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  • बिजनौर गोलीबारी: युवक की हत्या से क्षेत्र में फैली सनसनी

    बिजनौर गोलीबारी: युवक की हत्या से क्षेत्र में फैली सनसनी

    बिजनौर में युवक की गोली मारकर हत्या: क्या आपसी रंजिश थी असली वजह?

    क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई? यह घटना उस वक्त हुई जब दो गुटों के बीच चल रहा विवाद एक खूनी संघर्ष में बदल गया। इस दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। आइए, जानते हैं इस घटना के बारे में विस्तार से।

    घटना का सिलसिला

    घटना एक हफ्ते पहले शुरू हुई जब नीरज नामक युवक के दोस्त अक्षय की कुछ युवकों ने पिटाई कर दी थी। इस घटना के बाद दोनों गुटों के बीच तनाव बढ़ गया। हालांकि मामला शांत हो गया था, लेकिन सोमवार शाम को नीरज के एक अन्य साथी की पिटाई हो गई। गुस्से में आकर नीरज अपने साथियों के साथ दूसरे गुट से बात करने के लिए गया। बातचीत के दौरान दोनों गुटों में विवाद बढ़ गया और एक युवक ने नीरज को गोली मार दी जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    पुलिस की कार्रवाई

    स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को घटना की सूचना दी और नीरज को अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू की है। एसपी ने आश्वासन दिया है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मृतक के परिजनों ने भी पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दी है।

    क्या थी असली वजह?

    घटना की असली वजह अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह घटना पुरानी रंजिश का नतीजा हो सकती है। पुलिस मामले की पूरी जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि वह गवाहों से पूछताछ कर सभी पहलुओं पर गौर कर रही है। साथ ही CCTV फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।

    बिजनौर की घटना से सबक?

    बिजनौर की घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। क्या हमारे समाज में रंजिश और हिंसा को दूर करने का कोई ठोस उपाय नहीं है? इस घटना से सभी को सबक लेने की ज़रूरत है। किसी भी विवाद को बातचीत से सुलझाने का प्रयास करना चाहिए और हिंसा से बचना चाहिए। हम सबको मिलकर एक ऐसे समाज का निर्माण करने का प्रयास करना चाहिए जहाँ सभी लोग सुरक्षित महसूस करें।

    Take Away Points

    • बिजनौर में युवक की गोली मारकर हत्या से क्षेत्र में सनसनी फैल गई है।
    • पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश जारी है।
    • घटना से हमें रंजिश और हिंसा से बचने का संदेश मिलता है।
    • बातचीत के ज़रिए विवादों को सुलझाना और हिंसा से दूर रहना बेहद ज़रूरी है।
  • संभल में मिले प्राचीन मंदिर: एक अद्भुत खोज

    संभल में मिले प्राचीन मंदिर: एक अद्भुत खोज

    संभल में फिर मिला ऐतिहासिक मंदिर! मुस्लिम इलाके में मिले प्राचीन मंदिरों ने मचाया तहलका!

    क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश के संभल जिले में, एक मुस्लिम बहुल इलाके में, 46 साल पुराना बंद पड़ा मंदिर मिला है? और यह तो बस शुरुआत थी! हाल ही में, इसी इलाके में एक और मंदिर का पता चला है जिसने इतिहास के पन्नों को फिर से खोल दिया है. अतिक्रमण हटाने के दौरान पुलिस को यह मंदिर दिखाई दिया और अब इसकी साफ-सफाई का काम शुरू हो गया है. यह खबर सुनकर आपको हैरानी हो रही होगी, है ना? आइए, जानते हैं इस रोमांचक कहानी के बारे में विस्तार से.

    संभल में मिले मंदिर: एक अद्भुत खोज

    यह खोज वाकई में हैरान करने वाली है. संभल के मुस्लिम बहुल इलाके में मिले यह दोनों मंदिर न केवल शहर के इतिहास के बारे में रोमांचक जानकारी प्रदान करते हैं बल्कि धार्मिक सौहार्द की भी एक अनूठी मिसाल पेश करते हैं. प्राचीन मंदिरों के संरक्षण की इस मुहिम से पता चलता है की कैसे धर्म और संस्कृति एक दूसरे के साथ सह-अस्तित्व में रह सकते हैं, चाहे वह कितना भी जटिल इतिहास क्यों न हो. कई दशकों तक छिपे रहने के बाद यह खोज हमारे सामने एक नई तस्वीर पेश करती है. मंदिरों के अंदर मिली हनुमान जी और राधा कृष्ण की खूबसूरत मूर्तियों ने इस खोज को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है.

    मंदिरों की खोज से जुड़ी कहानी

    पहले मंदिर के मिलने के बाद से ही पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल था. और अब, दूसरे मंदिर के मिलने से उत्साह और भी बढ़ गया है. स्थानीय लोगों में काफी उत्साह है और लोग मंदिर की साफ़ सफ़ाई में मदद कर रहे हैं. यह एक ऐसा उदाहरण है जो दिखाता है कि कैसे धार्मिक स्थल लोगों को एक साथ जोड़ सकते हैं, भले ही उनके धार्मिक विश्वास अलग-अलग हों.

    ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक सौहार्द

    इन मंदिरों का ऐतिहासिक महत्व नकारा नहीं जा सकता. ये मंदिर केवल पत्थर और ईंटों की इमारतें नहीं हैं, बल्कि वे हमारे अतीत के जीवंत प्रमाण हैं. वे हमारी संस्कृति और विरासत के धरोहर हैं. इन मंदिरों के संरक्षण के साथ-साथ उनके ऐतिहासिक महत्व के बारे में शोध और जांच होना बेहद आवश्यक है. इस खोज ने समाज में धार्मिक सौहार्द के प्रसार की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया है.

    समुदाय का सहयोग और संरक्षण

    मुस्लिम बहुल इलाके में मिले मंदिरों की खोज ने लोगों को एक साथ लाया है. यह धार्मिक सौहार्द का एक अद्भुत उदाहरण है जहां अलग-अलग धर्मों के लोग मिलकर अपनी साझा विरासत को बचाने और संरक्षित करने में मदद कर रहे हैं. यह एक प्रेरणादायक कहानी है, जिससे पता चलता है की धर्म और जाति से ऊपर उठकर, एक-दूसरे के साथ मिलकर हम अपने इतिहास और विरासत की रक्षा कर सकते हैं.

    आगे क्या होगा?

    इन मंदिरों की खोज से संबंधित कई सवाल उठते हैं. जैसे, इन मंदिरों की सही उम्र का पता लगाना, इनके ऐतिहासिक महत्व को और गहराई से जानना, और इनका संरक्षण कैसे किया जा सकता है, आदि. इन सवालों के जवाब ढूंढना बेहद ज़रूरी है ताकि हम अपने अतीत को समझ सकें और इसे आगे के पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रख सकें.

    मंदिरों का भविष्य और संरक्षण योजनाएं

    सरकार और संबंधित अधिकारियों का कर्तव्य है की इन मंदिरों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए ठोस योजना बनाएं. इसके लिए समुदाय के साथ मिलकर काम करना, धन की व्यवस्था करना, और सुरक्षा की उचित व्यवस्था करना ज़रूरी है ताकि इन अमूल्य धरोहरों को संरक्षित रखा जा सके.

    Take Away Points

    • संभल में मिले प्राचीन मंदिरों की खोज एक आश्चर्यजनक घटना है.
    • यह खोज धार्मिक सौहार्द और सामुदायिक सहयोग का प्रमाण है.
    • इन मंदिरों का संरक्षण और उनके ऐतिहासिक महत्व की खोज जारी रहनी चाहिए.
    • इस खोज से हमें हमारे धर्म और संस्कृति की रक्षा के महत्व का एहसास होता है।
  • प्रतापगढ़ में रेलवे दुर्घटना: ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतरे

    प्रतापगढ़ में रेलवे दुर्घटना: ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतरे

    प्रतापगढ़ में रेलवे दुर्घटना: ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतरे, यातायात बाधित

    क्या आप जानते हैं कि प्रतापगढ़ में एक दिल दहला देने वाली घटना हुई है? मंगलवार सुबह, एक यात्री ट्रेन के दो डिब्बे शंटिंग के दौरान पटरी से उतर गए, जिससे रेलवे स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई। यह घटना माँ बेल्हा देवी धाम रेलवे जंक्शन के पास हुई, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। क्या आप जानना चाहेंगे कि इस घटना के पीछे क्या कारण था और इसके क्या परिणाम हुए?

    घटना का विवरण

    घटना मंगलवार सुबह लगभग 5:30 बजे हुई। 12 डिब्बों वाली यात्री ट्रेन को शंटिंग के लिए ले जाया जा रहा था, तभी अचानक उसके दो डिब्बे पटरी से उतर गए। सौभाग्य से, सभी डिब्बे खाली थे, जिससे किसी भी तरह की जानमाल की क्षति नहीं हुई। हालाँकि, इस घटना के कारण जेल रोड क्रॉसिंग गेट लगभग छह घंटे तक अवरुद्ध रहा, जिससे लोगों को भारी असुविधा हुई।

    यात्रियों को हुई परेशानी

    रेलवे क्रॉसिंग के बंद रहने के कारण यातायात बाधित हो गया और यात्रियों को घंटों इंतज़ार करना पड़ा। इस घटना से सरयू एक्सप्रेस, पद्मावत एक्सप्रेस, और अन्य ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हुआ और उन्हें पहले के स्टेशनों पर रोका गया। रेलवे अधिकारियों ने बाद में एक लाइन से ट्रेनों का आवागमन फिर से शुरू करवाया। लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी मुश्किलों के बारे में पोस्ट भी किये जिससे इस घटना को लेकर व्यापक आक्रोश देखने को मिला।

    रेलवे प्रशासन की जाँच

    इस घटना के बाद, रेलवे प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। स्टेशन अधीक्षक शमीम अहमद ने बताया कि घटना की जांच शुरू कर दी गई है। जांच के बाद पता चलेगा कि आखिरकार शंटिंग के दौरान डिब्बे पटरी से क्यों उतरे। क्या यह लापरवाही थी या कोई तकनीकी खराबी? यह सभी सवाल जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे। इस घटना ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    सुरक्षा उपायों की समीक्षा

    रेलवे अधिकारियों को इस घटना को गंभीरता से लेते हुए, सुरक्षा उपायों की समीक्षा करनी चाहिए। क्या रेलवे लाइनें नियमित रूप से जांची जा रही हैं? क्या शंटिंग ऑपरेशन के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण दिया जा रहा है? ये ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब मिलने ज़रूरी हैं ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे प्रशासन को अतिरिक्त कदम उठाने चाहिए।

    निष्कर्ष

    प्रतापगढ़ में हुई यह रेलवे दुर्घटना रेल यात्रा की सुरक्षा के प्रति चिंताजनक संकेत देती है। रेलवे प्रशासन को न केवल घटना की पूरी जांच करनी चाहिए, बल्कि भविष्य में होने वाली ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी ठोस कदम उठाने चाहिए। यात्रियों की सुरक्षा ही रेलवे प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, और उसे इस जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी और गंभीरता से निभाना चाहिए।

    टेक अवे पॉइंट्स

    • प्रतापगढ़ में रेलवे दुर्घटना ने यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।
    • रेलवे प्रशासन को सुरक्षा उपायों की समीक्षा करनी चाहिए।
    • घटना की पूरी जांच की जानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
    • रेल यात्रा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे प्रशासन को अतिरिक्त कदम उठाने चाहिए।
  • सोशल मीडिया स्टार अभिनव अरोड़ा पर जानलेवा हमला: पुलिस ने किया FIR दर्ज

    सोशल मीडिया स्टार अभिनव अरोड़ा पर जानलेवा हमला: पुलिस ने किया FIR दर्ज

    सोशल मीडिया स्टार अभिनव अरोड़ा पर जानलेवा हमला: पुलिस ने किया FIR दर्ज

    क्या आप जानते हैं कि सोशल मीडिया स्टार अभिनव अरोड़ा पर जानलेवा हमला हुआ है? जी हाँ, मथुरा पुलिस ने ‘बाल संत’ के नाम से मशहूर अभिनव अरोड़ा की शिकायत पर एक FIR दर्ज की है। उन पर 7 यूट्यूबर्स द्वारा ट्रोलिंग और जान से मारने की धमकियां देने का आरोप है, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम भी शामिल है! आइये जानते हैं इस चौंकाने वाले मामले की पूरी कहानी।

    अभिनव अरोड़ा पर ट्रोलिंग का आरोप

    अभिनव अरोड़ा, जो सोशल मीडिया पर भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराम की भक्ति का प्रचार-प्रसार करते हैं, लाखों फॉलोअर्स के साथ एक जाना-माना चेहरा हैं। लेकिन हाल ही में उनपर 7 यूट्यूबर्स द्वारा ट्रोलिंग करने का आरोप लगा है। इन यूट्यूबर्स ने उनके खिलाफ अपमानजनक वीडियो बनाए, जिसके बाद अभिनव को नफरत भरे कॉल और मैसेज आने लगे। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलनी शुरू हुईं।

    लॉरेंस बिश्नोई गैंग का कनेक्शन?

    जान से मारने की धमकियां देने वाले ने खुद को लॉरेंस गैंग का सदस्य बताया है। यह खुलासा मामले को और भी पेचीदा बनाता है। लॉरेंस बिश्नोई गैंग के अनेक गंभीर अपराधों में शामिल होने की वजह से पुलिस इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है और लॉरेंस गैंग के साथ इसके सम्बंध की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस इस गैंग के संभावित जुड़ाव को लेकर भी जांच कर रही है।

    मथुरा पुलिस की कार्रवाई

    अभिनव अरोड़ा की मां ज्योति अरोड़ा ने कोतवाली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के बाद मथुरा पुलिस ने तुरंत संज्ञान लेते हुए BNS की धारा 351(4) के तहत FIR दर्ज की है। एसपी सिटी अरविंद कुमार का कहना है कि यूट्यूबर अभिनव अरोड़ा की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर जांच-पड़ताल शुरू कर दी गई है।

    आगे क्या होगा?

    यह मामला अभी शुरुआती दौर में है, और आगे की जांच से और भी तथ्य सामने आ सकते हैं। पुलिस इस मामले में शामिल सभी लोगों से पूछताछ करेगी, साथ ही डिजिटल साक्ष्यों का भी बारीकी से विश्लेषण करेगी। यह देखना होगा कि आने वाले समय में इस मामले में क्या-क्या खुलासे होते हैं और आखिरकार दोषियों को कितनी सजा मिलती है। यह एक चेतावनी भी है कि सोशल मीडिया की दुनिया में भी सुरक्षा और कानून का पालन जरूरी है।

    Take Away Points:

    • सोशल मीडिया स्टार अभिनव अरोड़ा को 7 यूट्यूबर्स द्वारा ट्रोल और जान से मारने की धमकी दी गई।
    • लॉरेंस बिश्नोई गैंग का संभावित जुड़ाव मामले को और गंभीर बनाता है।
    • मथुरा पुलिस ने BNS की धारा 351(4) के तहत FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
    • यह घटना सोशल मीडिया पर सुरक्षा और कानून के महत्व पर प्रकाश डालती है।
  • सलमान खान और जीशान सिद्दीकी को जान से मारने की धमकी!

    सलमान खान और जीशान सिद्दीकी को जान से मारने की धमकी!

    सलमान खान और जीशान सिद्दीकी को मिली जान से मारने की धमकी!

    क्या आप जानते हैं कि बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान और विधायक जीशान सिद्दीकी को हाल ही में जान से मारने की धमकी मिली है? यह धमकी भरा कॉल व्हाट्सएप के जरिए आया था, जिसमें आरोपी ने पैसे की भी मांग की थी। इस खौफनाक घटना ने पूरे बॉलीवुड और राजनीतिक जगत में हड़कंप मचा दिया है। आइए, जानते हैं इस मामले की पूरी जानकारी।

    गिरफ्तार हुआ 20 साल का आरोपी

    मुंबई पुलिस ने इस मामले में 20 साल के मोहम्मद तैयब उर्फ गुरफान को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को नोएडा से गिरफ्तार किया गया, जहां से उसने सलमान खान और जीशान सिद्दीकी को धमकी भरा कॉल किया था। यह कॉल जीशान सिद्दीकी के बांद्रा ईस्ट स्थित कार्यालय के फोन पर आया था। पुलिस ने आरोपी को 4 दिन की ट्रांजिट रिमांड पर लिया और मुंबई ले आई है।

    आरोपी का है लॉरेंस बिश्नोई से कनेक्शन?

    पुलिस फिलहाल इस बात की जांच कर रही है कि कहीं आरोपी का कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से कोई कनेक्शन तो नहीं है। यह धमकी सिर्फ धमकी थी या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश है, इसका खुलासा करने की कोशिश पुलिस कर रही है। आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है।

    पुलिस की सतर्कता ने बचाई जानें

    जानकारी मिलते ही मुंबई पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई के चलते किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सका। यह मुंबई पुलिस की सतर्कता और कार्यकुशलता का प्रमाण है।

    मुंबई पुलिस की सराहना

    पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की देशभर में सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि समय रहते इस मामले का खुलासा होना बेहद ज़रूरी था। इससे एक अहम संदेश गया है की धमकी देने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

    एक कारपेंटर ने दी धमकी

    आरोपी मोहम्मद तैयब मूलरूप से बरेली का रहने वाला है और वर्तमान में दिल्ली में रहता है। पेशे से वो एक कारपेंटर है। नोएडा पुलिस इस मामले पर फिलहाल कुछ भी बोलने से बच रही है, लेकिन पूछताछ जारी है।

    पूछताछ जारी, सच्चाई का खुलासा होना बाकी

    आरोपी से पूछताछ जारी है। पुलिस कोशिश कर रही है कि आखिर इस धमकी के पीछे का असली कारण क्या था। क्या यह पैसों के लिए किया गया था या फिर कुछ और साजिश का हिस्सा था, इसका पता अभी तक नहीं चल पाया है। आगे की जांच से मामले की सच्चाई का खुलासा होने की उम्मीद है।

    Take Away Points

    • सलमान खान और जीशान सिद्दीकी को मिली जान से मारने की धमकी
    • 20 साल के मोहम्मद तैयब उर्फ गुरफान को किया गिरफ्तार
    • आरोपी से लॉरेंस बिश्नोई से कनेक्शन की जांच
    • पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की हुई सराहना
    • मामले की जांच जारी, सच्चाई का खुलासा होना बाकी
  • अयोध्या में दिवाली: राम मंदिर में ‘वोकल फॉर लोकल’ का अनूठा दीपोत्सव

    अयोध्या में दिवाली: राम मंदिर में ‘वोकल फॉर लोकल’ का अनूठा दीपोत्सव

    अयोध्या में इस दिवाली, राम मंदिर में होगी ‘वोकल फॉर लोकल’ की धूम!

    क्या आप जानते हैं कि इस साल अयोध्या में दिवाली का त्यौहार कुछ अलग ही अंदाज में मनाया जाएगा? जी हाँ, इस बार राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक ऐसा फैसला लिया है जिससे देशभक्ति की भावना और बढ़ जाएगी। ट्रस्ट ने इस साल राम मंदिर की सजावट में चीनी झालरों और लाइटों का इस्तेमाल ना करने का फैसला किया है। इसकी जगह, वो स्वदेशी सामानों का इस्तेमाल करेगा। सोचिए, कितना शानदार फैसला है! आइये, विस्तार से जानते हैं इस खबर की पूरी कहानी।

    स्वदेशी प्रतिबद्धता: राम मंदिर में ‘वोकल फॉर लोकल’ का अनूठा उदाहरण

    यह फैसला सिर्फ दिवाली की रौनक बढ़ाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह ‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत की पहल का एक बेहतरीन उदाहरण भी है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का यह कदम देश के प्रति उनकी गहरी निष्ठा को दर्शाता है। उन्होंने दिवाली के लिए मंदिर की सजावट में स्थानीय शिल्पकारों और कलाकारों को बढ़ावा देने का फैसला किया है। इससे न केवल राम मंदिर की शोभा बढ़ेगी बल्कि स्थानीय कारीगरों को भी काम मिलेगा और वो अपने हुनर दिखा पाएंगे। इतना ही नहीं, इससे पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा क्योंकि स्वदेशी सामान में कम प्रदूषण होता है।

    राम मंदिर में होगा दीपोत्सव का भव्य आयोजन

    इस साल राम मंदिर में दीपोत्सव का आठवाँ संस्करण आयोजित किया जाएगा, जो राम लला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद का पहला दीपोत्सव होगा। पूरे मंदिर परिसर को दीयों, फूलों और लाइटों से सजाया जाएगा। यह एक अद्भुत नज़ारा होगा, जो आँखों को मोह लेगा। लगभग 10,000 पुलिस कर्मियों को सुरक्षा व्यवस्था में लगाया जाएगा, जिसमे आधे से ज्यादा सादे कपड़ों में रहेंगे ताकि कोई गड़बड़ न हो।

    सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी नहीं, अयोध्या दीपोत्सव के लिए पूरी तरह तैयार

    अयोध्या प्रशासन ने इस दीपोत्सव को यादगार बनाने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। दीपोत्सव से पहले, अयोध्या में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम और रामलीला का आयोजन भी किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य इस साल गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़कर सबसे ज़्यादा दीये जलाना है। इसमें जनता का सहयोग अहम भूमिका निभाएगा। साथ ही प्रशासन ने ये स्पष्ट कर दिया है की कोई भी चीनी सामान ना इस्तेमाल करने के लिए मजबूर नहीं है, यह सब लोगों के अपने इच्छा पर निर्भर करता है।

    गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का लक्ष्य: एक नया मुकाम

    इस बार अयोध्या में दीपोत्सव एक नए रिकॉर्ड के साथ इतिहास रचने की तैयारी में है। सरकार का लक्ष्य एक साथ सबसे अधिक संख्या में दीये जलाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना है। इस खास आयोजन को सफल बनाने के लिए शहरवासी पूरी तैयारी में जुट गए हैं।

    ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश: आत्मनिर्भर भारत की राह पर

    राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा चीनी सामान का बहिष्कार करना केवल दिवाली के त्योहार को खास बनाने तक सीमित नहीं है; यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी है। इस फैसले के पीछे ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का भावना है। यह फैसला स्थानीय कारीगरों और कलाकारों को बढ़ावा देने और देश के आर्थिक विकास में योगदान देने का एक शानदार प्रयास है। यह दिखाता है कि कैसे छोटे कदम से देश के विकास में बड़ा योगदान हो सकता है।

    आत्मनिर्भरता का मंत्र: राष्ट्र निर्माण में योगदान

    राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के इस कदम से देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति के प्रति एक नई दिशा निर्धारित होती है। ‘वोकल फॉर लोकल’ का यह संदेश पूरी दुनिया में फैल रहा है और देशवासियों को स्वदेशी सामान को अपनाने और देश की तरक्की में योगदान देने के लिए प्रेरित कर रहा है।

    दीपोत्सव में शामिल होकर बनाएँ इतिहास

    अयोध्या में होने वाले दीपोत्सव में आप भी हिस्सा बनें। इस भव्य कार्यक्रम में शामिल होकर आप इस इतिहासिक पल के गवाह बन सकते हैं। ये सिर्फ़ त्योहार नहीं है बल्कि स्वदेशी प्रेम और राष्ट्रप्रेम का एक सारगर्भित प्रदर्शन है! इस साल का दीपोत्सव आपके लिए यादगार अनुभव बनेगा। आइये मिलकर अयोध्या के इस भव्य दीपोत्सव में रौशन करें भारत का नाम!

    Take Away Points

    • राम मंदिर ने दिवाली के लिए चीनी सामानों के बहिष्कार का ऐलान किया है।
    • इस कदम से स्थानीय शिल्पकारों और कलाकारों को बढ़ावा मिलेगा।
    • यह ‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत की पहल का एक शानदार उदाहरण है।
    • इस साल अयोध्या में दीपोत्सव के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य है।
  • वाराणसी में 10 साल पुराना शिव मंदिर: क्या है पूरा मामला?

    वाराणसी में 10 साल पुराना शिव मंदिर: क्या है पूरा मामला?

    वाराणसी में 10 साल से बंद पड़ा शिव मंदिर: क्या है पूरा मामला?

    क्या आप जानते हैं कि वाराणसी के एक मुस्लिम बहुल इलाके में 10 साल से एक शिव मंदिर बंद पड़ा है? जी हाँ, आपने सही सुना! यह मामला अभी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोगों में इसको लेकर काफी उत्सुकता है। आइये जानते हैं इस पूरे मामले के बारे में विस्तार से।

    मदनपुरा का रहस्यमयी मंदिर

    यह मंदिर वाराणसी के दशाश्वमेध थाना क्षेत्र के मदनपुरा में स्थित है। बताया जा रहा है कि यह मंदिर लगभग ढाई सौ साल पुराना है, और मकान नंबर D-31 के चबूतरे के पास स्थित है। पिछले एक दशक से इस मंदिर पर ताला लगा हुआ है, जिससे यह बंद है। मंदिर के अंदर मिट्टी भरी होने का भी दावा किया जा रहा है।

    सनातन रक्षक दल ने की पुलिस से शिकायत

    सोशल मीडिया पर बंद पड़े मंदिर की तस्वीरें वायरल होने के बाद, सनातन रक्षक दल ने पुलिस को एक पत्र लिखकर मंदिर को फिर से खुलवाने की मांग की है। इस पत्र में कहा गया है कि मंदिर को खोलकर वहां पूजा-पाठ की अनुमति दी जाए। पुलिस प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और मौके पर जांच की है।

    पुलिस ने की जांच, बल तैनात

    पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और जांच-पड़ताल की। जांच के बाद, पुलिस ने इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। पुलिस अब मंदिर के मालिकाना हक का पता लगाने की कोशिश कर रही है। यह पता लगाना भी ज़रूरी है कि आखिर ये ताला किसने और कब लगाया था।

    क्या है मंदिर का इतिहास?

    कहा जा रहा है कि इस मंदिर का जिक्र काशी खंड में है। यह मंदिर पुष्पदंतेश्वर से दक्षिण परम सिद्धिप्रद सिद्धिश्वर का है, जिसके पास ही सिद्धतीर्थ कूप भी है। लेकिन इस दावे की पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। इस मामले में ऐतिहासिक तथ्यों का पता लगाना महत्वपूर्ण है।

    आगे क्या होगा?

    यह मामला अभी भी जारी है और पुलिस जांच कर रही है। मंदिर का मालिकाना हक पता चलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले में क्या निर्णय आता है। क्या मंदिर फिर से खुल पाएगा? क्या पुराने भक्त फिर से यहां पूजा-अर्चना कर पाएंगे? समय ही बताएगा।

    Take Away Points

    • वाराणसी में 10 साल से बंद पड़ा एक शिव मंदिर का मामला सुर्खियों में है।
    • सनातन रक्षक दल ने पुलिस को पत्र लिखकर मंदिर खुलवाने की मांग की है।
    • पुलिस ने मौके पर जांच की है और इलाके में पुलिस बल तैनात किया है।
    • मंदिर के मालिकाना हक और ताला लगाने वाले व्यक्ति का पता लगाने की कोशिश जारी है।
    • इस मामले का ऐतिहासिक पहलू भी जांच का विषय है।
  • यूपी प्राविधिक शिक्षा विभाग घोटाला: पल्लवी पटेल बनाम आशीष पटेल

    यूपी प्राविधिक शिक्षा विभाग घोटाला: पल्लवी पटेल बनाम आशीष पटेल

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ आया है, जहां अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल ने प्राविधिक शिक्षा विभाग में भारी भरकम घोटाले का आरोप लगाते हुए धरना प्रदर्शन किया। क्या सच में हुआ है इतना बड़ा घोटाला? इस सनसनीखेज मामले की पूरी सच्चाई जानने के लिए आगे पढ़ें!

    घोटाले का आरोप: पदोन्नति का खेल?

    पल्लवी पटेल का दावा है कि उत्तर प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा विभाग में प्रवक्ताओं की नियुक्तियों में व्यापक स्तर पर घूसखोरी और अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि AICTE के नियमों के मुताबिक, प्रवक्ताओं की नियुक्तियां खुली भर्ती से होनी चाहिए थीं, लेकिन विभाग ने पदोन्नतियों का सहारा लेकर पदों को भर दिया। प्रदेश में लगभग 250 प्रवक्ताओं को पदोन्नति देकर पॉलिटेक्निक कॉलेजों में विभागाध्यक्ष बना दिया गया, जिससे नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। यह मामला कई सवाल खड़े करता है, क्या वाकई पदोन्नति के नाम पर हुई इस नियुक्ति में भ्रष्टाचार है या यह सब कुछ नियमानुसार किया गया? आगे की जांच इससे पर्दा उठा सकती है।

    क्या हैं पल्लवी पटेल के आरोप?

    पल्लवी पटेल ने अपने आरोपों को स्पष्ट करते हुए कहा कि इस नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों की पूरी तरह से अनदेखी की गई और भ्रष्टाचार का खेल खेला गया। उनके अनुसार, इस मामले में एक व्यापक जांच की ज़रूरत है जिससे सच्चाई सामने आ सके। क्या इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जाँच होगी ? क्या सच सामने लाया जा सकेगा? इन्हीं सवालों के जवाब आने वाले दिनों में तलाशे जा सकते हैं।

    2022 का मंत्री का दावा: नियमावली बन रही है

    इस पूरे विवाद पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और अपना दल (सोनेलाल) के कार्यकारी अध्यक्ष आशीष पटेल ने अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने बताया कि 2022 में जब उन्होंने इस विभाग का कार्यभार संभाला था, तब उन्होंने AICTE के वेतनमान को डिप्लोमा सेक्टर में लागू करने का काम किया। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि विभागीय चयन की नियमावली अभी तैयार हो रही है। क्या मंत्री के इस बयान से पल्लवी पटेल के आरोपों को बल मिलता है या कमज़ोर? क्या नियमावली पूरी होने से पहले ही पदों पर नियुक्तियाँ करना सही है? यह सवाल बेहद अहम है।

    क्या मंत्री का बयान पर्याप्त है?

    आशीष पटेल का कहना है कि वे अपने फैसलों पर कायम हैं और उन्होंने मुख्यमंत्री से CBI जांच की अपील की है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में नकल के रैकेट को समाप्त कर दिया। लेकिन क्या यह सफाई पल्लवी पटेल के गंभीर आरोपों का पर्याप्त जवाब है? जनता के मन में इस मामले को लेकर कई सवाल और शंकाएं हैं जिनके जवाब ढूंढने की ज़रूरत है।

    पल्लवी पटेल पर पलटवार: कहां से ऑपरेट हो रही हैं?

    आशीष पटेल ने पल्लवी पटेल पर निशाना साधते हुए कहा कि वह कहां से ऑपरेट हो रही हैं, यह बताने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि पल्लवी पटेल की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाए जा सकते हैं। क्या यह राजनीतिक आरोपों का एक खेल है, या पीछे कुछ और गड़बड़ है?

    राजनीतिक रणनीति या सच का सवाल?

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह जानना बेहद महत्वपूर्ण है कि आरोप लगाने वाली पल्लवी पटेल का मकसद क्या है। क्या वे सच में इस घोटाले को उजागर करना चाहती हैं या इसके पीछे उनकी कोई राजनीतिक मंशा है? क्या यह महज़ आरोप है या इसके पीछे गंभीर सच छिपा हुआ है?

    निष्कर्ष: क्या CBI जाँच लाएगी सच्चाई?

    यह मामला बेहद गंभीर है और इसके कई पहलू हैं। पल्लवी पटेल के गंभीर आरोप और आशीष पटेल का पलटवार इस मामले की जटिलता को दर्शाते हैं। सीबीआई जांच इस मामले में सच्चाई उजागर करने में अहम भूमिका निभा सकती है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में क्या कार्रवाई होती है और क्या सच्चाई सामने आती है। यूपी की जनता और देश इस सच्चाई का इंतज़ार कर रहा है!

    Take Away Points

    • पल्लवी पटेल ने प्राविधिक शिक्षा विभाग में घूसखोरी और अनियमितताओं का आरोप लगाया।
    • आशीष पटेल ने नियमों के अनुसार कार्यवाही करने का दावा किया और CBI जांच की मांग की।
    • इस मामले की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
    • यह घटनाक्रम उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए मोड़ की ओर इशारा करता है।
  • 381 करोड़ की साइबर ठगी से बचे पूर्व आईजी डीके पांडा! जानिए पूरी कहानी

    381 करोड़ की साइबर ठगी से बचे पूर्व आईजी डीके पांडा! जानिए पूरी कहानी

    साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला! पूर्व आईजी डीके पांडा को 381 करोड़ रुपये की ठगी से बचाया गया

    क्या आप जानते हैं कि कैसे एक पूर्व आईजी को साइबर ठगों ने 381 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाने की कोशिश की? यह सच है! प्रयागराज में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है जहाँ ‘दूसरी राधा’ के नाम से प्रसिद्ध डीके पांडा साइबर अपराधियों के शिकार बनने से बाल-बाल बचे। उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। आइये, इस पूरे मामले की गहराई से जानकारी प्राप्त करें और जानें कि कैसे आप खुद को इस तरह की ठगी से बचा सकते हैं।

    381 करोड़ रुपये का झांसा!

    यह घटना 26 अक्टूबर 2024 को हुई जब डीके पांडा को एक अज्ञात व्यक्ति ने व्हाट्सएप्प कॉल किया। ठग ने खुद को ‘अरव शर्मा’ बताया और दावा किया कि पांडा जी ने ऑनलाइन ट्रेडिंग में 381 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है! यह पैसा साइप्रस सिटी के साइप्रस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन से जुड़ा हुआ बताया गया, जो पूरे यूरोपीय संघ में व्यापार करता है। ठग ने यह भी कहा कि लंदन के वित्त विभाग में काम करने वाले राहुल गुप्ता और फिनिक्स ग्रुप के विनीत गोयल ने इस ट्रेडिंग में मदद की है। यह सब सुनकर पांडा जी भी हैरान रह गए होंगे! लेकिन पांडा जी के पास इतने पैसे कमाने का कोई साधन नहीं है। फिर भी यह झांसा कितना बड़ा है! यह सवाल आपके मन में भी जरूर आया होगा कि ऐसे झूठे दावों पर कोई कैसे विश्वास कर सकता है?

    साइबर अपराधियों की चालाकी

    साइबर अपराधी अक्सर लोगों की कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। वे अपनी बातों से लोगों को प्रभावित करने और विश्वास दिलाने में माहिर होते हैं। उनके पास कहानियां गढ़ने का हुनर होता है जिस पर भरोसा करना आसान होता है। उन्होंने ‘अरव शर्मा’ का किरदार बनाया और बहुत ही आत्मविश्वास से बात की, ताकि पांडा जी उन पर भरोसा कर लें। ये बात साफ करती है की कितना अहम है कि हम ऑनलाइन संपर्क में सावधानी बरतें और अनजान लोगों पर विश्वास न करें।

    8 लाख रुपये की मांग और पुलिस में शिकायत

    अब सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ठगों ने अपने इस ‘मुनाफे’ को पांडा जी के बैंक खाते में ट्रांसफर करने के लिए 8 लाख रुपये की मांग की! यहाँ ठगों की मंशा साफ दिखती है। वे पैसे लेना चाहते थे और फिर गायब हो जाते। लेकिन पूर्व आईजी के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। उन्होंने तुरंत मामले को समझा और धूमनगंज थाने में एक एफआईआर दर्ज करवाई। अगर ये 8 लाख रुपये भी जमा कर दिए जाते, तो शायद बाद में और भी पैसे मांगे जाते। पांडा जी ने समय रहते शिकायत करके अपना नुकसान होने से बचा लिया। इससे सीख मिलती है कि साइबर अपराधियों के झांसे में न आएं, और हमेशा सतर्क रहें।

    आप भी बरतें सावधानी

    इस घटना से हम सभी को साइबर अपराधों के बारे में जागरूक होना चाहिए। हमें अनजान लोगों से सावधान रहना चाहिए और ऑनलाइन संपर्क में पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए। कभी भी किसी अनजान व्यक्ति को अपनी निजी जानकारी, खासकर बैंक डिटेल्स, शेयर न करें।

    जांच जारी, पुलिस की कार्रवाई

    पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है और ठगों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। उम्मीद है कि जल्द ही अपराधियों को पकड़ लिया जाएगा। यह मामला साइबर अपराधों के खतरे को दिखाता है और लोगों को ऐसे अपराधों से बचने के लिए सावधान रहने की चेतावनी देता है।

    पुलिस की भूमिका और आपकी सुरक्षा

    पुलिस का तेजी से हस्तक्षेप सराहनीय है। लेकिन हम अपनी तरफ से भी सावधानी बरत सकते हैं। हमारे पास कई तरह के सुरक्षा उपाय हैं। अगर आप साइबर अपराध का शिकार होते हैं तो तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करें। साथ ही, आपकी ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कुछ अतिरिक्त सुरक्षा उपायों के बारे में जानना जरूरी है।

    Take Away Points

    • साइबर अपराधियों से सतर्क रहें।
    • अनजान लोगों पर भरोसा न करें।
    • अपनी निजी जानकारी साझा करने से बचें।
    • किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना दें।
    • ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में जागरूक रहें।
  • नोएडा में भीषण आग: एक इलेक्ट्रिशियन की मौत

    नोएडा में भीषण आग: एक इलेक्ट्रिशियन की मौत

    नोएडा में भीषण आग: लोटस ग्रेनेडियर बैंक्वेट हॉल में भीषण आग लगने से इलेक्ट्रिशियन की मौत

    क्या आप जानते हैं कि नोएडा के सेक्टर-74 में स्थित एक निर्माणाधीन बैंक्वेट हॉल में भीषण आग लग गई, जिससे एक इलेक्ट्रिशियन की दर्दनाक मौत हो गई? रात करीब 3 बजे लगी इस आग ने कुछ ही देर में पूरे बैंक्वेट हॉल को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे करोड़ों का नुकसान हुआ। यह घटना बेहद चिंताजनक है और हमें आग से सुरक्षा के उपायों पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित करती है। आइए, इस घटना के बारे में विस्तार से जानते हैं।

    घटना का विवरण

    मंगलवार की रात को नोएडा के सेक्टर-74 में स्थित लोटस ग्रेनेडियर बैंक्वेट हॉल में आग लगने की सूचना मिली। आग इतनी भीषण थी कि उसने पूरे हॉल को कुछ ही समय में अपनी चपेट में ले लिया। घटनास्थल पर पहुँची दमकल की गाड़ियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। इस हादसे में एक इलेक्ट्रिशियन की जलकर मौत हो गई, जो बेहद दुखद है।

    फायर ब्रिगेड का रेस्क्यू ऑपरेशन: एक कठिन लड़ाई

    आग की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की 15 गाड़ियाँ मौके पर पहुँचीं। बैंक्वेट हॉल के बड़े आकार के कारण आग पर काबू पाने में काफी समय लगा। गौतमबुद्ध नगर के डीसीपी और सीएफओ सहित अन्य अधिकारी भी घटनास्थल पर मौजूद रहे और फायर ब्रिगेड की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। यह घटना हमें याद दिलाती है कि कितनी तेज़ी से आग फैल सकती है और कितना नुकसान कर सकती है। इसलिए आग से सुरक्षा के लिए सावधानी बरतना बहुत ज़रूरी है।

    चुनौतियाँ और बचाव कार्य

    बैंक्वेट हॉल के विशाल आकार के कारण, आग को बुझाने में कई चुनौतियां आईं। इसके अलावा, आग की तीव्रता और तेज़ी से फैलने की क्षमता ने बचाव कार्य को और भी मुश्किल बना दिया। लेकिन फायर ब्रिगेड की टीम ने अपनी कुशलता और समर्पण से इस कठिन परिस्थिति में भी कामयाबी हासिल की। हमें उनकी मेहनत और साहस को सलाम करना चाहिए।

    आग का कारण अभी भी अनिश्चित

    अभी तक आग लगने के सही कारणों का पता नहीं चल पाया है। डीसीपी नोएडा रामबदन सिंह ने बताया कि घटना के कारणों की जांच की जा रही है और संबंधित अधिकारियों द्वारा आवश्यक कार्रवाई जारी है। इस घटना से हमें आग से सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदारी और सतर्कता के महत्व का एहसास दिलाता है। जांच पूरी होने के बाद ही आग लगने के पीछे के कारणों का पता चलेगा।

    जाँच और आगे की कार्रवाई

    पुलिस और अग्निशमन विभाग ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और सबूत इकट्ठा किए हैं। यह जांच इस बात का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण है कि आग कैसे लगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है। इसके अलावा, पीड़ित परिवार को उचित सहायता प्रदान की जा रही है।

    आग से बचाव के उपाय: सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा

    यह घटना हमें आग से बचाव के महत्व की याद दिलाती है। कुछ सावधानियाँ बरतकर, हम आग से होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं। जैसे कि:

    • घर में इलेक्ट्रिकल उपकरणों की नियमित जाँच करना।
    • खाना बनाते समय सावधानी बरतना।
    • मोमबत्तियाँ और दीये जलाते समय सावधानी रखना।
    • आग बुझाने के उपकरण घर में रखना और उनके इस्तेमाल का तरीका सीखना।

    इन सावधानियों को अपनाकर, हम आग से होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं और अपनी जान और अपने परिवार की जान को सुरक्षित रख सकते हैं।

    सुरक्षा उपायों का महत्व

    यह न केवल बड़ी इमारतों बल्कि घरों और छोटे प्रतिष्ठानों के लिए भी समान रूप से लागू होता है। नियमित रूप से सुरक्षा जांच करना और अग्निशामक प्रशिक्षण प्राप्त करना बेहद ज़रूरी है ताकि आग लगने की स्थिति में सुरक्षित तरीके से काम लिया जा सके।

    Take Away Points

    • नोएडा में लगे आग के कारण एक इलेक्ट्रिशियन की दुखद मौत हुई।
    • आग लगने के कारणों की अभी जांच की जा रही है।
    • आग से बचाव के उपायों पर ज़ोर दिया गया है।
    • सभी को आग से सुरक्षा के लिए सतर्क रहना चाहिए।