Category: uttar-pradesh

  • जया बच्चन ने किया नामांकन, आजम की तिकड़ी गायब रही

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    लखनऊ. समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर से जया बच्चन को राज्यसभा प्रत्याशी बनाया है. जया बच्चन ने शुक्रवार दोपहर विधानभवन के सेंट्रल हॉल में पहुंचकर नामांकन दाखिल किया. इस दौरान अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी लोगों को खटकती रही.

    जया बच्चन ने आज समाजवादी पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी के रूप में राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया. फिल्म अभिनेत्री से नेता बनीं जया ने विधान भवन के सेंट्रल हाल में तीन सेट में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. जया बच्चन का राज्यसभा के लिए यह चौथा कार्यकाल होगा.

    इस मौके पर लम्बे अरसे बाद जया बच्चन के नामांकन के समय सहारा इंडिया के प्रमुख सुब्रत रॉय भी नज़र आये. पीछे की कुर्सी पर बैठे सुब्रत राय सहारा को साँसद डिम्पल यादव ने कुर्सी खाली करा कर आगे की साफ में बैठाला.

    वहीं, नामांकन भरने के बाद जब उनसे नरेश अग्रवाल और किरनमय नंदा जैसे वरिष्ठ नेताओं को टिकट न दिए जाने पर सवाल किया गया तो जया बेबाकी से पूछ बैठीं कि मैं सीनियर नहीं हूं क्या.

    जया बच्चन ने मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, पार्टी के सभी नेताओं व कार्यकर्ताओं को धन्यवाद कहा. सीएम योगी का कार्यशैली के सवाल पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के काम पर कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए. इस दौरान उनके साथ डिंपल यादव, सहारा श्री सुब्रत राय, राजेंद्र चौधरी, किरणमय नंदा समेत सपा के कई बड़े नेता मौजूद रहे लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव नहीं थे.

    समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के फूलपुर में रोड शो में होने की वजह से कन्नौज से साँसद उनकी पत्नी डिंपल यादव राज्यसभा उम्मीदवार जया बच्चन के साथ सेंट्रल हाल में मौजूद थीं. समाजवादी पार्टी अपने 47 विधायको के बूते एक प्रत्याशी को जिता सकती है.

    समाजवादी पार्टी ने जया बच्चन को उम्मीदवार बनाये जाने से पहले पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नन्दा और राष्ट्रीय महासचिव नरेश अग्रवाल जैसे दूसरे बड़े दावेदारों की दावेदारी को खारिज करते हुए जया बच्चन को ही एक बार फिर से राज्यसभा में भेजने का फैसला लिया है.

    नामांकन के दौरान पार्टी के मुख्य राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव, राष्ट्रीय महासचिव नरेश अग्रवाल और फ़ायर ब्राण्ड नेता मोहम्मद आजम खां नदारत रहे हैं. नामांकन के बाद जया बच्चन ने पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव, अध्यक्ष अखिलेश यादव के अलावा पार्टी के विधायकों का शुक्रिया अदा किया.

  • सीएम योगी के हेल्पलाइन सेंटर की युवतियों के शोषण का मामला हुआ उजागर , ट्रेनर फरार

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    लखनऊ. सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ की जनता की मदद के लिए शुरू की गई हेल्पलाइन में काम करने वाली युवतियों के शोषण का मामला उजागर हुआ है. जिस हेल्पलाइन में लोग अपनी परेशानी का हल खोजने के लिए फोन करते हैं, उसी हेल्पलाइन में काम करने वाली करीब  20 युवतियों को एक कमरे में बंद कर बंधक बनाया गया, जहां उन्हें इतना प्रताड़ित किया गया कि कुछ बेहोश हो गई.

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    CM HELPLINE

    जानकारी के अनुसार, इस प्रताड़ना के पीछे इन युवतियों को पिछले 4 माह से वेतन नहीं मिलने के चलते इन महिला कर्मचारी का विरोध दर्ज करना बताया जा रहा है. विरोध के कारण उसे एक कमरे में बंद कर दिया गया था, जहां अब वह बेहोश हालात में मिली है. युवतियों ने आरोप लगाया कि उनके ट्रेनर और सुपरवाइजर अनुराग व आशुतोष ने उनसे जबरन सफेद कागज पर साइन करवा लिए. उन्हें अपशब्द सुनाते हुए बदतमीजी की गई.

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लखनऊ के गोमतीनगर के विभूतिखंड में साईबर हाईट में सीएम हेल्पलाइन संचालित की जाती है.  खबरों के अनुसार , पिछले 4 माह से यहां काम करने वाली करीब 20 युवतियों को वेतन नहीं दिया गया था, जिसका इन युवतियों ने विरोध दर्ज करवाया.

    सूचना पर पहुंची पुलिस टीम से भी सबकी भिड़ंत हुई। टेलीकॉलरों ने आरोप लगाया कि दो दिन पहले विभूतिखंड इंस्पेक्टर सत्येंद्र कुमार राय से मामले की शिकायत की गई तो उन्होंने धमकाया कि जेल में बंद कर देंगे, जिससे तुम्हारा भविष्य बर्बाद हो जाएगा। टेलीकॉलरों ने मीडिया के सामने ही पुलिस को गालियां भी दीं।

    सूचना पाकर एसपी नार्थ अनुराग वत्स मौके पर पहुंचे। लोगों को समझाने की कोशिश की लेकिन वे कंपनी के अफसरों और पुलिस पर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। वहीं, बीपीओ ने लिखित शिकायत की है कि ये टेलीकॉलर्स काम नहीं करने दे रहे हैं। कल लड़कों ने वेतन के लिए धरना दिया था, जिसका बदला आज लड़कियों ने ऐसे लिया।

    ऐसा करने पर करीब 20 युवितियों को शुक्रवार सुबह एक कमरे में बंद कर दिया गया. युवतियों ने अब आरोप लगाया कि इस दौरान कुछ लड़कियों के साथ अभद्रता की गई. उनके दुपट्टे तक गले से खींच लिए गए. कमरे में बंद किए जाने और डर के चलते इस दौरान कुछ युवतियां बेहोश हो गई, जिसके बाद वहां हड़कंप मच गया.

    हालांकि इस दौरान वहां अफवाह भी उड़ी की वेतन न मिलने और प्रताड़ना के चलते कुछ युवतियों ने जहर खा लिया है, जिसके बाद प्रशासन के हाथ पांव फूल गए. इसके बाद युवतियों को तुरंत कमरे में से निकाला गया और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है.

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  • नरेंद्र मोदी व फ्रांस के राष्ट्रपति के आगमन की तैयारियां जोरों पर, समीक्षा करने पहुंचेंगे योगी

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    वाराणसीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के 12 मार्च को वाराणसी दौरे से संबंधित तैयारियों की समीक्षा करने योगी आदित्यनाथ 2 दिवसीय दौरे पर शुक्रवार शाम वाराणसी आएंगे। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि योगी शाम लगभग साढ़े 5 बजे राजकीय विमान से लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डा आएंगे। जहां से उनका काफिला सड़क मार्ग से लगभग 6 बजे वाराणसी सर्किट हाउस पहुंचेगा।

    लगभग सवा 6 बजे से साढ़े 7 बजे के दौरान सीएम दोनों शीर्ष नेताओं के वाराणसी और मिर्जापुर में प्रस्तावित कार्यक्रमों की तैयारियों में जुटे संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। उन्होंने बताया कि अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के बाद सीएम रात लगभग 9 बजे से 11 बजे के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा लोकार्पण के लिए प्रस्तावित मंडुवाडीह रेलवे ओवर ब्रिज सहित अन्य विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे।

    योगी रात्रि विश्राम वाराणसी में करेंगे तथा अगले दिन सुबह बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय के यहां स्थित आवास पर उनसे मुलाकात करेंगे। इस दौरान वह मोदी एवं  मैक्रों के कार्यक्रमों और अन्य मुद्दों पर बातचीत कर सकते हैं।

    गौरतलब है कि मोदी के आमंत्रण पर मैक्रों का आज से शुरू हो रहे 4 दिवसीय भारत दौरे के अंतिम दिन 12 मार्च को उत्तर प्रदेश की प्रचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी आने का कार्यक्रम है। जिला प्रशासन ने अतिविशिष्ट मेहमानों मैक्रों एवं उनकी धर्मपत्नी ब्रिजिट मैक्रों के साथ मोदी के यात्रा कार्यक्रमों के बारे में विस्तृत जानकारी फिलहाल मीडिया से साझा नहीं किया है। उनके संभावित दौरे वाले क्षेत्रों एवं स्थानों को वह उत्सव की तरह सजाने-संवारने में कई दिनों से जुटा हुआ है।

    बताया जा रहा है कि मैक्रों के साथ उनके मंत्रिमंडल के अधिकारियों और वहां के व्यापारियों का एक शिष्टमंडल भी आएगा। विदेशी मेहमान विशेष विमानों से वाराणसी आएंगे तथा मोदी के साथ गंगा में नौका विहार के आलावा ऐतिहासिक दशाश्वमेध घाट पर पूजा-अर्चना कर विश्व प्रसिद्घ गंगा आरती में शामिल होंगे। साथ ही कई कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं।

    जिला प्रशासन ने उनकी इस यात्रा को बेहद गंभीरता से लिया और इसे यादगार बनाने के लिए असि घाट से राज घाट तक के तमाम गंगा घाटों के अलावा उनके संभावित यात्रा मार्गों की विशेष साफ-सफाई एवं मरम्मत के कार्य किए जा रहे हैं। दरभंगा घाट स्थित‘‘बृजराम पैलेस और उसके आसपास आवश्यक मरम्मत एवं रंग-रोगन का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। उनके दौरे के दिन उन स्थानों को फूलों से सजाने की तैयारी है।

  • ढह गया याेगी का किला, फूलपुर में भी मुरझाया कमल

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    लखनऊः उत्तर प्रदेश की 2 लोकसभा सीट गाेरखपुर आैर फूलपुर पर हुए उपचुनावों के नतीजे आ चुके हैं। दाेनाें सीटाें पर सपा प्रत्याशी ने अप्रत्याशित जीत दर्ज की है। आगामी लाेकसभा चुनाव का सेमीफाइनल कहे जाने वाले इस चुनाव में मिली करारी हार से बीजेपी के 2019 मिशन काे करारा झटका लगा है। सपा-बसपा गठबंधन की इस जीत ने बीजेपी के लाेकसभा चुनावी सफर को और भी मुश्किल बना दिया है।
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    गोरखपुर 
    गाेरखपुर सीट से सपा प्रत्याशी प्रवीण निषाद ने 45,454 वाेट से जीत दर्ज की है। आैपचारिक एेलान में बताया गया है कि प्रवीण निषाद ने 21961 मतों से जीत हासिल की है।
    गाेरखपुर से सपा कैंडिडेट प्रवीण निषाद 4,05,870 वाेट के साथ पहले आैर बीजेपी कैंडिडेट उपेंद्र दत्त शुक्ल 384753 वाेट के साथ दूसरे स्थान पर रहे जबकि कांग्रेस प्रत्याशी सुरहिता करीम 17,720 के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
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    फूलपुर
    वहीं एतिहासिक फूलपुर सीट से सपा कैंडिडेट नगेंद्र सिंह पटेल काे 3,42,796 वाेट आैर बीजेपी प्रत्याशी काैशलेंद्र प्रताप सिंह काे 2,83,183 मिले हैं जबिक कांग्रेस प्रत्याशी मनीष मिश्र काे 19, 334 वाेट प्राप्त हुए हैं। बाहुबली व निर्दलीय प्रत्याशी अतीक अहमद 48,087 वाेट के साथ तीसरे स्थान पर रहे। बता दें कि ये सीट यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद माैर्य के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। बीजेपी के लिए काफी अहम मानी जानी वाली इस सीट काे भी केशव माैर्य नहीं बचा पाए जाे उनके खुद के लिए एक प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई थी।

    याेगी आदित्यनाथ काे बड़ा झटका
    जिस गाेरखपुर सीट पर बीजेपी का पिछले तीन दशक से कब्जा था उसे भी मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ नहीं बचा पाए। इस सीट पर भी बीजेपी प्रत्याशी काे करारी हार का सामना करना पड़ा है।

    पहली परीक्षा में ही फेल हुए याेगी आदित्यनाथ
    बता दें कि मुख्यमंत्री बनने के बाद याेगी की ये पहली बड़ी परीक्षा थी जिसमें वह फेल हाे गए हैं। 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी गठबंधन को यूपी की 80 में से 73 सीटें हासिल हुई थीं, लेकिन चार साल बाद दो लोकसभा के उपचुनाव हुए और योगी जी के नेतृत्व में बीजेपी दोनों सीटें हार गई।

    गोरखपुर में हमेशा से रहा है गोरखपीठ का दबदबा
    गोरखपुर में शुरू से ही गोरखपीठ का दबदबा रहा है और यहां हमेशा से ही पीठ का मुख्य पुजारी चुनाव जीतता आया है। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 1998 से भाजपा के सांसद हैं। वह लगातार यहां से पांच बार सांसद रह चुके हैं।

    योगी आदित्यनाथ से पहले यहां गोरखपीठ के मुख्य पुजारी महंत अवेद्यनाथ यहां के सांसद थे। वह पहली बार 1989 में हिंदू महासभा की ओर से लोकसभा चुनाव जीते थे। अवेद्यनाथ यहां लगातार तीन बार चुनाव जीते और सांसद रहे।

    गोरखपुर में पहली बार गोरखपीठ मठ का दबदबा 1967 में देखने को मिला जब निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर महंत दिग्विजयनाथ ने यहां चुनाव जीता था। उनके बाद यहां से महंत अवेद्यनाथ ने पहली बार 1970 में चुनाव जीता। हालांकि 1977 में यहां भारतीय लोकदल के उम्मीदवार हरिकेश बहादुर चुनाव जीते थे। जिसके बाद 1980 में वह कांग्रेस के टिकट पर दोबारा 1980 में पर चुनाव जीते। इसके बाद यहां मदन पांडे कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा पहुंचे थे। लेकिन 1989 में यहां पर एक बार फिर से मठ ने वापसी की और महंत अवेद्यनाथ हिंदू महासभा की सीट पर चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। 1991 में महंत अवेद्यनाथ ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और फिर से जीतकर लोकसभा पहुंचे और इसके बाद से हमेशा यहां भाजपा का कब्जा रहा है।

    बिहार में भी बीजेपी काे मिली हार 
    बिहार की अररिया लाेकसभा की एक मात्र सीट पर हुए उपचुनाव में भी बीजेपी काे हार का सामना करना पड़ा है। इस सीट पर राजद प्रत्याशी ने बीजेपी कैंडिडेट काे कड़े मुकाबले में हराया है। वहीं भभुआ आैर जेहानाबाद की विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में एक सीट बीजेपी आैर एक सीट राजद काे मिली है।

  • SC ने सभी हस्तक्षेप याचिकाएं की खारिज, 23 मार्च को होगी अगली सुनवाई

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    अयोध्या/फैजाबादः अयोध्या में राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद का मामला देश का सबसे विवादित और पुराना मसला है, लेकिन जब इस मामले ने सियासी रंग बदला तो  मंदिर-मस्जिद की चौखट से निकलकर विवाद अदालत की दहलीज पर जा पहुंचा।सुप्रीम कोर्ट में इस विवादित मामले में आज यानि बुधवार से सुनवाई हुई। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला लिया है।
    ढह गया याेगी का किला, फूलपुर में भी मुरझाया कमल
    सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में सिर्फ मूल पक्षकारों को ही सुनने और असम्बद्ध व्यक्तियों के इसमें हस्तक्षेप करने के अनुरोधको अस्वीकार करने का आग्रह स्वीकार किया। न्यायालय ने अयोध्या में राम मंदिर में पूजा करने के मौलिक अधिकार को लागू करने के लिए स्वामी की निष्पादित याचिका बहाल करने का आदेश दिया।
    भाजपा को उमर अब्दुल्ला ने मारा ताना, आपने मुझे गलत साबित कर दिया, शुक्रिया
    इसके साथ ही न्यायालय ने मालिकानाहक विवाद के इस मामले में हस्तक्षेप के लिए भाजपा नेता सुब्रहमण्यम स्वामी की अर्जी भी अस्वीकार की। सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में हस्तक्षेप के लिए सभी अंतरिम अर्जियां अस्वीकार कीं। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय पीठ ने तीनों हस्तक्षेप याचिकाओं को नामंजूर कर दिया। पीठ के अन्य 2 सदस्यों में न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर शामिल हैं।

    न्यायालय ने कहा कि पंजीयक इस मामले में कोई भी हस्तक्षेप याचिका स्वीकार नहीं करेंगे। वहीं सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में कहा कि ‘मेरे मौलिक अधिकार मेरे संपत्ति के अधिकारों की तुलना में अधिक हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद की अगली सुनवाई 23 मार्च को 2 बजे निर्धारित की है।

  • इसलिए बेटी ने मां की कर दी हत्या, जानिये !

    गाजियाबाद , उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक लड़की ने अपनी ही मां की हत्या कर दी है। लड़की के एक महिला शिक्षक के साथ रहना चाहती थी। लड़की के उस महिला टीचर के साथ संमलैंगिक संबंध थे। जिसका विरोध करने पर बेटी ने अपनी ही मां की हत्या कर दी।

     मामला गाजियाबाद के कविनगर का है जहां मां ने बेटी को महिला शिक्षक के साथ रहने मे मना किया तो बेटी ने मां पर लोहे की रॅाड से हमला कर उसे घायल कर दिया। उपचार के लिए महिला को अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई है।
    आपको बता दें कि मृतका के पति सतीश कुमार राणा ने बताया कि उनकी बेटी के उसी के स्कूल की एक महिला शिक्षिका के साथ समलैंगिक रिश्तें थे। जिसे लेकर अक्सर उनके घर पर विवाद होता था।
    दरअसल बेटी शिक्षिका को अपने साथ रखने को लेकर घरवालों पर दबाव बना रहीं थी। जिसका हम दोनों ही पती-पत्नी विरोध करते रहे ओर बेटी को समझाने की बहुत कोशिश भी की। लेकिन मुझे इस बात का तनिक भी अंदाजा नहीं था कि वह ऐसा भी कुछ कर सकती है।
    सतीश ने आगे बताया कि घटना 9 मार्च की है जब वह सुबह काम पर चले गए और उनके तीन छोटे बच्चे भी स्कूल गए हुए थे। घर पर केवल मेरी पत्नी और बेटी ही मौजूद थे।
    इस दौरान दोनो मां-बेटी के बीच बहस हुई ओर बेटी ने गुस्से में आकर लोहे की एक रॅाड से अपनी मां के सिर पर हमला कर दिया ओर उसे उसी हालात में छूड़कर वहां से चली गई।
    जब दोपहर को बच्चे स्कूल से घर लौटे तो उन्होंने मुझे फोन कर इस बात की जानकारी दी। जिसके बाद हम उसे नजदीकी अस्पताल ले गए। जहां डॅाक्टरों ने उसे दिल्ली के जीटीबी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
    बहराल मृतका के पति ने अपनी बेटी और उसकी शिक्षिका के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद से पुलिस आरोपी बेटी और टीचर की तलाश में लग गई है। पुलिस को अभी तक आरोपियों के बारे में कोई सुराग हाथ नहीं लगा है।

  • साइकिल छोड़ नरेश अग्रवाल ने बेटे सहित थामा कमल

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    नई दिल्ली. समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश को बड़ा झटका लगा है. पार्टी प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल ने समाजवादी पार्टी छोड़ दी है. नरेश अग्रवाल बीजेपी में शामिल हो गए हैं.

    नरेश अग्रवाल ने अपने विधायक बेटे नितिन अग्रवाल समेत अन्य समर्थकों के साथ बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की. रेल मंत्री पियूष गोयल ने उन्हें दिल्ली स्थित बीजेपी ऑफिस में पार्टी में ज्वाइन करवाया.

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    आपको बात दें कि नरेश अग्रवाल का राज्यसभा कार्यकाल 23 मार्च को खत्म हो रहा है, लेकिन समाजवादी पार्टी ने उन्हें दोबारा राज्यसभा न भेजते हुए जया बच्चन को उम्मीदवार बनाया है.

    इस मौके पर नरेश अग्रवाल ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी के काम से बहुत प्रभावित हूं. पीएम मोदी के काम से पूरे विश्व में देश का मान बढ़ा है.

    साथ ही उन्होंने कहा कि मैं समाजवादी पार्टी में मुलायम सिंह और रामगोपाल यादव की जरुर इज्जत करता हूं, लेकिन जिस तरह से समाजवादी पार्टी ने कभी कांग्रेस से तो कभी क्षेत्रीय पार्टियों से गठबंधन किया, उससे सपा कमजोर हुई है.

  • शर्मनाक : डॉक्टरों ने संवेदनहीनता की हद, मरीज के कटे पैर को बनाया उसका तकिया

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    नई दिल्ली। झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज के डॉक्टरों ने संवेदनहीनता की हद कर दी। घायल युवक का क्षतिग्रस्त पैर ऑपरेशन मेंकाटने के बाद पैर को सिरहाने लगाकर तकिया बना दिया। इसका वीडियो वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया। यह था मामला: शनिवार को इटायल से मऊरानीपुर जा रही स्कूली बस ट्रैक्टर को बचाने में पलट गई।

    बस में फंसे बच्चों को किसी तरह बाहर निकाला गया। घायल क्लीनर घनश्याम को सीएचसी मेंभर्ती कराया गया। वहां से उसे मेडिकल कॉलेज रिफर कर दिया गया। वहां पहुंचने पर डॉक्टरोंने उसकी हालत बिगड़ती देख पैर काटने का फैसला किया। बाद में डॉक्टरोंने तकिए की जगह कटा पैर रख दिया।

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    मरीज के कटे पैर को बनाया उसका तकिया1

    झांसी के लहचूरा थाने में हुई इस शर्मनाक घटना ने सभी को चौंका दिया है। यहां के इटायल गांव में बच्चों से भरी एक स्कूल बस मऊरानीपुर की तरफ जा रही थी। रास्ते में अचानक से उनके सामने एक ट्रैक्टर आ गया और उसे बचाते वक्त बस अनियंत्रित होकर पलट गई। इस हादसे में बस क्लीनर के साथ-साथ आधा दर्जन बच्चे भी घायल हो गए। आनन-फानन में सभी को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बस क्लीनर घनश्याम की हालत नाजुक होने के कारण उसे झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। यहां पर डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया जिसके दौरान उसका एक पैर काटना पड़ा।

    इसके बाद डॉक्टरों ने जो किया वो बहुत ही शर्मनाक था। उन्होंने घनश्याम का कटा हुआ पैर ही उसकी तकिया के रूप में इस्तमाल कर दिया। जब घनश्याम के जीजा वहां पहुंचे तो वो इस मंजर को देख घबरा गए। उन्होंने तुरंत ही डॉक्टरों से सिर के नीचे से पैर हटाने को कहा लेकिन डॉक्टरों ने उनकी बात नहीं मानी। मामले की जानकारी जब मेडिकल प्रसाशन को मिली तो जांच करते हुए दो डॉक्टरों और दो नर्सों को सस्पेंड कर दिया गया। इसके साथ ही एक डॉक्टर के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिये गए हैं।

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  • साल 2018 का सबसे बड़ा उलटफेर : BJP की करारी हार

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    ये हैं योगी को पटखनी देने वाले प्रवीण निषाद

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    प्रवीण कुमार निषाद

    गोरखपुर से लोकसभा में पाँच बार नुमाइंदगी कर चुके आदित्यनाथ योगी को संसद के सबसे युवा चेहरों में से एक के रूप में देखा जाता था. पिछले साल उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत हुई और आदित्यनाथ योगी को उत्तरप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया जिसके बाद गोरखपुर लोकसभा सीट खाली हो गई थी. इस सीट पर अब उप-चुनाव के नतीजे आए हैं और जो  लोकसभा में गोरखपुर की नुमाइंदगी करेगा वो भी एक युवा चेहरा ही है।

    29 साल के प्रवीण कुमार निषाद, समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में यह चुनाव लड़ रहे थे. नोएडा से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक कर चुके प्रवीण कुमार का यह पहला चुनाव था। इस सीट पर खघ्ुद यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी थी.। मतगणना से पहले तक बड़े राजनीतिक पंडित और विश्लेषक भी यह मानकर चल रहे थे कि आखघ्रिकार ये सीट भाजपा के खाते में ही जाएगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. अब इसे साल 2018 का सबसे बड़ा उलटफेर कहा जा रहा है।

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    पहले राउंड की मतगणना के बाद से ही नतीजे समाजवादी पार्टी के पक्ष में जाते दिख रहे थे. हालांकि काउंटिंग के आखघ्रिी चरण में एक बार को भाजपा और सपा के बीच वोटों का अंतर कम होता दिखा था. लेकिन समाजवादी पार्टी ने अंततरू इस सीट पर कब्जा कर लिया. प्रवीण कुमार निषाद के लिए भले ही यह अपना पहला चुनाव था लेकिन राजनीति उनके लिए नई नहीं है. उन्हे राजनीति विरासत में मिली।

    प्रवीण निषाद के पिता, डॉक्टर संजय कुमार निषाद राष्ट्रीय निषाद पार्टी के संस्थापक हैं. साल 2013 में उन्होंने इस पार्टी को खड़ा किया था.   प्रवीण कुमार निषाद उस पार्टी के प्रवक्ता बनाए गए थे. साल 2008 में बी.टेक करने के बाद 2009 से 2013 तक उन्होंने राजस्थान के भिवाड़ी में एक प्राइवेट कंपनी में बतौर प्रोडक्शन इंजीनियर नौकरी की थी. लेकिन 2013 में अपने पिता के राजनैतिक सपनों में रंग भरने के लिए वो वापस गोरखपुर लौट आए।

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    प्रवीण कुमार निषाद 12

    प्रवीण कुमार निषाद के पिता डॉक्टर संजय कुमार निषाद राजनीति में लंबे अरसे से सक्रिय हैं। साल 2002 और 2003 तक गोरखपुर के अखघ्बारों के दफ्तरों में डॉक्टर संजय कुमार इलेक्ट्रो होम्योपैथी को मान्यता दिलाने के लिए बयान देते और विज्ञप्तियां बाँटते नजर आते थे.

    साल 2002 में उन्होंने पूर्वांचल मेडिकल इलेक्ट्रो होम्योपैथी एसोसिएशन का गठन भी किया. डॉक्टर संजय इसके अध्यक्ष थे.उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की शुरुआत 2008 में हुई जब उन्होंने ऑल इंडिया बैकवर्ड एंड माइनॉरिटी वेलफेयर एसोसिएशन का गठन किया. लेकिन सात जून 2015 को वो पहली बार सुर्खघ्यिों में तब आये, जब गोरखपुर से सटे सहजनवा के कसरावल गांव के पास निषादों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिए जाने की माँग को लेकर उनके नेतृत्व में ट्रेन रोकी गई.

    उस दिन हिंसक प्रदर्शन के बीच एक आंदोलनकारी की पुलिस फायरिंग में मौत के बाद आंदोलनकारियों ने बड़ी तादाद में गाड़ियों को आग लगा दी थी. इसके बाद डॉक्टर संजय कुमार निषाद पर तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार ने कई मुकदमें दायर कराए थे. पिछले विधानसभा चुनाव में निषाद पार्टी ने पिछड़े मुसलमानों पर अच्छी पकड़ रखने वाली पीस पार्टी के साथ मिलकर प्रदेश की 80 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था।

    जब गोरखपुर उप-चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हुई तो निषाद बहुल इस सीट पर उनकी सक्रियता को देखते हुए सपा ने निषाद पार्टी को विलय का प्रस्ताव दिया था, लेकिन संजय कुमार निषाद ने ऐसा करने से मना कर दिया. बाद में समाजवादी पार्टी ने उनको तवज्जो देते हुए उनके बेटे प्रवीण कुमार निषाद को अपने प्रत्याशी के तौर पर इस चुनाव में उतारा।

    अपनी उम्मीदवारी के समय दिए गए हलफनामे में प्रवीण कुमार ने अपने पास कुल 45,000 रुपये और सरकारी कर्मचारी पत्नी रितिका के पास कुल 32,000 रुपये नकदी होने का ब्यौरा दिया था। उनके पास नकदी भले ही कम हो लेकिन अब उन्होंने समर्थकों और वोटरों की बड़ी संपत्ति हासिल कर ली है.। साभार: बीबीसी हिंदी डॉट कॉम

  • यह दवा, जो बचाएगी लाखों बच्चों की जान

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    मेरठ। भारत में डायरिया की नई दवा को लेकर एक शोध के शुरुआती नतीजे बड़ी उम्मीद जगा रहे हैं। यह दवा हर साल देश के एक लाख से अधिक बच्चों की जान बचा सकती है। डायरिया के हाई रिस्क जोन वाले छह अन्य देश पाकिस्तान, बांग्लादेश, नाइजीरिया, इथोपिया, श्रीलंका और कंबोडिया में भी इस एंटीबायोटिक पर रिसर्च चल रही है।

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    भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का यह प्रोजेक्ट उत्तरप्रदेश के मेरठ मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में चल रहा है। एक हजार शिशुओं पर ड्रग सेंसिटीविटी टेस्ट सफल रहा तो मेडिकल साइंस को डायरिया की नई दवा मिल जाएगी।

    सामने आ सकता है डायरिया रोधी टीका
    असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. डीवी सिंह के निर्देशन में डब्ल्यूएचओ के इस प्रोजेक्ट के तहत 0-2 वर्ष उम्र तक के एक हजार शिशुओं पर शोध किया जाना है। अब तक 110 शिशुओं की रिपोर्ट बनाई गई है। बच्चों का वजन, दवा लेने की हिस्ट्री, त्वचा की शुष्कता एवं पोषण समेत कई बिंदुओं पर विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट बनाई जा रही है।

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    इलाज में नई संभावनाओं के लिए कान एवं गले के संक्रमण में प्रयोग की जाने वाली एंटीबॉयोटिक को अब डायरिया के मरीजों पर आजमाया जा रहा है। चिकित्सकों की मानें तो ये दवा शिशुओं की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर वायरल संक्रमण से होने वाले डायरिया को रोक देगी।

    डायरिया से सर्वाधिक मौतें
    भारत के तमाम इलाकों के भूजल में ई-कोलाई, फीकल कोलीफार्म जैसे घातक सूक्ष्मजीवियों समेत कई अन्य घातक रसायन मिले हैं। खाद्य वस्तुओं में मिलावट, बासी मिठाइयां, ठेलों पर कटे-फटे फल व जूस के सेवन से अमीबिक संक्रमण होने पर भी डायरिया हो जाता है। मलिन बस्तियों के बच्चों में संक्रमण का बड़ा कारण रोटा वायरस भी होता है।

    शुरुआत में बीमार बच्चे में दस्त, बाद में पानी की कमी, चिड़चिड़ापन, भूख न लगना, आंखों का धंसना, त्वचा की शुष्कता एवं खून की कमी समेत कई लक्षण उभरते हैं। शरीर में सोडियम, पोटेशियम एवं अन्य खनिज कम होने से बेहोशी भी आ सकती है। कुपोषित बच्चों में एनीमिया (खून की कमी) खतरनाक रूप से बढ़ती है।

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