Category: uttar-pradesh

  • दलितों के भारत बंद आंदोलन को मायावती ने किया समर्थन

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    Lucknow/New Delhi . एससी-एसटी एक्ट के केंद्र सरकार के रवैये से नाराज लोगों ने सोमवार को भारत बंद का आवाह्न किया है जिसके चलते पूरे प्रदेश में प्रदर्शन किए जा रहे है। इसी कड़ी में राजधानी में हज़रतगंज स्थित आंबेडकर प्रतिमा पर लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ नाराजगी जताते हुए जमकर नारेबाजी की।

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    आरक्षण समर्थक सुबह से ही हज़रतगंज चौराहे पर बड़ी संख्या में जुटने लगे थे और पुलिस भी बड़ी मुस्तैदी से प्रदर्शनकारियों को एक जगह एकत्र रखने का प्रयास करती रही। हलांकि कुछ लोगों ने शांति मार्च के बहाने सीएम आवास की ओर जाने का प्रयास किया पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया। दोपहर को एसएसपी दीपक कुमार स्वयं हज़रतगंज चौराहे पर पहुँच गए और सैंकड़ों  प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए फ़ायर बिग्रेड भी मंगवा ली गई।

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    बहुजन समाज पार्टी ने मौके को भुनाते हुए आनन-फ़ानन में नीले झंडे लोगों के हाथों में थमा दिए और जल्द ही जय भीम का नारा बसपा के नारों में तब्दील हो गया।SC/ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर दलितों के देशव्यापी आंदोलन को समर्थन देते हुए बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर निशाना साधा है.

    दलितों के देशव्यापी आंदोलन में अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और बिहार समेत कई अन्य राज्यों में झड़प की खबर है. मध्य प्रदेश में जहां 4 लोग मारे गए हैं वहीं राजस्थान के अलवर में एक प्रदर्शनकारी की मौत हुई है.

    मायावती ने कहा, ‘मैं एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ किए जा रहे विरोध प्रदर्शन का समर्थन करती हूं. मुझे पता चला है कि कुछ लोगों ने प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने की कोशिश की. मैं इसकी जोरदार निंदा करती हूं.

    उन्होंने कहा, ‘हमारी पार्टी विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार नहीं है.

    मायावती ने केंद्र सरकार पर इस मामले में देरी से पुनर्विचार याचिका दायर किए जाने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा को मायावती ने साजिश करार दिया.

    उन्होंने कहा, ‘प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के लिए कुछ असामाजिक तत्वों को भेजा गया, जिसकी वजह से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान हुआ और कुछ लोग मारे गए.

    मायावती ने इसके साथ ही हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की अपील की.

    गौरतलब है कि बीएसपी के पूर्व विधायक को हिंसा भड़काने की साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.

    मेरठ की एसएसपी मंजिल सैनी ने कहा, ‘वह (योगेश वर्मा) हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता है और हमने उसे हिरासत में लिया है.’

    उन्होंने कहा कि अभी तक 200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है. सैनी ने कहा, ‘सभी उपद्रवियों को रासुका के तहत गिरफ्तार किया गया है. अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है.

  • उत्तर प्रदेश पूरे देश में बिजली चोरी मामले में शीर्ष पर , केंद्र सरकार ने जारी किए खास निर्देश

    बिजली चोरी (लाइन हानियों) के मामले में उत्तर प्रदेश पूरे देश में शीर्ष पर है। 40 प्रतिशत से ज्यादा लाइन हानियों वाले देश भर के 145 विद्युत वितरण खंडों में 51 यूपी के हैं। केंद्र सरकार ने यूपी में लाइन हानियों पर चिंता जताते हुए इसे कम करने को कहा है।

     बिजली मंत्रालय ने 40 फीसदी से ज्यादा लाइन हानियों वाले वितरण खंडों के संबंध में 3 अप्रैल को दिल्ली में बैठक भी बुलाई है। प्रमुख सचिव ऊर्जा व पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष आलोक कुमार ने बिजली वितरण निगमों के एमडी को पत्र भेजकर लाइन हानियां कम करने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास करने को कहा है।

    पुनरीक्षित त्वरित विद्युत विकास एवं सुधार कार्यक्रम (आरएपीडीआरपी) के तहत जिन नगरों में पूंजी निवेश किया गया है, वहां लाइन हानियां घटाकर 15 फीसदी तक लाने का लक्ष्य रखा गया था।

    बिजली मंत्रालय ने इन नगरों को लाइन हानियों के अनुसार वर्गीकृत किया है। जिन 241 नगरों की लाइन हानियां 10 प्रतिशत से कम हैं, उनमें यूपी का एकमात्र नोएडा शामिल है। वहीं, दूसरे प्रदेशों के कई बड़े नगरों में लाइन हानियां दो से 10 प्रतिशत तक लाई जा चुकी हैं।

    इसी प्रकार आरएपीडीआरपी के तहत देश में कुल 266 नगर ऐसे हैं जहां लाइन हानियां 10 से 15 प्रतिशत के बीच हैं। इनमें यूपी का एकमात्र गाजियाबाद है।

    नोएडा व गाजियाबाद को छोड़कर प्रदेश के बाकी सभी नगरों में लाइन हानियां 15 फीसदी से ज्यादा हैं। आलोक कुमार का कहना है कि लाइन हानियां मानक से ज्यादा होने की वजह से बिजली क्षेत्र में वित्तीय संकट बना हुआ है।

  • केन्द्रीय मंत्री ने CM Yogi को पत्र लिखा, खाद से नॉन रिएंबर्सेबल टैक्स करें समाप्त

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    लखनऊ।केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने उत्तर प्रदेश में खाद पर लगे नॉन रिएंबर्सेबल इनपुट टैक्स को तत्काल समाप्त करने की मांग मुख्यमंत्री से की है। इसके लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।अनुप्रिया ने लिखा है कि प्रदेश के किसानों के हित में इस टैक्स को समाप्त किया जाना जरूरी है। इस टैक्स से उत्तर प्रदेश में खाद की प्रति बोरी की कीमत अन्य राज्यों की तुलना में 27 रुपये अधिक है।

    थोड़ी चिंता खाद की भी कीजिए

    उन्होंने लिखा है कि प्रदेश में 70 फीसदी जनता कृषि पर आधारित है। देश की कुल खाद का 15 फीसदी खपत अकेले प्रदेश में है। खाद्य एवं उर्वरक मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 47 लाख मीट्रिक टन खाद का प्रयोग हर साल होता है। इस लिहाज से प्रदेश के किसानों से करीब 300 करोड़ रुपये अतिरिक्त इस टैक्स के रूप में वसूला जा रहा है। इस टैक्स से किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ा है।

    अनुप्रिया पटेल ने केंद्रीय मंत्री सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं जल संसाधन नितिन गडकरी को पत्र लिखकर इलाहाबाद में नीवा, फाफामऊ से आगे मलाक हरहर चैराहे तक प्रस्तावित छह लेन पुल का नाम समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले के नाम पर रखने की मांग की है। लिखा है कि ज्योतिबा फुले ने दलितों, कमेरों, शोषितों और किसानों को उनका हक दिलाने के लिए जीवन भर संघर्ष किया। उनके लाखों-करोड़ों अनुयायियों की इच्छा है कि पुल का नाम उनके नाम पर रखा जाए। पुल का नामकरण महात्मा ज्योतिबा फुले के प्रति सम्मान होगा।

  • BSP की हार की कसक दूर करेंगे अखिलेश, एक सीट देंगे एमएलसी की !

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    Lucknow.विधान परिषद चुनाव के लिए नौ अप्रैल से नामांकन प्रारंभ होंगे। सपा-बसपा के बीच राज्यसभा चुनाव व विधान परिषद चुनाव को लेकर आपसी सहमति बनी थी। तय हुआ था कि सपा राज्यसभा चुनाव में बसपा के उम्मीदवार को अपने अतिरिक्त वोट देंगी। इसके बदले बसपा विधान परिषद चुनाव में सपा का समर्थन करेगी।

    राज्यसभा चुनाव में बसपा की हार की कसक सपा विधान परिषद चुनाव में दूर करेगी। हालांकि अधिकृत तौर पर घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सपा विधान परिषद की एक सीट बसपा को देगी। दोनों दल एमएलसी की एक-एक सीट पर चुनाव लड़ेंगे। इससे उनके बीच गठबंधन की नींव और मजबूत होगी।

    राज्यसभा चुनाव में सपा ने अतिरिक्त वोट बसपा को दिया, लेकिन उसका प्रत्याशी चुनाव हार गया। इस पर मायावती ने कहा था कि यदि वह अखिलेश यादव की जगह होतीं तो पहले बसपा प्रत्याशी को चुनाव जिताती। बसपा सुप्रीमो के यह कहने के बाद से अटकलें लगाई जा रही हैं कि राज्यसभा में बसपा की हार का बदला सपा उसे विधान परिषद की एक सीट देकर चुकाएगी।

    माना जा रहा है कि सपा मुखिया अखिलेश यादव ने विधान परिषद की एक सीट बसपा को देने का मन बना लिया है। हालांकि इस बाबत पूछे जाने पर उन्होंने कहा, हम क्या करेंगे आपको क्यों बताएं? उनके इस कथन का अर्थ निकाला जा रहा है कि अखिलेश सपा-बसपा की दोस्ती को बरकरार रखने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं।

  • बीजेपी सांसद ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिख की सीएम योगी की शिकायत,जानें क्या है पूरा मामला?

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    Lucknow. उत्तर प्रदेश के रॉबर्ट्सगंज से बीजेपी के दलित सांसद छोटेलाल ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर राज्य के सीएम योगी आदित्यनाथ की शिकायत की है. साथ ही प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडे और सुनील बंसल की भी शिकायत की है. चिट्ठी में सांसद छोटेलाल ने लिखा है कि जिले के आला अधिकारी मेरा उत्पीड़न कर रहे हैं.

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                                                                 CM-Yogi -सांसद छोटेलाल 

    सांसद छोटेलाल ने पीएम को लिखी चिट्ठी में कहा है कि शिकायत लेकर मैं सीएम योगी से दो बार मिला लेकिन उन्होंने डांट कर भगा दिया. पीएम मोदी ने सांसद छोटेलाल को उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है.

    क्या है सांसद छोटेलाल के दो मामले

     जब प्रदेश में अखिलेश सरकार थी उस समय 2015 में नौगढ़ वन क्षेत्र में अवैध कब्जे की शिकायत पीएम समेत कई लोगों से की लेकिन कार्रवाई की बजाय अधिकारियों ने मेरे घर को ही वन क्षेत्र में डाल दिया. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के आदेश पर दोबारा पैमाईश में सच सामने आया कि मेरा घर वनक्षेत्र में नहीं है.

     दूसरा मामला प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद का है. अक्टूबर 2017 में मेरे भाई (क्षेत्र पंचायत नौगढ़ का प्रमुख) के खिलाफ समाजवादी पार्टी की तरफ से अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, जिस पर वोटिंग के दौरान असलहों से लैस अपराधी तत्व के लोगो ने मेरे पर रिवॉल्वर तान दी, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर धमकी दी गाली दी उस समय अधिकारी भी मौजूद थे लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नही की. हमारे पार्टी के लोग और पुलिस अधिकारी भी शामिल थे.

  • अयोध्या विवाद मामले में 27 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई

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    नई दिल्ली : 

    अयोध्या विवाद मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 27 अप्रैल को सुनवाई की अगली तारीख़ निर्धारित की है। इससे पहले करीब सवा घण्टे तक अयोध्या भूमि विवाद को लेकर सुनवाई चलती रही।

    मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने एक बार फिर मामले को संविधान पीठ के सामने सौपे जाने की मांग की।

    धवन ने दलील दी कि इस्माइल फारुखी मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने कहा था कि मस्ज़िद इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। कहीं न कहीं इसका असर भी अयोध्या मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रहा है।

    राजीव धवन ने कहा, ‘आपने बहुविवाह का मसला संविधान पीठ को सौंपा। लेकिन ये उससे खहीं ज़्यादा बड़ा मसला है। ये सवाल कि मस्ज़िद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा है या नहीं, तुरंत संविधान पीठ को सौंपा जाना चाहिए।

    जिसके बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, ‘हम सिर्फ राजीव धवन को सुनकर ही कोई फैसला नहीं लेंगे, हम सभी पक्षों को सुनने के बाद ही संविधान पीठ को सौपे जाने के लिए फैसला लेंगे।’

  • 8 अप्रैल की आधी रात से प्रदेश में रोडवेज बसों का चक्का जाम

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    Lucknow. उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (यूपी रोडवेज) की बसों के पहिए 8 अप्रैल की रात 12 बजे से थम जाएंगे. रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री लाखन सिंह ने आज इसकी घोषणा करते हुए कहा कि हम एक महीने से अपनी मांगें पूरी कराने के लिए धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन सरकार पर कोई असर नहीं हुआ. बाध्य होकर हमें प्रदेश में रोडवेज बसों का चक्का जाम जैसा बड़ा निर्णय लेना पड़ा है.

    रोडवेज कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने की घोषणा से प्रदेश की परिवहन व्यवस्था पर संकट मंडराने लगा है. उधर, यूपी रोडवेज के प्रबन्ध निदेशक पी गुरुप्रसाद ने कहा कि हड़ताल ना हो इसके लिए जल्द ही रोडवेज कर्मचारी संगठनों के साथ वार्ता की जाएगी. इसके बावजूद भी यदि कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं तो आवश्यक जरुरी कदम उठाने के लिए हम तैयार हैं.

    उन्होंने कहा कि हड़ताल होने पर प्रदेश की परिवहन व्यवस्था पटरी से ना उतरे इसके भी प्रयास किये जा रहे हैं. प्रबन्ध निदेशक के अनुसार, हड़ताल ना हो इसके लिए उन्होंने निगम के वरिष्ठ अधिकारियों की आज बैठक बुलाई है.

    लाखन सिंह ने कहा कि यूपी रोडवेज कर्मचारियों के सातवें वेतनमान, एसीपी से रोक हटाने, डीए की किश्त ना मिलने, संविदा कर्मचारियों को नियमित करने, अनुबंधित बसों को नियमानुसार ना चलाने आदि मांगों को लेकर हम पिछले करीब एक माह से आंदोलनरत हैं लेकिन सरकार ने हमारी मांगों पर कोई विचार नहीं किया. ऐसे में हमने प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर की सहमति पर चक्का जाम करने का एलान कर दिया है.

  • कलयुगी क्रूर चाचा ने भतीजे-भतीजियों को जिंदा जला डाला, जानिए पूरा मामला  !

    इस मामले में थाना प्रभारी प्रभात सिंह के मुताबिक हत्यारा अमरनाथ गिरफ्तार है और वह बचने के लिए अजीब हरकतें भी कर रहा है। इसके सनकीपन की वजह से ही इसकी पत्नी इसे छोड़कर जा चुकी है और ग्रामीण भी उसके व्यवहार से परेशान रहते हैं।

  • श्री राजपूत करणी सेना ने एक बार फिर दो गरमा-गरम मुद्दों को उठाकर एक नई बहस को जन्म दे दिया, जानिये ये क्या हैं नये मुद्दे !

     लखनऊ। श्री राजपूत करणी सेना ने शनिवार को राजधानी में आरक्षण को लेकर अभियान छेड़ दिया है और साथ ही राम मन्दिर मुद्दे को लेकर भी आग में घी डालकर माहौल बनाने की मुहिम शुरू कर दी है।

    प्रेस क्लब में वार्ता करते हुए श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने आरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि आरक्षण की समीक्षा होनी चाहिए और इसका लाभ स्वर्ण समाज के अतिनिर्धन लोगों को भी मिलना चाहिए। संविधान में हर दस वर्षो पर आरक्षण की समीक्षा होने की बात करते हुए मकराना ने कहा कि संविधान में हर दस साल पर समीक्षा होने की बात लिखी गयी है परंतु समीक्षा नहीं की जा रही है।

    पूरे देश में आर्थिक आधार पर आरक्षण की मुहिम छेड़ने की बात करते हुए कहा कि करणी सेना गांव-गांव तक जा कर लोगों में आर्थिक आधार पर आरक्षण की अलख जगाने का काम करेगी और आने वाले दिनों में लाखों की संख्या में देश की राजधानी दिल्ली का घेराव कर सख्त संदेश केन्द्र सरकार को देने का काम करेगी। लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली घेराव करने की बात करते हुए महिपाल सिंह ने कहा कि पहले करणी सेना पूरे देश में माहौल बनाने का काम करेगी और इसके बाद संसद को संदेश देने का काम करेंगे।

    आगामी 10 अप्रैल को आरक्षण समर्थकों द्वारा भारत बंद में शामिल होने का स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि करणी सेना दलितों पिछडों की लड़ाई के खिलाफ नहीं है पर यदि कोई दलित का मुखौटा पहन कर हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानित करने का काम करेंगे तो करणी सेना हर तरीके से विरोध करने में सक्षम है। फिल्म पद्मावती का विरोध पूरे एक साल तक चला पर घायल होने की बात तो दूर किसी को पट्टी तक नहीं बंधी लेकिन लोग करणी सेना पर हिंसक होने का अनर्गल आरोप लगाया करतें हैं।

    आरक्षण को लेकर मैदान में उतरने के साथ ही श्री राजपूत करणी सेना ने राम मन्दिर मुद्दे को भी भुनाने का काम शुरू कर दिया है। प्रेस क्लब में वार्ता से ठीक पहले करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने नेता अमरनाथ मिश्र से गुप्त मुलाकात की है और इसके बाद ही उन्होंने राम मन्दिर मुद्दे पर आग में घी डालने का काम किया है।

    मकराना ने कहा कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में राजा दशरथ के महल में हुआ था इसलिए अयोध्या में राम का मन्दिर नहीं बल्कि दशरथ का महल बनना चाहिए और इसको लेकर करणी सेना पूरे देश में अभियान चलाएगी।

    जोधा-अकबर और पद्मावती के बाद श्री राजपूत करणी सेना ने एक बार फिर दो गरमागरम मुद्दों को एकसाथ छेड़ कर माहौल बनाने की कोशिश तेज कर दी है। हालांकि वार्ता के दौरान तेज तर्रार तरीके से बोल रहे महिपाल सिंह मकराना ने साफ कहा कि करणी सेना हिंसात्मक आन्दोलन में विश्वास नहीं रखती पर भाजपा से जुड़े होने के बाद भी उसे लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव में पटखनी दे कर करणी सेना अपनी ताकत दिखा चुकी है।

  • सरकार और बिजली कर्मियों के बीच हुआ समझौता, बिजली कर्मचारियों का आंदोलन समाप्त, जानिये समझौते शर्ते !

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    लखनऊ। पॉवर कारपोरेशन प्रबंधन के साथ वार्ता के बाद बिजली कर्मचारियों का आंदोलन वापस होने के बाद शुक्रवार को राजधानी में राणा प्रताप मार्ग स्थित हाइडिल फील्ड हॉस्टल में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उ०प्र० ने धन्यवाद सभा का आयोजन किया।

    गौरतलब है कि प्रमुख सचिव ऊर्जा और संघर्ष समिति के बीच आठ घंटे चली वार्ता के बाद   लिखित समझौता हुआ है। समझौते में साफ लिखा गया है कि सात जनपदों के टेण्डर वापस ले लिए गए हैं और कर्मचारियों व अभियंताओं को विश्वास में लिए बिना उप्र में किसी भी स्थान पर कोई निजीकरण नही किया जाएगा।

    समझौता में यह भी लिखा गया है कि विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही९ सुधार हेतु कर्मचारियों को विश्वास में लेकर ही सार्थक कार्यवाही की जाएगी। वार्ता के दौरान ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा भी उपस्थित थे। बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण आंदोलन को सफल बनाने के लिए मंत्रियो-विधायकों से पत्र लिखवाए, चिपको आंदोलन किया और बुद्धि-शुद्धि यज्ञ तक का आयोजन किया था।
    विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक को इंजीनियर शैलेन्द्र दुबे की अध्यक्षता में आयोजित किया गया जिसमें वक्ताओं ने समिति के संघर्ष और विजय को लेकर चर्चाएं की गई। प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर डी के मिश्रा ने सरकार के निजीकरण समर्थक रवैए की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार के खिलाफ लम्बी लड़ाई आपसी सहयोग के साथ लड़ी गई जिसके कारण हमें जीत हासिल हुई है।

    दिल्ली में घरना-प्रदर्शन करने की याद दिलाते हुए मिश्रा ने कहा कि पूरे देश में निजीकरण को लेकर सरकार अभियान चला रही है परंतु यूपी सरकार को अंततः घुटने टेकने पड़े। बैठक को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि निजीकरण से बचने के लिए बिजली कर्मियों को लाइन हानि नुकसान कम करते हुए राजस्व बढ़ाने के लिए अगली लड़ाई लड़नी होगी तभी हमारी जीत पूरी और सार्थक होगी।

    बिजली उपभोक्ताओं से अच्छा व्यवहार करने की सलाह देते हुए वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि लाइन हृास कम करना जरूरी है पर लाचार लोगों से अच्छा व्यवहार कर हमें दुआएं भी कमानी है। बैकक को इंजीनियर शैलेन्द्र दुबे के साथ सुहैल आबिद, दीपेन्द्र कुमार तथा मोहित निगम आदि ने सम्बोधित किया।