पडरौना,कुशीनगर : जिले के कुबेरस्थान क्षेत्र के सरयाडीह गांव के समीप सोमवार को बिजली का हाईटेंशन तार खेत में टूटकर गिर पड़ा था जिससे खेत में काम कर रहे दो किसान गंभीर रूप से झुलस गये। झुलसे किसानों को इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद डाक्टरों ने दोनों को मेडिकल कालेज रेफर कर दिया।
सोमवार की शाम को बिजली विभाग की लापरवाही का खामियाजा कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के दो किसानों को भुगतना पड़ा। सरयाडीह निवासी जय सिंह व समसुद्दीन अंसारी गन्ने के खेत में खेती कार्य कर रहे थे। अचानक खेत के उपर से गुजरा जर्जर हाईटेंशन तार टूटकर गिर गया। तार की चपेट में आने से दोनों किसान बुरी तरह झुलस गए व उनका पैर कटकर शरीर से अलग हो गया। हृदयविदारक इस घटना को देखकर चारो ओर चीख-पुकार मच गई। मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गयी।
घटना की जानकारी लोगों ने कुबेरस्थान व डायल 100 पुलिस को दी। पुलिस के देर से पहुंचने पर स्थानीय लोग काफी नाराज दिखे। आनन-फानन में लोगों ने दोनों किसानों को इलाज के लिए जिला अस्पताल पडरौना पहुंचाया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद डाक्टरों ने उनकी हालत नाजुक देख मेडिकल कालेज रेफर कर दिया। इस दौरान गोरखपुर मेडिकल कालेज मे चल रहे ईलाज के दौरान गंम्भीर रुप से झुलसे एक युवक की मौत हो गई |
पडरौना,कुशीनगर : पडरौना कोतवाली के परसौनी कला में मंगलवार को पुलिस के हस्तक्षेप से अनाथ आश्रम के उपर से गुजरा हुआ हाईटेंशन तार हट सका। पिछले चार दिनों से परसौनी कला समेत पांच गांवों में बिजली नहीं होने से ग्रामीण उग्र हो गए थे। पुलिस ने ग्रामीणों व अनाथ आश्रम संचालकों को समझाकर हाईटेंशन तार हटवाया।
अनाथ आश्रम में पिछले शनिवार की रात तार टूटकर गिरने से चार दुधारू गायों की मौत हो गई थी और बच्चे बाल-बाल बचे थे। पडरौना के परसौनी कला में शीरीन बसुमता नारी संस्थान के तत्वावधान में महिला बाल आश्रम अनाथालय संचालित होता है। अनाथ आश्रम के छत के उपर से हाई टेंशन तार गुजरा हुआ है। पिछले शनिवार की रात 11 बजे अनाथ आश्रम पर हाईटेंशन तार टूटकर गिर गया। इससे अनाथ आश्रम के छत पर चिनगारी की लपटें उठने लगीं।
चिनगारी की तड़तड़ाहट और आग से छत के नीचे कमरे में रखे कपड़े भी जल गये। इसकी आवाज सुनकर कमरे में सो रहे अनाथ आश्रम में पल रहे 30 बच्चे समेत 40 लोग कमरे से किसी तरह बाहर भाग कर अपनी जान बचाई। बिजली के करंट की चपेट में आने से अनाथ आश्रम की चार दुधारु गायें मर गयीं। नाराज ग्रामीणों ने अनाथ के बच्चों के साथ पडरौना-कठकुया मार्ग परसौनी कला में जामकर प्रदर्शन किया।
मौके पर पहुंचे एसडीएम अजय नारायण सिंह ने अनाथ आश्रम के छत से हाईटेंशन तार को हटाने का निर्देश दिया था। इससे परसौनी कला समेत हिरनही, सिधुआ, हरका, बेलीपट्टी, गुलेलहा व टिकुलही आदि गांवों का बिजली प्रभावित रही। मंगलवार को बिजली विभाग के कर्मचारी हाईटेंशन तार जोड़ने पहुंचे तो अनाथ आश्रम संचालक ने तार को छत से हटाकर जोड़ने की मांग की। उधर चार दिनों से बाधित बिजली से परेशान ग्रामीणों ने तार जोड़कर सप्लाई बहाल करने की मांग करने लगे। इसे लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो गया।
सूचना पाकर मौके पर पहुंचे कोतवाल विजयराज सिंह, एसओ चंद्रशेखर सिंह व राकेश समेत पुलिस कर्मियों ने ग्रामीणों व अनाथ आश्रम संचालिका को समझाकर हाईटेंशन तार से आश्रम के बगल से तीन नया पोल लगावाकर खींचवाया। इसे लेकर दिन भर गांव का माहौल गरम रहा।
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नहीं पहुंचा विद्युत विभाग का कोई जिम्मेदार
परसौनी कला क्षेत्र में चार दिनों से बिजली बाधित है। बिजली सप्लाई को लेकर हुए विवाद के बावजूद मौके पर बिजली विभाग का कोई जिम्मेदार नहीं पहुंचा। सिर्फ कर्मचारियों को तार खींचने के लिए भेज दिया गया था।
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चार दिनों से बाधित रही पांच गांवों की बिजली
आपूर्ति बहाल
पडरौना विद्युत उपकेंद्र के परसौनी कला में हाईटेंशन तार अनाथ आश्रम की छत पर टूटकर गिरने से परसौनी कला, हिरनही, सिधुआ, हरका, गुलेहा, टिकुलही आदि गांवों की बिजली बाधित रही।
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पुलिस ने निकाला बीच का रास्ता
परसौनी कला में ग्रामीणों और अनाथ आश्रम के बीच हुए विवाद की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे कोतवाल ने बीच का रास्ता अपनाया। कोतवाल ने अनाथ आश्रम की छत से लोहे का राड में कसा गये डिस्क व तार को हटवाकर पिछले हिस्से में चार मीटर पुराने लाइन को हटाकर तीन स्थानों पर पोल लगवाया। इससे अनाथ आश्रम समेत बगल के किसान का नुकसान न हो सके।
रात में प्रार्थना करने के बाद सोते हैं बच्चे
अनाथ अश्राम की संचालिका शीरीन बसुमता ने बताया कि अनाथ आश्रम के बच्चे प्रतिदिन प्रार्थना करने के बाद सोते हैं। आश्रम संचालिका के मुताबिक बच्चों को सोने से पूर्व भूकंप, बाढ़, छत से गुजरने वाले बिजली व सांप से बचाने के लिए प्रार्थना करते हैं। उन्होंने बताया कि हाईटेंशन तार से उस रात से उपर वाले की महिमा से गाय माता ने बच्चों को बचा लिया।
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ग्रामीण बिजली के लिए परेशान थे। अनाथ आश्रम द्वारा तार खींचने से मना करने पर विवाद बढने वाला था कि मौके पर पहुंचकर बीच का रास्ता निकाल तार खींचवाकर मामले को शांत किया गया है। इस मामले की जांच कर बिजली विभाग के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा।
बिजनौर। वेस्टर्न यूपी के नजीबाबाद और आसपास के रेलवे स्टेशनों पर बीते शुक्रवार देर रात हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि मुरशदपुर रेलवे स्टेशन में तैनात स्टेशन मास्टर शराब पीकर सो गया। स्टेशन मास्टर की ओर से रेलवे लाइन क्लियर का संकेत न मिलने से ट्रेनें जहां-तहां खड़ी हो गईं।
इस दौरान जम्मूतवी-हावड़ा मेन रेलवे लाइन का संचालन रुक गया। आलम यह रहा कि चार एक्सप्रेस और दो मालगाड़ियों के खड़े हो जाने की सूचना पर अधिकारियों ने पता करने के लिए टीम भेजी, तब स्टेशन मास्टर के शराब पीकर सो जाने का मामला सामने आया। इस घटना पर संज्ञान लेते हुए रेलवे ने स्टेशन मास्टर को निलंबित कर दिया है।
क्या पूरे स्टेशन पर एक ही जिम्मेदार व्यक्ती था? कुछ और भी तो कर्मचारी होंगे, क्या उन सभी को पता नहीं चला कि ट्रेंन आने वाली हैं? नजीबाबाद से लगभग दस किलोमीटर की दूरी पर मुरशदपुर रेलवे स्टेशन है। यहां पर शुक्रवार की रात स्टेशन मास्टर दीप सिंह की ड्यूटी लगाई गई थी। बताया जा रहा है कि देर रात दीप सिंह शराब पीकर स्टेशन में ही सो गया।
रात लगभग साढ़े दस बजे नजीबाबाद के स्टेशन मास्टर अविनाश गुप्ता ने मुरशदपुर स्टेशन मास्टर से संपर्क करने का प्रयास किया। यह संपर्क देहरादून से वाराणसी जा रही जनता एक्सप्रेस ट्रेन के क्लियरेंस के लिए किया जा रहा था। कई बार फोन करने के बाद भी स्टेशन मास्टर से संपर्क नहीं हो पाया।
दीप सिंह से संपर्क न हो पाने के कारण ट्रेन नजीबाबाद स्टेशन पर ही रोक ली गई। इधर नजीबाबाद के स्टेशन मास्टर ने मुरादाबाद कंट्रोल रूम में फोन करके मामले की जानकारी दी। किसी अनहोनी की आशंका से विभाग में हड़कंप मच गया।
अधिकारियों के निर्देश पर दूसरे स्टेशन मास्टर वीपी शुक्ला मुरशदपुर पहुंचे। यहां उन्होंने देखा कि दीप सिंह स्टेशन में बनी एक बेंच पर नशे में धुत होकर सो रहा है। बेंच के नीचे शराब की बोतलें रखी थीं। उन्होंने इसकी सूचना स्टेशन अधीक्षक आरके मीणा की दी। उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल रेलवे पुलिस मौके पर भेजी।
आरपीएफ के एएसआई महावीर सिंह नेगी फोर्स के साथ स्टेशन पहुंचे और दीप सिंह को उठाकर आरपीएफ थाने ले आए। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान इस रूट से गुजरने वाली ट्रेनों को जहां-तहां रोक दिया गया। स्टेशन मास्टर की लापरवाही से बुंदकी की ओर से मुरशदपुर आ रही मालगाड़ी को एक घंटा आउटर पर खड़ा रखना पड़ा। इलाहाबाद-हरिद्वार एक्सप्रेस ट्रेन लगभग एक घंटा फजलपुर रेलवे स्टेशन पर खड़ी रखी गई।
इधर मुरादाबाद के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दीप सिंह को तत्काल निलंबित कर दिया है। उसका मेडिकल कराया गया है। इतना ही नहीं स्टेशन मास्टर के खिलाफ विभागीय जांच भी गठित कर दी गई है।
नोएडा। दरअसल नोएडा के कथित ‘अपशकुनी’ इतिहास की कहानी यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के साथ हुई घटना से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि साल 1988 में नोएडा से लौटने के तुरंत बाद ही वीर बहादुर सिंह को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ गई थी. केंदीय नेतृत्व ने वीर बहादुर के नोएडा से लौटने के तुरंत बाद ही इस्तीफा मांग लिया था. इसके बाद 1989 में नारायण दत्त तिवारी और 1999 में कल्याण सिंह की भी नोएडा आने के बाद कुर्सी चली गयी . साल 1995 में मुलायम सिंह को भी नोएडा आने के कुछ दिन बाद ही अपनी सरकार गंवानी पड़ गई थी. नोएडा यात्रा से नेताओं की मुख्यमंत्री यात्रा पर विराम लगने से नोएडा पर ‘अपशकुनी’ होने का कलंक लगता चला गया।
लेकिन अब नोएडा यूपी सीएम योगी के लिए वरदान साबित हो रहा है। योगी आदित्यनाथ तकरीबन आधा दर्जन बार नोएडा आ चुके हैं और अरबों की योजनाओं का उद्घाटन-शुभारंभ कर चुके हैं, लेकिन न तो उनकी कुर्सी पर फर्क पड़ा और न कुछ बुरा हुआ, यह है योगी का कमाल। सोच से आधुनिक योगी आदित्यनाथ ने नोएडा आने के अंधविश्वास को पीछे छोड़ते हुए मायावती और मुलायम सिंह से बहुत आगे निकल गए हैं। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जो नोएडा के अंधविश्वास को अब भी सीने से लगाए हुए हैं, योगी के सामने ठहरते ही नहीं। योगी जहां आधुनिक सोच की बात करते हैं, वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव नोएडा को लेकर लकीर के फकीर बने हुए हैं और गाहे-बगाहे नोएडा के अंधविश्वास की बातें करते हैं।
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Cm Yogi
यह भी बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि नोएडा को लेकर पीएम और सीएम का इतनी दफा दौरा हुआ हो। पीएम ने स्टार्टअप योजना, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का भी नोएडा से ही शुभारंभ किया था, जबकि इससे पहले श्मनहूस नोएडा में सीएम-पीएम आने से डरते रहे हैं। लंबे समय तक नोएडा के बारे में माना जाता रहा है कि इस शहर में प्रदेश का तत्कालीन सीएम आ जाए तो उसकी कुर्सी चली जाती है। इसके ठीक उलट योगी ने इस अंधविश्वास पर चोट करते हुए नोएडा शहर के पांच दौरे कर सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। तकरीबन 6 महीने के दौरान योगी पांच बार नोएडा आए। वहीं, पीएम नरेंद्र मोदी ने भी चार साल में चार बार नोएडा आकर ऐसा काम कर दिया, जो प्रदेश के इतिहास पहले कभी नहीं हुआ।
यहां पर बता दें कि पिछले 30 साल से अधिक समय से खासतौर से बसपा और सपा के शासन के दौरान इस तरह का अंधविश्वास फैलाया जाता रहा है कि यूपी के मुख्यमंत्री का नोएडा आना अशुभ है। ऐसे में कोई सीएम नोएडा आने की हिम्मत नहीं जुटा पाया और यह महज इत्तेफाक है कि जो तत्कालीन सीएम आया उसकी कुर्सी चली गई। जानें कौन-कौन हुआ इस मिथक का शिकार…..
विश्वनाथ प्रताप सिंह
1982 में तत्कालीन यूपी के सीएम विश्वनाथ प्रताप सिंह नोएडा में वीवी गिरी श्रम संस्थान का उद्घाटन करने आए थे। उसके बाद वह मुख्यमंत्री पद से हट गए। हालांकि, यह अलग बात है कि वे बाद में देश के प्रधानमंत्री भी बने।
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वीर बहादुर सिंह
बात 1988 की है। इस साल यूपी के मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह फिल्म सिटी स्थित एक स्टूडियो में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने आए। वहां से उन्होंने कालिंदी कुंज पार्क का भी उद्घाटन किया था। कुछ माह बाद ही उन्हें झटका लगा। वह मुख्यमंत्री पद से हट गए।
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नारायण दत्त तिवारी
वीर बहादुर सिंह के बाद नारायण दत्त तिवारी यूपी के मुख्यमंत्री बने। वह भी नोएडा के सेक्टर 12 स्थित नेहरू पार्क का उद्घाटन करने वर्ष 1989 में आए थे। उसके कुछ समय बाद उनकी भी मुख्यमंत्री पद सकी कुर्सी जाती रही।
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मुलायम सिंह यादव
वर्ष 1994 में नोएडा के सेक्टर 40 स्थित खेतान पब्लिक स्कूल का उद्घाटन करने तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव आए थे। हैरानी की बात है कि मुलायम सिंह यादव ने मंच से कहा भी था कि मैं इस मिथक को तोड़ कर जाऊंगा कि जो मुख्यमंत्री नोएडा आता है उसकी कुर्सी चली जाती है। उसका कथन उल्टा साबित हुआ और उसके कुछ माह बाद ही वह मुख्यमंत्री पद से हट गए। इसका असर भी रहा और इसके बाद 6 सालों तक कोई नोएडा आया ही नहीं।
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मायावती
मुलायम के बाद नोएडा का मिथक तोड़ने का साहस मायावती ने जरूर दिखाया। यह अलग बात है कि वह मुख्यमंत्री रहने के दौरान चार बार नोएडा गईं और हर बार उन्हें कुर्सी गंवानी पड़ी। इसी कड़ी में 2011 में भी मायावती नोएडा आईं थी, लेकिन 2012 के चुनाव में उनकी सत्ता छिन गई।
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अखिलेश यादव
मुलायम सिंह और मायावती की तुलना में अखिलेश यादव ने साहस जुटाना तो दूर उन्होंने बतौर सीएम नोएडा की योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन लखनऊ से किया। हद तो तब हो गई जब राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नोएडा जाने पर उनकी अगवानी के लिए खुद न जाकर उन्होंने मंत्री भेजे।
मेरठ । उत्तर प्रदेश के सबसे कुख्यात गैंगस्टरों में से एक मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है। सोमवार को पेशी से पहले ही फिल्मी अंदाज में बागपत जेल में गोली मारकर मुन्ना बजरंगी की हत्या हो गई। पिछले चार दशक से उत्तर प्रदेश के अपराध जगत में मुन्ना बजरंगी का नाम चर्चा में था। यही नहीं पूर्वांचल के इस चर्चित डॉन ने सियासत में भी हाथ आजमाया लेकिन नाकामी हाथ लगी। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के निवासी मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है। 1967 में जिले के पूरेदयाल गांव में जन्मे मुन्ना बजरंगी ने पांचवीं के बाद पढ़ाई-लिखाई छोड़ दी। इस दौरान वह धीरे-धीरे जुर्म की दुनिया की ओर मुड़ता चला गया।
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कुख्यात माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी
17 साल में पहला केस दर्ज मुन्ना के अपराध की दलदल में फंसने की शुरुआत काफी छोटी उम्र में ही हो गई। 17 साल की उम्र में ही उसके खिलाफ जौनपुर के सुरेही थाने में पुलिस ने मारपीट और अवैध हथियार रखने के आरोप में पहला केस दर्ज किया।
1984 में पहली हत्या 80 के दशक में मुन्ना को जौनपुर के एक स्थानीय माफिया गजराज सिंह का संरक्षण मिल गया। 1984 में मुन्ना ने लूट के लिए एक कारोबारी को मौत के घाट उतार दिया। गजराज के इशारे पर जौनपुर में बीजेपी नेता रामचंद्र सिंह के मर्डर में भी मुन्ना की ही नाम सामने आया। इसके बाद तो हत्याओं का मानो सिलसिला चल पड़ा।
90 के दशक में मुख्तार गैंग में शामिल 90 के दशक में मुन्ना बजरंगी ने पूर्वांचल के बाहुबली माफिया और राजनेता मुख्तार अंसारी का दामन थामा। मुख्तार का गैंग मऊ से ऑपरेट हो रहा था लेकिन पूरे पूर्वांचल में जुर्म की दुनिया में मुख्तार की तूती बोल रही थी। मुख्तार ने इसी दौरान अपराध से सियासत का रुख किया। 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मुख्तार ने मऊ से विधानसभा का चुनाव जीता। इसके बाद मुन्ना का सरकारी ठेकों में दखल बढ़ता गया। इस दौरान वह लगातार मुख्तार अंसारी की सरपरस्ती में काम करता रहा।
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कुख्यात माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी
2005 में कृष्णानंद राय की हत्या में आरोपी पूर्वांचल में इसी दौरान बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की सनसनीखेज हत्या हुई। दरअसल 2004 में बृजेश सिंह गैंग से नजदीकी रखने वाले कृष्णानंद राय ने गाजीपुर में बीजेपी के टिकट से विधानसभा का चुनाव जीता। इससे मुख्तार के वर्चस्व को चुनौती मिलने लगी। कहा जाता है कि इसी के बाद 29 नवंबर 2005 को मुख्तार के इशारे पर मुन्ना बजरंगी और उसके साथियों ने कृष्णानंद राय को गोलियों से भून दिया। उत्तर प्रदेश पुलिस, एसटीएफ और सीबीआई इस मामले में मुन्ना बजरंगी का सुराग ढूंढ रही थी। उस पर सात लाख रुपये के इनाम का भी ऐलान हुआ। पुलिस से बचने के लिए वह लगातार ठिकाने बदल रहा था।
यूपी पुलिस और एसटीएफ के बढ़ते दबाव के बीच मुन्ना के लिए यूपी और बिहार में टिकने में मुश्किल हो रही थी। सुरक्षित ठिकाने की तलाश में मुन्ना मुंबई पहुंच गया। इस दौरान वह लंबे अरसे तक वहीं रहा। मुंबई मेें रहते हुए अंडरवर्ल्ड से भी उसने अपने संबंध मजबूत कर लिए। धीरे-धीरे वह मुंबई से ही अपने गैंग को ऑपरेट करने लगा।
सियासत में मिली नाकामी मुन्ना बजरंगी इस बीच एक महिला को गाजीपुर से बीजेपी का टिकट दिलवाना चाहता था। इस वजह से मुख्तार अंसारी के साथ उसके संबंध बुरे दौर में पहुंच गए। अब मुख्तार के लोग भी उसकी सहायता नहीं कर रहे थे। बीजेपी में बात नहीं बनने पर मुन्ना कथित रूप से कांग्रेस के एक कद्दावर नेता की शरण में चला गया। बताया जाता है कि कांग्रेस के यह नेता भी जौनपुर जिले से ही ताल्लुक रखते थे और मुंबई में रहते हुए सियासत में सक्रिय थे। बजरंगी और उसकी पत्नी ने क्रमशः 2012 और 2017 में जौनपुर की मड़ियाहूं सीट से निर्दलीय कैंडिडेट के तौर पर यूपी विधानसभा का चुनाव भी लड़ा था।
मुंबई के मलाड से हुई गिरफ्तारी मुन्ना बजरंगी के खिलाफ उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा केस दर्ज हैं। 29 अक्टूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना को मुंबई के मलाड से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद ऐसी भी चर्चाएं चलीं कि मुन्ना ने एनकाउंटर का डर होने के चलते खुद ही प्लानिंग के तहत अपनी गिरफ्तारी कराई थी। ।
दिल्ली पुलिस के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजबीर सिंह की हत्या के मामले में पुलिस को मुन्ना बजरंगी का हाथ होने का शक था। इसके बाद से उसे अलग-अलग जेल में रखा जाता रहा। मुन्ना बजरंगी ने एक बार दावा किया था कि अपने 20 साल के आपराधिक जीवन में उसने हत्या की 40 वारदातों को अंजाम दिया है। रविवार रात को ही मुन्ना को एक पेशी के सिलसिले में यूपी की झांसी जेल से बागपत जेल शिफ्ट किया गया था। यहां उसकी सनसनीखेज तरीके से हत्या कर दी गई।
लखनऊ । कृषि अनुभाग (6) समूह ख, ग और घ में स्वीकृत पद 26853- रिक्त पद 9313, खादी एवं ग्रामोद्योग अनुभाग (1) समूह ग और घ के स्वीकृत पद 1647-रिक्त पद 946। यह बानगी भर है। प्रदेश के करीब-करीब सभी सरकारी महकमे कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। इसके अलावा 2019-20 में बड़ी तादाद में कर्मचारी सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में सरकार के सामने शासकीय कार्यों और विकास कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में बड़ी चुनौती आने वाली है।
सरकारी महकमों में करीब 16 लाख पद स्वीकृत हैं। सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारियों के बाबत भर्तियां न होने से इस समय करीब 3.5 लाख पद रिक्त हैं। इस बीच, 90 के दशक में हुई बड़ी भर्तियों में काफी संख्या में सरकारी सेवा में आए अधिकारी-कर्मचारी अब रिटायर होने लगे हैं।
सूत्र बताते हैं कि 1984 से 1987 के बीच हुई बंपर भर्तियों में आए करीब दो से ढाई लाख कर्मचारी 2019-20 में रिटायर होंगे। यह स्थिति शासकीय कार्यों के लिहाज से बहुत ही चिंताजनक हैं। इसकी वजह है, कर्मचारियों की भारी कमी तो होगी ही, सरकार को अनुभवी कर्मचारियों की कमी से भी जूझना होगा।
इसीलिए सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने की सोच को बल
कर्मचारियों की भारी कमी और 2020 तक आने वाली दिक्कतों को देखते हुए ही सरकार के अंदर और बाहर बैठे कुछ लोग राज्यकर्मियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने की चर्चा कर रहे हैं। सरकार यदि यह कदम उठाती है तो यह संकट दो साल टाल सकता है। इस बीच, भर्तियों के लिए समय मिल जाएगा। इन दो साल में ही सरकार के पास सेवानिवृत्ति भुगतान का करीब 30 से 40 हजार करोड़ बचेगा, जिससे बड़े विकास कार्य किए जा सकेंगे।
सरकार ने बजा रखी है भर्ती की घंटी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद संभालने के साथ ही रिक्त पड़े पदों पर भर्तियां करने पर जोर दे रहे हैं। मुख्य सचिव ने भी भर्तियों का निर्देश दे रखा है। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का गठन कर दिया गया। आयोग ने अपना काम अब शुरू कर दिया है। कुछ पदों पर साक्षात्कार होने लगे हैं। इसके
बावजूद भर्तियां रफ्तार नहीं पकड़ पा रही हैं। सरकारी विभागों में कर्मचारियों की भारी कमी है। वेतन और सुविधाएं मिलने के बाद भी कर्मचारी काम के तनाव में हैं। इस तनावपूर्ण माहौल को समाप्त करने पर सरकार को तत्काल ध्यान देना चाहिए।
यादवेंद्र मिश्र, अध्यक्ष उप्र सचिवालय कर्मचारी संघ 2019-20 में ही करीब ढाई लाख कर्मचारी सेवानिवृत्त हो जाएंगे। पहले से ही करीब 3.5 लाख पद खाली हैं। सरकार इस पर ध्यान दे। मुख्य सचिव के सात बार के आदेश के बाद भी समूह ग में पदोन्नतियों का काम पूरा नहीं किया गया। हरिकिशोर तिवारी, अध्यक्ष उप्र राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद
पडरौना,कुशीनगर : जिले के तरयासुजान थाना क्षेत्र में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं से नाराज तमकुहीराज विधायक अजय कुमार लल्लू सहयोगियों के साथ सलेमगढ़ कस्बे में धरने पर बैठ गये।
सोमवार की रात किनवारी टोला निवासी सोनू राय की सलेमगढ़ में स्थित मोबाइल शाप से चोर लाखों का सामान चुरा ले गये। इसकी जानकारी पाकर मौके पर पहुंचे विधायक क्षेत्र में बढ़ रही चोरियों पर अंकुश लगाने में विफल रही पुलिस के खिलाफ तमाम आरोप लगाते हुए एसपी को मौके पर बुलाने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए।
विधायक के धरने पर बैठे होने की सूचना मिलते सीओ आरके तिवारी व एसओ तरयासुजान विनय पाठक मयफोर्स मौके पर पहुंच विधायक को मनाने में जुटे हुए हैं।
Lucknow. UP सरकार 50 साल से अधिक आयु वाले उन कर्मचारियों को रिटायरमेंट देने की योजना बना रही है, जो काम में लापरवाही बरत रहे हों। यदि ऐसे प्रस्ताव पर सरकार आगे बढ़ती है तो प्रदेश में कार्यरत 16 लाख एंप्लॉयीज में से 4 लाख इसकी जद में आ सकते हैं। सरकार की योजना उन कर्मचारियों को रिटायरमेंट देने की है, जो अपने काम में लापरवाही बरत रहे हों या फिर उनके काम का कोई सकारात्मक नतीजा न हो। एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक, इसके लिए 31 जुलाई तक सभी कर्मचारियों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट उनके विभागाध्यक्षों द्वारा सौंपी जाएगी।
अडिशनल चीफ सेक्रटरी मुकुल सिंह के एक आदेश में कहा गया है, अनिवार्य रिटायरमेंट के लिए सभी विभागाध्यक्ष 50 साल या उससे ऊपर की आयु के सभी कर्मचारियों की स्क्रीनिंग 31 जुलाई 2018 तक पूरी करें। 50 साल की उम्र की गणना 31 मार्च 2018 तक की जाएगी। इसका मतलब है कि 50 साल की उम्र पार कर चुके लोग स्क्रीनिंग में शामिल होंगे।
सरकार के आदेश से नाखुश हैं कर्मचारी यह भी कहा गया है कि नियमों के मुताबिक, कोई भी सरकारी कर्मचारी (स्थायी या अस्थायी) रिटायरमेंट ले सकता है। इस फैसले को लेकर राज्य सरकार के कर्मचारी नाखुश हैं। यूपी सचिवालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष यादवेंद्र मिश्रा ने कहा, ऐसे फैसले सिर्फ सरकारी कर्मचारियों को परेशान करने के मकसद से लिए गए हैं। यादवेंद्र मिश्रा ने यह भी कहा कि इन चीजों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसको लेकर सोमवार को मीटिंग की जाएगी और आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर राज्य सरकार इस फैसले पर बरकरार रहती है तो उनका संगठन कर्मचारियों के लिए हड़ताल करेगा।
फाइनैंस हैंडबुक के रूल 56 का जिक्र करते हुए आदेश में कहा गया है, श्नौकरी देने वाली संस्था कर्मचारी की उम्र 50 साल हो जाने के बाद कभी भी उन्हें नोटिस देकर रिटायर होने के लिए कह सकती है। यह नोटिस तीन महीने का होगा। इस आदेश में राज्य कर्मचारी विभाग के 26 अक्टूबर 1986 के आदेश की भी चर्चा की गई है, इस आदेश में स्क्रीनिंग कमिटी की सरंचना और अन्य बातों को बताया गया था।
वर्किंग कल्चर सुधारने के लिए योगी ने उठाया कदम एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य में वर्किंग कल्चर को सुधारने के सीएम योगी आदित्यनाथ ने पहले ही कहा है कि काम न करने वाले और भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी सरकार के ऊपर बोझ न बनें। इससे पहले पिछले साल ही योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इसी तरह 50 साल की उम्र पार कर चुके आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की भी स्क्रीनिंग की जा चुकी है।
पडरौना,कुशीनगर। पॉलीथिन बंद किए जाने के बाद स्वच्छता अभियान की अलख जगाने के लिए पडरौना में नगर पालिका परिषद की ओर से एक मिनी मैराथन दौड़ का आयोजन किया गया। नगर के सुभाष चौक से लेकर तिलक चौक तक हुए इस मिनी मैराथन के माध्यम से लोगों को स्वच्छता का संदेश देने का प्रयास किया गया। इस दौरान नगर पालिका अध्यक्ष विनय जायसवाल अपर जिलाधिकारी, एडिशनल एसपी ने हिस्सा लिया।
प्रतिभागी ग्रीन पडरौना, क्लीन पडरौना, स्वच्छ पडरौना और स्वस्थ पडरौना के नारे के साथ दौड़ लगाते हुए गए। एस दौड़ को देखने के लिए सड़क किनारे लोगों का जमावड़ा लगा रहा । इस अवसर पर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष विनय जायसवाल ने जानकारी देते हुए कहा कि शहर को कूड़ा मुक्त और साफ सुथरा रखने के लिए पहली बार पडरौना नगर पालिका ने ट्रिपल पी मॉडल को अपनाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपनो का भारत बनाने में नगर पालिका परिषद पडरौना अपनी भूमिका का निर्वहन करेगी।
पडरौना,कुशीनगर : खड्डा कस्बे मे स्थित एक सरकारी बैंक के एटीएम से कैश निकालने आये एक व्यक्ति का एटीएम कार्ड बदलकर कर साइबर अपराधियो ने उसके खाते से 75 हजार रुपये उडा लिए। इसकी जानकारी होने पर पीड़ित ने इस घटना की तहरीर थाने मे देकर साइबर अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
खड्डा क्षेत्र के ग्राम मदनपुर भेड़ियारी निवासी प्रदीप कुमार गुप्ता खड्डा कस्बे में स्थित भारतीय स्टेट बैंक में बचत खाता चलाता है। दो दिन पूर्व वह अपने भाई संतोष को एटीएम कार्ड देकर खाते से चार हजार रुपये निकालने के लिए एसबीआई बैंक भेजा। बैंक का एटीएम बंद देख संतोष सिनेमा परिसर मे स्थित सेंट्रल बैंक के एटीएम से कैश निकालने पहुंच गया। वहां पहले से मौजूद एक युवक ने एटीएम मशीन से रुपये निकालने मे उसका सहयोग करते हुए एटीएम से चार हजार रुपये निकालकर उसे दे दिया। लेकिन इसी दौरान उसका एटीएम कार्ड बदल उसे दूसरा एटीएम कार्ड थमा दिया। पढा-लिखा नहीं होने के चलते संतोष वह एटीएम कार्ड लेकर वापस घर चला गया और उसको कार्ड बदले जाने की भनक तक नहीं लगी।
लेकिन कार्ड बदलने वाले युवक ने प्रदीप गुप्ता के एटीएम कार्ड का इस्तेमाल कर उसके खाते से दो बार करके 36 हजार रुपये निकाल लिया। कुछ देर बाद खाते मे बचा शेष 39 हजार रुपये कुबेरस्थान क्षेत्र के ग्राम कनवर बकलोही निवासी एक व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर हो गया। प्रदीप गुप्ता के मोबाइल पर 75 हजार रुपये खाते से निकासी होने का मैसेज आते ही उसके होश उड़ गये। उसने बैंक पहुंचकर बैंक कर्मियो से उसके खाते से रुपये निकाले जाने की बात कही तो बैंकर्मी एटीएम कार्ड लॉक करते हुए पुलिस से शिकायत करने की सलाह दिए।