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  • मानहानि केस में कांग्रेस प्रवक्ता को 2 साल की जेल

    भोपाल.। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान की मानहानि के मामले में प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा को जिला अदालत दोषी करार दिया है. यह मामला विशेष सत्र न्यायाधीश काशीनाथ सिंह की अदालत में चल रहा था. मिश्रा को दो वर्ष की सजा और 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है. केके मिश्रा को इस मामले 50 हजार रुपए के बांड पर जमानत मिल गई है. मुख्यमंत्री की मानहानि के इस मामले में सरकार की ओर से अधिवक्ता आनंद तिवारी ने 2014 में याचिका लगाई थी. हाईकोर्ट ने इसमें छह महीने में सुनवाई पूरी करने के आदेश दिए थे. गौरतलब है कि केके मिश्रा ने सीएम शिवराज सिंह चैहान और उनकी पत्नी साधना सिंह पर व्यापमं घोटाले में शामिल होने के आरोप लगाए थे. जिसके बाद शिवराज सिंह ने उनके खिलाफ मानहानि का मामला लगाया था.।

    ह आरोप लगाया था

    कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने परिवहन आरक्षक भर्ती में सीएम की पत्नी साधना सिंह की भूमिका पर सवाल उठाए थे. इसके बाद शिवराज सिंह ने कहा था, श्गोंदिया (महाराष्ट्र) से मेरी पत्नी के किसी भी रिश्तेदार को मध्य प्रदेश में परिवहन आरक्षक के लिए नहीं चुना गया. कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं कि गोंदिया से 17 लोगों को भर्ती किया गया है. ऐसे आधारहीन आरोप लगाने वाले कभी तथ्यों को जानने की कोशिश नहीं करते. कहा जा रहा है कि सीएम हाउस से 139 फोन करे गए. जबकि उनके द्वारा जारी की गई कॉल डिटेल में एक भी नंबर सीएम हाउस का नहीं है.

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    बदनाम करने वालों को ऐसे ही नहीं छोड़ सकते

    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने ट्वीट कर कहा था, श्हम बेबुनियाद आरोप लगाने वालों को ऐसे ही नहीं छोड़ सकते हैं. ये साफ तौर पर मानहानि का मामला है. किसी पर आरोप लगने के बाद मीडिया उसका पक्ष भी लेती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ. मैं जानता हूं कि हारने पर लोगों को तकलीफ होती है, खासकर दो-दो बार हारने पर. कुछ ही लोग हैं जो पार्टी की हार को गरिमा के साथ स्वीकार करते हैं. लेकिन, क्या इन लोगों को इतना नीचे गिर जाना चाहिए?

    क्या है मानहानि कानून?

    आईपीसी की धारा 500 और 501 लोगों के आत्मसम्मान की रक्षा करने के लिए बनाई गई है. इसमें किसी भी शख्स की ओर से बेबुनियाद बयान या लिखित तौर पर भ्रामक जानकारी फैलाने पर मानहानि केस फाइल किया जा सकता है. दोषी पाए जाने पर इसमें अधिकतम 2 साल की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकता है.।

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  • ट्रांसफर वाली मैडम: 13 साल की नौकरी, नौ तबादले, 25 तहसीले

    भोपाल। मध्यप्रदेश राजस्व विभाग की महिला अधिकारी अमिता सिंह तोमर ने प्रदेश सरकार द्वारा बार-बार किए जा रहे अपने तबादले से परेशान होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है.। तहसीलदार अमिता का दो दिन पहले ही राजगढ़ जिले की ब्यावरा तहसील से सीधी जिले में तबादला किया गया है. यह उनकी 13 साल की नौकरी के दौरान नौवां तबादला है. अब तक वह प्रदेश के विभिन्न जिलों की 25 तहसीलों में काम कर चुकी हैं.।
    राजगढ़ जिले की ब्यावरा तहसील में पदस्थ महिला तहसीलदार अमिता ने बताया, मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मेरा बार-बार तबादला करने के मामले में हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की गुहार लगाई है. उन्होंने कहा, 13 साल की नौकरी के दौरान यह मेरा नौवां तबादला हुआ है. इसके अलावा मुझे अब तक 25 तहसीलों में काम करने हेतु शिफ्ट भी किया गया है।

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    कौन बनेगा करोडपति में 50 लाख रुपये जीतने एवं फेसबुक में विवादित टिप्पणी करने के बाद सुर्खियों में रही अमिता ने बताया, मैंने राज्य सरकार से मांग की थी कि मेरे स्वयं के व्यय से मेरा स्थानांतरण मेरे गृह जिले ग्वालियर में किया जाए, लेकिन सरकार ने दो दिन पहले मेरा तबादला 500 किमी दूर सीधी में कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ब्यावरा में उन्होंने जिन प्रभावशाली लोगों का अतिक्रमण हटाया था, उनके कहने पर सरकार ने उनका तबादला किया है।

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    सिंहस्थ कुंभ मेला के दौरान एवं अन्य कई अवसरों पर अच्छे काम के लिए प्रमाण-पत्र, पुरस्कार एवं मेडल पाने वाली अमिता ने कहा, केवल तीन महीने पहले ही मुझे ब्यावरा में भेजा गया था. अब मेरा तबादला सीधी कर दिया गया है. मैंने अपने तबादले के बारे में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान के अलावा प्रदेश के मुख्य सचिव एवं राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव को भी पत्र लिखा हैश्. उन्होंने कहा, मैंने कौन बनेगा करोड़पति में 50 लाख रुपये जीते थे, तब से लोग मुझे केबीसी वाली मैडम कहते थे, लेकिन बार-बार हो रहे तबादलों के कारण मुझे ट्रांसफर वाली मैडम कहा जाने लगा. मुझे मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। अमिता ने बताया कि अधिकांश तहसीलदारों की पूरी नौकरी 2-4 जिलों में ही पूरी हो जाती है, लेकिन मुझे 13 साल में 25 तहसीलों में शिफ्ट कर दिया गया, जिनमें नौ तबादले शामिल हैं.। (इनपुट भाषा से)

  • रात होते ही इंसान पत्थर में हो जाते हैं तब्दील इस मंदिर में

    आपने कई फिल्में ऐसी देखी होंगी जिनमें पुराने मंदिरों और खंडहरों के बारे में जिक्र किया गया हो

     

    दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो इस तरह के जगह को देखना-घूमना पसंद करते हैं। आज हम आपको राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित किराडू मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं। इस मंदिर की खूबसूरती को देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। इसकी शिल्प कला ऐसी है कि इसका दूसरा नाम ही ‘राजस्थान का खजुराहो’ पड़ गया। लेकिन इस मंदिर को लेकर जो सबसे खास बात है वह ये कि इस मंदिर को शापित बताया जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर को सालों पहले एक साधू ने श्राप दिया था जिसके बाद धीरे-धीरे ये मंदिर खंडहर में तबदील होने लगा। ये मंदिर पिछले 900 सालों से वीरान पड़ा है। इस मंदिर में दिन में तो लोग घूमते हुए नजर आ भी जाएंगे लेकिन रात को यहां जाने की हिम्मत कोई नहीं करता। इस मंदिर को लेकर लोगों के बीच ऐसी धारणा बनी हुई है कि जो भी व्यक्ति रात के अंधेरे में यहां जाएगा वह पत्थर का बन जाएगा।

    सालों से इस मंदिर को लेकर वहां रहने वाले लोगों के बीच ऐसी मान्यता बनी हुई है। कहा जाता है कि सदियों पहले इस मंदिर में देशाटन नामक एक साधू आए थे। उस साधू के साथ उनके कुछ शिष्य भी थे। साधू ने अपने शिष्य को वहीं छोड़ दिया और भ्रमण के लिए आगे चले गए। उनकी गैर-मौजूदगी में शिष्यों की हालत खराब हो गई। जब साधू वापस लौटे तो उन्होंने देखा कि गांव का कोई भी व्यक्ति शिष्यों की मदद के लिए आगे नहीं आया।

     

    पूरे गांव में बस एक कुम्हारिन थी जिसने उनकी मदद की थी। ऐसे में साधू ने गुस्से में पूरे गांव को श्राप दे दिया। साधू ने कहा, यहां के लोगों का दिल पत्थर का है और ऐसे लोगों को इंसान रहने का कोई हक नहीं। साधू ने बस कुम्हारिन को गांव छोड़ने के लिए कहा। साधु ने कहा कि अगर तुम पत्थर की नहीं बनना चाहती थी तो गांव छोड़ दो। तब से लेकर आज तक कोई इस मंदिर में रात को रुकने की हिम्मत नहीं करता।

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  • अयोध्या में सिर्फ राम मंदिर ही बनना चाहिये, दूसरा ढांचा नही : मोहन भागवत

    उडुपी. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर मुद्दे पर कहा है कि राम जन्म भूमि पर सिर्फ राम मंदिर ही बनाया जाना चाहिये कोई दूसरा ढांचा नहीं.। कर्नाटक के उडुपी में चल रहे धर्म संसद के दौरान मोहन भागवत देश भर से आए 2000 संतों और विश्व हिंदू परिषद् के नेताओं को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर किसी तरह का संदेह नहीं होना चाहिये।
    उन्होंने कहा, श्हम इसका निर्माण करेंगे. ये कोई चुनावी घोषणा नहीं है बल्कि हमारी आस्था का विषय है। संघ प्रमुख ने कहा कि सालों तक दिये गए बलिदान और कोशिशों के बाद अब इसके निर्माण की संभावना नजर आ रही है. हालांकि उन्होंने माना कि मामला अभी कोर्ट में है.। उन्होंने कहा, राम मंदिर ही बनना चाहिये कुछ और नहीं. इस वहीं पर बनाया जाना चाहिये.। उन्होंने कहा कि मंदिर को उसी तरह का भव्य बनाया जाएगा जैसा वहां हुआ करता था. उन्होंने कहा कि उसके निर्माण के लिये उन्हीं पत्थरों का इस्तेमाल किया जाएगा जिसका उस समय के मंदिरों के निर्माण के लिये किया गया था.।

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    उन्होंने कहा कि इसेक निर्माण के पहले लोगों के बीच जागरूकता फैलानी होगी. उन्होंने कहा, श्हम इस समय अपना लक्ष् पाने के नजदीक हैं, लेकिन हमें इस संबंध में सावधान रहना पड़ेगा.। वीएचपी की तरफ से आयोजित इस धर्म संसद में राम मंदिर, धर्मांतरण और गोरक्षा पर चर्चा की जाएगी.। सुप्रीम कोर्ट में 5 दिसंबर से अयोध्या मामले पर आखिरी सुनवाई होने जा रही है और उससे पहले मोहन भागवत के इस बयान से राजनीतिक भीचाल आ सकता है.।

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  • IPS डी रूपा के खिलाफ 20 करोड़ का मानहानि का मुकदमा, किया था शशिकला के वीआईपी ट्रीटमेंट का खुलासा

    जेल में शशिकला के वीआईपी ट्रीटमेंट को उजागर करने वालीं आईपीएस डी रूपा पर एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने मानहानि का मुकदमा दायर किया है. जेल के पूर्व क्ळच् एचएन सत्यनारायण ने रूपा पर 20 करोड़ का मानहानि का मुकदमा ठोका है. रूपा ने सत्यनारायण पर शशिकला को वीआईपी ट्रीटमेंट देने का आरोपी बताया था।.

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    डी रूपा ने जुलाई में डीजीपी एचएन सत्यवारायण राव को सौंपी अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि शशिकला को वीआईपी ट्रीटमेंट देने के लिए 2 करोड़ रुपये इधर-उधर किए गए हैं और उनपर भी रिश्वतखोरी के आरोप हैं. राव ने रूपा के सभी आरोपों को निराधार झूठा बताया था और कहा था कि वो उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाई करेंगे. राव के वकील पुट्टिग रमेश का कहना है कि डी रूपा ने बिना कोई नोटिस दिए राव पर सीधे उनपर गलत तरीके से आरोप लगाया, जो नियमों का उल्लंघन था. रमेश का ये भी कहना है कि रूपा ने रिपोर्ट सौंपने से पहले ही मीडिया में ये बात लीक कर दी थी. हमने सुना है कि रूपा पर एक फिल्म बन रही है. उन्हें पब्लिसिटी चाहिए थी. उन्होंने जानबूझकर राव के खिलाफ बदनामी की ये रिपोर्ट तैयार की. डी रूपा के अलावा एक अंग्रेजी अखबार और कन्नड़ चैनल पर भी केस चलाया जाएगा.।

  • गुजरात चुनाव: 397 करोड़पति उम्मीदवारो बारे में जानिये

    अहमदाबाद। गुजरात विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों के चुनावी हलफनामे का विश्लेषण करने वाले दो गैर सरकारी संगठनों ने बताया कि कुल 397 उम्मीदवार करोड़पति हैं। इनमें सबसे अमीर उम्मीदवार दसकरोई सीट से कांग्रेस के पंकज पटेल हैं।
    एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और गुजरात इलेक्शन वॉच (जीईडब्ल्यू) की रिपोर्ट के मुताबिक दो चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव में कुल 1828 उम्मीदवारों में से 1098 ने या तो बारहवीं कक्षा या उससे भी कम पढ़ाई की है। महिला उम्मीदवारों की कुल संख्या 118 है।
    उम्मीदवारों के चुनावी हलफनामे के विश्लेषण के मुताबिक पहले चरण में चुनाव में उतरने वाले कुल 977 उम्मीदवारों में से 198 ने एक करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति घोषित की है। दूसरे चरण के कुल 851 उम्मीदवारों में से 199 करोड़पति हैं।

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    इस अध्ययन के मुताबिक 397 करोड़पति उम्मीदवारों में से 131 ने पांच करोड़ रुपए की संपत्ति की घोषणा की है जबकि 124 अन्य उम्मीदवारों ने दो करोड़ रुपए से पांच करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्ति घोषित की है।
    सत्तारूढ़ भाजपा ने 142 करोड़पति उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है जबकि विपक्षी कांग्रेस की ओर से ऐसे 127 उम्मीदवार हैं। राकांपा ने 17 करोड़पति उम्मीदवारों को उतारा है जबकि आप के 13 उम्मीदवार और बसपा के पांच उम्मीदवार करोड़पति हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 56 निर्दलीय उम्मीदवार भी करोड़पति हैं।
    सबसे अमीर उम्मीदवार दसकरोई सीट से कांग्रेस के पंकज पटेल हैं। उनकी कुल संपत्ति 231.93 करोड़ रुपए है। उनके बाद दूसरे नंबर पर कांग्रेस के ही राजकोट-वेस्ट सीट से इंद्रनील राजगुरू हैं। उनकी कुल संपत्ति 141.22 करोड़ रुपए है। तीसरे नंबर पर बोटाड सीट से भाजपा उम्मीदवार सौरभ पटेल हैं। वह गुजरात के पूर्व वित्त मंत्री भी हैं। उनकी कुल संपत्ति 123.78 करोड़ रुपए है।

    इसके ठीक विपरीत छह निर्दलीय उम्मीदवारों ने घोषणा की है कि उनके पास कोई चल-अचल संपत्ति नहीं है। शैक्षणिक योग्यता के मामले में, 1098 उम्मीदवारों ने पांचवी, आठवीं, दसवीं या बारहवीं कक्षा पास की है। 119 उम्मीदवारों ने कहा कि वह महज साक्षर हैं और 23 उम्मीदवारों ने खुद को निरक्षर बताया। (भाषा)

  • झामुमो विधायक ने कराई चुंबन प्रतियोगिता, भाजपा को ऐतराज

    रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता व विधायक सिमोन मरांडी ने जनजातीय लोगों की एक चुंबन प्रतियोगिता का आयोजन किया। इस चुंबन प्रतियोगिता की खबर सोमवार को स्थानीय अखबारों में छपी।

    झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता व विधायक सिमोन मरांडी ने शनिवार की रात तल्पाहारी गांव में जनजातीय जोड़ों की एक चुंबन प्रतियोगिता का आयोजन किया. यह गांव उनके विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र लिट्टीपारा में आता है। इस चुंबन प्रतियोगिता की खबर सोमवार को स्थानीय अखबारों में छपी।

    झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता व विधायक सिमोन मरांडी ने जनजातीय लोगों की एक चुंबन प्रतियोगिता में तीन जनजातीय जोड़ों को पुरस्कार दिया गया.।

    सिमोन मरांडी ने सोमवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा, चुंबन प्रतियोगिता का आयोजन प्यार व आधुनिकता को बढ़ावा देने के लिए किया गया था. जनजातीय लोग संकोची हैं. जनजातीय जोड़ों द्वारा प्रतियोगिता में खुले तौर पर चुंबन करने से उनकी झिझक दूर होगी.। उन्होंने कहा कि इससे जोड़ों को एक दूसरे को समझने में मदद मिलेगी और तलाक रुकेगा।

    कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने शिरकत की. झामुमो के विधायक व वरिष्ठ नेता स्टीफन मरांडी भी आयोजन में मौजूद थे.। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कार्यक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    वरिष्ठ भाजपा नेता रमेश पुष्कर ने आईएएनएस से कहा, इस तरह की प्रतियोगिता आयोजित कर झामुमो क्या साबित करने की कोशिश में है. बहुत सारे तरीके हैं जिसे अपनाकर जनजातीय लोगों की झिझक दूर की जा सकती है. सिमोन मरांडी ने जनजातीय संस्कृति व परंपरा का मजाक बनाने की कोशिश की है.।
    उन्होंने कहा, ष्झामुमो के एक विधायक विधानसभा परिसर में एक बार खोलने को कह रहे है और दूसरे विधायक चुंबन प्रतियोगिता आयोजित कर रहे हैं.। झामुमो के विधायक कुणाल सारंगी ने बीते सप्ताह विधानसभा परिसर में एक बार खोलने की वकालत की थी।

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  • 20 लाख रुपये की रंगदारी मांगी जिला पंचायत चैयरमैन से

    अपराधियों ने जिला परिषद अध्यक्ष से 20 लाख रुपये की रंगदारी फोन पर मांगी गई है। रंगदारी न देने पर जान से मारने की धमकी दी गई है।

    सिवान । बिहार के सिवान जिले के जिला परिषद अध्यक्ष संगीता देवी से 20 लाख रुपये की रंगदारी फोन पर मांगी गई है। रंगदारी न देने पर जान से मारने की धमकी दी गई है। इस आशय की एफआइआर जिप अध्यक्ष ने मुफस्सिल थाने में शनिवार को दर्ज कराई है।

    आरोपित पिता-पुत्र मुफस्सिल थाना के सियारी गांव के रहने वाले हैं। पुलिस इनकी गिरफ्तारी में जुट गई है। मुफस्सिल थाना प्रभारी अभिजीत कुमार के अनुसार आरोपित हरेंद्र के खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं।

    जिप अध्यक्ष ने बताया कि गत 11 दिसंबर को वे पुलिस लाइन के पास अपने कॉलेज में थीं। उसी समय हरेंद्र ने उनके मोबाइल पर फोन कर जान से मारने की धमकी देते हुए रंगदारी मांगी। इसके बाद फोन काट दिया। इसे मैंने गंभीरता से नहीं लिया। फिर गत 14 दिसंबर को हरेंद्र और उसका बेटा नन्हें जिला परिषद स्थित कार्यालय में आकर खोज रहा था।

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    कर्मियों ने बताया कि दोनों गालियां देते हुए जान से मारने की बात कर रहे थे। धमकी दी कि 20 लाख रुपये नहीं दिए तो पूरे परिवार का सफाया कर देंगे। पुलिस ने हरेंद्र और उसके बेटे नन्हें की तलाश में कई स्थानों पर छापेमारी की, लेकिन दोनों में कोई नहीं मिला।

  • BJP के इस सांसद का दावा _: भाजपा रही है हार, गुजरात में अबकी बार कांग्रेस सरकार

    पुणे, ज्यादातर एग्जिट पोल में गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा के जीत हासिल करने की संभावना जताए जाने के बीच पार्टी से राज्यसभा सदस्य संजय काकड़े ने दावा किया कि उनकी पार्टी राज्य में अगली सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीटें नहीं जीतेगी। काकड़े ने दावा किया, ‘‘पूर्ण बहुमत को भूल जाइए, पार्टी को सरकार बनाने तक के लिए पर्याप्त सीटें नहीं मिलेंगी। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचेगी।’’ उन्होंने कहा कि यदि फिर भी पार्टी ने राज्य में सत्ता कायम रखी तो भी यह सिर्फ और सिर्फ नरेन्द्र मोदी के चलते होगी। काकड़े ने दावा किया कि उनकी टीम ने गुजरात में एक सर्वेक्षण किया है और उनका दावा सर्वेक्षण के नतीजों पर आधारित है। ‘‘मैंने छह लोगों की एक टीम गुजरात भेजी थी। वे ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में गए जहां वे लोग किसानों, चालकों, वेटरों और श्रमिकों से मिले। उनके सर्वेक्षण के आधार पर और खुद के अवलोकन से मुझे लगता है कि भाजपा को गुजरात में पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा।’’ काकड़े ने अपने अनुमान के लिए भाजपा सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के खिलाफ नकरात्मक भावना की भाजपा को कीमत चुकानी पड़ सकती है। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि पिछली कुछ रैलियों में पार्टी नेताओं ने विकास पर एक शब्द नहीं बोला।

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  • कस्टम विभाग की कस्टडी में रखा सोना कैसे बना लोहा, पढ़िये पूरी खबर

    मुंबई. आमतौर पर ठग लोहे को सोना बना देने का दावा करते हैं, पर कस्टम विभाग के कर्मचारियों ने इसका उलटा कर दिया. पुलिस रिकार्ड में दर्ज सोने को लोहा बना दिया गया था. 22 साल पहले कस्टम वालों ने मुंबई एयरपोर्ट पर किसी यात्री के पास से 100 ग्राम के सोने के 33 बिस्कुट जब्त किए थे. बाकायदा पंचनामा कर इन बिस्कुट को एक लिफाफे के अंदर रखा गया. लिफाफे में जब्ती की तारीख व अन्य जरूरी जानकारियां भी लिखी गईं. फिर उसे सील कर दूसरे लिफाफे में रखा गया. इस दूसरे लिफाफे को भी सील कर उसमें भी तमाम जानकारियां लिखी गईं. इसके बाद इन बिस्कुट को एयरपोर्ट के अंदर कस्टम विभाग के दफ्तर में बनी तिजोरी में रख दिया गया था.

    नियम यह है, जिसके पास से ये बिस्कुट जब्त किए गए, यदि वह इन्हें वापस लौटाने के लिए मुकदमा दायर न करे, तो इनकी नीलामी कर दी जाती है. नीलामी के लिए कस्टम विभाग को अदालत से इजाजत लेनी पड़ती है. सन 1996 में कस्टम विभाग ने इन बिस्कुट की नीलामी की प्रक्रिया शुरू करने के लिए जब तिजोरी में रखे लिफाफे को और फिर इस लिफाफे के भी अंदर वाले लिफाफे को खोला, तो उसमें सोने के बिस्कुट के बजाय लोहे के टुकड़े मिले. यह देख कस्टम अधिकारियों के होश उड़ गए. उन्होंने पुलिस में शिकायत की.

    एक व्यक्ति आया शक के घेरे में
    इसी में एक शक के घेरे में आ गया। पर पुलिस ने उसे तत्काल दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया नहीं, बल्कि उस पर नजर बनाए रखने का फैसला किया। इसी में पुलिस को पता चला कि वह नियमित एक डांस बार में जाता है और एक बार बाला पर रुपए लुटाता है। करीब एक पखवाड़े बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। जब उससे पूछताछ हुई, तो उसने कबूला कि उसने गिरफ्तारी से छह महीने पहले 33 सोने के बिस्कुट तिजोरी से चुराए थे।

    कस्टम अधिकारी को दिया था धोखा

    पकड़े गए आरोपी के अनुसार, कस्टम अधिकारी बहुत मस्तमौला था। वह अक्सर कैरम या ताश खेलने में मस्त रहता था और उसने तिजोरी की सुरक्षा का जिम्मा उसे ही सौंप रखा था। उसी में उसने तिजोरी में रखे सोने के बिस्कुट के लिफाफे के ऊपर क्या-क्या लिखा है, वह नोट कर लिया। फिर उसी तरह का एक लिफाफा खरीदा। उस पर बिल्कुल वही लिख दिया। उसमें लोहे के टुकड़े रखे। लोहे वाले इस लिफाफे को सील किया और फिर इसे तिजोरी में रखकर बिस्कुट वाला लिफाफा गायब कर दिया।

    बिस्कुट चुराकर बेचा जूलर्स को
    लिफाफे में रखे 33 बिस्कुट में से उसने 23 मुंबई के चार अलग-अलग जूलर्स को बेच दिए। बदले में मिली रकम को उसने बार बाला पर लुटा दिया। शेष 10 बिस्कुट उसने अपने एक दोस्त को एक बंद लिफाफे में बिना किसी भनक के दे दिए कि इसमें गोल्ड है, लेकिन दोस्त को कुछ शक हुआ। उसने एक दिन यह लिफाफा खोला और इसमें जब उसे सोने के बिस्कुट दिखे, तो वह लालच में आ गया। उसने इसमें से तीन बिस्कुट निकाले और इसे अपने गांव में चूल्हे के नीचे जमीन खोदकर छिपा दिए।

    जब रमेश महाले व अन्य पुलिस + अधिकारियों द्वारा उससे पूछताछ के बाद उसके दोस्त का सुराग मिला, तो जांच टीम ने दोस्त के घर से वह लिफाफा जब्त कर लिया। पर लिफाफे में तीन बिस्कुट गायब पाकर सभी को लगा कि आरोपी झूठ बोल रहा है। लेकिन जब आरोपी बार-बार यह बोलता रहा कि उसने सिर्फ 23 ही बिस्कुट बेचे और दस बिस्कुट इस दोस्त को दिए थे, तब आरोपी के इस दोस्त से सख्ती से पूछताछ हुई। इसी में दोस्त ने तीन बिस्कुट गायब करने की बात करने की बात कबूली। उसके बाद चूल्हे की जमीन से ये तीन बिस्कुट निकाले गए। जिन जूलर्स को 23 बिस्कुट बेचे गए, उनसे भी इन्हें बरामद कर लिया गया। बाद में कस्टम विभाग को इन्हें वापस कर दिया गया।

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