सुलतानपुर 09 जुलाई/ आज पं0 राम नरेश त्रिपाठी सभागार में पशु पालन एवं गोशालाओं के प्रबन्धन एवं सवंर्द्धन हेतु मुख्य विकास अधिकारी रमेश प्रसाद मिश्र की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गयी। बैठक में पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ0 रमा शंकर सिंह ने अवगत कराया कि तहसील स्तर पर भूसा टेण्डर प्रक्रिया अभी पूर्ण नही की गयी है शीघ्र पूर्ण करा लें। गत वित्तीय वर्ष में प्रेषित धनराशि का उपभोग प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया जाय। मनरेगा से होने वाले गोशाला निर्माण सम्बन्धी कार्यों में तेजी लायी जाय। ग्राम पंचायत सचिव प्रतिदिन एक गोशाला का निरीक्षण करें तथा प्रत्येक पशु हेतु हराचार, भूसा, दाना, चूनी, चोकर एवं पानी की पर्याप्त व्यवस्था की जाय। पशुशाला में दरवाजे लगाये जाय तथा कम से कम एक चौकीदार रात्रि में भी उपस्थित रहना चाहिये। गोशालाओं में पर्याप्त लाइट की व्यवस्था होनी चाहिये। निरीक्षण में किसी भी गोशाला में अभिलेखों का रख-रखाव ठीक नहीं पाया गया था अतः ठीक करें। मुख्य विकास अधिकारी ने अवगत कराया कि कोई भी राजकीय सामान किसी प्रकार के धन अथवा पशुओं आदि की चोरी की दशा में प्रथम सूचना रिपोर्ट अवश्य दर्ज करायी जाय। यदि सम्बन्धित प्रभारी निरीक्षक रिपोर्ट दर्ज नहीं करता है, तो आप सब व्हाट्सएप नम्बर 9454401121 पर विवरण अवश्य प्रेषित करें। इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज, समस्त उप जिलाधिकारी, समस्त खण्ड विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, समस्त राजस्व निरीक्षक, समस्त उप पशु चिकित्सा अधिकारी आदि उपस्थित रहे।
लखनऊ । जिसका डर था, वही हुआ। शर्तों के साथ लागू अनलॉक की व्यवस्था को लोगों ने अपनी मर्जी और बेफिक्री के धुएं में उड़ा दिया। नतीजा, सूबे की राजधानी हमारे शहर में दिल्ली जैसे हालात पैदा होने लगे हैं। मरीज मिलने की संख्या सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती जा रही है। जगह-जगह कटेंटमेंट जोन का फैलाव हो रहा है। आम ही नहीं, संक्रमितों में खास लोग भी हैं। पुलिस से लेकर प्रशासन तक में कोरोना जड़े जमा रहा है। लोगों की बेपरवाही के आगे प्रशासन भी बेबस है। सामुदायिक स्तर पर कोरोना का संक्रमण नहीं फैले, लिहाजा इसके बारे में सोचा जाने लगा है। कुछ पाबंदियों पर फिर से विचार किया जा रहा है। शासन से अनुमति मिलते ही एक दो दिन में कुछ पाबंदियां फिर से लागू कर दी जाएंगी।
राजधानी में भयावह स्थिति स्थिति पर नियंत्रण के लिए अनलॉक-2 में प्रशासन सख्ती की तैयारी में सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित होगी बाजारों में ऑड-ईवन फार्मूला फिर से लागू करके भीड़ कम की जाएगी रेस्टोरेंट और फूड स्टॉल पर सर्व करने पर भी दोबारा लगेगी पाबंदी सार्वजनिक स्थानों पर बेवजह खड़े होने वालों का काटा जाएगा चालान रात दस बजे के बाद केवल आवश्यक कार्य से ही निकल पाएंगे बाहर बिना मास्क और थूकने वालों पर मौके पर ही लगेगा जुर्माना मंडियों की स्थिति खराब, यहां लागू की जा सकती है पुरानी व्यवस्था
राजधानी में मरीजों का आंकड़ा हैरान करने वाला है। उससे अधिक मुश्किल रोजाना नए-नए इलाकों का कटेंटमेंट जोन में तब्दील होना। प्रशासन संक्रमण की रफ्तार को बेहद गंभीरता से लेकर रहा है। इसी के मद्देनजर जहां एक तरफ वैकल्पिक कोविड अस्पतालों का विस्तार किया जा रहा है, वहीं सार्वजनिक स्थानों और कार्यालयों में पाबंदियां बढाने पर फिर से विचार हो रहा है।
फिर से लागू होंगी पाबंदिया
डीएम अभिषेक प्रकाश के मुताबिक, राजधानी में जिस तरह से कोरोना संक्रमण की रफ्तार है, उसे रोकने के लिए कुछ पाबंदियां बेहद जरूरी हैं। सरकारी और निजी कार्यालयों में पचास प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य कराई जाएगी। प्रमुख बाजारों में ऑड-ईवन का फार्मूला फिर से लागू किया जा सकता है ताकि अधिक भीड़ न हो। मंडियों में भी पुरानी व्यवस्था लागू की जा सकती है। रेस्टोरेंट और फूड स्टॉल पर केवल डिलीवरी की सुविधा होगी। किसी को भी कहीं पर खड़े होकर खाने की इजाजत नहीं होगी। रात दस बजे के बाद सड़कों पर अनावश्यक घूमने वालों पर भी सख्ती होगी। इसके अलावा जो लोग बिना मास्क लगाकर या फिर थूकते दिखेंगे उनका चालान किया जाएगा।
पुलिस, प्रशासन, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग को मिलाकर क्यूआरटी बनेगी जो कोविड-19 के सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराएगी। संबंधित थाने पर इसकी जिम्मेदारी होगी।
कुशीनगर : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद पडरौना नगर इकाई द्वारा गुरुवार को विद्यार्थी दिवस के रूप में मनाया गया। इस मौके पर 72 वर्ष पूर्ण होने पर नगर में संगोष्टि के आयोजन में मुख्य वक्ता के रूप में नगर अध्यक्ष नवनीत मिश्रा ने कहा असल शक्ति युवा शक्ति से एक जुट होकर राष्ट्रहित में कार्य करना चाहिए,साथ ही साथ स्वामी विवेकानन्द के संदेशों का पालन करने का आह्वाहन किया व कार्यकताओ को संगठन को और आगे ले जाने के लिए और मेहनत करने पर जोर दिया।
इस अवसर पर कार्तिक सिंह,सोनू राज कुशवाहा,दीपक जायसवाल, उज्जवल साहा,आदित्य शर्मा,राजन वर्मा,सुनील गुप्ता, नवीन कुशवाहा,किशन कुशवाहा, जीते सिंह,सिद्धांत जायसवाल, सत्यम कसेरा,विश्वेस चौबे,जय सिंह, अभिषेक श्रीवास्तव, विक्की सिंह,विशाल सिंह,सचिन मिश्रा तमाम कार्यकर्ता उपस्थित रहें।
कानपुर। मोस्टवांटेड विकास दुबे की गिरफ्तारी उज्जैन में होने के बाद मां ने सावन में प्रति वर्ष उज्जैन महाकाल मंदिर में दर्शन करने जाने की बात कही है। चौबेपुर में बिकरू कांड के समय कही बात उन्होंने फिर दोहराते हुए कहा कि सरकार जो सही समझे उसके साथ करे।
लखनऊ में अपने छोटे बेटे दीप प्रकश के साथ रहने वाली विकास दुबे की मां सरला दुबे ने कहा कि अब सरकार जो चाहेगी वह कार्रवाई करेगी। मेरा बेटा विकास तो हर वर्ष सावन में उज्जैन में महाकाल के दर्शन करने जाता था। जब उनसे पूछा गया कि आपने पहले कहा था कि विकास दुबे ने जो कृत्य किया है उसकी सजा उसको मिलनी चाहिए। वह मर भी जाए तो मुझे गम नहीं अब आप क्या कहेंगी? आठ पुलिसवालों को मारने के सवाल पर भी विकास दुबे की मां सरला मुकर गई। उन्होंने कहा कि वह कभी भी, कहीं भी ऐसा कुछ नहीं बोली हैं।
चौबेपुर के बिकरू में सीओ समेत आठ पुलिस जवानों की हत्या के बाद फरार हुए मोस्ट वांटेड विकास दुबे की मां सरला देवी अपने छोटे बेटे प्रकाश के साथ लखनऊ के मकान में रहती हैं। गुरुवार की सुबह उनके घर पहुंचे मीडिया कर्मियों ने मोस्ट वांटेड अपराधी बेटे विकास दुबे की गिरफ्तारी उज्जैन में होने की जानकारी दी तो उन्होंने कहा कि वह हर साल सावन में महाकाल मंदिर में दर्शन करने जाता था।
बेटे विकास की ससुराल भी मध्य प्रदेश में ही है। गिरफ्तारी के सवाल पर उन्होंने कहा कि अब सरकार जो उचित समझे वही करे, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। चौबेपुर में बिकरू कांड के बाद भी मोस्ट वांटेड विकास दुबे की मां सरला देवी ने कहा था कि कितनी बार समझाया था उसको, लेकिन उसने मेरी एक न सुनी।
अब विकास मर भी जाए तो मुझे इसका गम नहीं है। विकास के कारण पूरा परिवार परेशानी झेलता आया है। उन्होंने बताया था कि करीब चार माह पहले विकास लखनऊ आया था तभी मुलाकात हुई थी।
अमेठी। मुसाफिरखाना- पारा मार्ग पर निजामुद्दीनपुर गोमती नदी पुल के पास बड़े व गहरे गड्ढ़े मौत को दावत दे रहे हैं। ये खतरनाक गड्ढे सड़क पर चलने वाले मुसाफिरों के लिए मुसीबत बन गये हैं। आये दिन राहगीर इन गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। किंतु जिम्मेदार अफसरानों को राहगीरों की इस बड़ी समस्या से कोई सरोकार नहीं है। गोमती नही के समीप मुख्य मार्ग पर बारिश की भेंट चढ़ चुकी पटरी पर लगभग 5 से 10 फुट के गहरे गड्ढे बन गए है। इस सड़क पर भारी मात्रा में छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन हमेशा लगा रहता है। सड़क पर पटरी किनारे बने गड्ढ़े राहगीरों की जान लेने पर आमादा है। हर रोज कोई न कोई राहगीर इन बढ़े गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहा है। किंतु, जान जोखिम में डालकर चलने वाले मुसाफिरों की इस बड़ी समस्या से जिम्मेदार महकमे को कोई सरोकार नहीं है। जबकि उसी सड़क के रास्ते से होकर आने जाने वाले विभाग के जिम्मेदार अफसरान अपनी आँखों पर पट्टी बांधकर आमजन की इस बड़ी समस्या को नजरअंदाज किये हुए हैं। लोगों का कहना है कि एक तरफ जहां विभाग के लोग कुम्भकर्णीय नींद में मस्त हैं, तो वही सड़क पर विवश होकर चलने वाले मुसाफिर गड्ढों के आतंक से त्रस्त हैं।
गिट्टियाँ बिखर गयी, डामर बह गये
मुसाफिरखाना पारा मार्ग के बीच मुख्य मार्ग पर जगह-2 टूटी सड़क पर बिखरी गिट्टियाँ सड़क के निर्माण में हुए भ्र्ष्टाचार की पोल खोल रही हैं तथा सड़क की खस्ताहाल दशा को बयां कर रही है। एक तरफ सड़क के बीचोबीच बिखरी गिट्टियों बड़े बड़े गड्ढे पर मजबूरन चलने वाले दुपहिया चालक, साईकिल सवार आदि लोग फिसलकर चुटहिल हो रहे है। वही दूसरी तरफ दुपहिया, चारपहिया वाहन के टायर, साकर आदि कलपुर्जे खराब होकर वाहन स्वामी पर अतिरिक्त खर्च का बोझ डाल रहे हैं। बहरहाल, सरकार को डायरेक्ट टैक्स देने वाले मुसाफिर बिखरी गिट्टियों पर चलने को विवश है। वही जिम्मेदार महकमा पीडब्ल्यूडी विभाग इस बड़ी समस्या से आंख फेरे हुए है।
अमेठी।जिले में कोरोना संक्रमण मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है गत दिनों आई रिपोर्ट में जिले के चार लोग कोरोनावायरस पॉजिटिव पाए गए जानकारी के अनुसार अमेठी जिले में कोरोनावायरस की जांच रिपोर्ट आने के बाद 4 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए जिसमें सुधा गुप्ता पुत्री राकेश कुमार अनसूया गुप्ता पुत्री राकेश कुमार शांति मार्केट जगदीशपुर व कुनाल कुमार पुत्र प्रेम कुमार निवासी पूरे पाठक ब्लाक जामो इसी क्रम में प्रदीप श्रीवास्तव पुत्र माता प्रसाद कोतवाली गौरीगंज निवासी कोरोनावायरस पॉजिटिव पाए जाने से क्षेत्र को सील कर दिया गया है
लखनऊ । कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार मे राज्य में फिर से लॉकडाउन लगाने का फैसला किया है। यह लॉकडाउन शुक्रवार रात 10 बजे से 13 जुलाई सुबह पांच बजे तक लागू रहेगा। इस दौरान आवश्यक सेवाओं को छोड़कर बाकी सब तीन दिनों के लिए बंद रखने का आदेश दिया गया है। बता दें कि प्रदेश में संक्रमितों का आंकड़ा 31 हजार पार कर चुका है। अब तक 862 लोगों की जान जा चुकी है। राज्य में जैसे-जेसे कोराना जांच का दायरा बढ़ रहा है, संक्रमितों का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है।
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यूपी में कोरोना के चलते 10 जुलाई की रात से 13 जुलाई की सुबह 5 बजे तक पूर्ण Lockdown होगा लागू
कोरोना संक्रमण के तेजी से बढ़ते मामलों ने उत्तर प्रदेश को फिर लॉकडाउन वाली स्थिति में लाकर खड़ा किया है। एक दिन के जनता कर्फ्यू की तरह ही यूपी की योगी सरकार ने अनलॉक-2 के बीच ही तीन दिन के लॉकडाउन की घोषणा कर दी है। शुक्रवार रात दस बजे से 13 जुलाई की सुबह पांच बजे तक के लिए सभी कार्यालय, हाट, बाजार व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद करने के आदेश मुख्य सचिव ने जारी किए हैं।
अनलॉक-1 और 2 में सरकार ने तमाम रियायतें दे दीं, जिसके बाद से कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। इस बार फिर से पहले की तरह लॉकडाउन के चल रहे कयासों के बीच शासन ने गुरुवार को तीन दिन के लॉकडाउन के आदेश जारी कर दिए। हालांकि, इस बार कोरोना संक्रमण के साथ ही संचारी रोगों से बचाव की बात भी कही गई है। 10, 11 और 12 जुलाई स्वच्छता और सैनिटाइजेशन के प्रदेशव्यापी अभियान के निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही जारी कर चुके हैं। माना यह जा रहा है कि यदि संक्रमण की रफ्तार नहीं रुकी तो पहले की तरह तीन दिन के इस ट्रायल के बाद फिर से लॉकडाउन को लंबी अविध के लिए लागू किया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी अधिकारिक रूप से कोई कहने को तैयार नहीं है।
तीन दिन के लिए जारी गाइडलाइन
उत्तर प्रदेश में सभी कार्यालय, शहरी व ग्रामीण हाट, बाजार, गल्ला मंडी, व्यावसायिक प्रतिष्ठान आदि बंद रहेंगे। सभी आवश्यक सेवाएं जैसे स्वास्थ्य, चिकित्सकीय सेवाएं, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पहले की तरह चलती रहेगी। आवश्यक सेवाओं से जुड़े व्यक्तियों, कोरोना वॉरियर, स्वच्छता कर्मी व डोर स्टेप डिलीवरी से जुड़े व्यक्तियों के आवागमन पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। रेलवे का आवागमन पहले की तरह यथावत रहेगा। ट्रेनों से आने वाले यात्रियों के लिए बसों की व्यवस्था उप्र परिवहन निगम करेगा। रेल यात्रियों के आवागमन के लिए लगी बसों के अलावा परिवहन निगम की अन्य बसों का प्रदेश में संचालन प्रतिबंधित रहेगा। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाएं यथावत रहेंगी। ऐसे यात्रियों के आवागमन पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। मालवाहक वाहनों के आवागमन पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। राष्ट्रीय व राज्य मार्गों पर परिवहन जारी रहेगा। इनके किनारे स्थित पेट्रोल पंप और ढाबे खुले रहेंगे।
तीन दिवसीय स्वच्छता और सैनिटाइजेशन से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी इन प्रतिबंधों से मुक्त रहेंगे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोविड-19/संचारी रोग सर्विलांस टीम के माध्यम से प्रत्येक घर में रहने वाले सभी सदस्यों की मेडिकल स्क्रीनिंग और सर्विलांस का अभियान यथावत जारी रहेगा।
इस अवधि में ग्रामीण क्षेत्र के सभी औद्योगिक कारखाने खुले रहेंगे, जिनमें शारीरिक दूरी और स्वास्थ्य संबंधी प्रतिबंधों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में लगातार चालू रहने वाले औद्योगिक कारखानों को छोड़कर बाकी बंद रहेंगे।
इस अवधि में आवश्यक सेवाओं से जुड़े कार्यालय और इन प्रतिबंधों से मुक्त सेवाओं से संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों का पहचान पत्र ही ड्यूटी पास माना जाएगा और उनकी आवाजाही पर रोक नहीं होगी।
वृहद निर्माण कार्य जैसे कि एक्सप्रेसवे, बड़े पुल व सड़कें, लोक निर्माण विभाग के बड़े निर्माण, सरकारी भवन तथा निजी प्रोजेक्ट जारी रहेंगे। प्रत्येक सार्वजनिक स्थल जैसे कि अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, औद्योगिक प्रतिष्ठान, चौराहों आदि पर जिला प्रशासन व पुलिस और नगर निकायों द्वारा पब्लिक ऐड्रेस सिस्टम के माध्यम से कोविड-19 व संचारी रोगों से बचाव के संबंध में जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाएगा। हर जिले में मजिस्ट्रेट व पुलिस अधिकारियों द्वारा संयुक्त भ्रमण किया जाएगा। पुलिस टीमें/यूपी 112 द्वारा पेट्रोलिंग की जाएगी और इन व्यवस्थाओं का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
शासन की ओर से कोरोना संक्रमण की समीक्षा के लिए जिलों में तैनात किए गए नोडल अधिकारी अपने पूर्व निर्धारित दायित्वों के साथ इन नए दिशा निर्देशों की भी मॉनिटरिंग करेंगे।
मुसाफिरखाना/अमेठी।अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जिला अमेठी के प्रत्येक तहसील में वृक्षारोपण कर एवं गोष्टी करके 72 वा स्थापना दिवस मनाया एबीवीपी के मुसाफिरखाना में प्रत्येक विद्यालयों में जैसे राजकीय डिग्री कॉलेज यूनिवर्सल पब्लिक स्कूल ,एएच इंटर कॉलेज, भारत पब्लिक स्कूल, सरस्वती विद्या मंदिर आदि संस्थानों में वृक्षारोपण किया गया मुसाफिरखाना के तहसील संयोजक प्रवीण पांडे के नेतृत्व में वृहद वृक्षारोपण किया गया उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण हमारे जीवन के लिए अहम है, एबीवीपी के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एवं एसएफडी जिला संयोजक राहुल कौशल विद्यार्थी ने कहा कि आज का दिन विद्यार्थी परिषद के लिए अहम है आज के दिन 9 जुलाई 1949 को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की स्थापना की गई थी ,अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ABVP एक भारतीय छात्र संगठन हैं। जिसका उद्देश्य छात्र हित व राष्ट्र हित है। विद्यार्थी परिषद का नारा है – ज्ञान, शील और एकता ! आजादी के बाद में, मन में गर्व और अनंत काल की परंपराओं की महिमा रखते हुए, पूरे देश हमारे देश की आधुनिक बनाने का सपना देखा है और एक, सभी परिस्थितिजन्य बाधाओं और खामियों से मुक्त कर दिया विकसित की है। देश में इस सपने को साकार करने के लिए, कुछ युवाओं को इस तरह के विश्वास के साथ एक आंदोलन को शुरू, देश भर में कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसरों में केंद्रित, इन गतिविधियों के एक राष्ट्रीय मंच औपचारिक रूप दिया और 9 जुलाई, 1949 को स्थापना हुई वहीं आ जाते एक छात्र संगठन के रूप अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने राष्ट्रहित, सामाजिक कार्य करना शुरू कर दिया अत: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लिए अपनी प्रतिबद्धता में दलगत राजनीति से ऊपर रहने के लिए पसंद करते हैं। इस अवसर पर तहसील संयोजक एस एफ डी विनय तिवारी ,नगर सह मंत्री रितेश तिवारी, नगर सह मंत्री शैलेंद्र बहादुर यादव, सचिन अग्रहरि, दिव्यांशु कसौधन आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे
प्रयागराज। न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा) के चीफ इंजीनियर रहे यादव सिंह की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मंजूर कर ली है। कोर्ट ने नई दिल्ली के एसटीएफ थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की धारा 120 बी के तहत दर्ज मामले में निरुद्धि को भी अवैध माना है और यादव सिंह को इस मुकदमे में जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर एवं न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव की खंडपीठ ने दिया है।
हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह भी कहा कि स्पेशल जज सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को समझने में गलती की है। लॉकडाउन के दौरान ऐसी परिस्थितियां नहीं थीं कि चार्जशीट दाखिल नहीं की जा सकती थी। असल में, यादव सिंह के खिलाफ नई दिल्ली के एसटीएफ थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम व आइपीसी की धारा 120 बी के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई। सीबीआई ने यादव सिंह को 10 फरवरी, 2020 को गिरफ्तार किया था। उसके बाद उसे 11 फरवरी को स्पेशल कोर्ट सीबीआई में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया।
यादव सिंह की ओर से कहा गया कि सीबीआई ने निर्धारित अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की। इस पर उसने 12 अप्रैल को गाजियाबाद के जिला जज को ई-मेल से प्रार्थना पत्र भेजकर जमानत पर रिहा करने की मांग की। जिला जज ने अर्जी 16 अप्रैल को स्पेशल जज सीबीआइ को फॉरवर्ड कर दी। स्पेशल जज ने 17 अप्रैल को उसकी अर्जी खारिज कर दी थी।
विशेष न्यायाधीश सीबीआई ने यादव सिंह की जमानत नामंजूर करते हुए कहा था कि कोविड-19 संक्रमण से हुए लॉकडाउन के कारण सीबीआई 60 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी। सुप्रीम कोर्ट ने भी 23 मार्च के आदेश में सभी प्रकार के मामलों में मियाद बढ़ा दी है, इसलिए सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने में जो विलंब हुआ उस अवधि की गणना नहीं की जाएगी। इलाहाबाद हाई कोर्ट में तब यह याचिका दाखिल कर सीबीआई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई। यादव सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल कर मामले में जल्द सुनवाई की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को यादव सिंह की याचिका पर बुधवार को सुनवाई कर उस पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।
हाई कोर्ट में बुधवार को यादव सिंह की ओर से कहा गया कि सीबीआई ने 60 दिन की निर्धारित अवधि में चार्जशीट न देकर 119 दिन बाद दाखिल किया है, इसलिए उसे अवैध निरुद्धि से मुक्त किया जाए या जमानत पर रिहा किया जाए। सीबीआई के वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश व एडवोकेट संजय यादव का कहना था कि कोविड-19 संक्रमण से देशव्यापी लॉकडाउन के कारण अदालतें बंद थीं। गत आठ जून को जिला न्यायालय खुले तो गाजियाबाद स्थित सीबीआई अदालत भी बैठी और उसी दिन इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी गई। इसमें अनावश्यक देरी नहीं की गई है। परिस्थितियों को देखते हुए इसे समय से दाखिल माना जाए।
बता दें कि सीबीआई ने गाजियाबाद की अदालत में यादव सिंह और अन्य के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने और नोएडा प्राधिकरण को 50 लाख से वित्तीय नुकसान पहुंचाने के आरोप में तीन चार्जशीट दायर की है। जांच एजेंसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि स्पेशल जज की अदालत में चीफ इंजीनियर और अन्य के खिलाफ तीन चार्जशीट फाइल की गई है। सीबीआई ने बताया है कि यादव सिंह ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर एक इंजीनियरिंग कंपनी को इलेक्ट्रिकल वर्क के करोड़ों रुपये के अवैध तरीके से टेंडर दिए थे। सीबीआई ने बताया कि यादव सिंह के इशारे पर वर्ष 2007 से लेकर 2012 तक जावेद अहमद की गुल इंजीनियरिंग कंपनी को इलेक्ट्रिकल वर्क के करोड़ों रुपये के टेंडर गलत तरीके से छोड़े गए थे।
2015 में शुरू हुई थी जांच : नोएडा के चीफ इंजीनियर रहे यादव सिंह के खिलाफ पहली बार वर्ष 2015 में जांच शुरू हुई थी। सीबीआई ने 2016-17 में दो चार्जशीट तैयार की थी। सीबीआई के आरोप-पत्र में कहा गया था कि यादव सिंह ने अप्रैल 2004 से चार अगस्त, 2015 के बीच आय से अधिक 23.15 करोड़ रुपये जमा किए, जो उनकी आय के स्रोत से लगभग 512.6 प्रतिशत अधिक है। नोएडा अथॉरिटी के पूर्व इंजीनियर यादव सिंह पर कुल 954 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है। जनवरी 2018 में सीबीआई ने उस मामले में जांच शुरू की थी जब यादव सिंह चीफ इंजीनियर थे। उस वक्त 5 प्राइवेट फर्म्स को कुल 116.39 करोड़ का टेंडर जारी हुआ था।
लखनऊ। कानपुर के चौबेपुर के दुर्दांत गैंगस्टर विकास दुबे के गुरुवार को मध्य प्रदेश के उज्जैन में गिरफ्तारी पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सवाल उठाया है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भले ही विकास दुबे को लेकर ट्वीट किया है, लेकिन बसपा प्रमुख मायावती या बेहद सक्रिय कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का इस मामले में अभी कोई बयान नहीं आया है।
विकास दुबे की उज्जैन में गिरफ्तारी को लेकर अखिलेश यादव ने ट्वीट किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार साफ करे कि यह आत्मसमर्पण है या गिरफ्तारी। सरकार साफ करे विकास दुबे ने आत्मसमर्पण किया है, या उसे गिरफ्तार किया गया है। अखिलेश यादव ने ट्वीट किया है कि खबर आ रही है कि कानपुर-काण्ड का मुख्य अपराधी विकास दुबे पुलिस की हिरासत में है। अगर यह सच है तो सरकार साफ करे कि यह आत्मसमर्पण है या गिरफ्तारी।
अखिलेश ने मामले में विकास दुबे के मोबाइल की पूरी जांच करने की मांग की है, जिससे कि यह सामने आ सके कि उसे कौन सहायता दे रहा था। इसके साथ ही उसके मोबाइल का कॉल डिटेल भी सार्वजनिक हो, जिससे सच्ची मिलीभगत का भंडाफोड़ हो सके। उन्होंने कहा कि विकास दुबे की जिस-जिस ने मदद की उनका नाम सामने आना चाहिए। ऐसा न हो कि विकास दुबे को जेल भेज कर उसको संरक्षण देने वालों को बचा लिया जाए। विकास दुबे से किसने-किसने बात की इसकी पूरी कॉल डिटेल जारी होनी चाहिए। जिससे अधिकारियों, पुलिसकर्मियों व राजनेताओं के कॉकस का चेहरा भी बेनकाब हो।