Category: uttar-pradesh

  • तीन मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी, इन चार विभागों के पुनर्गठन से

    लखनऊ। झारखंड और राजस्थान पहले ही मंत्रालयों का पुनर्गठन कर चुके हैं। इस निर्णय लागू को करने से पूर्व इसमें आने वाली बाधाओं पर विचार किया गया है। उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य से संबंधित चार विभागों को एक किये जाने की तैयारी चल रही है। माना जा रहा है कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य संबंधित चार विभागों चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, परिवार कल्याण और मातृ एवं शिशु कल्याण को एक करने पर सहमत हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस निर्णय को लागू करने के लिए जून-जुलाई में नीति आयोग को जिम्मेदारी दी थी। प्रदेश सरकार को इस नियम को लागू करने के लिए 3 महीने का समय दिया था जो अब बीत चुका है। बताया जा रहा है कि यूपी सरकार ने इन विभागों को एक करने का फैसला ले लिया है। नीति आयोग के सलाहकार आलोक कुमार के मुताबिक इस बात का सुझाव आया था कि प्रशासनिक कंट्रोल के लिए मंत्रालयों का पुनर्गठन किया जाए। कुमार ने बताया कि प्रशासन को बिना किसी रुकावट के चलाने के लिए अच्छा होता है कि कम मंत्रालय हों। यूपी में नेशनल हेल्थ मिशन परिवार कल्याण विभाग में आता है जिसकी मंत्री रीता बहुगुणा जोशी हैं। एनएचएम का बजट परिवार कल्याण में आता है और प्रोजेक्ट्स की टेंडरिंग व क्रियान्वयन का अधिकार स्वास्थ्य विभाग को है जिसके मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह हैं। इसी तरह कुछ काम चिकित्सा शिक्षा विभाग में आते हैं जिसके मंत्री आशुतोष टंडन हैं। जानकर मानते हैं कि इस तरह के विभागीय सिस्टम में कई बार काम करने में देरी होती है और योजनाओं में समन्वय स्थापित नहीं हो पाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इन चारों विभागों को एक करने की प्रक्रिया शुरू हुई है और वर्ष के अंत तक इस निर्णय को लागू किया जा सकता है।

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  • अंग्रेजों के जमाने के पुलिस कानून में बदलाव करेगी योगी सरकार, जानिये क्या बदलेगा !

     

    बदलेगा यूपी पुलिस का इतिहास, जीआरपी का जिला पुलिस में हो जाएगा विलय

    लखनऊ। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ही रास्तों पर यूपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी चल पड़े हैं। जिस तरह पीएम नरेंद्र मोदी अंग्रेजों के समय के व पुराने कानूनों में वर्तमान जरुरतों के आधार पर बदलाव का पक्ष रख रहे हैं। उसी तरह यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी कवायद शुरु कर दी है। योगी सरकार में जल्द ही अंग्रेजों के जमाने के नियम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। यह बदलाव पुलिस एक्ट में किया जाने की तैयारी है। इसके बाद अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे जीआरपी (राजकीय रेलवे पुलिस) बल को समाप्त कर दिया जाएगा। अंग्रेजों के जमाने के कानून में होगा बदलाव राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) को सिविल पुलिस में मिलाने की तैयारी जोरों पर शुरू हो गई है। इसको लेकर पुलिस महानिदेशक मुख्यालय स्तर पर विचार भी शुरू हो गया है। अगर इस मुद्दे पर साकारात्मक रुख रहा तो 1862 के पुलिस एक्ट में बदलाव करते हुए जीआरपी का जिला पुलिस में विलय हो जाएगा। जिसके बाद जीआरपी के थाने भी जिले के एसएसपी या एसपी के अंडर में आएंगे। बदलाव के लिए बनी कमेटीडीजीपी सुलखान सिंह ने इस संबंध में बुधवार को डीजीपी मुख्यालय में बैठक की। खर्चा, समय और मैनपावर के सही इस्तेमाल के लिए डीजीपी सुलखान सिंह इस पर प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा है। डीजी रेलवे वीके मौर्या की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है, जो यूपी जैसे बड़े राज्यों की जीआरपी पर स्टडी कर रिपोर्ट तैयार कर देगी। इस कमेटी में आईजी कानून व्यवस्था आनंद कुमार और आईजी रेंज लखनऊ जयनारायण सिंह भी बतौर सदस्य शामिल हैं। कमेटी के सदस्य इस संबंध में जल्द ही मुंबई, बिहार, हैदराबाद, चेन्नई और मध्य प्रदेश की जीआरपी का दौरा करेंगे और वहां जाकर देखेंगे कि वहां रेलवे और स्थानीय पुलिस के बीच किस तरह समन्वय स्थापित किया जाता है। रिपोर्ट के बाद होगा ऐतिहासिक फैसलाअगर कमेटी की रिपोर्ट में बदलाव को लेकर सहमति जताई जाती है तो जीआरपी के प्रदेशभर के 65 थानों और छह अनुभागों का सिविल पुलिस में विलय होना लगभग तय है। जिसकी कमान उस जिले के एसएसपी या एसपी के हाथ में रहेगी। दरअसल जीआरपी को सिविल पुलिस में मर्ज करने के पीछे ये तर्क दिया जा रहा है कि जीआरपी के पास ज्यादा काम नहीं रहता। जीआरपी के पास ज्यादातर मामले चोरी के होते हैं। इसलिए अगर जीआरपी को सिविल पुलिस के साथ जोड़ दिया जाएगा, तो बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। डीजीपी सुलखान सिंह की सालों पुरानी इच्छाडीजीपी सुलखान सिंह ने डीआईजी रेलवे लखनऊ के पद पर रहते हुए जीआरपी को सिविल पुलिस में मर्ज करने का प्रस्ताव तैयार किया था। उस समय वरिष्ठ अफसरों और सरकार ने इस पर आगे विचार करने से इंकार कर दिया था। लेकिन डीजीपी बनने के बाद वह जीआरपी को प्रदेश के नौवें जोन की तरह ही देख रहे हैं। वे लगातार नौवें जोन के तौर पर ही जीआरपी की समीक्षा कर रहे हैं। प्रदेश में अभी आठ जोन लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर और इलाहाबाद हैं। इसमें गोरखपुर को छोड़कर सभी जोन में एडीजी तैनात हैं। अब जीआरपी की गिनती भी जोन के तौर पर की जा रही है। यानी अब प्रदेश में जीआरपी समेत नौ जोन हो जाएंगे। जीआरपी में पहले जहां डीजी रैंक के अधिकारी तैनात होते थे, वहीं अब पूरी जिम्मेदारी एडीजी को दी गई है। इस बदलाव से कम होंगे खर्चेजीआरपी में सिविल पुलिस से ही कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल, एसआई व इंस्पेक्टर प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाते हैं। इसके बाद बड़े पैमाने पर उनके जीआरपी में तबादले होते हैं। टीए-डीए पर बड़ा खर्च आता है। छह अनुभाग के लिए छह पुलिस लाइंस हैं, जहां 40 से 50 जीआरपीकर्मी रिजर्व में रहते हैं। ये ऐसी मैनपावर है, जिसका इस्तेमाल नहीं हो पाता। चारबाग सर्किल में तैनात सीओ का क्षेत्र फैजाबाद तक है।

    छोटी से छोटी घटना होने पर उन्हें वहां जाना पड़ता है, जिसमें काफी समय और खर्च लगता है। छह अनुभाग और एसपी के छह पद खत्म होने से खर्च बचेगा। जब जीआरपी जिला पुलिस में मर्ज होगी तो ट्रेन जहां से गुजरेगी, उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित थानों की होगी, सुरक्षा इंतजाम ज्यादा और बेहतर होंगे। आसान नहीं होगी नई राहइस पूरी प्रक्रिया के बीच जानकारों का मानना है कि 1862 के पुलिस एक्ट में बदलाव इतना आसान भी नहीं होगा। जीआरपी का काम केवल रेलवे स्टेशन परिसर और ट्रेन के अंदर होने वाली आपराधिक घटनाओं को रोकने का नहीं होता, बल्कि जीआरपी के एक थाने की सीमा कई जिलों के स्टेशनों तक होती है। जीआरपी के सिविल पुलिस में मर्जर के बाद सीमा क्षेत्र के लिए लड़ने वाली पुलिस ट्रेन में होने वाली घटनाओं को लेकर रोजाना सीमा विवाद करेगी। पहले से कानून व्यवस्था और अपराध की विवेचनाओं से दबी सिविल पुलिस पर काम का बोझ बढ़ेगा। साथ ही रेलवे से समन्वय में दिक्कतें आएंगी।

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  • कहां लगेंगी ये गोपनीय ढंग से तैयार हो रही भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण मूर्तियां, जानिये

    लखनऊ। हाल ही में सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी सरकार ने अयोध्या में 100 मीटर ऊंची भगवान राम की मूर्ति लगवाने का प्रस्ताव राज्यपाल राम नाईक को सौंपा था। फिलहाल इस परियोजना के शुरू होने की तिथी तय नहीं हुई है। लेकिन ये साफ हो चुका है कि धर्म को ढाल बना कर अयोध्या के राम की काट के तौर पर सफाई में कृष्ण तैयार हैं। राम के नाम पर राजनीति करने का आरोप भारतीय जनता पार्टी पर लगाने वाली समाजवादी पार्टी भी उसी अनदाज में रंग चुकी है। समाजवादी पार्टी के गढ़ सैफई में कांसे की बनी भगवान कृष्ण की 50 फुट ऊंची प्रतिमा लगाई गई है। हालांकि इस मूर्ती को यादव बहूल क्षेत्र में लगाने का आईडिया पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का था लेकिन ये ऐसे समय होने जा रहा है जब वर्त्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान राम की 100 मीटर ऊँची मूर्ती अयोध्या में लगवाने का प्रस्ताव राज्यपाल रामनाईक को सौंपा है। गोपनीय ढंग से तैयार हो रही मूर्ती भगवान कृष्ण की प्रतिमा बनकर लगभग तैयार है। योजना के अनुसार अखिलेश यादव 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले लालू यादव समेत अन्य विपक्षी नेताओं को एक जुट कर इसका अनावरण करेंगे। दरअसल भगवान कृष्णा की मूर्ती यादव समाज और अन्य ओबीसी जातियों को लुभाने के लिए है। भगवान कृष्ण को रथ का पहिया उठाए दिखाया गया है जिसके पीछे राजनीतिक संदेश देने की मंशा है। दरअसल पूरी महाभारत के दौरान सिर्फ एक बार ही कृष्णा ने रथ का पहिया शस्त्र के तौर पर उठाया था। लोकसभा से पहले एक तरह से अखिलेश सभी विपक्षी नेताओं को एक जुट कर ये सन्देश देने का प्रयास करेंगे।
    खास बात ये है कि इस मूर्ती का निर्माण बेहद ही गोपनीय ढंग से पिछले छह महीने से किया जा रहा है। इस मूर्ती निर्माण के लिए पैसा सैफई महोत्सव का आयोजन करने वाली सैफई महोत्सव कमिटी ने दिया है। इस कमेटी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव हैं और अखिलेश यादव सदस्य हैं। क्या होगा विशेषजानकारों की माने तो मूर्ती 50 फुट की है और इसका वजन करीब 60 टन होगा। इसके निर्माण के लिए जापानी स्टेनलेस स्टील और पीतल का प्रयोग किया गया है। इसकी व्लडिंग के लिए भी खास तौर से एयरोप्लेन में वेल्डिंग करने वाली टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया है। ये मूर्ती उस दृश्य की है जब भगवान कृष्णा को रथांग पाणी (महाभारत के दौरान शस्त्र के तौर पर पहली बार उठाया रथ का पहिया) नाम से जाना गया।

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  • अब ऑनलाइन पा सकते हैं यूपी बोर्ड के पुराने अंक और प्रमाण पत्र

    अब ऑनलाइन पा सकते हैं यूपी बोर्ड के पुराने अंक और प्रमाण पत्र

     

     

    इलाहाबाद। यूपी सरकार इस वक्त काम में पारदर्शिता से विषेष ध्यान दे रही है। साथ ही लोगों को रोज रोज की भागदौड़ से छुटकारा दिलाने की भी पूरी कोशिश कर रही है। जिसके क्रम में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद् में छात्रों और अभिभावकों को अब अंक और प्रमाण पत्र के लिए कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

    up board

    बता दें कि यूपी बोर्ड तैयारी कर रहा है कि पुराने मूल प्रमाण पत्रों के साथ ही प्रमाण पत्रों में किसी संशोधन के लिए भी आनलाइन आवेदन लिया जाए। इसके लिए आवेदक सीधे बैंक में भुगतान करेगा। कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार बीते वर्षों के अंकपत्र व प्रमाणपत्र के लिए घर बैठे ही डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए शासन ने कार्यक्रम जारी किया था, लेकिन पूरा नहीं हो पाया। अब निकाय चुनाव के बाद पांच वर्ष पुराने अंक व प्रमाण पत्र आानलाइन दिलाने की तैयारी है।

    वहीं यूपी बोर्ड सचिव नीना श्रीवास्तव ने बताया कि 2013 से 2017 तक के रिकार्ड अपलोड करने का कार्य अंतिम चरण में है। एक समारोह में इस योजना का शुभारंभ कराने की तैयारी है और उसके बाद दस वर्षों के रिकार्ड एवं 1975 से लेकर अब तक के अंक व प्रमाण पत्र पर तेजी से कार्य चल रहा है।





  • फिर बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में हुई बच्चों की मौत

    फिर बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में हुई बच्चों की मौत

     

     

    नई दिल्ली। एक बार फिर सीएम योगी आदित्यनाथ का शहर और वहां का मेडिकल कॉलेज बाबा राघव दास अस्पताल मासूमों के लिए एक बार फिर से कब्रगाह बन गया है। जहां माह अगस्त में बच्चों की मौत के बाद एक बार फिर बवाल उठने लगा है। इस बार इस मेडिकल कॉलेज में बीते 3 दिनों में तकरीबन 30 बच्चों की मौते हुई हैं। 15 बच्चों की मौत एनआईसीयू और 15 बच्चों की मौत पीआईसीयू में हुई हैं। इसके पहले माह अगस्त में हुई बच्चों की मौतों के बाद सरकार की कार्य प्रणाली पर विपक्ष ने तगड़ा हमला बोला था।

    cm yogi in action of brd medical collage

    बीते अगस्त माह में ऑक्सीजन की सप्लाई को लेकर इस मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौतें हुई थीं। इन मौतों के बाद सरकार के स्वास्थ्य मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर आकर सफाई देनी पड़ी थी। इस मामले में जांच कमेटी का गठन किया गया। दोषियों को एसटीएफ ने गिरफ्तार भी किया। जिसमें मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और एक वरिष्ठ डॉक्टर भी शामिल था। बताया जा रहा था कि उनकी मौत ऑक्सीजन की कमी के चलते हुई थी।

    अब एक बार फिर प्रदेश के इस मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत ने सरकार के साथ प्रशासन के चॉक-चौबंद दावे को उड़ा दिया है। सबसे बड़ी बात है कि ये अस्पताल सीएम योगी के गृह जनपद गोरखपुर में है। जहां पर वो एक लम्बे असरे से सांसद रहे हैं। इसके साथ ही इस वक्त वो मौजूदा वक्त में सूबे के मुखिया भी हैं। हालात अगर खुद सीएम के गृह जनपद में ऐसे हों तो ये लाजमी है कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं कैसी होंगी।





  • कोहरे का कहर, यमुना एकस्प्रेसवे पर टकराई 18 गाड़िया, 10 लोग जख्मी

    कोहरे का कहर, यमुना एकस्प्रेसवे पर टकराई 18 गाड़िया, 10 लोग जख्मी

     

     

    मथुरा।  दिल्ली- एनसीआर में कोहरे के कहर का अभी तीन दिन तक और जारी रहेगा। कोहरे का कहर सबसे ज्यादा देखने को मिला यमुना एक्सप्रेस वे पर जहा भारी कोहरे के कारण एक के बाद एक 18 कारे एक दूसरे से टकरा गई। हालांकि इसमें किसी के भी मारे जाने की की कोई खबर सामने नहीं आई है, लेकिन इस हादसे में 10 लोग जख्मी हो गए हैं।  सुबह से ही प्रदेश में धुंध छाई हुई थी। कुछ इलाकों में तो विजिबिलटी इतनी कम थी कि नजदीक का भी कुछ नजर नहीं आ रहा था। यमुना एक्सप्रेस वे पर धुंध बहुत ज्यादा थी।

    बता दें कि नोएडा से आगरा की तरफ आ रहे रास्ते में सुबह धुंध में एक वाहन दूसरे वाहन से टकराया। इसके बाद देखते ही देखते कई वाहन एक दूसरे से भिड़ते गए। आलम यह हुआ कि एक्सप्रेस वे पर 10 गाड़ियां आपस में भिड़ गईं। इस वजह से 50 वाहनों का संचालन प्रभावित हो गया। इस हादसे में जख्मी हुए लोगों को अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। कई लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। घायलों में एक विदेशी कपल भी शामिल है। विदेशी महिला के सिर पर चोटें आईं हैं।





  • यूपी निकाय चुनाव में दावेदारी के बावजूद बीजेपी ने नहीं दिया राष्ट्रपति के परिवार को टिकट

    यूपी निकाय चुनाव में दावेदारी के बावजूद बीजेपी ने नहीं दिया राष्ट्रपति के परिवार को टिकट

     

     

    कानपुर। उत्तर प्रदेश में इस महीने के आखिरी में नगर निगम के चुनाव होने हैं। जहां इस चुनाव में योगी आदित्यनाथ की परीक्षा है तो वहीं सपा, बीएसपी और कांग्रेस के लिए राज्य में दोबारा स्थापित होने का एक मौका भी है। वहीं इस चुनाव में झींझक नगर पालिका काफी सुर्खिया बटोर रही है। यहां के अध्यक्ष पद के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के परिवार ने आवेदन दायर किया था, जिसे बीजेपी ने अस्वीकार कर दिया है। दावेदरी पेश कर रही रहीं राष्ट्रपति की भाभी विद्यावती कोविंद और रिश्तेदार दीपमाला वर्मा ने खुद को चुनाव मैदान से बीजेपी के निर्णय के बाद दूर कर लिया है। जबकि भतीजा और बहु ने जनता के निर्णय को सर्वोपरि रखते हुए चुनाव लड़ने के लिए अपनी दावेदारी बरकरार रखी है।

    आपको बता दें कि चुनावों के मद्देनजर बीजेपी ने जनपद के सभी नौ निकायों पर अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है। इसमें झींझक नगर पालिका सीट पर अध्यक्ष पद के लिए शिवकुमार कोरी की पत्नी सरोजदेवी को अपना प्रत्याशी बनाया है। बता दें कि इस अध्यक्ष पद के लिए राष्ट्रपति की भाभी विद्यावती कोविंद, भतीजा बहु दीपा कोविंद और रिश्तेदार दीपमाला वर्मा ने आवेदन दायर किया था। प्रत्याशी घोषित होने के बाद पार्टी के निर्णय को मानते हुए विद्यावती और दीपमाला तो चुनाव से दूर हो गए हैं, लेकिन कोविंद की भतीजा बहु अभी चुनाव लड़ने की मशा लिए बैठी है। दीपमाला के ससुर अशोक कुलश्रेष्ठ का कहना है कि अगर पार्टी चुनाव चिन्ह देती तो बहु को चुनाव लड़ाते,लेकिन अब हम पार्टी के फैसले के साथ है।

     

    विद्यावती ने कहा कि वे संगठन के निर्णय के साथ हैं। वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रपति के भाई प्यारेलाल की बहू दीपा ने चुनाव को जनता का आदेश मानते हुए खुद को निर्दलीय दावेदार के रूप में पेश किया है। दीपा के देवर दीपक के अनुसार झींझक की जनता के आग्रह पर भाभी चुनाव मैदान में आई हैं। पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो क्या लोगों का आग्रह है, इसलिए चुनाव में निर्दलीय के रूप में भाभी का गुरुवार 9 नवंबर को नामांकन कराएंगे।





  • यहां पर लगी भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर , योगी का सहारा

    नगर निकाय चुनाव में इस बार भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। टिकट बंटवारे को लेकर भाजपा में खाई पैदा हुई थी। पार्टी कार्यकर्ता और पदाधिकारियों में असंतोष की स्थिति है। वहीं आगरा में नौ विधायक और दो सांसद होने के बावजूद विकास कार्यों के लिए ताजनगरी तरस रही है। इन हालातों में भाजपा के लिए नगर निकाय चुनाव पार्टी की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। रुठे कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए पार्टी ने कई बड़े चेहरों को आगरा में भेजने का निर्णय लिया है, तो जनता को संबोधित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगरा में चुनावी रैली कर सकते हैं। प्रदेश अध्यक्ष कल पहुंचेंगे आगरानगर निकाय चुनाव में भाजपा के मुख्यमंत्री भी प्रत्याशियों के लिए जनसभा करेंगे। उनकी जनसभा अयोध्या से शुरू होगी। इसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ आगरा, अलीगढ़ में मेयर प्रत्याशियों के लिए जनसभाएं करेंगे। ऐसा माना जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पाण्डेय 13 नवंबर को आगरा में पहुुंच जाएंगे। उनके आगरा पहुंचने से अंदेशा व्यक्त किया जा रहा है कि सीएम योगी आदित्यनाथ 16 नवंबर को आगरा में जनसभा कर सकते हैं। भाजपा के मेयर प्रत्याशी नवीन जैन के लिए ये जनसभा कोठी मीना बाजार के मैदान में होगी ा आगरा में इस बार भाजपा प्रत्याशी के लिए मुकाबला जोरदार है। भाजपा इस बार अपने प्रत्याशी के समर्थन में माहौल बनाने में जुटी है। जनसमर्थन को जुटाने के लिए बूथ सम्मेलन रखा गया है। जिसमें टिकट बंटवारे को लेकर हुआ विरोध समाप्त करने का प्रयास किया जाएगा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पाण्डेय इस बूथ सम्मेलन में भाग लेंगे और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरेंगे। आगरा में पहले चरण का चुनाव है। यहां 22 नवंबर को मतदान होगा। ऐसे में भाजपा आगरा में चुनावी माहौल अपने पक्ष में करना चाहेगी। राजनीति के जानकारों का मानना है कि पिछली बार के मेयर कार्यकाल को लेकर आगरा की जनता में रोष व्याप्त है।

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  • BJP इन वादों के सहारे जीतना चाहती है चुनाव !

    लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को नगर निगम चुनाव के लिए अपना घोषणा पत्र जारी किया। विधानसभा के घोषणा पत्र की तर्ज पर इसे भी बीजेपी ने संकल्प पत्र का नाम दिया है। घोषणा पत्र में शहरों की अच्छी सड़कें, साफ पीने का पानी, जगमगाती स्ट्रीट लाइटें और साफ सुथरे शहर करने के वादे किए गए हैं। इसके आलावा पार्कों के सौन्दर्यकरण के साथ शहर के मुख्य सार्वजानिक स्थलों पर निशुल्क वाईफाई व्यवस्था प्रदान करने की बात कही गयी है। इस मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ , डिप्टी सीएम केशव मौर्या, डिप्टी सीएम डॉ दिनेश शर्मा , प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेंद्र नाथ पांडेय और नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना मौजूद रहे।?त?दखास बात यह है कि इस संकल्प पत्र में सभी विभागों ने संयुक्तरूप से सहयोगात्मक रवैया अपनाया है। नगर विकास के अलावा आवास विभाग, लोक निर्माण विभाग, बिजली विभाग और स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं की झलक भी इस संकल्प पत्र में देखी जा सकती है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्रनाथ ने कहा कि भाजपा हर चुनाव उद्देश्य के साथ लडती है। हमारा उद्देश्य जनसेवा होता है। सत्ता का उपभोग हमारा उद्देश्य नही। हम विधानसभा में भी संकल्प पत्र के साथ उतरे थे आज भी हम उद्देश्य के साथ उतरे है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश की 16 नगर निगमो में सभी स्ट्रीट लाइट को एलईडी स्ट्रीट लाइट में बदला जाएगा। वाराणसी और इलाहाबाद में ये कार्य लगभग पूरे भी हो चुके हैं। नगर निकाय बोर्ड का गठन भाजपा के नेतृत्व में होगा तो दिल्ली से निकली सुविधाएं समाज के अंतिम पायदान पर पहुँच सकेगी। मुख्य बिंदुसफाई को विशेष महत्व, स्वच्छ नगर, हरित नगर, स्वस्थ्य नगर, बेहतर सड़कें, बेहतर पेयजल व्यवस्था, एलईडी स्ट्रीट लाइट, निशुल्क सामुदायिक शौचालय, महिलाओं के लिए पिंग टॉयलट की व्यवस्था, आदर्श नगर पंचायत व्यवस्था, हर घर में फ्री पानी का कनेक्शन, सुदृढ़ नगर बस सेवा, घुमंतू पशुओं के लिए कांजी हाउस की व्यवस्था दोबारा दुरुस्त, पटरी दुकानदारों को प्रभावी संरक्षण, प्रशासन में पारदर्शिता होगी और वह जनता के प्रति उत्तरदाई होगी, सभी प्रभाव प्रकारों के देन की ऑनलाइन व्यवस्था, नगरों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकास, वाहन पार्किंग की समुचित व्यवस्था।?

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  • बसपा के नगर अध्यक्ष सहित दो पदाधिकारी पार्टी से निष्कासित

    बसपा के नगर अध्यक्ष सहित दो पदाधिकारी पार्टी से निष्कासित

     

     

    हमीरपुर। स्थानीय निकाय चुनाव में पार्टी के खिलाफ कार्य करने और अनुशासनहीनता बरतने के आरोप में बसपा के नगर अध्यक्ष सहित दो पदाधिकारियों को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। बसपा के जिलाध्यक्ष राघवेन्द्र अहिरवार ने कहा कि निकाय चुनाव में पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ भितरघात करने वालों को किसी भी दशा में बख्शा नही जायेगा।

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    बता दें कि बसपा जिलाध्यक्ष राघवेन्द्र अहिरवार ने शनिवार को बताया कि राठ विधानसभा क्षेत्र के मेहेर किशोर लोधी एवं नगर अध्यक्ष दिनेश प्रताप लोधी स्थानीय निकाय चुनाव में पार्टी की नीतियों के खिलाफ लगातार काम कर रहे थे। उन्हें कई बार समझाया भी गया था, मगर यह लोग अनुशासनहीनता करते रहे।

    वहीं उन्होंने उनका कहना है कि इन दोनों पदाधिकारियों को बसपा से बाहर का रास्ता दिखाया गया है। उनके स्थान पर विधानसभा अध्यक्ष पद जयसिंह राजपूत एडवोकेट व बृजगोपाल वर्मा को नगर अध्यक्ष पद पर नियुक्ति कर दी गयी है।