ट्रेन में बंद होकर न्याय की गुहार: बिजनौर का दिल दहला देने वाला मामला!
क्या आपने कभी सुना है कि किसी शख्स ने अपनी मांग पूरी कराने के लिए खुद को ट्रेन के डिब्बे में बंद कर लिया हो? बिजनौर में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहाँ एक शख्स ने जमीन कब्ज़े के खिलाफ़ न्याय पाने के लिए ये अजीबोगरीब कदम उठाया. यह मामला इतना दिलचस्प है कि आप इसे पढ़कर हैरान हो जाएँगे! इस घटना ने न सिर्फ़ बिजनौर बल्कि पूरे देश का ध्यान खींचा है. आइये जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम के बारे में.
खुद को डिब्बे में बंद कर किया हाईवोल्टेज ड्रामा
भारत भूषण नामक शख्स ने गजरौला से नजीबाबाद जाने वाली पैसेंजर ट्रेन में चांदपुर से सवार होकर दिव्यांग डिब्बे में जगह बनाई. उसने डिब्बे को अंदर से बंद कर लिया और पेट्रोल की बोतल भी अपने साथ रख ली. हल्दौर स्टेशन पर पहुँचते ही उसने एक पत्र खिड़की से बाहर फेंका जिसमें उसने लिखा था कि उसके ससुराल पक्ष की जमीन पर कब्ज़ा हो गया है और जब तक उसे न्याय नहीं मिलेगा, वह डिब्बे में ही रहेगा. उसने ये भी धमकी दी थी कि अगर जबरदस्ती की गई तो वो खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा लेगा. इस ड्रामा ने पूरे स्टेशन पर अफरा-तफरी मचा दी थी.
पेट्रोल से भरा हुआ डिब्बा
डिब्बे में बंद होने के दौरान उसने अपने ऊपर और डिब्बे में भी थोड़ा सा पेट्रोल डाल दिया था ताकि कोई जबरदस्ती अंदर ना घुस सके. यह जानलेवा कदम उस बेबसी की ओर इशारा करता है जिसका सामना वो कर रहा था. इस पूरी घटना के चलते ट्रेन तीन घंटे तक स्टेशन पर रुकी रही.
अधिकारियों का समझाने का प्रयास
घटना की जानकारी मिलते ही जीआरपी, एसडीएम अवनीश त्यागी, सीओ सिटी संग्राम सिंह और रेवेन्यू विभाग के अधिकारी मौके पर पहुँचे और भारत भूषण को समझाने की कोशिश की. लेकिन कई कोशिशों के बाद भी वो नहीं माना. कई घंटों तक चले इस ड्रामे ने सभी को हैरान कर दिया था.
परिजनों और अधिकारियों की गुहार पर बाहर निकला
करीब तीन घंटे बाद जब भारत भूषण के परिवार वाले और रिश्तेदार स्टेशन पहुँचे और उसे समझाया, तभी वो डिब्बे से बाहर निकला. उसे अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि मामले की जाँच कर न्याय दिलाया जाएगा. उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई, लेकिन उसके हरकत के लिए उसे ज़रूर चेतावनी मिली.
जमीन कब्ज़ा का मामला: एक लंबी लड़ाई
भारत भूषण का कहना है कि पिछले तीन-चार सालों से उसके ससुराल पक्ष की जमीन पर कुछ दबंगों ने कब्ज़ा कर रखा है और वो कई बार शिकायत कर चुका है लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी. अपनी आवाज़ उठाने और न्याय पाने के लिए उसने यह आखिरी हथकंडा अपनाया था. यह घटना हमें ऐसे मामलों पर ग़ौर करने पर मजबूर करती है जहाँ लोगों को न्याय पाने के लिए इतनी हद तक जाना पड़ता है.
न्याय के लिए लंबा इंतज़ार
यह मामला केवल एक व्यक्ति की जमीन की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह उस सिस्टम पर एक सवालिया निशान लगाता है जहाँ आम आदमी को न्याय पाने के लिए इतना संघर्ष करना पड़ता है. इस घटना ने सिस्टम में सुधार की जरूरत और प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद जगाई है.
टेक अवे पॉइंट्स
- भारत भूषण ने जमीन कब्ज़े के विरोध में खुद को ट्रेन में बंद कर लिया.
- तीन घंटे तक चला यह हाईवोल्टेज ड्रामा.
- अधिकारियों और परिजनों ने उसे समझाकर बाहर निकाला.
- ज़मीन कब्ज़े के मामले की जाँच की जाएगी.
- यह घटना न्यायिक व्यवस्था में सुधार की मांग करती है.









