वाराणसी : बनारस के नदेसर स्थित छोटा कटिंग मैदान में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर के बिगड़े बोल प्रदेश सरकार तक पहुंच गए हैं। उनके इस रवैये से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा के कई मंत्री व पदाधिकारी बेहद नाराज हैं। नाराजगी इतनी कि मुख्यमंत्री ने बनारस प्रवास पर आए स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह से रविवार की देर रात ही फोन पर बात की और स्पष्ट किया कि किसी भी हालत में दबाव की राजनीति नहीं चलेगी। मुख्यमंत्री का संकेत मिलते ही स्वास्थ्य मंत्री ने भी अपने तेवर बदल दिए। सोमवार की सुबह सर्किट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता में सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर के बिगड़े बोल को लेकर दो टूक कहा कि प्रदेश सरकार में शामिल सहयोगी दल की ओर से जो दबाव की राजनीति की जा रही है वह नहीं चलेगी। स्वास्थ्य मंत्री ने सुभासपा प्रमुख का नाम लिए बिना कहा कि दबाव की राजनीति से योगी सरकार डरने वाली नहीं है। जो दल यह समझकर अनरगल आरोप लगा रहे हैं उनकी समझ गलत है। यदि कोई परेशानी है तो आपस में बैठकर सुलझा लेना सभी के लिए हितकर होगा।
चलेगा भाजपा का धोबी पाट :
स्वास्थ्य मंत्री ने बातों-बातों में जो संकेत दिए उससे यही अनुमान लगाया जा रहा है कि सहयोगी दल के तौर पर प्रदेश सरकार में शामिल सुभासपा को भाजपा के बड़े दांव का सामना करना पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार भाजपा ने राजनीति का जो धोबी पाट दांव महाराष्ट्र में मारा था और सहयोगी दल शिवसेना चित हो गई थी, कमोबेश उप्र में सुभासपा के खिलाफ भी पार्टी वही दांव मार सकती है।
दल में भरोसा अब दूर की बात : प्रदेश सरकार में भाजपा के सहयोगी दल सुभासपा पर भरोसा अब दूर की बात हो गई है। इसकी वजह सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर की ओर से अब तक चले राजनीतिक दांव हैं। पहले बसपा तो फिर सपा के साथ भी उन्होंने दबाव की राजनीति की थी। इसके बाद विधानसभा चुनाव से लगायत प्रदेश सरकार में शामिल होने तक उनकी ओर से दबाव की राजनीति होती रही। इसे देखते हुए अब भाजपा के शीर्ष पदाधिकारी उन पर भरोसा करने की स्थिति में नहीं हैं।
रायबरेली के हरचंदपुर गांव के रहने वाले इंजीनियर विक्रम सिंह ने लाखों रुपये का पैकेज छोड़ कर चाय का बिजनेस शुरू कर दिया। इस युवक ने लंदन से लौटने के बाद अब तक नोएडा व रायबरेली में अपने चाय के चार आउटलेट खोल दिए। उनका अगला लक्ष्य लखनऊ और देहरादून में चहास नाम से चाय की दुकान शुरू करना है।
विक्रम ने अपना यह स्टार्टअप बिजनेस बिना सरकारी मदद के शुरू किया। उन्होंने चहास नाम से चाय की दुकान सबसे पहले नोएडा में खोली। बिजनेस चल निकलने पर उन्होंने दूसरा आउटलेट नोएडा के सेक्टर 62 में शुरू किया। रायबरेली के रहने वाले विक्रम सिंह ने एक आउटलेट अपने जिले शहर रायबरेली में भी खोला है। उन्होंने यहां दूसरा आउटलेट भी शुरू किया।
लंदन के कॉफी कैफे से लिया आइडिया ग्वालियर से एमसीए करने वाले विक्रम को एल एंड टी कंपनी में नौकरी मिली। कंपनी ने एक प्रोजेक्ट के तहत उन्हें छह महीने के लिए लंदन भेजा। नए स्टार्टअप के लिए आइडिया विक्रम को लंदन में चलने वाले कॉफी कैफे से मिला। भारत लौटने के बाद उन्होंने कुछ अन्य कंपनियों में भी नौकरी की। साथ ही चाय के बिजनेस पर भी निगाह लगाए रहे। इस बीच उन्होंने इंटरनेट पर चाय पर रिसर्च जारी रखी।
25 तरह की चाय मिलती है चहास में विक्रम सिंह के चाय ठेका पर आप 25 तरह की चाय का स्वाद ले सकते हैं. रुपया 7 से रुपया 99 तक में उनकी चाय बिकती है। इसमें अदरक वाली चाय की डिमांड खासी है।
युवाओं को रोजगार देना प्राथमिकता लाखों का पैकेज छोड़कर अपना स्टार्टअप शुरू करने वाले विक्रम सिंह खुद तो रोजगारी बने ही, उनकी प्राथमिकता युवाओं को रोजगार देने की है। इसीलिए वह यूपी के हर शहर में अपना यह बिजनेस शुरू करना चाहते हैं।
गाजीपुर । ससुराल में शौचालय नहीं बना तो भावी दुल्हन ने चौखट लांघने से इन्कार कर दिया। इससे वर पक्ष असमंजस में पड़ गया और दुल्हन को मनाने का दौर जारी है। मामला जैतपुरा गांव निवासी सुदामा निषाद का है। सुदामा का विवाह वीरपुर गांव निवासी जनार्दन निषाद की बेटी राजकुमारी से आठ फरवरी को होना तय हुआ है।
वर व वधू दोनों दिव्यांग हैं लेकिन, पढ़े-लिखे हैं। सुदामा जहां स्नातक स्तर तक की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं वहीं राजकुमारी स्नातक अंतिम वर्ष में हैं। दोनों का विवाह तय होने के दौरान वधू पक्ष ने सुदामा के घर में शौचालय न होने का सवाल खड़ा किया। इस पर वर पक्ष की तरफ से आश्वासन मिला कि विवाह से पहले प्रत्येक दशा में हम शौचालय बनवा लेंगे।
दिव्यांग सुदामा के पिता प्यारेलाल ने ग्राम पंचायत के प्रधान, सेक्रेटरी, सदर विकासखंड के खंड विकास अधिकारी आदि के यहां शौचालय बनवाए जाने की गुहार लगाई किंतु अब तक शौचालय नहीं बन पाया। इधर, पढ़े-लिखे सुदामा और राजकुमारी में सोशल साइट के जरिये बातचीत भी शुरू हो गई। राजकुमारी की तरफ से बार-बार सुदामा से पूछा जा रहा है कि शौचालय के निर्माण की प्रगति क्या है? राजकुमारी ने यहां तक कह दिया कि शौचालय नही बना तो मैं ससुराल का चौखट नहीं लाघूंगी।
सामाजिक संस्था से लगाई गुहार
बात बिगड़ती देख सुदामा ने अपना संदेश समग्र विकास इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष ब्रजभूषण दुबे तक पहुंचाया। इस पर ब्रजभूषण दुबे सोमवार को सुदामा के घर अपने सहयोगियों सहित पहुंचकर पूरा हाल जाने। उन्होंने पूरा मामला जिलाधिकारी के बालाजी, केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा सहित उत्तर प्रदेश शासन व प्रधानमंत्री के पोर्टल पर भेजते हुए तत्काल सुदामा के घर स्तरीय शौचालय निर्माण कराए जाने की मांग की।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने गणतंत्र दिवस पर कासगंज में 2 समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़प को ‘कलंक’ और शर्मनाक करार दिया। उन्होंने कहा कि मामले में सरकार को और गहराई से जांच करनी चाहिए। राज्यपाल ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि कासगंज में जो भी हुआ, वह किसी को शोभा नहीं देता है।
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Case of Kasganj
किसने शुरुआत की और किसने बाद में जवाब दिया, यह बात तो जांच में बाहर आएगी, लेकिन निश्चित तौर पर कासगंज में जो भी घटनाएं हुईं वे यूपी के लिए कलंक हैं। सरकार इसकी जांच कर रही है और इसमें कड़ा से कड़ा रुख अपनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोग जो माहौल को खराब करते हैं, उनकी जितनी निंदा की जाए कम है। मैं चाहता हूं कि सरकार और तफसील में जाकर जांच करे। पिछले 8-9 माह के दौरान प्रदेश में ऐसी कोई विशेष घटना नहीं हुई थी। यह (कासगंज की घटना) हम सब के लिए शर्म की बात है। मैं आशा करता हूं कि ऐसे कदम उठाए जाएंगे कि यूपी में फिर कभी ऐसे दंगे नहीं हों।
मालूम हो कि गणतंत्र दिवस पर कासगंज शहर में कथित रूप से आपत्तिजनक नारों को लेकर 2 समुदायों के बीच पथराव और गोलीबारी में एक युवक की मौत हो गई थी तथा कुछ अन्य घायल हो गए थे। घटना के बाद से शहर में रह-रहकर हिंसक वारदात हुईं।
मामले में अब तक 112 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस बीच, कासगंज शहर में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। हालांकि अधिकतर बाजार अब भी बंद हैं, लेकिन सड़कों पर लोगों का आवागमन शुरू हो चुका है। बहरहाल, जिला प्रशासन ने इंटरनेट सेवाओं को एहतियातन सोमवार रात 10 बजे तक बंद रखा है। पुलिस, पीएसी और रैपिड एक्शन फोर्स की टुकड़ियां शहर में लगातार गश्त कर रही हैं। शहर की सीमाएं अब भी सील हैं।
लखनऊ. उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में करीब 10 हजार सरकारी नौकरियों में गड़बड़ियों का मामला सामने आ रहा है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) लोक सेवा आयोग की तीन बड़ी भर्ती परीक्षाओं के साथ ही अन्य परीक्षाओं में हुई धांधलेबाजी के खेल की जांच कर रही है। जानकारों की मानें तो उत्तर प्रदेश के लोकसेवा आयोग में मध्य प्रदेश के व्यापम से भी बड़ा घोटाला हो सकता है, जिसके संकेत भी सीबीआई को मिलने शुरू हो गये हैं। लोक सेवा आयोग में ये भर्तियां अप्रैल 2012 से मार्च 2017 तक हुई हैं।
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UPPSC की भर्तियों में भ्रष्टाचार की जांच
सीबीआई लोक सेवा आयोग की तीन बड़ी भर्ती परीक्षाओं (पीसीएस, लोअर व आरओ-एआरओ) के साथ ही अन्य भर्तियों और सीधी भर्ती में हुई गड़बड़ियों की जांच कर रही है। सीबीआई ने अब तक परीक्षा, स्क्रीनिंग, इंटरव्यू और अन्य अनुभागों से जुड़े साक्ष्य जुटाये हैं। सूत्रों की मानें तो UPPSC की भर्तियों में भ्रष्टाचार की जांच कर रही सीबीआई टीम को तीन दलालों के नाम मिले हैं जो आयोग के अफसरों और परीक्षार्थियों के बीच समझौता कराते थे। तीनों नाम सीबीआई के राडार पर हैं, वे इलाहाबाद में खासे प्रतिष्ठित बताये जा रहे हैं। वो तीन नाम कौन हैं? इसे लेकर सीबीआई की ओर से खुलासा नहीं हुआ है। सूत्रों की मानें तो सीबीआई तक इन दलालों के नाम प्रतियोगी छात्रों ने ही पहुंचाये हैं। हालांकि, पता चला है कि इन तीन नामों में एक डॉक्टर, दूसरा कोचिंग संचालक और तीसरा नाम विभाग के ही एक कर्मचारी का है।
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UPPSC
भर्तियों में हुए भ्रष्टाचार में तीन बड़े नाम आये सामने लोक सेवा आयोग की भर्तियों में हुए भ्रष्टाचार को अब मध्यप्रदेश के व्यवसायिक परीक्षा मंडल व्यापम की तरह देखा जा रहा है। जानकारों की माने तो निष्पक्ष और तथ्यपूर्ण जांच हुई तो इसका मामला व्यापम घोटाले से भी बड़ा हो सकता है ।जिसके संकेत सीबीआई की जांच टीम को मिलने लगे है।आयोग की जांच करने पहुचीं सीबीआई की टीम को प्रतियोगी छात्रों ने अब तक कई अहम सबूत सौपे है।जिससे कई बड़े नाम सामने आये है। जो अब सीबीआई के निशाने पर है।बता दें की अब तक शहर के तीन बड़े और प्रतिष्ठित नाम सामने आए है।हालांकि उनके नाम का खुलासा न सीबीआई ने किया है न ही छात्र कुछ बताने को तैयार है।सूत्रों की मानें तो तीन बड़े दलाल अब तक आयोग के खेल में सामने आए है।
प्रतियोगी छात्रों ने बड़ी भर्तियों में धांधली की बात पहुंचाई सूत्रों की मानें तो सीबीआई तक प्रतियोगी छात्रों ने ही लोक सेवा आयोग की बड़ी भर्तियों में धांधली की बात पहुंचाई है। इन छात्रों ने सीबीआई को यह तक बताया है कि कितने रकम देकर एक-एक पद की सेटिंग का खेल हुआ है। सीबाआई तक यह भी जानकारी इन्हीं छात्रों के माध्यम से पहुंची है कि धांधलेबाजी के इस खेल में विभाग के कौन-कौन से अधिकारी शामिल थे। साथ ही छात्रों और अफसरों के बीच दलाली करने वालों के नाम भी प्रतियोगी छात्रों के माध्यम से ही सीबीआई तक पहुंचे हैं।
सबसे ज्यादा स्क्रीनिंग में गड़बड़ी सीबीआई की जांच टीम ने अब तक 2012से 2017 तक की परीक्षा की स्क्रीनिंग इंटरव्यू सहित आयोग के अन्य गोपनीय विभागों के कंप्यूटर की फॉरेंसिक रिकवरी ऑफ एविडेंस डिवाइस से स्कैनिंग कर इनके डाटा को सीबीआई ने अपने कब्जे में लिया है।प्रतियोगी छात्रो की शिकायत पर साक्ष्य जुटाने में जुटी सीबीआई स्कैनिंग के बाद प्रतियोगियों ने आयोग के तीन बड़ी भर्तियों की परीक्षा जिसमे पीसीएस लोवर आरओ एआरओ के साथ कई अन्य अलग भर्ती में हुई बड़े पैमाने की गड़बड़ियों की शिकायत सीबीआई के सामने रखी है । अब तक की जाँच में छात्रो से संवाद में सीबीआई ने यह माना है की भर्तियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है । जिसमे सबसे ज्यादा स्क्रीनिंग में गड़बड़ी और इंटरव्यू में कम नंबर देकर फेल करने का मामला सामने आया है।
लखनऊ। अॉल इण्डिया कम्यूनिटी हेल्थ वर्कर्स एसोशिएसन के राष्ट्रीय महासचिव मनोज कुमार ने बुधवार को अपने आंदोलनकारी साथियों के नाम एक संदेश जारी किया। संदेश में मनोज कुमार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सहयोग के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि प्रदेश की वर्तमान सरकार के सहयोगात्मक रूख के कारण लम्बे समय से चल रहा स्वास्थ्य रक्षक आंदोलन अब सफलता के निकट पहुंच चुका है तथा हजारों स्वास्थ्य रक्षकों की बहाली को निर्धारित करने वाला विभागीय शासनादेश जल्द ही जारी होने वाला है.
जिसके लिए इतने लम्बे समय से आंदोलन करने वाले सभी सहयोगी मित्र सम्वेदनशील प्रशासनिक अधिकारी और इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया के सभी पत्रकार बंधु बधाई के पात्र हैं।
मनोज कुमार ने इस संदेश में कहा है कि इस संदेश को जारी करने की आवश्यकता इसलिए महसूस की गई क्योंकि पिछले दिनों नैतिक पार्टी नामक राजनैतिक दल के कुछ लोगों ने भ्रष्ट नौकरशाहों के साथ मिल कर आंदोलन को भटकाने का असफल प्रयास किया था.
जो प्रशासनिक स्तर पर पूरी तरह असफल सिद्ध हुआ है। इस सम्बंध में दूर दराज के जिलों तथा भारत के लगभग सभी प्रदेशों में मौजूद लाखों स्वास्थ्य रक्षकों तक सही जानकारी पहुंचाना जरूरी समझा गया।
साउण्ड तथा समयावधि के लिए लेनी होगी अनुमति, छलका कलाकारों का दर्द आर्टिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश ने योगी को भेजा पॉच सूत्रीय मांगपत्र
रंजीव ठाकुर लखनऊ। एंटी रोमियों अभियान चला कर शादी से पहले आशिकों की नकेल कसने के बाद सूबे की योगी सरकार ने एक साल के भीतर ही विवाहोपरांत होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अनुमति लेने का फ़रमान सुना कर आशिकों के साथ-साथ संगीत प्रेमियों पर भी डंडा चला दिया है। ऐसे में मशहूर कवि पद्मश्री डॉ सुनील जोगी की वे पंक्तियाँ याद आ जाती है जो उन्होंने एंटी रोमियों को लेकर सीएम योगी को कही थी। उन मिसरों में डॉ जोगी कहते है – चाहत के समंदर में उतरने नहीं दूंगा, महबूब की गलियों से गुजरने नहीं दूंगा।
एक रोमियों से योगी जी ने ये कहा, जो मैंने न किया तुम्हे करने नहीं दूंगा। कुछ ऐसा ही नज़ारा अब तिलक, शादी,या जन्मोत्सव में देखने में आएगा। इस साल फरवरी, मार्च या अप्रैल के किसी भी मांगलिक कार्यक्रम में आप जाएंगे तो आपको मायूसी का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि योगी सरकार ने मांगलिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में साउण्ड तथा समयावधि हेतु अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया है।
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अब शादी-ब्याह में ना तो “बहारों फूल बरसाओं” सुनने को मिलेगा और ना ही आप डांस करने का लुफ्त उठा सकेंगे। अनुमति की जटिलताओं को देखते हुए आम आदमी सांस्कृतिक कार्यक्रमों को टालना ही उचित समझेगा और इससे मायूसी उन लोगों को होगी जो शादी, मुंडन या रिसेप्शन में बजने वाले आर्क्रेस्ट्रा को बड़े चाव से सुनते आए हैं।
शुक्रवार को राजधानी के प्रेस क्लब में आर्टिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के सैंकड़ों कलाकारों ने प्रेस कांफ्रेंस करने के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को पॉच सूत्रीय मांगपत्र सौंपा।
प्रेस क्लब में प्रदेश के लगभग 20 लाख कलाकारों की समस्यायों को रखते हुए एसोशिएसन के अध्यक्ष अंजनी कुमार उपाध्याय ने कहा कि सरकार ने रोज कमाने रोज खाने वाले कलाकारों को फांका करने की ओर बढ़ा दिया है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में साउण्ड तथा समयावधि की अनुमति लेना एक जटिल प्रक्रिया है जिसका सामना साधारण आदमी के बस की बात नहीं है और ऐसे में कलाकारों का भविष्य अंधकारमय होता नज़र आ रहा है।
सरकार यदि रोजगार नहीं दे सकती तो उसे रोजगार छीनने का हक भी नहीं है, ये बातें करते हुए यशभारती से सम्मानित मशहूर ग़ज़ल गायक कमाल खान ने कहा कि सरकार के इस फैसले से करोड़ों लोगों का रोजगार तहस नहस हो जाएगा और इस कदम से कला तथा संस्कृति का भी दम घुट जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी लॉन, बैंक्वेट हॉल, होटलों या सामुदायिक केन्द्रों में अन्य अनुमतियों के साथ साथ साउण्ड की परमीशन लेनी पड़ती है जिसका खामियाजा कलाकार भुगतते हैं क्योंकि आयोजक अनुमति लेने से बेहतर कार्यक्रम को रद्द करना समझते हैं।
साउण्ड तथा समयावधि की प्रक्रिया को सरल बनाने की बात करते हुए मशहूर उदघोषक अबरार अहमद ने कहा कि मुख्यमंत्री को एसोशिएसन ने जो मांगपत्र दिया है उसमें खासतौर पर यह उल्लेख किया है कि अनुमति के लिए सरकार एक पोर्टल बनाएं जिससे कि यह प्रक्रिया आसान हो सके और लोग अॉनलाइन परमीशन ले सके। उन्होंने कहा कि जबतक अॉनलाइन अनुमति की व्यवस्था नहीं हो जाती तब तक सरकार ऐसे छोटे आयोजनों के लिए शिथिलता बरतने का काम करना चाहिए।
राजधानी के मशहूर आर्क्रेस्ट्रा संचालक अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि हम कानफोडू संगीत के पक्ष में नहीं है पर सरकार को चाहिए कि शादी, तिलक, जन्मदिन, नवरात्रि या तीज़ त्यौहारों पर अनुमति लेने की बाध्यता समाप्त करें।
उन्होंने कहा कि समारोह में आज भी लोग फायरिंग करते हैं पर सरकार का ध्यान उस ओर नहीं जाता है और गरीब कलाकार के पेट पर आसानी से लात मार दी जाती है। उन्होंने कहा कि ये सही है कि रात 10 बजे के बाद संगीत बजाने की अनुमति लेना आवश्यक हो पर उससे पहले तो सरकार को दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
एसोसिएशन के मुख्य सलाहकार सतीश तिवारी ने कहा कि यदि एक हफ्ते में सरकार हमारी मांगो को लेकर उचित कार्यवाही नहीं करती है तो अगले शुक्रवार को हजारों की संख्या में कलाकार हजरतगंज चौराहे पर कटोरा लेकर भीख मांगते हुए विरोध प्रदर्शन करेंगे।
गौरतलब है कि सरकार के इस फरमान से कलाकारों और इस लघु उद्योग से जुड़े करोड़ों लोगों को नुकसान पहुंच रहा है और कहीं ना कहीं इस कदम से कला व संस्कृति को हानि पहुंच रही हैं।
बड़े कलाकारों की बात छोड़ दें तो गांव देहात से लेकर पूरे प्रदेश में लाखों की संख्या में ऐसे कलाकार हैं जिनकी जीविका का आधार ही ऐसे छोटे मोटे आयोजन है। ये कलाकार ही है जिनकी मदद से राजनितिक दल चुनाव में अपना प्रचार करवाते है और किसी के नेता के भाषण से पहले भी यहीं कलाकार पब्लिक को बांध कर रखने का काम करते है।
आज कलाकारों. की हालत को देख कर सहज ही डॉ सुनील जोगी की उपरोक्त पंक्तियाँ गुनगुनाने का जी करता है की योगी जी जो आपने ना किया वो किसी को करने नहीं देंगे।
सीएम योगी के निर्देशों के बाद प्रदेश में नकल विहीन परीक्षाएं कराने के लिए डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने कमान आपने हाथ में ले लिया है. इस बार बोर्ड परीक्षाओं को नकलविहीन कराना सरकार के लिए एक बड़ी बनकर सामने है. इसी के मददेनजर पहली बार खुद डिप्टी सीएम परीक्षा के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी न हो इसके लिए फ्लाइंग स्क्वायड के साथ परीक्षा केन्द्रों का औचक निरीक्षण करने का फैसला लिया है.
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प्रदेश में नकल विहीन बोर्ड परीक्षाएं कराने के लिए 8517 बोर्ड परीक्षा केन्द्र बनाए गए हैं. इन केन्द्रों पर सीसीटीवी कैमरों सहित, वीडियों रिकॉर्डिंग, बिजली के लिए जनरेटर की व्यवस्था कराई गई है. जिससे किसी भी हालत में परीक्षा के दौरान नकल न हो सके.
बोर्ड परीक्षा के दौरान किसी तरह की चूक न हो इसलिए परीक्षा केन्द्रों पर तैनात कर्मचारियों को डीआइओएस द्वारा पहचान पत्र दिया जाएगा. परीक्षा के दौरान हर कर्मचारी को अपने साथ यह पहचान पत्र रखना अनिवार्य होगा. अगर जांच के दौरान परीक्षा केन्द्र पर बिना कार्ड के कोई संदिग्ध पाया गया तो उसके खिलाफ एफआइआर दर्ज की जाएगी.
नई दिल्ली/नोएडा. खाकी का खौफ सड़कों पर दिखाई देने लगा है. बहन की सगाई कर बहरामपुर से वापस लौट रहे जितेंद्र यादव उर्फ डम्बर को UP के एक दारोगा ने गोली मार दी. गंभीर रूप से घायल जितेंद्र यादव को नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया है जबकि उनके अन्य साथी गायब बताए जा रहे हैं. अब पुलिस अधिकारी इस पूरे मामले की जांच करने और आरोपी को न बख्शने की बात कह रहे हैं.
जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे जितेंद्र यादव उर्फ डम्बर को सेक्टर 122 स्थित CNG फिलिंग स्टेशन पर कहासुनी के बाद विजयदर्शन नाम के दारोगा ने गोली मार दी. पीड़ित परिवार का आरोप है कि रात को लगभग 10 बजे जब जितेंद्र बहरामपुर से बहन की सगाई कर स्कोर्पियो से लौट रहे थे, तभी नशे में धुत विजयदर्शन नाम के दारोगा ने फर्जी एनकाउंटर करने की कोशिश की. परिवार वालों का आरोप है कि पुलिस ने जितेंद्र के बाकी साथियों को गायब कर दिया.
निष्पक्ष जांच कराने की बात- जितेंद्र नोएडा 122 में स्थित पार्थला गांव में जिम चलाता है. उसका कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है. परिवार वालों का कहना है कि गोली गले में लगी और रीढ़ की हड्डी में अटक गई है. घटना के वक्त जितेंद्र के जिम वाले दोस्त मौजूद थे, जिन्हें फर्जी एनकाउंटर के बाद पुलिस ने गायब कर दिया है. वहीं मौके पर पहुंचे DIG लव कुमार मामले की निष्पक्ष जांच कराने की बात कह रहे हैं.
लखनऊ। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश शिक्षक भर्ती को लेकर बड़ा फैसला किया है। दरअसल सरकार ने यूपी शिक्षक भर्ती देश भर के युवाओं के लिए खोलने का निर्णय लिया है। राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) डिग्री धारक किसी भी राज्य का क्यों न हो, वो अब आवेदन कर सकेंगा।
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बता दें कि सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई, जिसमें से यह फैसला भी एक है। सरकार के प्रवक्ता और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट ने एक निर्णय में शिक्षकों की भर्ती में देश भर के पात्र युवाओं को मौका देने का निर्देश दिया था। कैबिनेट ने हाईकोर्ट के फैसले के मद्देनजर यूपी बेसिक शिक्षा अध्यापक सेवा नियमावली-1981 में 21वें संशोधन को मंजूरी दे दी है।
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TET-teacher
गौरतलब है कि वर्तमान में प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक भर्ती के लिए सिर्फ प्रदेश के डिग्रीधारक युवा ही आवेदन कर सकते थे, लेकिन अब इसके लिए एनसीटीई की डिग्री मान्य कर दी गई है। इससे अब देश भर के एनसीटीई डिग्री धारक युवा प्रदेश की शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन कर सकेंगे।