Category: uttar-pradesh

  • यूपी बीजेपी अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह व जल शक्ति मंत्री महेन्द्र सिंह की कोरोना रिपोर्ट आई पॉजिटिव

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    लखनऊ। तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस के संक्रमण से अब उत्तर प्रदेश में और भयावह स्थिति होने लगी है। कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण रविवार सुबह योगी आदित्यनाथ सरकार में प्राविधिक शिक्षा मंत्री कमलरानी वरुण के निधन का निधन हो गया। शाम को सूचना आई कि उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह भी कोरोना वायरस से संक्रमित मिले हैं। उन्होंने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी है। इसी बीच यूपी सरकार के जल शक्ति मंत्री महेन्द्र सिंह की भी रिपोर्ट पॉजिटिव होने की सूचना मिली। महेन्द्र सिंह संजय गांधी पीजीआई में भर्ती हैं। योगी सरकार के अब तक सात मंत्री कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। इसके अलावा आइजी नवनीत सिकेरा सहित कुछ अफसर भी संक्रमित हो चुके हैं। राज्य में पिछले 24 घंटे के दौरान कोविड-19 के 3,953 नए मामले मिले हैं। यह अभी तक मिले मरीजों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। इससे पहले 31 जुलाई को सर्वाधिक 4,453 मरीज मिले थे। अब तक राज्य में कुल 93,709 मरीज मिल चुके हैं, जबकि 1,730 मरीज दम तोड़ चुके हैं।

    यूपी भाजपा के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने रविवार शाम को ट्वीट कर कहा कि ‘मुझे कोरोना के शुरुआती लक्षण दिख रहे थे, जिसके चलते मैंने अपनी कोविड-19 की जांच कराई। जांच में मेरी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। मुझसे संपर्क में आने वाले सभी लोगों से मेरा निवेदन है कि वे गाइडलाइन के अनुसार स्वयं को क्वारंटाइन कर लें और आवश्यकता अनुसार अपनी जांच करा लें। स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि डॉक्टर की सलाह पर मैं वर्तमान में अपने आवास पर होम क्वारंटाइन हूं। मेरा सभी प्रदेश्वासियों से निवेदन है कि पूरी सावधानी बरतें और सरकार की गाइडलाइन का सख्ती से पालन करें।

    उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के अब तक सात मंत्री कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह के अलावा स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह, होमगार्ड मंत्री चेतन चौहान, ग्राम्य विकास मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह, आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्म सिंह सैनी व खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) उपेंद्र तिवारी शामिल हैं। इनके अलावा श्रम एवं परामर्शदात्री समिति के अध्यक्ष ठाकुर रघुराज सिंह भी कोरोना संक्रमित हैं। हाल ही में आईजी नवनीत सिकेरा भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इसके अलावा कुछ अन्य अफसर भी कोरोना संक्रमित मिले हैं। फिलहाल इन सभी के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है।

    उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे जांच में तेजी आई है, कोरोनो वायरस से संक्रमितों की संख्या भी बढ़ी है। यूपी में रविवार को रिकार्ड 1,14,822 नमूनों की जांच की गई तो इसमें से 3,953 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। यह अभी तक मिले मरीजों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। इससे पहले 31 जुलाई को सर्वाधिक 4,453 मरीज मिले थे। वहीं अभी तक प्रदेश भर में 25,33,631 लोगों की कोरोना जांच की जा चुकी है। अब तक 53,357 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। बीते 24 घंटे में 53 लोगों की मौत हुई और अभी तक 1,730 मरीज दम तोड़ चुके हैं। अब एक्टिव केस 37,834 हैं। बीते 24 घंटे में जिन 53 लोगों की मौत हुई है उनमें लखनऊ के 14, कानपुर के 11, बरेली के पांच, वाराणसी व प्रयागराज के तीन-तीन, झांसी, मुरादाबाद व अयोध्या में दो-दो और आगरा, बलिया, बुलंदशहर, बाराबंकी, मथुरा, इटावा, मैनपुरी, फतेहपुर, जालौन, बदायूं और श्रावस्ती का एक-एक व्यक्ति शामिल है।

    उत्तर प्रदेश में पूल टेस्ट के अन्तर्गत 3,460 पूल की जांच की गई। इसमें 3,175 पूल पांच-पांच सैम्पल के और 285 पूल 10-10 सैम्पल के थे। कोविड-19 के 38,023 मामले एक्टिव हैं। इनमें से 11,046 मरीज होम आइसोलेशन में हैं। 1,255 मरीजों का प्राइवेट अस्पताल और 120 मरीजों का एल-1 सेमीपेड फैसल्टी में इलाज किया जा रहा है। शेष मरीजों को एल-1, एल-2 तथा एल-3 के कोविड डेडीकेटेड अस्पतालों में उपचार हो रहा है। अब तक 53,168 मरीजों का पूरी तरह से उपचार किया जा चुका है।

  • कुशीनगर से राममंदिर भूमिपूजन के लिए कुक संजीव बंदोपाध्याय तो वेटर तोप बहादुर का अयोध्या बुलावा

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    उपेंद्र कुशवाहा
    कुशीनगर : पर्यटन विभाग के कुशीनगर स्थित होटल पथिक निवास से कुक संजीव बंदोपाध्याय और वेटर तोप बहादुर थापा को अयोध्या बुलाया गया है। रामजन्म भूमि शिलान्यास को लेकर आयोजित कार्यक्रम को लेकर पर्यटन निदेशालय ने अयोध्या स्थित पर्यटन विभाग होटल राही यात्री निवास में इनकी ड्यूटी लगाई है।
    संजीव अयोध्या के लिए रवाना हो गए हैं, जबकि वेटर तोप बहादुर थापा सोमवार को जाएंगे। वहां 6 अगस्त तक ड्यूटी करने के बाद इनकी वापसी होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगामी 5 अगस्त को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का शिलान्यास करेंगे। अयोध्या में पर्यटन निगम के होटल यात्री निवास में भी इससे संबंधित तैयारियां चल रही हैं।
    इसी क्रम में निगम ने अपने अच्छे कुक और वेटर आदि की टीम की वहां तैनाती की है। कुशीनगर के पथिक निवास होटल के कुल संजीव बंदोपध्याय व वेटर तो बहादुर थापा की भी ड्यूटी लगाई गई है। पर्यटन निदेशालय के पत्र में लिखा है कि पीएम के कार्यक्रम को देखते हुए इन दोनों की ड्यूटी अयोध्या राही यात्री निवास में 6 अगस्त तक के लिए लगाई जा रही है।
    कलाम के लिए भोजन पका चुके हैं संजीव
    कुक संजीव बंदोपध्याय 2007 में राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के लिए भोजन बनाने वाली टीम में शामिल थे। वह पथिक निवास में 15 साल से तैनात हैं और जब राष्ट्रपति यहां आए थे तो निगम ने बाहर से भी कुछ कुक बुलाए थे मगर उनके साथ संजीव की भी बतौर कुक ड्यूटी थी। संजीव हर तरह के भोजन बनाने के एक्सपर्ट माने जाते हैं और तमाम प्रमुख लोग उनकी पाक कला की तारीफ कर चुके हैं।
    कुक संजीव को अयोध्या भेज दिया गया है। वेटर तोप बहादुर को भेजने के लिए मौखिक सूचना मिली है। सोमवार को उन्हें रवाना कर दिया जाएगा। पीएम के कार्यक्रम को देखते हुए निदेशालय ने 6 अगस्त तक दोनों की वहां ड्यूटी लगाई है।
    राजेश मणि त्रिपाठी,प्रबंधक, पथिक निवास, यूपी पर्यटन निगम

  • Coronavirus : एक महीने में कोरोना से दोबारा संक्रमित हुआ युवक, डॉक्टर भी नहीं समझ पा रहे इसकी वजह

    कानपुर कोरोना वायरस का कहर घातक होता जा रहा है। अब तो ठीक होने के बाद फिर से मरीज कोरोना वायरस की चपेट में आ रहे हैं। हैलट अस्पताल में एक ऐसा केस सामने आया है, जिसमें इलाज के एक महीने के अंदर एक व्यक्ति को दोबारा कोरोना का संक्रमण हो गया। हैलट के आर्थोपेडिक विभाग के डॉक्टरों के लिए दूसरी बार मरीज का कोरोना पॉजिटिव आना पहेली से कम नहीं है। इसको लेकर विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है। कहते हैं नया वायरस है, इसलिए इस पर अभी बहुत अधिक शोध-अध्ययन नहीं हुए हैं।

     

    Coronavirus : एक महीने में कोरोना से दोबारा संक्रमित हुआ युवक, डॉक्टर भी नहीं समझ पा रहे इसकी वजह
    हैलट से ठीक होकर जाने के एक माह बाद दोबारा निकला संक्रमित डॉक्टरों ने ऑपरेशन से खड़े किए हाथ।

    पनकी के रतनपुर का रहने वाला 45 वर्षीय युवक हादसे में घायल हो गया था। उसके पैर की हड्डी टूट गई थी। स्वजन उसे तीन जुलाई को आर्थोपेडिक विभाग की सेमी इमरजेंसी में लेकर आए थे। आपरेशन से पहले उसकी कोविड की जांच कराई, जिसकी पांच जुलाई को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। हैलट के कोविड हॉस्पिटल में 12 दिन तक भर्ती रहा। दोबारा जांच रिपोर्ट निगेटिव आने पर अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। सात दिन वह घर पर क्वारंटाइन रहा। एक माह बाद दोबारा ऑपरेशन के लिए तीन अगस्त को हैलट में भर्ती हुआ। उसकी दोबारा कोविड की जांच कराई गई, जिसमें फिर से संक्रमण की पुष्टि हुई है।

    एक माह से ऑपरेशन अटका

    उसकी पत्नी का कहना है कि उसमें कोरोना जैसे कोई भी लक्षण नहीं हैं। फिर भी रिपोर्ट में कोरोना का संक्रमण आ रहा है, जिसके कारण एक माह से पैर का ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है। इस वजह से उनकी हालत बिगड़ती जा रही है। पहले 12 दिन इलाज चला, अब फिर से 10 दिन और इलाज चलेगा।

    डॉक्टर भी हैरान

    आर्थोपेडिक विभागाध्यक्ष प्रो. संजय कुमार का कहना है कि हादसे में घायल मरीज की रिपोर्ट देखकर खुद अचरज में पड़ गए हैं। एक माह के अंदर दो बार कोरोना की पॉजिटिव रिपोर्ट आना समझ से परे है। इसके लिए माइक्रो बायोलॉजी विभाग को लिखा है। मरीज को कोरोना के इलाज के लिए आइसोलेट करा दिया है। उसकी रिपोर्ट निगेटिव आने पर ही पैर का ऑपरेशन होगा।

    यह है विज्ञान

    दरअसल, डॉक्टरों का मानना था कि मेडिकल साइंस के मुताबिक शरीर में जब कोरोना वायरस यानी एंटीजन (बाहरी तत्व) प्रवेश करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी आइजीएम एंटी बाडी उसे खत्म करने के लिए बनती है, जो 15-20 दिन में खत्म हो जाती है। उसके बाद स्थायी रूप से लड़ाई के लिए आइजीजी एंटीबाडी मेमोरी सेल में बनती है, जो कभी भी वायरस का अटैक होने पर उससे शरीर की रक्षा करती है। ऐसे में मरीज में दूसरी बार उस वायरस के संक्रमण का खतरा नहीं रहता है।

    विशेषज्ञों की राय

    यह एकदम नया वायरस है। इस पर अभी बहुत अधिक शोध और अध्ययन नहीं हुआ है, इसलिए बहुत कुछ कहा नहीं जा सकता है। वायरस के चीन, यूरोप, इटली व अमेरिका के अलग-अलग स्टेन हैं। एक फीसद यह संभावना हो सकती है कि युवक को पहली बार कोरोना वायरस के दूसरे स्टेन का संक्रमण हुआ हो, दूसरी बार में किसी दूसरे स्टेन का।

    -डॉ. विकास मिश्रा, माइक्रोबायोलॉजिस्ट कानपुर

  • हरदोई: पति ने साथ जाने से इनकार किया तो महिला ने लगाई फांसी

    हरदोई जिले के बघौली थाना क्षेत्र के ग्राम परेनुआ में पति के साथ जाने से इनकार करने पर महिला ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। महिला मायके जाने की जिद कर रही थी। परेनुआ निवासी सावित्री (30) पत्नी लल्लन का मायका शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पेढ़वा में है।हरदोई: पति ने साथ जाने से इनकार किया तो महिला ने लगाई फांसी

    मंगलवार को सावित्री पति लल्लन से पेढ़वा चलने की जिद कर रही थी। लल्लन ने सावित्री से अकेली ही मायके जाने को कहा तो मंगलवार रात दोनों के बीच कहासुनी हो गई। रात में सावित्री कमरे में चली गई, जबकि लल्लन बच्चों के साथ आंगन में सो गया।
    बुधवार सुबह लल्लन कमरे में गया तो सावित्री का शव कमरे में साड़ी के फंदे से लटकता मिला। घटना से परिजनों में कोहराम मच गया। उसने घटना की सूचना सावित्री के पिता बेचेलाल को दी तो वह भी घटनास्थल पर पहुंच गए। बेचेलाल के मुताबिक सावित्री की शादी छह वर्ष पहले हुई थी।
    उसके एक पुत्र और एक पुत्री है। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। बघौली के प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र मोहन सरोज ने बताया कि मायके चलने से इनकार करने से आहत महिला ने खुदकुशी की है। परिजनों ने कोई आरोप नहीं लगाए हैं।

     

  • जिसे दफनाया, वह जिंदा घर लौट आया, पुलिस के साथ परिवारवालों की भी धोखा खा गईं आंखें

    कानपुर के कर्नलगंज में 5 अगस्त को मिले शव की शिनाख्त में पुलिस और परिजन दोनों धोखा खा गए। जिसे दफनाने का दावा किया गया वह शुक्रवार देर रात घर लौट आया। जब परिजनों और पुलिस ने उसे देखा तो उनके होश उड़ गए। पुलिस अब उससे पूछताछ कर रही है। एसपी पश्चिम डॉ. अनिल कुमार ने पुष्टि की कि जिस अहमद शव माना जा रहा था वह घर लौट आया है। जिसे दफनाया, वह जिंदा घर लौट आया, पुलिस के साथ परिवारवालों की भी धोखा खा गईं आंखें

    मूल रूप से चमनगंज निवासी अहमद हसन (39) चकेरी के ओमपुरवा स्थित आजाद पार्क के पास अपने दूसरे मकान में पत्नी नगमा और दो बच्चे के साथ रहते हैं। उनके साले जैद के मुताबिक वह एसी रिपेयरिंग का काम करते है। 2 अगस्त को झगड़कर घर से निकल गए थे। दूसरे दिन चकेरी थाने में उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। 5 अगस्त को यतीमखाना के पास एक लावारिस शव पाए जाने की सूचना मिली। परिवार के लोग पहुंचे और उसकी अहमद के रूप में पहचान की। पोस्टमार्टम के बाद उसे कब्रिस्तान में दफना दिया गया। शुक्रवार रात अहमद खुद घर पहुंचेे तो सभी दंग रह गए।

    परिवार के लोग उन्‍हें लेकर चकेरी थाने लेकर पहुंचे। उन्‍होंने अपने बारे में पुलिस को जानकारी दी। एसपी पश्चिम डॉ.अनिल कुमार का कहना है कि अहमद घर लौट आए हैंं। उनसे पूछताछ की जा रही है। कर्नलगंज में मिले शव की फिर से शिनाख्त कराने की कोशिश की जाएगी। अभी यह नहीं पता कि यतीमखाना के पास मिला शव किसका था। दफनाए गए शव को निकालकर डीएनए जांच के लिए सैंपल लिया जाएगा। भविष्य में यदि कोई दावा करता है तो डीएनए से मिलान कर पुष्टि कराई जाएगी।

    पूछताछ की जा रही है।

  • डीआईजी बरेली जोन व पुलिस अधीक्षक पीलीभीत द्वारा किया गया कोतवाली पूरनपुर का आकस्मिक निरीक्षण

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    रिपोर्ट ज़ाहिद अली

    पीलीभीत । अपराधियों पर नकेल कसने के दिए निर्देश आज पुलिस उपमहानिरीक्षक बरेली राजेश पाण्डेय और पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश ने थाना पूरनपुर का आकस्मिक निरीक्षण किया गया।

    डीआईजी ने सबसे पहले थाना कार्यालय का निरीक्षण किया गया व आवश्यक निर्देश दिए गए। ड्यूटी पर मौजूद कार्यालय मुंशी से पूंछताछ की एवं अपराध रजिस्टर व अन्य अभिलेखों की जानकारी ली। इस दौरान क्षेत्राधिकारी पूरनपुर योगेंद्र कुमार भी मौजूद रहे।

  • बुधवार को राममंदिर का भूमि पूजन के लिए अयोध्या में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात…

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    लखनऊ । अयोध्या में 5 अगस्त होने वाले राम मंदिर के भूमिपूजन से पहले शहर में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किया गया है। वहीं भूमिपूजन से पहले रामजन्मभूमि स्थल पर रामार्चा पूजा शुरू हुई। इस पूजा में सभी प्रधान देवी और देवताओं की पूजा होती है।

    रामार्चा पूजा जिसमें राम कथा और राम धुन का पाठ शामिल है, की अगुवाई वाराणसी और अयोध्या के 11 पुजारी कर रहे हैं। राम जन्मभूमि परिसर में छह से सात घंटे तक पूजा जारी रहेगी।

    हनुमान गढ़ी मंदिर में भगवान हनुमान के ‘पताका’ (ध्वज) की विशेष पूजा भी की जा रही है।

    पूरा राम जन्मभूमि क्षेत्र पीले गेंदे के फूलों से सजा हुआ है।

    ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने कहा, “पीला एक शुभ रंग है। हिंदू परंपरा में, पीले रंग का उपयोग सभी समारोहों में किया जाता है। यह पवित्रता और प्रकाश का प्रतीक है।”

    उन्होंने कहा कि विभिन्न मंदिरों में होने रहे विभिन्न अनुष्ठानों का समापन बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘भूमिपूजन’ करने के साथ होगा।

    आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के मंगलवार शाम तक अयोध्या पहुंचने की उम्मीद है। वह उन पांच अतिथियों में शामिल होंगे जिन्हें बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर बैठाया जाएगा।

    मंच पर मौजूद होने वाले अन्य अतिथियों में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मंदिर के निर्माण की देखरेख करने वाले श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास होंगे।

  • कुशीनगर में लावारिस लाशों के वारिश बने लाश वाले बाबा अब कोरोना से मरने वालों लोगों कर रहे हैं अंतिम संस्कार

    कुशीनगर में लावारिस लाशों के वारिश बने लाश वाले बाबा अब कोरोना से मरने वालों लोगों कर रहे हैं अंतिम संस्कार
    उपेंद्र कुशवाहा
    कुशीनगर : कोरोना से फैली बीमारी का सबसे डरावना पक्ष मौत है। वह मौत जिसके बाद अपने अंतिम संस्कार करने को भी राजी नहीं होते। वह मौत जिसके बाद शव छूने की इजाजत तक नहीं। कई मामलों में तो आखिरी बार अपनों को मरने वाले की सूरत देखना भी नसीब नहीं होता है। सोशल डिस्टेंसिंग की चीख-पुकार के बीच कोरोना वायरस ने दूरी इतनी बना दी है कि परिजन शवों के करीब भी जाना नहीं चाहते। कुछ मामले तो ऐसे भी आए,जहां परिजन शवों का दाह संस्कार नहीं करना चाहते हैं। लेकिन कुछ ऐसे लोग हैं,जो इन परायों को अपनों की तरह अलविदा कर रहे हैं। जो कोरोना संक्रमण के बीच शवों के करीब भी जा रहे हैं। उन्हें कंधा भी दे रहे हैं। परिजनों के साथ पर अग्नि भी दे रहे हैं। यहां तक कि कुछ तो अंतिम संस्कार का जिम्मा तक उठा रहे हैं। परिवार इनका भी है। घर पर छोटे बच्चे भी हैं। खतरा इन्हें भी है,लेकिन बावजूद इसके ये बेखौफ यह काम कर रहे हैं।
    बताते चलें कि कुशीनगर जिले के पडरौना तहसील क्षेत्र के गांव सिसवा मठिया निवासी पशुपति नाथ मिश्र उर्फ लाश वाले बाबा कोरोना योद्धा की कहानी है।
    वैसे तो पशुपति नाथ मिश्र लाश वाले बाबा कोरोना काल से पहले विभिन्न थाना क्षेत्रों में रेलवे ट्रैक व बडी नहर से मिलने वाली लावारिस शवों का पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार करते थे। पेशे से आटो रिक्शा चालक लाश वाले बाबा विगत कई वर्षों से जिला अस्पताल पर इसी मामले में ड्यूटी दे रहे हैं। सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक यहीं रहते हैं। वे कहते हैं कि,‘लावारिस शवों को मैं खुद अग्नि देता हूं। अब कोरोना संक्रमित शव भी आ रहे हैं,इन्हें भी अग्नि दे रहा हूं।’लाश वाले बाबा पिछले 8 सालों से कुशीनगर में सेवाएं दे रहे हैं। जबकि लावारिस शवों के अंतिम संस्कार का खर्च पुलिस उठाती हैं।
    लाश वाले बाबा अपने साथ मृतक के परिजनों के सहयोग से पीपीई किट पहनकर करते हैं काम

    एक शव को जलाने में 1700 से 1800 रुपए का खर्चा आता है। इसमें ढाई क्विंटल लकड़ी,30 कंडे और दो संटी लगती हैं। पोस्टमार्टम हाउस पर शव को लाने व यहां से लेकर श्मशान घाट तक ले जाने में मृतक के परिजन खर्च उठाने काम करते हैं।

    अस्पताल से ऑटो पर आने जाने वाले वाले मरीजों से मिले पैसे पर चलाता हैं परिवार का खर्च
    वैसे तो लाश वाले बाबा हर दिन जिला अस्पताल पे ही रहते हैं, रात का एक टाइम इसी अस्पताल पर गुजरात हैं। कोरोना काल के बाद से इनका पूरा समय इसी अस्पताल पर ही बीत रहा है। हालाकी लाश वाले बाबा को स्वास्थ विभाग ने अपनी ओर से पीपीई किट दी गई है। इसे पहनकर पूरी सुरक्षा के साथ सेवा कार्य में जुटे रहते हैं। जबकि अब घरवाले तो बाहर निकलने से भी मना करते हैं,वो कहते हैं कि नहीं निकलूंगा तो परिवार का पालन कैसे कर पाऊंगा।
    सुबह से शाम तक जिला अस्पताल पर ही रहते हैं लाश वाले बाबा
    पशुपति मिश्र उर्फ लाश वाले बाबा कहते हैं कि,बहुत से शव लावारिस होते हैं। वैसे इनका मोबाइल नंबर अस्पताल के इमरजेंसी मे लिखा हुआ मिल जाएगा। हादसे या अन्य मामले से जुड़े संदिग्ध परिस्थितियों में मिले लावारिस शव आने पर पुलिस इसी लाश वाले बाबा को सूचना देते हैं। एसे में वो सरकारी एम्बुलेंस या अपने आटो से शव बुलवा लेते हैं। फिर इन शव का अंतिम संस्कार होता है। हालांकि अब तक जितने भी कोरोना से मौत हो चुकी उन सभी का शव का इनके द्वारा ही अंतिम संस्कार किया गया है।

  • अनलाक: सप्ताह के अंतिम दिन शनिवार-रविवार बंदी में बेसहारों का सहारा बने हैं, व्यापारी नेता मनोज

    अनलाक: सप्ताह के अंतिम दिन शनिवार-रविवार बंदी में बेसहारों का सहारा बने हैं, व्यापारी नेता मनोज
    उपेंद्र कुशवाहा
    कुशीनगर : कोरोना महामारी से बचाव को लेकर सप्ताह के अंतिम शनिवार रविवार के दिन बंदी के दौरान पडरौना शहर में लोगो के बाहर न निकलने से बेजुबान जानवरो को भी खाने के लाले पड़े हुए हुए है जिसको लेकर शहर के ही व्यापारी नेता व समाजसेवी मनोज मोदनवाल द्वारा बेजुबान जानवरो को पेट भरने के लिए रोटी देते नजर आ रहे हैं।
    गौरतलब हो कि एसडीएम सदर रामकेश यादव द्वारा पिछले माह में कोरोना वायरस से बचाव के लिए जिस तरह से नलाक प्रक्रिया अपनाई थी,इसको लेकर सप्ताह के अंतिम दिन शनिवार-रविवार बंदी होने की वजह से शहर की सड़कें पूरी तरह सुनसान है,लोगो की आवाजाही पर प्रतिबंध है, वही भूख से तड़प रहे बेजुबान जानवरो के दरवाजे पर आ जाने पर व्यापारी नेता मनोज मोदनवाल रोटी देने का कार्य कर रहे हैं ।

  • श्रीराम के परित्याग के बाद वन देवी के रूप में यहां रहीं थी माता सीता, रसोई में अाज भी रखे हैं बर्तन

    पौराणिक व ऐतिहासिक थाती संजोए बिठूर, वन देवी के रूप में यहां रहीं माता सीता के पद-रज का साक्षी है। उनकी रसोई के बर्तन, उपासना स्थल के साथ स्वर्ग नसेनी भी आकर्षण का केंद्र है। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण से इनका दीदार करने के लिए सैलानियों की संख्या बढऩी तय है। पर्यटन विभाग में हलचल भी दिखने लगी है।

    ब्रह्मांड के केंद्र बिंदु के रूप में पहचान

    श्रीराम के परित्याग के बाद वन देवी के रूप में यहां रहीं थी माता सीता, रसोई में अाज भी रखे हैं बर्तन

    महर्षि वाल्मीकि आश्रम बिठूर को ब्रह्मांड के केंद्र बिंदु के रूप में पहचाना जाता है। यहां पर ब्रह्म खूंटी भी है। इसी के नाम पर गंगा तट पर ब्रह्मावर्त घाट भी है। लव-कुश की जन्मस्थली में त्रेता युग की कई आकर्षक धरोहर हैं।

    सघन वन में पशु-पक्षी और पेड़-पौधों तक था उल्लास 

    वाल्मीकि आश्रम का मुख्य द्वार काफी ऊंचाई पर स्थित है। माता सीता इसके ही पास वन देवी के रूप में रहती थीं। पर्यटन विभाग की तरफ से देखरेख करने वाले प्रदीप यादव बताते हैं कि वन देवी का मंदिर वर्तमान में भी है। तब घने जंगल में पीलू व करेल के पेड़ अधिक थे। वर्षों पुराना एक पीलू का पेड़ अभी भी है। वाल्मीकि रामायण में पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों के अंदर भी माता सीता के वहां वास करने का उल्लास दिखता था। वह वन से लकड़ी लाकर भोजन बनाती थीं।

    मान्यता, गहरे कुएं से लेती थीं जल

    वाल्मीकि आश्रम के ठीक नीचे सीता रसोई में अब भी उनके पौराणिक काल के बर्तन, चूल्हा, लकड़ी के चम्मच, चिमटा, बेलन व कढ़ाई रखे हैं। इसी के पास गहरा कुआं है। माता सीता यहीं से जल लेती थीं।

    स्वर्ग नसेनी से दिखता बिठूर का आकर्षक नजारा

    पंडित नंद किशोर दीक्षित बताते हैं कि यहां स्वर्ग नसेनी में 49 सीढिय़ां हैं। 365 दीप रखने के स्थान हैं, जिनमें दीप जलाए जाते हैं। उन्हें दीप मालिका कहा जाता है। कालांतर में ऐतिहासिक काल में यहां लगे घंटे को बजाते ही दुश्मन से भिडऩे के लिए सेना तैयार होने लगती थी। स्वर्ग नसेनी की आखिरी सीढ़ी पर पहुंचने से बिठूर का विहंगम दृश्य दिखता है। इसमें चढऩे के लिए सात फेरे हैं, जिससे भाई-बहन को एक साथ चढऩा मना है।

    श्रीराम के परित्याग के बाद वन देवी के रूप में यहां रहीं थी माता सीता, रसोई में अाज भी रखे हैं बर्तन

    क्या कहते हैं अधिकारी

    • स्वदेश दर्शन योजना के तहत वाल्मीकि आश्रम में कई कार्य कराएं जा चुके हैं। बेंच, पाथवे, लाइटिंग, टर्फ ग्रास आदि कार्य हुए हैं। रामायण सर्किट में आने से बिठूर धाम में कई कार्य होने की संभावना बनेगी। भविष्य में रामलला स्मृतियों से जुड़ा यह पावन धाम पूरे विश्व में आकर्षण का केंद्र बनेगा। -अर्चिता ओझा, जिला पर्यटक अधिकारी।
    • अभी फिलहाल वाल्मीकि आश्रम व सीता रसोई के लिए कोई भी निर्माण कार्य योजना प्रभावी नहीं है। अयोध्या शिलान्यास के बाद यहां बड़े स्तर पर निर्माण व पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना जागी है। -प्रदीप यादव, स्मारक परिचर, पुरातत्व विभाग।