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  • आखिर चालक का नाम पूछकर क्यों करते है चालान

    आखिर चालक का नाम पूछकर क्यों करते है चालान

    हरिपाल कश्यप की रिपोर्ट

    शाहजहांपुर । शाहजहाँपुर परिवहन विभाग मे लम्बे समय से जमे PTO आरिफ सिद्दीकी साहब के नाम से भुवनेश मिश्रा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली की PTO नाम पूछ कर डग्गामार गाड़ियों का चालान काटते है तो आखिर नाम पूछ कर ही क्यों चालक की गाड़ी का चालान काटते है आखिर क्या सिद्ध होता है आरिफ की मनोदशा से ?

    आखिर चालक का नाम पूछकर क्यों करते है चालान

    हाँ अगर ऐसा करते हैं तो क्या सिर्फ हिन्दू सिक्ख ईसाई को ही सजा देते है और विरादरी वाद के लोगों को छोड़ देते हैं जबकि ऐसा नही होना चाहिए क्योंकि अधिकारी तो सर्व समाज का होता है न की किसी एक वर्ग का।लेकिन पोस्ट देखकर शक का कीड़ा रेंगना हर किसी का बाजिव है।पर देखा जाता कि सबसे ज्यादा नेशनल हाईवे 24 पर बरेलीमोड़ से लेकर वनतारा तक आरिफ साहव जमे रहते है फिर भी इनको ओवर लोड़ भूसी की गाड़ी,भूसे की ट्राली ,जानवरों की गाड़ियां,आटो,दिल्ली से पलिया लखनऊ चलने वाली प्राईवेट बसें,एक ट्रेक्टर दो ट्राली,मण्डी समिति मे चलने वाली ट्रेक्टर ट्राली आदि दिखाई नही देतीं ।
    जबकि सभी अधिकारी जानते हैं दिल्ली से लखनऊ चलने वाली प्राईवेट बसें रोड़वेज को सेलटैक्स को चूना लगा रहीं है और मण्डी समिति मे चलने वाले ट्रेक्टरट्राली भी सबसे ज्यादा मोहल्ला किला की हैं।जबकि लम्बे अर्शे से टिके पीटीओ साहव से भी कुछ छुपा नही है फिर भी यह वाहन दौड़ रहे है बगैर डर भय के जबकि आये दिन शाहजहांपुर मे हादसों का की बढ़ोत्तरी हो रही है थाना रोजा क्षेत्र के जमुका दोराहे पर ऐक्सिडेंट मे 17 लोगों की जान चली गई फिर भी प्रशासन मौन जबकि बड़े जोर शोर से वर्तमान समय मे यातायात माह भी चल रहा है तो केवल नगर के अन्दर और स्कूलों मे पर पूरे जिले के यातायात की भूगोलिक स्थिति से सब अनभिज्ञ है।

  • केंद्र-AAP आमने-सामने शुद्ध पानी के सवाल पर: लिस्ट जारी कर पासवान ने दिया केजरीवाल को जवाब

    केंद्र-AAP आमने-सामने शुद्ध पानी के सवाल पर: लिस्ट जारी कर पासवान ने दिया केजरीवाल को जवाब

    नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में पीने के पानी को लेकर जारी केंद्रीय एजेंसी भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की रिपोर्ट सामने आने के बाद केंद्र सरकार और दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के बीच ठनी हुई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में पीने का पानी गुणवत्ता जांच में असफल रहा है।

    मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रिपोर्ट को झूठी और राजनीति से प्रेरित करार दिया। केजरीवाल ने सोमवार को उपभोक्ता मामले के मंत्री रामविलास पासवान को जांच कराने का चैलेंज दिया था। पासवान ने केजरीवाल को पत्र लिखकर चैलेंज स्वीकार कर लिया। अब मंगलवार को पासवान ने उन 11 स्थानों के नाम-पते ट्विटर पर पोस्ट किए हैं जहां से सैंपल लिए गए।

    साथ ही लिखा कि आम आदमी पार्टी और इनकी पार्टी के नेताओं द्वारा दिल्ली के पानी की गुणवत्ता पर बीआईएस की जांच रिपोर्ट के संबंध में विभिन्न माध्यमों से सवाल उठाए जा रहे हैं और कहा जा रहा है कि कहां से पानी के सैंपल लिए गए यह भी पता नहीं है। ये हैं उन 11 स्थानों के नाम-पते जहां से सैंपल लिए गए।

    इससे पहले आज ही आप के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने पासवान को पानी की गुणवत्ता की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से करवाने की चुनौती दी है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार के एक अन्य विभाग-जल शक्ति मंत्रालय ने दिल्ली में पाइप के जरिए आपूर्ति किए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता की तारीफ की थी।

    संजय सिंह ने कहा कि जल शक्ति मंत्रालय ने दिल्ली में पाइप के जरिए आपूर्ति किए जा रहे पेयजल की सराहना की थी। हम किसी भी स्वतंत्र एजेंसी से पाइप के पानी की जांच करवाने के लिए तैयार हैं। सच्चाई यह है कि उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की रिपोर्ट जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट की विरोधाभासी है, जिससे साबित होता है कि उपभोक्ता मंत्रालय की रिपोर्ट संदिग्ध है।

  • सफलता और असफलता के राज छुपे हैं आपकी ही किचन में, जाने कैसे?

    सफलता और असफलता के राज छुपे हैं आपकी  ही किचन में, जाने कैसे?

    नई दिल्ली। वास्तु के अनुसार चीजों व्यवस्थित न हो तो यह अपशगुन का कारण बनती हैं। ऐसे में घर की रसोई का विशेष ख्याल रखना चाहिए। किचन की दिशा के साथ ही साथ रसोई घर में काम आने वाले तमाम बर्तन भी शुभता और अशुभता का कारण हो सकते हैं।

    यदि उनका ठीक प्रकार से प्रयोग न किया जाए या फिर उसे उचित स्थान पर सही तरीके से न रखा जाए तो उसके परिणाम नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। किचन के बर्तनों का सही तरह से प्रयोग न करने पर वे दरिद्रता का भी कारण बन सकती हैं।

    वास्तु के अनुसार किचन में सबसे अधिक प्रयोग आने वाले बर्तनों में तवे का बहुत ज्यादा महत्व होता है। वास्तु के अनुसार तवा और कढ़ाई राहु का प्रतिनिधित्व करने वाले होते हैं। ऐसे में इनका प्रयोग करते समय विशेष ख्याल रखे जाने की जरूरत होती है।

    मसलन, तवे या कढ़ाई को कभी भी जूठा न करें ना ही उस पर जूठी सामग्री रखें। हालांकि किचन में जूठे हाथ से किसी भी बर्तन को नहीं छूना चाहिए और न ही वहां पर जूठीं सामग्री रखना चाहिए। किचन में पवित्रता का पूरा ख्याल रखना बहुत जरूरी होता है। घर के इस कोने में स्वच्छता का जितना ख्याल रखा जाएगा धन आगमन के रास्ते उतने ही आसान होंगे।

    किचन में वास्तु से जुड़े नियम

    रात को खाना बनाने के बाद तवे को हमेशा धो कर रखें। जब तवे का उपयोग न करना हो तो उसे ऐसी जगह पर रखें जहां से वह आम नजरों में न आ पाए। कहने का तात्पर्य उसे खुले में रखने की बजाए किसी आलमारी या दराज में रखें।

    -तवे या कढ़ाई को कभी भी उल्टा नहीं रखना चाहिए क्योकि तवा को उल्टा रखने से घर में राहु की नकारत्मक उर्जा का संचार होता है।

    -तवा और कढ़ाई को जहां पर खाना बनाते हों, उसकी दाईं ओर रखें क्योकि किचन के दाई ओर मां अन्नपूर्णा का स्थान होता है।

    -कभी भी भूलकर गर्म तवे पर पानी न डालें। वास्तु के अनुसार ऐसा करने पर घर में मुसीबतें आती हैं।

  • BCCI कर रहा है पैर की नो बॉल पकडऩे के लिए यत्न, किया था कोलकाता डे-नाइट टेस्ट में लागू

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    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) इस बात को लेकर काफी प्रयास कर रहा है कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के अगले सीजन में मैदानी अंपायरों को पैर (फ्रंट फुट) की नो बॉल को पकडऩे में तकनीक की मदद मिले। यह प्रयास भारत और बांग्लादेश के बीच कोलकाता में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में लागू किया गया था लेकिन बोर्ड इसे अब आगे भी जारी रखने के बारे में विचार कर रहा है। बोर्ड रन आउट कैमरे का इस्तेमाल नो बॉल को पकडऩे के लिए भी कर रहा है ताकि अंपायर गेंदबाज की कमी को पकड़ सकें।

    आईपीएल के बीते संस्करण में इस बात को लेकर काफी बवाल हुआ था क्योंकि कई मैचों में अंपायर गेंदबाज की पैर की नो बॉल को पकड़ नहीं पाए थे। सिर्फ आईपीएल में ही नहीं बल्कि पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच ब्रिस्बेन में खेले गए पहले टेस्ट मैच में भी यह विवाद रहा था क्योंकि दूसरे दिन के दो सत्र में 21 नो बॉल पकड़ में नहीं आ सकी थीं।

    बीसीसीआई के संयुक्त सचिव जयेश जॉर्ज ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि यह नए तरीकों को लागू करने की बात है और नए अधिकारी इस बात को सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे कि तकनीक का पूरा इस्तेमाल किया जा सके। उन्होंने कहा कि हां, यह काम अभी प्रगति पर है। आईपीएल हमेशा प्रयोग के लिए रहा है। हमारी कोशिश है कि आईपीएल का हर सीजन नई तकनीक को लेकर आए और खेल को आगे ले जाने में मदद करे। अहम बात यह है कि जब तकनीक इस तरह के मुद्दे सुलझाने में मदद कर सकती है तो फिर खिलाड़ी क्यों भुगते?

    संयुक्त सचिव ने कहा कि अतीत में हमने देखा है कि पैर की नो बॉल एक विवादित मुद्दा रहा है। मेरा यह मानना है कि तकनीक पैर की नो बॉल को पकडऩे के लिए उपयोग में ली जा सकती है। इसके लिए बड़े पैमाने पर जांच की जरूरत है और हम विंडीज सीरीज में भी यह जारी रखेंगे। उनसे जब पूछा गया कि क्या विंडीज सीरीज को लेकर जो डाटा मिलेगा क्या उस पर आईपीएल की गवर्निंग काउंसिल और बोर्ड के अधिकारी चर्चा करेंगे?

    इस पर जवाब मिला, जब पूरा डाटा आएगा तो मैं अपने साथियों के साथ इस पर चर्चा करूंगा और फिर आगे बढऩे को लेकर विचार करेंगे। तीसरे अंपायर द्वारा जो कैमरा रन आउट की जांच करने के लिए उपयोग में लिया जाता है वही कैमरा नो बॉल की जांच के लिए उपयोग में लिया जाएगा। यह कैमरा एक सेकेंड में 300 फ्रेम को कैद करता है। इन कैमरे को ऑपरेटर अपनी इच्छा के मुताबिक जूम कर सकते हैं।

    यह प्रस्ताव इस महीने की शुरुआत में आईपीएल की गवर्निंग काउंसिल में रखा गया था और काउंसिल के सदस्य ने कहा था, अगर अगले आईपीएल में सभी कुछ अच्छा रहा तो आप नियमित अंपायरों के अलावा नो बॉल को परखने के लिए अलग से अंपायर देख सकते हैं। यह विचार थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन यह मुद्दा आईपीएल की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में उठा था।

  • Bigg Boss 13 : Salman Khan को घरवालों पर आया जबरदस्त गुस्सा, अचानक Bigg Boss का दरवाजा खुलवाया और छह लोगों को कर दिया बाहर

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    मुंबईl बिग बॉस 13 (Bigg Boss 13) में 7 दिसंबर में फिल्म अभिनेता सलमान खान वीकेंड का वार के दौरान कंटेस्टेंट पर जमकर बरसते नजर आएl  क्योंकि उन्होंने सभी घरवालों को आड़े हाथों लेते हुए जमकर लताड़ाl इसमें सलमान खान (Salman Khan) ने इस तरह से सबको डांटा कि सबकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गईl

    यहां तक कि सलमान खान के साथ बाहर बैठे ऑडिएंस ने जब एक बात पर हंस पड़ी तो सलमान ने उन्हें भी डांट कर शांत करा दियाl कुछ इस तरह का माहौल बना कि एपिसोड के शुरुआत के एक घंटे तक कोई कुछ कह नहीं पायाl सलमान ने शुरुआत में रश्मि की समस्याओं पर बात करनी शुरू की. क्योंकि रश्‍मि देसाई ने शो को छोड़ने की बात की थी. इसलिए बात वहीं से शुरू कीl

     

    रश्मि की कंप्लेन सुनते-सुनते बात इतनी बढ़ गई कि सलमान खान के सामने ही पूरा घर लड़ गयाl सलमान बैठे-बैठे सुनते रहे. लेकिन जब घरवालों का लफड़ा खत्म नहीं हुआ तब वे उठे और उन्होंने कहा कि अब वे ये सब देख के फेड-अप हो गए हैं. इसी दौरान जब बात सिद्धार्थ शुक्ला से बात करने की बात हुई तो सलमान ने कहा कि उन्होंने सिद्धार्थ से कई दफा ऐसा ना करने को कहा. लेकिन सिद्धार्थ समझने को तैयार नहीं हैं. सलमान ने सबको एक साथ ‘इडियट्स’ कहाl

    इसके बाद विशाल, विकास पाठक ने लगातार सिद्धार्थ पर आरोप लगाने शुरू कर दिए. ये सब चलता रहा इसके बाद सलमान खान ने खुद अरहान खान का राज खोल दियाl अरहान ने बिग बॉस के घर में रश्मि को प्रपोज किया. कई मर्तबा घर में ही दोनों की शादी की बातें भी हुईंl

     

    इसी बाबत सलमान ने बता दिया कि अरहान शादीशुदा हैं और उन्हें एक बच्चा भी है. ये बात उन्होंने रश्मि को नहीं बताई हैl अगर आप किसी गंभीर रिश्ते की ओर बढ़ रहे हैं तो आपको अपने पुरानी सभी बातें बता देनी चाहिएl इसके बाद सलमान दोनों एक दूसरे से बात‌चीत का मौका दे दियाl.

    लेकिन प्रोमो में दिखाए गए वीडियो के अनुसार जब वे लौटे तो एक बार फिर से उनका दिमाग खराब हो गया. उन्होंने बिग बॉस का दरवाजा खुलवाया और बिग बॉस के घर से ज्यादातर लोगों को निकाल बाहर किया. इनमें सिद्धार्थ शुक्ला, शहनाज गिल, शेफाली जरीवाला, विकास पाठक उर्फ हिन्दुस्तानी भाऊ, आसिम रियाज, विशाल आदित्य सिंह, अरहान खान, हिमांशी खुराना, रश्मि देसाई शामिल हैंl

     

    हालांकि बाद में सलमान ने कहा कि ये मेरी निजी राय है. मैं कलर्स होता, बिग बॉस होता तो यही करता. हमें टॉप 4 कंटेस्टेंट मिल गए हैं. माहिरा, आरती, शेफाली बग्गा और मधुरिमा ही आगे जाएंगे. बाकी दूसरी कंटेस्टेंट आ जाएंगेl

    सलमान खान ने कहा, टीवी ऐसे नहीं चलता है. उनका टीवी से ज्यादा लेना-देना नहीं है, लेकिन वो यहां आकर 10 साल से फंस गए हैं. इसके बाद सलमान खान खुद बिग बॉस के घर चले गएl

  • 22 हजार आतंकी मारे गए 19 साल में , जारी है घुसपैठ 370 हटने के बाद भी, गृह मंत्रालय ने दी जानकारी

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    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने स्वीकार किया है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद भी सीमा पार से आतंकी घुसपैठ की कोशिशें जारी हैं। अगस्त, 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से अब तक घुसपैठ के 84 प्रयास हुए हैं, इस दौरान 59 आतंकियों के सीमा में घुसने की खबर है। लोकसभा में मंगलवार को हुए एक सवाल के जवाब में गृह मंत्रालय ने यह जानकारी दी है। दरअसल, आंध्र प्रदेश की इलुरु सीट से वाईएसआर कांग्रेस सांसद श्रीधर कोटागिरी ने पूछा था कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद नियंत्रण रेखा पार कर भारत में घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों की संख्या कितनी है। उन्होंने यह भी पूछा था कि भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए एवं पकड़े गए आतंकवादियों की संख्या कितनी है?

    लिखित जवाब में गृह मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि वर्ष 1990 से लेकर एक दिसंबर 2019 तक सुरक्षा बलों ने आतंकवादी हिंसा की घटनाओं में संलिप्त 22,527 आतंकवादियों को मार गिराया है। सुरक्षा बलों की प्रभावी निगरानी के कारण वर्ष 2005 से लेकर 31 अक्टूबर, 2019 तक सीमापार से घुसपैठ के प्रयासों के दौरान 1011 आतंकी मारे गए, वहीं 42 आतंकी गिरफ्तार किए गए, जबकि 2253 आतंकवादी खदेड़े गए।

    गृह मंत्रालय ने बताया कि घुसपैठ के प्रयासों को विफल करने के लिए निरंतर डोमिनेशन ऑपरेशन (निरंतर प्रभुत्व कायम रखने) की कार्रवाई की जा रही है। सीमा पर घुसपैठ रोधी मजबूत ग्रिड भी उपलब्ध है।

  • CITIZENSHIP AMENDMENT BILL : शिवसेना ने समर्थन देने पर फंसाया पेंच,देखें राज्यसभा की स्थिति

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    मुंबई। नागरिकता संशोधन विधेयक पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मोदी सरकार पर कई सवाल उठा दिए हैं। महाराष्ट्र मुख्यमंत्री ठाकरे ने कहा कि जब तक चीजें स्पष्ट नहीं होंगी हम बिल (नागरिकता संशोधन विधेयक) का समर्थन नहीं करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि ये भ्रम है कि बीजेपी देश की चिंता करती है। उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई भी नागरिक इस बिल की वजह से डरा हुआ है तो उसका संदेह दूर करना जरूरी है। वे हमारे लोग हैं, उनके सवालों का जवाब देना जरूरी है।
    उद्धव ठाकरे ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक का जो भी विरोध कर रहे हैं, उन सभी को देशद्रोही मानना भ्रम है। शिवसेना ने कहा था कि शरणार्थियों को 25 साल तक वोट करने का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए।

    राज्यसभा में कुल सदस्य 245 हैं, लेकिन पांच सीटें रिक्त हैं, इसके चलते फिलहाल कुल सदस्यों की संख्या 240 हैं। मतलब ये कि अगर सदन के सभी सदस्य मतदान करें तो बहुमत के लिए 121 वोट की जरूरत पड़ेगी।

    राज्यसभा में देखें मोदी सरकार का आंकड़ा….

    नागरिकता संशोधन विधेयक पर लोकसभा में जिन दलों ने समर्थन किया था। इस इसाब से इनकी संख्या 119 है। इनमें भाजपा के 83, बीजेडी के 7, एआइएडीएमके के 11, अकाली दल के 3,जेडीयू के 6 वाईएसआर कांग्रेस के 2, एलजेपी के 1, आरपीआई के 1 और 4 नामित राज्यसभा सदस्य हैं।

    विपक्ष के पास 100 सदस्य…

    नागरिकता संशोधन विधेयक पर विपक्ष का जिस तरह से रुख अपना रखा है। इस इसाब से राज्यसभा में इस विधेयक को रोकने में बहुत मजबूत स्थिति में नजर नहीं आ रहा है। राज्यसभा में कांग्रेस के 46, टीएमसी के 13, सपा के 9, वामदल के 6 और डीएमके के 5 और आरजेडी, एनसीपी और बसपा के 4-4 सदस्य हैं। इसके अलावा टीडीपी के 2, मुस्लिम लीग के 1 पीडीपी के 2, जेडीएस के 1, केरल कांग्रेस के 1 और टीआरएस के 6 सदस्य हैं। इस प्रकार  विपक्ष के पास 100 सदस्य होते हैं।

    इन 21 सदस्यों पर रहेगी विशेष नजर…

    सत्ता पक्ष और विपक्ष के साथ खड़े दलों के अलावा राज्यसभा में 21 सदस्य बच रहे हैं। इनके रुख पर भी बहुत कुछ निर्भर करता हैं। इनमें शिवसेना के 3, असम गण परिषद के 1, बोडोलैंड पीपुल फ्रंट के 1, एमडीएमके 1, नागा पीपुल्स के 1, पीएमके के 1 और सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के 1 राज्यसभा सदस्य हैं। इसके अलावा 6 राज्यसभा सदस्य निर्दलीय और अन्य के हैं।

  • कोरियोग्राफर Remo D’Souza मुश्किल में, 5 करोड़ ठगी का आरोप

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    गाजियाबाद। बॉलीवुड के कोरियोग्राफर और डायरेक्टर रेमो डिसूजा आरोप पर है कि रेमो डिसूजा ने सत्येंद्र त्यागी के पैसे से फिल्म का निर्माण कराया और भरोसा दिया था कि 1 साल के अंदर वह इससे डबल देंगे। निर्धारित समय में जब पैसा वापस नहीं मिला तो सत्येंद्र ने रेमो डिसूजा के खिलाफ सिहानी गेट थाने में 2016 में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था।

    इस मामले की सुनवाई जिला अदालत में लंबित है। गौरतलब है कि जिला अदालत की पेशी से लगातार गैर-हाजिर चल रहे रेमो डिसूजा के खिलाफ पिछले दिनों कोर्ट ने गैर जमानती वॉरंट जारी किया था।

    रेमो डिसूजा गिरफ्तारी से बचने के लिए कोरियोग्राफर रेमो डिसूजा हाई कोर्ट पहुंच गए हैं। उन्होंने जमानत की गुहार लगाई है।

    अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने अपना पासपोर्ट गाजियाबाद पुलिस को जमा करवाया है। गौरतलब है कि रेमो के खिलाफ गाजियाबाद के सिहानीगेट थाने में धोखाधड़ी सहित अन्य संगीन धाराओं में मामला दर्ज है।

    पुलिस के अनुसार, रेमो डिसूजा ने गाजियाबाद के राजनगर निवासी सत्येंद्र त्यागी के साथ साल 2013 में ‘अमर मस्ट डाई’ फिल्म बनाई थी। इसमें जरीन खान और राजीव खंडेलवाल मुख्य भूमिका में थे। आरोप है कि रेमो डिसूजा ने सत्येंद्र त्यागी के पैसे से फिल्म का निर्माण कराया और भरोसा दिया था कि 1 साल के अंदर वह इससे डबल देंगे।

    जब सत्येंद्र ने उनसे पैसे मांगने शुरू किए तो 13 दिसंबर 2016 को उसे प्रसाध पुजारी नाम के एक शख्स से धमकी दिलवाई गई। पुजारी ने खुद को अंडरवर्ल्ड से बताया. उसने कहा कि अगर वो दोबारा रेमो डिसूजा से पैसे मांगता है तो अपने पैसे से हाथ धोना पड़ सकता है। यही नहीं इस शख्स ने धमकी दी अगर वो मुंबई आता है तो उसके ठीक नहीं होगा। इसी के बाद सत्येंद्र त्यागी ने गाजियाबाद के सिहानीगेट थाना में शिकायत दर्ज कराई।

  • UP : एक-दूसरे पर लगा रहे माता-पिता तीन दिन की नवजात की हत्या का आरोप

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    पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में शुक्रवार की रात को तीन दिन की एक नवजात की मौत हो गई। अब उसकी मौत का आरोप माता-पिता एक दूसरे पर लगा रहे हैं। यह घटना सुनगढ़ी पुलिस थाना क्षेत्र में ईदगाह के पास कांशी राम आवास विकास कॉलोनी की है। रिपोट्र्स के अनुसार, पड़ोसियों ने शुक्रवार की रात बच्ची के माता-पिता को एक-दूसरे पर चिल्लाते हुए सुना, जब वे वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा की बच्ची की मौत हो चुकी थी।

    एक पड़ोसी ने पुलिस को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आनी अभी बाकी है। बच्ची के पिता मोहम्मद शाकिर के अनुसार, शुक्रवार शाम वह बाजार गया था और जब वापस आया तो देखा कि बच्ची मर चुकी थी। उसकी पत्नी फूल बी शव के पास बैठी थी। पति ने आरोप लगाया कि फूल बी मानसिक तौर पर बीमार है और उसने बेटी का गला घोंटकर उसे मार डाला।

    वहीं फूल बी ने आरोप को खारिज करते हुए पति पर बच्ची की हत्या का आरोप लगाया। एसएचओ राजेश कुमार ने कहा कि पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है और रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस बीच पड़ोसी बबलू ने पत्रकारों से कहा कि उसने दंपत्ति के सामने बच्ची को गोद लेने का प्रस्ताव रखा था, क्योंकि उसके माता-पिता गरीब थे और वे बच्ची का ध्यान रखने में असमर्थ थे।

    शाकिर रिक्शा चालक है और शराब भी पीता है। वह रोज अपनी कमाई का ज्यादातर हिस्सा शराब पर खर्च करता था। बबलू को बच्ची देने के एवज में शाकिर ने 15000 रुपए की मांग की थी, ताकि इस पैसे से वह अपनी मानसिक तौर पर बीमार पत्नी का इलाज कर सके। हालांकि शाकिर की मांग के बाद में बबलू ने बच्ची को गोद लेने का विचार त्याग दिया।

  • अहम भूमिका निभा रही है तकनीक खेलों में बदलाव में : डॉ. सेबहट्टीन डेविसोग्लुय

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    जयपुर। सोशल मीडिया, आग्मेंटेड रियल्टी, स्पोर्ट्स मीडिया के विकास में टेक्नोलॉजी खेलों के भविष्य को बदल रही है। टेक्नोलॉजी खेलों की परफॉर्मेंस मेजरमेंट, टिकटिंग, मार्केटिंग, इकोनॉमिक मैनेजमेंट सहित सभी पहलुओं में धीरे-धीरे प्रवेश कर रही है। लीग क्रियेशन, वीयरेबल स्पोर्टिंग इक्युपमेंट, इंटेलीजेंट टिकटिंग एवं ब्रॉडकास्टिंग, ई-स्पोर्ट्स व फैंटंसी स्पोर्ट्स, स्पोर्ट्स टूरिज्म और स्पोर्ट्स फेस्टिवल जैसे ट्रेंड्स दर्शाने के लिए कुछ नाम हैं। यह कहना था इलाजिग, तुर्की के स्पोर्ट्स साइंसेज की फैकल्टी, डॉ. सेबहट्टीन डेविसोग्लुय का। वे मणिपाल यूनिवर्सिटी, जयपुर (एमयूजे) में ‘फिजीकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स साइंस‘ विषय पर आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस (आईसीपीईएसएस) के दूसरे दिन संबोधित कर रहे थे। वे कॉन्फ्रेंस के ‘प्रिलिम्नरी सेशन-2‘ के मुख्य वक्ता थे। 11 जनवरी तक चलने वाली यह कॉन्फ्रेंस एमयूजे के डिपार्टमेंट ऑफ आर्ट्स (फिजीकल एजुकेशन) और स्कूल ऑफ ह्यूमेनिटीज की ओर से आयोजित की जा रही है।

    प्रोफेशनल एथेलीट्स की मेंटल ट्रेनिंग की आवश्यकता के बारे में बात करते हुए ओ. पी. जिंदल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर, संजीव पी. साहनी ने कहा कि एथेलीट्स को अपने दृष्टिकोण व मानसिक कौशल में सुधार करने तथा खेलों में प्रदर्शन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए मानसिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है। एथलीट्स में तेजी से मानसिक दबाव बढ़ रहा हैं। यह मानसिक दबाव एथलीट्स की व्यक्तिगत अथवा व्यावसायिक जीवन में मीडिया के फोकस, परफॉर्मेंस से स्वयं को अलग करने में असमर्थता, बाहरी परिस्थितियों से प्रदर्शन के प्रभावित होने को स्वीकार करने में असमर्थता जैसे कई कारणों की वजह से उत्पन्न हो रहा है। स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट्स का चयन अंतिम समय में नहीं होना चाहिए, बल्कि इन्हें प्रतिभाओं की पहचान से लेकर प्रबंधन तक एथेलीट्स के साथ मिलकर करना चाहिए।

    खेलों में प्रतिभा की पहचान के लिए विभिन्न मॉडलों की जानकारी देते हुए लक्ष्मीबाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजुकेशन, ग्वालियर के प्रोफेसर व डीन (स्टूडेंट्स वेलफेयर), प्रो. जे. पी. वर्मा ने प्रतिभागियों को ‘टैलेंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम इन स्पोर्ट्स (टीआईएसएस) एप्लिकेशन के दो प्रोजेक्ट्स के बारे में बताया। एक प्रोजेक्ट ‘स्पोर्ट्स टैलेंट की पहचान करने‘ में मदद करता है, जबकि दूसरा प्रोजेक्ट ‘विशिष्ट खेल की प्रतिभा की पहचानने’ का कार्य करता है। खिलाड़ी के विशिष्ट व आनुवंशिक मापदंडों का उपयोग करते हुए इसके टेस्ट व्यक्ति की खेल में क्षमता की पहचान करने में बेंचमार्क, सहजता या निष्पक्षता प्रदान करते हैं।

    इस सेशन की अध्यक्षता डॉ. गुरदीप सिंह द्वारा की गई और सह-अध्यक्षता प्रो. राजेश वर्मा ने की। दोपहर में एक्सरसाइज प्रिस्क्रिप्शन, फिजीकल फिटनेस एंड डोपिंग, स्पोर्ट्स ट्रेनिंग, स्पोर्ट्स बायोमैकेनिक्स व स्पोर्ट्स पेडगॉजी, योगा, मेंटल हैल्थ एंड स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन, टेक्निकल इनोवेशन व एंटरेप्रेन्योरशिप इन स्पोर्ट्स जैसे विषयों पर चार पैरेलल सेशन आयोजित किए गए। इसके बाद पोस्टर प्रेजेंटेशन सेशन और फिर विभिन्न पैरेलल सेशन आयोजित किए गए। ये सेशन एजिंग एंड एक्सरसाइज फिजियोलॉजी, एक्सरसाइज फिजियोलॉजी, डोपिंग एंड इंटरनेशनल रिलेशंस, सोश्यलाइजेशन, इंडस्ट्रियलाइजेशन एंड स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इमर्जिंग ट्रेंड्ज एंड चैलेंजेज इन फिजीकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स साइंसेज और इमर्जिंग ट्रेंड्ज एंड चैलेंजेज इन फिजीकल एजुकेशन एंड फिजीकल लिटरेसी जैसे विषयों पर रहे।

    इस कॉन्फ्रेंस में अमेरिका, तुर्की, ब्रिटेन, स्लोवाकिया, बांग्लादेश सहित 15 देशों के करीब 500 प्रतिभागी शामिल हुए हैं। कॉन्फ्रेंस के तीनों दिन प्रिलिमनेरी व टेक्निकल सैशन आयोजित किए जा रहे हैं। कॉन्फ्रेंस के उप-विषयों में एक्सरसाइज प्रिस्क्रिप्शंस एंड फिजीकल फिटनेस, मेंटल हैल्थ, योगा एंड रिसर्च पेडगॉगी, स्पोर्ट्स मेडिसिन, एजिंग तथा एक्सरसाइज फिजियोलॉजी शामिल हैं।

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