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  • मध्य प्रदेश बाढ़ः अलर्ट जारी, स्कूल बंद, इलाके कराए गए खाली

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    मध्य प्रदेश के कई इलाकों में पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश से हाहाकार मचा है। इन इलाकों में बाढ़ की स्थितियां बन गई हैं। घर पानी में डूब गए हैं तो लोगों को रेस्क्यू कराने का काम तेजी से चल रहा है। भोपाल में रविवार को एक डेढ़ साल के बच्चे समेत दो लोगों की मौत हो गई। बारिश की स्थिति को देखते हुए भोपाल, मंडला, सिवनी जिलों के स्कूलों की छुट्टी कर दी गई है। प्रशासन ने जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद और हरदा सहित अन्य इलाकों में अलर्ट जारी किया है।

    लगातार भारी बारिश के कारण जिला कलेक्टर भोपाल तरुण पिथोडे ने सभी स्कूलों को बंद रखने के निर्देश दिए हैं। डीएम ने कहा कि सभी सरकारी, निजी, सीबीएसई और आईसीएसई स्कूल सोमवार को बंद रहेंगे। इसके अलावा अन्य जिलों में भी अलर्ट जारी किया गया है।

    तेज बहाव में बह गई बच्ची
    स्थानीय पुलिस ने बताया कि रविवार को प्रेमपुरा घाट के पास एक युवक ऊपरी झील में बह गया। पानी में तेज बहाव और अंधेरे के कारण युवक को नहीं खोजा जा सका। वहीं एक बच्ची अनुष्का का शव पानी में बरामद किया गया। एसएचओ खजुरी एलडी मिश्रा ने कहा कि चाय की दुकान चलाने वाले प्रकाश की बेटी अनुष्का फंदा इलाके में रहती थी। वह अपनी बड़ी बहन पूजा (10) के साथ एक किनारे पर खड़ी थी, तभी उसका पैर फिसल गया और वह बहाव में बह गई।

    विदिशा रेलवे स्टेशन के हवालात में घुसा पानी
    इटारसी के राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के हवालात में बंद पांच आरोपियों को रविवार को बारिश के पानी में डूबने के बाद थाने की पहली मंजिल पर ले जाना पड़ा। एसएचओ बीएस चौहान ने कहा कि दो आरोपियों को मोबाइल फोन चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, जबकि बाकी आरोपियों पर गाड़ियों में चोरी का आरोप है। रविवार को उन्हें अदालत में पेश किया जाना था। हवालात में बारिश का पानी घुटने तक भर गया।

    इलाके कराए गए खाली
    कोलार क्षेत्र में लगभग 20 परिवारों को स्थानांतरित किया गया है। कलियासोत बांध के चार स्लूस गेटों को सुबह खोले जाने के बाद धाम खेड़ा क्षेत्र में बाढ़ आ गई। रविवार शाम को छह फाटक और खोले गए। भोपाल महापालिका के फायर ब्रिगेड प्रभारी पंकज खरे ने बताया कि शुरुआत में निचले इलाकों में छह घरों को खाली करवाया गया। कोलांस नदी अपने सामान्य निशान से दस फीट ऊपर बह रही है। निचले इलाकों में के सारे घरों को खाली करने का आदेश जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रभावित इलाके के सरकारी प्राथमिक स्कूल को भी स्थानांतरित कर दिया गया है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए क्षेत्र में चार टीमों को तैनात किया गया है।

    कई इलाकों में जलभराव के कारण शहर में लगातार बारिश ने जीवन से बाहर कर दिया। राजीव नगर की बस्तियां भी जलमग्न हो गईं। स्थानीय विधायक और कानून मंत्री पीसी शर्मा ने स्थिति का जायजा लेने के लिए इलाके का दौरा किया। क्षेत्र के कुछ निवासियों को तत्काल स्थानांतरित करने के लिए जिला कलेक्टर को निर्देश दिए गए थे। स्थानीय लोगों ने कहा कि इलाके में नालियों को चौड़ा नहीं किए जाने के कारण बाढ़ आई है। मंत्री ने कलेक्टर को झुग्गी क्षेत्रों में भोजन और राशन प्रदान करने का निर्देश दिया।

    लोगों को जल निकायों से दूर रहने के आदेश
    नर्मदा नदी के पास स्थित शहरों में रहने वाले लोगों को जल निकायों से दूर रहने के लिए कहा गया है। बरगी का पानी सोमवार को होशंगाबाद पहुंच गया। तवा नदी का पानी नर्मदा में बहना शुरू हो चुका है। मंडला में नर्मदा खतरे के निशान से चार फीट ऊपर बह रही है। डाउनस्ट्रीम बरगी का विशाल जलाशय है जहां ऊपर भारी वर्षा के बाद जल स्तर तेजी से बढ़ता है।

    कई इलाकों में अलर्ट जारी
    प्रशासन ने जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद और हरदा सहित अन्य इलाकों में अलर्ट जारी किया है। नरसिंहपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना ने चेतावनी देते हुए कहा कि नर्मदा में 15 फीट से अधिक जल स्तर बढ़ सकता है। बरगी का पानी नर्मदा में पहुंच गया है, जिससे और बाढ़ आने की आशंका है। इसके अलावा इंदिरा सागर बांध के स्लुइस 20 गेटों में से 12 को खोला गया था। ओंकारेश्वर में 23 में से 14 बांध भी खोले गए हैं। यह नर्मदा घाटी में कहर पैदा कर रहा है और यहां गुजरात सरदार सरोवर बांध भर रहा है।

  • एनडीए के ‘कैप्‍टन’ हैं नीतीश कुमार और 2020 के विधानसभा चुनाव तक रहेंगे: सुशील मोदी

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    बिहार में सत्‍तारूढ़ जेडीयू और बीजेपी के बीच चल रही मतभेद की खबरों के बीच राज्‍य के डेप्‍युटी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार एनडीए के ‘कैप्‍टन’ हैं और आगामी विधानसभा चुनाव तक वही ‘कैप्‍टन’ बने रहेंगे। उन्‍होंने कहा कि हमारे कैप्‍टन नीतीश कुमार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं, इसलिए बदलाव का सवाल ही नहीं है।

    बीजेपी नेता सुशील मोदी ने बुधवार को ट्वीट किया, ‘नीतीश कुमार बिहार में एनडीए के कैप्‍टन हैं और वर्ष 2020 में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव तक हमारे कैप्‍टन बनें रहेंगे। जब कैप्‍टन (नीतीश कुमार) चौका और छक्‍का मार रहे हैं, विपक्षियों को पारी की हार दे रहे हैं तो ऐसे में किसी तरह के बदलाव का सवाल ही नहीं उठता है।’

    बीजेपी नेता ने की थी नीतीश को हटाने की मांग
    बता दें कि बिहार में उठे ताजे सियासी उठापटक के बीच जेडीयू अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सहयोगी बीजेपी से सभी चीजें साफ कर लेना चाहती है। सूत्रों के अनुसार पार्टी जल्द ही मीटिंग कर राज्य में सियासी तस्वीर और विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व को लेकर अपनी रणनीति साफ कर देना चाहती है। पार्टी का मानना है कि आम चुनाव की तरह समय पर सब कुछ तय कर लेने से तैयारी में मदद मिलेगी। जेडीयू का तर्क कि आम चुनाव में भी 10 महीने पहले सारी चीजें साफ हो गई थीं।

    दरअसल, बिहार में जेडीयू ने ताजी पहल तब शुरू की है जब बीजेपी नेता संजय पासवान का बयान आया है। संजय पासवान ने सोमवार को राज्य में अपने ही गठबंधन के नेता नीतीश कुमार पर बयान देते हुए कहा कि वह पिछले 15 साल से सीएम हैं और अब बहुत हो गया। उन्होंने अगली बार यह पद बीजेपी को दिए जाने की मांग करते हुए नीतीश कुमार को केंद्र में जिम्मेदारी संभालने की सलाह भी दे दी। जेडीयू को नीतीश कुमार के नेतृत्व पर उठी यह आवाज नागवार गुजरी और फौरन पलटवार कर दिया।

    बयानबाजी और उठापटक

    बता दें कि कि बीजेपी और जेडीयू के बीच बयानबाजी का दौर कोई नया नहीं है। आम चुनाव के तुरंत बाद गिरिराज सिंह ने नीतीश कुमार पर टिप्पणी की थी जिसके बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को दखल देते हुए विवाद को आगे बढ़ने से रोकना पड़ा था। हाल में सियासी चर्चा तब भी उठी जब जेडीयू ने नीतीश कुमार को अगला सीएम चेहरा बताते हुए होर्डिंग लगा दिए।

    आरजेडी को मिला मौका
    जेडीयू-बीजेपी के हुए बयानबाजी का सियासी लाभ लेने की कोशिश में आरजेडी भी कूद गई। पार्टी के सीनियर नेता तेजस्वी यादव ने संजय पासवान के बयान पर ट्वीट कर कहा कि क्या CM बीजेपी के लोगों की बात का खंडन करने का माद्दा रखते हैं? क्या यह सच नहीं है कि नीतीश ने मोदी के नाम पर वोट मांगकर अपना घोषणा पत्र जारी किए बिना ही बीजेपी के घोषणा पत्र पर 16 सांसद बना लिए? क्या यह यथार्थ नहीं है कि हर एक बिल पर वह बीजेपी का समर्थन कर रहे हैं? फिर वह अलग कैसे?

  • बिहार: JDU ने कहा- बीजेपी दे सफाई नीतीश को बदलने की मांग पर

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    बिहार की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। इस बार घमासान एनडीए के भीतर है। बीजेपी नेता संजय पासवान ने सीएम की कुर्सी अब अपनी पार्टी के लिए मांगते हुए नीतीश कुमार को केंद्र में जिम्मेदारी संभालने की सलाह दे दी है। बीजेपी नेता के इस बयान पर बिहार में गठबंधन सहयोगी जेडीयू ने कड़ी नाराजगी जताई है। बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व को बदलने की मांग वाले इस बयान पर जेडीयू ने अब बीजेपी से स्पष्टीकरण मांगा है।

    जेडीयू प्रवक्ता और पार्टी महासचिव पवन वर्मा ने कहा, ‘मेरा सवाल सिर्फ यह है कि क्या पासवान ने यह व्यक्तिगत रूप से बयान दिया है या फिर यह पार्टी की भी राय है? बीजेपी को यह बताने की जरूरत है कि जब बिहार में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर संजय पासवान बयान दे रहे हैं तो हम इस बयान को पार्टी से जोड़ें या इसे व्यक्तिगत राय समझें।’

    ‘जब तक गठबंधन, नीतीश रहेंगे चेहरा’
    उन्होंने आगे कहा, ‘नीतीश कुमार बिहार के सर्वमान्य नेता हैं। वह बिहार में एनडीए का भी चेहरा हैं। जब तक बिहार में बीजेपी और जेडीयू का गठबंधन रहेगा, नीतीश कुमार ही उसका चेहरा होंगे। इसे बीजेपी नेतृत्व द्वारा स्वीकार किया जा चुका है।’ पासवान ने कहा था, बीजेपी ने 15 साल तक बिहार में मुख्यमंत्री पद पर नीतीश कुमार को स्वीकार किया। पर, अब समय आ गया है कि वह बीजेपी के लिए इस पद को छोड़ें और केंद्र की जिम्मेदारी संभालें।’

    ‘कुछ मुद्दों पर हमारे विचार अलग’
    बीजेपी नेता ने आगे कहा था, ”हमने लोकसभा चुनाव साथ लड़े लेकिन विधानसभा चुनाव अलग लड़ा। हम अगला विधानसभा चुनाव भी साथ लड़ेंगे और उसके बाद यह तय करेंगे कि हमारा नेता कौन होगा। हम नीतीश कुमार के काम, ईमानदारी और सुशासन में विश्वास करते हैं। मैं सिर्फ इतना कहता हूं कि कुछ मुद्दे हैं, जिसे लेकर हमारे बीच अंतर है, जैसे- तीन तलाक, राम मंदिर और एनआरसी। लोग हमसे पूछते हैं कि आखिर इन मुद्दों पर बीजेपी और जेडीयू के विचार में अंतर क्यों है?

    ‘एक बार बीजेपी पर भरोसा करें नीतीश’

    पासवान ने आगे कहा था, ‘ऐसे में मैं नीतीश कुमार से अपील करता हूं कि वह देखें कि राज्य की जनता इन मुद्दों पर क्या सोच रही है। मैं नीतीशजी से अपील करता हूं कि वह एक बार बीजेपी पर भरोसा करें और हमारी पार्टी के किसी नेता को सीएम पद के लिए मौका दें।’

  • उत्तराखंड सरकार ने भी गुजरात के बाद अब घटाया ट्रैफिक फाइन, 50 फीसदी तक दी छूट

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    देशभर में नए ट्रैफिक नियमों के तहत बढ़े चालान शुल्क का विरोध देख राज्य सरकारों ने अपने स्तर पर राहत देने का सिलसिला शुरू कर दिया है। मंगलवार को गुजरात की बीजेपी सरकार ने छूट की घोषणा की तो 24 घंटे बाद ही उत्तराखंड भी उसके रास्ते पर चल पड़ा। यहां भी बीजेपी की सत्ता में है और बुधवार को राज्य सरकार ने भी कई नियमों में छूट देने की घोषणा की। संशोधित चालान शुल्क की लिस्ट भी जारी कर दी गई है। उधर, कर्नाटक के सीएम कार्यालय ने भी कहा है कि वह भी गुजरात की राह पर चलने की योजना बना रहे हैं। वहीं, महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार ने केंद्र ने फैसले पर फिर से विचार करने को कहा है। आपको बता दें कि दिल्ली सरकार भी अपने दायरे में आने वाले चालान शुल्क कटौती पर विचार कर रही है।

    उत्तराखंड सरकार ने नए नियमों में बदलाव करते हुए बिना लाइसेंस वाहन चलाने पर छूट देते हुए इस राशि को 2500 कर दिया है। केंद्र सरकार ने बिना लाइसेंस गाड़ी चलाने पर 500 रुपये पड़ने वाले फाइन को बढ़ाकर 5,000 कर दिया था। इसके अलावा लाइसेंस निरस्त करने के बाद भी वाहन चलाते हुए पाए जाने पर प्रदेश में 10,000 की जगह 5,000 रुपये का ही चालान काटा जाएगा। वहीं, मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने पर पहली बार 1000 रुपये और दूसरी बार 5,000 रुपये का चालान किया जाएगा।

    राज्य सरकार के फैसले की बड़ी बातें
    – ध्वनि प्रदूषण या वायु प्रदूषण संबंधी मानकों का उल्लंघन करने पर केंद्र ने 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया था, जिसे राज्य सरकार ने प्रथम अपराध के लिए 2,500 रुपये और उसके बाद के लिए 5,000 रुपये कर दिया है।

    • गाड़ी चलाते समय मोबाइल से बात करने पर नया शुल्क 5000 रुपये था, जिसे उत्तराखंड सरकार ने प्रथम अपराध के लिए 1,000 रुपये और उसके बाद के लिए 5,000 रुपये कर दिया है।

    • धारा 66(1) के उपबंधों का उल्लंघन कर बिना वैध परमिट के गाड़ी चलाने पर केंद्र ने 10,000 रुपये का जुर्माना रखा था, अब राज्य ने इसे घटाकर प्रथम अपराध के लिए 5,000 और उसके बाद के लिए 10,000 रुपये कर दिया है।

    • भारी वाहनों में क्षमता से अधिक ले जाने पर केंद्र ने 20,000 रुपये का जुर्माना रखा था, जिसे राज्य ने हल्के वाहन के लिए 2,000 रुपये, मध्यम एवं भारी मोटर वाहनों के लिए 5,000 रुपये कर दिया है।

    • गाड़ी में माल का गाड़ी से बाहर निकले होने पर केंद्र ने 20,000 का जुर्माना लगाया था, जिसे राज्य ने हल्के वाहनों के लिए 2,000 रुपये और भारी वाहनों के लिए 5,000 रुपये कर दिया है।

    • गाड़ी में बच्चों को सीट बेल्ट न लगाने पर केंद्र ने 1,000 रुपये का जुर्माना रखा है, जिसे राज्य ने 200 रुपये कर दिया है।

    • फायर ब्रिगेड की गाड़ी या ऐंबुलेंस को रास्ता न देने पर केंद्र ने 10,000 रुपये का जुर्माना रखा है, जिसे उत्तराखंड ने घटाकर 5,000 रुपये कर दिया है।

    • बिना इंश्योरेंस के गाड़ी चलाने पर केंद्र ने प्रथम अपराध के लिए 2,000 और उसके बाद के लिए 4,000 रखा था जिसे राज्य सरकार ने दो पहिया और तीन पहिया वाहनों के लिए पहले अपराध पर 1,000 और बाद में 2,000 रुपये कर दिया है। इसी प्रकार से चार पहिया वाहनों के लिए 2,000 और 4,000 रुपये कर दिया है।

    • नाबालिग को गाड़ी चलाने के लिए देने पर केंद्र ने 5,000 का जुर्माना रखा था, जिसे उत्तराखंड सरकार ने 2,500 कर दिया है।

    • लाइसेंस के लिए अपात्र घोषित किए गए व्यक्ति के गाड़ी चलाने का जुर्माना 10,000 से घटाकर 5,000 रुपये कर दिया गया है।

    • गाड़ी के डीलर द्वारा नियमों के खिलाफ जाकर गाड़ी बेचने पर 1 लाख का जुर्माना था, जिसे अब 50, 000 रुपये कर दिया गया है।

    • नियमों के खिलाफ गाड़ी से संबंधित किन्हीं सुरक्षा उपकरणों को बेचने पर 1 लाख का जुर्माना घटाकर 50,000 कर दिया गया है। आपको बता दें कि उत्तराखंड सरकार ने केंद्र के कई ट्रैफिक नियमों को बरकरार रखा है।

    ‘गुजरात मॉडल’ की स्टडी कर रहा कर्नाटक
    कर्नाटक के सीएम बीएस येदियुरप्पा के कार्यालय की तरफ से कहा गया है कि बुधवार को अधिकारियों को चालान शुल्क में कटौती के गुजरात मॉडल का अध्ययन करने के निर्देश दे दिए गए हैं, ताकि वैसे ही नियम लागू किए जा सकें। ऐसे में माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में यहां भी लोगों को ट्रैफिक चालान पर छूट की घोषणा की जा सकती है।

    एक दिन पहले गुजरात ने घटाया था फाइन
    इससे पहले केंद्र सरकार द्वारा मोटर वीइकल्स ऐक्ट में संशोधन के महज 10 दिन बाद गुजरात सरकार ने मंगलवार को कई जुर्माने घटा दिए थे। ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर केंद्र के बढ़ाए जुर्माने को गुजरात सरकार ने 25% से 90% तक कम कर दिया था। मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने इसके लिए मानवीय आधार को कारण बताया था।

    इस नियम को लागू नहीं करेंगी ममता
    वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि उनकी सरकार फिलहाल इस नियम को लागू नहीं करेगी। उनका तर्क है कि इससे राज्य की जनता पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसके अलावा बीजेपी शासित महाराष्ट्र ने फिलहाल नए कानून को राज्य में लागू न करने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने इसे लागू न करने और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से इसपर पुनर्विचार करने की अपील की है।

    गडकरी बोले, राज्य फैसले लेने के लिए स्वतंत्र
    केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुजरात द्वारा यातायात नियमों के उल्लंघन पर बढ़ाए गए जुर्माने में भारी कटौती करने को ज्यादा तूल नहीं देते हुए कहा कि यह मामला समवर्ती सूची का है और इसमें राज्य अपने फैसले लेने को स्वतंत्र हैं। गडकरी ने कहा, ‘पहली बात यह है कि मोटर वाहन कानून समवर्ती सूची में है। केंद्र और राज्य सरकारों को इस बारे में कानून बनाने का अधिकार है। राज्य वही फैसला लेंगे जो उन्हें उचित लगेगा।’

    उन्होंने दोहराया कि सरकार की मंशा जुर्माना बढ़ाकर राजस्व जुटाने की नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि जुर्माना बढ़ाने की वजह से राजस्व बढ़ता भी है तो यह राज्यों के खजाने में जाएगा। मोटर वाहन कानून के तहत जुर्माने में भारी बढ़ोतरी का बचाव करते हुए मंत्री ने कहा कि दुर्घटनाओं में कमी लाकर लोगों की जिंदगी बचाना महत्वपूर्ण है। देश में हर साल पांच लाख दुर्घटनाएं होती हैं जिनमें डेढ़ लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है और तीन लाख अन्य घायल हो जाते हैं। विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्य मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल पहले ही इस कानून को लागू करने से इनकार कर चुके हैं।

  • जारी रहेगा बारिश का कहर, पानी-पानी हुआ मध्य प्रदेश

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    मध्य प्रदेश में मूसलाधार बारिश और बाढ़ से जिंदगी ठहर गई है। राजधानी भोपाल में भारी बारिश लोगों के लिए मुसीबत बनकर आई है। शहर के निचले इलाके पानी में डूब गए हैं। 2016 के बाद पहली बार कोलार डैम के गेट खोलने पड़े हैं। हरदा में हुई बारिश ने जेल के कैदियों को मुश्किल में डाल दिया। इस बीच मौसम विभाग की मानें तो अगले दो दिन सूबे के लोगों पर भारी हैं। तस्वीरों में देखें राज्य का हाल…

    राज्य में यलो अलर्ट

    राज्य के 32 जिलों में भारी से बेहद भारी बारिश का अनुमान है। सोमवार से 48 घंटे के लिए मौसम विभाग ने रेड, ऑरेंज और यलो अलर्ट जारी किया है।

    तीन दिन से बारिश

    भोपाल में पिछले तीन दिन से भारी बारिश हो रही है। मूसलाधार बारिश का सिलसिला सोमवार शाम तक जारी रहा, जिसके चलते आम जनजीवन ठप हो गया। रविवार सुबह से सोमवार शाम तक यहां 160 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

    निचले इलाकों में पानी

    शहर के कई निचले इलाकों में पानी घुस गया है। कोलार, समर्धनगर और नेहरूनगर जैसे इलाके बुरी तरह प्रभावित हैं। 100 से ज्यादा परिवारों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया गया है।

    तीन साल में पहली बार खोले गए गेट

    तीन साल में पहली बार कोलार डैम के गेट खोले गए हैं। क्षेत्र में भारी बारिश की वजह से डैम के 8 में से दो गेट खोल दिए गए हैं

    जेल में घुसा पानी

    सुखनी नदी का जलस्तर बढ़ने की वजह से सोमवार सुबह हरदा जिला जेल में पानी घुस गया, जिसके बाद 4 महिला कैदियों समेत 331 कैदियों को दूसरी बैरकों में शिफ्ट करना पड़ा। पिछले कुछ दिन से हो रही भारी बारिश के बाद यहां 9 रिलीफ कैंप बनाए गए हैं।

    नदी-नाले उफान पर

    सोमवार शाम तक मिले आंकड़ों के मुताबिक सिवनी में 24 घंटे के दौरान सबसे अधिक 31 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। भारी बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं और प्रदेश के कई जगहों पर सड़क यातायात अवरुद्ध होने के साथ-साथ कई निचले इलाके जलमग्न हो गए।

  • मगध यूनिवर्सिटी के मुख्य ऑफिस के गेट में छात्रों ने लगाया ताला, किया हंगामा

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    मगध यूनिवर्सिटी में रिजल्ट को लेकर बीएड के छात्रों ने हंगामा शुरु कर दिया है। सोमवार को यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट में ताला लगा दिया और अनिश्चिकालीन बंद का घोषणा कर दी। पदाधिकारियों और कर्मियों को ऑफिस के अंदर प्रवेश करने से रोक दिया और जमकर नारेबाजी करने लगे। विवि का कामकाज ठप कर दिया है। माहौल बिगड़ते देख बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। लेकिन छात्रों के गुस्से के सामने पुलिस चुपचाप खड़ी रही।

    ये सभी बीएड सत्र 2017-19 के छात्र हैं। रिजल्ट नहीं मिलने आक्रोशित हैं। शनिवार से प्रशासकीय भवन के गेट पर धरना व अनशन पर बैठे हैं। धरना पर बैठे आंदोलनरत छात्रों ने अपनी मांग जायज बताते हुए मांग पूरा होने तक पीछे नहीं हटने की बात पर अड़े हैं। आक्रोशित छात्रों का कहना है कि जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जाती है, तब तक हमारा आंदोलन चलता रहेगा। हालांकि विश्विद्यालय छात्रों को 18 सितंबर तक रिजल्ट देने का आश्वसन दे रही है। लेकिन छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय अपने वादे पर कभी खरा नहीं उतरती। सिर्फ आश्वासन देकर टालमटोल करती है। आमरण अनशन पर बैठे पांच छात्रों की हालत बिगड़ती जा रही है।

    रविवार को विश्वविद्यालय बंद रहने के बावजूद छात्र अपनी मांग पर अड़े रहे।  उनका कहना है शिक्षक नियोजन परीक्षा में आवेदन करने के लिए रिजल्ट चाहिए। लेकिन यूनिवर्सिटी समय पर रिजल्ट नहीं दे रही है। जिसके कारण हमलोग शिक्षक नियोजन परीक्षा के लिए फार्म भरने से वंचित हो सकते हैं। जबतक रिजल्ट नहीं मिलती तबतक अनशन जारी रखने की जिद पर अड़े हैं।

    वहीं विवि कंट्रोलर डॉ विनोद कुमार सिंह का कहना है। छात्रों के भविष्य को देखते हुए वीसी के आग्रह करने पर शिक्षक नियोजन परीक्षा के फार्म भरने की तिथि 25 सितंबर तक करवाई गई है। छात्रों को 18 सितंबर तक हरहाल में रिजल्ट दे दिया जाएगा। फिर भी छात्र अपने जिद पर अड़े है। जो उचित नहीं। छात्र साजिश के शिकार हो रहे हैं।

  • हेमंत सोरेन ने रघुवर दास के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करने का किया ऐलान

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    पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करने का ऐलान किया है। अपने आवास पर रविवार को संवाददाता सम्मेलन बुलाकर उन्होंने इसकी घोषणा की। हेमंत ने सीएम को लीगल नोटिस भेजकर माफी मांगने के लिए सात दिन की मोहलत दी है।  ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री ने हेमंत सोरेन पर 500 करोड़ की जमीन खरीदने का आरोप लगाया था।

    हेमंत सोरेन ने कहा कि उन्हें आश्चर्य है कि 500 करोड़ की अवैध संपत्ति खरीदने पर भी वे जेल के बाहर क्यों हैं। उन्होंने आरोप लगाने के बदले खुद को गिरफ्तार करने की चुनौती  मुख्यमंत्री को दी। हेमंत सोरेन ने कहा कि छ‌वि किसी भी व्यक्ति की पूंजी होती है। सीएम राजनीतिक लाभ के लिए उनपर झूठे आरोप लगा रहे हैं। आगे इसका कड़ा प्रतिकार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के मन में आदिवासियों के प्रति नफरत भरी है, लेकिन धरतीपुत्रों को आतंकित करने की हर कोशिश को झामुमो नाकाम करेगा। हेमंत सोरेन ने जमीन की गड़बड़ी की जांच के लिए गठित एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की।

    हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री रघुवर दास के कथित साले खेमचंद साहू पर जमशेदपुर में मनीष दास नामक व्यक्ति की मकान और संपत्ति पर कब्जा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मनीष दास ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार अदालत के फैसले का इंतजार क्यों कर रही है। अपनी एजेंसियों से जांच कर पीड़ित के साथ न्याय क्यों नहीं कर रही है। उन्होंने सीएम के रिश्तेदारों की गड़बड़ी को सत्ता का संरक्षण होने का आरोप लगाया।

  • पंचायत चुनाव: राज्य निर्वाचन आयोग के सामने खड़ा नामांकन प्रक्रिया पूरी कराने का संकट

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    पंचायत चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से चार दिन पहले ही राज्य निर्वाचन आयोग उम्मीदवारों के लिए लागू दो बच्चों की शर्त को लेकर उलझ गया है। पंचायतीराज विभाग को इस ऐक्ट की उलझनों पर प्रश्नावली तैयार कर निर्वाचन आयोग ने स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। उत्तराखंड में 20 सितंबर से पंचायत चुनाव के नामांकन होने हैं। इस बार यह चुनाव लड़ने के लिए अधिकतम दो बच्चों की शर्त लागू कर दी गई है। यानी ऐसे लोग जिनकी तीसरी संतान है, वो चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। लेकिन, दो बच्चों की शर्त के लिए पंचायतीराज ऐक्ट में कई अहम बातों का जिक्र नहीं है।

    इस कारण आयोग के सामने नामांकन प्रक्रिया पूरी कराने का संकट खड़ा हो गया है। दरअसल, आयोग के पास तमाम लोग अपनी उलझन लेकर आ रहे हैं। इसलिए आयोग की ओर से सचिव रोशन लाल ने सचिव पंचायतीराज को पत्र लिखकर, नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। इस पत्र में यह भी लिखा गया है कि उम्मीदवारों के लिए तय की गई शैक्षिक योग्यता में ओबीसी वर्ग का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इसलिए इस पर भी स्थिति स्पष्ट की जाए। ऐक्ट में इस बात का भी उल्लेख नहीं है कि यदि उम्मीदवार के निर्वाचित होने के बाद तीसरी संतान पैदा होती है तो निर्वाचन खारिज होगा या नहीं। इधर, आयोग के पत्र के बाद न्याय विभाग से राय मांगी गई है। पंचायतीराज विभाग कुछ राज्यों में लागू ऐसे कानून का अध्ययन भी कर रहा है।

     

    आयोग के सवाल

    • प्रत्याशी के दूसरे गर्भधारण पर यदि जुड़वा बच्चे पैदा हुए तो बच्चों की संख्या कितनी गिनी जाएगी?
    • प्रत्याशी तीसरी संतान गोद देता है तो जन्म देने वाली की तीसरी संतान गिनी जाएगी या नहीं?
    • यदि प्रत्याशी ने तीसरी संतान गोद ली हुई है तो क्या उनकी तीसरी संतान गिनी जाएगी?
    • यदि किसी महिला ने ऐसे पुरुष से शादी की है, जिनकी पहली पत्नी से दो बच्चे हैं तो महिला प्रत्याशी से पैदा बच्चे को तीसरी संतान गिना जाएगा?

     

     

    पंचायतीराज ऐक्ट की व्याख्या शासन ही कर सकता है, इसलिए आयोग ने शासन से कुछ बिंदुओं पर जवाब मांगा है। नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने से पहले इस पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
    चंद्रशेखर भट्ट, राज्य निर्वाचन आयुक्त 

  • लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए पटना में जिला प्रशासन दे रहा थोड़ी राहत

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    सड़कों पर जहां चेकिंग प्वाइंट बनाए गए हैं, वहां 16 सितंबर से वाहनों के प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र और बीमा के कागजात बनाए जाएंगे। जिला प्रशासन यह सुविधा आम लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए शुरू कर रहा है। 16 से 22 सितंबर तक चेकिंग प्वाइंट पर पुलिसवाले लोगों के कागजात बनवाने में सहयोग करेंगे।

    पुलिसवाले लोगों को नए ट्रैफिक नियमों की जानकारी भी देंगे। सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। शिक्षण संस्थान, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, पार्क, यात्री बस, पेट्रोल पंप पर लोगों को बैनर पोस्टर, होर्डिंग, पम्फलेट आदि से जागरूक किया जाएगा। साथ ही सड़क सुरक्षा के उपायों से भी अवगत कराएंगे। डीएम कुमार रवि की अध्यक्षता में रविवार को जिले के आला अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें जागरूकता अभियान चलाने से संबंधित निर्णय लिया गया।

    जिला प्रशासन की वेबसाइट से भी ले सकते हैं जानकारी
    नए ट्रैफिक नियम लागू होने के बाद वाहनों के कागजात की चेकिंग सख्ती से की जा रही है। इसीलिए जिला प्रशासन ने लोगों की सुविधा के लिए अपनी वेबसाइट पर प्रदूषण जांच केंद्रों की सूची जारी कर दी है। जिला प्रशासन की वेबसाइट से लोग अपने निकटवर्ती प्रदूषण जांच केंद्र की जानकारी ले सकते हैं।

    यहां बनवाएं कागजात
    कंकड़बाग, पुराना बाइपास, बेली रोड, फ्रेजर रोड, एसपी वर्मा रोड, बोरिंग कैनाल रोड, बोरिंग रोड, हार्डिंग रोड, गांधी मैदान, अशोक राजपथ, राजापुर-दीघा रोड आदि।

  • प्रदूषण जांच केंद्र 15 दिन में खुलेंगे उत्तराखंड के पेट्रोल पंपों पर

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    राज्य के पेट्रोल पंपों पर प्रदूषण जांच की सुविधा इस महीने के आखिर तक मिलने की उम्मीद है। हर पेट्रोल पंप पर जांच केंद्र बनाने के सरकार के आदेश के बाद तेल कंपनियां भी हरकत में आ गईं।  तेल उद्योग के राज्य समन्वयक मनोज जयंत ने कहा-इस बाबत सभी पंप मालिकों को निर्देश दे दिए हैं। जांच केंद्र का पूरा सिस्टम 10 से 15 दिन में तैयार हो जाता है। इसे लेकर पंप मालिकों ने जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया है। नया मोटर व्हीकल ऐक्ट लागू होने के बाद प्रदूषण जांच कराने के लिए पूरे राज्य में अफरा-तफरी का माहौल है। राज्य में बामुश्किल 100 प्रदूषण जांच केंद्र होने के कारण ज्यादा मुश्किल हो रही है। इस दिक्कत से निपटने के लिए सरकार ने सभी पेट्रोल पंप संचालकों को जांच केंद्र बनाने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट भी इस बाबत आदेश कर चुका है। ढाई से तीन लाख रुपये तक आता है खर्च : प्रदूषण जांच केंद्र को स्थापित करने का खर्च ढाई लाख रुपये से तीन लाख रुपये तक है। हालांकि सरकार से एकाएक जांच केंद्र बनाने का आदेश मिलने से पेट्रोल पंप संचालक ऊहापोह में है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नया ऐक्ट लागू होने से करीब एक महीना पहले जांच केंद्र के लिए तैयारी कर ली जाती तो यह समस्या ज्यादा नहीं बढ़ती।

     

    सरकार ने खाद्य विभाग को पेट्रोल पंपों पर प्रदूषण जांच केंद्र बनाने की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दे दिए है। खाद्य विभाग ने भी अपने स्तर से कार्रवाई शुरू कर दी है। इन जांच केंद्र के बनने से वाहन चालकों को प्रदूषण जांच कराने के लिए परेशानी नहीं उठानी होगी।
    शैलेश बगोली, सचिव एवं आयुक्त-परिवहनपेट्रोल पंपों