Category: state-news

  • हरियाणा कांग्रेस को लगा चुनाव से पहले झटका, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर ने छोड़ी पार्टी

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    चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस को आज बड़ा झटका लगा है। टिकट बंटवारे को लेकर नाराज चल रहे पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर (Ashok Tanwar) ने पार्टी छोड़ दी है।

    पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष तंवर शनिवार को ट्वीट कर लिखा कि पार्टी कार्यकर्ताओं से लंबे समय तक विचार-विमर्श के बाद मैंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का निर्णय किया है। उन्होंने यह भी लिखा कि उनके इस्तीफे की वजह कांग्रेसी और जनता अच्छी तरह से जानते हैं। आपको पता है कि तंवर ने प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पर पुराने लोगों को नजरअंदाज कर नए लोगों को टिकट देने का आरोप लगाया था। तंवर ने यह भी आरोप लगाया था कि सोहना विधानसभा का टिकट पांच करोड़ में बेचा गया है।

    आपको बताते जाए कि अशोक तंवर की काफी दिनों से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से तनातनी चल रही थी। हाल में अशोक तंवर से प्रदेश की कमान छीनकर कुमारी शैलजा को दी गई है। हरियाणा में बीच चुनाव के बीच अशोक तंवर का इस्तीफा कांग्रेस के लिए बड़े झटके के रूप देखा जा रहा है।

  • दुर्घटनाग्रस्त तेलंगाना में ट्रेनी विमान, दो पायलटों की मौत

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    विकाराबाद। तेलंगाना के विकाराबाद जिले (Vikarabad)के सुल्तानपुर में रविवार को एक विमान हादसा हो गया है। इस हादसे में दो पायलटों की मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि यह एक ट्रेनर विमान था। मौके पर पहुंची टीम ने राहत और बचाव कार्य प्रारंभ कर दिए हैं।

    मिली जानकारी के अनुसार, एक पायलट की पहचान प्रकाश विशाल के रूप में हुई है। दूसरी पायलट महिला थी। इसकी पहचान अभी नहीं हो सकी है। बताया जाता है कि विशाल ट्रेनी पायलट था। ट्रेनी विमान विकाराबाद जिले के सुल्तानपुर गांव के उपर से निकल रहा था इस दौरान हादसा का शिकार हो गया।

    विमान का मलबा कुछ दूरी में फैले खेतों में गिर गया है। मलबा जिस खेत में गिरा है, उस खेत मेें फसल भी लगी थी। हादसे की सूचना पाकर मौके पर राहत और बचाव कार्य की टीम पहुंच गई है। हादसे के कारणों का पता नहीं लग पाया है।

    आपको बताते जाए कि पिछले दिनों मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भी भारतीय वायु सेना का मिग 21 लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में विमान में सवार दोनों पायलट बाल-बाल बच गए थे।

  • MAHARAHSTRA: अज्ञात लोगों ने किया भाजपा नेता के परिवार पर हमला, 5 की हत्या

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    जलगांव। जिले के भुसवल शहर में भारतीय जनता पार्टी(BJP) के नगर सेवक रविंद्र खरात के परिवार पर अज्ञात लोगों ने अंधाधुंध गोलियों चलाई और चाकू से भी हमले किए गए। इस हमले में 5 लोगों की मौत हो गई है। इस घटना के बाद पूरा भुसावल में सनसनी फैल गई। पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने इस हत्याकांड को आपसी रंजीश बताया है।

    मिली जानकारी के अनुसार, रविंद्र खरात भुसावल शहर स्थित समता नगर परिसर में अपने घर के बाहर बैठे थे । इसी दौरान दो आरोपियों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां चलना प्रारंभ कर दी । यह हादसा रविवार रात करीब 9 बजे हुआ है।

    गोलीबारी की आवाज सुनकर उनके भाई सुनील बाबू राव बाहर आए। हमलावरों ने उन पर भी गोली चला दी। सुनील खरात जान बचाने के लिए बगल वाले घर में घुस गए, वहां पर भी हमलावर उनका पीछा करते हुए पहुंच गए। हमलावरों ने चाकू से सुनील खरात पर बुरी तरह से हमला किया और उनका गला काट दिया। उनकी वहीं पर मौत हो गई।

    हमलावरों ने बाद में रविंद्र खरात के दोनों बेटे रोहित और प्रेम सागर के साथ उनके एक दोस्त पर भी चाकू से हमला बोल दिया। इस के बाद बदमाश फरार हो गए। इस घटना में दो व्यक्तियों की तत्काल घटनास्थल पर ही मौत हो गई। तीनों को हमले के तत्काल बाद जलगांव सिविल अस्पताल में एडमिट कराने ले जाया गया, लेकिन उनकी रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
    इस घटना में मृतक रविंद्र की पत्नी भी घायल हो गई। उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस घटना के आधे घंटे के बाद जलगांव के पुलिस विभाग ने 3 लोगों को हिरासत में लिया है। घटना के समय हाथापाई होने से दो आरोपी भी जख्मी हो गए हैं। भुसावल शहर के साथ पूरे जिले में बहुत खलबली मची है। पुलिस अधीक्षक पंजाबराव उगले ने बताया कि इस घटना के बाद भुसावल शहर में माहौल तनावपूर्ण बने हुए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

  • मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर सवाल उठाने वाले विधायक बैठा दिए हैं घर

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    चड़ीगढ़। ढाई साल पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के खिलाफ अभियान चलाने वाले सात विधायकों को भाजपा ने इस बार घर बैठा दिया है। विरोधियों के टिकट कटवा कर खट्टर ने साबित कर दिया है कि हरियाणा में पार्टी के भीतर उन्हें किसी तरह की कोई चुनौती नहीं है. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह यह पहले ही साफ़ कर चुके हैं कि पार्टी के फिर से सत्ता में आने की सूरत में राज्य की बागडोर फिर से खट्टर के ही हाथों में होगी।

    जिन विधायकों ने खट्टर की कार्यशैली को लेकर विरोध का झंडा उठाया था, इस बार उनकी टिकट काट दी गई हैं। हालांकि, असंतुष्टों ने खुद को विरोधी कहलाने के बजाए ‘सुधारक’ बताते हुए कहा था कि पार्टी के हित में आलाकमान का ध्यान आकृष्ट करने को मुख्यमंत्री की खिलाफत नहीं माना जाना चाहिए। बावजूद इसके उन सभी विधायकों को पार्टी ने टिकट देने से इनकार कर दिया।

    रेवाड़ी के विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास, गुरुग्राम के विधायक उमेश अग्रवाल, मुलाना की विधायक संतोष चौहान सारवान, अटेली की विधायक संतोष यादव, पटौदी की विधायक बिमला चौधरी और कोसली के विधायक विक्रम यादव उस सूची में शामिल हैं, जिनके टिकट काट दिए गए हैं. इस अभियान में पर्दे के पीछे उद्योग मंत्री विपुल गोयल की भूमिका भी संदेहास्पद मानी गई और उन्हें भी फरीदाबाद से टिकट नहीं दिया गया. करनाल के भाजपा सांसद संजय भाटिया, जिन्हें मुख्यमंत्री खट्टर का नजदीक माना जाता है, उन्होंने पानीपत की विधायक रोहिता रेवड़ी का टिकट कटवा कर प्रमोद विज को मैदान में उतरने का मौका दिया है।

    ‘सुधारक ग्रुप’ का गठन कर नाराज विधायकों ने खट्टर के विरुद्ध अपना अभियान शुरु किया था। तब मामला इतना बढ़ गया था कि भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को न केवल इन विधायकों को साथ लेकर मुख्यमंत्री के साथ बैठक करनी पड़ी थी, बल्कि पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने भी खट्टर को तलब कर लिया था। नाराज विधायकों का आरोप था कि मुख्यमंत्री उनकी अनदेखी करते हैं. इस दौरान विधायक उमेश अग्रवाल की तरफ से विधानसभा में भी ऐसे मुद्दे उठाये गए थे, जिससे मुख्यमंत्री को सदन में असहज स्थिति का सामना करना पड़ा था।

    हालात शांत होने तक तब खट्टर ने बड़े धैर्य का परिचय दिया था. उन्होंने कहा था, कोई ख़ास बात नहीं है। घर का मामला है, आपसी बातचीत से सुलझा लिया जाएगा।’ लेकिन अब विधानसभा चुनावों में उन्होंने उन में से किसी भी विधायकों को टिकट नहीं लेने दी है, जो समय-समय पर उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े करते रहे हैं। यह पार्टी के लिए नए चुना कर आने वाले विधायकों के लिए भी एक चेतावनी है।

  • करोड़ों युवाओं के दिलों पर राज करने वाले पंजाबी सिंगर सुखी करतेँगे 13 अक्टूबर को जयपुर में लाइव परफॉर्म

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    जयपुर। “हाय नी तेरा कोका”, “कुड़ी कहँदी पैले जगुआर ले लो”, “मैं क़रजू सुसाइड तेरे सामने” सरीखे गीतों से करोड़ों युवाओं के दिलों पर राज करने वाले पंजाबी सिंगर सुखी 13 अक्टूबर को जयपुर में लाइव परफॉर्म करेंगे। वे पिंकसिटी के यंगस्टर्स को म्यूजिकली चीयर करने के लिए सीतापुरा स्थित ज़ी स्टूडियोज में आयोजित किए जाने वाले इण्डियन म्यूजिक फेस्ट में शिरकत करेंगे।
    सुखी के साथ ही मॉडल-एक्टर नेहा मलिक और ऑस्कर नॉमिनेटेड मूवी “गली बॉय” फेम रैपर्स काम भारी, एमसी अल्ताफ, ड्यूल ड्रामा डीजे कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण होंगे। प्रज्ञा ग्लोबल, पीपुल्स च्वॉइस इवेंट्स, आईसीसी डिजाइन्स और एक्सट्रीम इवेंट्स की ओर से इण्डियन म्यूजिक फेस्ट का आयोजन किया जा रहा है। शुक्रवार को इंडियन म्यूजिक फेस्ट का पोस्टर लांच किया गया। इस अवसर पर इण्डियन म्यूजिक फेस्ट के आयोजक पीयूष मंडोरा, राहुल खुराना, मनीष सोलंकी व अरविंद सिंह, एट द रेट ऑफ लाइव के डायरेक्टर अभिषेक अग्रवाल, फ्यूजन ग्रुप के डाइरेक्टर योगेश मिश्रा, मिस राजस्थान 2019 कंचन खटाना व फर्स्ट रनर-अप अरुणा बेनीवाल व सोशलिस्ट कनु मेहता, एंकर वीर व वर्षा मित्तल उपस्थित थे।

    इंडियन म्यूजिक फेस्ट के आयोजक राहुल खुराना व मनीष सोलंकी ने बताया कि फेस्ट के चौथे सीजन को और भी सेंसेशनल बनाने के लिए हम युवाओं की पसंद के अनुसार पंजाबी, बॉलीवुड और फोक म्यूजिक का फ्यूज़न लेकर आ रहे हैं, जिसमें उपरोक्त कलाकारों के अलावा “बापू सेहत के लिए हानिकारक है” फेम राजस्थानी लोक गायक सरवर खान भी अपनी आवाज से यंगस्टर्स का मनोरंजन करेंगे। अक्षय कुमार की मिमिक्री से फेमस हुए आर्टिस्ट विकल्प मेहता शो होस्ट करेंगे।

  • MAHARASHTRA ASSEMBLY ELECTION : दलों में बागियों के कारण बेचैनी, मुख्यमंत्री दे चुके हैं चेतावनी

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    मुंबई। महाराष्ट्र में सभी राजनीतिक दल, विशेष रूप से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी-शिवसेना के बीच बेचैनी का माहौल है, क्योंकि 288 विधानसभा क्षेत्रों के लिए 21 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में बागी नेता कई निर्वाचन क्षेत्रों में अधिकृत उम्मीदवारों की जीत की संभावनाओं पर पानी फेर सकते हैं। जहां कुछ दलों ने उन्हें साम या दाम से दूर करने की कोशिश की। वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चेतावनी दी है कि अगर बागी चुनावी मैदान से नहीं हटे तो उन्हें उनकी जगह दिखा दी जाएगी।

    लेकिन कई बागी नेताओं पर इस चेतावनी का कोई असर नहीं हुआ है। भाजपा-शिवसेना के अलावा, यहां तक कि विपक्षी कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी राकांपा भी बागियों पर नकेल कसने को लेकर सिर खपा रही है, जो सभी पक्षों के लिए दोधारी तलवार की तरह काम कर सकते हैं। एक तरफ, बागी नेता अधिकृत उम्मीदवारों की जीत की संभावनाओं में रोड़ा अटका सकते हैं या विरोधियों को लाभ पहुंचा सकते हैं, तो वहीं कुछ मामलों में यह भी संभावना है कि वे कहीं-कहीं अपनी व्यक्तिगत पकड़ के कारण जीत भी हासिल कर सकते हैं।

    भाजपा-शिवसेना पहले 27 से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में 110 बागियों का सामना कर रही थी। इसके अलावा लगभग 20 सीटों पर कांग्रेस-राकांपा को इस स्थिति से दो-चार होना पड़ा है और करीब आधा दर्जन सीटों पर आधिकारिक गठबंधन भी एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं। लेकिन, भाजपा-शिवसेना अभी भी कम से कम 30 सीटों पर विद्रोहियों का सामना कर रही हैं, और कांग्रेस-राकांपा ने बागी नेताओं को समर्थन देकर उनका फायदा उठाने की कोशिश की है।

    कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में, विपक्ष का राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के साथ सुविधाजनक, लेकिन अनौपचारिक रूप से समझौता हो गया हैं, जिसके उम्मीदवार भाजपा-शिवसेना के प्रत्याशियों के वोटबैंक में सेंध लगा सकते हैं। दोनों गठबंधनों के शीर्ष नेताओं ने विद्रोहियों से निपटने के लिए चेहरा बचाने के फार्मूले पर काम किया। कुछ मामलों में उन्हें आकर्षक मोलभाव के साथ लुभाया गया और अन्य में विद्रोहियों को जीत के बाद कैबिनेट में पद देकर पार्टी में लौटने की पेशकश की गई है।

    सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए, यह एक कठिन काम है, क्योंकि उसे अपनी पार्टी के टिकट दावेदारों के मुकाबले, राकांपा या कांग्रेस से आए ढेर सारे नए चेहरों को टिकट देकर संतुष्ट करना है। महादेव जानकर की अगुवाई वाला राष्ट्रीय समाज पक्ष सत्तारूढ़ महागठबंधन में एक छोटा, लेकिन महत्वपूर्ण सहयोगी है, जो विभिन्न मामलों में भाजपा से बहुत नाखुश है और महायुति छोडऩे पर विचार कर सकता है।

    शुरुआत में भाजपा ने आरएसपी को 10 सीटें देने से इनकार कर दिया और आरएसपी अनिच्छा से दो सीटों -जिन्तूर और दौंड- पर राजी हो गया, लेकिन अब भाजपा ने यहां भी अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। धनगर समुदाय के बीच अच्छी पकड़ रखने वाला आरएसपी शीघ्र ही इस बात पर फैसला करेगा कि सत्ताधारी गठबंधन के साथ रहना है या नहीं।

    पार्टी से निष्कासित किए जाने के खतरे के बावजूद चेतावनी को दरकिनार करने पर आमादा कई बागी नेताओं ने पार्टी में शामिल हुए नए लोगों के आगे पार्टी के वफादारों की अनदेखी करने की बुद्धिमानी पर सवाल उठा रहे हैं और चेतावनी दे रहे हैं कि इससे पार्टी मजबूत होने के बजाय कमजोर होगी।

    वर्तमान परिदृश्य में, सत्ता पक्ष के कम से कम पांच मौजूदा विधायक -चरण वाघमारे, नारायण पवार, राजू तोडसम और बालासाहेब सनप सभी भाजपा के और शिवसेना की तृप्ति सावंत पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। मुक्ताईनगर (जलगांव) में भाजपा उम्मीदवार रोहिणी खडसे शिवसेना के बागी चंद्रकांत पाटील का सामना कर रही हैं। चुनौती तब और बढ़ गई जब राकांपा ने अपने उम्मीदवार रवींद्र पाटील की उम्मीदवारी वापस ले ली और अब वह शिवसेना के बागी नेता का समर्थन कर रही है।

    शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को भी प्रतिष्ठित सीट बांद्रा पूर्व पर कुछ ऐसी ही शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। उद्धव का घर इसी निर्वाचन क्षेत्र में पड़ता है। यहां शिवसेना से मौजूदा विधायक तृप्ति सावंत मुम्बई के महापौर विश्वनाथ महादेश्वर के खिलाफ निर्दलीय के रूप में मैदान में उतर गई हैं।

    सावंतवाड़ी में शिवसेना के गृह राज्य मंत्री दीपक केसरकर को भी कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि शिवसेना के ही उनके सहयोगी राजन तेली ने बगावत कर दी है और निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे के बेटे -कांग्रेस के मौजूदा विधायक नितेश राणे कंकावली सिंधुदुर्ग में शिवसेना के बागी सतीश सामंत के कारण मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।

    विक्रमगढ़ (पालघर) सीट संवेदनशील बन गई है। भाजपा के हेमंत सवारा के खिलाफ बागी सुरेखा टेथल खड़ी हैं और रामटेक में शिवसेना के पूर्व विधायक आशीष जायसवाल भाजपा के मौजूदा विधायक मल्लिकार्जुन रेड्डी के खिलाफ खड़े हो गए हैं। सोलापुर सिटी सेंट्रल में भी आधिकारिक उम्मीदवार दिलीप माने के खिलाफ शिवसेना के एक बागी महेश कोठे खड़े हो गए हैं, जबकि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के करीबी महेश बलदी उरण (रायगढ़) में शिवसेना उम्मीदवार मनोहर भोईर के खिलाफ बागी बन गए हैं।

    पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व केंद्रीय मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण कराड दक्षिण (सांगली) में बागी उदयसिंह उंडालकर का सामना कर रहे हैं। कोथरुड (पुणे) और ठाणे में, कांग्रेस-राकांपा ने मनसे के उम्मीदवारों -किशोर शिंदे और अविनाश जाधव- को समर्थन दिया है, जो क्रमश: भाजपा-शिवसेना के खिलाफ लड़ रहे हैं। अंतिम आंकड़ों के खेल में बागी नेता बड़े खिलाड़ी के तौर पर उभर सकते हैं, विशेष रूप से आधिकारिक उम्मीदवारों की जीत की संभावनाओं को ग्रहण लगा सकते हैं।

  • HARYANA ASSEMBLY ELECTION 2019 : इन वीआईपी सीटों पर हरियाणा चुनाव में टिकी सभी की निगाहें

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    चंडीगढ़। हरियाणा में सभी सीटों पर प्रत्याशियों की स्थिति साफ होने के बाद से यूं तो चुनावी सरगर्मी बढ़ चुकी है, मगर सूबे का सियासी पारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 14 अक्टूबर से शुरू होने वाली ताबड़तोड़ रैलियों से चढ़ेगा, ऐसा समझा जाता है।

    बहरहाल, राजनीतिक विश्लेषकों के साथ ही आम जनता की नजरें उन वीआईपी सीटों पर हैं, जहां से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस, इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) और जननायक जनता पार्टी (जजपा) के दिग्गज ताल ठोक रहे हैं। हरियाणा में 21 अक्टूबर को मतदान होगा और 24 अक्टूबर को मतगणना के बाद नतीजे आएंगे।

    मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से जुड़ी होने के कारण करनाल ‘वीवीआईपी सीट’ है। कांग्रेस ने इस बार यहां से त्रिभुवन सिंह को खड़ा किया है। पिछले चुनाव में यहां इनेलो तीसरे और कांग्रेस चौथे स्थान पर थी। जबकि दूसरे नंबर पर रहे निर्दलीय प्रत्याशी को खट्टर ने 63 हजार से अधिक मतों से हराया था।

    ऐसी ही एक और सीट है ‘गढ़ी-सांपला-किलोई’। यहां से एक बार फिर दो बार मुख्यमंत्री रह चुके भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस की ओर से लड़ रहे हैं। भाजपा ने उनके खिलाफ सतीश नांदल को खड़ा किया है। सतीश नांदल पहले इनेलो में थे और 2009 में वह इसी सीट से हुड्डा के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं।

    इसके साथ ही एलनाबाद सीट पर भी सभी की निगाहें टिकी हैं। वजह यह कि पार्टी के दो खंड होने के बाद अब इनेलो नेता अभय चौटाला के सामने जीत दर्ज कर राजनीतिक वर्चस्व कायम रखने की चुनौती है। कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला की कैथल सीट पर भी सभी की नजरें हैं।

    हरियाणा विधानसभा चुनाव में राजनीतिक हस्तियों के अलावा मैदान में उतरे सेलिब्रिटी वर्ग को लेकर भी लोगों में उत्सुकता है। भाजपा ने इस चुनाव में कई सितारों को चुनाव मैदान में उतारा है। अंतर्राष्ट्रीय पहलवान बबीता फोगाट दादरी से चुनाव लड़ रही हैं, वहीं ओलंपियन योगेश्वर दत्त सोनीपत की बरौदा सीट से मैदान में हैं। भारतीय हाकी टीम के पूर्व कप्तान संदीप सिंह भी पिहोवा से चुनाव लड़ रहे हैं। आदमपुर से भाजपा ने एक्ट्रेस और टिक-टॉक स्टार सोनाली फोगाट को चुनाव मैदान में उतारा है। इन सीटों पर भी सभी की निगाहें टिकी हैं।

    चुनाव में मंत्रियों के सामने भी बड़ी चुनौती है। खट्टर सरकार के दो मंत्रियों को छोड़ अन्य सभी चुनावी मैदान में हैं। उद्योग मंत्री विपुल गोयल को फरीदाबाद और लोक निर्माण मंत्री राव नरबीर सिंह को बादशाहपुर सीट से पार्टी ने इस बार चुनाव नहीं लड़ाया है। जबकि अन्य सभी मंत्री फिर से ताल ठोक रहे हैं। इन मंत्रियों के सामने और बड़ी जीत दर्ज कर पार्टी में अपना कद बढ़ाने की चुनौती है। अपने बयानों से सुर्खियों में रहने वाले स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज अंबाला कैंट से लड़ रहे हैं। सोनीपत से कविता जैन मैदान में हैं, जबकि शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा महेंद्रगढ़ से ताल ठोक रहे हैं।

  • सिंधिया ने दी खुर्शीद-अल्वी के टकराव के बीच नसीहत, कांग्रेस को आत्मावलोकन की जरूरत

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    भोपाल। देश में 21 अक्टूबर को दो प्रमुख राज्यों महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनाव होने जा रहे हैं। फिलहाल इन दोनों प्रदेशों में भाजपा सरकार है। इससे भाजपा के हौसले काफी बुलंद हैं। ऐसे में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को कड़ी टक्कर देने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना होगा। उसे लोकसभा चुनाव में शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा और अब उसके पास वापसी का पहला मौका है।

    हालांकि लगातार सामने आ रही कांग्रेस नेताओं की फूट और अनर्गल बयानबाजी की खबरों से समर्थकों में निराशा है। राहुल गांधी के अध्यक्ष पद छोडऩे के बाद कांग्रेस की नैया और डगमगा गई है।

    एक दिन पहले वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री सलमान खुर्शीद के राहुल गांधी दिए गए बयान पर एक और अनुभवी नेता राशिद अल्वी के जोरदार हमले के बाद अब मध्यप्रदेश के बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी इस मामले में अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है। सिंधिया ने कहा कि मैं किसी के कमेंट पर टिप्पणी तो नहीं करूंगा लेकिन हां, इसमें कोई शक नहीं कि कांग्रेस को आत्मावलोकन की आवश्यकता है।

  • HIMACHAL PRADESH:चोरी का मामला दर्ज करा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर की पत्नी आईं विपक्ष के निशाने पर

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    शिमला। चंडीगढ़ के ब्यूटी पॉर्लर गईं हिमाचल प्रदेश सरकार के मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर की पत्नी रजनी ठाकुर की गाड़ी से चोरों ने ढाई लाख कैश नकदी गायब कर दी। पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराने के बाद अब मंत्री, उनकी पत्नी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार कांग्रेस के निशाने पर आ गई है। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि जब आम जनता सिर्फ 50,000 रुपए नकद रख सकती है तो फिर मंत्री की पत्नी के बैग में ढाई लाख रुपए कहां से आए? सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं। सूत्र बता रहे हैं कि इस पूरे प्रकरण में किरकिरी होती देख भाजपा नेतृत्व ने मामले को गंभीरता से लिया है। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व नेता से उनकी पत्नी के मामले में जवाब तलब कर सकता है।

    हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की वरिष्ठ नेता आशा कुमारी ने यहां संवाददाता सम्मेलन कर कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी डिजिटल ट्रांजैक्शन की बात करते हैं तो फिर एक मंत्री की पत्नी बैग में ढाई लाख रुपये लेकर क्यों चल रही थीं।

    बताया जाता है कि मंत्री की पत्नी चंडीगढ़ के ब्यूटी पॉर्लर में मेकअप के लिए गईं थीं। इस बीच बाहर खड़ी गाड़ी में रखे ढाई लाख की नकदी और कुछ जेवरातों पर चोरों ने हाथ साफ कर दिए। सात अक्टूबर की इस घटना पर जब मंत्री की पत्नी रजनी ठाकुर ने मामला दर्ज कराया तो घटना का खुलासा हुआ। अब कांग्रेस ने इसको लेकर कई सवाल खड़े कर दिए।

    आशा कुमारी ने बताया कि जिस गाड़ी (एचपी-66, 0001) से मंत्री की पत्नी चंडीगढ़ में सेक्टर-8 स्थित सैलून में गई थी। वह गाड़ी तो हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कापोर्रेशन के एमडी के नाम दर्ज है। आखिर सरकारी गाड़ी से मंत्री की पत्नी निजी काम यानी ब्यूटी पॉर्लर कैसे जा सकतीं हैं?” आशा कुमारी ने सवाल उठाया कि क्या यह सरकारी वाहन का दुरुपयोग नहीं है।

  • गाय, गांधी और गांव बने छत्तीसगढ़ की राजनीति के अहम हिस्से

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    रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी सरकार में पहली प्राथमिकता में ‘गाय, गांधी और गांव’ को रखा है। यही कारण है कि राज्य में गांधी विचार-यात्रा, गौठान और रियायती राशन के जरिए गरीब और गांव को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं। वहीं, भाजपा ने मुख्यमंत्री बघेल की इस मुहिम को राजनीति का हिस्सा करार दिया है।

    राज्य में कांग्रेस को सत्ता में आए नौ माह से ज्यादा का वक्त गुजर गया है, इस दौरान भूपेश बघेल की सरकार ने आवारा गौवंश को आश्रय देने के लिए गौठान बनाने का काम शुरू किया है तो दूसरी ओर, गांव को समृद्ध बनाने के लिए किसानों का कर्ज माफ किया और फसलों के दाम व तेंदूपत्ता संग्राहकों के बोनस में बढ़ोतरी की है। इसके अलावा गांधी का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के लिए ‘गांधी विचार यात्रा’ निकाली जा रही है।

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बताया कि वह गांधी के रास्ते पर ही चलकर ही राज्य की सत्ता में आए हैं और अगले पांच साल में गांधी की ग्राम स्वराज की परिकल्पना को मजबूत करने के लिए काम करेंगे।

    छत्तीसगढ़ में आवारा जानवर, खासकर गाय एक बड़ी समस्या बनी हुई है। यहां एक करोड़ 28 लाख से ज्यादा जानवर हैं, इनमें 30 लाख आवारा हैं, जिसके कारण खेतों की फसलों को नुकसान होने के साथ सड़कों पर हादसे भी होना आम रहा है। इन जानवरों, खासकर गायों के लिए गौठान बनाए गए हैं। राज्य में अब तक दो हजार गौठान बन चुके हैं। इन गौठानों के लिए ग्राम पंचायतों ने 30 हजार एकड़ जमीन दी है। गौठान वह स्थान है, जहां गायों के लिए खाने-पीने का पूरा इंतजाम होता है।

    मुख्यमंत्री बघेल ने गांधी की ग्राम स्वराज की परिकल्पना के अनुसार राज्य के अंतिम व्यक्ति को सशक्त बनाने का वादा किया है। उनका कहना है कि गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर राज्य सरकार ने पोषण, स्वास्थ्य, राशन, समस्या निदान के लिए पांच योजनाओं की शुरुआत की है।

    इस तरह भूपेश सरकार ने पंद्रह दिन के भीतर गांव-गांव तक अपनी बात पहुंचाने के लिए गांधी विचार यात्रा निकाली हैं। इस यात्रा के जरिए गांधी के सहारे राज्य सरकार अपनी आगामी योजनाओं की जानकारी पहुंचा रही है और गांव-गांव से यह फीडबैक भी ले रही है कि सरकार को और क्या करना चाहिए, जिससे लोगों में सरकार के प्रति सकारात्मक सोच बनी रहे।

    राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने बघेल पर महात्मा गांधी की 150वीं जयंती को ‘विवादग्रस्त’ बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा ने कभी भी राष्ट्रवाद के नाम पर देश को बांटने का काम नहीं किया है, कांग्रेस ने सत्ता के लिए देश का सांप्रदायिक आधार पर विभाजन तक मंजूर किया। बघेल छत्तीसगढ़ के कण-कण में राम होने की बात करते हैं और उनकी पार्टी ने सत्ता में रहते हुए राम के अस्तित्व को नकारने का हलफनामा दिया था।”

    वहीं, भाजपा किसान मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष पूनम चंद्राकर ने गोठान की स्थिति पर चिंता जताई है और आरोप लगाया है कि सरकार इसका राजनीतिकरण कर रही है। वहां अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। चारा-पानी के अभाव में जानवर मर रहे हैं, सरकार को गौवंश की रक्षा की बजाय राजनीति की चिंता ज्यादा है।