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  • BJP के खेमे में जा सकते हैं BSP के कमजोर होने से दलित

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    हरियाणा में बीएसपी के कमजोर पड़ने से बीजेपी को दलित मतदाताओं को लुभाने का मौका मिल गया है। यही वजह है कि बीजेपी यहां विधानसभा चुनाव में ‘मिशन 75’ लेकर चल रही है। इस लक्ष्य को पूरा करने का दारोमदार काफी हद तक राज्य की 17 सुरक्षित सीटों पर निर्भर रहेगा। सत्ताधारी पार्टी को पिछले विधानसभा चुनाव में ऐसी 17 सीटों (एससी की सीटें)में से आठ पर जीत मिली थी।

    हरियाणा बीजेपी के महासचिव अनिल जैन ने हमारे सहयोगी इकनॉमिक टाइम्स से बातचीत में कहा, ‘इस बार हम सभी 17 सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।’ अनिल जैन ने बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ 17 सितंबर को हरियाणा के खरखौदा (झज्जर) में एससी सम्मेलन को संबोधित किया था। अनिल ने बताया, ‘हमें सम्मेलनों में काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। हमारी सभी 90 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में एससी रैली आयोजित करने की योजना है। अभी तक ऐसी तीन रैलियां हो भी चुकी हैं।’

    सूबे में 19 प्रतिशत दलित वोटर
    दरअसल, हरियाणा में कुल वोटरों में से 19 प्रतिशत दलित हैं। बीएसपी 2009 तक दलित वोटरों की भरोसे की पार्टी थी और उसका वोट शेयर 6-7 प्रतिशत के बीच था। 2009 विधानसभा चुनाव में पार्टी को 6.7 प्रतिशत वोट और दो सीटें मिली थीं। बीएसपी राज्य में कभी ज्यादा सीटें तो नहीं जीत पाई, लेकिन उसने हमेशा बड़ी पार्टियों का खेल बिगाड़ा। हालांकि, 2014 विधानसभा चुनाव में उसका वोट शेयर घटकर 4 प्रतिशत पर आ गया और उसे सिर्फ एक सीट पर जीत मिली।

    बीएसपी ने की थी गठजोड़ की कोशिश
    बीएसपी लोकसभा चुनावों के बाद से हरियाणा में राजनीतिक पार्टियों के साथ गठजोड़ की कोशिश कर रही थी, लेकिन सीट बंटवारे पर मतभेद के चलते सफलता नहीं मिली। अब उसने अकेले लड़ने का फैसला किया है। बीएसपी ने पहले अजय चौटाला की जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के साथ गठबंधन का ऐलान किया था। हालांकि, अब वह गठबंधन से निकल चुकी है।

    जाट बनाम दलित से बीजेपी को फायदे की उम्मीद

    हरियाणा के एक बीजेपी नेता ने बताया, ‘विपक्षी पार्टियां चाहें, वह कांग्रेस हो या आईएनएलडी या जेजेपी, सभी के कुछ हिस्सों में जाटों का वोट मिलता है। जाट आमतौर पर बीजेपी के खिलाफ वोट देते हैं। इससे हमें दलित वोट पाने में मदद मिल सकती है क्योंकि आमतौर पर दलित जाटों के साथ वोट नहीं देते।’

    इस कारण बीजेपी को हो सकता है फायदा
    बीजेपी का मानना है कि कांग्रेस में हुड्डा और चौटाला की पार्टी बंटवारे के बाद जाटों का वोट इन्हीं पार्टियों को जाएगा। इस स्थिति में बीजेपी को फायदा होगा क्योंकि हरियाणा में जाट-दलित प्रतिद्वंद्विता की वजह से दलित बीजेपी के खेमे में आ सकते हैं।

    लगभग आधी एससी आबादी जाटव की
    एससी समुदाय में सबसे ज्यादा दबदबा जाटव का है। राज्य में तकरीबन आधी एससी आबादी जाटव की है। इसके अलावा वाल्मीकि, खटिक और अन्य समुदाय शामिल हैं। जैन ने कहा, ‘हम सभी समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व देते हैं। बीजेपी ने जिस तरह से जाति और मजहब में भेदभाव किए बिना राज्य में काम किया है, उससे जाति समीकरण ध्वस्त हो गया है। आज बीजेपी को राज्य में सभी समुदायों से वोट मिलते हैं।’

  • चुनाव करीब, जानिए महाराष्ट्र-हरियाणा में सियासी हालात

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    महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। दोनों राज्यों में अभी बीजेपी के नेतृत्व में सरकार है। 21 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनाव में महाराष्ट्र में सत्ताधारी बीजेपी-शिवसेना गठबंधन का मुकाबला कांग्रेस-एनसीपी से है। वहीं, हरियाणा में लोकसभा चुनाव में क्लीन स्वीप के बाद बीजेपी विधानसभा चुनाव में भी बड़ी जीत दर्ज करने की जुगत लगा रही है। बदलते समीकरणों के बीच क्षत्रपों के लिए करो या मरो जैसी स्थिति बन सकती है। एक नजर दोनों राज्यों के सियासी हालात पर:

    महाराष्ट्र
    2014 में महाराष्ट्र विधानसभा में कई चीजें पहली बार हुई थीं। राज्य में पहली बार पारंपरिक सहयोगी बीजेपी-शिवसेना और कांग्रेस-NCP अलग-अलग चुनाव लड़े थे। बीजेपी को 288 विधानसभा सीटों में से तब 122 पर जीत मिली थी जबकि शिवसेना 63 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही थी। पहले महाराष्ट्र में बीजेपी के साथ अलायंस में शिवसेना का पलड़ा भारी हुआ करता था, लेकिन 2014 के चुनाव से पासा पलट गया।

    कांग्रेस को पिछले विधानसभा चुनाव में यहां 42 सीटों पर जीत मिली थी, जो NCP से एक सीट अधिक थी। NCP की पश्चिम महाराष्ट्र में बीजेपी के हाथों बुरी हार हुई थी। बीजेपी ने इस क्षेत्र में 70 में से 24 सीटों पर कब्जा किया था। यहां NCP को 19 और कांग्रेस को 10 सीटों पर जीत मिली थी। शिवसेना चुनाव के बाद देवेंद्र फडणवीस सरकार में शामिल हुई, जिसे पश्चिम महाराष्ट्र में 13 सीटें मिली थीं।

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    बीजेपी ने विदर्भ में अच्छा प्रदर्शन किया था। उसे यहां 62 में से 44 सीटों पर जीत मिली थी। उसने मराठवाड़ा में 46 में से 15, मुंबई में 36 में से 15 और उत्तर महाराष्ट्र में 35 में से 14 सीटें जीती थीं। लेकिन कोंकण की 39 में से 14 सीट जीतकर शिवसेना, बीजेपी की 10 सीटों के मुकाबले काफी आगे थी।

    पिछले पांच साल में फडणवीस के नेतृत्व में नई विकास परियोजनाओं के दम पर पार्टी ने पहुंच बढ़ाई है। पीएम किसान स्कीम से उसे किसानों का भरोसा हासिल हुआ। इस समुदाय ने पिछले पांच साल में कई आंदोलन किए थे। मराठा और आय के आधार पर आरक्षण जैसे फैसलों से भी उसका आधार बढ़ा है। पिछले कुछ महीनों में NCP और कांग्रेस के कई नेताओं को फडणवीस अपनी पार्टी में ले आए हैं, जिससे विपक्ष कमजोर हुआ है।

    हरियाणा
    महाराष्ट्र की तरह हरियाणा भी ऐसा राज्य है, जहां 2014 में बीजेपी ने पहली बार अकेले चुनाव लड़ा था। उसे 90 में 47 सीटें मिलीं और वह अपने दम पर सरकार बनाने में सफल रही। 1966 में हरियाणा अलग राज्य बना था। तब से 2009 में भूपिंदर सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस को छोड़कर अभी तक किसी भी पार्टी ने भी यहां लगातार दो बार सरकार नहीं बनाई है। हालांकि, 2014 में कांग्रेस 13 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर पहुंच गई और INLD को दूसरी पोजिशन मिली थी।

    गैर-जाट समुदाय की कांग्रेस से नाराजगी और प्रधानमंत्री मोदी के कारण 2014 में राज्य में बीजेपी को शानदार जीत मिली थी। उसे शहरी क्षेत्रों के साथ यादवों की बहुलता वाले अहिरवाल क्षेत्र में व्यापक समर्थन मिला था। दिल्ली के साथ लगे अहिरवाल क्षेत्र में बीजेपी ने 15 में से 12 सीटें जीती थीं। शुरुआती वर्षों में कई विवादों के कारण बीजेपी सरकार की किरकिरी हुई थी, लेकिन पिछले दो साल में केंद्र की योजनाओं को लागू करने से मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की लोकप्रियता बढ़ी है।

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    पिछले साल उपचुनाव में जाट बहुल जींद सीट पर बीजेपी की जीत विपक्षी दलों के लिए चेतावनी थी। कांग्रेस के स्टार लीडर रणदीप सिंह सुरजेवाला इस सीट से चुनाव हार गए थे और वह तीसरे नंबर पर थे। लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने हरियाणा की सभी 10 सीटों पर कब्जा किया था। तब उसका वोट शेयर 58 प्रतिशत हो गया था। पिछले पांच साल में अपना जनाधार मजबूत करने के बजाय विपक्ष बिखरा हुआ नजर आया है। ऐसे में इस बार हरियाणा में बीजेपी की जीत पक्की लग रही है।

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    कांग्रेस का तो 2014 के बाद से जमीनी स्तर पर संगठन तक नहीं है। पार्टी ने कुछ ही हफ्ते पहले कुमारी सैलजा को प्रदेश अध्यक्ष और हुड्डा को कैंपेन कमिटी का प्रमुख व विधायी दल का नेता बनाया है। इस चुनाव में कांग्रेस की चुनौती पूरी तरह हुड्डा के परफॉर्मेंस पर निर्भर करेगी। INLD में फूट की वजह से कांग्रेस को बीजेपी-विरोधी वोट मिलने की उम्मीद है। INLD के दो धड़े, अभय चौटाला और दिग्जविजय चौटाला के नेतृत्व वाली जननायक जनता पार्टी (JJP), देवी लाल की विरासत पर दावा कर रहे हैं, जो अभी खतरे में दिख रही है। यहां मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच होगा, जिसमें बीजेपी मीलों आगे दिख रही है।

  • दुर्गा पूजा को लेकर की गई बैठक

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    रिपोर्ट विवेक चौबे

    गढ़वा : दुर्गा पूजा को लेकर कांडी के ग्रामीणों द्वारा महावीर मंदिर के प्रांगण में एक बैठक आयोजित की गई। उपस्थित सभी ग्रामीणों के सर्वसम्मति से पूजा समिति के अध्यक्ष-सिद्धार्थ कुमार,उपाध्यक्ष- सुनील प्रसाद,कोषाध्यक्ष- सूरज प्रासाद, उप कोषाध्यक्ष-विजय कुमार,सचिव- मोहन कुमार,उप सचिव-अनिल प्रसाद,चंदा प्रभारी- उदल राम व राजेश प्रसाद, संरक्षक-सतीश चंद्रवंशी को नियुक्त किया गया। जबकि सोहर प्रसाद,नरेश माझी,रंजन ठाकुर, संजय प्रसाद,अनूप राम,अमित प्रकाश,उदय राम सहित अन्य को पूजा समिति का सदस्य बनाया गया।

    वहीं उपस्थित पूजा समिति के सभी सदस्यों ने प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी हर्षोल्लास के साथ दुर्गा पूजा मनाने का निर्णय लिया। वहीं पूजा समिति के चंदा प्रभारी-राजेश प्रसाद ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष एक लाख बिस हजार की लागत से भव्य पंडाल का निर्माण होगा।इस प्रकार का पंडाल कांडी प्रखण्ड क्षेत्र में पहली बार देखने को मिलेगा।

  • हरियाणा: पति-पत्नी समेत 3 की आकाशीय बिजली गिरने से मौत

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    हरियाणा के चरखी दादरी से दर्दनाक खबर सामने आई है। जिले के गांव जावा में आसमानी बिजली गिरने से खेतों में काम कर रहे तीन लोगों की मौत हो गई। इसमें पति-पत्नी भी शामिल हैं।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार शाम बूंदाबांदी के चलते खेत में काम कर रहे दंपती और पड़ोस का एक युवक एक पेड़ के नीचे खड़े थे। अचानक तेज बारिश के बीच आसामानी बिजली गिरने से तीनों उसकी चपेट में आ गए।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक खेत से गुजर रहे कुछ किसानों ने पुलिस और परिवारवालों को इसकी सूचना दी। पुलिस की टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से तीनों को सिविल अस्पताल पहुंचाया। यहां डॉक्टरों ने सभी को मृत घोषित कर दिया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

    जानकारी के मुताबिक मृतक दंपती खेती के जरिए ही अपने परिवार का गुजारा करते थे। उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी हैं। वहीं, मृतक युवक आईटीआई का छात्र था।

  • बिल्ला नंबर 13 बना महिला कुली लक्ष्मी की पहचान, पढ़िए लक्ष्मी की प्रेरक कहानी

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    जज्बा हो तो इनसान हर मुश्किल चुनौती से लड़ सकता है। पति की मौत के बाद भोपाल की लक्ष्मी ने कुछ ऐसा ही जज्बा दिखाया। बिल्ला नंबर 13 उनकी पहचान है। भोपाल रेलवे स्टेशन पर कुली के रूप में कार्यरत लक्ष्मी हमेशा आपको वहां मुस्कराते हुए मिल जाएंगी। वह जज्बा ही है जिसके दम पर विपरीत परिस्थिति में भी लक्ष्मी ने हार नहीं मानी और मुश्किल हालातों से लड़ते हुए ना सिर्फ अपने परिवार को सहारा दे रही हैं बल्कि लाखों महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी कर रही हैं।

    दरअसल, इसी वर्ष जुलाई में उनके पति की मौत हो गई। लक्ष्मी के पति इसी स्टेशन पर कुली के रूप में काम कर रहे थे। अब पति का बिल्ला नंबर 13 ही लक्ष्मी की नई पहचान है। आठ साल के बच्चे की मां लक्ष्मी कहती हैं, ‘पति की मौत के बाद मुझे मेरे बेटे को सहारा देना था। उसे एक अच्छी जिंदगी देनी थी। इसलिए मैंने यह निर्णय किया कि अब उनकी नौकरी मैं खुद करूंगी।’

    ‘बेटे के बेहतर भविष्य के लिए कर रही हूं’
    वह कहती हैं, ‘मेरे पास आय का कोई दूसरा स्रोत नहीं है। मुझे खुद और बेटे को पालना भी है। इस नौकरी से मैं रोजाना कम से कम 50 से 100 रुपये कमा लेती हूं।’ लक्ष्मी मानती हैं कि कुली के रूप में काम करना उनके लिए आसान नहीं था। कहती हैं, ‘हां, यह बेहद मुश्किल है। पर, मेरे पास विकल्प नहीं है। बेटे के बेहतर भविष्य के लिए मुझे कुछ ना कुछ तो करना ही है।’

    ‘मुझे स्थाई नौकरी की जरूरत है’
    लक्ष्मी यह जरूर मानती हैं कि उन्हें अपने बेटे को आगे बढ़ाने और जीवनयापन के लिए एक स्थाई नौकरी की जरूरत है। कहती हैं, ‘यहां कुछ भी निश्चित नहीं है। किसी दिन ऐसा भी होता है कि एक भी रुपये की कमाई नहीं होती। ऐसे में मैं भी एक स्थाई नौकरी चाहती हूं।’ हालांकि, लक्ष्मी इस दौरान अपने अन्य सहयोगियों का शुक्रिया करना नहीं भूलतीं, जो भारी सामान उठाने में अक्सर उनकी मदद करते हैं।

    ‘ग्रुप डी में नौकरी देने की अपील’
    एक सहयोगी कुली महेश प्रजापति कहते हैं, ‘कई बार यात्री उन्हें महिला समझकर कहते हैं कि उनके लिए सामान काफी भारी है। ऐसे में हम लोग संबंधित यात्री को उनके हालात के बारे में समझाते हैं और जरूरत पड़ने पर खुद सामान उठाने में मदद भी करते हैं।’ प्रजापति आगे कहते हैं, ‘हमने संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर लक्ष्मी को रेलवे में ग्रुप डी की नौकरी देने की मांग की है।’

    ‘महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं लक्ष्मी’
    रेलवे स्टेशन पर महिला कुली के सवाल पर लक्ष्मी के एक सहयोगी कहते हैं, ‘समाज को जो सोचना है सोचे। पर, सच्चाई यह है कि लक्ष्मी आत्मनिर्भर बनकर अपने बेटे के लिए काम करना चाहती हैं और वह कर रही हैं। बल्कि वह उन महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं जो आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं।’

  • मंजूर हुए इस्तीफे हरियाणा सीएम के तीन ओएसडी और सलाहकारों के

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    हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के तीन ओएसडी और तीन सलाहकारों के इस्तीफे मंजूर हो गए हैं। इन इस्तीफों की आधिकारिक पुष्टि करते हुए एक प्रवक्ता ने बताया कि इन लोगों ने 18 और 20 सितंबर को इन्होने अपने इस्तीफे मुख्यमंत्री को सौंप दिए थे।

    इन इस्तीफों को मुख्यमंत्री ने आदर्श आचार संहिता के लागू होते ही तुरंत प्रभाव से मंजूर कर लिया था और सोमवार को इस संबंध में मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं।

    जिन तीन ओएसडी ने अपने इस्तीफे सोंपे थे, उनमें प्रधान विशेष कार्यकारी अधिकारी नीरज दफ़्तुआर, विशेष कार्यकारी अधिकारी भूपेश्वर दयाल और अमरेन्द्र सिंह शामिल हैं। इसी प्रकार इनमे मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकारों राजीव जैन और अमित आर्य तथा प्रधान राजनीतिक सलाहकार दीपक मंगला के इस्तीफे भी शामिल हैं।

  • हिल्सा मछलियों ने शुरू कर दिया अपना स्थान बदलना, हो रही विस्थापित बांग्लादेश की नदी की तरफ

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    हुगली नदी के किनारों पर फैला कचरा और जगह-जगह बिखरे जालों के चलते हिल्सा मछलियों ने अपना स्थान बदलना शुरू कर दिया है। बंगाल की नदियों से हिल्सा मछलियों की संख्या में आ रही कमी की यह एक बड़ी वजह है। इस वजह से रिटेल मार्केट में इनकी कीमतों पर भी असर पड़ रहा है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, 2002-03 में हुगली में 62,600 हिल्सा पकड़ी गई थीं जबकि डेढ़ दशक बाद (2017-18) यह संख्या घटकर आधी 27,539 टन ही रह गई। जबकि इसी समय अंतराल में बांग्लादेश में हिल्सा की पकड़ बढ़कर 1,99,032 टन से 5,17,000 टन हो गई है।

    केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान के रिटायर्ड डिविजनल हेड उत्पल भौपिक के अनुसार, ‘उत्तरी बंगाल की खाड़ी में एकत्रित हिल्सा स्पॉनिंग सीजन में धारा के प्रतिकूल दिशा में अपनी यात्रा के लिए तीन मार्ग अपनाती हैं- हुगली नदी, बांग्लादेश में मेघना नदी और म्यांमार में इरावती नदी। हालांकि हुगली में अत्यधिक कचरा और फिशिंग पर प्रतिबंध न होने के चलते हिल्सा ने अपना माइग्रेशन रूट बदल लिया है और मेघना नदी में विस्थापन शुरू कर दिया है।’

    बांग्लादेश में 75% और भारत में सिर्फ 5% हिल्सा
    आज बांग्लादेश में करीब 75 फीसदी हिल्सा पकड़ी जा रही हैं जबकि म्यांमार में 15 और भारत और बाकी देशों में इनकी पकड़ मात्र 5 फीसदी रह गई है। भौपिक ने बताया, ‘हिल्सा 30 से 40 फीट से कम गहरे पानी में प्रवेश नहीं करती हैं लेकिन हुगली में फरक्का बैराज और ड्रेजिंग की कमी की वजह से इसकी गहराई कम हो रही है।’

    अत्यधिक फिशिंग की वजह से कम हो रही मछलियां
    पूर्वी मिदनापुर के कोंतई के निवासी हिल्सा मछुआरे देबब्रत खुटिया ने बताया, ‘यहां ओवरफिशिंग की अधिक समस्या है। कुछ साल पहले तक यहां 3 हजार नावें हुआ करती थीं और अब 6 हजार फिशिंग नावों का संचालन हो रहा है।’ स्मॉल स्केल फिश वर्कर्स (इनलैंड) के नैशनल प्लैटफॉर्म के प्रदीप चटर्जी ने बताया, ‘2 किमी लंबे सैकड़ों जाल नदी में बिछे हुए हैं। ऐसे में मछलियां यहां कैसे प्रवेश कर पाएंगे। खुद को जीवित रखने के लिए हिल्सा मेघना नदी की ओर विस्थापित हो रही हैं जहां नदी की गहराई 50 से 60 फीट है।’

    5 इलाकों को बनाया था हिल्सा सेंचुरी
    जादवपुर विश्वविद्यालय के समुद्र विज्ञान अध्ययन संस्थान की ईशा दास बताती हैं, ‘पहले हिल्सा मछलियां प्रयागराज तक यात्रा करती थीं लेकिन अब ये फरक्का बैराज तक पार नहीं कर पाती हैं।’ बता दें कि 2013 में पश्चिम बंगाल सरकार ने 5 इलाके- हुगली के अलग-अलग हिस्सों के साथ, मातला, रायमंगल और ठकुरान नदी को हिल्सा सेंचुरी घोषित किया था। इसके अलावा 23 सेमी से कम लंबाई वाली हिल्सा को पकड़ने, रखने, ट्रांसपोर्ट करने और बेचने पर रोक लगाई गई थी। इसी के साथ हर साल 15 सितंबर से 24 अक्टूबर तक के समय अंतराल में फुल मूल के 5 दिन पहले और 5 दिन बाद तक हिल्सा फिशिंग पूरी तरह प्रतिबंधित थी।

  • राज्य के विभिन्न जिलों से आए लोगों ने सुनाई मुख्यमंत्री गहलोत को अपनी समस्याएं

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    राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को यहां मुख्यमंत्री आवास पर लोगों की समस्याएं सुनीं।गहलोत ने राज्य के विभिन्न जिलों से आए लोगों की तीन घंटे सुनवाई की और अधिकारियों को जनसमस्याओं का निराकरण करने के निर्देश दिए। इस दौरान बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, विभिन्न समाजों एवं संगठनों के प्रतिनिधिमंडलों ने मुख्यमंत्री को अपनी समस्याओं से अवगत कराया। एक सरकारी बयान के अनुसार, विभिन्न संस्थाओं से संबद्ध महिलाएं और युवा भी जनसुनवाई में गहलोत से मिले।

  • सारदा चिटफंड घोटाले में राजीव कुमार को सता रहा गिरफ़्तारी का डर

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    बहुचर्चित सारदा चिटफंड घोटाले में फंसे कोलकाता के पूर्व कमिश्वर राजीव कुमार पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। उनको मिली गिरफ्तारी से राहत खत्म होने के बाद सीबीआई ने नोटिस भी दिया था लेकिन वह जांच एजेंसी के समक्ष पेश नहीं हुए। अग्रिम जमानत के लिए उन्होंने अलीपुर सेशंस कोर्ट में याचिका दायर की थी लेकिन वह खारिज हो गई। अब राजीव कुमार की पत्नी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की है।

    बीते शनिवार को अलीपुर की जिला और सत्र अदालत ने राजीव कुमार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। सीबीआई ने अदालत से कहा कि सारदा चिटफंड घोटाला मामले में समन से बचकर राजीव कुमार कानून तोड़ रहे हैं, जिसके बाद उनकी अग्रिम जमानत याचिका रद्द कर दी गई। फिलहाल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सीआईडी) के पद पर तैनात राजीव कुमार ने शुक्रवार को इस अदालत में जमानत याचिका दायर की थी। इससे एक दिन पहले शहर की एक अदालत ने कहा था कि सीबीआई को सारदा मामले में राजीव कुमार को गिरफ्तार करने के लिए वॉरंट की जरूरत नहीं है।

    राजीव कुमार की तलाश में जुटी सीबीआई

    वहीं, सीबीआई की टीम ने राजीव कुमार का पता लगाने के लिए अपना अभियान तेज कर दिया है। सीबीआई की अलग-अलग टीमें अलीपुर बॉडीगार्ड लाइंस और राजीव कुमार के पार्क स्ट्रीट स्थित सरकारी आवास गईं। बता दें कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने राजीव कुमार को दिया किया गया संरक्षण वापस ले लिया है।

    ममता बनर्जी हैं खास
    राजीव कुमार को पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी का खास माना जाता है। उनपर आरोप है कि उन्होंने घोटाले की जांच में जरूरी सबूत दबा दिए थे। पश्चिम बंगाल पुलिस ने सीबीआई को सूचित किया है कि राजीव कुमार 9 सितंबर से 25 सितंबर तक छुट्टी पर हैं। सारदा समूह की कंपनियों ने लोगों को उनके निवेश पर अधिक मुनाफा का वादा करते हुए कथित रूप से 2500 करोड़ रुपये ठग लिए थे।

  • दलित बच्चों की पीट-पीट कर हत्या, दो आरोपी गिरफ्तार

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    मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के भावखेड़ी गांव में बुधवार की सुबह पंचायत भवन के सामने शौच करने पर दो व्यक्तियों ने दो दलित बच्चों को कथित तौर पर पीट-पीटकर मार डाला। सिरसोद पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक आर एस धाकड़ ने बताया कि पुलिस ने मामले में दो आरोपियों हाकिम यादव और उसके भाई रामेश्वर यादव को गिरफ्तार कर लिया है।

    उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि घटना में दो ही व्यक्ति शामिल थे। उन्होंने बताया कि बुरी तरह पीटे जाने से दोनों बच्चों रोशनी वाल्मीकि (12) और अविनाश वाल्मीकि (10) को गंभीर चोटें आईं। जिला अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। धाकड़ ने मृतक बच्चों के माता-पिता की शिकायत के हवाले से बताया कि हाकिम और रामेश्वर ने सुबह करीब साढ़े छह बजे उनके बच्चों को तब बुरी तरह पीटा जब वे सड़क के पास शौच कर रहे थे।

    मृतक अविनाश के पिता मनोज वाल्मीकि ने कहा कि उनका गांव यादव बहुल है और गांव में उनके साथ जातिगत आधार पर भेदभाव किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव के सभी लोगों द्वारा पानी लेने के बाद ही उन्हें हैंडपंप से पानी निकालने की अनुमति है। उन्होंने कहा, ‘दो साल पहले मेरी आरोपियों से बहस हुई थी और उन्होंने मुझे जातिगत गालियां देते हुए मारने की धमकी दी थी।’

    मनोज ने कहा, ‘इसके अलावा वे चाहते थे कि मैं कम पैसे में उनके लिए मजदूरी करूं।’ धाकड़ ने बताया कि दोनों आरोपियों पर हत्या और अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच की जा रही है। इस बीच, प्रशासन ने घटना के बाद ऐहतियात के तौर पर जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर भावखेड़ी गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया है। सूत्रों ने बताया कि दलित संगठन और बीएसपी के नेता भी गांव पहुंच रहे हैं।