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  • यूपी उपचुनाव: बुर्के और पहचान पत्र पर सियासी घमासान

    यूपी उपचुनाव: बुर्के और पहचान पत्र पर सियासी घमासान

    यूपी उपचुनाव: बुर्के और पहचान पत्र पर सियासी संग्राम

    यूपी की नौ विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनावों में एक अनोखा विवाद सामने आया है। बुर्के में मतदान करने वाली महिलाओं की पहचान और वोटिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने को लेकर सियासी दलों के बीच तीखा विवाद शुरू हो गया है। सपा ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी दल के दबाव में पुलिस प्रशासन मतदाताओं को वोटिंग से रोक रहा है, जबकि बीजेपी ने फर्जी पहचान पत्रों और बिना पहचान सुनिश्चित किए मतदान कराने पर आपत्ति जताई है। इस विवाद के केंद्र में कानपुर का सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र है।

    पुलिस अधिकारियों पर गिरी गाज

    चुनाव आयोग ने सपा की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करते हुए आधा दर्जन से ज़्यादा पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। एक वीडियो वायरल होने के बाद दो सब-इंस्पेक्टरों को निलंबित किया गया जिसमें पुलिसकर्मी वोटर आईडी कार्ड चेक कर मतदाताओं को वोट डालने से रोक रहे थे।

    मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना

    चुनाव आयोग ने यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, सभी जिला निर्वाचन अधिकारी और रिटर्निंग अफसरों को निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि किसी भी योग्य मतदाता को मतदान से नहीं रोका जाएगा और किसी भी प्रकार का पक्षपात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शिकायतों का तुरंत संज्ञान लेकर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    पुलिस की भूमिका सीमित

    चुनाव आयोग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी पुलिसकर्मी मतदान के लिए पहुंचे किसी भी व्यक्ति की आईडी चेक नहीं कर सकता। यह अधिकार केवल पोलिंग बूथ के भीतर मतदान कर्मियों की टीम के पास है। पोलिंग पार्टी और उम्मीदवारों के एजेंट मतदाताओं की तस्दीक कर सकते हैं। पुलिस का काम सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।

    आरोप-प्रत्यारोप का दौर

    बीजेपी उम्मीदवार सुरेश अवस्थी ने सीसामऊ में पोलिंग एजेंट के साथ अभद्रता और अपनी गाड़ी पर पथराव का आरोप लगाते हुए सपा पर निशाना साधा है। वहीं, सिविल लाइंस स्थित एक पोलिंग बूथ पर बीजेपी के कार्यकर्ताओं के द्वारा मतदाताओं को वोट डालने से रोकने का भी आरोप लगा है।

    अखिलेश यादव का आरोप

    सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पुलिस प्रशासन पर अपनी पार्टी के मतदाताओं को वोट डालने से रोकने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह सब बीजेपी की हार के डर से हो रहा है और चेतावनी दी कि गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    चुनाव आयोग पर भरोसा

    अखिलेश यादव ने कहा कि पुलिस मतदाताओं की आईडी चेक नहीं कर सकती और चुनाव आयोग को उम्मीद है कि वह बेईमान अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा।

    टेकअवे पॉइंट्स

    • यूपी उपचुनावों में बुर्के और पहचान पत्र पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
    • सपा ने पुलिस पर मतदाताओं को रोकने का आरोप लगाया है।
    • चुनाव आयोग ने कई पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया है।
    • बीजेपी ने भी फर्जी पहचान पत्रों का मुद्दा उठाया है।
    • चुनाव आयोग ने निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
  • समाजवादी पार्टी नेताओं की जेल मुलाक़ात: उत्तर प्रदेश में राजनैतिक भूचाल

    समाजवादी पार्टी नेताओं की जेल मुलाक़ात: उत्तर प्रदेश में राजनैतिक भूचाल

    समाजवादी पार्टी नेताओं की जेल में बंद आरोपियों से मुलाक़ात: एक बड़ा राजनैतिक भूचाल!

    क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश की सियासत में एक ऐसा तूफ़ान आया है जिसने सबको हिलाकर रख दिया है? समाजवादी पार्टी के नेताओं के जेल में बंद संभल हिंसा के आरोपियों से मिलने का मामला अब पूरे प्रदेश में आग की तरह फ़ैल रहा है। इस घटना ने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है और कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस लेख में हम आपको इस पूरे मामले की पूरी जानकारी देंगे और आपको बताएँगे कि कैसे यह मामला प्रदेश की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।

    जेल अधिकारियों पर गिरी गाज: निलंबन की कार्रवाई

    इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस मुलाक़ात को जेल के अंदरूनी षड्यंत्र का परिणाम बताया जा रहा है! इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है और मुरादाबाद जेल के अधिकारियों पर निलंबन की गाज गिरी है। पहले जेलर और डिप्टी जेलर को निलंबित किया गया और अब जेल अधीक्षक पीपी सिंह पर भी यही कार्रवाई की गई है। डीआईजी जेल की जांच में इनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई थी जिसके बाद ये कार्रवाई हुई। इस मामले ने प्रदेश की जेल प्रशासन में हड़कम्प मचा दिया है और कई सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार यह सब कैसे हुआ?

    क्या थे नियमों के उल्लंघन के आरोप?

    आरोप है कि जेल अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर समाजवादी पार्टी के नेताओं को जेल में बंद संभल हिंसा के आरोपियों से मिलने दिया। यह एक बहुत बड़ा मामला है जो प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है। यह घटना जेल के सुरक्षा तंत्र पर भी कई गंभीर सवाल खड़े करती है और यह स्पष्ट करती है कि जेल के अंदर कैसे भ्रष्टाचार पनप रहा है। इस मामले में और भी कई सवाल हैं जिनके जवाब ज़रूरी हैं।

    सपा नेताओं की मुलाक़ात: क्या है पूरा मामला?

    समाजवादी पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने संभल हिंसा के आरोपियों से जेल में मुलाक़ात की थी, जिसके मुख्य सदस्य पूर्व सांसद एसटी हसन और विधायक समरपाल सिंह, नवाब जान खां थे। प्रतिनिधिमंडल में कुल 15 लोग थे। यह मुलाक़ात संदेहास्पद तरीके से हुई है जो कई लोगों को संदेह में डालती है। क्या इस मुलाक़ात का कोई राजनैतिक मकसद था? क्या यह एक राजनैतिक चाल थी? ये ऐसे सवाल हैं जिन्हें इस मामले की गहन जांच के बाद ही समझा जा सकता है।

    क्या इस मुलाकात से सपा को फायदा होगा?

    इस सवाल का जवाब पाना थोड़ा मुश्किल है क्योंकि इसके अनेक पहलू हैं। यह देखना होगा की इस मामले पर आगे कैसे राजनैतिक रणनीति अपनाई जाएगी। क्या विपक्षी दल इस घटना का लाभ उठाने के लिए किसी नई राजनीतिक रणनीति तैयार कर रहा है? समय ही बताएगा की इसके राजनैतिक परिणाम क्या होंगे।

    संभल हिंसा: ढाई हजार से ज़्यादा लोगों पर मामला दर्ज

    संभल हिंसा की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। 24 नवंबर को स्थानीय कोर्ट के आदेश पर शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें 4 लोगों की जान चली गई थी और 2 दर्जन से ज़्यादा लोग घायल हो गए थे। इस हिंसा के लिए पुलिस ने ढाई हजार से ज़्यादा लोगों पर मामला दर्ज किया है, जिनमें से अधिकांश अभी भी अज्ञात हैं। यह एक बेहद गंभीर घटना है जिससे साफ़ है कि राज्य में कानून व्यवस्था कितनी कमज़ोर है।

    संभल हिंसा पर सियासत गरम

    इस घटना के बाद से सियासत गरम है। विपक्षी दल सरकार पर निशाना साध रहे हैं जबकि सरकार का कहना है कि वो आरोपियों पर सख्त से सख्त कार्यवाही करेगी। ऐसे में, संभल हिंसा पर राजनैतिक बयानबाजी जारी है और आने वाले समय में ये राजनैतिक मुद्दा बन सकता है।

    मुख्य बातें

    • मुरादाबाद जेल में समाजवादी पार्टी के नेताओं की जेल में बंद संभल हिंसा के आरोपियों से मुलाकात।
    • जेल अधिकारियों पर गिरी गाज: जेलर, डिप्टी जेलर, और जेल अधीक्षक को निलंबित किया गया।
    • संभल हिंसा में 4 लोगों की मौत, और ढाई हजार से ज़्यादा पर मामला दर्ज।
    • इस घटना ने प्रदेश की राजनीति में तूफ़ान ला दिया है और कई सवाल खड़े किये हैं।
  • कन्नौज में ऑटो में 16 सवार: एक खतरनाक घटना और सबक!

    कन्नौज में ऑटो में 16 सवार: एक खतरनाक घटना और सबक!

    कन्नौज में ऑटो में 16 लोगों के सवार होने की घटना ने सभी को हैरान कर दिया है! एक दिव्यांग ऑटो चालक ने अपनी गाड़ी में 15 यात्रियों को ठूंस-ठूंस कर बैठाया, जिससे एक बड़ा ही खतरनाक हादसा होने से बाल-बाल बचा। क्या आप जानते हैं इस घटना की पूरी कहानी? क्या इस घटना से सबक सीखने की ज़रूरत है? आइए, विस्तार से जानते हैं।

    ऑटो में 16 सवारियां: एक खतरनाक सच!

    कन्नौज के तिर्वा मार्ग पर एक ऑटो में 16 लोग सवार थे। जी हाँ, आपने सही सुना! एक दिव्यांग ऑटो चालक ने नियमों को ताक पर रखकर अपनी गाड़ी में 15 यात्रियों को अतिरिक्त रूप से बैठा लिया। ट्रैफ़िक इंस्पेक्टर आफाक खान की चौकसी ने इस ख़तरनाक स्थिति को रोका। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो एक बड़ा हादसा हो सकता था। सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि ऑटो में कितनी भीड़ थी, और हर कोई असुरक्षित था।

    नियमों की अवहेलना: क्यों ज़रूरी है सावधानी?

    यह घटना हमें यातायात नियमों की अवहेलना के खतरों की याद दिलाती है। ओवरलोडिंग न केवल यात्रियों की जान को ख़तरे में डालती है, बल्कि दुर्घटना की संभावना को भी बढ़ाती है। कभी-कभी एक छोटी सी लापरवाही भी बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। हरदोई की एक हालिया घटना में ऐसा ही कुछ हुआ था, जिसने सभी को झकझोर कर रख दिया।

    दिव्यांग चालक की मजबूरी या लापरवाही?

    ऑटो चालक के दिव्यांग होने का दावा सामने आया है। हालांकि, उसकी मजबूरी या लापरवाही की बात यह नहीं बदलती कि उसने यातायात नियमों का उल्लंघन किया। ऐसी खतरनाक स्थिति में यात्रा करना बेहद ही जोखिम भरा होता है। कई लोग बचपन से ही जानते हैं कि ऑटो या अन्य वाहन में निर्धारित संख्या से अधिक यात्री नहीं बैठने चाहिए।

    सुरक्षा पहले: जिम्मेदारी सभी की!

    यह ज़रूरी है कि हम सभी यातायात नियमों का पालन करें। न केवल ऑटो चालक, बल्कि यात्रियों को भी ज़िम्मेदारी का ध्यान रखना होगा। ज़रूरत से ज़्यादा सवारी ऑटो या किसी भी वाहन में भरने से बचें, और नियमों का सख्ती से पालन करें। याद रखें, आपकी सुरक्षा आपकी ही ज़िम्मेदारी है।

    पुलिस की सराहनीय कार्रवाई: जागरूकता का समय!

    ट्रैफ़िक पुलिस ने इस मामले में समय रहते कार्रवाई करके एक संभावित दुर्घटना को टाला। नवंबर माह में चल रहे यातायात सुरक्षा सप्ताह में पुलिस ओवरलोडिंग और अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन पर कड़ी नज़र रख रही है। यह एक ज़रूरी कदम है जिससे लोगों में जागरूकता बढ़ेगी।

    सुरक्षित यात्रा: सबका अधिकार!

    हम सभी का अधिकार है कि हमें सुरक्षित यात्रा मिले। यातायात नियमों का पालन करके, हम न केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं, बल्कि दूसरों की सुरक्षा में भी योगदान दे सकते हैं। यह हम सब की सामूहिक ज़िम्मेदारी है।

    Take Away Points

    • ओवरलोडिंग बेहद खतरनाक है और इससे बचना चाहिए।
    • यातायात नियमों का पालन करना ज़रूरी है।
    • सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने में सबका योगदान महत्वपूर्ण है।
    • पुलिस की कार्रवाई सराहनीय है और इससे लोगों को जागरूकता बढ़ेगी।
    • दिव्यांगों के प्रति संवेदनशील रहते हुए नियमों का पालन करना ज़रूरी है।
  • गाजियाबाद में फर्जी आईपीएस अधिकारी की धमकी: गिरफ्तारी और जेल

    गाजियाबाद में फर्जी आईपीएस अधिकारी की धमकी: गिरफ्तारी और जेल

    गाजियाबाद में फर्जी आईपीएस अधिकारी की धमकी: गिरफ्तारी और जेल

    क्या आप जानते हैं कि कैसे एक फर्जी आईपीएस अधिकारी ने गाजियाबाद में पुलिस अधिकारियों को धमकी देकर उन्हें अपनी मुट्ठी में झुकाने की कोशिश की? यह सनसनीखेज मामला आपको चौंका देगा! इस आर्टिकल में हम आपको इस पूरे मामले की पूरी जानकारी देंगे, जिसमें एक फर्जी रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी और उसके साथी ने मिलकर पुलिस को धमकी दी और कानून को अपने हाथों में लेने की कोशिश की।

    धमकी का तरीका

    यह मामला तब सामने आया जब अनिल कटियाल नाम के एक शख्स ने खुद को मणिपुर कैडर के 1979 बैच का रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी बताया और डीसीपी ट्रांस हिंडन के पीआरओ नीरज राठौड़ को फोन पर धमकी दी। उसने कहा कि अगर उसके दोस्त विनोद कपूर के खिलाफ दर्ज केस वापस नहीं लिया गया तो वह इंदिरापुरम पुलिस के खिलाफ फिरौती के लिए अपहरण का केस दर्ज कराएगा। इस धमकी ने पूरे पुलिस विभाग में हड़कंप मचा दिया।

    फर्जी आईपीएस अधिकारी की गिरफ्तारी और जेल यात्रा

    पुलिस ने तुरंत इस मामले में कार्रवाई की और अनिल कटियाल और उसके साथी विनोद कपूर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की जांच में पता चला कि कटियाल और कपूर ने वित्तीय लाभ कमाने और अनुचित लाभ पाने के लिए अपनी असली पहचान छिपाई हुई थी। दोनों आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जसवीर सिंह यादव के समक्ष पेश किया गया और जेल भेज दिया गया। ये घटना दर्शाती है कि कोई भी, चाहे वो कितना ही ताकतवर क्यों न हो, कानून के आगे नहीं बच सकता।

    गिरफ्तारी के बाद का घटनाक्रम

    कटियाल की गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ और पुलिस ने उसके खिलाफ कई धाराओं में केस दर्ज किया, जिसमें धोखाधड़ी और सरकारी काम में बाधा डालना भी शामिल हैं। यह घटना एक चेतावनी है कि खुद को महान समझने वाले अपराधी भी अंततः कानून की गिरफ्त में आते हैं। समाज में न्याय व्यवस्था का कितना महत्त्व है, यह मामला एक बड़ा उदाहरण प्रस्तुत करता है।

    इंदिरापुरम पुलिस पर कार्रवाई की धमकी

    कटियाल ने केवल पीआरओ को ही नहीं, बल्कि इंदिरापुरम पुलिस पर भी कार्रवाई करने की धमकी दी थी। उसने कहा था कि वो बीएनएस की धारा 140 (1) (हत्या या फिरौती के लिए अपहरण) के तहत इंदिरापुरम पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएगा। इस धमकी से यह स्पष्ट हो जाता है कि कटियाल का उद्देश्य केवल अपने दोस्त को बचाना नहीं था, बल्कि पुलिस को डराना और उन पर दबाव बनाना भी था। यह साफ़ करता है कि अपराधियों की इस तरह की हरकतों के साथ कैसे सख्ती से निपटा जाना चाहिए।

    सब-इंस्पेक्टर को भी दी धमकी

    यह धमकी सिर्फ पीआरओ तक ही सीमित नहीं रही, कपूर ने इंदिरापुरम पुलिस थाने में जांच अधिकारी, सब-इंस्पेक्टर प्रमोद हुडा को भी इसी तरह की धमकी दी थी। इससे सामने आया कि यह केवल एक अकेला मामला नहीं था, बल्कि एक संगठित प्रयास था जिसमें कई लोगों ने मिलकर पुलिस को डराने और प्रभावित करने की कोशिश की थी। यह पूरी घटना एक खतरनाक उदाहरण है कि कैसे अपराधी कानून को चुनौती देने की कोशिश करते हैं।

    कटियाल और कपूर के खिलाफ दर्ज धाराएँ

    पुलिस ने कटियाल और कपूर के खिलाफ आईपीसी की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिनमें धारा 308 (जबरन वसूली), 221 (सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में लोक सेवक को बाधा पहुंचाना), 204 (लोक सेवक का अपमान करना) और 318 (धोखाधड़ी) शामिल हैं। यह सख्त कार्रवाई दर्शाती है कि सरकार अपराधियों के प्रति कितनी कठोर है और ऐसे कृत्यों को कितनी गंभीरता से लिया जाता है। यह एक बड़ा संदेश है कि कानून का उल्लंघन करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।

    न्याय प्रणाली का विजय

    यह मामला न्याय प्रणाली की जीत और कानून के शासन की पुष्टि करता है। यह एक सुझाव देता है कि कितनी भी शक्तिशाली व्यक्ति अपनी कार्रवाई से बच नहीं सकते, अगर वे कानून को तोड़ते हैं। ऐसे ही मामलों पर त्वरित और सख्त कार्यवाही से न्याय प्रणाली को मजबूती मिलती है।

    Take Away Points

    • फर्जी आईपीएस अधिकारी अनिल कटियाल और उसके साथी विनोद कपूर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
    • उन्होंने गाजियाबाद में पुलिस अधिकारियों को धमकी दी और फिरौती के लिए अपहरण का केस दर्ज कराने की धमकी दी।
    • दोनों पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
    • यह मामला साबित करता है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।
  • दिल्ली-देहरादून शताब्दी एक्सप्रेस पर पथराव: यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल

    दिल्ली-देहरादून शताब्दी एक्सप्रेस पर पथराव: यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल

    दिल्ली-देहरादून शताब्दी एक्सप्रेस पर पथराव: एक चौंकाने वाला वाक्या!

    क्या आप कल्पना कर सकते हैं? भारत की प्रतिष्ठित शताब्दी एक्सप्रेस पर पथराव! जी हाँ, यह सच है। हाल ही में, नई दिल्ली से देहरादून जा रही शताब्दी एक्सप्रेस पर अज्ञात बदमाशों ने पथराव किया, जिससे ट्रेन के एक डिब्बे की खिड़की का शीशा क्षतिग्रस्त हो गया। इस घटना ने यात्रियों में भय और आक्रोश पैदा कर दिया है, और रेलवे अधिकारी मामले की जांच में जुटे हुए हैं। आइए, इस घटना के बारे में विस्तार से जानते हैं।

    घटना का विवरण

    17 नवंबर को, जब नई दिल्ली-देहरादून शताब्दी एक्सप्रेस सहारनपुर से रवाना होकर अस्पताल पुल और खानआमपुरा यार्ड के बीच से गुज़र रही थी, तभी कुछ बदमाशों ने ट्रेन पर पथराव कर दिया। इस पथराव से ट्रेन के कोच C2 में सीट नंबर 18 और 19 की खिड़की के शीशे चकनाचूर हो गए। हालांकि, इस घटना में किसी यात्री को कोई गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन यह घटना बेहद खतरनाक थी और रेल यात्रा की सुरक्षा पर सवाल उठाती है।

    जांच और कार्रवाई

    घटना की सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस (जीआरपी) और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक आरोपी भाग चुके थे। पुलिस ने घटना के संबंध में एक FIR दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है। सहारनपुर के एएसपी (शहर) अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि शताब्दी एक्सप्रेस आमतौर पर सुबह 10 बजे के आसपास सहारनपुर पहुँचती है और इंजन बदलने के लिए लगभग 30 मिनट तक रुकती है। इसके बाद यह ट्रेन देहरादून के लिए रवाना होती है। 17 नवंबर की घटना, ट्रेन के स्टेशन से रवाना होने के कुछ देर बाद ही हुई थी। खानआलमपुरा स्थित आरपीएफ चौकी प्रभारी सत्य प्रकाश ने बुधवार शाम इस संबंध में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई।

    रेल यात्रा की सुरक्षा पर चिंता

    यह घटना रेल यात्रा की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाती है। यह एक ऐसा मामला है जहाँ यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। ऐसे बदमाशी भरे कामों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की ज़रूरत है। ऐसे अपराधियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करके सजा दिलाना बहुत ज़रूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हो सकें।

    आगे का रास्ता क्या?

    इस घटना से रेलवे अधिकारियों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। यह आवश्यक है कि ट्रेनों की सुरक्षा के लिए और भी कड़े उपाय किए जाएँ। अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, और सुरक्षा कैमरों की संख्या में वृद्धि, रेलवे की यात्रा को और अधिक सुरक्षित बनाने में मददगार हो सकती है।

    टेक अवे पॉइंट्स

    • दिल्ली-देहरादून शताब्दी एक्सप्रेस पर पथराव की घटना हुई।
    • इस घटना में कोई यात्री घायल नहीं हुआ।
    • पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
    • रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।
  • बुलंदशहर सड़क हादसा: तीन महिलाओं की मौत, चार घायल

    बुलंदशहर सड़क हादसा: तीन महिलाओं की मौत, चार घायल

    बुलंदशहर का दर्दनाक सड़क हादसा: तीन महिलाओं की मौत, चार घायल

    एक दिल दहला देने वाली घटना में, उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक भीषण सड़क हादसे में तीन महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई और चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा तब हुआ जब ये सभी लोग एक धार्मिक समारोह में शामिल होने के बाद ऑटो रिक्शा से घर लौट रहे थे। इस घटना ने पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी है, और पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    हादसे का विवरण

    गुरुवार को हुए इस भीषण हादसे में कुड़वाल बनारस गांव की रहने वाली 55 वर्षीय राजेंद्र, 50 वर्षीय गंगावती और 50 वर्षीय राधा की मौके पर ही मौत हो गई। चार अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हुए और उन्हें तुरंत पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। पुलिस ने बताया कि एक तेज रफ्तार ट्रक ने ऑटो रिक्शा को जोरदार टक्कर मारी जिससे यह भीषण हादसा हुआ।

    पुलिस की कार्रवाई और जाँच

    स्थानीय पुलिस ने घटनास्थल पर तुरंत पहुंचकर ट्रक चालक को हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है ताकि हादसे के सही कारणों का पता लगाया जा सके और यह पता चल सके कि क्या ट्रक चालक की लापरवाही इस घटना के लिए ज़िम्मेदार थी या अन्य कोई कारक। प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को दर्ज किया जा रहा है और सबूत जुटाए जा रहे हैं।

    पीड़ित परिवारों की मांग और जन आक्रोश

    इस हादसे से पीड़ित परिवारों में गहरा शोक छाया हुआ है। उन्होंने प्रशासन से हादसे के लिए जिम्मेदार ट्रक चालक के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही, स्थानीय लोगों ने इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सड़क सुरक्षा के मजबूत उपायों की मांग की है और अधिक सख्त नियमों को लागू करने का आह्वान किया है। इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा के महत्व और लापरवाह ड्राइविंग के खतरों को उजागर किया है।

    आगे का रास्ता और रोकथाम

    इस दर्दनाक घटना ने हमें सड़क सुरक्षा के महत्व पर पुनर्विचार करने का मौका दिया है। हमें सड़कों पर तेज रफ्तार गाड़ियों और लापरवाही से ड्राइविंग करने वालों को रोकने के लिए कठोर उपाय करने होंगे। सरकार और नागरिकों दोनों की ज़िम्मेदारी है कि वे सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करें और जीवन की रक्षा के लिए सुरक्षित ड्राइविंग को बढ़ावा दें। बेहतर सड़क ढांचा, जागरूकता अभियान, और सख्त कानूनों से इस तरह के हादसों को कम करने में मदद मिल सकती है।

    टेक अवे पॉइंट्स

    • बुलंदशहर में हुए सड़क हादसे में तीन महिलाओं की मौत हो गई।
    • चार अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
    • पुलिस ने ट्रक चालक को हिरासत में ले लिया है और जाँच जारी है।
    • पीड़ित परिवारों और स्थानीय लोगों ने सख्त कार्रवाई और सड़क सुरक्षा उपायों की मांग की है।
    • इस घटना ने सड़क सुरक्षा के महत्व को फिर से उजागर किया है।
  • कानपुर में बेटी की गुमशुदगी: बुज़ुर्ग दंपति का आत्मदाह प्रयास, पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल

    कानपुर में बेटी की गुमशुदगी: बुज़ुर्ग दंपति का आत्मदाह प्रयास, पुलिस की निष्क्रियता पर उठे सवाल

    क्या आप जानते हैं कि एक बुज़ुर्ग दंपति ने अपनी गुमशुदा बेटी को ढूंढने में पुलिस की नाकामी से इतना निराश होकर आत्मदाह करने की कोशिश की? यह दिल दहला देने वाली घटना कानपुर के बिल्हौर इलाके से सामने आई है, जहाँ 22 साल की आकांक्षा दुबे की गुमशुदगी के मामले में पुलिस की कथित लापरवाही से उनके माता-पिता इतने हताश हो गए कि उन्होंने आत्महत्या का रास्ता चुना। लेकिन क्या यह घटना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल नहीं उठाती है? आइए जानते हैं इस पूरी घटना के बारे में विस्तार से।

    आकांक्षा दुबे का गुमशुदगी का मामला

    31 अगस्त को, आकांक्षा दुबे, शिवराजपुर के खरेश्वर मंदिर में जलाभिषेक करने के बाद लापता हो गई थीं। उनके माता-पिता राकेश दुबे और उनकी पत्नी ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन 105 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस आकांक्षा को नहीं ढूँढ पाई। दंपति ने बार-बार पुलिस और मुख्यमंत्री कार्यालय से गुहार लगाई, लेकिन उन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। यह निराशा ही थी जिसके चलते उन्होंने आत्महत्या का रास्ता चुना।

    आत्मदाह का प्रयास और पुलिस की कार्रवाई

    शुक्रवार को, हताश होकर राकेश दुबे और उनकी पत्नी कानपुर के सीपी कार्यालय के बाहर पहुँचे और खुद को पेट्रोल डालकर आत्मदाह करने का प्रयास किया। लेकिन, वहाँ मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें बचा लिया। इस घटना के बाद पुलिस आयुक्तालय ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और सहायक पुलिस आयुक्त (बिल्हौर) को मामले की जांच सौंपी गई है। पुलिस ने जांच अधिकारी और स्टेशन हाउस ऑफिसर की भूमिका की भी समीक्षा करने का आदेश दिया है।

    पुलिस की निष्क्रियता: क्या है असली सच्चाई?

    यह घटना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या पुलिस ने आकांक्षा के गुमशुदगी के मामले में सही से जांच की? क्या पुलिस ने पर्याप्त प्रयास किए? क्या पुलिस की इस निष्क्रियता के पीछे कोई साज़िश तो नहीं है? दंपति के आत्मदाह के प्रयास के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज करने का वादा किया है, लेकिन क्या यह वादा काफी है? क्या पुलिस को अपनी कार्यशैली पर गंभीरता से विचार करना चाहिए?

    आगे की कार्रवाई और न्याय की उम्मीद

    पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और जांच शुरू कर दी है। तीन पुलिस थानों के प्रमुखों और जांच अधिकारी को इस मामले में ठोस कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन, सिर्फ़ जांच से काम नहीं चलेगा, न्याय की तलाश में जुटे दंपति को न्याय दिलवाना ज़रूरी है और साथ ही पुलिस को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। आकांक्षा को ढूंढने के लिए और भी कठोर कदम उठाए जाने चाहिए।

    Take Away Points

    • कानपुर में एक बुज़ुर्ग दंपति ने बेटी की गुमशुदगी में पुलिस की निष्क्रियता के कारण आत्मदाह का प्रयास किया।
    • आकांक्षा दुबे 31 अगस्त से लापता है, और पुलिस ने 105 दिनों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
    • पुलिस आयुक्त ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और जांच अधिकारी और SHO की भूमिका की समीक्षा करने को कहा गया है।
    • इस घटना से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठते हैं, और पुलिस को अपनी भूमिका पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।
    • न्याय की उम्मीद में, आकांक्षा को ढूँढने के लिए अधिक सक्रिय प्रयास किए जाने चाहिए।
  • मथुरा आश्रय गृह मौत: पांच महीने की बच्ची की मौत से हड़कंप

    मथुरा आश्रय गृह मौत: पांच महीने की बच्ची की मौत से हड़कंप

    पांच महीने की बच्ची की मौत: सरकारी आश्रय गृह में हुई दर्दनाक मौत, मथुरा प्रशासन जाँच में जुटा

    क्या आप जानते हैं कि मथुरा के एक सरकारी आश्रय गृह में रहने वाली मात्र पांच महीने की एक मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत हो गई? इस घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। बच्ची की मौत से जुड़े कई सवाल उठ रहे हैं और प्रशासन मामले की जाँच में जुटा हुआ है। इस घटना ने एक बार फिर से सरकारी आश्रय गृहों की व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। आइये, जानते हैं इस पूरी घटना के बारे में विस्तार से।

    घटनाक्रम:

    यह घटना मथुरा जिले के एक सरकारी आश्रय गृह में हुई। पांच महीने की बच्ची पिछले कुछ महीनों से इसी आश्रय गृह में रह रही थी। मंगलवार की रात को बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसे तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उसे आगरा रेफर कर दिया। परन्तु, आगरा पहुंचने से पहले ही रास्ते में बच्ची की मौत हो गई। बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

    प्रशासन की कार्रवाई:

    इस घटना के बाद मथुरा के जिला मजिस्ट्रेट पुलकित खरे ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने कहा है कि घटना की मजिस्ट्रेट जांच कराई जाएगी, ताकि मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके। अधिकारियों को अपेक्षा की जा रही है कि वो पूछताछ के निष्कर्षों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी आश्रय गृहों में बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    सरकारी आश्रय गृहों की सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर चिंता:

    इस घटना से एक बार फिर यह सवाल उठता है कि क्या सरकारी आश्रय गृह बच्चों के लिए सुरक्षित हैं? क्या इन गृहों में बच्चों को उचित स्वास्थ्य सेवाएँ मिल पाती हैं? क्या इन गृहों में बच्चों की देखभाल के लिए पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन मौजूद हैं? ऐसी घटनाएँ यह बताती हैं कि अभी भी इन क्षेत्रों में सुधार की काफी गुंजाइश है। सरकार को इन आश्रय गृहों की निगरानी और व्यवस्थाओं में सुधार करने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएँ न हों।

    बच्चों की देखभाल के लिए सुझाव:

    • सभी सरकारी आश्रय गृहों में नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करें।
    • बच्चों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती करें।
    • बच्चों के लिए पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराएँ।
    • आश्रय गृहों की नियमित निगरानी करें।

    मौत का कारण अब भी रहस्य:

    फिलहाल, बच्ची की मौत का सही कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। प्राथमिक जाँच में डॉक्टरों ने बच्ची के फेफड़ों में संक्रमण की आशंका जताई है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आ पाएगा। जांच जारी है, और इससे सच्चाई सामने आएगी और उचित कदम उठाए जा सकेंगे।

    आगे क्या?

    इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, सरकार और प्रशासन को इस पर त्वरित कार्रवाई करने की आवश्यकता है। आश्रय गृहों में सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के मानकों में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समुचित प्रबंधन करना बहुत ज़रूरी है। समाज में इस तरह की दुखद घटनाएं लोगों के मन में सरकारी व्यवस्थाओं के प्रति सवाल खड़ा करती हैं, जिन पर तुरंत ध्यान दिया जाना आवश्यक है।

    टेक अवे पॉइंट्स:

    • मथुरा में एक पांच महीने की बच्ची की सरकारी आश्रय गृह में मौत हो गई।
    • प्रशासन ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं।
    • बच्ची की मौत का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
    • इस घटना ने सरकारी आश्रय गृहों में सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
    • सरकार को आश्रय गृहों की निगरानी और व्यवस्था में सुधार करने की जरूरत है।
  • सात साल के मासूम की हत्या: पड़ोसी ने की निर्मम हत्या

    सात साल के मासूम की हत्या: पड़ोसी ने की निर्मम हत्या

    सात साल के मासूम की हत्या: पड़ोसी ने की निर्मम हत्या, जानिए क्या है पूरा मामला

    उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है जहाँ एक 7 साल के मासूम की उसके ही पड़ोसी ने निर्मम हत्या कर दी। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। आरोपी ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसने बच्चे को इसलिए मारा क्योंकि उसके पड़ोसी उसका और उसकी पत्नी का बच्चा न होने के लिए चिढ़ाते थे।

    क्रूरता की पराकाष्ठा: 7 साल के मासूम की गला दबाकर हत्या

    यह दिल दहला देने वाली घटना मंगलवार को हुई जब आरोपी, दीपू नाम का व्यक्ति, 7 साल के मासूम अरुण को अपने साथ खेत में ले गया और उसका गला दबाकर हत्या कर दी। आरोपी की पत्नी से शादी के 3 साल बाद भी संतान नहीं हुई, जिसके कारण पड़ोसी उसे और उसकी पत्नी को चिढ़ाते थे। आरोपी ने बताया कि कई झाड़-फूंक करने वालों ने पड़ोसियों पर ही टोटका करने का आरोप लगाया था। यह सुनकर आरोपी ने गुस्से में आकर इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया।

    क्या थे हत्या के पीछे के कारण?

    पुलिस द्वारा की जा रही पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसके पड़ोसी मेलेराम और उनकी पत्नी पूनम उसे और उसकी पत्नी को निरंतर चिढ़ाते थे, क्योंकि उनके कोई संतान नहीं थी। मृतक मासूम अरुण मेलेराम और पूनम का बेटा था, यह एक और दुर्भाग्यपूर्ण पहलू है। इसके अलावा आरोपी ने यह भी स्वीकार किया कि झाड़-फूंक करने वालों ने बताया था कि उसके पड़ोसियों ने टोटका किया है। उसने आरोप लगाया कि उसके पड़ोसियों ने ही बच्चा न होने की वजह से उसका और उसकी पत्नी का मजाक उड़ाते थे।

    पुलिस की तत्परता: आरोपी की गिरफ्तारी

    श्रावस्ती पुलिस और एसओजी टीम ने घटना के बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी दीपू को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटाए और पूरे मामले की गहन जाँच की। घटना के बाद से ही पुलिस लगातार इस मामले की जांच में जुटी थी। दीपू ने घटना के बाद भागने की कोशिश की थी लेकिन पुलिस की सूझबूझ से उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया गया।

    पुलिस की जाँच में क्या हुआ?

    सीओ भिनगा ने बताया कि दस दिसंबर को हरदत्त नगर गिरन्ट थाना क्षेत्र में सात वर्षीय बालक की हत्या हुई थी। पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया था। गहन जाँच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। पुलिस की सराहनीय कार्यवाही ने पूरे क्षेत्र में कानून व्यवस्था को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    मीडिया की भूमिका: घटना पर जनता का आक्रोश

    इस घटना के बाद से ही सोशल मीडिया पर लोगों ने इस जघन्य अपराध को लेकर अपनी नाराजगी ज़ाहिर की है। लोग आरोपी को कड़ी सजा देने की माँग कर रहे हैं। इस तरह की घटनाएँ समाज में बढ़ती हिंसा और क्रूरता की ओर इशारा करती हैं। इस घटना ने एक बार फिर से बच्चों की सुरक्षा और बाल संरक्षण पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    घटना से मिलने वाले सबक

    यह घटना हमें याद दिलाती है कि हमें बच्चों की सुरक्षा के लिए और जागरूक होने की आवश्यकता है। हमें बच्चों को किसी भी प्रकार के खतरे से बचाने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। साथ ही, सामाजिक बंधन मजबूत करके ही हम ऐसी घटनाओं को रोक सकते हैं।

    Take Away Points

    • सात साल के मासूम की निर्मम हत्या ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैलाया है।
    • आरोपी पड़ोसी ने बच्चे को गला दबाकर मार डाला।
    • पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
    • यह घटना बच्चों की सुरक्षा और बाल संरक्षण पर सवाल खड़े करती है।
  • यूपी सरकार की किसान सब्सिडी योजना: 80% तक सब्सिडी पाएँ!

    यूपी सरकार की किसान सब्सिडी योजना: 80% तक सब्सिडी पाएँ!

    यूपी सरकार द्वारा किसानों को कृषि यंत्रों पर भारी सब्सिडी!

    क्या आप जानते हैं कि यूपी सरकार किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों पर 50% से 80% तक की सब्सिडी दे रही है? जी हाँ, आपने सही सुना! यह सुनहरा मौका है अपनी खेती को आधुनिक बनाने और पैदावार बढ़ाने का। इस लेख में, हम आपको यूपी सरकार की इस योजना के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।

    सब्सिडी योजना का लाभ कैसे उठाएं?

    यूपी सरकार की इस योजना का लाभ उठाने के लिए, आपको ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन करने की प्रक्रिया बेहद आसान है। आपको बस यूपी सरकार के कृषि विभाग की वेबसाइट पर जाना है और आवेदन फॉर्म भरना है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 दिसंबर 2023 है। जल्दी करें और इस अवसर का लाभ उठाएं।

    आवश्यक दस्तावेज:

    • आधार कार्ड
    • किसान रजिस्ट्रेशन नंबर
    • जमीन का मालिकाना हक का प्रमाण

    किन-किन कृषि यंत्रों पर मिल रही है सब्सिडी?

    यूपी सरकार विभिन्न प्रकार के कृषि यंत्रों पर सब्सिडी प्रदान कर रही है, जिनमें शामिल हैं:

    • पराली प्रबंधन यंत्र (यह यंत्र पराली जलाने की समस्या को कम करने में मदद करेगा)
    • एग्रीकल्चर ड्रोन (आधुनिक तकनीक से खेती की दक्षता में वृद्धि)
    • कस्टम हायरिंग सेंटर (अपने यंत्रों का किराये पर देकर आय में बढ़ोतरी)
    • फार्म मशीनरी बैंक (उपलब्ध कृषि यंत्रों का उपयोग सुविधा के साथ)

    यहां पर विभिन्न कृषि यंत्रों के बारे में और अधिक जानकारी प्रदान की जा रही है। सब्सिडी का लाभ पाकर अपने खेती का आधुनिकरण करें और ज्यादा मुनाफा कमाएँ।

    सब्सिडी की दर:

    सब्सिडी की दर यंत्र के प्रकार और किसान की श्रेणी पर निर्भर करती है। अधिकतम 80% तक की सब्सिडी उपलब्ध है।

    पराली जलाने की समस्या से छुटकारा!

    पराली जलाने की समस्या से किसानों और पर्यावरण दोनों को काफी नुकसान होता है। इस समस्या को कम करने के लिए यूपी सरकार किसानों को पराली प्रबंधन यंत्र पर सब्सिडी देकर उन्हें प्रोत्साहित कर रही है। इस यंत्र के उपयोग से किसान आसानी से पराली का प्रबंधन कर सकते हैं, जिससे प्रदूषण भी कम होगा और खेत की उर्वरता भी बनी रहेगी। यूपी में पराली जलाने के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में काफी कमी आई है, जो सरकार की इस पहल की सफलता को दर्शाता है।

    पराली प्रबंधन यंत्र के लाभ:

    • पर्यावरण संरक्षण
    • मृदा उर्वरता में सुधार
    • समय और धन की बचत

    योजना का उद्देश्य

    इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को प्रोत्साहित करना, आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने को बढ़ावा देना, और पराली जलाने जैसी पर्यावरणीय समस्याओं को कम करना है। यूपी सरकार का लक्ष्य कृषि क्षेत्र को और अधिक मजबूत और टिकाऊ बनाना है।

    योजना की सफलता:

    इस योजना की सफलता से यूपी के किसानों को फायदा होगा। आधुनिक यंत्रों के प्रयोग से उनकी उत्पादकता बढ़ेगी और आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

    Take Away Points:

    • यूपी सरकार किसानों को कृषि यंत्रों पर भारी सब्सिडी दे रही है।
    • 20 दिसंबर 2023 से पहले आवेदन करें।
    • पराली प्रबंधन यंत्र पर भी मिल रही है सब्सिडी।
    • इस योजना से पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।