Category: uttar-pradesh

  • वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम के अवसर पर अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा ने किया पौधरोपण

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    रिपोर्ट:सैय्यद मकसूदुल हसन

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    विभिन्न स्थानों पर हो रहे वृक्षारोपण कार्यक्रम का किया निरीक्षण।

    घरों में सहजन व औषधीय पेड़ जरूर लगाएं…….अपर मुख्य सचिव मोनिका एस. गर्ग।

    पेड़ लगाने के साथ ही उनका संरक्षण भी जरूरी……..अपर मुख्य सचिव।

    अमेठी। रविवार वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद नोडल अधिकारी/अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्रीमती मोनिका एस. गर्ग ने आज जगदीशपुर के मरौचा तेतारपुर व मंगरौरा स्थित लखनऊ-सुल्तानपुर मार्ग पर पौधरोपण कर वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। जिसमें मरौचा तेतारपुर स्थित तालाब के किनारे 1000 पौधे रोपित किए गए तथा मंगरौरा स्थित लखनऊ-सुल्तानपुर मार्ग पर 37896 पौधे रोपित किए गए हैं, इसके साथ ही पूरे जनपद में 37 लाख 04 हजार पौधे जनप्रतिनिधियों व जनसहभागियों के माध्यम से आज रोपित किए जाएंगे। इसके साथ ही अपर मुख्य सचिव ने विभिन्न स्थानों पर हो रहे वृक्षारोपण कार्यक्रम का निरीक्षण भी किया एवं आवश्यक निर्देश दिए। वृक्षारोपण के उपरांत अपर मुख्य सचिव ने जगदीशपुर स्थित बीएचईएल में मीडिया बंधुओं के साथ प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि इस वर्ष पूरे प्रदेश में आज 25 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे, जिसके क्रम में आज जनपद अमेठी में शासन द्वारा वृक्षारोपण कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए नोडल अधिकारी नामित करते हुए भेजा गया है, अपर मुख्य सचिव ने कहा कि वन विभाग द्वारा जो पौधे लगाए जा रहे हैं उनकी गुणवत्ता अच्छी है तथा विभिन्न प्रजातियों के फलदार, फूलदार व छायादार पौधे लगाए जा रहे हैं। दौरान उन्होंने आमजन से अपील करते हुए कहा कि अपने घरों में शहजन का पेड़ जरूर लगाएं इसके साथ ही औषधीय पौधों को भी लगाएं । अपर मुख्य सचिव ने कहा कि पेड़ लगाने के साथ ही उनका संरक्षण भी जरूरी है। इस दौरान अपर मुख्य सचिव ने जनसामान्य से कोविड-19 कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव एवं रोकथाम हेतु जागरूक रहने की अपील किया। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी प्रभुनाथ, उपजिलाधिकारी मुसाफिरखाना रामशंकर, उप प्रभागीय वनाधिकारी ए.के. द्विवेदी सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

  • यूपी सरकार का निर्देश, ऑनलाइन कक्षाएं स्कूल फीस न जमा कर पाने वाले विद्यार्थियों को भी पढ़ाएं

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    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कोराना महामारी के बीच स्कूलों की फीस को लेकर अभिभावक और स्कूल प्रबंधक आमने-सामने हैं। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल जबरिया तीन-तीन महीने की फीस ले रहे हैं और न देने पर नाम काट रहे हैं। प्रदेश भर से ऐसी तमाम शिकायतें आने के बाद उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला की ओर से सभी जिलों के डीएम और डीआइओएस को निर्देश हैं कि वह यह सुनिश्चित करवाएं कि अगर कोई अभिभावक किन्हीं कारणों से स्कूल की फीस नहीं जमा कर पा रहा है तो उसके बच्चे का स्कूल से नाम न काटा जाए। ऐसे विद्यार्थियों को भी नियमित ऑनलाइन कक्षाएं पढ़ाई जाएं।

    उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला  की ओर से जारी निर्देश में कहा गया कि अभिभावकों से मासिक आधार पर ही शुल्क लिया जाए और परिवहन शुल्क किसी कीमत पर न लिया जाए। अभिभावकों को यदि फीस देने में कठिनाई है तो उनसे प्रार्थना पत्र लेकर उस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए। ऐसे अभिभावकों से आसान किश्तों पर फीस लेने की व्यवस्था की जाए, क्योंकि लॉकडाउन के कारण तमाम अभिभावक आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे हैं। कहा गया कि शुल्क से संबंधित मामले में यदि कोई भी पक्ष क्षुब्ध है तो वह उप्र स्वावित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) 2018 के अंर्तगत गठित जिला शुल्क नियामक समिति के सामने अपना पक्ष रख सकता है।

    इस तरह के आवेदनों पर जिला शुल्क नियामक कमेटी एक सप्ताह के अंदर निर्णय लेगी। वहीं ऐसे अभिभावक जो नियमित वेतन भोगी सरकारी या सार्वजनिक उपक्रम इत्यादि में कार्यरत हैं और निजी क्षेत्र के वह अभिभावक जो इनकम टैक्स देते हैं, उन्हें नियमित रूप से मासिक आधार पर स्कूल का शुल्क जमा करना होगा, क्योंकि स्कूल प्रबंधन को शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मियों को वेतन भी देना होता है।

  • चौबेपुर पुलिस थाने में 10 कांस्टेबलों को मिली तैनाती

    चौबेपुर पुलिस थाने में 10 कांस्टेबलों को मिली तैनाती

    कानपुर। कानपुर के चौबेपुर के बिकरू गांव में आठ पुलिस कर्मियों के शहादत के बाद मंगलवार को 10 कांस्टेबलों को चौबेपुर पुलिस स्टेशन में तैनाती दी गई है। सभी सिपाही पुलिस लाइन से चौबेपुर थाने भेजे गए हैं। पुलिस अधीक्षक कानपुर दिनेश पी के जनसंपर्क अधिकारी रमेन्द्र ने बताया कि इतनी संख्या में पुलिस कर्मियों के शहीद होने बाद वहां काम प्रभावित हो रहा था, इस कारण मंगलवार को 10 कांस्टेबलों को चौबेपुर पुलिस स्टेशन में तैनाती दी गई है।

    सभी सिपाही पुलिस लाइन से चौबेपुर थाने भेजे गए हैं। आईजी रेंज कानपुर के अनुसार चौबेपुर थाने का पूरा स्टाफ कानपुर एनकाउंटर के मामले में जांच के दायरे में है।

    कानपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार कांस्टेबल सुधीर को पुलिस लाइन से चौबेपुर भेजा गया है। इसी तरह कांस्टेबल आशीष, विमल, रवि, मोहित, नवीन, विजेन्द्र, धीरज कुमार, लवकुश, रिशी यादव को भी पुलिस लाइन से चौबेपुर में तैनाती मिली है।

    इस मामले में पहले ही पूर्व एसओ चौबेपुर की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था। सोमवार को भी चौबेपुर थाने के तीन पुलिस कर्मियों की भूमिका संदिग्ध मिलने पर उन्हें भी सस्पेंड किया गया है। सूत्र बता रहे हैं कि चौबेपुर थाने के पुलिस कर्मियों के नंबर विकास के मोबाइल में मिले हैं।

    जांच टीम पूरे चौबेपुर थाने को विकास दुबे का मुखबिर मानते हुए सभी से पूछताछ कर रहे हैं।

    गौरतलब हो कि हिस्ट्रीशीटर विकास को पकड़ने गई पुलिस पर घात लगाकर बैठे बदमाशों ने हमला कर दिया था। जिसमें आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए थे। घटना के बाद से पुलिस की कई टीमें विकास की तलाश कर रही हैं। कई जिलों में छापेमारी हो रही है।

  • पुलिस का चला बुलडोजर विकास के किले जैसे घर में, दो घंटे में मलबे में हुअा तब्दील

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    कानपुर। चौबेपुर के बिकरू गांव में सीओ समेत आठ पुलिस कर्मियों को मौत के घाट उतारने वाले हिस्ट्रीशीटर अपराधी विकास दुबे के दो बीघे की चाहरदिवारी में बने किलेनुमा मुकान में पुलिस ने बुलडोजर चलाकर करीब दो घंटे में मलबे में तब्दील कर दिया है। घर के अंदर खड़ी दस से पंद्रह लाख कीमत वाली दो लग्जरी कार और दो ट्रैक्टर भी नष्ट कर दिए। ना शुरू कर दिया है। पुलिस ने बीते तीस घंटे में मकान सील करके चप्पे-चप्पे की तलाशी ली तो महफूज किले जैसी सुरक्षा घेरे वाले परिसर के अंदर बने पुराने मकान में अंडरग्राउंड बंकर भी मिला है। पुलिस मकान ढहाकर बंकरनुमा तलघर के सिरे को भी देख रही है।

    दो बीघा के अंदर चार कमरे नए हैैं, जहां विकास रहता था। पूरे की करीब 12 फीट ऊंची बाउंड्रीवाल है। कोई दाखिल न हो सके, इसलिए करीब दो फीट ऊंचाई में छल्लेदार कंटीले तार भी लगाए गए हैैं। गांव वालों के मुताबिक नया घर सात-आठ साल पहले ही बना है। बाउंड्रीवाल के अंदर ही पैतृक घर भी है, जहां अब सेवादार रहते हैैं। घर में दाखिल होने के चार गेट हैैं। एक मुख्य द्वार है। दो गेट दाएं-बाएं वाली गलियों में खुलते हैैं तो चौथा गेट पुराने घर से अंदर आने-जाने का है। तीनों नए गेट इतने चौड़े हैैं कि चार पहिया वाहन आ जाए। चारों गेट के बाहर और अंदर सीसीटीवी कैमरे लगे हैैं। कोई गेट के पास पहुंचा नहीं कि सीसीटीवी से उसे खबर लग जाती।

    मुख्य गेट से करीब 80 मीटर अंदर चार कमरों वाले आलीशन घर में ही विकास रहता था। यहां जाने से पहले चैनल का मजबूत गेट लगा है। दालान और फिर बाएं बैठक का कमरा। इस कमरे के बराबर विकास का बेड रूम। दाहिने कमरे में पिता रामकुमार दुबे और उनके पीछे वाले कमरे में कामवाली रेखा अपने पति व दो बेटियों संग रहती है। सीढिय़ां बाहर से भी छत तक पहुंचाती हैैं, आंगन से भी। इन्हीं तगड़े इंतजामों और बेखौफ प्रवृत्ति के कारण पुलिस भी घर में दाखिल होने से घबराती थी। घर में ऐशो-आराम का भी पूरा इंतजाम है। बाथटब से लेकर वाश बेसिन तक डिजाइनर। किचन भी माड्युलर। यानी, सबकुछ ऐसा इंतजाम कि शहर में रहने वाले तमाम लोगों को भी शायद ही नसीब हो।

    पुलिस ने सारा दिन और रात मकान के हर एक हिस्से की गहनता से छानबीन की। पुलिस को शनिवार सुबह पुराने मकान में एक अंडरग्राउंड बंकर मिला। मकान की ऊपरी फर्श साधारण लग रही थी और उसपर लकड़ी का तखत रखा हुआ था। शुरुआत में पुलिस टीम छानबीन करके चली गई, फिर दोबारा पड़ताल में पुलिस टीम ने तखत हटाकर ठोका तो खोखलेपन की आवाज महसूस हुई। इसपर पुलिस को संदेह हुआ और पड़ताल की तो फर्श के नीचे तलघर बना मिला। माना जा रहा है कि अपराध करने के बाद विकास इसी अंडरग्राउंड बंकर में छिप जाता था।

    पुलिस ने घर के अंदर से विकास के पिता और नौकरनी समेत परिवार को बाहर निकाल दिया। इसके बादमकान के आसपास पचास मीटर पर आवागमन बंद करा दिया है, मीडिया को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। पुलिस ने बुलडोजर से चाहरिदवारी को गिराना शुरू कर दिया है, अंदर कार खड़ी किए जाने वाले हिस्से को भी ढहा दिया।

    पुलिस ने दो घंटे की कार्रवाई में पूरे मकान को गिराकर मलबे में तब्दील कर दिया है। गैराज गिराकर दस से पंद्रह लाख कीमत वाली दो कारें और दो ट्रैक्टर पर क्षतिग्रस्त कर दिए हैं। मकान में महंगे बाथरूम, ड्राइंग रूम और किचने समेत सभी हिस्सों को गिरा दिया गया है। गांव में सशस्त्र पुलिस फोर्स तैनात है। वहीं गांव वाले भी दूर से पुलिस की कार्रवाई को देख रहे हैं और पुलिस फोर्स को देखकर पास जाने की कोई हिम्मत नहीं कर रहा है।

  • यूपी में अवैध खनन का कारोबार अफसरों व माफिया के गठजोड़ से फिर उठाने लगा सिर

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    लखनऊ। खनन एक ऐसा शब्द है जिसके साथ अवैध शब्द स्वत: ही जुबान पर आ जाता है। इसकी वजह संभवत: यह है कि सपा-बसपा शासन में लोगों ने इससे अरबों रुपये की कमाई की और सरकारी धन की सिलसिलेवार लूट की खबरें बाद में लंबे समय तक सुर्खियों में रहीं। यहां तक कि सपा शासनकाल में मंत्री गायत्री प्रजापति को जेल तक जाना पड़ा। लेकिन, अवैध खनन की जिन्न समय-समय पर फिर सिर उठाता है। उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने इस पर काबू करने की कोशिशें तो की लेकिन, विभागीय अधिकारी, पुलिस, परिवहन और माफिया का गठजोड़ एक बार फिर सिर उठाने लगा है। सरकार की आंखों में धूल झोंककर अवैध खनन-परिवहन एक बार फिर शुरू है।

    अवैध खनन के कारोबार पर अंकुश लगाने के दावे कुछ इसी तरह के हैं जैसे कि गोमती नदी या तालाबों से जलकुंभियों को दूर करने की बात की जाए। हर सरकार में इस बात के दावे हुए और भाजपा सरकार ने तो चौतरफा नाकेबंदी भी कराई। खदानों में कांटा व सीसीटीवी कैमरे से लेकर अवैध खनन-परिवहन के लिए बदनाम जिलों में खनिज बैरियर भी लगाए। लेकिन, आज भी सूबे की राजधानी से लेकर नेपाल बार्डर व कमोवेश प्रदेश के सभी जिलों तक क्षमता से दो से तीन गुना मौरग व गिट्टी लदे ट्रक बहुतायत में देखे जा रहे हैं। जांच में कई स्थानों में बगैर रायल्टी वाले मोरंग लदे ट्रक भी पकड़े गए हैं। जाहिर है कि अवैध खनन में सत्ता के समानांतर काम करने वाला तंत्र एक बार फिर सक्रिय है। प्रयागराज का ही उदाहरण लें, यहां यमुनापार से आने वाले दो हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। मुकदमे भी दर्ज कराए गए हैं। लेकिन, उन मुकदमों की आड़ ही अन्य वाहनों के बेरोकटोक निकलने का जरिया बन जाती है।

    ऐसा नहीं कि यह स्थिति गंगा किनारे के बुंदेलखंड वाले जिलों में ही है। ब्रज में भी ऐसी ही स्थिति है। वहां खुलेआम अवैध खनन हो रहा है। ट्रकों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की कतारें देख पुलिस नजरें फेर लेती है और खनन विभाग चुप्पी साधे रहता है। इसी का परिणाम है कि खनन माफिया बेखौफ है। धंधे में रोड़ा अटकाने वालों को बेखौफ माफिया जानलेवा हमले तक करते और करवाते हैं।

    खनन के मामले में सुíखयों में रहने वाले बिजनौर जिले के प्रशासन ने सफाई दी है कि बरसाती नदियों में रेत बजरी का खनन काफी समय से बंद है। हरिद्वार-काशीपुर फोरलेन बाईपास निर्माण में मिट्टी का भराव किए जाने के कारण खनन किया जा रहा है। हाल ही में एसडीएम ने कोटावाली नदी क्षेत्र में अवैध खनन में एक जेसीबी और एक वाहन को पकड़कर सीज कर दिया था। सहारनपुर के बेहट व मिर्जापुर में हरियाणा के खनन माफिया खनन करते हैं। पिछले दिनों 14 खनन माफिया को पकड़ा भी गया। बरथा घाट पर पीएसी की तैनाती की गई।

    शामली जिले के गांव मामौर में खनन माफिया ने अस्थायी पुल बनाया था। मामला सुर्खियों में आने पर एनजीटी ने संज्ञान लेकर पुल को हटवाया था। पिछले वर्ष ही सीबीआई ने अवैध खनन को लेकर जांच की थी। शामली में पूर्व में तैनात रहे खनन अधिकारी शासन स्तरीय जांच में दोषी पाए गए थे। मुजफ्फरनगर में पुलिस की मिलीभगत से जनपद में पुरकाजी से खतौली तक अवैध तरीके से गंगनहर से खनन करते हैं। प्रत्येक साल कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। जिला खनन अधिकारी ने बागपत जिले के फिरोजपुर गांव में 10 लोगों को नामजद किया था। बदरखा तथा छपरौली में चार ट्रैक्टर-ट्राली कब्जे में ली थी। मेरठ के परीक्षित गढ़ क्षेत्र में एक ट्राली व दो डंफर पकड़े थे।

    बरेली में भी खनन माफिया बेखौफ : बरेली में खनन माफिया लंबे समय से सक्रिय है। शहर से लेकर कस्बों तक में अवैध खनन होता है। वहीं, कार्रवाई के नाम पुलिस छह महीने में एक-दो बार महज ट्राली पकड़कर इतिश्री कर लेती है। जबकि खनन सिंडिकेट चलाने वाले माफिया पर कोई कार्रवाई नहीं होती। जिले में मोहम्मदपुर और टयूलिया में महज दो जगह खनन की अनुमति है। इसके बावजूद इज्जतनगर के बैरियर वन, सुभाषनगर क्षेत्र में रामगंगा किनारे, फरीदपुर में ढकनी, पढेरा क्षेत्र में खुलेआम अवैध खनन होता है। आंवला तहसील में रामगंगा किनारे शिवपुरी, अलीगंज, अंजनी गांव में बालू अवैध खनन होता है।

    अलीगंज थाना क्षेत्र में अरिल नदी किनारे ब्योधन खुर्द में भी मिटटी का कटान होता है। मीरगंज में भी यही स्थिति है। बावजूद इसके बीते दो महीने में पुलिस ने अवैध खनन के खिलाफ एक भी कार्रवाई नहीं की है। जिला खनन अधिकारी कमल कश्यप का कहना है कि महज दो जगह खनन का पटटा है, वहीं से मिटटी ढोई जा रही। शाहजहांपुर जिले में गर्रा नदी किनारे शहर से लेकर तिलहर तक अवैध खनन होता है। इसके अलावा मिर्जापुर-कलान में रामगंगा किनारे बसे गांवों में बालू का खनन चालू है। बदायूं के कछला व कुछ अन्य क्षेत्रों बदायूं के कछला में कुछ महीने पहले कछला में अवैध खनन करते हुए कुछ लोग पकड़े भी गए थे। मुरादाबाद पुलिस ने एक माह में 40 वाहनों को अवैध खनन में सीज किया है।

    कार्रवाई भी, समानांतर कारोबार भी : मनमाना खनन कर माफिया नदी और पहाड़ों का सीना छलनी कर रहे हैं। जिन्हें रोकना है, कार्रवाई बता रही है कि उसमें से कुछ ही संजीदगी दिखा रहे हैं। महोबा में तो एक थानेदार को खनन माफिया के साथ संबंध के आरोप में निलंबित भी किया जा चुका है। बांदा में ग्रामीणों के आंदोलन पर दो ठेकेदारों पर करीब दो करोड़ समेत अवैध खनन पर 6.5 करोड़ रुपये जुर्माना वसूला गया। फतेहपुर व उन्नाव में पोकलैंड मशीनें सीज की गई। बाकी स्थानों पर ओवरलोडिंग पर ही कार्रवाई हुई। जाहिर है कि कार्रवाई के साथ समानांतर कारोबार भी चल रहा है। बुंदेलखंड में 307 खनन के ठेकों में 158 जारी हैं। वहीं 35 से अधिक मनाही वाले स्थानों पर खनन हो रहा है। हमीरपुर में 73, चित्रकूट में बालू के अवैध परिवहन पर 17 ट्रक पकड़े गए। अवैध खनन पर 19 लाख रुपये जुर्माना वसूला गया।

    औरैया में एक ही स्थान पर खनन : महोबा में डंपिंग और अवैध खनन के खिलाफ 14 कार्रवाई कर 64.80 लाख रुपये जुर्माना वसूला गया है। बांदा में डंपिंग व अवैध खनन के खिलाफ 4-4 कार्रवाई हुई हैं और 6.92 करोड़ जुर्माना वसूला गया है। फतेहपुर में यमुना के पांच घाट हैं। रानीपुर घाट में दो पोकलैंड मशीनें सीज की गई थीं। 18 डंपिंग लाइसेंस हैं लेकिन डंप 50 से अधिक स्थानों पर है। आठ लाख रुपये जुर्माना वसूला गया। उन्नाव में मनाही वाले स्थान पर खनन हो रहा है। ओवरलोडिंग वाले 23 वाहन पकड़कर 4.50 लाख रुपये वसूले गए। औरैया में एक ही स्थान पर खनन हो रहा है। यहां, खनन वाहनों की ओवरलोडिंग पर 12.50 लाख रुपये जुर्माना वसूला गया। इटावा में यमुना में चार ठेके हैं लेकिन खनन बंद हैं।

    पीलीभीत में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष के भाई पर हुई थी कार्रवाई : पीलीभीत जिले में बीसलपुर के करखेड़ा, राजूपुर कुंडरी गांव में पट्टा किया था, लेकिन शर्तों का उल्लंघन कर अवैध तरीके से खनन किया जा रहा था। करीब छह महीने पहले इसकी शिकायत बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा ने मुख्यमंत्री से की थी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर डीएम ने जांच कराई तो मामला सही पाया गया था। जिसके बाद भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जेपीएस राठौर के भाई डीपीएस राठौर व पट्टा लेने वाले महेंद्र पाल पर मुकदमा दर्ज किया गया था। वहीं, करीब साढ़े 17 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।

    घटनाएं हैं गवाह 

    • आगरा में पांच जून, 2019 में खेरागढ़ के बुरहरा गांव में खनन माफिया और पुलिस की एक घंटे तक आमने-सामने की फायरिंग हुई। इसके चार पुलिसकर्मी घायल हुए। दो के पैर में गोली लगी थी। माफिया ट्रैक्टर लेकर खेतों के रास्ते भाग गए।
    • आगरा में सात जून, 2019 को मंसुखपुरा क्षेत्र में वनर्किमयों ने खनन माफिया के ट्रैक्टर-ट्रॉली रोकने की कोशिश की। इस पर माफिया ने वन विभाग की टीम पर फायरिंग कर दी।
    • आगरा में तीन नवंबर, 2019 को इरादत नगर में सब इंस्पेक्टर निशामक त्यागी को खनन माफिया ने ट्रैक्टर रोकने पर गोली मार दी थी।
    • आगरा में 19 दिसंबर 2019 को यमुना से बालू ले जा रहे ट्रैक्टर- ट्रॉली को रोकने पर माफिया ने सिपाहियों पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश की। किसी तरह उन्होंने जान बचाई।
    • आगरा में 18 अक्टूबर 2019 को खेरागढ़ के रूधऊ गांव से होकर माफिया चंबल सेंड ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर ले जा रहे थे। दो सिपाहियों ने रोकने की कोशिश की तो उन पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश की।
    • आगरा में एक जून 2020- फतेहपुर सीकरी में खनन माफिया ने पुलिस पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश की। इसमें पुलिसकर्मी चुटैल हो गए। बाद में पुलिस ने ट्रैक्टर-ट्रॉली सीज कर दिए।
    • मथुरा में 30 जनवरी, 2018 को नौहझील क्षेत्र में सब इंस्पेक्टर सुमित कुमार, एसआइ जितनपाल, कांस्टेबल भरत शर्मा पर हमला किया और एक दारोगा की पिस्टल छीन ली।
    • मथुरा में 21 जून, 2019 को कंजौली घाट पर रैपुरा जाट चौकी प्रभारी चंद्रभान सिंह की वर्दी फाड़ दी। सितंबर, 2019 में गांव सलेमपुर में पुलिस पर हमला बोला, जिसमें एसआइ महेश कुमार को भाग कर जान बचानी पड़ी और सिपाही अंकित कुमार को माफिया ने पकड़कर आगरा बॉर्डर पर फेंक दिया।
    • फीरोजाबाद में दो साल पहले नारखी क्षेत्र में बालू का ट्रैक्टर रोकने पर डायल 100 पर तैनात सिपाही को कुचलकर मार डाला था।

  • गिरफ्तार किये गए विकास दुबे की बहू, नौकरानी और पड़ोसी….

    गिरफ्तार किये गए विकास दुबे की बहू, नौकरानी और पड़ोसी….

    कानपुर। पुलिस की साठ टीमें मोस्टवांटेड विकास दुबे की तलाश में जुटी हैं, उसके मध्य प्रदेश और राजस्थान भाग जाने की आशंका बढ़ गई है। वहीं पुलिस ने विकास की बहू, नौकरानी और एक पड़ोसी को गिरफ्तार किया है। मुठभेड़ में शहीद हुए आठ पुलिस जवानों के परिवार को जिले पुलिसकर्मी और अधिकारी एक दिन वेतन देंगे।

    -शहर के विजय नगर में तीन लावारिस कार मिलने के बाद विकास दुबे से कनेक्शन को लेकर संदेह के घरे में आए ब्रह्मनगर के जय बाजपेयी को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। हालांकि तीनों कारें जय बाजपेयी के नाम नहीं थी लेकिन कार मालिकों ने जय द्वारा उनके नाम से कार खरीदने की जानकारी दी थी।

    -काकादेव पुलिस छानबीन में उनका कोई कनेक्शन विकास से ढूंढ सकी थी। अब एसटीएफ ने जय बाजपेयी से पूछताछ शुरू की है और विकास दुबे से कनेक्शन तलाशने में जुटी है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि जय ब्याज और बीसी का काम करता है। इसमें तमाम लोग अपना पैसा लगाते हैैं।

    -बिकरू हत्याकांड में पुलिस ने सोमवार रात विकास के दिवंगत भतीजे संजय दुबे उर्फ संजू की पत्नी क्षमा, मुठभेड़ में पकड़े गए नौकर दयाशंकर अग्निहोत्री की पत्नी रेखा और पड़ोसी सुरेश वर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया। तीनों पर दबिश के दौरान बदमाशों को पुलिस कर्मियों के मूवमेंट की सूचना देने और हत्या करने के लिए उकसाने का आरोप है। उनके खिलाफ साजिश रचने की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है।

    -हाईवे पर कानपुर देहात और उन्नाव के टोल प्लाजा पर विकास दुबे का पोस्टर चस्पा करने के बाद अब पुलिस अफसरों ने नगर समेत आसपास जिलों में तैनात प्रत्येक सिपाही के मोबाइल फोन पर विकास दुबे की फोटो भेज दी है ताकि यदि कहीं किसी पर संदेह हो तो तत्काल फोटो से मिलान करके सूचना दे सकें।

    -बिकरू में मुठभेड़ में शहीद हुए सीओ व अन्य पुलिस कर्मियों के परिवार के लिए जिले के पुलिस अधिकारी व कर्मचारी अपना एक दिन का वेतन देंगे, इस बाबत सभी ने मिलकर यह सहमति जताई है। पुलिस अफसरों ने जल्द ही चेक शहीदों के स्वजन को सौंपने की बात कही है।

    हमले के दौरान पुलिस कर्मियों के मूवमेंट की जानकारी दे रहा था पड़ोसी

    चौबेपुर थाना प्रभारी कृष्णमोहन राय के मुताबिक सुरेश वर्मा का घर बिकरू गांव में विकास के घर के पास ही है। जब विकास और उसके साथी पुलिस टीम पर गोलीबारी कर रहे थे, तब सुरेश उनकी हौसलाअफजाई कर रहा था। वह पुलिस को देखकर चिल्लाकर बदमाशों से कह रहा था कि आज कोई बचकर न जाए। पुलिस कर्मी जब आड़ लेकर छिप रहे थे तो उनके बारे में भी सूचना दे रहा था। क्षमा दुबे विकास के भतीजे संजू की पत्नी होने के साथ ही हमले में नामजद अमर दुबे की मां है।

    फायङ्क्षरग के दौरान कुछ पुलिसकर्मी क्षमा से उसके मकान में शरण लेकर जान बचाने के लिए दरवाजा खोलने के लिए कह रहे थे, लेकिन क्षमा ने दरवाजा नहीं खोला। इतना ही नहीं, सीढ़ी के रास्ते अपने मकान की छत पर आकर उसने पुलिसकर्मियों के छिपे होने की जानकारी बदमाशों को दी थी। इसके बाद बदमाशों ने छतों से उतरकर पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी थी।

    विकास की नौकरानी रेखा अग्निहोत्री ने भी पुलिस टीम के आने की सूचना हमलावरों को दी। वह चिल्लाकर कह रही थी कि मारो इनको, कोई बचकर जाने न पाए। उसने विकास के सामने वाले मकान की दीवार की आड़ में छिपे दो पुलिस वालों के बारे में भी हमलावरों को बताया था। इसके बाद बदमाशों ने उन पुलिसकर्मियों को भी ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हत्या कर दी थी।

    क्षमा के पति पर भी दर्ज थे मुकदमे

    क्षमा का पति संजय दुबे भी शातिर अपराधी था और विकास के साथ ही वारदातों में शामिल रहा था। थाने में उसकी हिस्ट्रीशीट भी खुली थी। कई वर्ष पूर्व एक सड़क हादसे में संजय की मौत हो गई थी, फिर उसके बेटे अमर का हाथ विकास ने थाम लिया और वारदात को अंजाम देने के लिए उसे साथ ले जाने लगा।

    पुलिस परिवार बांट रहा शहीदों के परिवारों का दर्द

    मुठभेड़ में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद उनके स्वजन गम में बेहाल हैं। नम आंखों से वह हर पल दुर्दांत हत्यारे विकास के लिए भगवान से मौत की सजा मांग रहे हैैं। इस घड़ी में पुलिस परिवार उनका दर्द बांटने में जुटा है। एसएसपी दिनेश कुमार पी ने बताया कि सभी अधिकारियों व कर्मचारियों ने स्वेच्छा से अपना एक माह का वेतन इन परिवारों को देने की बात कही है। जल्द चेक शहीदों के स्वजन को दिए जाएंगे।

  • मा0 मंत्री चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, परिवार कल्याण तथा शिशु कल्याण विभाग, उ0प्र0/जनपद प्रभारी मंत्री जय प्रताप सिंह जी द्वारा केएनआईटी परिसर में पौधरोपण कर वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का किया गया शुभारम्भ

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    रिपोर्ट:सैय्यद मकसूदुल हसन

    सुलतानपुर 05 जुलाई/ मा0 मंत्री चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, परिवार कल्याण तथा शिशु कल्याण विभाग, उ0प्र0/जनपद प्रभारी मंत्री जय प्रताप सिंह जी द्वारा केएनआईटी परिसर में पंचवटी के वृक्ष बरगद का पेड़ लगाकर शुभारम्भ किया गया। तत्पश्चात हरिशंकरी (पीपल, पाकड़, बरगद) का पौध रोपित किया गया। उन्होंने प्रभागीय वनाधिकारी से वृक्षों के गुण एवं महत्व के विषय में जानकारी प्राप्त की। मा0 मंत्री जी के साथ-साथ मा0 विधायक सुलतानपुर सूर्यभान सिंह द्वारा पीपल, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ0 आर0ए0 वर्मा द्वारा मौलश्री, जिलाधिकारी सी0 इन्दुमती द्वारा आम, निदेशक केएनआईटी जे0पी0 पाण्डेय द्वारा महुआ, मुख्य विकास अधिकारी द्वारा नीम, एएसपी द्वारा मौलश्री, जिला विकास अधिकारी द्वारा मौलश्री, उप निदेशक कृषि द्वारा मौलश्री, जिला सूचना अधिकारी द्वारा शीशम, डीसी मनरेगा द्वारा आम का पौध रोपित कर कार्यक्रम को वृहद आकार दिया गया। इस प्रकार आज केएनआईटी परिसर में कुल 986 वृक्ष रोपित किये गये। वृक्षारोपण के पश्चात मा0 मंत्री जी की अध्यक्षता में केएनआईटी परिसर में बैठक की गयी। बैठक में जिलाधिकारी द्वारा अवगत कराया गया कि जनपद में कुल 3233750 पौध रोपित करने का लक्ष्य है, जिसे वन विभाग सहित 23 अन्य विभाग मिलकर पूर्ण कर रहे हैं। आज सुबह 6 बजे से प्रत्येक ग्राम पंचायत में पौध रोपण कार्यक्रम संचालित है। हमनें प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम 1000 पौधे रोपित करने का लक्ष्य रखा है। वन विभाग के अतिरिक्त स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा सीड बाल के माध्यम से पौधे तैयार किए गए हैं जिन्हें उचित मूल्य पर क्रय रोपित किया जा रहा है। इस प्रकार महिलाओं द्वारा नर्सरी तैयार करने से उनके रोजगार एवं आय में वृद्धि हुई है। जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में अवगत कराया कि मिशन 1000 के तहत जनपद में 1000 तालाबों की खुदाई करायी गई है और तालाबों के किनारों पर छायादार एवं फलदार वृक्ष रोपित किए जा रहे हैं, जिससे समुदाय को आर्थिक लाभ होगा तथा साथ ही तालाबों का सुन्दरीकरण कराकर उसे पिकनिक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। तालाबों के किनारों पर वृक्षारोपण द्वार भूमि को मृदा अपरदन से संरक्षित किया जा सकेगा तथा भू - जल स्तर को संरक्षित करने में मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त गौशालाओं के किनारों पर पौधरोपण कर प्राकृतिक चहारदीवारी तैयार कराई जा रही है। साथ ही साथ जन मानस में वृक्षारोपण के लाभ एवं उसकी महत्ता के बारे में जागरूक किया जा रहा है। मा ० मंत्री जी ने जिलाधिकारी द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए अवगत कराया कि प्रदेश का विभाजन होने से उत्तर प्रदेश का अधिकांश वन क्षेत्र उत्तराखंड में चले जाने के कारण उत्तर प्रदेश के सामने वन क्षेत्र विस्तार की चुनौती थी, जिसे वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम संचालित कर प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। वृक्षारोपण से वातावरण के साथ - साथ आत्मा का शुद्धिकरण होता है। कार्यक्रम के अन्त में जिलाधिकारी द्वारा प्रतीक स्वरूप मौलश्री रोपित गमला देकर मा ० मंत्री जी को सम्मानित किया गया। प्रभागीय वनाधिकारी आनंदेश्वर प्रसाद द्वारा कार्यक्रम की सफलता पर आभार एवम् धन्यवाद व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का कुशल संचालन उप प्रभागीय वनाधिकारी ए०के० शुक्ला द्वारा किया गया।इस अवसर पर वरिष्ठ जनपदीय अधिकारियों के साथ – साथ भाजपा पदाधिकारी एवं काफी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

  • पृथ्वी पर पर्यावरण को जीवंत बनाए रखने एवं जीवन को संजीवनी प्रदान करने के लिए वृक्षारोपण आवश्यक…मा. प्रभारी मंत्री

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    रिपोर्ट:सैय्यद मकसूदुल हसन

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    पौधरोपण कर वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का मा. प्रभारी मंत्री जी ने किया शुभारंभ।

    वृक्ष मानव जीवन की अमूल्य धरोहर…….मा. प्रभारी मंत्री।

    कोविड-19 से बचाव एवं रोकथाम हेतु जिला प्रशासन द्वारा किए गए कार्यों की किया सराहना।

    जनपद में एक ही दिन में 37 लाख 04 हजार पौधे रोपित…जिलाधिकारी।

    अमेठी। मा. राज्यमंत्री अल्पसंख्यक कल्याण मुस्लिम वक्फ एवं हज उत्तर प्रदेश/प्रभारी मंत्री मोहसिन रजा ने आज विकास भवन प्रांगण में पौधरोपण कर वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मा. मुख्यमंत्री जी के आवाह्नन पर आज पूरे प्रदेश में 25 करोड़ पौधे रोपित किए जाएंगे, जिसके क्रम में जनपद अमेठी में आज 37 लाख 4 हजार पौधे जनप्रतिनिधियों व जनसहयोगियों के माध्यम से रोपित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वृक्ष हमारी धरोहर हैं इसलिए प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह वृक्षारोपण कर कार्यक्रम में अपनी सहभागिता निभाए। उन्होंने कहा कि वृक्ष मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी हैं वृक्षों से हमें छाया, फल, ऑक्सीजन जो हमारे जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी है वह सब वृक्षों से ही हमें प्राप्त होती है इसलिए हमें अपने जीवन काल में अधिक से अधिक पेड़ लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर पर्यावरण को जीवंत बनाए रखने एवं जीवन को संजीवनी प्रदान करने के लिए वृक्षारोपण अत्यंत आवश्यक है वृक्षारोपण से वन संपदा में वृद्धि होती है वृक्ष ऑक्सीजन के उत्सर्जन के साथ ही वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड को नियंत्रित करते हैं, मानव व जीव-जंतुओं के जीवन को सुखी, समृद्ध एवं वायुमंडल को संतुलित बनाए रखने के लिए वृक्षों का विशेष महत्व है। इस दौरान उन्होंने आमजन से फलदार, फूलदार, छायादार व औषधीय पौधों को अधिक से अधिक लगाने की अपील किया। मा. प्रभारी मंत्री जी ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार निरंतर गरीब, पिछड़े व अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्तियों की मूलभूत सुविधाओं के लिए कार्य कर रही है। मा. प्रभारी मंत्री जी ने कोविड-19 कोरोना वायरस की रोकथाम एवं बचाव हेतु अभी तक जिला प्रशासन द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की एवं आवश्यक निर्देश दिए। वृक्षारोपण के उपरांत मा. प्रभारी मंत्री जी ने प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय में स्थापित जनपद स्तरीय कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया एवं संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। वृक्षारोपण कार्यक्रम में जिलाधिकारी श्री अरुण कुमार ने मा. प्रभारी मंत्री जी को अवगत कराते हुए बताया कि शासन के निर्देश के क्रम में आज जनपद अमेठी में एक ही दिन में 37 लाख 4 हजार पौधे रोपित किए जाएंगे, जिसमें जनप्रतिनिधि, अधिकारी/कर्मचारी, व्यापारियों अधिवक्तागणों एवं जनसहभागियों के माध्यम से रोपित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि वृक्षारोपण कार्यक्रम को लेकर जनपद में पूर्व में ही सभी विभागों को लक्ष्य आवंटित करते हुए कार्य योजना तैयार की गई थी जिसके क्रम में आज वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने प्रभागीय वनाधिकारी को विकास भवन के सामने खाली पड़ी जमीन पर आदर्श नर्सरी बनाने का निर्देश दिया तथा चारों तरफ विभिन्न प्रजातियों के पेड़ लगाने को कहा। उन्होंने बताया कि कोविड-19 के संक्रमण से बचाव एवं रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन जन सामान्य की मूलभूत सुविधाओं हेतु निरंतर प्रयासरत हैं। इस दौरान प्रभागीय वनाधिकारी यूपी सिंह, जनप्रतिनिधिगण, जनसामान्य मौजूद रहे।


  • कांस्टेबल से सीओ तक का सफर दिलेरी दिखा तय किया देवेंद्र मिश्र ने

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    लखनऊ। कानपुर में हिस्ट्रीशीटर बदमाश विकास दुबे को उसके गांव पकड़ने पहुंची तीन थानों पुलिस टीम अपनी ही सुरक्षा नहीं कर सकी और सीओ, एसओ समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए। गोली लगने से पांच पुलिसकर्मी, एक होमगार्ड और एक एसओ का प्राइवेट ड्राइवर घायल हैं। इसमें होमगार्ड की हालत गंभीर है। सूबे में यह पहली बार है, जबकि इतनी बड़ी संख्या में पुलिस वाले शहीद हुए हैं। यह खबर शहीदों के घर पहुंचते ही कोहराम मच गया।

    कानपुर में मुठभेड़ के दौरान शहीद सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा बेहद दिलेर थे। कांस्टेबल से सीओ तक का सफर उन्होंने अपनी दिलेरी की दम पर ही तय किया था। बांदा जिले के गिरवां क्षेत्र के सहेवा गांव निवासी सीओ देवेंद्र मिश्र बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता महेश प्रसाद शिक्षक थे। खुरहंड स्कूल से ही हाईस्कूल करने के बाद उन्होंने एचआइसी कॉलेज से इंटर पास किया था। इसके बाद जेएन कॉलेज से स्नातक करने के बाद वर्ष 1981 में कांस्टेबल के पद पर पुलिस विभाग में नौकरी पाई थी।

    शहीद सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा विभागीय परीक्षा पास कर एसआई बने और कानपुर की अहिरवां चौकी इंचार्ज का पद संभाला। इसके बाद वर्ष 2004-05 में वह उन्नाव जनपद के आसीवन थाना इंचार्ज की पोस्ट पर रहे। यहां उन्होंने एक शातिर अपराधी का एनकाउंटर किया। विभाग ने उनकी दिलेरी का इनाम आउट ऑफ टर्न प्रमोशन के रूप में दिया और प्रभारी निरीक्षक बनाया। तकरीबन दो वर्ष पहले ही वह प्रमोट होकर क्षेत्राधिकारी बने थे। परिवार में उनकी आखिरी बार बात जुड़वा भाई राजीव मिश्र से हुई थी। कोरोना संक्रमण काल पर चिंता जताते हुए उन्होंने परिवार के सभी सदस्यों की कुशलक्षेम पूछी थी और हालात सामान्य होते ही घर आने का वादा किया था।

    आतंक से लोहा लेते शहीद हुआ बैसवारे का लाल : कानपुर में आतंक का पर्याय बने अपराधी से लोहा लेते जिन पुलिस के जवानों ने सीने पर गोली खाई उनमें एक बैसवारे का लाल भी शामिल है। तड़के जब यह खबर शहीद दारोगा महेश यादव के रायबरेली जिले के सरेनी थाना क्षेत्र के दबपुरा बनपुरवा मजरे हिलौली गांव पहुंची तो कोहराम मच गया। पुलिस और प्रशासनिक अमले के साथ गांव के तमाम लोग पहुंच गए। महेश यादव ने वर्ष 1996 में पहली बार खाकी पहनी थी। सिपाही के पद पर सहारनपुर में उनकी भर्ती हुई थी। वर्ष 2014 में हुई परीक्षा में पास होने के बाद दारोगा बन गए। इस पर सबसे पहले एसएसपी कानपुर के पीआरओ की जिम्मेदारी मिली।

    महेश यादव अपनी मेहनत और लगन की बदौलत कानपुर नगर के कई थानों की कमान संभाली। इस वक्त उनकी तैनाती शिवराजपुर थाने में बतौर थानाध्यक्ष थी। कुख्यात अपराधी विकास दुबे से हुई मुठभेड़ में वह भी अपनी टीम के साथ पहुंचे थे। बदमाशों से भिड़ंत में दारोगा के शहीद होने की खबर शुक्रवार की सुबह करीब पांच बजे उसके घर पहुंची तो यहां कोहराम मच गया। पिता देवनारायण व भाई राजेश यादव गांव के अन्य लोगों के साथ शहीद का पार्थिव शरीर लेने कानपुर चले गए। इधर, घर में उनकी मां राम दुलारी, पत्नी सुमन, बेटे विवेक और विराट समेत अन्य परिवारीजनों का रो-रोकर हाल बेहाल हैं।

    दारोगा अनूप सिंह की कानपुर में हुई थी पहली तैनाती : कानपुर में हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे गैंग से मुठभेड़ में शहीद हुए अनूप सिंह की दारोगा के पद पर पहली तैनाती कानपुर में वर्ष 2017 में हुई थी। 21 वर्ष की उम्र में 2004 में कांस्टेबल पद पर उनका चयन हुआ था। प्रतापगढ़ जिले के मानधाता थाना क्षेत्र के बेलखरी गांव निवासी दारोगा अनूप कुमार सिंह ने पुलिस विभाग में भर्ती होने के बाद 10 साल प्रयागराज में नौकरी की थी। सिपाही की नौकरी के दौरान भी उनमें दारोगा बनने का जुनून था। वह वर्ष 2015 बैच के दारोगा थे। उन्नाव में ट्रेनिंग करने के बाद अगस्त 2017 में उनकी तैनाती कानपुर नगर जिले में हुई। तब से वहीं पर तैनात थे। परिवार के लोग उनकी शहादत की खबर सुनकर शुक्रवार सुबह ही कानपुर चले गए। घर में मां और पत्नी हैं। आस पड़ोस और रिश्तेदार उन्हें ढांढस बंधा रहे हैं।

    चचेरे भाई के निधन पर 14 मई को घर आए थे दारोगा नेबूलाल : कानपुर में हिस्ट्रीशीटर गैंग से मुठभेड़ में दारोगा नेबूलाल के शहीद होने की खबर शुक्रवार को प्रयागराज के हंडिया थाने से उनके घर भीटी नउआन पहुंची तो चीत्कार मच गया। पिता, पत्नी, भाई सहित परिवार व गांव के लोग कानपुर रवाना हो गए। शहीद दारोगा का बड़ा बेटा कानपुर में रहकर नीट की तैयारी कर रहा है। दारोगा नेबू लाल वर्ष पुत्र कालिका प्रसाद 1990 में पुलिस में कॉस्टेबल पद पर भर्ती हुए थे। 2009 में परीक्षा पास कर वह 2011 में दारोगा हुए थे। 2013 में कानपुर में तैनात हुए। वहां अकेले रहते थे। कुछ दिन से बड़ा बेटा कानपुर में रहकर नीट की तैयारी करता है। वह चार भाइयों व एक बहन में सबसे बड़े थे। उनके परिवार में बेटी सुनीता (30), बेटा अरविंद (23), मधुबाला (18) व बेटा हिमांशु (17) है। वह चचेरे भाई संतोष (30) के निधन पर घर आये थे और 24 मई को ड्यूटी पर कानपुर चले गए थे।

    गम में डूब गया मथुरा का गांव नवादा : कानपुर में बदमाशों से हुई मुठभेड़ में कान्हा की नगरी मथुरा के लाल ने भी अपना बलिदान दे दिया। बिठूर में तैनात सिपाही जितेंद्र पाल सिंह के बलिदान की खबर मिली तो हर दिल में गुस्से का गुबार भर गया, आंख बेटे की याद में नम हो गईं। मूलत: मथुरा के रिफाइनरी थाना क्षेत्र के गांव बरारी निवासी तीर्थपाल सिंह के तीन बेटों में जितेंद्र सबसे बड़े थे। करीब दो दशक से तीर्थपाल नवादा क्षेत्र के इंदिरा आवास कॉलोनी में रहने लगे थे। 2015 के बैच में जितेंद्र सिपाही के रूप में पुलिस विभाग में भर्ती हुए। शुक्रवार तड़के तीर्थपाल को फोन पर जितेंद्र के घायल होने की सूचना मिली थी। वह पत्नी रानी, छोटे बेटे जिनेंद्र, पड़ोसी मोतीराम, महेश, विनोद, संता कानपुर के लिए रवाना हो गए, लेकिन कुछ देर बाद जितेंद्र पाल के बलिदान की खबर मिली, तो कोहराम मच गया। जितेंद्र पाल जब पुलिस में भर्ती हुए, स्वजन ने उनसे बहुत सी उम्मीदें बांध लीं। मृदुभाषी जितेंद्र सभी के हर काम में शरीक होते थे। 23 जून को ही जितेंद्र मथुरा आए थे, यहां लोगों से मिलना उनकी आदत में शामिल था। सुबह जब जानकारी मिली, तो लोगों को सहसा विश्वास ही नहीं हुआ।

    पल भर में काफूर हो गईं जन्मदिन की खुशियां : कानपुर में दबिश देने गई पुलिस पर हुए जानलेवा हमले में शहीद हुए झांसी के सुल्तान सिंह का गुरुवार को जन्मदिन था। परिवार के साथ ही तमाम परिचितों से शुभकामनाएं लेने के कुछ समय बाद ही सुल्तान को दबिश में जाना पड़ा और यह घटना हो गई। उनके घर में मातम पसरा हुआ है, कुछ परिजन सूचना मिलते ही कानपुर रवाना हो गए हैं। परिवार के अन्य लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। कानपुर में तैनात सुल्तान सिंह पुत्र हरप्रसाद वर्मा का घर तो बूढ़ा भोजला में है, पर वह अपने ननिहाल मोहल्ला चौक दमेला मऊरानीपुर में शुरू से रहे। वहीं शिक्षा प्राप्त करने के बाद उनकी भर्ती भी मऊरानीपुर से ही हुई। सुल्तान की ससुराल उरई में है और वे अपनी पत्नी उर्मिला व 8 साल की बेटी चेरी को वहीं छोड़ आए थे। गुरुवार को पूरा परिवार उनका जन्मदिन मना रहा था, पर कुछ ही समय बाद परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट गया। बूढ़ा भोजला स्थित सुल्तान के घर पर उनके भाई-बहन ही मिले, अन्य लोग कानपुर जा चुके थे। घर से बिलखने की आवाजों ने फिजां को गमगीन कर दिया था। बहन कलावती का कहना था कि उनका भाई वीरगति को प्राप्त हुआ है, उन्हें अपने भाई पर गर्व है। मऊरानीपुर स्थित ननिहाल में भी जैसे दुख का पहाड़ टूट पड़ा है।

    आगरा निवासी बलिदानी बबलू के गांव में कोहराम : कानपुर में बदमाशों से मुठभेड़ में बलिदान हुए कांस्टेबल बबलू का आगरा जिले का गांव फतेहाबाद का पोखर पांडेय गमगीन है। शुक्रवार सुबह बेटे के बलिदान की जानकारी होते ही पिता व परिवार के अन्य सदस्य कानपुर चले गए। अब गांव के लोग और रिश्तेदार उनके घर पर हैं। गांव वालों को बेटे को खोने का गम है और अपराधियों पर गुस्सा भी है। उनका कहना है कि अब उनका खात्मा करना चाहिए। फतेहाबाद कस्बे से दो किमी दूरी पर स्थित गांव पोखर पांडेय निवासी छोटेलाल के बेटे बबलू वर्ष 2018 में पुलिस में कांस्टेबल पद पर भर्ती हुए। कानपुर में ही ट्रेनिंग के बाद वहीं तैनाती मिली। वर्तमान में वे बिठुर थाने में तैनात थे। परिवार के लोगों ने बताया कि गुरुवार शाम सात-आठ बजे भाई दिनेश के मोबाइल पर बबलू का फोन आया था। उनसे हालचाल लिए। दिनेश के मोबाइल पर इसके 12 घंटे बाद ही दुखद सूचना मिली। कानपुर से किसी पुलिस अधिकारी ने उन्हेंं फोन कर भाई के बलिदान के बारे में बताया। इसके बाद घर में कोहराम मच गया। पिता छोटेलाल, भाई दिनेश व परिवार के अन्य सदस्य कानपुर चले गए। घर में अभी कोहराम मचा है।

    राहुल ने पत्नी से कहा था-‘लौटकर बात करेंगे’  : कानपुर में शहीद होने वाले पुलिसकर्मियों में एक गाजियाबाद जिले के मोदीनगर की देवेंद्रपुरी कॉलोनी निवासी राहुल कुमार भी हैं। उन्होंने शाम को ही अपनी पत्नी से कहा था कि मुठभेड़ में जा रहा हूं, लौटकर बात करेंगे। लेकिन, क्या पता था कि काल बनकर बैठे बदमाश उनको दोबारा से किसी से बात करने का मौका ही नहीं देंगे। मूलरूप से ओरैया जिले के दिव्यापुर थाना क्षेत्र के रूरूकलां गांव निवासी राहुल के पिता ओमकुमार भी यूपी पुलिस में ही थे। वे मोदीनगर में साहबनगर, निवाड़ी रोड, मोदीपोन चौकी प्रभारी रहे थे। राहुल 2016 में यूपी पुलिस में भर्ती हो गए थे। पहली पोस्टिंग कानपुर में ही हुई थी। राहुल की शादी दिल्ली निवासी दिव्या से करीब डेढ़ साल पहले हुई थी। दो माह की बेटी नित्या भी है। भाई राकेश ने बताया कि राहुल शुरू से ही पुलिस में भर्ती होना चाहते थे। उनको यह प्रेरणा पिता से मिली। उन्होंने बताया कि पिता व मां को उनके बीमार होने के चलते अभी तक राहुल के शहीद होने की जानकारी नहीं दी गई है। पिता को यह कहकर कार में बैठाया गया कि राहुल के पैर में गोली लगी है। उसका बेहतर इलाज कराने के लिए कानपुर चलना है।

  • कोरोना के नोएडा में 96 नए मामले, सक्रिय मरीज हजार के पार

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    गौतमबुद्धनगर। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर यानी नोएडा में बीते 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 96 नए मामले सामने आए। जिले में कुल सक्रिय मरीजों की संख्या 1000 को पार कर गई है। इस दौरान 1 मरीज की मौत हो जाने से जिले में संक्रमण से मौतों का आंकड़ा बढ़कर 23 हो गया। राहत की बात यह कि अब तक 1541 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। वहीं बढ़ते संक्रमण को देखते हुए जिले में कंटेनमेंट जोन की संख्या भी बढ़ा दी गई है।

    जिला सूचना अधिकारी राकेश चौहान द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल सक्रिय मामलों की संख्या 1005 हो गई है। सभी संक्रमित मरीजों का इलाज जिले के अस्पतालों में किया जा रहा है। जिले में अब तक कुल 2569 संक्रमित मामले सामने आ चुके हैं। वहीं जिला प्रशासन द्वारा कंटेनमेंट जोन की एक नई सूची जारी की गई, जिसके मुताबिक, अब जिले में कंटेनमेंट जोन की संख्या 315 हो गई है। इनमें से श्रेणी 1 में 258 कंटेनमेंट जोन शामिल हैं। वहीं श्रेणी 2 में 57 कंटेनमेंट जोन शामिल हैं।”

    जिला प्रशासन कोरोना पर जीत पाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करता नजर आ रहा है। जेवर तहसील में कोविड हेल्प डेस्क स्थापित की गई है। इस हेल्प डेस्क की मदद से कोई भी व्यक्ति कोरोना वायरस को लेकर जानकारी प्राप्त कर सकता है।