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  • लेफ्ट के गढ़ त्रिपुरा की सत्ता पर BJP की नजर, बनाई ये योजना

    लेफ्ट के गढ़ त्रिपुरा की सत्ता पर BJP की नजर, बनाई ये योजना

     

     

    पूर्वोत्तर में पैठ बनाने की कवायद के तहत बीजेपी अब वामदल शासित राज्य त्रिपुरा में जोर लगा रही है और राज्य में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (एम) को टक्कर देने का दायित्व बीजेपी पन्ना प्रमुखों को सौंपा गया है.

    पार्टी ने 60 मतदाताओं पर एक कार्यकर्ता को नियुक्त किया है जो सीधे मतदाताओं के सम्पर्क में रहेंगे. बीजेपी के त्रिपुरा प्रदेश प्रभारी सुनील देवधर ने कहा कि पार्टी काफी समय से राज्य में जमीन तैयार करने में जुटी है. इसी का नतीजा है कि करीब 2 साल में डेढ़ लाख लोग दूसरे दलों से बीजेपी में आए हैं. पार्टी का पूरा जोर बूथ प्रबंधन पर है.

    उन्होंने कहा, ‘हम फर्जी वोटरों की शिनाख्त कर उसे बाहर करवाने, नए वोटरों को जोड़ने और बांग्लादेश से आए फर्जी वोटरों को बाहर करने के साथ ही प्रदेश सरकार के घोटाले और स्थानीय समस्याओं को मुद्दा बना रहे हैं.’

    देवधर के मुताबिक, जो मुद्दे राज्य की जनता को प्रभावित करते हैं, उनमें सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि नहीं होने के अलावा 1993 से सरकारी अध्यापकों की भर्ती न होने और मनरेगा है, जिसमें घोटाला ही घोटाला है. वहीं बहुचर्चित चिटफंड मामला भी एक प्रमुख मुद्दा है, जिसमें काफी संख्या में जनता प्रभावित है.2018 के चुनावों में पन्ना प्रमुख की भूमिका

    बीजेपी ने त्रिपुरा में मतदाता सूची के हर पन्ने के 60 मतदाताओं पर एक कार्यकर्ता नियुक्त किया है. फरवरी 2018 में आसन्न राज्य के विधानसभा चुनाव में इन पन्ना प्रमुखों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी.

    बीजेपी नेता ने कहा कि त्रिपुरा में 25 साल के वामपंथी शासन में राज्य में जनजातियों का सर्वाधिक शोषण हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि अत्यंत गरीब लोगों तक प्रदेश की कम्युनिस्ट सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की जन कल्याण की योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचने दिया.

    देवधर ने कहा कि आज विपक्ष में रहकर हम उनकी केवल आवाज उठा सकते हैं जबकि सत्ता में आने पर जब केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार होगी तब प्रदेश के विकास की रफ्तार तेज होगी.

    सीपीआई को हार साफ दिखाई दे रही है’

    उन्होंने कहा कि त्रिपुरा के 12 लाख युवाओं को अगर रोजगार देना है तो माणिक सरकार को बेरोजगार करना होगा. उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में बीजेपी की परिवर्तन सभा में शामिल होने वाली जनता की गाड़ियों को सीपीआई के लोगों द्वारा आने से रोका गया. इस बात से यह साफ प्रतीत होता है की सीपीआई बौखला गई है और उनको अपनी हार साफ दिखाई दे रही है.

    उन्होंने कहा कि सीपीआई को अब यह समझ लेना चाहिए की वो लोगों को सभा में आने से तो रोक सकती है लेकिन जनता के बुलंद हौसले को कैसे रोक पाएगी? देवधर ने कहा कि सीपीआई (एम) ने त्रिपुरा में पिछले 35 वर्षो के शासनकाल में आदिवासी लोगों के लिये कुछ भी नहीं किया. आदिवासी महिलाओं को न्याय नहीं मिल रहा है . मुख्यमंत्री माणिक सरकार के पास गृह विभाग भी है लेकिन कानून व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है.

    बहरहाल, वामदलों के नेतृत्व वाले त्रिपुरा में प्रचार अभियान तेज करने के लिए भाजपा का एक संसदीय दल राज्य का दौरा करने वाला है. यह दल राज्य के वर्तमान हालात का जायजा लेगा. त्रिपुरा में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं.

    ये भी पढ़ें: ‘गुजरात चुनाव साबित कर देंगे कौन जबर्दस्त नेता और कौन जबर्दस्ती का नेता’

    राजनीतिक पार्टियों को बैनर और झंडियां हटाने के आयोग ने दिए आदेश

  • बहुत समस्याएं हैं तो यशवंत सिन्हा, शत्रुघ्न सिन्हा इस्तीफा दे दें: बीजेपी नेता

    बहुत समस्याएं हैं तो यशवंत सिन्हा, शत्रुघ्न सिन्हा इस्तीफा दे दें: बीजेपी नेता

     

     

    तेलंगाना बीजेपी के प्रवक्ता कृष्णा सागर राव ने बुधवार को कहा कि अगर
    यशवंत सिन्हा और
    शत्रुघ्न सिन्हा को शासन को लेकर समस्याएं हैं और उन्हें पार्टी के मंचों पर अपने मुद्दे उठाने का पर्याप्त मौका नहीं मिल रहा है तो उन्हें पार्टी से इस्तीफा दे देना चाहिए. राव ने कहा कि दोनों नेताओं ने बहुत पहले ही पार्टी की अनुशासनात्मक लक्ष्मण रेखा पार कर दी थी.

    यशवंत सिन्हा ने ‘बेहद दोषपूर्ण’ माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली की आलोचना करते हुए कहा कि देशवासी ये मांग कर सकते हैं कि वो उनके सामने आई परेशानियों के कारण इस्तीफा दें और उनका ये भी मानना है कि जेटली गुजरात के लोगों पर बोझ हैं. जेटली गुजरात से राज्यसभा सदस्य हैं.

    अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा ने हाल ही में कहा कि अगर बीजेपी ‘वन-मैन शो और टू-मैन आर्मी‘ से बचती है तो ही वो लोगों की उम्मीदों पर खरी उतर पाएगी.

    राव ने कहा कि बीजेपी वित्त मंत्री के खिलाफ यशवंत सिन्हा के गुस्से को ‘एक ऐसे व्यक्ति के असंतुष्ट होने के तौर पर देखती है जो सरकार में कोई हिस्सा चाहता है और उसे वो नहीं दिया गया.’ उन्होंने कहा, ‘सिर्फ इस नाराज़गी के कारण कि उनके नाम पर प्रशासनिक या मंत्री पद के लिए विचार नहीं किया जा रहा, इसलिए वो वित्त मंत्री पर हमले कर रहे हैं. वरना ये कैसे सही साबित होता है कि उन्होंने केवल चुनाव के समय हमला किया.’राव ने कहा, ‘जब भी बीजेपी चुनाव में उतरती है तो उसी समय यशवंत सिन्हा या शत्रुघ्न सिन्हा ऐसी टिप्पणियां करते हैं. ये बिहार, उत्तर प्रदेश के दौरान हुआ और अब ये हिमाचल प्रदेश तथा गुजरात चुनाव के दौरान भी हो रहा है.’ उन्होंने कहा, ‘ये दिखाता है कि ये कुटिल साज़िश है जिसमें दुर्भाग्यपूर्ण रूप से वो फंस गए हैं. बीजेपी का मानना है कि कोई और उनका इस्तेमाल कर रहा है.’

    राव ने कहा कि अगर दोनों नेता परेशान हैं और जिस तरीके से सरकार चलाई जा रही है वो उससे चिढ़े हुए हैं तो राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद और यशवंत सिन्हा के ‘मार्गदर्शक मंडल’ के तौर पर उन्हें पार्टी के मंचों पर अपने मुद्दे उठाने चाहिए. पार्टी उन्हें ऐसा करने के कई मौके देती है.

    बीजेपी नेता ने कहा, ‘यशवंत सिन्हा ऐसा नहीं करते बल्कि वो हमारे अपने नेताओं पर हमला करने के लिए केवल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं. इससे ऐसा दिखता है कि वो दोनों देश में विशेष हित वाली ताकतों के हाथों की कठपुतली बन गए हैं.’ उन्होंने कहा कि दोनों बहुत वरिष्ठ नेता हैं. अगर पार्टी को उनके खिलाफ कदम उठाना है तो बड़े स्तर पर इस पर चर्चा की जाएगी और फैसला बिना सोचे नहीं लिया जा सकता. बीजेपी इस पर विचार करेगी.

    राव ने कहा, ‘आदर्श स्थिति ये है कि वो पार्टी से इस्तीफा दे दें. अगर उन्हें शासन में इतनी समस्याएं है और उन्हें पार्टी के भीतर अपनी बात रखने का मौका नहीं मिल रहा तो उन्हें कदम उठाना चाहिए.’

  • अरुणाचल प्रदेश सरकार ने बढ़ाई पेंशनभोगियों की पेंशन

    अरुणाचल प्रदेश सरकार ने बढ़ाई पेंशनभोगियों की पेंशन

     

     

    अरुणाचल प्रदेश कैबिनेट ने वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं और दिव्यांगों के लिए पेंशन में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. कैबिनेट की कल हुई बैठक में यह मंजूरी दी गई.

    राज्य सरकार ने पेंशन में वृद्धि के लिए केंद्र सरकार की तीन पेंशन योजनाओं में राज्य के हिस्से को जोड़ा है. तीन योजनाओं में वृद्धावस्था पेंशन योजना, राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना और राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना शामिल हैं.

    एक आधिकारिक बयान में आज बताया गया कि 60-79 वर्ष के लिए वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत पहले 200 रुपये मिलते थे, अब इसे बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया गया है. इसी तरह 80 साल और ज्यादा उम्र वाले लोगों के लिए वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत राशि 500 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये कर दी गई है।

  • कश्मीर घाटी में लश्कर के शीर्ष नेतृत्व का सफाया

    कश्मीर घाटी में लश्कर के शीर्ष नेतृत्व का सफाया

     

     

    सेना ने रविवार को कहा कि
    जम्मू एवं कश्मीर के बांदीपोरा जिले में छह आतंकवादियों के मारे जाने के बाद कश्मीर घाटी में पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष नेतृत्व का सफाया हो गया है. सेना की 15वीं कोर के श्रीनगर स्थित मुख्यालय के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल जे एस संधू ने संवाददाताओं को बताया, ‘कल लश्कर-ए-तैयबा के छह आतंकवादी कमांडरों के खात्मे के साथ घाटी में इसके शीर्ष नेतृत्व का सफाया हो चुका है.’

    उन्होंने शनिवार को चलाए गए अभियान के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि हाजिन क्षेत्र चिंता का विषय था. इस क्षेत्र में आतंकवादियों ने कुछ लोगों को मार डाला था.

    संधू ने बताया कि क्षेत्र में विशेष बल तैनात किए गए और अच्छी जानकारियां आनी शुरू हो गईं. हम चांदेगीर गांव पर नज़र बनाए हुए थे. ये आतंकवादी दो-तीन दिन से एक घर में रह रहे थे.

    जनरल ने मारे गए एक आतंकवादी की पहचान ओसामा जांगवी उर्फ ओवैद के रूप में की है, जो जकी-उर-रहमान का रिश्तेदार और शायद जकीउर रहमान मक्की का बेटा है.औवेद सहित छह पाकिस्तानी आतंकवादी और लश्कर के दो अन्य शीर्ष कमांडर जरगर और महमूद शनिवार को मारे गए. मुठभेड़ में भारतीय वायुसेना का एक कमांडो शहीद हो गया.

    जनरल ने कहा, ‘हम घाटी में अभियान को जारी रखने और जल्द ही शांति बहाल होने का इंतज़ार कर रहे हैं.’

    जम्मू एवं कश्मीर के पुलिस महानिदेशक एस पी वैद्य ने इस्लामिक स्टेट (आईएस) के उन दावों का खंडन किया है, जिसमें आतंकवादी संगठन ने दावा किया था कि शुक्रवार को श्रीनगर के जाकुरा में हुआ हमला कश्मीर में आईएस का पहला हमला है. हमले में एक पुलिसकर्मी के शहीद होने के साथ ही एक आतंकवादी मारा गया था.

    इस बारे में टिप्पणी करने के लिए कहे जाने पर उन्होंने कहा, ‘नहीं, इसकी पुष्टि होनी अभी बाकी है. मुझे नहीं लगता कि यहां आईएसएस की कोई मौजूदगी है.’

  • मुस्लिम परिवार कानून के लिए विधेयक लाए सरकार :BMMA

    मुस्लिम परिवार कानून के लिए विधेयक लाए सरकार :BMMA

     

     

    भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन ने तीन तलाक को लेकर विधेयक लाए जाने की सरकार की योजना का स्वागत किया है. बीएमएमए ने कहा कि सरकार हिंदू विवाह कानून की तर्ज पर एक ‘मुस्लिम परिवार कानून’ बनाने के लिए ऐसा विधेयक लायें, जो कुरान पर आधारित हो और देश के संविधान से भी मेल खाता हो.

    बीएमएमए की संस्थापक जकिया सोमन ने कहा, सरकार का कदम स्वागत योग्य है. लेकिन मामला सिर्फ तीन तलाक का नहीं है. निकाह हलाला, बहुविवाह और कई दूसरे ऐसे मुद्दे हैं जिनका समाधान मुस्लिम महिलाओं के लिए जरूरी है. ऐसे में हमारी मांग है कि सरकार हिंदू विवाह कानून की तर्ज पर मुस्लिम परिवार कानून बनाने के लिए विधेयक लाए जो कुरान पर आधारित हो और हमारे देश के संविधान से भी मेल खाता हो.

    उन्होंने कहा, हाल ही में हमने सभी महिला सांसदों, कानून मंत्री और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री को पत्र लिखकर कानून बनाने की मांग की थी. तीन तलाक के मामले में बीएमएम पिछले कई वर्षों से अभियान चला रहा है. सरकारी सूत्रों ने कहा कि सरकार एक बार में तीन तलाक की प्रथा को खत्म करने के लिए संसद के शीतकालीन सत्र में विधेयक लाने पर विचार कर रही है और इसको लेकर मंत्री स्तरीय समिति का गठन किया गया है.

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  • 1000 crore सट्टा लगाया जा रहा गुजरात चुनाव पर

    नई दिल्ली। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सट्टेबाजों का कहना है कि भाजपा साल 2012 में पाई जीत को दोहरा नहीं सकती, लेकिन वह जीतेगी इसके पूरे आसार दिख रहे हैं। हालांकि देश में सट्टेबाजी गैरकानूनी है, लेकिन क्रिकेट ही नहीं अब चुनाव में जीत-हार पर भी इसका काला खेल अपनी जड़े मजबूत कर चुका है। इस बार करीब 1000 करोड़ रुपये का काला कारोबार गुजरात चुनाव में खेला जा सकता है। गुजरात विधानसभा चुनाव में जीत-हार पर सट्टेबाजों की भी नजर है। सट्टेबाजों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य की सत्ता पर फिर काबिज होगी। सट्टेबाजों का दावा है कि भाजपा इस बार 118 से 120 सीटों पर जीत दर्ज करेगी। वहीं कांग्रेस को 80 से 100 सीटें मिल सकती है।

    सट्टेबाजों के रेट के मुताबिक अगर भाजपा पर 1 रुपया लगाया जाता है तो उसका 1 रुपये 25 पैसे मिलेंगे, वहीं कांग्रेस पर ये रेट 1 रुपये पर 3 रुपये है। महत्वपूर्ण बात यह है कि कांग्रेस की हार का खतरा नवंबर में ज्यादा उछल रहा था, इसलिए उस समय रेट 1 रुपये लगाने 7 रुपये मिलने का चल रहा था।

    जिन पार्टियों की जीत के यहां कम उम्मीद है उनमें आम आदमी पार्टी (आप) और शिव सेना शामिल हैं, इसलिए आप की जीत के लिए 1 रुपये पर 25 रुपये और शिवसेना के लिए 30 रुपये दिए जा रहे हैं। एक सट्टेबाज का कहना है कि चुनाव के नजदीक आने और भाजपा-कांग्रेस का प्रदर्शन जितना बेहतर होगा वैसे ही ये रेट बदलते रहेंगे। बताया जा रहा है कि हार्दिक के कांग्रेस को समर्थन दिए जाने के बाद रेट्स में कई बदलाव आए हैं।

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    सट्टेबाजों का यह भी कहना है कि नोटबंदी और जीएसटी ने गुजरात की कई जगहों में भाजपा की पकड़ को कमजोर किया है। एक सट्टेबाज ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी की वजह से शहरी इलाकों में भाजपा कमजोर हुई है और ये उसे नीचे भी गिरा सकता है।

  • झामुमो विधायक ने कराई चुंबन प्रतियोगिता, भाजपा को ऐतराज

    रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता व विधायक सिमोन मरांडी ने जनजातीय लोगों की एक चुंबन प्रतियोगिता का आयोजन किया। इस चुंबन प्रतियोगिता की खबर सोमवार को स्थानीय अखबारों में छपी।

    झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता व विधायक सिमोन मरांडी ने शनिवार की रात तल्पाहारी गांव में जनजातीय जोड़ों की एक चुंबन प्रतियोगिता का आयोजन किया. यह गांव उनके विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र लिट्टीपारा में आता है। इस चुंबन प्रतियोगिता की खबर सोमवार को स्थानीय अखबारों में छपी।

    झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता व विधायक सिमोन मरांडी ने जनजातीय लोगों की एक चुंबन प्रतियोगिता में तीन जनजातीय जोड़ों को पुरस्कार दिया गया.।

    सिमोन मरांडी ने सोमवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा, चुंबन प्रतियोगिता का आयोजन प्यार व आधुनिकता को बढ़ावा देने के लिए किया गया था. जनजातीय लोग संकोची हैं. जनजातीय जोड़ों द्वारा प्रतियोगिता में खुले तौर पर चुंबन करने से उनकी झिझक दूर होगी.। उन्होंने कहा कि इससे जोड़ों को एक दूसरे को समझने में मदद मिलेगी और तलाक रुकेगा।

    कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने शिरकत की. झामुमो के विधायक व वरिष्ठ नेता स्टीफन मरांडी भी आयोजन में मौजूद थे.। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कार्यक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    वरिष्ठ भाजपा नेता रमेश पुष्कर ने आईएएनएस से कहा, इस तरह की प्रतियोगिता आयोजित कर झामुमो क्या साबित करने की कोशिश में है. बहुत सारे तरीके हैं जिसे अपनाकर जनजातीय लोगों की झिझक दूर की जा सकती है. सिमोन मरांडी ने जनजातीय संस्कृति व परंपरा का मजाक बनाने की कोशिश की है.।
    उन्होंने कहा, ष्झामुमो के एक विधायक विधानसभा परिसर में एक बार खोलने को कह रहे है और दूसरे विधायक चुंबन प्रतियोगिता आयोजित कर रहे हैं.। झामुमो के विधायक कुणाल सारंगी ने बीते सप्ताह विधानसभा परिसर में एक बार खोलने की वकालत की थी।

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  • विपिन अग्नीहोत्री : जर्नलिज्म से फिल्म मेकिंग और फिर राजनीति तक में पाया मुकाम

    सक्रिय राजनीति समाजसेवा का रूप होती है : विपिन अग्नीहोत्री

    Vipin agnihotri

    लखनऊ। वर्ष 2016-17 में 5 लघु फिल्म, 4 म्यूजिक एल्बम तथा 15 से अधिक एड
    फिल्मों का निर्देशन कर चुके विपिन अग्नीहोत्री ने एक खास बातचीत में जीवन की
    परतें खोलते हुए कई राज़ बताए। विपिन आज कल फिल्मों के साथ साथ सक्रिय राजनीति
    में भी हाथ आजमा रहे हैं और सामाजिक मुद्दों पर संघर्ष कर रहे हैं।

    विपिन बतातें है कि महर्षि विद्या मंदिर से इंटर पास करने के बाद एलयू से
    बीएससी और फिर कानपुर यूनिवर्सिटी से गणित में एमएससी करने के साथ साथ
    जयपुरिया इंस्टिट्यूट से जर्नलिज्म का कोर्स किया। पत्रकारिता की पढ़ाई याद
    करते हुए विपिन अपने गुरू रतन मनी लाल की यादों में डूब जाते हैं। वे कहते हैं
    कि लाल सर और संजय मोहन जौहरी से ना केवल पत्रकारिता के गुर सीखे बल्कि जीने
    का फलसफा भी सीखने का मौका मिला।

    जर्नलिज्म का कोर्स करने के बाद विपिन ने अंग्रेजी अखबार पायनियर से अपना
    कैरियर शुरू किया और टाइम्स आफ इंडिया, हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ साथ डे
    आफ्टर इंडिया में काम किया। अपने खट्टे-मीठे अनुभवों को सांझा करते हुए बताया
    कि जर्नलिज्म का कोर्स करने के दौरान अमित भनोट, अनिरुद्ध यादव, शलभ सक्सेना व
    मनमोहन राय ने उन्हें हमेशा मोटीवेट किया है।

    भावुक होकर विपिन बतातें है कि उनकी जिंदगी में तब एक ऐसा मोड़ आया जब उनके
    विजीटर्स फैकल्टी रहें निर्देशक अतुल अरोड़ा ने उनकी मुलाकात मशहूर निर्देशक
    डॉ एस अब्बास से करवाई। उन्होंने कहा कि डॉ अब्बास ने उनके अंदर छिपे हुए हुनर
    को ना केवल पहचाना बल्कि अपने जौहर दिखाने का भरपूर मौका दिया। फिल्म इंडिया
    कम्युनिकेशन के बैनर तले डां अब्बास ने मार्गदर्शन किया और फिल्म लाइन की
    बारीकियां सिखाई। हाल ही में एक कलैंडर शूट करने की बात करते हुए विपिन बतातें
    है कि प्रदेश स्तर पर फिल्म लाइन में मुकाम हासिल करने के बाद अब राजनीति में
    भी हाथ आजमाने की सोच रहे है।

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    हमेशा से समाज के लिए संवेदनशील रहें विपिन का कहना है कि मैं उन सामाजिक
    मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहता हूं जिन्हें लोग खानापूर्ति समझ कर छोड़
    देते हैं। बीजेपी को पसंदीदा दल बतातें हुए कहा कि सुषमा स्वराज उन्हें
    प्रभावित करती है और यदि मौका मिला तो वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल होना
    चाहेंगे और राज्यसभा सदस्य बन कर देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहेंगे।

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    नीला रंग पसंद करने वालें विपिन ब्रायन लारा, अजय देवगन, रनवीर कपूर, विद्या
    बालन, मुकेश अंबानी के फैन हैं और खाली समय में हैरी पॉटर को देखना पढ़ना नहीं
    भूलते हैं। जीन्स टी-शर्ट को आरामदायक मानने के साथ विपिन काटन के वस्त्र पसंद
    करते हैं पर मोबाइल फोन में केवल आई फोन पर ही विश्वास रखते हैं। गोवा और
    बर्सीलोना को मन पसंद जगह बताने वाले विपिन अग्नीहोत्री कहते हैं कि अभी जीवन
    में बहुत काम करने की जरूरत है।

  • जिग्नेश, उमर, कन्हैया और शहला रशीद एक ही मां के बेटे हैं , जानिए कौन है ये औरत

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    पिछले साल अगस्त में हुए उना कांड के बाद चर्चा में आए जिग्नेश मेवाणी अब वडगाम से एक विधायक बन गए हैं। उना कांड में जिग्नेश ने लगभग 20 हजार दलितों को एक साथ मरे जानवर न उठाने और मैला न ढोने की शपथ दिलाई थी। मेवाणी ने कहा था की दलित अब सरकार से अपने लिए दूसरे काम की बात करेंगे।

    इस दौरान जिग्नेश मेवाणी ने ‘दलित अस्मिता यात्रा’ भी निकाली। इसी यात्रा की अहमदाबाद में समाप्ति थी और एक जनसभा का रूप दिया गया। जिसमें पहली बार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र अध्यक्ष कन्हैया कुमार और उमर खालिद ने भी शिरकत की।

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    Gauri lankesh
    ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट मुकुल सिन्हा के ‘जन संघर्ष मंच’ को भी जिग्‍नेश ने ज्वाइन किया था।  इसके साथ ही मेहसाणा जिले में जन्मे जिग्नेश ‘आजादी कूच आंदोलन’ चला चुके हैं। जिसमें 20 दलितों  के साथ मिलरकर मरे जानवरों को ना उठाने और मैला ना ढोने की शपत दिलाई थीदौरान उन्होंने दंगा पीड़ितों और वर्कर यूनियन के लिए लड़ाई लड़ी। बाद में आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता बने।
    राज्य में दलितों का वोट प्रतिशत करीब सात फीसदी है। जिग्नेश दलित आंदोलन के दौरान एक काफी पॉपुलर नारा दिया था। ‘गाय की पूंछ तुम रखो हमें हमारी जमीन दो’ इस सभा में रोहित वेमुला की मां भी शामिल हुई थी। इस सभा दलित, पिछड़े और मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाले युवा नेता भी शामिल हुए। इसके अलावा भी जिग्नेश मेवाणी और कन्हैया कुमार ने कई रैलियों को एक साथ संबोधित किया है।

    इस सभा में साथ आने के बाद जिग्नेश मेवाणी का कद गुजरात के साथ-साथ जेएनयू में भी बढ़ा। जिग्नेश मेवाणी प्रचार-प्रसार के लिए जेएनयू आने लगे। उन्हें यहां होने वाली सेमिनारों में बुलाया जाने लगा।

    जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष शेहला रशीद ने जिग्नेश मेवाणी को चर्चाओं और सेमिनार में बुलाया। आज हुई ‘युवा हुंकार रैली’ का पूरा आयोजन और समर्थकों को जुटाने का पूरा जिम्मा शेहला रशीद ने उठाया। जब रैली को परमिशन नहीं मिली तो ट्वीट के माध्यम से दिल्ली पुलिस को प्रतिक्रिया दी।

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    जेएनयू के ही एक छात्र और हैं उमर खालिद। उमर खालिद के साथ जिग्नेश मेवाणी पिछले एक साल से टच में है। शौर्य दिवस को भीमा कोरेगांव में हिंसा हुई।  पुलिस का आरोप है कि उमर खालिद और जिग्नेश मेवाणी ने 31 दिसंबर को आयोजित एक कार्यक्रम में भड़काऊ भाषण दिया और इसी वजह से 1 जनवरी को भीमा कोरेगांव में हिंसा भड़की।

    इसके अलावा जेएनयू के इन तीनों छात्रों और जिग्नेश मेवाणी का एक और संबंध। ये सभी एक ही मां के बेटे हैं। मतलब ये कि जिग्नेश मेवाणी, कन्हैया कुमार, शेहला रशीद और उमर खालिद को कन्नड़ की वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश ने गोद लिया था। पिछले साल पांच सितंबर 2017 को कुछ हिंदूवादी लोगों ने गौरी लंकेश की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

  • आखिर क्यों जीफ जस्टिस के खिलाफ मीडिया के सामने आये सुप्रीम कोर्ट के चार जज

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    नयी दिल्ली । आज का दिन भारतीय न्यायापालिका के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट के चार जज मीडिया के सामने आये हैं और उन्होंने जीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर मनमानी करने का आरोप लगाया है. प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले चार जज में शामिल हैं जस्टिस चेलामेश्वर,जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इन्होंने कहा कि हमने जीफ जस्टिस को समझाने की कोशिश की, लेकिन हम सफल नहीं हो पाये और मजबूर होकर हमने मीडिया के सामने आने का फैसला किया. जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा, हमपर देश का जो कर्ज है, उसके निर्वहन के लिए हम यहां आये हैं. जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा निष्पक्ष न्यायपालिका के बिना लोकतंत्र सफल नहीं हो सकता, गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में पिछले कुछ समय से जीफ जस्टिस और कुछ जजों के बीच विवाद चल रहा था. यह विवाद तब शुरू हुआ जब न्यायिक पदों की उम्मीदवारी को अदालत ने खारिज कर दिया था और खारिज करने के कारणों को सार्वजनिक कर दिया था. जिसके बाद जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस मदन लोकुर ने जीफ जस्टिस को एक पत्र लिखा था,इनका कहना था कि उम्मीदवारों का चयन न करने के कारणों का खुलासा उनके मानवाधिकार, गोपनीयता और गरिमा का उल्लंघन कर सकता है. अक्तूबर माह में सुप्रीम कोर्ट की कोलेजियम ने एक आदेश पारित किया कि न्यायिक पदों की नियुक्ति में पारदर्शिता लाने के लिए नियुक्ति खारिज करने के कारणों को उजागर किया जाये. इस आदेश से उन लोगों को काफी शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ा जो प्रमोशन नहीं पा सके थे. मीडिया के सामने आये जज का कहना है कि पारदर्शिता से किसी को इनकार नहीं है, लेकिन गोपनीयता और पारदर्शिता के बीच संतुलन जरूरी है,ऐसी जानकारी भी मिली है कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से यह चारों जज इसलिए भी नाखुश हैं, क्योंकि कुछ केसों की सुनवाई को लेकर भी इनके बीच अधिकारों की जंग चल रही थी. आरोप है कि जीफ जस्टिस ने इन जजों के पास से कुछ केस अपने पास ट्रांसफर करा लिये थे.

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    जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस से मोदी सरकार में मचा हड़कंप
    भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों ने कोर्ट के संचालन में मनमानी करने के गंभीर आरोप लगाये हैं. इसे देश के इतिहास का अभूतपूर्व घटनाक्रम माना जा रहा है. चार जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्र ने कहा कि वह 2 बजे खुली अदालत में इस मामले की सुनवाई कर सकते हैं. हालांकि ऐसा कुछ हुआ नहीं. चीफ जस्टिस दीपक मिश्र ने सामान्य दिनों की तरह मुकदमों की सुनवाई की. इससे पहले उन्होंने अटॉर्नी जनरल और सुप्रीम कोर्ट के अन्य जजों से बात की. सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट का अंदरूनी मामला बताते हुए इस मुद्दे से पल्ला झाड़ लिया, तो कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा करार दिया. इस बीच, खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वोच्च अदालत के सुप्रीम संकट पर कानून मंत्री रविशंकर से बातचीत की है. वहीं, न्यूज चैनलों की मानें, तो सरकार ने चीफ जस्टिस से इस मुद्दे पर बातचीत की है. दूसरी तरफ, सीपीआई नेता डी राजा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चीफ जस्टिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाले सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस चेलामेश्वर से मुलाकात की. सुप्रीम कोर्ट के इन चार जजों ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि देश के कानून के इतिहास के लिए यह बहुत बड़ा दिन है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का प्राशासनिक कार्य ठीक से नहीं हो रहा है. जस्टिस जे चेलामेश्वर ने कहा, ‘हम चारों के लिए यह बहुत तकलीफ से भरा समय है और यह संवाददाता सम्मेलन करने में कोई खुशी नहीं हो रही. हम नहीं चाहते कि 20 साल बाद कोई कहे कि चारों वरिष्ठतम न्यायाधीशों ने अपनी आत्मा बेच दी थी.’ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपनी बात रखते हुए जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि अब देश तय करे कि चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग चले या नहीं. जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा, ‘हम चार लोग (जस्टिस चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ) भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र को लगातार कहते रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट की खातिर अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लायें. पिछले कुछ महीनों में हमने कुछ गड़बड़ियां देखीं. हमने हस्तक्षेप करने की कोशिश की, लेकिन उसे महत्व नहीं दिया गया. हम नहीं चाहते कि 20 साल बाद कोई कहे कि हमने अपनी आत्मा बेच दी.’ जस्टिस चेलामेश्वर की अगुवाई में जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने जस्टिस चेलामेश्वर के आवास पर मीडिया को संबोधित किया. ये सभी जज भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र की अगुवाई में बने कोलेजियम के सदस्य हैं. जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा, ‘हमने मुख्य न्यायाधीश से कहा कि सुप्रीम कोर्ट के प्रशासन में कुछ ऐसी चीजें हो रही हैं, जो ठीक नहीं हैं. दुर्भाग्य से हमारी कोशशें बेकार गयीं. इसलिए हमें राष्ट्र के सामने आकर ये बातें कहनीं पड़ रही हैं.’

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    Former judge RS Sodhi

    चारों जजों को घर भेज देना चाहिए: आर एस सोढ़ी
    रिटायर जस्टिस आर एस सोढ़ी ने सुप्रीम कोर्ट के चार जजों की प्रेस कांफ्रेंस करने को गलत करार दिया। उन्होंने कहा, मुझे लगता है चारों जजों पर महाभियोग चलाया जाना चाहिए। इनके पास बैठकर बयानबाजी के अलावा कोई काम नहीं बचा। लोकतंत्र खतरे में है तो संसद है, पुलिस प्रशासन है। यह उनका काम नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि इन चारों जजों को अब वहां बैठने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं यह सब देखकर काफी दुखी हूं। हमारे बीच कई बार मतभेद हुए, लेकिन यह प्रेस के बीच कभी नहीं आया। यह भयावह है।

    सुप्रीम कोर्ट के जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर वरिष्ठ वकील बोले- यह कदम उठाना जरूरी था
    नई दिल्ली देश के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। प्रेस कॉन्फ्रेंस जस्टिस जे.चेलमेश्वर के घर में आयोजित की गई। उनके साथ अन्य तीन जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरिन जोसेफ मौजूद थे। वहीं जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सीनियर वकीलों की तरफ से इस पर टिप्पणी आई है।ये बड़ी दुखद बात है कि मीडिया में आकर सुप्रीम कोर्ट के जज चीफ जस्टिस के खिलाफ खुलेआम बोल रहे हैं। ये शर्मनाक बात है इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ।

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    उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री को अपने संज्ञान में इस बात को लेना चाहिए। यह न्यायपालिका का काला दिन है. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के खराब नतीजे सामने आएंगे. अब से हर आम आदमी न्यायपालिका के हर फैसले को संदेह की नजरों से देखेगा. हर फैसले पर सवाल उठाए जाएंगे। ये दुखद दिन है। यह सुप्रीम कोर्ट का मामला है, जहां लोगों के विश्वास से जुड़ा हुआ है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के जजों ने जो इल्जाम लगाए हैं, उसकी जांच होनी चाहिए। ताकि देश और लोगों का विश्वास बना रहे।

    मीडिया के सामने आए सुप्रीम कोर्ट के 4 जज, मोदी ने कानून मंत्री को किया तलब

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    नई दिल्ली देश के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों ने आज मीडिया को संबोधित किया। जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सरकार में हड़कंप मच गया। इसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और राज्य मंत्री पीपी चैधरी को तलब किया। सूत्रों के मुताबिक पीएम इस मामले को ज्यादा तूल नहीं देना चाहते हैं और इसी के चलते कानून मंत्री को बुलाकर जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर सकते हैं। यह पहला ऐसा मौका है जब सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों ने मीडिया के सामने अपनी परेशानियों को जाहिर किया और कोर्ट प्रशासन के कामकाज पर भी सवाल उठाया। चारों जजों ने आरपो लगाया कि कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है, अगर ऐसा चलता रहा तो लोकतांत्रिक खतरे में है। जजों ने यह भी बताया कि इस संबंधी वे पहले चीफ जस्टिस को खत लिख चुके हैं जब उनकी बात नहीं सुनी गई तो आज सामने आए। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते कि हम पर कोई आरोप लगाए कि हमने अच्छे से काम नहीं किया। हम तो बस देश के प्रति अपना कर्ज अदा कर रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल थे।

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