भोपाल, एएनआइ। कांग्रेस में शुरू हुई कलह को लेकर मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) ने कहा है कि आखिरकार वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल (Kapil Sibal), गुलाम नबी आजाद और पी. चिदंबरम (P. Chidambaram) ने भी मान लिया कि पार्टी खत्म हो रही है। उनका ये बयान कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) के पांच-सितारा कांग्रेस संस्कृति वाले बयान के बाद आया है।
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बिहार चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद कांग्रेस पार्टी में कलह मच गई है। वरिष्ठ नेता पार्टी नेतृत्व को लेकर सवाल उठा रहे हैं। सबसे पहले कपिल सिब्बल समेत कुछ नेताओं ने पार्टी के नेतृत्व में बदलाव की मांग की थी जिसके बाद पार्टी में तनाव शुरू हो गया।
नरोत्तम मिश्रा ने कहा, ‘हमने बहुत पहले ही कह दिया था कि कांग्रेस खत्म हो रही है। अब आखिरकार आजाद जी, कपिल सिब्बल और चिदंबरम जी ने भी यह कह दिया है। लेकिन हमें नहीं लगता कि पार्टी नए सिरे से शुरू हो सकेगी। यहां तक कि गांधीजी ने भी पार्टी के विघटन का आह्वान कर दिया था।’
गौरतलब है कि बिहार चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद कांग्रेस पार्टी में कलह मच गई है। वरिष्ठ नेता पार्टी नेतृत्व को लेकर सवाल उठा रहे हैं। सबसे पहले कपिल सिब्बल समेत कुछ नेताओं ने पार्टी के नेतृत्व में बदलाव की मांग की थी, जिसके बाद पार्टी में तनाव शुरू हो गया। तो वहीं सलमान खुर्शीद समेत कई नेता पार्टी का समर्थन करते भी दिखे। इसके बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा था कि कांग्रेस जमीन से संपर्क खो चुकी है। यहां कोई भी पदाधिकारी बन जाता है और फिर लेटरहेड और विजिटिंग कार्ड छपवाकर संतुष्ट हो जाता है।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि फाइव स्टार होटलों में बैठकर चुनाव नहीं जीते जाते। आजाद ने कहा कि जिला अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष अगर चुनाव जीतकर बनता तो इसकी अहमियत का एहसास होता, लेकिन यहां तो कोई भी बन जाता है।
नई दिल्ली, एएनआइ। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को आज जमकर लताड़ लगाई। केंद्रीय सैनिक बोर्ड द्वारा आयोजित आर्म्ड फोर्स फ्लैग डे सीएसआर वेबिनार (Armed Forces Flag Day CSR Webinar) में रक्षामंत्री ने बगैर पाकिस्तान का नाम लिए कहा कि जो देश अपनी संप्रभुता की रक्षा करने में विफल रहते हैं, वे हमारे पड़ोसी देश (पाकिस्तान) की तरह बन जाते हैं। ऐसे देश (पाकिस्तान) अपनी सड़कों का निर्माण अपने दम पर नहीं कर सकते हैं और न ही उन पर चल सकते हैं।
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एक वेबिनार में शामिल होते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बगैर पाकिस्तान का नाम लिए कहा कि जो देश अपनी संप्रभुता की रक्षा करने में विफल रहते हैं वे हमारे पड़ोसी देश (पाकिस्तान) की तरह बन जाते हैं।
यहां तक कि अपने दम पर व्यापार भी नहीं कर सकते हैं या किसी को व्यापार करने से रोक भी नहीं सकते हैं।
#WATCH: “…Countries who fail to protect their sovereignty become like our neighbouring nation-who can’t build their roads on their own, nor walk on them, not even have trade on their own or stop someone from trading..,” says Defence Minister at Armed Forces Flag Day CSR Webinar pic.twitter.com/3u5FjihvRv
वेबिनार के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि कुछ सालों से फ्लैग डे फंड में कई गुना की बढ़ोतरी हुई है। आप लोगों का यह सहयोग आपको उन स्वतंत्रता सेनानी उद्योगपतियों की कतार में लाकर खड़ा कर देता है जिन्हें आज हम स्वतंत्रता संग्राम में उनकी सेवा, समर्पण और सहयोग के कारण याद करते हैं।
वेबिनार के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि कुछ सालों से फ्लैग डे फंड में कई गुना की बढ़ोतरी हुई है। आप लोगों का यह सहयोग आपको उन स्वतंत्रता सेनानी उद्योगपतियों की कतार में लाकर खड़ा कर देता है जिन्हें आज हम स्वतंत्रता संग्राम में उनकी सेवा, समर्पण और सहयोग के कारण याद करते हैं।
वेबिनार में बोलते हुए उन्होंने कहा कि सन 1962 के युद्ध में राष्ट्र के आह्वान पर इस देश की जनता ने ‘गर्म ऊन से लेकर गर्म खून’ तक का खुशी-खुशी दान कर दिया था। रुपए-पैसे, गहने की तो कोई गिनती नहीं थी। यह है राष्ट्र के प्रति हमारी सच्ची भावना है।
Kisan Andolan : कृषि कानून के खिलाफ सबसे ज्यादा पंजाब और हरियाणा के किसानों ने आवाजें बुलंद की हैं। आज लगातार सातवें दिन भी किसानों का प्रदर्शन जारी है। किसानों का साफ कहना है कि जब तक केंद्र सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं कर देती, तब तक वो अपना आंदोलन जारी रखेंगे। सिंघु बॉर्डर पर हरियाणा और पंजाब से आए हजारों ट्रैक्टर और ट्रॉलियां खड़े हैं और हर बीतते दिन के साथ ये संख्या बढ़ती ही जा रही है। ऐसे में इन कृषियों के खाने पीने की जिम्मेदारी कौन उठा रहा है। तब इस मामले की जांच की गई तो सामने आया कि किसान आंदोलन का बहीखाता है।
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किसान आंदोलन के लिए कहाँ से आ रहा है फंड, हो गया खुलासा ?
जी हं, हर गांव में साल में दो बार चंदा इकट्ठा किया जाता है। मिली जानकारी के मुताबिक, हर छह महीने में तकरीबन ढाई लाख रूपये तक चंदा इकट्ठा हो जाता है।इस आंदोलन को पंजाब के डेमोक्रेटिक टीचर्स फेडरेशन ने सबसे ज्यादा मदद की है। इस फेडरेशन की ओर से किसानों की सहायता के लिए दस लाख रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की गई है।
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किसान आंदोलन के लिए कहाँ से आ रहा है फंड, हो गया खुलासा ?
इसके अलावा किसानों पर कहां कितना खर्च किया जा रहा है। इस बारे में सभी जानकारी बहीखाते में दर्ज की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, भारतीय किसान यूनियन उगराहां से संबंधित करीब 1400 गांव साल में दो बार चंदा इकट्ठा करते हैं। एक चंदा गेहूं की कटाई के बाद इकट्ठा किया जाता है। जबकि दूसरा धान की फसल के बाद जुटाया जाता है। पंजाब के गांवों में हर छह महीने में करीब ढाई लाख रुपये इकट्ठे हो जाते हैं।
बताते चलें ट्रॉलियों में खाने-पीने का सामान लदा है और किसानों के रहने और सोने की व्यवस्था है। यहां दिन भर चूल्हे जलते रहते हैं और कुछ ना कुछ पकता रहता है। दिल्ली के कई गुरुद्वारों ने भी यहां लंगर लगाए हैं इसके अलावा दिल्ली के सिख परिवार भी यहां आकर लोगों को खाना खिला रहे हैं।
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किसान आंदोलन के लिए कहाँ से आ रहा है फंड, हो गया खुलासा ?
इस आंदोलन से जुड़ी यूनियनों ने चंदा इकट्ठा करने के लिए गांव से लेकर जिला स्तर तक पर समीतियां बनाई हैं और आ रहे पैसों का पूरा हिसाब रखा जा रहा है.राजिंदर सिंह कहते हैं, ष्हम एक-एक पैसे का हिसाब रख रहे हैं. जो लोग देखना चाहें वो यूनियन में आकर देख सकते हैं. सिर्फ पैसों का ही नहीं, यूनियन के नेता आंदोलन में आ रहे लोगों का भी हिसाब रख रहे हैं. एक थिएटर ग्रुप से जुड़े युवा भी आपस में चंदा करके आंदोलन में शामिल होने पहुँचे हैं।
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किसान आंदोलन के लिए कहाँ से आ रहा है फंड, हो गया खुलासा ?
इसी में शामिल एक युवा का कहना था, बहुत जाहिर सी बात है, जो पंजाब पूरे देश का पेट भर सकता है, वो खघ्ुद भूखा नहीं मरेगा. हम सब अपनी व्यवस्था करके आए हैं. गांव-गांव में किसान यूनियनों की समीतियां हैं, हम सबने चंदा इकट्ठा है. ट्रॉली में भले ही एक गांव से पांच लोग आए हों, लेकिन पैसा पूरे गांव ने इकट्ठा किया है. हम अपनी नेक कमाई से इस आंदोलन को चला रहे हैं.ष्शाम होते-होते पंजाब की ओर से आए कई नए वाहन प्रदर्शन में पहुंचे. इनमें से रोटियां बनाने की मशीनें उतर रही थीं।
सोशल मीडिया पर एक महिला किसान नेता का वीडियो काफी वायरल हो रहा है। किसान आंदोलन में शामिल इस महिला नेता गीता भाटी की सैंडल गायब हो गई। गीता भाटी ने मोदी सरकार पर सैंडल गायब कराने का आरोप लगाते हुए कहा कि ‘मेरी सैंडल सरकार और पुलिस की साज़िश के तहत गायब हुई है। मोदी सरकार मेरी सैंडल वापस दिलवाए।’ सोशल मीडिया पर यूजर्स इस वीडियो को वायरल कर रहे हैं।
ग्रेटर नोएडा : किसान आंदोलन में शामिल महिला नेता की सैंडल हुई गायब….बोली
आप भी ये बात पढ़कर हैरान हो गए होंगे। देखा जाए तो ये हैरान होने वाली बात ही है और इसपर विश्वास मानना भी मुश्किल लगता है मगर ये सच है। दुनिया में ऐसी कई हैरान करने वाली चीजें होती हैं जिनके बारे में जानकर लोगों को लगता है कि वो चमत्कार ही है । ऐसा ही एक वाकया अमेरिका में हुआ है। यहां एक बच्ची ने जन्म लिया है जो उम्र में 27 साल की है और अपनी मां से महज 18 महीने छोटी है! आइए आपको बताते हैं कि पूरा मामला क्या है ।
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एक 27 साल की बच्ची ने लिया जन्म, नवजात बच्ची मां से उम्र में 18 महीने छोटी, जानें कैसे !
ये है पूरी कहानी टीना गिब्सन का जन्म साल 1991 में हुआ था और उनकी और बेंजामिन की शादी को 10 साल हो चुके हैं, उन्हें बांझपन (Infertility) की समस्या थी । ये पूरा मामला अमेरिका के टेनिसी का है । 1992 में एक महिला ने अपने भ्रूण को फ्रीज कराया था । फरवरी 2020 में उस भ्रूण को टीना नाम की महिला के गर्भ में ट्रांसप्लांट किया गया। टीना ने अक्टूबर महीने में बच्चे को जन्य दिया जिसका नाम मॉली है । टीना की पैदाईश अप्रैल 1991 की है वहीं मॉली के भ्रूण को अक्टूबर 1992 में फ्रीज कराया गया था ।
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एक 27 साल की बच्ची ने लिया जन्म, नवजात बच्ची मां से उम्र में 18 महीने छोटी, जानें कैसे !
27 साल पहले फ्रीज किया गया था भ्रूण ये चमत्कार विज्ञान की मदद से संभव हो सका है । मॉली दुनिया की पहली ऐसी भ्रूण है जिसे 27 साल तक फ्रीज कर के रखा गया और उसके बाद गर्भ में ट्रांसप्लांट किया गया है । इससे पहले ये रिकॉर्ड 24 साल था । उस भ्रूण ने एमा नाम की बच्ची के रूप में नवंबर 2017 में जन्म लिया था । एमा, मॉली की ही बहन है । एमा को भी टीना के ही गर्भ में ट्रांसप्लांट किया गया था ।
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एक 27 साल की बच्ची ने लिया जन्म, नवजात बच्ची मां से उम्र में 18 महीने छोटी, जानें कैसे !
टीना और उनके पति बेंजामिन को 2017 में टीना के परिवार वालों से इस बात का पता चला कि फ्रीज किए हुए भ्रूण को कंसीव कर के भी वो बच्चे को जन्म दे सकते हैं । शुरुआत में टीना असहज थीं मगर बाद में वो इसके लिए तैयार हो गईं ।
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एक 27 साल की बच्ची ने लिया जन्म, नवजात बच्ची मां से उम्र में 18 महीने छोटी, जानें कैसे !
क्या होते हैं फ्रीज किए हुए भ्रूण?
गर्भ में फर्टिलाइजेशन के बाद से 8 वें हफ्ते तक के जीव को भ्रूण कहते हैं । भ्रूण को शरीर से निकाल कर फ्रीज कर दिया जाता है जिससे बाद में उसे किसी गर्भ में ट्रांसप्लांट किया जा सके । फ्रीज किए हुए भ्रूण को या तो प्रेग्नेंसी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, या फिर रिसर्च से जुड़े काम को अंजाम देने के लिए । भ्रूण को एक बंद कंटेनर में -321 डिग्री फारेनहाइट या -196 डिग्री सेल्सियस के ताप मान में फ्रीज किया जाता है ।1980 की शुरुआत से भ्रूण को फ्रीज करने का प्रोसेस शुरु हुआ है ।
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एक 27 साल की बच्ची ने लिया जन्म, नवजात बच्ची मां से उम्र में 18 महीने छोटी, जानें कैसे !
गरमपानी (नैनीताल) : अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास निधि (आइफैड) के तहत जलागम विभाग को लाखों करोड़ों रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। मकसद है ग्रामीण क्षेत्रों का विकास तथा काश्तकारों को आत्मनिर्भर बनाना। पर हालात एकदम उलट हैं आए दिन जलागम विभाग में एक के बाद एक घोटाले उजागर हो रहे हैं। बेतालघाट ब्लॉक के बसगांव क्षेत्र में बने दस लाख रुपये की लागत से बने भवन की हालत गुणवत्ता की हकीकत बयां कर रहा है। जलागम विभाग के कार्यालय के लिए बेतालघाट ब्लॉक की सिमलखा यूनिट को अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास निधि के तहत करीब दस लाख रूपये अवमुक्त हुए। मकसद था गांव में जलागम कार्यालय का निर्माण ताकि कार्यालय में बैठकर विभागीय कार्य निपटाए जा सके साथ ही किसानों के लिए भी योजनाएं तैयार की जाए। सिमलखा यूनिट की निगरानी में जोर-शोर से कार्य भी शुरु किया गया। पर एक वर्ष भी नहीं गुजरा है कि नवनिर्मित लाखों रुपये के भवन में भ्रष्टाचार की दरारें गहरी होती जा रही है।
भवन के चारों ओर झाड़ियां उग चुकी है। नए भवन के दरवाजों के समीप गहरी होती दरारें बड़े खतरे की ओर इशारा कर रही है। सुरक्षा दीवार तक ध्वस्त हो चुकी है। जिससे गुणवत्ता की हकीकत उजागर हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जलागम विभाग सरकारी बजट की धड़ल्ले से बर्बादी कर रहा है। मिलीभगत से सरकारी धन को ठिकाने लगाया जा रहा है। आलम यह है कि उद्घाटन के बावजूद कार्यालय में ताला लगा हुआ है। जलागम के कर्मी समीपवर्ती पंचायत घर में बैठकर कार्य कर रहे हैं। रातीघाट बेतालघाट मोटर मार्ग पर बसगांव के समीप बने भवन को जाने वाला रास्ता भी खस्ताहाल है। लाखो रुपये खर्च होने के बावजूद रास्ता तक दुरुस्त नहीं किया गया है। क्षेत्रवासियों ने मामले में उच्च स्तरीय जांच की भी मांग उठाई है।
विभाग के यूनिट अधिकारी जगदीश पंत का कहना है कि जलागम विभाग ने पैसा दिया है। ग्राम पंचायत के माध्यम से निर्माण करवाया गया। भुगतान हो चुका है। यदि भवन में दिक्कत आई है तो ग्राम पंचायत से ही दुरुस्त करवाया जाएगा। सिमलखा की ग्राम प्रधान लक्ष्मी देवी ने बताया कि मेरे कार्यकाल से पहले बना है। हमने कोई निर्माण नहीं कराया। निरीक्षण किया जाएगा। जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
नई दिल्ली, पीटीआइ। कोविड-19 वैक्सीन के सुरक्षित और प्रभावी होने की आशंकाओं के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि टीके के चयन और अप्रूवल को लेकर किसी तरह की जल्दबाजी नहीं की जाएगी। मंत्रालय ने कहा है कि सुरक्षा और कारगर होने के आधार पर नियामक संस्थानों की हरी झंडी मिलने के बाद ही देश में किसी वैक्सीन को मंजूरी दी जाएगी। मंत्रालय का कहना है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है और सुरक्षित टीकाकरण अभियान के लिए राज्यों को टीके के साइड इफेक्ट की स्थिति से निपटने के लिए पहले से बंदोबस्त करने के लिए भी कहा गया है।
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देश में टीकाकरण को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ किया है कि टीके के चयन और अप्रूवल को लेकर किसी तरह की जल्दबाजी नहीं की जाएगी। जानें टीकाकरण से जुड़ी महत्वपूर्ण सवालों के जवाब…
आपात इस्तेमाल के लिए इन कंपनियों ने दिया है आवेदन
देश के दवा नियामक भारतीय औषधि महानियंत्रक यानी डीजीसीआई के पास भारत बायोटेक, सीरम इंस्टीट्यूट और फाइजर ने अपने कोविड-19 टीकों के आपात इस्तेमाल की मंजूरी देने के लिए आवेदन दिए हैं। डीजीसीआई के विशेषज्ञों की समिति इन आवेदनों पर बारीकी से गौर कर रही है। बीते दिनों डीजीसीआई ने उक्त कंपनियों से ट्रायल के आंकड़ों को मांगा था। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वीके पॉल के मुताबिक, वैज्ञानिक आधार पर आवेदनों पर गौर किया जा रहा है। टीका सुरक्षित हो और कोरोना के खिलाफ कारगर हो इस बारे में अवलोकन किया जा रहा है।
जोरों पर टीकाकरण की तैयारियां
समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि टीकाकरण के लिए तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। वैसे तो कोविड-19 वैक्सीन की खुराक लेना व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर करेगा लेकिन सबसे पहले इसे स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम मोर्चे पर तैनात प्राथमिकता समूह को दिया जाएगा। यही नहीं टीके की उपलब्धता के आधार पर 50 वर्ष से ज्यादा उम्र वालों को इसकी खुराक दिए जाने पर विचार किया जाएगा। सरकार अत्यंत जोखिम वाले समूहों को सबसे पहले टीका लगाए जाने को प्राथमिकता दे रही है।
वैक्सीन लेना स्वैच्छिक लेकिन ये हैं अहम सवाल
दरअसल मंत्रालय ने कोविड-19 टीके से जुड़े सवालों-जवाबों की सूची तैयार की है। इसी में कुछ सवाल थे जैसे कि क्या सबके लिए टीका लेना जरूरी है… टीके से कितने दिनों में एंटीबॉडी तैयार होंगी… क्या कोविड-19 से उबर चुका व्यक्ति भी टीका ले सकता है। मंत्रालय का कहना है कि सभी को टीका लेने की सलाह दी जाती है लेकिन वैक्सीन लेना स्वैच्छिक है। टीके के लिए ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड जैसे दस्तावेज मान्य होंगे। यही नहीं कैंसर, मधुमेह, हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों से जूझ रहे मरीज भी वैक्सीन ले सकते हैं।
संक्रमण को शिकस्त देने वाले भी लें वैक्सीन
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि किसी भी टीके को मंजूरी पूरी जांच परख के बाद ही होगी। भारत में उपलब्ध टीका भी दूसरे देशों में विकसित टीके जितना ही सुरक्षित और कारगर होगा। देश में कोविड-19 के छह टीकों के परीक्षण चल रहे हैं। मंत्रालय का कहना है कि पूर्व में कोविड-19 से संक्रमित हो चुके लोगों को भी कोरोना के टीके की पूरी खुराक लेने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से बीमारी के खिलाफ मजबूत प्रतिरोधक क्षमता तैयार होगी। मंत्रालय ने बताया कि वैक्सीन की दूसरी खुराक लेने के दो हफ्ते बाद जाकर शरीर में सुरक्षात्मक स्तर तक एंटीबॉडी बन पाते हैं।
हैदराबाद, भारत बायोटेक (Bharat Biotech) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. कृष्णा एला (Krishna Ella) और संयुक्त प्रबंध निदेशक सुचित्रा एला (Suchitra Ella) ने हैदराबाद में शुक्रवार को उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू से मुलाकात की। इस मुलाकात में भारत और दुनिया में स्वदेशी वैक्सीन (कोवैक्सीन) को उपलब्ध कराने के बारे में चर्चा हुई। बता दें कि भारत बायोटेक (Bharat Biotech) कोवैक्सीन (COVAXIN) नाम का कोविड टीका विकसित कर रही है।
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भारत बायोटेक (Bharat Biotech) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. कृष्णा एला और संयुक्त प्रबंध निदेशक सुचित्रा एला ने हैदराबाद में शुक्रवार को उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू से मुलाकात की। इस मुलाकात में भारत और दुनिया में स्वदेशी वैक्सीन को उपलब्ध कराने के बारे में चर्चा हुई।
आधिकारिक बयान में कहा गया है कि बैठक के दौरान उस स्वदेशी टीके की स्थिति और भारत एवं दूसरे देशों में इसे उपलब्ध कराने की योजना पर बातचीत हुई। उपराष्ट्रपति ने स्वदेशी वैक्सीन के विकास में सरकारी-निजी भागीदारी के महत्व पर जोर दिया। यही नहीं उन्होंने वैक्सीन विकसित करने को लेकर आईसीएमआर और भारत बायोटेक के बीच सहयोग की सराहना की। समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक, वैक्सीन के पहले चरण के प्रतिभागियों में टीका लगाए जाने के तीन महीने बाद तक एंटीबॉडी और टी-सेल्स देखी गई हैं।
टी-सेल्स लंबे वक्त तक शरीर में मौजूद रहती हैं और वायरस के संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करती हैं। अध्ययन में पाया गया है कि उक्त एंटीबॉडीज छह से 12 महीने तक रह सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरे चरण के अध्ययन में भी इस वैक्सीन (COVAXIN) के अच्छे नतीजे सामने आए हैं। वैक्सीन (COVAXIN) के दूसरे चरण के ह्यूमन ट्रायल के नतीजे सुरक्षित पाए गए हैं। भारत बायोटेक (Bharat Biotech) ने कोवैक्सीन को लेकर एक अनुसंधान पत्र में यह जानकारी दी। कोवैक्सीन को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान मिलकर बना रहे हैं। इसके तीसरे चरण का ट्रायल जारी है।
भारत बायोटेक (Bharat Biotech) ने कोवाक्सिन (COVAXIN) के तीसरे चरण का ट्रायल नवंबर के मध्य में शुरू किया था। ट्रायल के लिए 13 हजार स्वयंसेवकों की भर्ती की गई है। कंपनी की मानें तो तीसरे चरण के लिए वह विभिन्न स्थानों से कुल 26 हजार लोगों की भर्ती करेगी। पहले और दूसरे चरण के ट्रायल्स में लगभग एक हजार लोगों पर कोवाक्सिन की जांच की गई थी। वैक्सीन (COVAXIN) को भारत बायोटेक के बीएसएल-3 संयंत्र में विकसित किया गया है। भारत बायोटेक (Bharat Biotech) की संयुक्त प्रबंध निदेशक सुचित्रा एला का कहना है यह भारत में होने वाला एक अभूतपूर्व वैक्सीन परीक्षण है। ट्रायल के नतीजों से कंपनी (Bharat Biotech) उत्साहित हैं।
नई दिल्ली। टेलीकॉम उद्योग के सक्रिय ग्राहकों की संख्या इस वर्ष अक्टूबर के आखिर में करीब 25 लाख बढ़कर 96.1 करोड़ पर पहुंच गई। आइसीआइसीआइ सिक्युरिटीज ने एक रिपोर्ट के माध्यम से कहा है कि पिछले कुछ समय के दौरान टेलीकॉम टैरिफ में बढ़ोतरी हुई है और प्रत्येक सिम को सक्रिय रखने के लिए मासिक शुल्क निर्धारित कर दिया गया है। इससे सक्रिय कनेक्शनों की संख्या बढ़ी है।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के आंकड़ों के आधार पर आइसीआइसीआइ सिक्युरिटीज ने कहा कि अक्टूबर में भारती एयरटेल के सक्रिय ग्राहकों की संख्या करीब 30 लाख बढ़कर 32 करोड़ पर पहुंच गई। कंपनी ने परंपरागत रूप से कमजोर माने जाने वाले महाराष्ट्र सर्किल में सबसे अधिक सात लाख और गुजरात सर्किल में पांच लाख ग्राहक जोड़े।
सक्रिय ग्राहकों की गणना विजिटर लोकेशन रजिस्टर (वीएलआर) के आधार पर होती है। अक्टूबर में जियो के सक्रिय ग्राहकों की संख्या 11 लाख बढ़कर 31.9 करोड़ पर पहुंच गई। हालांकि वोडाफोन आइडिया लिमिटेड (वीआइएल) के सक्रिय ग्राहकों की संख्या में गिरावट जारी है। अक्टूबर में कंपनी के सक्रिय ग्राहक करीब 27 लाख घटकर 26 करोड़ रह गए।
आइसीआइसीआइ सिक्युरिटीज ने पाया है कि भारती एयरटेल ने सक्रिय सब्सक्राइबर्स के जरिए एक बार फिर टेलीकॉम बाजार में एक लीडर की भूमिका में आ गई है। भारती एयरटेल के सक्रिय ग्राहकों की संख्या करीब 30 लाख बढ़कर 32 करोड़ पर पहुंच गई। जबकि जियो के सक्रिय ग्राहकों की संख्या अक्टूबर में 31.9 करोड़ दर्ज की गई। वहीं, सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल और एमटीएनएल को सब्सक्राइबर बेस में नुकसान हुआ है।