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  • रैगिंग: छात्रों पर अत्याचार का नया रूप?

    रैगिंग: छात्रों पर अत्याचार का नया रूप?

    कुर्नूल के रयालसीमा विश्वविद्यालय में गुरुवार को एक रैगिंग घटना में पन्द्रह वरिष्ठ छात्रों के एक समूह ने इंजीनियरिंग के छात्र सुनील पर कथित रूप से हमला किया। घटना के बाद से विश्वविद्यालय में तनाव का माहौल है। यह घटना रैगिंग के नाम पर हिंसा के बढ़ते चलन पर चिंता पैदा करती है, और इस सवाल को भी उजागर करती है कि विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।

    रैगिंग: छात्रों पर अत्याचार और डर का माहौल

    रयालसीमा विश्वविद्यालय में हुई यह घटना इस बात का प्रमाण है कि रैगिंग एक गंभीर समस्या बनी हुई है। यह मामला तब और भी चिंताजनक हो जाता है जब रैगिंग के नाम पर जूनियर छात्रों को भयानक हमलों का सामना करना पड़ता है। घटना के प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वरिष्ठ छात्र, जूनियरों से परिचय सत्र के बहाने रैगिंग कर रहे थे और फिर उसका उपयोग उन्हें डराने और हानि पहुँचाने के लिए कर रहे थे। इस तरह के कृत्य छात्रों को अनावश्यक तनाव और डर का अनुभव कराते हैं, जिससे उनके शैक्षणिक जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

    घटना के विवरण:

    सूत्रों के अनुसार, घटना तब हुई जब सुनील अपने साथियों के साथ विश्वविद्यालय परिसर के भीतर से गुजर रहा था। उस पर वरिष्ठ छात्रों का एक समूह टूट पड़ा और उसे धमकाया, उसे पीटा और चोटें पहुँचाए। इस घटना में सुनील को काफी चोटें आईं। अन्य छात्रों ने घटना को देखकर उसे स्थानीय अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया, जहाँ उसकी स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है।

    घटना के बाद की प्रतिक्रिया और विश्वविद्यालय प्रबंधन की भूमिका:

    सुनील पर हमला की घटना ने विश्वविद्यालय में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। छात्र इस घटना को लेकर चिंतित हैं और आरोप लगा रहे हैं कि विश्वविद्यालय के अधिकारी रैगिंग के मामलों को बर्दाश्त कर रहे हैं। इस घटना में छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर अनुरोध के बावजूद कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है, जबकि यह घटना स्थानीय पुलिस स्टेशन के पास ही घटी। यह आरोप और भी खतरनाक हैं क्योंकि वे संस्थानों के भीतर मौजूद संरचनागत दोषों की ओर इशारा करते हैं।

    यह भी कहा जा रहा है कि हमले के पीछे शायद कुछ पूर्व विवाद रहा होगा। हालाँकि, विश्वविद्यालय अधिकारियों और पुलिस की जांच पूरी होने तक घटना का वास्तविक कारण अभी तक ज्ञात नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसी तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का भरोसा दिलाया है, लेकिन विश्वविद्यालय के आश्वासन पर अब बहुत सारे छात्रों का भरोसा नहीं रह गया है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने वरिष्ठ छात्रों द्वारा किए गए बर्ताव की निंदा की है और माता-पिता को विश्वास दिलाया है कि जिम्मेदार छात्रों के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई की जाएगी। लेकिन अब देखना यह है कि ये आश्वासन कितने प्रभावी होंगे और क्या अधिकारी वास्तव में रैगिंग के मामलों को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई करेंगे।

    रैगिंग: एक राष्ट्रीय समस्या

    रयालसीमा विश्वविद्यालय की घटना एक अकेला मामला नहीं है। भारत में विश्वविद्यालयों में रैगिंग की कई घटनाएं हुई हैं। हाल के वर्षों में रैगिंग के कई मामले सामने आए हैं जिन्होंने विश्वविद्यालयों में छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। हालांकि रैगिंग को रोकने के लिए कई कानून बनाए गए हैं, लेकिन विश्वविद्यालयों में इसका प्रचलन बंद नहीं हो पाया है। रैगिंग के खिलाफ अधिकारियों की निष्क्रियता से समस्या और भी गंभीर हो गई है।

    रैगिंग का क्या है कारण?

    रैगिंग एक जटिल समस्या है जिसके कई कारण होते हैं। यह बड़े पैमाने पर शक्ति के गलत इस्तेमाल से संबंधित होता है जो कि वर्षों से चल रहे बड़े पैमाने पर विषाक्त संस्कृति का फल होता है जहां छात्रों को खास तौर पर पहली बार विश्वविद्यालय में दाखिला लेने पर एक गैर पेशेवर तरीके से खौफ में रखा जाता है। विश्वविद्यालय के कुछ प्रोफेसर या अधिकारी रैगिंग को नजरअंदाज करते हैं और इससे समस्या और भी बढ़ जाती है। कई मामलों में रैगिंग में जात, धर्म, और सामाजिक पृष्ठभूमि का प्रभाव भी देखा जा सकता है।

    रैगिंग को रोकने के उपाय

    रैगिंग को रोकना एक कठिन कार्य है, लेकिन यह असंभव नहीं है। इस समस्या का समाधान करने के लिए एक सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है जिसमें विश्वविद्यालय प्रशासन, पुलिस और छात्रों को मिलकर काम करना होगा।

    प्रभावी समाधान:

    • सतर्कता बढ़ाएं: विश्वविद्यालय प्रशासन को रैगिंग के विरुद्ध अधिक सजग होना होगा और इसके मामलों को गंभीरता से लेना होगा। किसी भी रैगिंग घटना की तुरंत जांच करनी चाहिए और जिम्मेदार छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
    • विद्यार्थियों में जागरूकता पैदा करें: विश्वविद्यालय को छात्रों में रैगिंग के विरुद्ध जागरूकता पैदा करने के लिए कैम्पेन चलाने चाहिए और छात्रों को इस समस्या के विरुद्ध खड़े होने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
    • नियम का कड़ा इम्प्लीमेंटेशन: रैगिंग विरोधी कानून का कड़ा इम्प्लीमेंटेशन करना अति आवश्यक है। नियम तोड़ने वालों पर कड़ी सजा दिन से प्रभावी ढंग से रैगिंग को रोका जा सकता है।
    • पुलिस और विश्वविद्यालय मिलकर काम करें: पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन को मिलकर काम करना होगा और रैगिंग के विरुद्ध एक साझा रणनीति तैयार करनी होगा।

    निष्कर्ष

    रयालसीमा विश्वविद्यालय में हुई यह घटना सभी के लिए एक जागरूकता का संकेत है। देश में रैगिंग के खिलाफ लड़ाई के लिए सब को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। सभी छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रैगिंग को खत्म करना जरूरी है। यदि यह समस्या समाधान नहीं हो पाई तो विश्वविद्यालयों में डर का माहौल कायम रहेगा। रैगिंग न केवल छात्रों को शारीरिक तौर पर नुकसान पहुँचाती है बल्कि उनके मन पर भी गहरा प्रभाव डालती है। सभी छात्रों की सुरक्षा और उनके अकादमिक विकास के लिए रैगिंग के विरुद्ध लड़ना ज़रूरी है।

  • पुंगनूर गाय: विलुप्त होने के कगार पर एक अनोखी प्रजाति

    पुंगनूर गाय: विलुप्त होने के कगार पर एक अनोखी प्रजाति

    पुंगनूर गाय – विलुप्त होने के कगार पर एक अनोखी प्रजाति

    पुंगनूर गाय, जो दुनिया की सबसे छोटी गायों की प्रजातियों में से एक है, एक समय आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में बड़ी संख्या में पाई जाती थी। आज, केवल 50 से भी कम पुंगनूर गायें जीवित हैं। इन गायों की सीमित व्यावसायिक क्षमता और लोकप्रिय धारणाओं के बावजूद, इन प्राणियों का अस्तित्व संकट में है।

    पुंगनूर गाय की अनोखी पहचान

    पुंगनूर गाय अपनी छोटी कद-काठी और सुंदरता के लिए जानी जाती है। ये गायें केवल 80-90 सेमी ऊंची होती हैं और उनके शरीर का रंग भूरा, सफ़ेद या ग्रे होता है। उनकी गोल और काली आँखें और चुस्त-दुरुस्त शरीर उन्हें छोटे पालतू कुत्तों से मिलता-जुलता बनाते हैं। पुंगनूर गायें अपनी अद्वितीय चरित्र विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध हैं, वे मानवीय स्नेह के लिए जानी जाती हैं और अपने मालिकों से गहरा नाता जोड़ती हैं।

    पुंगनूर गाय की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

    यह माना जाता है कि पुंगनूर गायें देवी लक्ष्मी और कामधेनु का अवतार हैं। सदियों पहले, विजयनगर साम्राज्य के राजा और ज़मींदार इन गायों का पालन पोषण करते थे और उन्हें विशेष भोजन जैसे खजूर, काजू, बादाम और शहद-मिश्रित सब्ज़ियों और फलों के रस से खिलाते थे। यह उनकी धार्मिक महत्ता और आध्यात्मिक महत्व का प्रमाण है।

    व्यावसायिक संभावनाएं

    हालाँकि, व्यावसायिक रूप से, पुंगनूर गाय की प्रतिष्ठा कुछ अलग है।

    दूध उत्पादन

    यह देखा गया है कि ये गायें प्रतिदिन एक से डेढ़ लीटर दूध ही दे पाती हैं, जो अधिकतर एक छोटे परिवार की ज़रूरतें पूरी कर पाती हैं। इसलिए, इन गायों का व्यावसायिक दूध उत्पादन के लिए उपयोग सीमित है।

    अन्य उत्पादों की मांग

    दूसरी ओर, पुंगनूर गाय के गोबर और मूत्र की मांग काफी अधिक है। इनका उपयोग जैविक खाद और आयुर्वेदिक औषधियों के लिए किया जाता है। यह मांग उन आश्रमों से भी आती है जो हिमालय के तराई इलाकों में स्थित हैं।

    संकट और संरक्षण प्रयास

    गायों के अस्तित्व को खतरा

    पुंगनूर गाय की अत्यधिक पालाऊपन प्रकृति, उनका रोग प्रतिरोधक क्षमता, और कम दूध उत्पादन व्यावसायिक रूप से इसे लाभहीन बनाते हैं। इन कारणों से, कई किसान इन गायों को पालने से बचते हैं, जो उनकी संख्या में कमी का प्रमुख कारण है।

    सरकार द्वारा संरक्षण

    हालाँकि, केंद्र और राज्य सरकारों ने पुंगनूर गाय की इस दुर्लभ प्रजाति को संरक्षित करने के लिए विभिन्न प्रयास किए हैं। वे गायों को टीकाकरण और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करते हैं। लेकिन, इन प्रयासों के बावजूद, उनकी संख्या में वृद्धि न के बराबर है।

    सीखने के बिंदु

    • पुंगनूर गाय, एक अनोखी और सुंदर प्रजाति, दुर्लभ होती जा रही है।
    • इन गायों का पालन करना उनकी अत्यधिक पालाऊपन प्रकृति और सीमित दूध उत्पादन के कारण व्यावसायिक रूप से कम लाभदायक है।
    • गोबर और मूत्र की बढ़ती मांग एक बड़ा अवसर प्रदान करती है।
    • सरकारी संरक्षण और जनजागरूकता इस प्रजाति को विलुप्त होने से बचाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • रेलवे निजीकरण: सुरक्षा के लिए खतरा या विकास का रास्ता?

    रेलवे निजीकरण: सुरक्षा के लिए खतरा या विकास का रास्ता?

    भारतीय रेलवे, दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रेलवे, यात्री सुरक्षा के मामले में लापरवाही बरत रही है। यह आरोप रेलवे कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन (RCWU) के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष एम. साईबाबू ने लगाया है। उन्होंने विशाखापत्तनम में शनिवार (19 अक्टूबर, 2024) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह आरोप लगाते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान 40 ट्रेन दुर्घटनाओं में 313 यात्री और चार रेलवे कर्मचारी मारे गए।

    निजीकरण का बढ़ता असर:

    एम. साईबाबू ने आगे आरोप लगाया कि भारतीय रेलवे में 3 लाख से अधिक पद खाली हैं, जिनमें से बड़ी संख्या सुरक्षा श्रेणी के पद जैसे स्टेशन मास्टर, सिग्नलिंग स्टाफ, लोको पायलट, गार्ड और तकनीशियन शामिल हैं। इन सुरक्षा पदों पर प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति के बजाय, ‘निजीकरण’ के नाम पर ‘अप्रशिक्षित कर्मचारियों’ का उपयोग किया जा रहा है। उन्हें प्रदान किए जा रहे उपकरण भी ‘पुराने’ हैं और सुरक्षा श्रेणी के कर्मचारियों को नवीनतम उपकरणों के संचालन के बारे में उचित प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा है। खाली पदों को न भरने से मौजूदा कर्मचारियों पर भारी दबाव पड़ रहा है।

    निजीकरण के कारण सुरक्षा में गिरावट:

    सुरक्षा के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी ‘शॉर्टकट’ तरीके अपनाए जा रहे हैं। साईबाबू के अनुसार, प्रत्येक दुर्घटना के बाद नियुक्त विभिन्न जांच आयोगों द्वारा दिए जा रहे रिपोर्टों को लागू नहीं किया जा रहा है और उन रिपोर्टों को त्याग दिया जा रहा है। यह सब देश में रेलवे दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या के पीछे के कारणों की व्याख्या करता है।

    निजीकरण से रेलवे की संपत्ति का ह्रास:

    रेलवे की जमीन और संपत्ति को ‘राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन’ के नाम पर निजी पार्टियों को सौंप दिया जा रहा है। देश भर में रेलवे में काम कर रहे लगभग पाँच लाख ठेका कर्मचारी उचित मजदूरी और अन्य लाभों से वंचित हैं। उन्हें नौकरी की सुरक्षा भी नहीं है क्योंकि ठेकेदार बदलने पर उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाती हैं।

    ठेका कर्मचारियों के साथ अन्याय:

    साईबाबू ने कहा कि ‘प्रमुख नियोक्ता’ के रूप में रेलवे प्रशासन का यह कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि ‘ठेकेदार’ ठेका श्रमिकों को न्यूनतम वेतन और अन्य लाभ दे रहा है।

    भविष्य में क्या?

    रेलवे में ‘निजीकरण’ के खिलाफ देशव्यापी अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने और ठेका श्रमिकों के अधिकारों के लिए भी आंदोलन किया जाएगा। इन मुद्दों पर 20 दिसंबर को दिल्ली में एक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

    मुख्य takeaways:

    • भारतीय रेलवे यात्री सुरक्षा के मामले में लापरवाही बरत रही है।
    • रेलवे में ‘निजीकरण’ के कारण सुरक्षा मानकों में गिरावट आई है।
    • ठेका कर्मचारियों को उचित मजदूरी और अन्य लाभों से वंचित किया जा रहा है।
    • रेलवे प्रशासन रेलवे में ‘निजीकरण’ के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहा है।
  • बहराइच हत्याकांड: न्याय की माँग

    बहराइच हत्याकांड: न्याय की माँग

    बहराइच में रविवार को हुई हिंसा में हुई राम गोपाल मिश्रा की मौत के बाद मृतक की पत्नी रोली मिश्रा ने कहा है कि उन्हें तब तक न्याय नहीं मिलेगा जब तक उनके पति के हत्यारों को मार नहीं दिया जाता। उन्होंने अधिकारियों पर भी रिश्वत लेने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें न्याय से वंचित किया जा रहा है। रोली मिश्रा ने सोशल मीडिया पर एक संदेश में कहा, “हमें न्याय चाहिए, लेकिन हमें न्याय से वंचित किया जा रहा है। अधिकारियों ने रिश्वत ली है।” उन्होंने कहा कि उनके पति के हत्यारे, हालांकि पकड़े गए हैं, उन्हें अभी तक मार नहीं दिया गया है। “हमें बताया गया है कि उनके पैरों में गोली लगी है, लेकिन हमें न्याय नहीं मिल रहा है।”

    न्याय के लिए परिवार का संघर्ष

    राम गोपाल के पिता कैलाश नाथ मिश्रा ने शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात से संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा, “हम संतुष्ट हैं। हमें मुख्यमंत्री से जो माँग थी, वो पूरी हुई।” कैलाश नाथ ने बताया कि सीएम ने परिवार को घर बनाने के लिए पैसे, उनकी बहू के लिए नौकरी, कुछ नकद और आयुष्मान कार्ड (स्वास्थ्य बीमा कवर) का वादा किया है। “अब और क्या कहना है, उन्होंने हमें सभी सुविधाओं का वादा किया है। लेकिन हम माँग करते हैं कि हमारे बेटे के हत्यारे को भी उसी नसीब का सामना करना पड़े।”

    सुसाइड की धमकी

    हालांकि, इससे पहले, कैलाश नाथ ने धमकी दी थी कि अगर परिवार को न्याय नहीं मिला, तो वे आत्महत्या कर लेंगे। उन्होंने कहा, “अगर हमें न्याय नहीं मिला, तो हम आत्महत्या कर लेंगे।”

    अधिकारी बनाम हत्यारे

    इस बीच, लोक निर्माण विभाग (PWD) ने महराजगंज इलाके में निरीक्षण किया और 20-25 घरों, जिसमें अभियुक्त अब्दुल हमीद का घर भी शामिल है, की माप की गई। एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया, “हर साल रूटीन एक्शन लिया जाता है सड़क के चौराहों, S curves या junction points पर बने घरों को गिराने के लिए, जो दूसरी तरफ से नज़रों में रुकावट डालते हैं। महराजगंज में लगभग 20-25 ऐसे अवैध घरों को चिह्नित किया गया है, जिनको हम रोड कंट्रोल एक्ट 1964 के तहत नोटिस देने जा रहे हैं।”

    अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का नोटिस

    अब्दुल हमीद के घर पर लगाए गए नोटिस के अनुसार, PWD ने कहा कि निर्माण “अवैध” है क्योंकि इसे ग्रामीण इलाकों में सड़क के मध्य बिंदु से 60 फीट के दायरे में बनाया गया था, जो कि अनुमति नहीं है। नोटिस में कहा गया है, “इसलिए, आपको सूचित किया जाता है कि यदि यह निर्माण बहराइच के जिला मजिस्ट्रेट या संबंधित विभाग से पूर्व अनुमति से कराया गया है, तो कृपया अनुमोदन की मूल प्रति तुरंत उपलब्ध कराएँ। इसके अतिरिक्त, आपसे यह भी अनुरोध किया जाता है कि उक्त अवैध निर्माण को तीन दिनों के भीतर हटा दिया जाए। अन्यथा, अवैध निर्माण को पुलिस और प्रशासन की सहायता से हटा दिया जाएगा, और इस कार्रवाई के लिए किए गए खर्च को राजस्व माध्यमों से आपसे वसूल किया जाएगा।”

    BJP विधायक का बयान

    महसी विधानसभा क्षेत्र के BJP विधायक सुरेश्वर सिंह ने कहा कि “हत्यारों” की गिरफ्तारी के बाद, यह “एक और कार्रवाई” का समय है। उन्होंने कहा, “प्रशासन ने मुख्य आरोपी अब्दुल हमीद के अवैध निर्माण वाले घर पर तोड़फोड़ का नोटिस चस्पा कर दिया है, आगे की कार्रवाई बहुत जल्द देखने को मिलेगी,” उन्होंने तोड़फोड़ का इशारा करते हुए कहा।

    राम गोपाल मिश्रा का हत्याकांड

    रविवार को राम गोपाल मिश्रा महराजगंज इलाके से होकर गुजर रहे दुर्गा पूजा जुलूस में शामिल थे, जब हिंदू-मुस्लिम झड़प में गोली लगने से उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद सामने आया एक वीडियो में उन्हें एक घर की छत से हरे रंग का झंडा हटाते हुए दिखाया गया है और उसके बदले भागम-भाग में केसरिया झंडा लगाते हुए दिखाया गया। उसी के बाद उन पर गोली चलाई गई।

    घटना के बाद जिले में दिनों दिन तनाव का माहौल रहा और इलाकों में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं देखने को मिलीं.

    गुरुवार को उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ मुठभेड़ में मिश्रा की हत्या में शामिल माने जाने वाले पाँच लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिसमें दो को गोली लग गई थी.

    यह मुठभेड़ नौपरा थाने के अंतर्गत नेपाल सीमा के करीब हादा बसेहरी इलाके में हुई थी। हादा बसेहरी रुपैडीहा से लगभग 15 किलोमीटर दूर है जो भारत और नेपाल के बीच का एक पारगमन बिंदु है.

    पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार ने गुरुवार को गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान मोहम्मद फहीन, मोहम्मद सरफराज और अब्दुल हमीद के रूप में की थी, जिनका नाम एफआईआर में है. दो अन्य लोगों, मोहम्मद तलीम उर्फ सब्लू और मोहम्मद अफजल को बाद में गिरफ्तार किया गया।

    कुमार के अनुसार, एक पुलिस टीम ने फहीन और तलीम को गिरफ्तार किया, जिन्होंने नौपरा क्षेत्र में अपराध में प्रयोग किए गए हथियार का स्थान बताया। हालांकि, जब टीम वहां हथियार जप्त करने गई तो हमीद, सरफराज और अफजल की ओर से गोलीबारी हुई। जवाबी कार्रवाई में सरफराज और तलीम जख्मी हो गए। “उनका इलाज किया जा रहा है। हत्या में प्रयोग किए गए हथियार को बरामद कर लिया गया है,” पुलिस ने कहा.

    Take Away Points:

    • राम गोपाल मिश्रा की मौत के बाद हिंसा का मौसम रहा और घटना के बाद जिले में दिनों दिन तनाव का मौहल रहा.
    • मिश्रा की पत्नी ने अधिकारियों पर रिश्वत लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनें न्याय नहीं मिल रहा है.
    • राम गोपाल के पिता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात के बाद कहा कि उनकी मांग पूरी हुई है लेकिन उन्होंने हत्यारों को मृत्युदंड की मांग की है.
    • PWD ने घटना में शामिल आरोपी अब्दुल हमीद के घर पर तोड़फोड़ का नोटिस लगाया है और तोड़फोड़ के लिए अन्य कार्रवाई करने की बात कही है.
    • इस मामले में पाँच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, दो आरोपी मुठभेड़ में जख्मी हुए थे.
  • भारतीय हवाई क्षेत्र में बम धमकी: क्या है इसका असली मकसद?

    भारतीय हवाई क्षेत्र में बम धमकी: क्या है इसका असली मकसद?

    भारतीय हवाई क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों में बम धमकी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। शनिवार, 19 अक्टूबर 2024 की सुबह से ही 20 से ज़्यादा उड़ानों को बम धमकी मिली है। इनमें एयर इंडिया, इंडिगो, अकासा एयर, विस्तारा, स्पाइसजेट, स्टार एयर और एलायंस एयर की उड़ानें शामिल हैं। इनमें दिल्ली और मुंबई से इस्तांबुल जाने वाली इंडिगो की दो उड़ानें, जोधपुर से दिल्ली जाने वाली इंडिगो की उड़ान और उदयपुर से मुंबई जाने वाली विस्तारा की उड़ान शामिल है।

    बम धमकी की बढ़ती घटनाएँ

    शनिवार को कई विमानों को बम धमकी मिली, जिससे यात्रियों और विमान चालकों में भय और चिंता फैल गई। इन धमकियों के चलते कई उड़ानों को रोक दिया गया और विमानों की सुरक्षा जाँच की गई। इंडिगो ने अपनी दो उड़ानों – 6E 17 (मुंबई से इस्तांबुल) और 6E 11 (दिल्ली से इस्तांबुल) के बारे में बयान जारी किया, जिसमें बताया गया कि वे संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और आवश्यक सावधानियां बरत रहे हैं।

    इंडिगो और विस्तारा की उड़ानें

    इंडिगो ने अपनी उड़ान 6E 184 (जोधपुर से दिल्ली) को लेकर एक और बयान जारी किया, जिसमें बताया गया कि उड़ान को सुरक्षा संबंधित सतर्कता के चलते दिल्ली में उतारा गया है और यात्रियों को विमान से उतारा गया है।

    वहीं, विस्तारा ने अपनी उड़ान UK 624 (उदयपुर से मुंबई) के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मुंबई में उतरने से कुछ देर पहले, उड़ान में सुरक्षा संबंधी चिंता पैदा हो गई थी, जिसके बाद विमान को अनिवार्य जांच के लिए मुंबई हवाई अड्डे के आइसोलेशन बे में ले जाया गया।

    खुफ़िया एजेंसियां जांच में जुटी

    हालांकि इन धमकियों के पीछे कौन है या ये धमकियाँ किस मकसद से दी जा रही हैं, अभी तक पता नहीं चल पाया है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ इन घटनाओं की जांच कर रही हैं और धमकियों के पीछे के मकसद का पता लगाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। इन मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है, और ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

    पहले भी मिली हैं bomb threats

    शुक्रवार, 18 अक्टूबर को, विस्तारा की तीन अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों को भी बम धमकियाँ मिली थीं। ये धमकियाँ बाद में झूठी साबित हुईं। इनमें से एक उड़ान को सुरक्षा के मद्देनजर फ्रैंकफर्ट में डायवर्ट किया गया था। पिछले कुछ दिनों में, भारतीय वाहकों द्वारा संचालित 40 से अधिक उड़ानों को बम धमकियाँ मिली हैं, जो बाद में झूठी साबित हुई हैं।

    क्या हो सकते हैं इस बढ़ते ट्रेंड के पीछे के कारण?

    इन धमकियों के पीछे कई कारण हो सकते हैं। हालांकि ये सवालिया निशान अब भी मौजूद हैं कि ये धमकियां किस मकसद से दी जा रही हैं,

    ** कुछ सम्भावित कारणों में शामिल हो सकते हैं:**

    • शरारत: यह संभव है कि ये धमकियाँ सिर्फ शरारत के लिए दी जा रही हों।
    • ध्यान खींचने का प्रयास: हो सकता है कुछ लोग यह धमकियों के ज़रिए ध्यान खींचने की कोशिश कर रहे हों।
    • अराजकता फैलाना: यह भी हो सकता है कि इन धमकियों के पीछे का मकसद हवाई सेवाओं में व्यवधान पैदा करके अराजकता फैलाना हो।

    क्या करें आप

    अगर आप हवाई यात्रा कर रहे हैं तो आपको हमेशा सावधान रहना चाहिए। यदि आपको कुछ भी संदिग्ध लगता है तो कृपया तुरंत विमान चालक दल या हवाई अड्डे के अधिकारियों को सूचित करें।

    Takeaways

    • पिछले कुछ दिनों में कई भारतीय एयरलाइंस को बम धमकियां मिली हैं, लेकिन ज्यादातर मामले झूठे साबित हुए हैं।
    • सुरक्षा एजेंसियां इन धमकियों के पीछे के मकसद की जांच कर रही हैं।
    • इन धमकियों के चलते यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए यात्रियों से अपील है कि वे यात्रा के दौरान सुरक्षा के निर्देशों का पालन करें।
    • आपको किसी भी प्रकार का खतरा या असुरक्षा महसूस होने पर तुरंत अधिकारियों को बताएं।
  • आंध्र प्रदेश: रेत की कीमतों पर सियासी घमासान

    आंध्र प्रदेश: रेत की कीमतों पर सियासी घमासान

    आंध्र प्रदेश में रेत की कीमतें बढ़ने पर यशवंत जगनमोहन रेड्डी ने आरोप लगाए, तेलुगु देशम पार्टी (TDP) सरकार पर हमला बोला। रेड्डी ने कहा कि तेलुगु देशम पार्टी ने रेत की कीमतों को नियंत्रण करने में नाकाम रही और इस काम में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है। रेड्डी ने यह भी आरोप लगाया कि तेलुगु देशम पार्टी ने रेत की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कानूनों का उल्लंघन किया और भ्रष्ट तरीकों का उपयोग किया। इस मामले में तेलुगु देशम पार्टी को कई प्रश्नों का सामना करना पड़ सकता है।

    रेत की कीमतों को लेकर विवाद

    YSR कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश में रेत की कीमतों में वृद्धि पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की राज्य सरकार पर तीखी टिप्पणी की, यह कहते हुए कि रेत को मुफ्त में उपलब्ध कराने के वादे के बावजूद इसकी कीमतें आसमान छू रही हैं।

    रेत की कीमतों में भारी वृद्धि

    रेड्डी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि तेलुगु देशम पार्टी और इसके सहयोगियों ने राज्य में रेत की कीमतों को बढ़ाकर अपने फायदे के लिए इसका फायदा उठाया है। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय तेलुगु देशम पार्टी ने मुफ्त रेत उपलब्ध कराने का वादा किया था, लेकिन वास्तविकता में ऐसा कुछ नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में रेत की कीमत प्रति ट्रक ₹20,000 से ₹60,000 तक पहुंच गई है।

    ई-निविदा प्रक्रिया का उल्लंघन

    रेड्डी ने आगे आरोप लगाया कि तेलुगु देशम पार्टी सरकार ने भ्रष्ट तरीकों से निविदाओं को जारी किया है, जिसके कारण रेत की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया कि ई-निविदा प्रक्रिया के लिए केवल दो दिन का समय दिया गया था, जो त्योहार के समय के दौरान किया गया था। उनका दावा था कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों के विपरीत थी।

    YSRCP सरकार की पारदर्शिता

    रेड्डी ने अपनी सरकार की रेत व्यवस्था में पारदर्शिता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि YSRCP सरकार ने ई-निविदा प्रक्रिया का पालन किया था, जिसमें ठेकेदारों को ₹475 प्रति टन रेत का भुगतान करना पड़ा था। उन्होंने बताया कि राज्य को इस रॉयल्टी के रूप में ₹375 प्रति टन मिल रहा था, जो सालाना ₹750 करोड़ से अधिक का राजस्व उत्पन्न कर रहा था। रेड्डी ने कहा कि “राज्य सरकार में पारदर्शिता की कमी है। मुफ्त रेत देने के दावे के बावजूद, सरकार को कोई राजस्व नहीं हुआ है और रेत की कीमतें आसमान छू रही हैं।”

    तेलुगु देशम पार्टी सरकार की आलोचना

    रेड्डी ने चुनावों में लोगों से किए गए वादों को पूरा करने में तेलुगु देशम पार्टी सरकार की विफलता की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार पांच महीने की सत्ता में रहने के बाद भी पूरा बजट पेश करने में नाकाम रही और वोट-ऑन-अकाउंट बजट पेश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार में भ्रष्टाचार व्याप्त है, खासकर रेत, शराब, जुआ और खनन के क्षेत्रों में। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने अपने वादों की अनदेखी की है और घोटालों को बढ़ावा देकर राज्य की स्थिति को बदतर बना दिया है।

    राज्य की दुर्दशा पर चिंता

    रेड्डी ने तेलुगु देशम पार्टी सरकार के कार्यकाल में राज्य की दुर्दशा पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने रेत की कीमतों को नियंत्रित करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं, जिससे रेत की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने इस मामले में राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए और रेत के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की मांग की।

    takeaways

    • YSRCP के अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश में रेत की कीमतों को लेकर तेलुगु देशम पार्टी (TDP) सरकार पर तीखा हमला बोला।
    • उन्होंने आरोप लगाया कि TDP सरकार ने रेत के दाम बढ़ाकर मुनाफा कमाया है और ई-निविदा प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का इस्तेमाल किया है।
    • रेड्डी ने अपनी YSRCP सरकार द्वारा रेत के प्रबंधन में पारदर्शिता का दावा किया।
    • उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी सरकार के कार्यकाल में राज्य की दुर्दशा पर भी चिंता जताई और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की मांग की।
  • बेंगलुरु में “बम धमकी ईमेल” कांड: डार्जिलिंग से गिरफ्तार आरोपी

    बेंगलुरु के दो कॉलेजों को भेजे गए बम धमकी ईमेल मामले में बेंगलुरु पुलिस ने एक 48 वर्षीय डार्जिलिंग के रहने वाले दीपांजन मित्रा को गिरफ्तार किया है। घटना 4 अक्टूबर, 2024 की है जब बेंगलुरु इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी) के प्रिंसिपल ने वी.वी. पुरम पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें कहा गया था कि उन्हें “svesekr@hotmail.com” नामक ईमेल आईडी से एक धमकी ईमेल मिला था, जिसमें कॉलेज परिसर में हाइड्रोजन आधारित आईईडी रखे जाने की बात कही गई थी। ऐसा ही एक मामला हनुमंतनगर पुलिस स्टेशन में भी दर्ज किया गया था जो कि बीएमएस कॉलेज के प्रिंसिपल ने दर्ज कराई थी।

    प्रौद्योगिकी के उपयोग से पुलिस ने आरोपी की लोकेशन का पता लगाया

    पुलिस ने तकनीकी रूप से मामले की जांच की और आरोपी का पता लगाया जो डार्जिलिंग के सलबुरी शहर में रहता था। जांच करने पर पता चला कि आरोपी दीपांजन मित्रा बीकॉम ग्रेजुएट है और उसने कथित तौर पर धमकी ईमेल भेजने की बात स्वीकार की। बेंगलुरु पुलिस के अनुसार, मित्रा ने पश्चिम बंगाल में 10 ऐसे ही मामलों में शामिल था।

    आरोपी दीपांजन मित्रा की गिरफ्तारी

    बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर बी. दयानंद ने बताया, “हम बेंगलुरु के अन्य मामलों में उसकी भूमिका की जांच कर रहे हैं जहाँ स्कूलों और कॉलेजों को धमकी ईमेल मिले थे। अभी तक ऐसा लग रहा है कि उसका कर्नाटक से कोई संबंध नहीं है और इसका मकसद शरारत प्रतीत होता है।” पुलिस ने आरोपी से एक मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किया है। आरोपी को पश्चिम बंगाल की स्थानीय अदालत में पेश किया गया था और बेंगलुरु पुलिस ने ट्रांजिट वारंट मांगा था। पुलिस ट्रांजिट वारंट प्राप्त नहीं कर सकी और आरोपी को जमानत पर रिहा कर दिया गया। दयानंद ने बताया, “हमने उसे नोटिस भेजकर जांच के लिए पेश होने के लिए कहा है।”

    पुलिस की जांच जारी

    पुलिस मामले की जांच कर रही है और दीपांजन मित्रा से पूछताछ कर रही है।

    आगे की कार्यवाही

    बेंगलुरु पुलिस ने दीपांजन मित्रा को ट्रांजिट वारंट जारी करने की मांग की है, तथा अपनी जांच जारी रखे हुए है। पुलिस अन्य मामलों की भी जांच कर रही है, जहां स्कूलों और कॉलेजों को धमकी ईमेल मिले थे, और दीपांजन मित्रा के कर्नाटक के इन मामलों से संबंध की जाँच भी जारी है।

    निष्कर्ष

    यह घटना बेंगलुरु में स्कूलों और कॉलेजों में सुरक्षा की चिंताओं को उजागर करती है। पुलिस की सक्रियता और जांच से, इस प्रकार की घटनाओं के विरुद्ध मुख्य रूप से तकनीकी आधारित जाँच के माध्यम से, सुरक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था को मजबूत करना ज़रूरी है।

  • खाद्य सुरक्षा: मिलावट और अस्वच्छता के खिलाफ जंग

    खाद्य सुरक्षा: मिलावट और अस्वच्छता के खिलाफ जंग

    उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में खाद्य पदार्थों में मिलावट और अस्वास्थ्यकर व्यवहार को रोकने के लिए कड़े कानून बनाने का फैसला किया है। इस फैसले के पीछे विभिन्न घटनाएं हैं जो राज्य के अलग-अलग शहरों में हुई हैं।

    खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकने के लिए कड़े कानून

    मुस्सौरी में दो लोगों द्वारा चाय में थूकने की घटना के बाद राज्य भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। इस घटना के एक हफ्ते बाद, 16 अक्टूबर, 2024 को, उत्तराखंड सरकार ने इस तरह के अपराध के लिए ₹25000 से ₹1 लाख तक का जुर्माना लगाने का फैसला किया। इससे पहले, पुलिस महानिदेशक (DGP) ने सभी जिलों की पुलिस को होटल/ढाबा और अन्य वाणिज्यिक संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों का 100% सत्यापन सुनिश्चित करने के आदेश दिए थे।

    राज्य सरकार द्वारा किए गए कदम

    स्वास्थ्य सचिव, आर. राजेश कुमार ने एक आदेश जारी करके बताया कि जो दुकानें गैर-शाकाहारी भोजन बेचती हैं, उन्हें यह बताना होगा कि उनके द्वारा परोसे जाने वाला मांस ‘झटका’ या ‘हलाल’ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक में कहा कि खाद्य पदार्थों की पवित्रता सुनिश्चित करने और जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए सख्त कानून बनाना चाहिए।

    मिलावट के मामलों में बढ़ती चिंता

    हाल ही में सहारनपुर, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में ऐसी घटनाएँ हुई हैं जिसमें मानव मल और अखाद्य गंदगी को रस, दाल और रोटी जैसे खाद्य पदार्थों में मिलाया गया था। मुख्यमंत्री ने इन घटनाओं को घृणित और आम आदमी के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक करार दिया।

    सुरक्षा उपायों को मजबूत करने का आग्रह

    मुख्यमंत्री ने खाद्य प्रतिष्ठानों के रसोईघरों और भोजन कक्षों में लगातार निगरानी रखने के लिए पर्याप्त संख्या में CCTV कैमरों की स्थापना अनिवार्य बनाने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि हर उपभोक्ता को खाद्य और पेय सेवा प्रदाताओं और विक्रेताओं के बारे में आवश्यक जानकारी जानने का अधिकार है। इस लिए विक्रेताओं को अपने प्रतिष्ठान पर साइनबोर्ड लगाना अनिवार्य किया जाना चाहिए।

    कर्मचारियों की पहचान और कठोर दंड

    मुख्यमंत्री ने खाद्य प्रतिष्ठानों में काम करने वाले सभी कर्मचारियों के लिए पहचान पत्र होना अनिवार्य करने के साथ ही यह भी कहा कि उन लोगों के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान किया जाना चाहिए जो अपने नाम बदलकर और गलत जानकारी देकर अपनी पहचान छिपाते हैं।

    विरोध और कानूनों की भूमिका

    समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अब्दुल हाफिज गांधी ने कहा कि इस तरह की घटनाएं संख्या में बहुत कम हैं। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों में जानबूझकर मिलावट के मामलों को संभालने के लिए पहले से ही कानूनों में पर्याप्त प्रावधान हैं। उन्होंने कहा, “यह एक सामाजिक मुद्दा है। हाल ही में, एक गैर-मुस्लिम घर में काम करने वाले नौकर पर आटे में पेशाब मिलाने का आरोप लगाया गया था। कानून का उपयोग एक समुदाय को दंडित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।”

    takeaways

    • राज्य सरकार ने खाद्य पदार्थों में मिलावट और अस्वास्थ्यकर व्यवहार को रोकने के लिए सख्त कानून बनाने का फैसला लिया है।
    • राज्य सरकार ने दुकानों पर CCTV कैमरों की अनिवार्यता, साइनबोर्ड लगाना और कर्मचारियों के लिए पहचान पत्र जैसे कदम उठाए हैं।
    • इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए पहले से ही मौजूद कानूनों को लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
    • कानून को धार्मिक रूप से विभाजित नहीं किया जाना चाहिए और सभी को बराबर ढंग से लागू किया जाना चाहिए।
  • बहराइच हिंसा: सच का सामना

    बहराइच हिंसा: सच का सामना

    बहराइच में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद हुई घटनाओं ने पूरे देश में बहस छेड़ दी है। इस हिंसा में एक युवक की मौत हो गई थी, और पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद इन दोनों आरोपियों की मुठभेड़ में मौत हो गई, जिसके बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर फर्जी मुठभेड़ कराने के आरोप लगाए।

    मुठभेड़ का विवाद

    उत्तर प्रदेश में हुए इस मुठभेड़ पर सियासी घमासान मच गया है। विपक्षी पार्टियाँ राज्य सरकार पर फर्जी मुठभेड़ कराने का आरोप लगा रही हैं। इन आरोपों के अनुसार, पुलिस ने आरोपियों को उनकी हत्या के लिए पहले से ही मार डालने का षड्यंत्र रचा था।

    आरोपों की जड़

    विपक्ष का कहना है कि इस घटना को राजनीतिक रूप से रंग देने की कोशिश की जा रही है। कुछ विपक्षी नेताओं का मानना है कि राज्य सरकार द्वारा अपने नकारात्मक प्रदर्शन को छुपाने के लिए फर्जी मुठभेड़ का सहारा लिया गया है। वे यह भी कहते हैं कि राज्य सरकार जनता के ध्यान को विपक्ष की ओर से उठाये जा रहे मुद्दों से भटकाने की कोशिश कर रही है।

    सच्चाई की तलाश

    इस मुठभेड़ पर राज्य सरकार का कहना है कि आरोपी अपने कब्जे से मिली बंदूकों से पुलिस टीम पर गोलीबारी करने की कोशिश कर रहे थे, जिसके जवाब में पुलिस को उन्हें मारना पड़ा। हालांकि, आरोपियों के साथ हुई मुठभेड़ के वीडियो ने दृश्य कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का कहना है कि यह वीडियो साफ तौर पर यह दिखाता है कि पुलिस आरोपियों को मारने के इरादे से गई थी। यह एक गंभीर मुद्दा है, और जांच आवश्यक है कि इस घटना में वास्तव में क्या हुआ।

    धार्मिक तनाव और आरोप

    सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं हमेशा ही समय रहते नहीं रोकी जा सकती हैं। यह घटना भी धार्मिक तनाव और नफरत का एक उदाहरण है। यह समस्या बहुत जटिल है, और यह एक सच्ची आपत्ति है। इस हिंसा में शामिल व्यक्तियों को कानून के कठघरे में लाने और उन्हें दंडित किया जाना जरूरी है।

    हिंसा के अदृश्य हाथ

    इस घटना ने राज्य सरकार की कानून व्यवस्था बनाए रखने की क्षमता पर सवालिया निशान लगाए हैं। अब यह आवश्यक है कि राज्य सरकार सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करे और सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए कठोर कदम उठाए।

    भ्रम और गलत सूचना

    घटना के बाद, सोशल मीडिया पर बहुत सी गलत सूचनाएं और अफवाहें फैली हैं। इन अफवाहों ने और भी ज्यादा तनाव और दहशत फैला दी है। सरकार को सोशल मीडिया पर नजर रखनी चाहिए और अफवाहों का बदला लें ने के लिए कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।

    बहराइच घटना के शिक्षण

    यह घटना बहुत ही घृणित है और यह हमें धार्मिक सहिष्णुता और भाईचारे की महत्व का पाठ सिखाती है। हमें धार्मिक तनाव का विरोध करना चाहिए और समाज में शांति और सद्भाव कायम रखने के लिए एकजुट होना चाहिए।

    मुख्य बिंदु

    • मुठभेड़ की घटना पर राजनीतिक तनाव
    • विपक्ष द्वारा फर्जी मुठभेड़ के आरोप
    • धार्मिक तनाव और सांप्रदायिक हिंसा की घटना का खतरा
    • राज्य सरकार की कानून व्यवस्था बनाए रखने की क्षमता पर सवाल
    • सोशल मीडिया पर गलत सूचनाएं और अफवाहें फैलाने पर रोक लगाने की आवश्यकता
    • समाज में शांति और सद्भाव कायम रखने के लिए एकजुट होने की आवश्यकता
  • एस.एम. कृष्णा: दोबारा अस्पताल में भर्ती

    एस.एम. कृष्णा: दोबारा अस्पताल में भर्ती

    पूर्व कर्नाटक मुख्यमंत्री और वरिष्ठ राजनेता एस.एम. कृष्णा को शनिवार (19 अक्टूबर, 2024) को दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह घटना उनके अस्पताल से छुट्टी मिलने के लगभग दो महीने बाद हुई है। मैनिपाल अस्पताल की ओर से जारी बयान के मुताबिक, 92 वर्षीय राजनेता और पूर्व विदेश मंत्री को स्वास्थ्य जांच और उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल अधिकारियों ने बताया, “उनकी स्थिति स्थिर है और सोमवार को उन्हें छुट्टी मिलने की उम्मीद है।”

    एस.एम. कृष्णा का स्वास्थ्य

    एस.एम. कृष्णा को पहले अप्रैल में वित्तल मल्लया रोड स्थित व्याधि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में तीव्र श्वसन संक्रमण के लिए भर्ती कराया गया था, बाद में उन्हें मैनिपाल अस्पताल में स्थानांतरित किया गया था। 28 अगस्त को, चार महीने की अस्पताल में रहने के बाद, निमोनिया और फेफड़ों में जलन के इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। जुलाई तक, उन्हें पर्याप्त सहायता और कृत्रिम वेंटिलेशन के साथ आईसीयू में रखा गया था, इसके बाद उन्हें वार्ड में स्थानांतरित किया गया था।

    हालिया स्वास्थ्य समस्याएं

    इस हालिया अस्पताल में भर्ती होने के बारे में बहुत कुछ पता नहीं चल सका है, लेकिन यह स्पष्ट है कि कृष्णा की उम्र के साथ ही उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आई है। अस्पताल अधिकारियों द्वारा “स्वास्थ्य जांच और अनुकूलन” के लिए अस्पताल में भर्ती करने का उल्लेख किया गया है, जिससे यह संभावना बनी है कि वे अपनी वर्तमान स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान करने और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए अस्पताल में हैं।

    राजनीति में एस.एम. कृष्णा का प्रभाव

    राजनीति के एक अनुभवी और प्रतिष्ठित व्यक्ति के रूप में, एस.एम. कृष्णा ने दशकों तक भारतीय राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला है। 1962 में कर्नाटक विधान सभा में प्रवेश करने के बाद से, उन्होंने कर्नाटक में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है, जिसमें मुख्यमंत्री पद भी शामिल है। 1980 से 1989 तक, उन्होंने भारत के पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गांधी के मंत्रिमंडल में मंत्री पद संभाला और बाद में 2009 से 2012 तक पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल में विदेश मंत्री के रूप में काम किया।

    राजनीतिक कैरियर

    अपने लंबे राजनीतिक जीवन के दौरान, कृष्णा ने हमेशा खुद को एक राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित किया है और दोनों सत्ताधारी पार्टियों के साथ काम करते रहे हैं। उनका राजनीतिक अनुभव, नीतियों में महारत और कूटनीतिक कौशल ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर एक सम्मानित व्यक्ति बनाया है। उन्होंने कई वर्षों तक विदेश मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं और इस पद पर अपनी कार्यक्षमता और राजनीतिक सूझबूझ के लिए जाने जाते हैं।

    समर्थन और शुभकामनाएं

    एस.एम. कृष्णा की हालिया अस्पताल में भर्ती होने की खबर के बाद से, उन्हें कई प्रमुख हस्तियों और उनके समर्थकों ने समर्थन और शुभकामनाएं दी हैं। लोग उनकी शीघ्र स्वस्थता की कामना कर रहे हैं और आशा व्यक्त कर रहे हैं कि वह जल्द ही ठीक हो जाएंगे। कई लोग अपने पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन के दौरान उनके योगदान को भी याद कर रहे हैं और उन्हें एक शानदार नेता मानते हैं।

    राजनीतिक दिग्गज की कमी

    अपनी लंबी सेवा और योगदान के साथ, एस.एम. कृष्णा ने भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण जगह बनाई है। उनकी अनुपस्थिति निश्चित रूप से महसूस की जाएगी। यह केवल उनके परिवार के लिए ही एक नुकसान नहीं है, बल्कि पूरी राजनीतिक व्यवस्था के लिए भी है।

    takeaways:

    • 92 वर्षीय एस.एम. कृष्णा का स्वास्थ्य पिछले कुछ समय से बिगड़ रहा है।
    • वे अप्रैल में निमोनिया और फेफड़ों में जलन के लिए अस्पताल में भर्ती थे, 28 अगस्त को उन्हें छुट्टी मिली थी.
    • 19 अक्टूबर को उन्हें फिर से मैनिपाल अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
    • वह भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण व्यक्ति रहे हैं और उन्हें उनके समर्थक और कई राजनीतिक हस्तियां उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।