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  • MAHARASHTRA : शिवसेना का बीजेपी पर एक के बाद एक तंज, संजय राउत ने कहा कि …

    MAHARASHTRA : शिवसेना का बीजेपी पर एक के बाद एक तंज, संजय राउत ने कहा कि …

    महाराष्ट्र। महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 9 नवंबर को खत्म होने जा रहा है। अभी भी यह असमंजस बरकरार बना हुआ है कि अगली सरकार किसकी होगी। मुख्यमंत्री पद को लेेकर भाजपा-शिवसेना में तकरार बनी हुई है। इसी बीच आज भाजपा का एक दल प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील की अगुवाई में राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी से मिला। इनके साथ होगा मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस का दिया हुआ एक संदेश जो वो राज्यपाल के साथ साझा करेंगे।

    अपडेट…

    • शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि शिवसेना अब भी सीएम पद की मांग पर कायम है। गवर्नर से मिलने के बाद बीजेपी नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस के जवाब में राउत ने कहा कि बीजेपी यदि सरकार नहीं बना रही है तो साफ है कि उसके पास बहुमत नहीं है। वे राष्ट्रपति शासन लगाने की मंशा रखते हैं। यदि वे सरकार नहीं बना पा रहे हैं तो फिर बताएं कि हमारे पास बहुमत नहीं है। यदि वे राज्यपाल से मिलकर आए हैं तो उन्हें 145 विधायकों की सूची उन्हें सौंपनी चाहिए थी।

    -राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी से मिलने के बाद भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष चंदक्रांत पाटिल ने कहा कि महाराष्ट्र चुनाव में जनता ने महायुति की सरकार बनाने का बहुमत दिया है। अर्थात भाजपा और शिवसेना को बहुमत दिया है। जनता चाहती है कि भाजपा व शिवसेना मिलकर सरकार बनाएं। राज्यपाल को वर्तमान स्थिति से अवगत कराया गया है।
    -मुंबई में राजभवन में बीजेपी का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल कोश्यारी भगत से मिलने के लिए पहुंच गया है।

    -मुंबई में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी के विधायकों के साथ बैठक के बाद बड़ा बयान देते हुए कहा कि जो पहले तय हुआ था, हमें वह चाहिए। उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं से मेरी कोई भी सीधी बात नहीं हुई है, हमारे पास सभी विकल्प हैं, लेकिन हम नहीं चाहते हैं कि उन पर हम विचार करें। उद्धव ठाकरे के इस बयान से साफ हो गया है कि सीएम पद पर फिलहाल वह कोई समझौता नहीं करने जा रही है।

    • शिवसेना के विधायकों को रंगशारदा होटल ले जाया जा रहा है। विधायकों के तोड़-फोड़ के भय से ये कदम उठाया गया है।
    • शिवसेना के विधायकों की विधायकों की बैठक अब खत्म हो गई है। विधायकों को हिदायत दी गई है कि बैठक के बारे में बाहर किसी को भी जानकारी नहीं दें।

    -महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि जल्द ही कोई फैसला होगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस नेतृत्व में सरकार बनाई जानी चाहिए। गडकरी ने कहा कि आरएसएस और मोहन भागवत का इससे कोई संबंध नहीं है। महाराष्ट्र में अगले मुख्यमंत्री के खुद के नाम पर नितिन गडकरी ने कहा कि मेरे लिए महाराष्ट्र लौटने का कोई सवाल नहीं है, मैं दिल्ली में काम करना जारी रखूंगा।

    -रूठी शिवसेना को मानाने के लिए भाजपा ने इमोशनल कार्ड खेल दिया है। एक बार फिर बीजेपी की ओर से शिवसेना से साथ आने की अपील की गई है। बीजेपी नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि हम एक मजबूत और स्थिर सरकार चलाना चाहते हैं, हम शिवसेना के साथ सरकार बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उद्धव जी ने स्वयं कहा था कि देवेंद्र फडणवीस जी भी शिव सैनिक हैं।

    • सूत्रों ने बताया कि भाजपा आज सरकार बनाने को लेकर दावा पेश कर सकते हैं। वहीं शिवसेना के विधायकों की बैठक मातोश्री शुरू हो गई है।

    -शिवसेना नेता संजय राउत ने आज कहा है कि हम बयानबाजी में विश्वास नहीं करते हैं। इसके पास बहुमत है वह सरकार बनाएगा। मुख्यमंत्री तो शिवसेना का होगा। मेरी कभी कोई आकांक्षा नहीं थी। उन्होंने कहा कि मातोश्री में आज शिवसेना विधायकों की बैठक होगी, इस बैठक में उद्धव ठाकरे आगे की रणनीति बताएंगे।

    उद्धव ठाकरे ने आज शिवसेना के विधायकों की बैठक बुलाई है। शिवसेना विधायकों की बैठक से पहले पार्टी के मुखपत्र सामना में एक बार फिर से बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा है कि भाजपाा की खुशखबरी मिलने वाले दावे पर सामना ने सवाल पूछा है कि आखिर कब आएगी ये सरकार और ये महायुति किसकी होगी।

    शिवसेना ने लिखा है कि बीजेपी के मौजूदा मंत्रियों को अपनी सरकारी गाड़ी, घोड़ा, बंगला जाने की चिंता बनी हुई है। शिवसेना अतिउत्साही बीजेपी से बार-बार यही पूछ रही है कि कहां से आएगा 145 का आंकड़ा।

  • अभावग्रस्त घोषित राज्य के 12 हजार 943 गांव

    अभावग्रस्त घोषित राज्य के 12 हजार 943 गांव

    जयपुर। राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर राज्य के 18 जिलों के 12 हजार 943 गांवो को खरीफ फसल, 2019 में बाढ़ से खराबा होने पर अभावग्रस्त घोषित किया है।
    अधिसूचना के अनुसार अजमेर जिले के 154, बांसवाड़ा के 1 हजार 532, भीलवाड़ा के 748, बारां के 1 हजार 85 एवं बूंदी जिले के 689 गांव अभावग्रस्त घोषित किये गए है।
    इसी प्रकार चितौड़गड़ जिले के 1 हजार 306, धौलपुर के 57, डूंगरपुर के 1 हजार 11, झालावाड़ के 1 हजार 622, जोधपुर के 7, कोटा के 887 व करौली जिले के 20 गांवों को अभावग्रस्त घोषित किया गया।
    नागौर जिले के 49, पाली के 170, प्रतापगढ़ के 1 हजार 13, सवाईमाधोपुर के 17, टोंक के 580 व उदयपुर जिले के 1 हजार 996 गांवो को अभावग्रस्त घोषित किया गया।
    अधिसूचना के अनुसार अभावग्रस्त गावों में यह प्रावधान 31 दिसम्बर, 2019 तक लागू रहेंगे।

  • MAHARASHTRA: आज राज्यपाल से मिलेंगे भाजपा के नेता, बीजेपी पर शिवसेना ने फिर बोला हमला

    MAHARASHTRA: आज राज्यपाल से मिलेंगे भाजपा के नेता, बीजेपी पर शिवसेना ने फिर बोला हमला

    महाराष्ट्र। महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 9 नवंबर को खत्म होने जा रहा है। अभी भी यह असमंजस बरकरार बना हुआ है कि अगली सरकार किसकी होगी। मुख्यमंत्री पद को लेेकर भाजपा-शिवसेना में तकरार बनी हुई है। इसी बीच आज भाजपा का एक दल प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील की अगुवाई में राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी से मौजूदा हालात पर मुलाकात करेंगे। इनके साथ होगा मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस का दिया हुआ एक संदेश जो वो राज्यपाल के साथ साझा करेंगे।
    शिवसेना विधायकों की बैठक से पहले पार्टी के मुखपत्र सामना में एक बार फिर से बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा है कि भाजपाा की खुशखबरी मिलने वाले दावे पर सामना ने सवाल पूछा है कि आखिर कब आएगी ये सरकार और ये महायुति किसकी होगी।

    शिवसेना ने लिखा है कि बीजेपी के मौजूदा मंत्रियों को अपनी सरकारी गाड़ी, घोड़ा, बंगला जाने की चिंता बनी हुई है। शिवसेना अतिउत्साही बीजेपी से बार-बार यही पूछ रही है कि कहां से आएगा 145 का आंकड़ा।

  • MAHARASHTRA LIVE : उद्धव ठाकरे बोले- सभी विकल्प हैं खुले, जो पहले तय हुआ था, चाहिए वही

    MAHARASHTRA LIVE : उद्धव ठाकरे बोले- सभी विकल्प हैं खुले, जो पहले तय हुआ था, चाहिए वही

    महाराष्ट्र। महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 9 नवंबर को खत्म होने जा रहा है। अभी भी यह असमंजस बरकरार बना हुआ है कि अगली सरकार किसकी होगी। मुख्यमंत्री पद को लेेकर भाजपा-शिवसेना में तकरार बनी हुई है। इसी बीच आज भाजपा का एक दल प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील की अगुवाई में राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी से मौजूदा हालात पर मुलाकात करेंगे। इनके साथ होगा मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस का दिया हुआ एक संदेश जो वो राज्यपाल के साथ साझा करेंगे।

    LIVE अपडेट…

    -मुंबई में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी के विधायकों के साथ बैठक के बाद बड़ा बयान देते हुए कहा कि जो पहले तय हुआ था, हमें वह चाहिए। उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं से मेरी कोई भी सीधी बात नहीं हुई है, हमारे पास सभी विकल्प हैं, लेकिन हम नहीं चाहते हैं कि उन पर हम विचार करें। उद्धव ठाकरे के इस बयान से साफ हो गया है कि सीएम पद पर फिलहाल वह कोई समझौता नहीं करने जा रही है।

    • शिवसेना के विधायकों को रंगशारदा होटल ले जाया जा रहा है। विधायकों के तोड़-फोड़ के भय से ये कदम उठाया गया है।
    • शिवसेना के विधायकों की विधायकों की बैठक अब खत्म हो गई है। विधायकों को हिदायत दी गई है कि बैठक के बारे में बाहर किसी को भी जानकारी नहीं दें।

    -महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि जल्द ही कोई फैसला होगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस नेतृत्व में सरकार बनाई जानी चाहिए। गडकरी ने कहा कि आरएसएस और मोहन भागवत का इससे कोई संबंध नहीं है। महाराष्ट्र में अगले मुख्यमंत्री के खुद के नाम पर नितिन गडकरी ने कहा कि मेरे लिए महाराष्ट्र लौटने का कोई सवाल नहीं है, मैं दिल्ली में काम करना जारी रखूंगा।

    -रूठी शिवसेना को मानाने के लिए भाजपा ने इमोशनल कार्ड खेल दिया है। एक बार फिर बीजेपी की ओर से शिवसेना से साथ आने की अपील की गई है। बीजेपी नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि हम एक मजबूत और स्थिर सरकार चलाना चाहते हैं, हम शिवसेना के साथ सरकार बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उद्धव जी ने स्वयं कहा था कि देवेंद्र फडणवीस जी भी शिव सैनिक हैं।

    • सूत्रों ने बताया कि भाजपा आज सरकार बनाने को लेकर दावा पेश कर सकते हैं। वहीं शिवसेना के विधायकों की बैठक मातोश्री शुरू हो गई है।

    -शिवसेना नेता संजय राउत ने आज कहा है कि हम बयानबाजी में विश्वास नहीं करते हैं। इसके पास बहुमत है वह सरकार बनाएगा। मुख्यमंत्री तो शिवसेना का होगा। मेरी कभी कोई आकांक्षा नहीं थी। उन्होंने कहा कि मातोश्री में आज शिवसेना विधायकों की बैठक होगी, इस बैठक में उद्धव ठाकरे आगे की रणनीति बताएंगे।

    उद्धव ठाकरे ने आज शिवसेना के विधायकों की बैठक बुलाई है। शिवसेना विधायकों की बैठक से पहले पार्टी के मुखपत्र सामना में एक बार फिर से बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा है कि भाजपाा की खुशखबरी मिलने वाले दावे पर सामना ने सवाल पूछा है कि आखिर कब आएगी ये सरकार और ये महायुति किसकी होगी।

    शिवसेना ने लिखा है कि बीजेपी के मौजूदा मंत्रियों को अपनी सरकारी गाड़ी, घोड़ा, बंगला जाने की चिंता बनी हुई है। शिवसेना अतिउत्साही बीजेपी से बार-बार यही पूछ रही है कि कहां से आएगा 145 का आंकड़ा।

  • बजट घोषणाओं की प्रगति की जलदाय विभाग के प्रमुख सचिव ने की समीक्षा

    बजट घोषणाओं की प्रगति की जलदाय विभाग के प्रमुख सचिव ने की समीक्षा

    जयपुर । प्रदेश के जलदाय विभाग के प्रमुख सचिव संदीप वर्मा ने बुधवार को आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2019-2020 के बजट में प्रदेश में पेयजल योजनाओं के सम्बंध में की गई घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा की। जलदाय विभाग की 16 बजट घोषणाओं में से 9 घोषणाओं के क्रियान्वयन के लिए वित्त विभाग की स्वीकृति आवश्यक थी, जबकि 7 घोषणाओं की क्रियान्वित के लिए विभागीय स्तर पर पालना की जानी थी।

    प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि प्रदेश के 1250 फ्लोराईड प्रभावित गांवों में डी-फलोरिडेशन यूनिट लगाने, 2000 स्थानों पर सौर ऊर्जा नलकूप बनाने एवं 390 बड़े गांव, जिनकी आबादी 4000 से अधिक है, इनमें पाईप योजना लागू करने की बजट घोषणाओं के लिए अतिरिक्त बजट की सैद्धान्तिक सहमति वित्त विभाग द्वारा गत 17 अक्टूबर को जारी की गई है। इसके अतिरिक्त नागौर जिले की तीन शहरी योजनाओं मेड़ता, डेगाना व लाडनू के लिए भी अतिरिक्त बजट की सहमति वित्त विभाग द्वारा गत 04 नवम्बर को जारी कर दी गई है। उन्होंने बताया कि इन सभी घोषणाओं की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियाँ जलदाय विभाग द्वारा जारी कर निविदाएं आमंत्रित करने की कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गई है।

    बैठक में जानकारी दी गई कि विभाग द्वारा आठ योजनाओं यथा चम्बल से अलवर पानी लाने, ईसरदा बांध से दौसा, सवाईमाधोपुर को पेयजल आपूर्ति, नागौर की शेष रही 244 ढ़ाणियों की पेयजल योजना, बीकानेर शहर व 32 गांवों की पेयजल व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण, चम्बल-भीलवाड़ा योजना से हिण्डौली के शेष रहे 284 गांवों को पेयजल, जोधपुर-दांतीवाड़ा से सोजत के 10 गांवों को पेयजल, 114 गांवों को कुम्भाराम लिफ्ट से पेयजल की डीपीआर बनाने की स्वीकृतियाँ जारी कर डीपीआर बनाने का कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है।

    इसके अलावा जोधपुर शहर व जोधपुर तथा बाड़मेर के ग्रामीण क्षेत्रों को राजीव गांधी लिफ्ट परियोजना के तृतीय चरण से पेयजल आपूर्ति के लिए 1454 करोड़ रूपये का बजट एडीबी से वित्त पोषण करवाकर, क्रियान्वित करने की बजट घोषणा की गई थी। इस सम्बंध में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गत अगस्त माह में आयोजित बैठक में दिए गए निर्देशों की पालना में प्रस्ताव वित्त विभाग को ऑनलाईन भारत सरकार को अग्रेषित करने के लिए प्रस्तुत कर दिए गए। वित्त विभाग द्वारा गत 30 अक्टूबर को एडीबी के स्थान पर द्विपक्षीय बाह्य सहायता यथा जायका, एएफडी. इत्यादि से ऋण प्राप्त करने का सुझाव दिया गया। बैठक में प्रमुख शासन सचिव श्री वर्मा ने इस सम्बंध में मुख्य अभियन्ता को वित्त विभाग की राय अनुसार कार्यवाही करने करने के निर्देश दिये।

  • लगाए जाएंगे मध्य प्रदेश में काजू के पेड़, सुधरेगी किसानों की माली हालत

    लगाए जाएंगे मध्य प्रदेश में काजू के पेड़, सुधरेगी किसानों की माली हालत

    भोपाल। मध्य प्रदेश में किसानों की माली हालत सुधारने की दिशा में चल रही कोशिशों में सरकार नवाचारों पर जोर दे रही है और उसी के तहत बंजर पड़ी भूमि पर ‘काजू की खेती’ को प्रोत्साहित किया जा रहा है और यह किसानों को भी रास आने लगा है, तभी तो किसानों की जिंदगी में खुशियों के रंग भरने के अभियान को शुरुआती सफलता भी मिलती नजर आने लगी है। राज्य में कभी सूखा, कभी अतिवृष्टि और कभी अधिक उत्पादकता किसानों के लिए समस्या लेकर आती है। यह स्थिति किसान के लिए नुकसान का सौदा बन जाती है। यही कारण है कि किसानों को एक तरफ सरकार तमाम तरह की रियायत दे रही है तो दूसरी ओर खेती-पशुपालन के क्षेत्र में नवाचारों को प्रोत्साहित कर रही है। काजू की खेती भी उनमें से एक है।

    उद्यानिकी विभाग के अधिकारी बताते है कि काजू और कोको विकास निदेशालय, कोच्चि (केरल) ने राज्य के बैतूल, छिन्दवाड़ा, बालाघाट और सिवनी जिले की जलवायु को काजू की खेती के लिए उपयुक्त पाया है। इसी के चलते इन जिलों में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना ‘रफ्तार’ में इस वर्ष काजू क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम को लागू किया गया है।

    इन जिलों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और सामान्य वर्ग के किसानों ने कुल 1,430 हेक्टेयर क्षेत्र में काजू के एक लाख 60 हजार पौधों का रोपण किया है। इसके अलावा एक लाख 26 हजार पौधे और उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आधिकारिक ब्योरे के अनुसार, अब तक बैतूल में 1,000, छिंदवाड़ा में 30, बालाघाट और सिवनी में 200-200 किसानों ने अपनी जमीन पर काजू के पेड़ रोपे हैं।

    औसतन सभी किसानों ने एक-एक हेक्टेयर क्षेत्र में काजू के पौधे रोपे हैं। एक हेक्टेयर क्षेत्र में 200 पेड़ रोपे गए हैं, प्रति पेड़ के बीच की दूरी सात मीटर की होती है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो काजू का एक पेड़ औसतन 15 किलो फल का उत्पादन करता है।

    इस तरह एक हेक्टेयर में 200 पेड़ से कुल 3000 किलो काजू पैदा हो सकता है। बाजार में काजू की कीमत 600 रुपये भी आकी जाए तो औसत तौर पर एक हेक्टेयर से किसान को 18 लाख रुपये प्रति वर्ष की आमदनी हो सकती है।

    राज्य के कृषि मंत्री सचिन यादव का कहना है कि सरकार की ओर से किसानों के जीवन में खुशहाली लाने के प्रयास जारी हैं, किसानों का दो लाख तक का कर्ज माफ किया गया है, बिजली बिल आधा कर दिया गया, कृषि यंत्रों पर सब्सिडी 50 प्रतिशत की गई है। इसी तरह किसानों को नगदी फसलों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। काजू की खेती भी उसी दिशा में बढ़ाया गया एक कदम है।

  • JHARKHAND : BJP कर रही खास तैयारी 28 आदिवासी सीटों पर जीत के लिए, जानें…

    JHARKHAND : BJP कर रही खास तैयारी 28 आदिवासी सीटों पर जीत के लिए, जानें…

    नई दिल्ली। झारखंड में आदिवासी बहुल 28 सीटों पर जीत के लिए भाजपा खास तैयारी में जुटी है। पांच महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव में सामान्य सीटों की तुलना में आरक्षित पांच सीटों पर हुई जीत में वोटों के कम अंतर को देखते हुए भाजपा विधानसभा चुनाव में सजग है।

    इसके लिए पार्टी की ओर से आदिवासियों के बीच जाकर उनके लिए संचालित योजनाएं गिनाई जा रही हैं। पहली बार राज्य में रघुबर दास के रूप में गैर आदिवासी मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर कहीं इस चुनाव में आदिवासी भाजपा के खिलाफ न जाएं, इसके लिए पार्टी ने आदिवासी नेताओं को सब कुछ दुरुस्त करने की जिम्मेदारी दी है।

    प्रमुख आदिवासी चेहरों में शुमार केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा और प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा और उनकी टीम की ओर से आदिवासी सीटों पर जीत के लिए रणनीति बनाई जा रही।

    मुख्यमंत्री रघुबर दास पूर्व में अपनी जनआशीर्वाद यात्रा की शुरुआत संथाल क्षेत्र से कर आदिवासियों को रिझाने की कोशिश कर चुके हैं। आदिवासी क्षेत्रों में जाकर भाजपा कार्यकर्ता जाकर बता रहे कि रघुबर सरकार में भूमिहीन आदिवासियों को सरकार ने वनाधिकार पट्टे देने शुरू किए, ताकि राज्य में एक भी आदिवासी भूमिहीन न रहे।

    और भी कई योजनाएं आदिवासियों के लिए लागू की गईं। मसलन, आदिम जनजाति समूह को मुख्यधारा में लाने के लिए परिवारों के एक विवाहित सदस्य को छह सौ रुपये पेंशन की व्यवस्था की गई। जनजातीय बटालियन का भी गठन हुआ है। 50 प्रतिशत से अधिक आदिवासी जनसंख्या वाले क्षेत्र में एकलव्य स्कूल भी खोलने पर रघुबर सरकार ध्यान दे रही।

    राज्य में करीब 26 प्रतिशत आदिवासी मतदाता हैं। कुल 81 में से 28 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। संख्या के लिहाज से आदिवासी चुनावों में किंगमेकर माने जाते हैं। 2014 के विधानसभा में कुल 81 में से अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 28 विधानसभा सीटों में 13 सीटें भाजपा को मिलीं थीं, इतनी ही सीटें झारखंड मुक्ति मोर्चा को मिली थी। जबकि दो सीटों पर अन्य उम्मीदवार जीते थे।

    पिछली बार राज्य में कुल 37 सीटें जीतकर बहुमत से चूक जाने वाली भाजपा की बाद में झाविमो के छह विधायकों के विलय के बाद बहुमत से सरकार बनी थी। ऐसे में भाजपा आदिवासी बेल्ट की 28 सीटों में अधिक से अधिक जीतने की कोशिश में है।

  • CHHATTISGARH: CRPF का जवान नक्सलियों से मुठभेड़ में शहीद

    CHHATTISGARH: CRPF का जवान नक्सलियों से मुठभेड़ में शहीद

    रायपुर । सुरक्षा बलों की एक संयुक्त टीम और नक्सलियों के बीच गुरुवार तड़के मुठभेड़ में केंद्रीय रिजर्व सुरक्षा बल (सीआरपीफ) के एक जवान की मौत हो गई। अर्धसैनिक बल ने यह जानकारी दी। मुठभेड़ तड़के लगभग 3.50 बजे हुई जब सीआरपीएफ की कोबरा यूनिट के साथ राज्य पुलिस तलाशी अभियान चला रही थी। मुठभेड़ में सीआरपीएफ कान्सटेबल की गोली लगने से मौत हो गई। इस दौरान कुछ नक्सली भी मारे गए हैं, लेकिन उनकी संख्या की अभी पुष्टि नहीं हुई थी।

  • JHARKHAND : बिखर गया महागठबंधनचुनाव से पहले ही! जीतनराम मांझी ने पकड़ी अलग राह

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    पटना। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से मुकाबला करने के लिए झारखंड में विपक्षी दलों के एकजुट होने की संभावना क्षीण होती दिख रही है। झारखंड में झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) के प्रमुख बाबूलाल मरांडी के अकेले चुनाव लडऩे की घोषणा के बाद महागठबंधन के घटक दलों में शामिल बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) ने भी झारखंड में अकेले चुनाव लडऩे की घोषणा कर दी है।

    हम ने अगले साल होने वाले बिहार विधानसभा में भी अकेले चुनाव लडऩे की बात कही है। पार्टी अध्यक्ष जीतनराम मांझी ने आरोप लगाया है, मेरे बार-बार कहने के बावजूद ग्रैंड अलायंस (महागठबंधन) में कोऑर्डिनेशन कमेटी का गठन नहीं किया जा सका। इस वजह से, गठबंधन सहयोगियों के बीच समन्वय की कमी है। ऐसे में अकेले चुनाव लडऩा बेहतर होगा।

    उन्होंने शुक्रवार को महागठबंधन से अलग होने की घोषणा करते हुए कहा कि पार्टी का अस्तित्व बचाने के लिए ऐसा फैसला लेना पड़ा है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि महागठबंधन में रहने वालों को भ्रम है कि वे हैं, तभी महागठबंधन और अन्य पार्टियां हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नौ अगस्त को भी उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से राय मांगी थी और गुरुवार को पार्टी की बुलाई गई बैठक में यही राय बनी है।

    हम के प्रवक्ता दानिश रिजवान ने शुक्रवार को आईएएनएस को बताया कि अब हम किसी भी गठबंधन की बैसाखी के सहारे चुनाव में नहीं उतरने जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने झारखंड का चुनाव स्वतंत्र रूप से लडऩे का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी किन सीटों पर चुनाव लड़ेगी और कौन-कौन उम्मीदवार होंगे, 10 नवंबर तक इसकी घोषणा कर दी जाएगी।

    झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी ने आगे निर्णय लेने के लिए प्रधान महासचिव डॉ. संतोष कुमार सुमन को अधिकृत किया है। हम ने गुरुवार को सदस्यता अभियान की समीक्षा के लिए पार्टी की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में 30 दिसंबर तक बूथ स्तर तक समिति बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

    इस साल हुए लोकसभा चुनाव में महागठबंधन को मिली करारी हार के बाद से ही महागठबंधन में दरार दिखने लगी थी। मांझी ने इसके पहले भी हार के लिए राजद नेता तेजस्वी यादव के कमजोर नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया था। गौरतलब है कि गुरुवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य संजय पासवान ने भी मांझी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद पासवान ने हालांकि छठ का प्रसाद खाने और खिालाने के लिए आने की बात कही थी। मांझी की पार्टी महागठबंधन से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल थी। हम ने लोकसभा चुनाव में महागठबंधन का दामन थामा।

    इसके बाद हाल में ही पांच विधानसभा क्षेत्रों में हुए उपचुनाव में मांझी की पार्टी ने महागठबंधन से बगावत करते हुए एक सीट पर अपनी पार्टी के प्रत्याशी को उतारा था। राजद हालांकि अभी भी महागठबंधन को एकजुट बता रहा है। राजद के वरिष्ठ नेता और विधायक विजय प्रकाश ने कहा कि महागठबंधन एकजुट है।

    उन्होंने कहा कि मांझी अभी भी महागठबंधन में शामिल हैं। मांझी के बयानों के बारे में ध्यान दिलाए जाने पर प्रकाश ने कहा, मांझीजी ऐसे बयान देते रहते हैं। वे महागठबंधन के साथ हैं। कुछ दिन इंतजार कीजिए। उल्लेखनीय है कि झारखंड में भी पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की पार्टी झाविमो ने अकेले चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा कर दी है।

  • JHARKHAND ASSEMBLY ELECTION: चुनौती बना बिहार के बड़े दलों के लिए झारखंड में खोई प्रतिष्ठा वापस पाना

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    रांची। बिहार की राजनीतिक में धाक जमाने वाले दलों को झारखंड के विधानसभा चुनाव में खोई प्रतिष्ठा वापस पाना चुनौती बना हुआ है। हालांकि, इन दलों के नेता झारखंड में अपनी खोई जमीन तलाशने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं।

    बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) हो या बिहार में सबसे ज्यादा विधायकों वाली पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद), दोनों जहां अपने खोई जमीन पाने के लिए छटपटा रही हैं, वहीं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) अपने जातीय समीकरण का जोड़-घटाव कर झारखंड में खाता खोलने के लिए व्यग्र दिख रही है।

    वैसे, ये सभी दल झारखंड में भी अपनी ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के सहारे उन जातीय वर्ग में पैठ बनाने की कोशिश में हैं, जिससे वे अब तक बिहार में सफलता पाते रहे हैं।

    उल्लेखनीय है कि राजद और जद (यू) को झारखंड के मतदाताओं ने पिछले चुनाव में पूरी तरह नकार दिया था। वर्ष 2014 में हुए चुनाव में जद (यू) 11 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, जबकि राजद ने 19 और लोजपा ने एक सीट पर अपने उम्मीदवार उतारे थे।

    ऐसा नहीं कि राजद और जद (यू) को यहां के मतदाताओं ने पसंद नहीं किया है। झारखंड बनने के बाद पहली बार 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में जद (यू) के छह और राजद के सात प्रत्याशी विजयी हुए थे।

    वर्ष 2009 में हुए चुनाव में जद (यू) ने 14 उम्मीदवार उतारे थे, जिसमें से दो जबकि राजद ने पांच सीटों पर विजय दर्ज कर अपनी वजूद बचा ली थी।

    लोजपा झारखंड में अब तक खाता नहीं खोल पाई है। दीगर बात है कि प्रत्येक चुनाव में उसके प्रत्याशी भाग्य आजमाते रहे हैं।

    इस चुनाव में जद (यू) ने जहां अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की है, वहीं राजद विपक्षी दलों के महागठबंधन के साथ अब तक खड़ी नजर आ रही है। लोजपा सत्ताधारी भाजपा के साथ चुनाव मैदान में उतरने के मूड में है।

    जद (यू) पिछले कई महीने से अपने पुराने वोटरों को गोलबंदी करने के प्रयास में लगा है। जद (यू) की नजर राज्य में दर्जनभर से ज्यादा सीटों पर है। जद (यू) की मुख्य नजर पलामू, दक्षिणी छोटानागपुर और उत्तरी छोटानागपुर की उन सीटों पर है, जहां जद (यू) का परंपरागत आधार रहा है। जद (यू) अपने वरिष्ठ नेता आऱ सी़ पी़ सिंह के नेतृत्व में राज्यभर के चुनिंदा विधानसभा में कार्यकर्ता सम्मेलन सह जनभावना यात्रा निकालकर अपने वोटबैंक को सहेजने की कोशिश कर चुकी है।

    जद (यू) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य प्रवीण सिंह कहते हैं कि जद (यू) पूरे दमखम के साथ इस चुनाव में उतर रही है। उन्होंने चुनौती के संबंध में पूछे जाने पर कहा कि कोई भी चुनाव चुनौती होती है।

    इधर, लोजपा भी झारखंड में अपने चुनावी अभियान का आगाज कर चुका है। 20 सितंबर को झारखंड के हुसैनाबाद में लोजपा के अध्यक्ष चिराग पासवान ने एक जनसभा को संबोधित किया था। लोजपा ने राजग में सीटों की दावेदारी की है। लोजपा की दावेदारी पांच से छह सीटों पर है। लोजपा के नेता का कहना है कि लोजपा राजग में हैं और अपनी सीटों पर दावेदारी की है।

    राजद ने भी महागठबंधन के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी पूरी कर ली है। बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राजद 12 सीटों पर अपना दावा ठोंक चुकी है, मगर अब तक महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    पलामू प्रमंडल और संथाल की कुछ सीटों पर राजद की पुरानी पैठ रही है। इन क्षेत्रों में राजद के उम्मीदवार जीतते भी रहे हैं।

    बहरहाल, झारखंड चुनाव में बिहार के इन दलों द्वारा खोई जमीन तलाशने की कोशिश कितनी सफल होती है, यह तो चुनाव परिणाम से ही पता चल सकेगा, लेकिन लोजपा के लिए इस राज्य में खाता खोलना मुख्य चुनौती बना हुआ है।