Category: state-news

  • तिहाड़ से फरलो पर दो हफ्तों के लिए रिहा होंगे दुष्यंत चौटाला के पिता अजय चौटाला

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    चंडीगढ/ दिल्ली। जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला के पिता अजय चौटाला आज तिहाड़ जेल से दो हफ्ते के लिए फरलो (जेल से छुट्टी) मिल गया है। दुष्यंत चौटाला के पिता अजय चौटाला को दो हफ्ते की बाहर रहने की स्वीकृति मिल गई है। आज शाम या कल सुबह जेल से रिहा होंगे। दो दिन पहले 24 अक्टूबर को हरियाणा विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद दुष्यंत चौटाला ने अजय चौटाला को बड़ी खुशखबरी दी और उनके 10 विधायक चुनकर आए।

    तिहाड जेल के डीजीपी ने बताया कि जननायक जनता पार्टी के नेता दुष्यंत चौटाला के पिता अजय चौटाला आज शाम या कल सुबह जेल से बाहर होंगे। अजय चौटाला को 2 हफ्ते के लिए जेल से आजाद किया जा रहा है।

    फरलो क्या होता है….
    वे मुजरिम जो आधी से ज्यादा जेल काट चुका होता है , उसे साल में 4 हफ्ते के लिए फरलो दिया जाता है। फरलो मुजरिम को सामाजिक या पारिवारिक संबंध कायम रखने के लिए दिया जाता है। इनकी अर्जी डीजी जेल के पास भेजी जाती है और इसे गृह विभाग के पास भेजा जाता है और उस पर 12 हफ्ते में निर्णय होता है।

    एक बार में दो हफ्ते के लिए फरलो दिया जा सकता है और उसे दो हफ्ते के लिए एक्सटेंशन दिया जा सकता है। फरलो मुजरिम का अधिकार होता है, जबकि पैरोल अधिकार के तौर पर नहीं मांगा जा सकता। पैरोल के दौरान मुजरिम जितने दिन भी जेल से बाहर होता है, उतनी अतिरिक्त सजा उसे काटनी होती है। फरलो के दौरान मिली रिहाई सजा में ही शामिल होती है।
    टीचर भर्ती घोटाले में दोषी पाए गए….
    अजय चौटाला हरियाणा में जूनियर बेसिक ट्रेंड (JBT) टीचर भर्ती घोटाला मामले में जेल गए। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री  ओमप्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला को सीबीआई के स्पेशल कोर्ट ने 10-10 साल की सजा सुनाई थी। इस घोटाले में कुल 55 लोगों को कोर्ट ने दोषी करार दिया था।

  • महाराष्ट्र : शिवसेना के साथ सरकार बनाने में फंसा पेच, भाजपा की बुधवार को बुलाई बैठक

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    नई दिल्ली। महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद को लेकर शिवसेना के साथ पेच फंसने पर भाजपा ने अब जरा देरी से, 30 अक्टूबर को विधानमंडल दल की बैठक बुलाई है। सूत्रों का कहना है कि अगर नतीजों के तुरंत बाद सरकार में पदों को लेकर शिवसेना से बातचीत सहमति तक पहुंच जाती तो हरियाणा की तरह महाराष्ट्र में भी शनिवार को ही विधायक दल की बैठक कर रविवार तक शपथ ग्रहण समारोह हो जाता। मगर भाजपा और शिवसेना के बीच ‘ढाई-ढाई मुख्यमंत्री’ के फॉर्मूले पर सहमति न बन पाने के कारण भाजपा को चुनाव के नतीजे आने के छह दिन बाद विधायक दल की बैठक बुलाने को मजबूर होना पड़ा है।

    भाजपा के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने शनिवार को मीडिया को बताया कि पार्टी ने 30 अक्टूबर को विधान भवन में विधायक दल की बैठक बुलाई है, जिसमें सभी 105 नव निर्वाचित विधायक अपना नेता चुनेंगे।

    उन्होंने कहा कि 24 अक्टूबर को नतीजे आने के दिन भाजपा के नई दिल्ली मुख्यालय में हुई संसदीय बोर्ड की बैठक में देवेंद्र फड़णवीस के नाम पर मुहर लग चुकी है, इसलिए बुधवार को होने वाली बैठक में उनका नेता चुना जाना तय है।

    इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा और शिवसेना ने गठबंधन कर क्रमश: 164 और 124 सीटों पर चुनाव लड़ा था। घोषित परिणाम के अनुसार, भाजपा को 105 और शिवसेना को 56 सीटें मिली हैं।

    साल 2014 के विधानसभा चुनाव की तुलना में भाजपा को इस बार 17 सीटें कम मिली हैं, जबकि शिवसेना को सात सीटों का नुकसान हुआ है। राज्य में बहुमत का आंकड़ा 145 है, ऐसे में शिवसेना से मदद लिए बिना भाजपा के लिए सरकार बनाना मुश्किल है।

    भाजपा की कम सीटें आने के बाद उसकी शिवसेना पर निर्भरता को देखते हुए शिवसेना आक्रामक होकर मोल-भाव पर उतर आई है। उसका कहना है कि लोकसभा चुनाव के दौरान 50-50 का फॉर्मूला तय हुआ था, ऐसे में ढाई साल भाजपा का और ढाई साल शिवसेना का मुख्यमंत्री बनना चाहिए। भाजपा इस फॉर्मूले पर सहमत नहीं है। यही वजह है कि भाजपा राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करने में देरी कर रही है।

    भाजपा सूत्र बताते हैं कि विधानमंडल दल की बैठक इसलिए 30 अक्टूबर को रखी गई है, ताकि इस बीच शिवसेना से बातचीत कर फॉर्मूले पर फंसे पेच को सुलझाने का वक्त मिल जाए।

  • MP : दीपावली का तोहफा पौने दो लाख अध्यापकों को, कांग्रेस ने किया था वादा

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    भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने एक लाख 84 हजार अध्यापकों को दीपावली का तोहफा दिया है, इन अध्यापकों को सातवें वेतनमान का लाभ दिया जाएगा। इसके लिए शनिवार को आदेश जारी कर दिए गए हैं। वहीं अध्यापकों के नेताओं ने वेतनमान का लाभ मिलने में समय लगने की बात कही है। राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री प्रभुराम चौधरी ने शनिवार को अध्यापकों को सातवां वेतनमान दिए जाने का ऐलान किया, इसके आदेश भी जारी किए गए।

    जारी आदेश के मुताबिक, अध्यापकों को सातवें वेतनमान का लाभ एक जुलाई 2018 से मिलेगा। कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में अध्यापकों को यह लाभ देने का वादा किया था। अध्यापकों को अक्टूबर के माह के वेतन में यह लाभ मिलेगा, जिसका भुगतान नवंबर में किया जाना है।

    बताया गया है कि इस नए वेतनमान के चलते सहायक अध्यापकों के वेतन में पांच, अध्यापक के वेतन में छह से सात और वरिष्ठ अध्यापक के वेतन में सात से आठ हजार तक का इजाफा होगा। इससे सरकार पर हर साल लगभग दो हजार करोड़ का अतिरिक्त भार आएगा। सरकार के इस फैसले से राज्य के लगभग एक लाख 84 हजार अध्यापकों को सातवें वेतनमान का लाभ मिलेगा।

    वहीं अध्यापक संघ के अध्यक्ष जगदीश यादव का कहना है कि आदेश तो सातवां वेतनमान देने के जारी हो चुके हैं, मगर इसका भुगतान जल्दी हो पाएगा ऐसा संभव नहीं लगता, क्योंकि अध्यापकों को एंप्लाई कोड जारी नहीं किए गए है, जिससे भुगतान में समय लगेगा। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि अध्यापकों को वचनपत्र भरकर देना होगा, सेवा शर्तो के अनुसार वचनपत्र देने पर ही अध्यापकों को सातवें वेतनमान का लाभ मिल सकेगा।

  • HARYANA : लगातार दूसरी बार ली मनोहरलाल खट्टर ने मुख्यमंत्री पद की शपथ

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    चंडीगढ़। मनोहर लाल खट्टर ने रविवार को दूसरे कार्यकाल के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। विधानसभा की 40 सीटें पाने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बहुमत न मिलने पर पहली बार गठबंधन सरकार बनाई है।

    भाजपा ने 10 सीटें पाने वाली जननायक जनता पार्टी (जजपा) के साथ गठबंधन किया है। जजपा प्रमुख दुष्यंत चौटाला ने खट्टर सरकार में उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 65 वर्षीय खट्टर दूसरे कार्यकाल में भी 1 नवंबर 1966 को बने राज्य की सरकार के मुखिया होंगे।

    भाजपा विधायक दल की शनिवार को हुई बैठक में खट्टर को नेता चुना गया। वह हरियाणा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं। खट्टर ने शपथ लेने से पहले मीडिया से कहा, “मेरी सरकार पारदर्शी होगी।”

    शपथ ग्रहण समारोह में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के प्रमुख और पांच बार पंजाब के मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल अपने बेटे सांसद सुखबीर बादल के साथ शामिल हुए। शिअद का भाजपा की प्रतिद्वंद्वी पार्टी इंडियन नेशनल लोक दल (इनलो) के साथ गठबंधन है।

    शनिवार को आयोजित बैठक में खट्टर को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया था। इसके बाद खट्टर और जेजेपी अध्यक्ष दुष्यंत चौटाला ने राज्यपाल से मिलकर मिलकर सरकार बनाने का प्रस्ताव सौंपा। खट्टर ने बताया कि वे जेजेपी के 10 और 7 निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बना रहे हैं। वे विवादित विधायक गोपाल कांडा का समर्थन नहीं लेंगे।

  • भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने दी दीपावली पर्व पर शुभकामनाएं

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    जयपुर। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने दीपावली के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी है। पूनिया ने कहा कि दीपावली खुशियों का त्यौहार है। दीपोत्सव के अवसर पर सभी अपने जीवन में खुशियाँ, सुख-समृद्धिपायें, ऐसी ईश्वर से कामना करता हूँ। रोशनी का पर्व दीपावली अंधकार पर प्रकाश एवं बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। दीपों का यह पर्व प्रदेशवासियों में सुख और समृद्धि लाए। उन्होंने दीपावली के अवसर पर सभी प्रदेशवासी स्वच्छता का संकल्प लेकर अपने आस-पास के वातावरण को स्वच्छ एवं प्रदूषण रहित बनायें।
    पूनिया ने कहा कि भारतीय सनातन धर्म का पर्व है दीपावली, वो केवल हिन्दुस्तान तक ही सीमित नहीं है, अपितु आज पूरी दुनिया में मनाई जाती है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मनोभावना के अनुरूप देश के प्रधानमंत्री ने उज्ज्वला योजना, अन्तोद्य योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से गरीबों के घरों में दीया जलाया है और एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिला कि हमारे प्रधानमंत्री ने पिछली दीपावली हमारे सैनिकों के साथ मनाई। साथ ही साथ इस दीपावली को उनका संदेश स्पष्ट है कि राजनीति अब नारों की नहीं हो, सरोकारों की हो। इसलिए इस दीपावली का उद्ेश्य भारतीय सनातन के परमपरा के साथ-साथ उस गरीब कल्याण का भी है, जहां रोशनी के दीये की अभी तक इन्तेजार थी।

    उन्होंने कहा कि 70 वर्षों की जड़ता को तोड़के उन्होंने विद्युतीकरण करके हजारों घर, गांवों को रोशनी दी है एवं ऐसे ही उज्ज्वला योजना के माध्यम से कई सारी महिलाओं के आंशु पौंछे। उन्होंने कहा कि जो नये भारत की संकल्पना है इस दिपावली पर और ज्यादा मजबूत हो एवं भारत की आजादी के 75वें वर्ष 2022 की दीपावली और जानदार, शानदार हो ऐसी मैं मंगलकामना करता हूँ।पूनियां ने प्रदेश के सभी निवासियों की खुशहाली की कामना की एवं भारतीय जनता पार्टी के परिवार के सभी लोगों को सुख-समृद्धि और शांति के साथ यह दीप पर्व मनाये ऐसी उन्होंने कामना की।

  • जेजेपी छोड़ी बर्खास्त बीएसएफ कांस्टेबल ने

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    चंडीगढ़। बर्खास्त बीएसएफ कांस्टेबल तेज बहादुर यादव ने जननायक जनता पार्टी(जेजेपी) से इस्तीफा दे दिया है। तेज बहादुर ने कहा कि पार्टी के प्रमुख दुष्यंत चौटाला ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को समर्थन देकर मतदाताओं के साथ धोखा किया है। तेज बहादुर यादव ने हरियाणा विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के खिलाफ चुनाव लड़ा था और हार गए थे।

    जेजेपी से इस्तीफा देने के कारण बताते हुए तेज बहादुर यादव ने कहा, “जेजेपी ने भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ा और 10 सीटें जीतीं। दुष्यंत जिन्होंने चुनावों के दौरान भाजपा की आलोचना की, अब उन्होंने भाजपा के साथ हाथ मिलाकर हरियाणा के लोगों को धोखा दिया है।”

    खट्टर ने करनाल में कांग्रेस के उम्मीदवार तरलोचन सिंह को 45,188 वोटों से हराया। यादव 3,175 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

    जेजेपी ने हरियाणा विधानसभा सीटों में 10 सीटों पर जीत हासिल की है। उसने भाजपा को समर्थन किया है।

    तेज बहादुर यादव को 2017 में खाने की गुणवत्ता की शिकायत करते हुए एक वीडियो पोस्ट करने के बाद बीएसएफ से बर्खास्त कर दिया गया था।

  • महालक्ष्मी पूजन हुआ भाजपा प्रदेश कार्यालय में

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    जयपुर। भाजपा प्रदेश कार्यालय में ‘‘महालक्ष्मी पूजन’’ का कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें प्रत्येक वर्ष की भाँति पूर्ण विधि विधान से प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने सपत्निक महालक्ष्मी का पूजन कर अपनों से बड़ों का आशीर्वाद लिया व उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं को प्रसाद खिलाकर दीपोत्सव की शुभकामनाएं दी।

    ‘‘महालक्ष्मी पूजन’’ से पूर्व भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में ‘‘मन की बात’’ का पाँचवा कार्यक्रम प्रसारित हुआ, जिसे देशवासियों ने रेडियो, टेलीविजन एवं नमो ऐप के माध्यम से सुना।

     

  • भाजपा-जेजेपी गठबंधन की बादल ने की सराहना

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    चंडीगढ़।पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) व दुष्यंत चौटाला की अगुवाई वाले जननायक जनता पार्टी (जेजेपी ) द्वारा हरियाणा के जनता के जनादेश का सम्मान करते हुए हाथ मिलाने के कदम की सराहना की। भाजपा-जेजेपी गठबंधन को शुभकामनाएं देते हुए अकाली दल के संरक्षक व पांच बार के पूर्व मुख्यमंत्री बादल ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि दोनों पार्टियां गरीबों के कल्याण व सामाजिक सौहार्द के लिए काम करेंगी।

    बादल, भाजपा-जेजेपी की नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में रविवार दोपहर बाद चंडीगढ़ में भाग ले रहे हैं। इस सरकार के मुखिया मनोहर लाल खट्टर होंगे।

  • लगभग 122 विधायक हमारे पास महाराष्ट्र में, मुख्यमंत्री हमारा था और रहेगा : भाजपा

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    मुंबई। महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ सरकार बनाने में पेंच फंसने पर भी भाजपा बैकफुट पर आने को तैयार नहीं है। सभी निर्दलीय विधायकों को अपने साथ खड़ा कर भाजपा, शिवसेना पर दबाव बनाने में जुटी है। ठाकरे घराने से किसी सदस्य के तौर पर पहली बार चुनाव लडक़र आदित्य ठाकरे के जीतने के बाद मुख्यमंत्री पद पर शिवसेना की निगाह गडऩे पर भाजपा ने साफ कर दिया है कि यह पद उसे नहीं मिलने वाला।

    भाजपा का कहना है कि उसे 15 निर्दलीयों का भी समर्थन मिला है। छोटे दलों के कुछ और भी विधायक संपर्क में हैं। इस प्रकार वह 2014 की तरह ही संख्याबल के आधार पर मजबूत स्थिति में है। कुल मिलाकर भाजपा, शिवसेना को संदेश देने की कोशिश में है कि वह इस चुनाव में किसी तरह से कमजोर नहीं हुई है।

    भाजपा की महाराष्ट्र इकाई की प्रवक्ता श्वेता शालिनी ने सोमवार को आईएएनएस से कहा, भाजपा के साथ 15 निर्दलीय विधायक खड़े हैं। ये निर्दलीय भाजपा के ही नेता रहे हैं, जो गठबंधन आदि वजहों से टिकट न मिलने के कारण निर्दलीय लडक़र जीते हैं। 2014 की तरह ही पार्टी के पास अब भी 122 विधायकों का समर्थन है।

    बता दें कि मीरा भायंदर सीट से भाजपा का टिकट न मिलने पर निर्दल लडक़र जीतीं गीता जैन, बरसी सीट से राजेंद्र राउत, अमरावती जिले की बडनेरा सीट से जीतने वाले रवि राणा ने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा कर दी है। भाजपा का कहना है कि इन तीनों की तरह अन्य निर्दलीय विधायकों ने खुद भाजपा से संपर्क कर समर्थन देने की बात कही है, क्योंकि उनका नाता भाजपा से ही रहा है। नतीजे आने के दिन 24 अक्टूबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी 15 निर्दलीयों के संपर्क में होने की बात कही थी।

    शिवसेना के मुख्यमंत्री पद को लेकर अड़ जाने के सवाल पर भाजपा प्रवक्ता श्वेता शालिनी ने कहा, मुख्यमंत्री भाजपा का था, है और आगे भी रहेगा। मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा का रुख साफ है। शिवसेना भी इसे जानती है। दरअसल, राजग को बहुमत मिलने के बाद भी सरकार बनाने का पेंच तब फंस गया, जब 24 अक्टूबर को चुनाव नतीजे आने के दिन प्रेस कांफ्रेंस कर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने लोकसभा चुनाव के दौरान तय हुए 50-50 फॉर्मूले की बात उठा दी थी। उन्होंने संकेत दिए कि शिवसेना ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद चाहती है। सीएम कौन होगा? प्रेस कांफ्रेंस में इस सवाल पर उन्होंने कहा था, यह बेहद अहम सवाल है।

    चुनाव से पूर्व शिवसेना के मुखपत्र सामना में छपे उद्धव ठाकरे ने अपने इंटरव्यू में भी कहा था कि वे शिवसैनिक को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं। जिसके बाद से भाजपा-शिवसेना में सरकार बनाने को लेकर अब तक पेंच फंसा हुआ है। सोमवार को दोनों दलों के नेताओं ने राज्यपाल से अलग-अलग भेंट भी की।

    इससे माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री और सरकार में पदों को लेकर बातचीत सुलझ नहीं सकी है। भाजपा प्रवक्ता श्वेता शालिनी ने कहा, लोकसभा चुनाव के दौरान जिस 50-50 फॉर्मूले की बात शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे कह रहे हैं, उसमें बहुत-सी बातें हो सकतीं हैं। चुनाव के दौरान 50-50 प्रतिशत सीटों पर लडऩे की बात भी तो हो सकती है। इसका मतलब ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने से नहीं लगाया जा सकता।

  • कोई बयान देना उचित नहीं अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले : कल्याण सिंह

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    अलीगढ़। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने सोमवार को यहां कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई रिटायरमेंट से पहले अयोध्या विवाद पर फैसला देंगे और उससे पहले इस मुद्दे पर किसी भी पक्ष की तरफ से कोई बयान दिया जाना उचित नहीं है।

    कल्याण सिंह ने यहां पर पत्रकारों से बातचीत में कहा, राम मंदिर को लेकर सभी सुनवाई पूरी हो चुकी है। अब निर्णय में ज्यादा समय नहीं लगेगा, क्योंकि भारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे रहे हैं और उससे पहले ही वे राम मंदिर मामले पर निर्णय सुनाएंगे।

    अब क्या निर्णय देंगे यह तो तभी पता चलेगा, आज इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। कल्याण ने कहा, मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि सभी को सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का इंतजार करना चाहिए और किसी भी पक्ष की ओर से उससे पहले कोई भी बयान दिया जाना उचित नहीं है।

    राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह ने कहा है कि अयोध्या में विवादित स्थल के मसले पर अदालत के निर्णय का इंतजार किया जाना चाहिए। ज्ञात हो कि 40 दिनों तक चली सुनवाई के बाद पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट नवंबर के दूसरे सप्ताह तक इस मामले में अपना फैसला सुना सकता है।