पडरौना,कुशीनगर : प्रदेश में हुए लॉकडाउन के कारण बाजार में फलों की आवक घट गई है। इसके चलते सभी फलों के दाम बढ़ने लगे हैं। पडरौना नगर में बाजार बंद होने से नवरात्र में पूजा आदि में प्रयोग होने वाली सामग्री भी उपलब्ध नहीं है। कुछ खास दुकानदार महंगे दाम ले रहे हैं।
नवरात्रि में कलश रखने के लिए नारियल व अन्य पूजन सामग्री कई गुना अधिक दाम पर बेचा जा रहा है। युपी-बिहार सीमाएं सील होने के चलते फल की गाड़ियां कुशीनगर जिले के पडरौना नगर में देर से पहुंच रही है। इसलिए 30 रुपये किलो बिकने वाला संतरा सीधे 60 रूपए में बिक रहा है। सेब केला अंगूर के दाम भी 40 से 50 प्रतिशत बढ़ गए हैं।
पीलीभीत के थाना माधोटांडा पुलिस ने किया आज दवाई लेने जाते हुए एक व्यक्ति की बाइक का किया चालान।जहाँ एक तरफ सरकार का आदेश है कि इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी। बहीं दूसरी ओर पुलिस दवाई लेने जाने बालों को भी नही छोड़ रही है।बलविंदर सिंह अपनी पुत्री की दबाई लेने माधोटांडा आये किसी मेडिकल से दवाई ली दवाई लेने में पैसे कम पड़ गए । तव बलविंदर सिंह एटीम से पैसे निकालने माधोटांडा थाने के पास स्थित एटीएम से पैसे निकालने आये जहां पर पुलिस द्वारा उनकी बाइक का चालान कर दिया गया ।
उन्होंने पुलिस को बताया भी कि वह अपनी बेटी की दवाई लेने आये हैं लेकिन पुलिस ने उनकी एक न सुनी। पुलिस जरूरत से निकलने बालों के चालान काट रही है लेकिन जो वे जरूरत रोडों पर फर्राटा भर रहे हैं उनपर कोई कार्यवाही नही l
कोरोना वायरस की चुनौतियों से निपटने के लिए लॉकडाउन को लेकर पुलिस प्रशासन सख्त हैं। वहीं लोग लॉकडाउन के नियमों का उलंघन करते हुए सड़क पर बेवजह घूमने से बाज नहीं आ रहे हैं। साथ ही प्रशासन द्वारा दिए गए छूट का गलत इस्तेमाल कर बाजारों में भीड़ इकट्ठा कर सामानों की खरीदारी करते दिख रहे हैं। जबकि पुलिस और प्रशासन हर जगह सामानों के डोर टू डोर डिलेवरी को भी सुनिश्चत करा रही है।
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gorakhpur – नवीन मंडी में सब्जी खरदीने पहुंचे लोग। यह तस्वीर सात बजे की है।
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कानपुर सहित आसपास के 13 जिलों उन्नाव, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज, हरदोई, महोबा, बांदा, हमीरपुर, उरई में सुबह से ही बाजारों में खरीदारों की भारी भीड़ रही।
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कानपुर सहित आसपास के 13 जिलों उन्नाव, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज, हरदोई, महोबा, बांदा, हमीरपुर, उरई में सुबह से ही बाजारों में खरीदारों की भारी भीड़ रही।
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इटावा जिले में सुबह से ही बाजार में भीड़ उमड़ पड़ी। जरूरी सामान खरीदने के लिए सुबह भीड़ सडकों पर निकल आई।
वाराणसी। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को धता बताकर बनारस की सड़कों पर घूम रहे एक फ्रांसीसी पर्यटक को पकड़कर पुलिस ने होटल में ‘क्वारंटाइन’ कर दिया। बनारस में इस समय 100 से ज्यादा विदेशी पर्यटक अलग-अलग होटलों और गेस्टहाउस में ठहरे हैं।
जिला प्रशासन ने होटल संचालकों को इन विदेशी पर्यटकों को होटलों में ही क्वारंटाइन करने का आदेश दिया है। सोमवार को लॉकडाउन के बाद भी कई जगह विदेशी पर्यटक घूमते मिले। सोमवार को सड़कों पर घूम रहे फ्रांसीसी पर्यटक की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मंगलवार को पुलिस ने इसको रोहनिया के पास पकड़ लिया।
साधु के वेष में मीरजापुर जा रहा था विदेशी पर्यटक साधु के वेष में गले में कंठी-माला डाले लोगों से लिफ्ट लेकर मीरजापुर जाने की फिराक में घूम रहे इस विदेशी पर्यटक को मंगलवार को पकड़ने के बाद पुलिस दशाश्वमेध घाट स्थित जिस होटल में वह ठहरा था, वहां ले गई और उसे क्वारंटाइन कर दिया। होटल संचालक को किसी भी दशा में किसी भी विदेशी पर्यटक के बाहर न जाने का निर्देश दिया है। जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने कहा कि बनारस में मौजूद विदेशी पर्यटक जहां ठहरे हैं उनको वहीं क्वारंटाइन करने का निर्देश दिया गया है।
सड़कों पर निकले विदेशी पर्यटक तो पासपोर्ट होगा सीज बनारस की सड़कों पर लॉक डाउन के दौरान अब अगर विदेशी पर्यटक घूमते मिले तो उनका पासपोर्ट सीज करने के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। इसके साथ ही होटल संचालकों पर कड़ी कार्रवाई होगी। गौरतलब है अब वाराणसी में विदेशियों के ठहरने की सूचना न देने पर शुक्रवार को ही 13 होटलों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है।
नोएडा/गाजियाबाद । लॉकडाउन में फंसे दिल्ली-राजस्थान और हरियाणा आदि से यूपी और बिहार जाने वाले मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए शुक्रवार को यूपी रोडवेज ने 16 घंटों के दौरान 86 बसें चलाईं। हालांकि इस दौरान यात्रियों की भीड़ और सोशल डिस्टेंस के नियम का पालन न होने के कारण रोडवेज व जिला प्रशासन की किरकिरी भी हुई। इसके बाद सरकार ने अगले आदेश तक रोडवेज की बसों के संचालन पर रोक लगा दी।
बसों का संचालन रुकने से शुक्रवार देर शाम लाल कुआं, कौशांबी व यूपी गेट पर बड़ी संख्या में यात्री फंस गए। लोग बसों के इंतजार में रात तक खड़े रहे। वहीं बसें न मिलने से बड़ी संख्या में यात्री पैदल ही अपने घरों की ओर निकल पड़े।
यूपी के कई इलाकों के लिए चलीं बसें यूपी रोडवेज के आरएम ए.के. सिंह ने बताया कि हमें सूचना मिली थी कि हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली आदि राज्यों में कार्य करने वाले लोग बड़ी संख्या में यहां फंसे हैं। ये सभी अपने घर जाना चाहते हैं, लेकिन कोई साधन नहीं मिल रहा है। इसके बाद रोडवेज ने गुरुवार रात 12 बजे से लेकर शुक्रवार शाम 4 बजे तक अलग-अलग रूटों के लिए 86 बसें उतारीं। ये बसें इटावा, मैनपुरी, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ के रास्ते गोरखपुर तक गईं हैं। इसके बाद लोग कौशांबी, और लाल कुआं पर बसों की व्यवस्था करने की मांग कर रहे थे।
Ghaziabad: Large number of migrant workers had gathered at Kaushambi Bus Station yesterday to take buses to their respective hometowns within the state, amid the nationwide #CoronavirusLockdown (27.03.2020) pic.twitter.com/37DxHUQq5Y
रोडवेज की इस पहल के बीच अलग-अलग विभागों के अफसरों में तालमेल की कमी भी दिखी। एक तरफ जहां रोडवेज ने गाजियाबाद से बसें भेजीं, वहीं दूसरी तरफ इनमें से कुछ बसों को दूसरे जिलों में रोक लिया गया। ए.के. सिंह ने बताया कि प्रशासन के निर्देश पर यात्रियों को लेकर गई बसों को सिकंद्राबाद के पास बुलंदशहर प्रशासन ने रोक लिया है। वहां करीब 31 बसें रोकी गई हैं।
साहिबाबाद में बाहर से आकर रह रहे लोग अब जैसे तैसे अपने घर पहुंचना चाहते हैं। बस और ट्रेन बंद हैं। रास्तों पर पुलिस का पहरा होने की वजह से वे रेलवे ट्रैक पर ही निकल पडे हैं। महामारी के कठिन दौर में प्रशासनिक मदद न मिलने के कारण खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। शुक्रवार को साहिबाबाद रेलवे स्टेशन के पास ट्रैक पर पैदल अपने गांव की दूरी तय करते दिखे। ट्रैक से गुजर रहे मुकेश ने बताया कि वह रिक्शा चलाते हैं। यहां कुछ काम नहीं बचा है। घर जाने के लिए कोई साधन नहीं मिल रहा है। मजबूरी में रेलवे लाइन को पकड़ कर अपने गांव जा रहे हैं।
शुक्रवार को एनएच-24 पर बड़ी संख्या में पैदल यूपी की तरफ जाते हुए लोग दिखे। ये लोग दिल्ली और हरियाणा के अलग-अलग हिस्सों से आ रहे थे। इन्हीं मे से एक आशीष ने बताया, ‘मैं हरियाणा के बहादुरगढ़ से आ रहा हूं और मुझे इटावा (360 किलोमीटर) जाना है। मेरी कंपनी बंद हो चुकी है, वापस लौटने के अलावा हमारे पास कोई रास्ता नहीं है।’
अमेठी। इस बार नवरात्र पर कोराना वायरस का साया पड़ चुका है। लोगों को इस बार देवी मंदिरों के दर्शन नहीं मिल रहे हैं।क्षेत्र के सभी प्रमुख पौराणिक मंदिरों के पट बंद किए जा चुके हैं।वही दादरा गाँव मे स्थित पौराणिक देवी हिंगलाज मन्दिर का पट बन्द है। भारतीय उपमहादीप में आदि शक्ति के नाम से जानी जाने वाली देवी माँ हिंगलाज का मंदिर अमेठी के दादरा गाँव में स्थित है हिँगलाज मंदिर की स्थापना सँत कवि बाबा पुरषोत्तम दास ने लगभग हजार वर्ष पूर्व में की थी जो सन्त तुलसीदास जी के समकालीन थे । दरअसल पाकिस्तान में बलूचिस्तान प्रान्त के ल्यारी जनपद के हिंगुल पर्वत पर माता हिँगलाज का धाम है जो मुख्य शहर कराची से 250 किलो मीटर दूरी पर है बलोचवासियो के लिये यह मंदिर समान रूप से महत्वपूर्ण है हिँगलाज माता के मेले में केवल हिन्दू श्रद्धालु ही नही मुसलमान भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते है जहाँ हिन्दुस्तान में भक्त हिँगलाज देवी को ”माँ” कहकर पुकारते है वही पाकिस्तान में मुसलमान ” नानी का मंदिर ”कहते है 52 सिद्ध पीठो में अग्रणी माँ देवी हिँगलाज आज भी भारत पाकिस्तान की आपसी प्रेम सद्भाव एवम् श्रद्धा की प्रतीक है।
क्या कहते हैं हिंगलाज सेवक….
दादरा गाँव निवासी व माता हिंगलाज सेवक अंजनी कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि शासन व प्रशासन के निर्देश पर पूरा मन्दिर परिसर को बंद रखा गया है बीते नौ रात्रो में हजारो महिला और पुरुषों की यहाँ भीड़ होती थी लेकिन आज ताला बंद है सिर्फ पुजारी के द्वारा ही पूजा अर्चना की जा रही है ।और महामारी के चलते 600 वर्ष पहले तत्कालीन सन्त कवि बाबा पुरषोत्तम दास ने देवी हिंगलाज की स्थापना दादरा गाँव मे की थी। तब से लोगो का कल्याण हो रहा है।
क्या कहते है पुजारी…
हिंगलाज पुजारी पं शेष राम मिश्र बताते है कि सभी भक्तजन अपने घर में नवरात्रि के दिनों में माता रानी की पूजा करे,अपने जीवन को सफल बनावै।और देश हित के लिये सुख समृद्धि की कामना करें यही देवी जी की सच्ची भक्ति व आराधना है।
पडरौना,कुशीनगर : वैश्विक संकट बनकर उभरे कोरोना वायरस से बचाव के लिए देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के बाद लोग ज्यादा सचेत नजर आ रहे हैं। शनिवार को पडरौना विकास खंड कुछ गांवों में जो तस्वीर सामने आई उससे तथाकथित समझदारों को गंवई लोगों से सीख लेने की जरूरत है। सरकार के आदेश के बाद गांव में सैनिटाइज व मास्क वितरण करने के साथ भोजन की व्यवस्था की है। संक्रमण को रोकने के लिए जहां कुछ गांवों के प्रधान काफी सचेत दिख रहे हैं वहीं समाजसेवी भी बढ़-चढ़ कर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
ग्रामीणों के बीच जरुरत कि सामाग्री व मास्क का वितरण करने के साथ ही गांवों को सैनिटाइजर के आलावा फागिंग कर रहे है। पडरौना विकास खंड के सिधुआ मिश्रौली,आदि गांवों के प्रधान अपने गांव को न सिर्फ फागिंग करने में जुटे रहे,बल्कि भोजन सामग्री व मास्क भी वितरित किया। सिधुआ के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि आलोक शुक्ला घर-घर घूमकर ग्रामीणों को जागरूक करने के साथ ही भोजन सामग्री देने के अलावा मास्क वितरण करने के बाद फागिंग भी कराया है।
इसी क्रम में पडरौना शहर में इंस्पेकटर पडरौना पवन सिंह समाजसेवी मंटू बाबा नेता सुधीर कुशवाहा आदि ने गांव के गरीब लोगों में भोजन सामग्री वितरण कर सुरक्षा के मद्देनजर एक दूसरे को घर में रहने का ही भरोसा दिल आया है । इस दौरान ग्रामीणों से इस वैश्विक महामारी से सावधान रहने की सलाह दी।
मुसाफिरखाना/अमेठी। कोरोना वायरस से पूरे विश्व में काले बादल छाए हुए हैं. सुरक्षा की दृष्टि से पूरे भारत में लॉकडाउन किया गया है. शासन-प्रशासन भी जनहित में हर सम्भव कदम उठा रहा है. ऐसे माहौल में पूरा देश एकजुट होकर महामारी से निपटने के लिए प्रयास कर रहा है.कोरोना वायरस से आम लोगों को बचाने के उद्देश्य को लेकर रविवार को दादरा प्रधान प्रतिनिधि सर्वेश सिंह रवि अपने मित्र प्रशांत श्रीवास्तव के साथ जागरूकता अभियान चलाकर दादरा गांव में घर घर जाकर लोगों के हाथ धुलवा कर आम लोगों को मास्क ,सेनेटाइजर व साबुन बाटे और गांव की गलियो व नालियो में दवाईओ का छिड़काव कराया। उन्होंने आम लोगों से कहा की कोरोना वायरस से बचाव के लिए सावधानी बरतें तथा भीड़भाड़ में इकट्ठा न हो और घरों में रहे। उन्होंने लोगों से हाथ मिलाने, गंदगी से दूर रहने तथा अपने हाथों को दिन में कई बार साबुन से धोने का भी आह्वान किया। श्री रवि सिंह ने कहा कि मुझे लगता है इस वैश्विक महामारी से निपटने के लिए सरकार के साथ हर नागरिक को अपने कर्तव्य का निर्वहन करना चाहिए। चुनौती बड़ी है, लिहाजा देश के एक नागरिक होने के नाते कोरोना के खिलाफ जंग में हमारी भी अहम जिम्मेदारी है।
एक तरफ तो प्रधानमंत्री के निर्देष पर पूरा देश बंद है वहीं पीलीभीत जिले के कुछ व्यापारी लॉक डाउन को मानने को तैयार ही नहीं हैं थाना कोतवाली में एक व्यापारी जैविक खाद व दवाइयां बेचता हुआ नजर आया और दूसरी तरफ शैली अग्रवाल व्यापार मंडल अध्यक्ष भी नियम तोड़ते नज़र आ रहे हैं और बिना मास्क व दस्तानों के भीड़ एकत्र करते हुए दिखे अगर पुलिस प्रशासन ने जल्द ही करवाई नहीं कि तो इससे वायरस फैलने का खतरा और भी बढ़ जाएगा।
ये खुलेआम भीड़ लेकर शहर में घूम रहे हैं ये लॉक डाउन में अपनी सुरक्षा भी नही कर रहे हैं और दूसरे लोगों को भी खतरे में डाल रहे हैं।देखना है कि पीलीभीत प्रशासन इनपर क्या कार्यवही करता है या फिर इन्हें लॉक डाउन का नियम तोड़ने पर कोई कार्यवाही करता है l
पडरौना,कुशीनगर : कोरोना वायरस से बचाव के लिए रेड अलर्ट जारी करते हुए जिस तरह युपी-बिहार की सीमा को 14 अप्रैल तक सील कर दिया है। वही बिहार में युपी पार कर किसी जाने वाले कि अनुमति नहीं जल्दी नही मिल रही है। एसे में युपी बिहार सीमा पर स्थित पडरौना कोतवाली पुलिस की बांसी चौकी पुलिस ने जहां चेक पोस्ट लगा कर लगदा उनकी कड़ी निगरानी कर रही है,वहीं इसी जिले के कुबेरस्थान कि पुलिस पचरुखियां घाट के अलग अलग दोनों पुलों पर बैरिकेडिंग कर नजर जमाए हुई है l
इन सबके अलावा युपी बिहार बाडर सीमा बांसी बाजार के बिहार बॉर्डर चेक पोस्ट पर तैनात पुलिस मुस्तैदी के साथ बैरिकेडिंग कर ड्यूटी कर रहे है। दूसरी ओर लाक डाउन के छठे दिन लखनऊ व दिल्ली लौटे बिहारियों की घर वापसी के बाद यूपी बिहार सीमा से होकर अलग-अलग जिलों के विभिन्न गांव निवासी पैदल जाते नजर आए जो कई सौ किलोमीटर पैदल यात्रा करके घर को जाने को मजबूर थे,इनके लिए बिहार सरकार ने किसी प्रकार की भोजन के आलावा इन्हें यूपी बिहार बॉर्डर से घर भिजवाने के लिए कोई संसाधन मुहैया नहीं कराई थी l जिसके वजह से लखनऊ दिल्ली से कमाने गए मजदुर गरीब जैसे तैसे आए लोग यूपी पार करने के बाद बिहार में प्रवेश कर पैदल जाना ही मुनासिब समझा ।