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  • ‘जिगोलो मार्केट’ में औरतें लगाती हैं मर्दों के ‘जिस्म’ की बोली

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    नई दिल्ली। महिला प्रॉस्टीट्यूट के बारे में सभी अच्छी तरह से जानते होंगे लेकिन अब भारत में मेल प्रॉस्टीट्यूट यानी जिगोलो का मार्केट तेजी से फल-फूल रहा है। युवा इस पेशे को पैसे कमाने का जरिया बनाते जा रहे हैं और यह बिजनेस काफी मशहूर भी होता जा रहा है। इस बिजनेस में युवाओं को काफी पैसा मिल रहा है जिस वजह से वह इसे करने से हिचकिचा भी नहीं रहे हैं। वैसे तो यह बिजनेस देशभर में फैल रहा है लेकिन राजधानी दिल्ली में इसकी जड़ें काफी मजबूती से फैल रही हैं।

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    मर्दों की बोली, मुंहमांगी कीमत

    दिल्ली में कुछ जगहें है जहां रात 10 बजे के बाद जिगोलो का मार्केट सजता है। यहां अमीर और शौकीन महिलाएं इन मर्दों की बोलियां लगाकर उनकी कीमत तय करती हैं। ये बोली कुछ घंटों से लेकर एक रात तक की होती है। जिगोलो मार्केट’ में मर्दों की मुंहमांगी कीमत दी जाती है। वैसे तो ये कारोबार छिपकर किया जाता है लेकिन दिल्ली के कई इलाकों में यह खुलेआम होता है। सरोजनी नगर, लाजपत नगर, पालिका मार्केट और कमला नगर मार्केट समेत कई इलाकों में रात होते ही मर्दों की बिक्री है।

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    मर्दों की बोली, मुंहमांगी कीमत2

    हालांकि ये धंधा रात के अंधेरों में दिल्ली के बदनाम गलियों में होता है लेकिन इसे बहुत ही सिस्टम के साथ संचालित किया जाता है। इसमें कमाई के कुछ अंश को डीलर्स या हुकर्स को दी जाती है जो इन जिगोलो बने मर्दों को कस्टमर्स उपलब्ध करवाते हैं। जिगोली को उनके गले में बंधे मफलर और स्कार्फ के जरिए पहचाना जाता है। ये इनकी आम पहचान होती है। ये लोग रात 10 से सुबह 4 के बीच अपना बिजनेस चलाते हैं। इसके अलावा कुछ जिगोलो सोशल मीडिया के जरिए भी अपना बिजनेस चलाते हैं और ऑनलाइन एड पोस्ट करते हैं।

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    मर्दों की बोली, मुंहमांगी कीमत3

    आपको जानकर हैरानी होगी कि अगर आप इंटरनेट पर ळपहवसवे पद प्दकपं वद स्पदामकप्द इस की-वर्ड से सर्च करते हो तो आपको ऐसी कई प्रोफेशनल अकाउंट मिल जाएंगे। जहां कई पुरुष जिगोलो की तरह काम करने के साथ खुद की प्रोफेशनल अकाउंट भी मैंटेन कर रहे हैं। अपनी क्लाइंट की विश को पूरी करने के लिए देशभर में कहीं भी ट्रेवल करने से चूकते नहीं है। इस बिजनस से जुड़ने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी होते हैं जिसमें 3 महीने से एक साल तक मेंबर बने रह सकते हैं और रजिस्ट्रेशन फीस 10 से 30 हजार देनी होती है। ये कम्पनी रजिस्टर्ड जिगोलो को एक महीने में 10 क्लाइंट उपलब्ध करवाता है।

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ : 87 करोड़ रुपये लागत की 36 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास

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    गोरखपुर. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को 87.57 करोड़ रुपए की लागत से गोरखपुर जिले की कुल 36 परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया. योगी ने प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी और आसरा योजना के 7-7 लाभार्थियों को आवास की प्रतीक चाभी तथा प्रमाण पत्र एवं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत 7 लाभार्थियों को अंत्योदय/पात्र गृहस्थी का राशन कार्ड वितरित किया.

    इस दौरान आसरा आवास योजना के 100 तथा प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के 51 लाभार्थियों को योजना के तहत प्रमाण पत्र/प्रतीक चाभी वितरित की गई. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार गरीबों के उत्थान के लिए प्रयत्नशील है और उनके हित में अनेक जन कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है. विकास योजनाओं को बिना भेदभाव समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है. उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में 11 लाख प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) बनाया जा चुका है जिसका एक साथ गृह प्रवेश अक्टूबर के अंत में कराया जाएगा. इसी प्रकार शहरी क्षेत्र में 4 लाख लोगों को आवास उपलब्ध कराया जाएगा. जो लोग मकान विहीन है अथवा मकान जर्जर स्थिति में है, उनको आवास उपलब्ध कराने के दिशा में कार्य किया जा रहा है.

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक सड़क किनारे रहने वाले बसफोड़ अपने आवंटित आवास में रहेंगे. प्रशासन उनके परम्परागत रोजगार की व्यवस्था भी सुनिश्चित करायेगा. खेतों के किनारे बांस लगाए जाएं ताकि उनका परम्परागत रोजगार प्रभावित न हो और उनके कलाकृतियों को बाजार में बिक्री की व्यवस्था की जाए. बसफोड़ को स्वंय सहायता समूह बनाकर स्वावलम्बी बनाया जाएगा. उन्होंनेे बताया कि प्रदेश में वेण्डरजोन बनाया जा रहा है जिसके अन्तर्गत सड़क को अतिक्रमण मुक्त करने तथा सड़क के किनारे ठेला, खोम्चा लगाने वाले को व्यवस्थित करने के साथ ही जिलों को स्वच्छ सुन्दर बनाया जाएगा.

    प्रदेश में अंत्योदय एवं पात्र गृहस्थी के तहत 3.50 करोड़ लोगों को राशन कार्ड वितरित करने का फैसला किया गया है जिसका शुभारम्भ आज यहां से किया गया है. अंत्योदय कार्ड के तहत कार्ड धारक को 35 किलो खाद्यान्न रियायती दर पर दिया जाता है, पात्र गृहस्थी कार्ड पर प्रत्येक सदस्य को 5 किलो खाद्यान्न दिया जाता है. योगी ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा सर्वे कराया जा रहा है कि कोई भी पात्र व्यक्ति राशन कार्ड से वंचित न रहे और जो लोग छूटे है उन्हें भी राशन कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा. गरीब की कोई जाति नहीं होती है, कोई भूखा न रहे इसलिए सबको आगे आकर उनकी मदद करना होगा.

  • ताजिया रखने को लेकर दो पक्ष हुए आमने सामने

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    By सत्यप्रकाश मद्धेशिया
    महाराजगंज । बीती रात चौक थाने के खजुरिया गांव में ताजिया रखने का लेकर दो पक्षों में विवाद होने के कारण दोनो पक्ष आपस में भिड़ने गये। विवाद की गम्भीरता को देखते हुये सूचना पर सदर एसडीएम और सीओ भारी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस दोनों पक्षों में बातचीत करके मामले को सुलझाने की कोशिस में जुटी हुई हैं।
    प्राप्त समाचार के अनुसार चौक थाने के खजुरिया गांव में रामरक्षा मद्देशिया नामक व्यक्ति चाय की दुकान लगाता है, उसी के बगल में ताजिया भी रखी जाती हैं। प्रत्येक साल ताजिया रखने के लिए रामरक्षा अपनी चाय की दुकान को हटा लेता था। लेकिन इस बार बीती रात उसने अपनी चाय की दुकान को हटाने से मना करा दिया, जिस कारण दोनों पक्ष आमने-सामने आ गये और विवाद गहराने लगा।
    गहराते विवाद के बीच इस मामले को लेकर दो पक्ष आपस में भिड़ गये, जिसके कारण क्षेत्र में तनाव का माहौल बना गया। सूचना के बाद आज सुबह एसडीएम और सीओ फोर्स समेत मौके पर पहुंचे और मामल का जायजा लिया। पुलिस दोनों पक्षों से बातचीत कर मामले को निपटाने में जुटी हुई हैं। पुलिस ने किसी को भी कानून हाथ में न लेने की सख्त हिदायत दी है।

  • विवेक तिवारी हत्याकांड : पोस्टपार्टम रिपोर्ट में पुलिस का एक बड़ा झूठ सामने आया

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    लखनऊ । एपल के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या के मामले में पुलिस का एक बड़ा झूठ पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुल गया। रिपोर्ट में स्पष्ट है कि शुक्रवार देर रात विवेक तिवारी को गोली ऊंचाई से मारी गई है। गोली या तो कार के बोनट पर चढ़कर मारी गई है या फिर डिवाइडर पर चढ़कर मारी गई थी।

    विवेक तिवारी हत्याकांड की कल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पुलिस का बड़ा झूठ सामने आ गया। रिपोर्ट में स्पष्ट हो गया कि सिपाही ने विवेक तिवारी को गोली ऊंचाई से मारी थी। या तो उसने डिवाइडर पर खड़े होकर गोली चलाई या फिर बोनट पर चढ़कर फायर किया। गाड़ी में विवेक तिवारी के साथ मौजूद सना खान ने कल बयान में कहा कि जिस सिपाही ने विवेक पर फायर किया था, वह डिवाइडर पर खड़ा था। उसने सामने से आती हुई कार पर गोली चलाई, जबकि उसकी जान को कोई खतरा नहीं था।

    29 की रात राजधानी लखनऊ में एपल के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या के मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और एकमात्र चश्मदीद के बयान से पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठ रहे हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक विवेक को लगी गोली किसी ऊंची जगह से चलाई गई थी। पूर्व सहकर्मी सना का कहना है कि आरोपी सिपाही ने एक से डेढ़ फुट ऊंचे डिवाइडर पर खड़े होकर गोली मारी ।

    शूटआउट के बाद मामले को दबाने में जुटी पुलिस का दावा था कि विवेक तिवारी ने सिपाही को कुचलने का प्रयास किया। जिस पर उसने आत्मरक्षा में फायर किया और गोली विवेक के चेहरे पर लगी, जिससे उनकी मौत हो गई। पूर्व सहकर्मी के बयान और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने लखनऊ पुलिस के अधिकारियों के सफेद झूठ को सामने ला दिया है। सहकर्मी और चश्मदीद सना खान के बयान को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी पुष्ट कर रही है।

    पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में स्पष्ट है कि विवेक तिवारी पर चली गोली ऊपर से नीचे की दिशा में है। फायर करने वाला व्यक्ति ऊंचाई पर खड़ा था। उसने सीधे निशाना नहीं साधा, बल्कि फायर करते वक्त उसका हाथ नीचे की ओर झुका हुआ था। रिपोर्ट में कहा गया है कि गोली विवेक की ठोड़ी पर लगी और नीचे की तरफ जाकर गर्दन में फंस गई। वारदात के बाद 29 की रात 2:05 बजे विवेक को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद रात 2:25 पर विवेक की मौत हुई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में फायर आर्म इंजरी का जिक्र किया गया है। गोली लगने के बावजूद पुलिस ने एक्सीडेंट की थ्योरी दी। 3:30 बजे विवेक की पत्नी के अस्पताल पहुंचने के बावजूद 4:57 पर सना से पहली एफआईआर दर्ज करवाई।

    विवेक तिवारी को गोली सामने से ऊंचाई से मारी गई क्योंकि विवेक के शरीर में गोली ऊपर से नीचे की ओर गई है। इससे मामले में विवेक की पत्नी कल्पना तिवारी ने जो एफआईआर दर्ज कराई थी उसमें भी लिखा है कि सिपाही प्रशांत चौधरी ने गाड़ी के शीशे से अपनी पिस्टल सटाकर गोली मारी। विवेक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पत्नी की एफआईआर देखकर लगता है कि शायद विवेक की गाड़ी के बोनट पर चढ़ के गोली मारी गई, क्योंकि गोली अगर सड़क पर खड़े होकर चलाई गई होती तो वो ऊपर से नीचे नहीं जाती। विवेक तिवारी की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, विवेक के चेहरे के बाई तरफ प्वाइंट ब्लैंक रेंज से गोली मारी गई है।

    पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक विवेक की औसत बॉडी

    – आंखें बंद।

    – विवेक का वजन- 74 किलो।

    – हाइट -170 सेंटीमीटर।

    – मुंह आधा खुला।

    – मुंह में ब्लड क्लॉटिंग।

    – चिन के बाई तरफ गोली के घाव का निशान।

    – घाव का साइज दो सेंटीमीटर लम्बा 1 सेंटीमीटर चौड़ा और मसल्स के अंदर तक।

    – विवेक की मौत 29 सितम्बर की रात 2 बज के 25 मिनट पर हुई।

    – बुलेट 11 सेंटीमीटर तक धंसी थी।

    – विवेक के शरीर मे गोली ऊपर से नीचे की तरफ गई थी।

  • कागज की गड्डी और असलहे के साथ टप्पेबाज गिरफ्तार

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    उपेन्द्र कुशवाहा

    कुशीनगर : जिले के पटहेरवा पुलिस ने वाहन चेकिंग के दौरान बिना नंबर की बाइक के साथ कट्टा कारतूस व रुपयों के साइज के कागज की गड्डी के साथ एक टप्पेबाज को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने धोखाधड़ी एवं आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया ।

    रविवार को एसओ पटहेरवा संजय कुमार मिश्र व चौकी प्रभारी फाजिलनगर राजीव कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम एनएच पर काजीपुर ग्राम सभा के सामने वाहन चेकिंग कर रही थी। इस दौरान तमकुही के तरफ से आ रहा एक बाइक सवार पुलिस को देख कुछ दूरी पर रुक कर बाइक पीछे कर भागने का प्रयास करने लगा।
    यह देख पुलिस र्किमयों ने संदेह के आधार पर उसे दौड़ा कर बाइक सहित पकड़ लिया। पकड़े गए व्यक्ति की तलाशी लेने पर उसके पास से कट्टा-कारतूस के अलावा बाइक की डिक्की से एक छोटे बैग में नोटो के साइज की कागज की गड्डी जिसमें 100 के चार नोट उपर नीचे लगाए गए थे बरामद हुआ। पूछताछ में उसने अपना नाम रफीक अंसारी निवासी चौरा दीगर थाना पटहेरवा का निवासी बताया। उसने यह भी कबूल किया कि बैंक में पैसा निकालने आये भोले भाले लोगों को कागज की गड्डी देकर उनके रुपये लेकर फरार हो जाता है।

  • अफसरों ने जेल भूमि खरीद में सरकार को लगायी करोड़ों की चपत, तत्कालीन डीएम व एडीएम सिटी समेत आठ पर मुकदमा

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    मुरादाबाद। जमीन घोटाले में फंसे तत्कालीन जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर व सेवानिवृत्त एडीएम सिटी अरुण कुमार श्रीवास्तव समेत आठ के खिलाफ बरेली विजिलेंस ने दो मुकदमे दर्ज कराए हैं। सिविल लाइन थाने में दर्ज मुकदमा सीलिंग जमीन घोटाला एवं मूंढापांडे थाने में दर्ज मुकदमा जेल की जमीन में हुए घोटाले का है। विजिलेंस जांच में जेल भूमि खरीद घोटाले का कच्चा चिट्ठा सामने आ गया है। प्रस्तावित जेल के लिए जिला प्रशासन ने जो भूमि खरीदी वह 20 दिन के भीतर दो बार बिकी थी।

    जेल के लिए चिन्हित होने से पहले यह भूमि किसानों के नाम पर थी। इस भूमि पर जेल का प्रस्ताव स्वीकृत होते ही अफसरों ने पूरी भूमि अपने करीबियों को खरीदवा दी। हाकिमों ने बाद में इन लोगों को चार गुना कीमत चुकाकर यह भूमि सरकार के पक्ष में खरीद ली। इस खरीद – फरोख्त में सरकार को करीब पांच करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

    विजिलेंस जांच में साबित हो चुका है कि तत्कालीन हलका लेखपाल से लेकर जिले में उस समय तैनात रहे डीएम तक इस खेल में शामिल थे। सभी ने अपने पदों का दुरुपयोग कर सरकार को आर्थिक क्षति पहुंचाई और परोक्ष रूप से आर्थिक लाभ लिए। सरकार के पक्ष में जब भूमि खरीद शुरू होने वाली थी उससे पहले ही इस सूचना को अपने करीबियों से साझा करके उन्हें सर्किल रेट पर भूमि खरीदवा दी।

    नियमानुसार एक बार सरकारी योजना के लिए चिन्हित हो जाने के बाद इस भूमि की खरीद – फरोख्त पर रोक लग जानी चाहिए थी। लेकिन अफसरों ने ऐसा नहीं किया। जेल के लिए चिन्हित होने ही इस भूमि को तेजी से खरीदा – बेचा गया। जब भूमि किसानों के हाथों से निकलकर अफसरों के करीबियों के नाम पर दर्ज हो गई तब जिला प्रशासन ने इसकी खरीद शुरू की।

    राज्यपाल के पक्ष में सर्किल रेट का चार गुना दाम चुकाकर भूमि खरीदी गई। किसानों के भूमि खरीदने वाले अफसरों के करीबी व्यापारियों और कुछ नेताओं को 20 दिन के भीतर ही करोड़ों रुपये का मुनाफा हुआ। विजिलेंस ने जांच रिपोर्ट में कहा है कि सरकार को क्षति पहुंचाकर कमाए गए इस मुनाफे की बाद में अफसरों में भी बंदरबांट हुई।

    जेल के लिए जिन किसानों की भूमि खरीदी गई उन्हें सरकार की योजना का कोई लाभ नहीं मिला। चार गुना कीमत पर किसानों का हक था, लेकिन अफसरों की मिलीभगत ने उनके इस हक पर डाका डलवा दिया। यदि यह भूमि सीधे किसानों से खरीदी जाती तो किसानों को चार गुना कीमत मिलती। अफसरों के इस खेल से किसानों में भी गुस्सा है।

    एक निर्यातक ने भी जेल प्रोजेक्ट के लिए तीन एकड़ से अधिक भूमि सरकार को बेची। बेचने से कुछ दिन पहले ही यह भूमि खरीदी गई थी। निर्यातक का नाम अभी तक जांच के दायरे से बाहर है। अपर जिलाधिकारी प्रशासन लक्ष्मीशंकर सिंह का कहना है कि निर्यातक ने खुद के हिस्से भी ज्यादा का बैनामा सरकार के पक्ष में कर ज्यादा रकम भी ले ली है। इस रकम को वापस करने के लिए निर्यातक को नोटिस जारी किया गया है।

  • सरकार 45 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में है डूबी, मंत्रियों के लिए खरीद रही लग्जरी गाड़ियां

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    जयराम सरकार करोड़ों रुपये के कर्ज में डूबी है, बजट के लिए प्रदेश के लोगों से भले ही खर्च घटाने के सुझाव मांग रही है, लेकिन अपने मंत्रियों के लिए सरकार ने खजाने का मुंह खोल दिया है।  तीन मंत्रियों को फॉर्च्यूनर गाड़ियां देने के बाद मंगलवार को तीन और फॉर्च्यूनर गाड़ियों का सप्लाई आर्डर जारी करने का प्रपोजल तैयार कर दिया गया। ये लग्जरी गाड़ियां बंगलूरू की कंपनी से मंगवाई जा रही हैं।

    एक गाड़ी की कीमत 32 लाख रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। माना जा रहा है कि तीनों गाड़ियां एक करोड़ रुपये में हिमाचल पहुंचेंगी। हिमाचल सरकार 45 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में डूबी है।

    सरकार चलाने को कभी लोन लिया जा रहा है, तो कभी केंद्र सरकार से बजट जारी करने के लिए फरियाद लगाई जा रही है, लेकिन मंत्री और अन्य नुमाइंदे अपने खर्चे कम नहीं कर रहे।

    पहले जो तीन लग्जरी गाड़ियां आई हैं, वह मंत्री गोविंद ठाकुर, किशन कपूर और अनिल शर्मा को दी गई हैं। अब जो तीन लग्जरी गाड़ियां आएंगी, इन्हें अन्य तीन मंत्रियों को दिया जाना है, वर्तमान में इन मंत्रियों के पास जो गाड़ियां हैं, वह सचिवालय सामान्य प्रशासन पूल में रखेगा।

    शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज को सचिवालय सामान्य प्रशासन की ओर से जो गाड़ी अलॉट की गई थी, उन्होंने उसे वापस कर दिया है। इन्होंने शिक्षा विभाग से गाड़ी ली है।

    जुब्बल-कोटखाई के विधायक व मुख्य सचेतक नरेंद्र बरागटा को सचिवालय सामान्य प्रशासन ने गाड़ी अलॉट कर दी है। सचिवालय में चर्चा है कि मुख्य सचेतक को गाड़ी विधानसभा से दी जानी थी, लेकिन यह भी बताया जा रहा है कि जनमंच के संयोजक के कारण उन्हें गाड़ी अलॉट की है।

    सूत्र बताते है कि बंगलूरू कंपनी से आने वाली ये तीनों गाड़ियां मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपी जाएंगी। अब यह सीएम कार्यालय तय करेगा कि किन-किन मंत्रियों को यह लग्जरी गाड़ियां दी जानी हैं।

  • बाइक रैली में भाजपा के गुंडों ने उड़ाई कानून की धज्जियां

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    रिपोर्टर – विकास कुमार गौतम

    कौशाम्बी । पूर्ब निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आज भारतीय जनता पार्टी द्वारा जिले में कमल संदेश बाइक रैली का आयोजन किया गया था जहाँ भाजपा के मण्डल से भी बाइक एकत्रित की गई थी कार्यक्रम के आयोजन का नेतृत्व कौशाम्बी सांसद विनोद सोनकर द्वारा किया गया था और जिले के प्रमुख भाजपा नेताओं के साथ माननीय भी कमल संदेश बाइक रैली में बाइक पर सवार थे ।

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    आज की इस कमल संदेश बाइक रैली में लगभग एक हजार बाइक शामिल रही बाइक चालको में अधिकतर को हेलमेट लगाए नही देखा गया कमल संदेश बाइक रैली मंझनपुर मुख्यालय के डायट मैदान में एकत्रित हो कर मंझनपुर चौराहा होते हुए जिला अस्पताल ओसा चौराहा ,समदा में रैली का प्रदर्शन भाजपाइयों द्वारा किया गया रैली में शामिल भाजपा के कार्यकर्ता पदाधिकारियों द्वारा प्रधानमंत्री मोदी जिन्दाबाद के बुलन्द नारे जा रहे थे आज की कमल संदेश बाइक रैली का सब से अहम सवाल यह था कि केंद्र प्रदेश में जिस पार्टी की सरकार सत्ता में काबिज हो उसी पार्टी द्वारा आयोजित बाइक रैली में खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हो सुरक्षा को लेकर क्षेत्राधिकारी समेत बड़े पैमाने पर पुलिस फोर्स तैनात रही लेकिन किसी की जुर्रत कहा कि भाजपा की रैली में शामिल लोगों को कानून का पाठ पढ़ा सके

    बताना जरूरी होगा कि कमल संदेश बाइक रैली में शामिल लोगों में अधिकतर लोगों ने बाइक चलाते समय हेलमेट नही लगाया था जब कि इन दिनों यातायात माह के नाम पर बराबर हेलमेट लगाने का प्रचार सरकार और उनके नुमाइंदों द्वारा किया जा रहा है लेकिन पुलिस की जुर्रत कहा कि यातायात नियम का उलंघन कर निकाली गई बाइक रैली में शामिल वह भाजपा के इन गुंडो को कानून का पाठ पढ़ा सके और नियम के विपरीत बाइक चलाने पर चालान काटने जुर्माना वसूलने की जुर्रत कर सके रैली में शामिल तमाम बाइको में तीन भाजपाई सवार होकर कानून की धज्जियां उड़ाते हुए रैली को आगे बढ़ा रहे थे

    मूरतगंज मण्डल से पहुँची 200 बाइक
    कौशाम्बी मूरतगंज मंडल से 200 बाइक के साथ मंडल अध्यक्ष दिनेश श्रीवास्तव व सूरज यादव, महामंत्री राजेश कुशवाहा ,शेरा यादव, अवनेश यादव धीरज सिंह यादव राम प्रकाश यादव आकाश यादव योगेश यादव आदि सैकड़ों समर्थकों के साथ बाइक रैली निकाली गई

  • जिला अस्पताल मे डॉक्टर समय से पहले ही कुर्सी छोड़ कर समय से पहले ही चले जाते हैं

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    मंझनपुर जिला अस्पताल मे मरीजों को डॉक्टर से मुलाकात करने मे होती है बड़ी परेशानियां और तो और डॉक्टर भी रहते है गायब कुछ मरीजों ने बताया कि यहां के डॉक्टर समय से पहले ही कुर्सी छोड़ कर समय से पहले ही चले जाते हैं जिससे मरीजों को होती है दिक्कत l
    चेस्ट फिजीशियन छाती रोग व खास रोग विशेषज्ञ डॉक्टर संजीव सिंह दरवाजे के पास एक व्यक्ति कुर्सी लगाकर बैठता और वो डॉक्टर से मरीजों को मिलने व पर्ची जमा करने से मना करता है और मरीजों को भगा देता है इससे मरीजों को बहुत बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

  • सरकारी कांटे गन्ने के लग गए लेकिन गन्ने का मूल्य निर्धारण नहीं हुआ अंधेरे में है किसान

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    रिपोर्टर राजेश सिंह

    पूरे फतेहपुर में गन्ने के लगभग 20 कांटे चल रहे हैं जिसमें सैकड़ों की संख्या में किसान गन्ने की ट्राली लेकर अपने नंबर का इंतजार करते रहते हैं इसी तरह धाता ब्लाक में भी गन्ने का कांटा लगा हुआ है जिसमें तौल तो बराबर होती है ।

    लेकिन ना तो तौल करने वाला बाबू और ना ही किसान गन्ने के रेट के विषय में कुछ जानते हैं यह गन्ना हैदरगढ़ मिल में जाता है जिसका मूल्य निर्धारण अभी तक नहीं हुआ है इससे गन्ना किसानों में मायूसी छाई हुई है और वह भगवान भरोसे गन्ना दे रहे हैं ।