकरा सकता है। सूर्य में एक कोरोनल होल होगा जिससे सूरज से भारी मात्रा में ऊर्जा निकलेगी। यदि ये पृथ्वी से टकराता है तो इससे सैटेलाइट आधारित मोबाइल, टीवी और आदि सुविधाएं ठप्प पड़ जाएंगी। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने एक तस्वीर भी जारी की है जिसमें सूर्य से उठने वाले गैस के तूफान को देखा जा सकता है।

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    रिपोर्ट के मुताबिक तूफान से धरती के सोलर डिस्क के लगभग आधे हिस्से को काटते हुए एक बड़ा सा छेद बनेगा, जिसके कारण सूर्य के वातावरण से पृथ्वी की ओर बेहद गर्म हवा का एक तूफान आएगा। नेशनल ओशन ऐंड अटमॉस्फियर एसोसिएशन का कहना है कि यह सोलर स्टॉर्म जी-1 कैटेगिरी का है।

    यानी कि यह तूफान हल्का होगा, लेकिन इससे काफी ज्यादा नुकसान हो सकता है। एसोसिएशन फोरकास्ट का कहना है कि जी-1 श्रेणी का जियोमैग्नेटिक तूफान 48 घंटे में उस वक्त आ सकता है जब सौर हवाएं चलेंगी। चुंबीय तूफान को सौर तूफान कहते है जो सूर्य की सतह पर आए क्षणिक बदलाव से उत्पन्न होते हैं। इन्हें पांच श्रेणी जी-1, जी-2, जी-3, जी-4 और जी-5 में बांटा गया है।

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    ऐसा माना जाता है कि जी-5 श्रेणी का तूफान पृथ्वी को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। सोलर स्टॉर्म को लेकर स्काईमेट के साइंटिस्ट डॉ. महेश पलावत का कहना है कि जी-1 कैटिगरी में पावर ग्रिड पर सबसे अधिक असर होता है। माइग्रेटरी बर्ड्स पर भी इसका गंभीर असर पड़ सकता है। इस आंधी का व्यापक असर यूएस और यूके में ज्यादा पड़ने की आशंका है।

  • इस गांव के लोगो ने आज तक नहीं देखा मोबाइल

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    आज हमारी इस डिजिटल लाइफ में मोबाइल के बिना किसी भी व्यक्ति का मन नहीं लगता है. अगर किसी का मोबाइल कुछ मिनटों के लिए भी उससे दूर हो जाता है तो उस व्यक्ति का मन नहीं लगता है. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बता रहे है जहां सभी लोग मोबाइल फोन से दूर है. ये गांव है रोमानिया में।

    यहाँ के लोगो ने आज तक मोबाइल नहीं देखा. जहां पूरी दुनिया में सेल्फी लेना आम बात है यहाँ के लोग अब तक सेल्फी नाम से शब्द से अपरीचित है. लेकिन यहाँ के लोग गांव की परंपरा को जीवित रखने के लिए हमेशा संघर्ष करते रहते है.।

    ये लोग कंप्यूटर और मोबाइल से दूर अपनी अलग ही दुनिया में जीते है. लेकिन ऐसा नहीं है कि यहाँ कभी भी इंटरनेट या मोबाइल की सुविधा नहीं पहुंच पाई हो. यहाँ सभी सुविधा पहुंची है लेकिन इन लोगो ने इस सुविधा को नजरअंदाज किया और अपने पुराने रिवाजो पर ही टिके रहे।

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    इन लोगो का पहनावा भी बाकियो से अलग है. इस गांव के लोग अब भी सैकड़ो साल पुराने संस्कृति और रिवाजो को ही निभाते है. साथ ही इनके पास तस्वीरें लेने के लिए मोबाइल तो दूर कमरे जैसी भी कोई चीज नहीं है. वाकई में ऐसी जिंदगी का भी अलग ही मजा है।

  • फेसबुक पर लड़किओं की शादी के लिए लड़के भी मिलने लगे है…..

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    आज के युग में टेक्नोलॉजी इंसान के जीवन पर इतनी हावी हों चुकी है कि बगैर किसी टेक्नोलॉजी को यूज़ किए एक दिन भी नहीं गुज़ार सकते. घर की शॉपिंग से लेकर मनुष्य की सारी ज़रूरतें सिर्फ मोबाइल के एक क्लिक पर हाज़िर हो सकती हैं. इसी बढ़ती टेक्नोलॉजी के चलते एक और नया चमत्कार देखा गया है. वो यह कि जहां लोग फेसबुक के सहारे नए दोस्त बनाते थे और मिलते थे, वही अब फेसबुक की मदद से लड़कियां अपने लिए लड़के ढूढ़ने लगी हैं.

    हाल ही में ऐसा ही कुछ देखा गया, जहां केरल की रहने वाली एक लड़की अपने लिए फेसबुक पर लड़का ढूढ़ने लगी. केरल के मलप्पुरम में रहने वाली ज्योति केजी का #FacebookMatrimony वाला हैशटैग काफी वायरल हो रहा. शादी के लिए प्रस्ताव रखते हुए ज्योति ने फेसबुक लिखा, “मैं सिंगल हूँ. अगर मेरा कोई दोस्त किसी को जानता है, तो मुझे बताए. मेरी कोई डिमांड नहीं है. मेरे लिए कुंडली या फिर धर्म-जाति महत्वपूर्ण नहीं है. मेरे माता-पिता ज़िंदा नहीं है. मैंने फैशन डिजाइनिंग में बीएससी किया है.”

    ज्योति ने इस तरह की तमाम इन्फॉर्मेशन दी और पारिवारिक स्थिति का भी उल्लेख किया. उन्होंने इस पोस्ट को मलयालम में लिखा था. उन्होंने अपनी इस पोस्ट के साथ अपनी एक फोटो भी डाली थी, जो बिलकुल मॅट्रिमोनी के एड की तरह लग रही थी. 26 अप्रैल को ज्योति द्वारा किए गए इस पोस्ट को अभी तक करीब 6 हज़ार से ज्यादा लोग शेयर कर चुके हैं. वही बात करें ज्योति की तो, कमेंट सेक्शन में उन्हें कई प्रपोज़ल्स मिल चुके हैं.

  • अगर आप का Mobile हो गया है चोरी तो करें शिकायत 14422 नंबर पर , पुलिस ढूंढ कर देगी

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    मोबाइल चोरी होने पर अक्सर लोग मायूस हो जाते हैं और शिकायत दर्ज कराने के लिए उन्हें धक्के खाने पड़ते हैं, लेकिन सरकार ने एक हेल्पलाइन नंबर 14422 जारी किया है। इससे पूरे देश में लोगों को अब शिकायत दर्ज कराने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। इस नंबर पर डायल करने या संदेश भेजने पर शिकायत दर्ज हो जाएगी और पुलिस व सेवा प्रदाता कंपनी मोबाइल की खोज में जुट जाएगी। दूरसंचार मंत्रालय मई के अंत में महाराष्ट्र सर्किल में इसकी शुरुआत करेगा। देश के 21 अन्य दूरसंचार सर्कल में कई चरणों में इसे दिसंबर तक लागू किया जाएगा।

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    दूरसंचार विभाग द्वारा तैयार सीईआईआर में हर नागरिक का मोबाइल ब्योरा होगा
    दूरसंचार प्रौद्योगिकी केंद्र (सी-डॉट) ने चोरी या गुम मोबाइल का पता लगाने के लिए सेंट्रल इक्विपमेंट आईडेंटिटी रजिस्टर (सीईआईआर) तैयार कर लिया है। सीईआईआर में देश के हर नागरिक का मोबाइल मॉडल, सिम नंबर और आईएमईआई नंबर है। मोबाइल मॉडल पर निर्माता कंपनी द्वारा जारी आईएमईआई नंबर के मिलान का तंत्र सी-डॉट ने ही विकसित किया है।

    इस तंत्र को चरणबद्ध तरीके से राज्यों की पुलिस को सौंपा जाएगा। मोबाइल के खोने पर शिकायत दर्ज होते ही पुलिस और सेवा प्रदाता मोबाइल मॉडल और आईएमईआई का मिलान करेंगी। अगर आईएमईआई नंबर बदला जा चुका होगा, तो सेवा प्रदाता उसे बंद कर देंगी, हालांकि सेवा बंद होने पर भी पुलिस मोबाइल ट्रैक कर सकेगी।

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    सी-डॉट के मुताबिक शिकायत मिलने पर मोबाइल में कोई भी सिम लगाए जाने पर नेटवर्क नहीं आएगा, लेकिन उसकी ट्रैकिंग होती रहेगी। पिछले कुछ सालों से रोजाना हजारों मोबाइल की चोरी और लूट की घटनाओं को देखते हुए सी-डॉट को दूरसंचार मंत्रालय ने यह तंत्र विकसित करने को कहा था। मंत्रालय के एक सर्वे में सामने आया था कि देश में एक ही आईएमईआई नंबर पर 18 हजार हैंडसेट चल रहे हैं।

    आईएमईआई बदलने पर होगी जेल 

    आईएमईआई बदलने पर तीन साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। गत वर्ष दूरसंचार मंत्रालय ने मोबाइल चोरी, झपटमारी और गुम होने की बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर टेलीग्राफ एक्ट में संशोधन किया था। इसके तहत आईएमईआई से छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

  • पाक मूल की खूबसूरत महिला के शौक जानकर आप भी हो जायेंगे हैरान !

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    जहां एक तरफ दुनिया में कई लोगों के पास दो वक्त का खाना खाने के लिए पैसें नहीं होते और उन्हें भूखा सोना पड़ता हैं। तो वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों के पास इतना पैसा होता है कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि वह उस पैसें को खर्च कैसे करें जिसकी वजह से शायद वह बिना  तुक के पैसा खर्च कर देते है और उन्हें लगता है कि वह अपने शौक-मौज पूरे कर रहे।

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    आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे है जिनके बारे में जानकर आपको हैरानी तो होगी ही साथ ही आपको बहुत हंसी भी आ सकती है। पाकिस्तान मूल की ब्रिटिश अरबपति मोहम्मद जूहर की पत्नी कमालिया एक बहुत ही खूबसूरत महिला है और जो कि हमेशा खूबसूरत बने रहने के लिए तरह-तरह की चीजे का इस्तेमाल करती रहती है।

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    आपको जानकर हैरानी होगी कि कमालिया को शैंपेन से नहाने का शौक है। एक रिपोर्ट के मुताबिक कमालिया जिस शैम्पेन के बोतल से नहाती हैं। उस शैम्पेन की एक बोतल की कीमत लगभग 5000 रुपये हैं। वो एक दिन में नहाने के लिए लगभग 20-30 बोतलें का इस्तेमाल करती हैं। पूरे महीने में कमालिया के नहाने का खर्च करोड़ो में पहुंच जाता हैं।

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    इसके अलावा शानो शौकत दिखाने के लिए भी कमालिया अपने आसपास हर वक्त 20-22 नौकर रखती है। जिस वजह से उनके ऊपर एक्स्ट्रा 1 से 2 करोड़ रुपये और भी खर्च होता है।

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    कमालिया को पेरिस के मशहूर और सबसे बड़े होटल सूट इंपेरियल रिट्ज बहुत पसंद है जिसकी वजह से वह उस होटल में अक्सर जाकर रूकती है। आपको बता दें इस होटल में एक रात रुकने का ही खर्च करीब 20 लाख रुपए तक है।

  • बिना पेट वाली लड़की, जो दूसरों के लिए बनाती है खाना !

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    इनकी इंस्टाग्राम फीड देखेंगे तो खाने के अलावा और कुछ दिखाई ही नहीं देगा. खाना भी ऐसा कि देखते ही जी ललचा जाए. खाने की इतनी शौकीन लड़की खुद जो चाहे वो नहीं खा सकती. उनके एक-एक निवाले पर डॉक्टर की नजर रहती है. इन सबके बाद भी वो दिन-रात खाना बनाती हैं और बड़े प्यार से सबको खिलाती हैं.। वो कई नामी रेस्तरां के लिए बतौर कंसल्टेंट काम करती हैं और खाने की खुशबुओं के बीच अपनी जिंदगी गुजारती हैं. ये लड़की हैं नताशा दिद्दी जो पुणे में रहती हैं. नताशा खुद को द गटलेस फूडी कहती हैं. यानी खाने-पीने का शौकीन ऐसा शख्स जिसका पेट नहीं है.।

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    पेट निकाले जाने की कहानी
    बात साल 2010 की है जब नताशा ने अपने बाएं कंधे में एक चुभता हुआ सा दर्द महसूस किया. जैसे ही वो कुछ खातीं, दर्द और बढ़ जाता. चूंकि दर्द कंधे में था, वो आर्थोपेडिशियन (हड्डी के डॉक्टर) के पास गईं. एक्स-रे और दूसरे कई टेस्ट के बाद उनके कंधे की दो बार सर्जरी हुई और उन्हें छह महीने कड़ा वर्कआउट करने को कहा गया. बावजूद इसके, नताशा की हालत में रत्ती भर भी सुधार नहीं हुआ. वो दर्द से तड़पतीं और पेनकिलर खाती रहतीं. उनकी हालत सुधरने के बजाय और बिगड़ती चली गई. कभी 88 किलो की रहीं नताशा का वजन अब घटकर 38 किलो हो चुका था.।

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    न कोई दवा काम आ रही थी, न फिजियोथेरेपी और न अल्ट्रासाउंड और सोनोग्रैफी जैसे मेडिकल टेस्ट. तमाम मुश्किलों और हताशा के बाद आखघ्रिकार नताशा सही जगह और सही शख्स के पास पहुंचीं. वो जगह थी पुणे का केईएम हॉस्पिटल और वो शख्स थे डॉ. एसएस भालेराव। उन्होंने बताया,मैं अस्पताल के बिस्तर पर अपने घुटने मोड़कर बैठी थी. क्योंकि इस तरह बैठने से दर्द जरा कम महसूस होता था. उसी time मेरे कमरे में एक अनजान शख्स आया और मुझे देखने लगा. तभी मेरे पापा और उन्होंने बताया कि वो मेरे डॉक्टर हैं। नताशा आगे बताती हैं,Dr. भालेराव ने मुझे देखने के मिनट भर बाद बता दिया कि मेरे पेट में अल्सर है जिससे blood रिस रहा है और यही मेरे दर्द की वजह है।

    इसके बाद एक लैप्रोस्कोपी टेस्ट हुआ और अल्सर वाली बात साबित हो गई. लैप्रोस्कोपी वो टेस्ट है जिसमें फाइबर और ऑप्टिक की एक नली से पेट के अंदर हो रही हलचल को देखा जाता है।
    डॉ. भालेराव ने   बताया, नताशा के पेट में दो अल्सर थे और उनसे ब्लीडिंग शुरू हो चुकी थी. वो इतने पेनकिलर ले चुकी थी कि उसके पेट ने काम करना बंद कर दिया था. पेनकिलर्स हमारे शरीर को बहुत नुकघ्सान पहुंचाते हैं, खसकर इंटेस्टाइंस को। इसके जवाब में डॉ. भालेराव बताते हैं,  अल्सर नताशा के पेट के उस हिस्से में था जो डायफ्राम से लगा था. डायफ्राम और कंधे की एक नर्व जुड़ी होती है इसलिए पेट का ये दर्द कंधे तक पहुंचता था. मेडिकल साइंस की भाषा में इसे श्रेफर्ड पेनश् कहते हैं.।

    चूंकि पेनकिलर्स और अल्सर ने मिलकर नताशा के पेट को तबाह कर दिया था, इसलिए सर्जरी करके उसे निकाल देना ही एकमात्र विकल्प बचा था. इस ऑपरेशन को श्टोटल गैस्ट्रेक्टॉमीश् कहते हैं. नताशा ने बताया, ष्ये फैसला आनन-फानन में लिया गया था. मैं ऑपरेशन थियेटर में बेहोशी की हालत में थी जब डॉ. भालेराव ने लैप्रोस्कोपी के जरिए मेरे पेट की हालत देखी. उन्होंने मेरे मॉम-डैड और पति को ये बताया। नताशा के परिवार से कहा गया था कि ये काफी बड़ा ऑपरेशन है और इस दौरान उनकी मौत भी हो सकती है. परिवार के पास भी चांस लेने के अलावा कोई चारा नहीं था।

    आखिर नौ घंटे लंबे ऑपरेशन के बाद नताशा का पेट निकाल दिया गया. पेट निकाले जाने की बात सुनकर नताशा का क्या रिऐक्शन था? इसके जवाब में वो कहती हैं, ष्मुझे इस ऑपरेशन के तकरीबन एक हफ्ते बाद इसके बारे में बताया गया. मेरे घरवालों को समझ में नहीं आ रहा था कि वो मुझे ये कैसे बताएं. जिसकी जिंदगी ही खाने के इर्द-गिर्द घूमती हो उसे कोई ये कैसे बता सकता है कि उसका पेट ही नहीं रहा?

    लेकिन पता तो चलना ही था. पता भी चला. पता यूं चला कि नताशा हॉस्पिटल के बिस्तर में बैठी कुछ खाने जा रही थीं और तभी उनकी मां ने टोक दिया. उन्होंने कहा, रुक! तू ऐसे कुछ भी नहीं खा सकती. डॉक्टर को दिखाना होगा. अब तेरा पेट नहीं है। पेट नहीं है!!! नताशा ने तुरंत नीचे देखा और उन्हें समझ नहीं आया कि उनकी मां क्या कह रही हैं. दरअसल जो हम छू कर महसूस करते हैं, वो पेट का बाहरी हिस्सा होता है. नताशा के शरीर का वो हिस्सा निकाला गया है जहां खाना पचता है.।

    पेट निकाले जाने के बाद नताशा की जिंदगी एकदम से बदल गई. ऐसा नहीं है कि वो खाना नहीं खा सकतीं. वो खाना खाती जरूर हैं लेकिन आम लोगों की तरह नहीं. अब वो दिन में सात-आठ बार खाना खाती हैं. उनके लिए फुल ब्रेकफास्ट, लंच या डिनर जैसा कुछ नहीं है। उनका खाना डायबिटीज के किसी मरीज जैसा होता है और इसकी लगातार निगरानी होती है. खाने में अधिकतर पीने की चीजें होती हैंसाभार: बीबीसी हिन्दी