Category: uttar-pradesh

  • अन्याय के खिलाफ लड़ने का मुलायम ने लिया संकल्प

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    लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने कहा कि हम अन्याय के खिलाफ लड़ेंगे, साथ ही गरीब जनता को उसका हक दिलाने के लिए हर हद तक जाएंगे। मुलायम सिंह ने 71वें गणतंत्र दिवस पर रविवार को पार्टी कार्यालय में ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर उन्होंने वहां मौजूद लोगों को आज से अन्याय के खिलाफ लड़ने का संकल्प दिलाया।

    उन्होंने कहा कि “26 जनवरी और 15 अगस्त का हमारे लिए विशेष महत्व है। यह महान पर्व हैं और ऐसा नहीं है कि इस दिन हम सभी सिर्फ झंडारोहण करके अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लें। आप और हम यह दिन देख रहे हैं, कयोंकि इस दिन के लिए हमारे बुजुगरें ने कुर्बानी दी थी।”

    मुलायम ने कहा कि संकल्प लिए बिना यहां से कोई कार्यकर्ता नहीं जाएगा। सियासत करने वालों के लिए बिना संकल्पित जीवन तमाम चीजें बेकार हैं। उन्होंने कहा कि पूरा देश अंग्रेजों के खिलाफ एक साथ खड़ा हुआ था। उस समय तो कहा जाता था कि अंग्रेज कभी इस देश से नहीं हटेगा, लेकिन हमारे बुजुगोर्ं ने जान देकर हमें आजादी दिलवाई।

    सपा संरक्षक ने कहा कि “अब तो इस आजादी के बाद हमारी सभी की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। वास्तव में आज का दिन संकल्प का दिन है। तमाम कार्यकर्ताओं को संकल्प करना चाहिए कि हम अन्याय के खिलाफ लड़ेंगे, इसके साथ ही गरीब जनता को उसका हक दिलाने के लिए हर हद तक जाएंगे।”

    पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कहा कि “हर किसी को उम्मीद थी कि आजादी मिलने के बाद हमारी तमाम समस्याएं खत्म हो जाएंगी। देश के लोगों को रोजगार मिलेगा। किसान भी खुशहाल हो जाएगा और तो और नौजवान दर-दर नहीं भटकेगा। लेकिन आज हालात बहुत अच्छे नहीं है। आज भी हमें बहुत कुछ करने की जरूरत है।”

  • हर्षोल्लास के साथ जनपद भर में मनाया गया 71 वां गणतंत्र दिवस

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    जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट परिसर में किया ध्वजारोहण।

    रिपोर्ट:सैय्यद मकसूदुल हसन

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    अमेठी। जनपद में 71 वां गणतंत्र दिवस सादगी एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस राष्ट्रीय पर्व पर जिलाधिकारी श्री अरुण कुमार ने कलेक्ट्रेट परिसर में ध्वजारोहण किया साथ ही अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व, उपजिलाधिकारी गौरीगंज सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
    इसके उपरांत जिलाधिकारी ने महात्मा गांधी व संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण किया। इस दौरान जिलाधिकारी मौजूद अधिकारियों एवं कर्मचारियों को शपथ दिलाई। शपथ में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी को अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन बखूबी करना चाहिए, जिनके जो भी कार्य हैं उन्हें समय से पूरा करें। इसके उपरांत उन्होंने आयोजित गोष्ठी में 71वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर संबोधन देते हुए कहा कि हमारे देश का संविधान विश्व के संविधान में सबसे अच्छा संविधान है हमें अपने संविधान पर गर्व करना चाहिए। हमें जो भी संविधान में निहित निर्देश प्राप्त हुए हैं उनको पूरे मनोयोग से पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ मौलिक कर्तव्यों को भी ध्यान में रखना चाहिए। गोष्ठी के दौरान विद्यालय की छात्राओं द्वारा गीत किए गए। इस दौरान अपर जिलाधिकारी वंदिता श्रीवास्तव, वरिष्ठ कोषाधिकारी आलोक राजवंशी, उप जिलाधिकारी गौरीगंज राकेश कुमार, बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी राजकुमार सहित कलेक्ट्रेट के कर्मचारी व संभ्रांत लोग मौजूद रहे।

  • 1 से 3 घंटे तक लेट दिल्ली आने वालीं 14 ट्रेनें , यहां देखें कौनसी गाड़ी

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    नई दिल्ली। दिल्ली आ रहीं 14 ट्रेनें एक से लेकर से तीन घंटे तक की देरी से दिल्ली पहुंच रही है। सबसे ज्यादा विलंब से दिल्ली आ रहीं ट्रेनों में मुंबई-अमृतसर एक्सप्रेस है जो 3 घंटे की देरी से दिल्ली आ रही है। जबकि भुनेश्वर-नई दिल्ली दुरंतो एक्सप्रेस और इस्लामपुर-नई दिल्ली मगध एक्सप्रेस 1 घंटे की देरी से दिल्ली आ रही हैं। अन्य ट्रेनों में डिब्रूगढ़-ब्रह्मपुत्र मेल 2 घंटे, गया-नई दिल्ली महाबोधि एक्सप्रेस 2 घंटे 30 मिनट, भागलपुर-आनंद विहार विक्रमशिला एक्सप्रेस 2 घंटे, गया-आनंद विहार एक्सप्रेस 1 घंटे 30 मिनट, सिंगरौली-निजामुद्दीन एक्सप्रेस 2 घंटे, मुंबई-अमृतसर एक्सप्रेस 3 घंटे, जबलपुर-निजामुद्दीन संपर्क क्रांति 2 घंटे लेट चल रही है।

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    इसी तरह वाराणसी-नई दिल्ली काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस 2 घंटे और रक्सौल-आनंद विहार सत्याग्रह एक्सप्रेस 2 घंटे 30 मिनट की देरी से दिल्ली पहुच रही हैं।

  • थाना जामो पुलिस द्वारा मु0अ0सं0 25/2020 धारा 304/323/324/452/504/506 भादवि में वांछित 02 अभियुक्त गिरफ्तार

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    रिपोर्ट:सैय्यद मकसूदुल हसन

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    अमेठी। पुलिस अधीक्षक डा0 ख्याति गर्ग के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक दयाराम सरोज के पर्यवेक्षण व क्षेत्राधिकारी गौरीगंज अर्पित कपूर के कुशल नेतृत्व में अपराध एवं अपराधियों के धर पकड़ हेतु चलाये जा रहे अभियान के क्रम में रविवार को प्रभारी निरीक्षक रतन सिंह थाना जामो मय हमराह द्वारा मुखबिर की सूचना पर मु0अ0सं0 25/2020 धारा 304/323/324/452/504/506 भादवि में वांछित अभियुक्त संजय कुमार व वीरेन्द्र कुमार पुत्रगण जुगुत पाल कनौजिया निवासी पूरे सुभाऊ मजरे कटारी थाना जामो को पहलवान बाबा मंदिर लोनार घाट पुल के पास से समय करीब 11.15 बजे दिन में गिरफ्तार किया गया ।

    गिरफ्तार अभियुक्त का नाम व पता

    1. संजय कुमार पुत्र जुगुतपाल कनौजिया निवासी पूरे सुभाऊ मजरे कटारी थाना जामो जनपद अमेठी
    2. वीरेन्द्र कुमार पुत्र जुगुतपाल कनौजिया निवासी पूरे सुभाऊ मजरे कटारी थाना जामो जनपद अमेठी
      सम्बन्धित अपराधः
      मु0अ0सं0 25/2020 धारा 304/323/324/452/504/506 भादवि थाना जामो जनपद अमेठी ।

    गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीमः
    1.प्र0 नि0 रतन सिंह थाना जामो जनपद अमेठी

    1. उ0नि0 प्रवीण कुमार सिंह थाना जामो जनपद अमेठी
      3.उ0नि0 ब्रह्मानन्द यादव थाना जामो जनपद अमेठी
      4.हे0का0 राकेश सिहं थाना जामो जनपद अमेठी
      5.हे0का0 घनश्याम यादव थाना जामो जनपद अमेठी
      6.का0 धीरेन्द्र कुमार सिंह थाना जामो जनपद अमेठी
      7.का0 अशोक कुमार थाना जामो जनपद अमेठी

  • थाना अमेठी का डीएम ने किया औचक निरीक्षण

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    संगीन अपराधों में तत्काल विवेचना कर अपराधियों को सजा दिलाएं…..डीएम

    रिपोर्ट:सैय्यद मकसूदुल हसन

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    अमेठी। जिलाधिकारी अरुण कुमार ने आज थाना अमेठी का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने अपराध रजिस्टर, हिस्ट्रीशीटर रजिस्टर, त्योहार रजिस्टर नियुक्ति रजिस्टर, ग्राम अपराध रजिस्टर, माननीय न्यायालय द्वारा भेजे जाने वाला समन रजिस्टर सहित अन्य रजिस्टरों का निरीक्षण किया। अपराध रजिस्टर में कई ऐसे मामले पाए गए जिनकी निर्धारित तिथि बीत जाने के बाद भी अभी तक उनमें विवेचना नहीं हुई थी जिस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जो मुकदमा अपराध रजिस्टर में दर्ज हो उन्हें संबंधित ग्राम अपराध रजिस्टर में जरूर दर्ज करें। हिस्ट्रीशीटर रजिस्टर में 79 हिस्ट्रीशीटर दर्ज हैं। त्यौहार रजिस्टर के निरीक्षण में ईद का त्यौहार दर्ज नहीं पाया गया। नियुक्ति रजिस्टर भी अपडेट नहीं था जिस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जाहिर की। माननीय न्यायालय द्वारा भेजे जाने वाले समन में डीएम ने कहा कि जो भी मामले तमिला हेतु लंबित हैं उन्हें तत्काल तमिला कराएं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि गंभीर अपराध वाले मामलों में जल्द से जल्द विवेचना कर चार्जशीट दाखिल करें जिससे अपराधी को जल्द से जल्द सजा दिलाई जा सके। संगीन अपराध वाले मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही पोक्सो एक्ट, एसी/एसटी एक्ट के अंतर्गत जो भी मुकदमा दर्ज किए गए हैं उनकी समय सीमा के अंतर्गत विवेचना कर अपराधियों को सजा दिलायें। इसके साथ ही डीएम ने मालगृह का निरीक्षण किया इस दौरान माल खाना का रजिस्टर मौके पर उपलब्ध नहीं पाया गया। डीएम एसडीएम अमेठी को मौके पर मौजूद रहकर माल खाना में मौजूद सामग्री का मिलान कराने का निर्देश दिया। इसके बाद डीएम ने आइजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त संदर्भों की समीक्षा की इस दौरान उन्होंने पाया कि कुल 33 संदर्भ समय सीमा के अंतर्गत लंबित हैं। निरीक्षण के दौरान पुलिस क्षेत्राधिकारी अमेठी पीयूष कांत राय, एस ओ अमेठी श्याम सुंदर सहित अन्य संबंधित मौजूद रहे।

  • पद्मश्री पुरस्कार शरीफ चाचा के लिए है बेहद खास

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    अयोध्या। मोहम्मद शरीफ अयोध्या में अचानक चर्चा का केंद्र बन गए हैं। उन्हें हमेशा से प्यार और सम्मान मिलता रहा है और उन्हें प्यार से लोग ‘शरीफ चाचा’ के नाम से बुलाते हैं। लेकिन शनिवार को हुई पद्मश्री पुरस्कारों की घोषणा ने रातोंरात उनकी प्रतिष्ठा और बढ़ा दी है। शरीफ चाचा कई वर्षो से अयोध्या में लावारिश लाशों को दफनाते या दाह-संस्कार करते रहे हैं। उन्होंने अब तक 25,000 से ज्यादा शवों को दफनाया/दाह संस्कार किया है।

    पेशे से साइकिल मिस्त्री मोहम्मद शरीफ हर रोज लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए कब्रिस्तान और श्मशान का चक्कर लगाया करते हैं।

    अगर कभी वह वहां नहीं पहुंच पाते तो श्मशान स्थल या कब्रिस्तान के निगरानीकर्ता लावारिश लाश होने पर उन्हें सूचित कर देते हैं।

    उन्होंने सिर्फ मुसलमानों व हिंदुओं की लाशों को दफनाया व दाह-संस्कार ही नहीं किया है, बल्कि सिखों व ईसाइयों के भी अंतिम संस्कार किए हैं।

    शरीफ के अनुसार, उन्होंने अपने बेटे को 28 साल पहले खो दिया था और उसका शव रेल पटरी पर मिला था।

    शरीफ का केमिस्ट बेटा किसी काम से सुल्तानपुर गया था और वहीं से लापता हो गया था। यह वही समय था, जब बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मुद्दे को लेकर सांप्रदायिक तनाव अपने चरम पर था। बाद में पता चला कि उनका बेटा उसी सांप्रदायिक दंगे की भेंट चढ़ गया।

    यह ऐसी हृदयविदारक घटना थी, जिसने मोहम्मद शरीफ के जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया। उनके बेटे के शव को लावारिस समझा गया। तब से उन्होंने अपने जिले में लावारिस शवों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठा ली और धर्म की परवाह किए बिना हर लावारिस लाश का अंतिम संस्कार करने का फैसला किया।

    शरीफ कहते हैं कि उन्हें कई बार आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा, लेकिन चंदा जुटाकर या दान में मिले पैसों से यह पुनीत काम करना जारी रखा।

  • UP : बच्चे की अमरूद खरीदने को लेकर पीट-पीटकर हत्या

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    लखीमपुर। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले में एक स्तब्ध करने वाली घटना सामने आई। जिले के एक सरकारी स्कूल के तीन किशोर छात्रों ने अपने सहपाठी की अमरूद खरीदने को लेकर हुए झगड़े में पीट-पीटकर हत्या कर दी। यह घटना सोमवार को अमीरनगर गांव में हुई। पुलिस रिपोर्टों के अनुसार, मृतक की पहचान कक्षा 6 के फरमान कुरैशी के रूप में की गई है। शनिवार को स्कूल के बाद अमरूद खरीदने को लेकर उसका (फरमान) अपने तीन दोस्तों से झगड़ा हो गया था।

    तीनों लड़कों ने फरमान से अपने लिए अमरूद खरीदने को कहा, लेकिन फरमान ने इनकार कर दिया। तीनों लड़के 15 साल की उम्र के हैं। सोमवार को जब फरमान कुरैशी अपने चचेरे भाई तौहीद के साथ स्कूल पहुंचा, तो उन तीनों ने उस पर हमला किया और बेरहमी से उसकी पिटाई की।

    इन तीनों को एक स्कूल स्टाफ ने पकड़ लिया और इसके बाद पुलिस को सौंप दिया। बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) बुधप्रिया सिंह ने कहा, “पुलिस ने इस मामले में आवश्यक कदम उठाए हैं, जबकि हमने यह पता लगाने के लिए जांच का आदेश दिया है कि क्या किसी स्कूल शिक्षक की ओर से कोई लापरवाही की गई है।”

    फरमान के पिता की शिकायत पर तीनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है और लड़के के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

  • पुलिस तटस्थ विधायक के भतीजे से मारपीट के मामले में

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    बांदा। उत्तर प्रदेश में बांदा जिले के नरैनी कस्बे में रेत के अवैध खनन को लेकर भाजपा विधायक के भतीजे के साथ की गई कथित मारपीट के मामले में पुलिस अब तटस्थ रुख अपना रही है। पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार दोनों पक्ष खनन कारोबार से जुड़े हैं।

    रविवार रात नरैनी कस्बे के मोतियारी मोड़ पर स्थानीय भाजपा विधायक के भतीजे के साथ कथित रूप से की गई मारपीट को लेकर भले ही विधायक ने इसे अपनी नाक का बाल समझ लिया है, लेकिन पुलिस इस मामले में तटस्थ है। सोमवार देर रात तक कोई भाजपाई इस मामले में नरैनी कोतवाली तो नहीं पहुंचा, लेकिन विधायक और उनके लोग देर रात तक कोतवाली में जमघट लगाए रहे और पुलिस पर कार्रवाई करने का दबाव बनाते रहे। लेकिन, पुलिस अभी तक तटस्थ भूमिका में है। न तो अभी तक प्राथमिकी दर्ज की गई है और न ही आरोपियों से पूछताछ हुई है।

    हालांकि, इस मामले में नरैनी कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) गिरीन्द्र सिंह ने मंगलवार को बताया, “मामले की जांच हल्का के उपनिरीक्षक बृजकिशोर मिश्रा को सौंपी गई है और जांच रिपोर्ट मिलने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।”

    वहीं, नरैनी से भाजपा विधायक राजकरन कबीर के प्रतिनिधि नन्दकिशोर ब्रह्मचारी ने कहा कि जब नरैनी पुलिस विधायक से जुड़े मामले में रपट नहीं दर्ज कर रही है तो आम आदमी के मामलों का क्या होगा।

    एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि “दोनों पक्ष अवैध तरीके से रेत खनन के कारोबार से जुड़े हैं। कथित पीड़ित युवक दीपक ने कुछ दिन पूर्व आरोपी चुन्नू यादव की तीन ट्रॉली बालू लेकर बेच लिया था, वही बालू उसके द्वारा मांगने पर विवाद हुआ और अब इसे तूल दिया जा रहा है।”

    गौरतलब है कि नौगवां गांव की बागै नदी में किए जा रहे रेत खनन को लेकर दो पक्षों में रविवार रात विवाद हुआ था, जिसके बाद खुद को विधायक का भतीजा बताने वाला युवक दीपक मुदीर्रामपुर के चुन्नू यादव पर मारपीट करने का आरोप लगा रहा है।

  • 63 साल से 150 साल पुराने ‘फांसी-घर’ को महिला मुजरिम की ‘गर्दन’ का इंतजार

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    मथुरा। फांसी, फांसी-घर और मुजरिमों के किस्से-कहानियों और उसके इतिहास से जमाने की लाइब्रेरियां भरी पड़ी हैं। लेकिन इस भीड़ में शायद ही कोई ऐसी लाइब्रेरी दुनिया में हो, जिसमें कहीं किसी ‘महिला-फांसी घर’ का जिक्र देखने-पढ़ने को मिला हो।  एक ऐसे महिला फांसी घर की सच्ची कहानी खोजकर निकाली है, जिसका निर्माण सन 1870 यानी अब से तकरीबन 150 साल पहले किया गया था।

    हाल-फिलहाल लंबे समय से देश के इकलौते और पहले माने जाने वाले इस ‘महिला फांसी-घर’ को पिछले 63 सालों से इंतजार है एक अदद महिला मुजिरम की ‘गर्दन’ का।

    रहस्य और रोमांच से लबरेज इस इकलौते महिला फांसी-घर से संबंधित दस्तावेजों को खंगालने पर कई महत्वपूर्ण कहानियां-जानकारियां आईएएनएस के हाथ लगीं हैं। इस महिला फांसी घर का उल्लेख ब-मुश्किल इन दिनों अगर मिल सकता है तो, सिर्फ और सिर्फ उत्तर प्रदेश के करीब 63 साल पुराने जेल मैनुअल-1956 में। जिसमें इस फांसी घर का उल्लेख साफ-साफ दर्ज है।

    अपने आप में अजूबा मगर गुमनामी में जमींदोज हो चुका यह रहस्यमयी ‘महिला-फांसी घर’ मौजूद है राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से करीब 150 किलोमीटर दूर स्थित कृष्ण भगवान की जन्मस्थली और उत्तर प्रदेश के मथुरा की जिला जेल में। यह जेल स्थित है उसी खूनी जवाहर बाग के पास (मथुरा कैंट के पास), जहां जून 2016 में हुआ था पुलिस और ढोंगी रामबृक्ष यादव समर्थकों के बीच खूनी संघर्ष। उस खूनी संघर्ष में यूपी के कुछ बुजदिल पुलिस वालों के कारण तमाम बेकसूर और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (मथुरा) जांबाज मुकुल द्ववेदी मारे गए थे।

    दस्तावेज खंगालने पर आईएएनएस को पता चला कि मथुरा जेल का निर्माण सन 1870 यानी अब से करीब 150 साल पहले हुआ था। उसी दौरान इस जेल परिसर में ‘महिला फांसी-घर’ का निर्माण कराया गया था। आईएएनएस के पास मौजूद इस महिला फांसी घर की जानकारियों पर मथुरा जेल के मौजूदा वरिष्ठ जेल अधीक्षक शैलेंद्र कुमार मैत्रेय भी अपनी मुहर लगाते हैं।

    यूपी में फिलहाल करीब 62 जेल हैं। 62वीं जेल का उद्घघाटन हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंबेडकर नगर में किया था। मथुरा जेल यूं तो 36 एकड़ में फैली है। इसमें से 16 एकड़ में जेल परिसर निर्मित है। बाकी खाली भूमि पर सजायाफ्ता मुजरिमों से मशक्कत (खेती-बाड़ी) कराई जाती है।

    मथुरा जेल में कैदियों को रखने की निर्धारित क्षमता 554 है। इस संख्या में 524 पुरुष और 30 महिला कैदी ही रखे जाने चाहिए। इसके बाद भी यहां, गाजर-मूली की तरह ठूंसकर भर दिए गए हैं करीब 1600 कैदी। इनमें से निर्धारित क्षमता 30 की तुलना में 102 सिर्फ महिला कैदी हैं। मतलब यूपी की सल्तनत ने मथुरा जिला जेल को घोड़ों का अस्तबल बनाकर छोड़ दिया है।

    आईएएनएस की पड़ताल के दौरान सामने आए कुछ सवालों के बाबत पूछे जाने पर जेल के वरिष्ठ अधीक्षक शैलेंद्र कुमार मैत्रेय ने कहा, “यहां मौजूद महिला फांसी-घर में सिर्फ महिला कैदियों को ही टांगा जाएगा। इसका उल्लेख उत्तर प्रदेश जेल मैनुअल-1956 में भी किया गया है।”

    करीब आधा बीघा जगह में जेल का यह महिला ‘फांसी घर’ फिलहाल ‘भुतहा’ और ‘अभिशप्त’ जगह से ज्यादा कुछ नहीं है। जेल की बाहरी और भीतरी दीवार के बीच में मौजूद एक जर्जर, बेहद पुरानी कोठरी ही मथुरा जेल में मौजूद आजाद हिंदुस्तान का इकलौता और पहला ‘महिला फांसी घर’ है। इसके आसपास किसी को फटकने की इजाजत नहीं है। वैसे भी इसकी जर्जर खंडहरनुमा तकरीबन दिन-ब-दिन जमींदोज हो रहे दर-ओ-दीवार की ओर किसी की जाने की हिम्मत नहीं होती है।

    अदालत की पेशी से इस जेल में लौटे एक कैदी ने आईएएनएस को बताया, “इस बूढ़े फांसी घर पर रात में जो बल्ब रोशनी के वास्ते जलाया जाता है, उसकी मद्धिम रोशनी भी डराती है। बदन के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।”

    वरिष्ठ जेल अधीक्षक होने के नाते ‘महिला फांसी-घर’ में आप कितनी बार गए? शैलेंद्र कुमार मैत्रेय ने आईएएनएस से कहा, “नहीं मैंने भी अंदर जाकर इसे कभी नहीं देखा। अंदर कुछ बचा ही कहां है? दरवाजा गल चुका है। दीवारें बेहद कमजोर हैं। अंदर बड़े-बड़े झाड़-झंखाड़ मौजूद हैं। महिला फांसी घर के दरवाजे के छेद से अंदर देखने पर, लोहे का लीवर भी एकदम गला हुआ दिखाई देता है। धूप-बरसात के कारण फांसी-घर पर किसी जमाने में लगाए गए लकड़ी के तख्ते मिट्टी में मिल-दब-खप चुके हैं। चूंकि यहां आज तक कभी किसी महिला मुजरिम को फांसी पर ‘टांगा’ ही नहीं गया, इसलिए इसकी देखरेख-मरम्मत की भी जरूरत महसूस नहीं हुई।”