Category: state-news

  • अपनी कार में घर से निकली प्राइवेट स्कूल की लापता टीचर भिवानी में

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    भिवानी/बहल। स्कूल से पढ़ा कर अपनी गाड़ी से लौट रही एक शिक्षिका के अपहरण का मामला दो दिन पहले प्रकाश में आया। अब तक शिक्षिका को ढूंढा नहीं जा सका है। शिक्षिका मंढोलीकलां गांव के एक निजी स्कूल में फिजिक्स की अध्यापिका है और अपना अध्यापन कार्य करके अपने गांव ओबरा लौट रही थी। इसी बीच ओबरा से कुछ दूरी पर उसके गाड़ी को साइड मारने का प्रयास किया तो शिक्षिका ने अपनी गाड़ी को रोड साइड की कच्ची जगह में डाल दिया। गाड़ी इस दौरान कच्चे में फंस कर रह गई। गाड़ी को फंसा देखकर दूसरी गाड़ी में सवार बदमाशों ने शिक्षिका को उसकी गाड़ी से जबरन उतार कर अपनी गाड़ी में डालकर ले जाने का अंदेशा है।

    जब यह वारदात हुई तो उस दौरान घटना से पहले और बाद में एक आइ-20 गाड़ी को उस रोड पर आते जाते देखा गया है और संभवतः इसी गाड़ी में सवार लोगों ने शिक्षिका का अपहरण करने का अंदेशा है। शिक्षिका के पिता ने पुलिस ने बहल पुलिस को इस वारदात की जानकारी दी और सूचना मिलते ही बहल पुलिस सहित डीएसपी लोहारू, सीआइए दो भिवानी व फारेंसिक टीम घटनास्थल पर पहुंच कर वारदात का जायजा लिया। मगर अब शिक्षिका को ढूंढने को लेकर इंटरनेट मीडिया पर मुहिम छीड़ गई है, लोग जानकारी सहित और खबरों को अपने अकाउंट पर पोस्‍ट कर शिक्षिका को ढूंढने की गुहार लगा रहे हैं। पुलिस पर भी दबाव बनता जा रहा है।

    पुलिस इस मामले में हर एंगल पर कार्य कर रही है शिक्षिका के मोबाइल नंबरों को ट्रेसिंग पर लगाया गया है और संदिग्ध गाड़ी वाहनों को भी चेक किया जा रहा है। वही पुलिस जांच टीम मंढोलीकलां स्कूल से लेकर गोपालवास, हरियावास, सिधनवा तथा ओबरा गांव में लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगालने में जुटी हुई है। इस बीच गुस्साए ग्रामीणों ने अभिभावकों ने ओबरा चौक को करीब आधा घंटा तक जाम करके रखा था। सीआइए-2 के प्रभारी निरीक्षक श्रीभगवान यादव के आश्वासन पर जाम हटा दिया गया है पुलिस को सुबह तक अपहृत शिक्षिका का सुराग नहीं लगाने की स्थिति में फिर से जाम लगाने का अल्टीमेटम दिया।

    इंस्पेक्टर श्रीभगवान यादव ने बताया कि जिले की तमाम पुलिस इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच पड़ताल में जुटी हुई है और हर उस एंगल पर गंभीरता से नजर रखे हुए हैं जो अध्यापिका को खोज निकालने में सक्षम है। शिक्षिका सहित कई मोबाइल फोन को ट्रेसिंग पर लगाया हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस इस मामले में हर एंगल पर काम कर रही है और जल्द ही इसका पता लगा लिया उधर बहल पुलिस में शिक्षिका के पिता दिनेश के बयान पर अपहरण का मामला दर्ज करके छानबीन शुरू कर दी है। प्रत्यक्षदर्शियों में अभिभावकों ने बताया है कि जिस गाड़ी से शिक्षिका आ रही थी उस गाड़ी में शिक्षिका का दुपट्टा व चप्पल आदि भी मौके से पुलिस को मिले हैं। इसी के आधार पर पुलिस इस मामले को अपहरण करके जांच में लगी हुई है।

  •  7 साल की बच्ची से सहेली के पिता ने किया दुष्कर्म पड़ोस में खेलने गई, 25 साल की कैद

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    कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र में अपनी बेटी की सात वर्षीय सहेली के साथ दुराचार करने के दोषी को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनीष दुआ की अदालत ने 25 साल कैद की सजा सुनाई है। दोषी पर 50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त कैद काटनी होगी।

    स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर भूपेंद्र कुमार ने बताया कि एक महिला ने चार मई 2020 को सदर थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया कि उसकी सात वर्षीय बच्ची पिपली निवासी राजकुमार की बेटी की सहेली है। वे दोनों इकट्ठा खेलती हैं। उसकी बेटी राजकुमार के घर गई थी। यहां राजकुमार ने उसके साथ दुराचार कर दिया। सदर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर 376ए, बी व 6-पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया था। इसकी जांच एसआइ सुमन देवी को सौंपी थी। पुलिस ने बच्ची का मेडिकल कराकर अदालत में बयान कराए। पुलिस ने आरोपित राजकुमार को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के पश्चात आरोपित को दोषी करार देेते हुए 25 साल कैद व 50 हजार रुपये जुर्माना किया है। जुर्माना अदा न करने पर दोषी को छह माह की अतिरिक्त कैद काटने की सजा सुनाई।

    तीन माह के अंदर मिली सजा

    स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर भूपेंद्र कुमार ने बताया कि दोषी राजकुमार पर चार्ज लगने के तीन माह के अंदर अदालत ने सजा सुनाई है। कोरोना काल के कारण पहले अदालतें बंद रही। 11 जनवरी को अदालतों में दोबारा सुनवाई शुरू हुई थी। इस केस में करीब 27 गवाह थे। जिनकी नियमित सुनवाई के दौरान गवाही कराई गई। दोषी पर चार्ज लगते ही मामले को प्राथमिकता पर लिया।

    पोक्सो एक्ट में है आजीवन कारावास का प्रावधान

    स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर भूपेंद्र कुमार ने बताया कि 12 साल से कम आयु की बच्चियों के साथ दुराचार करने पर पोक्सो एक्ट की धारा-छह के तहत केस दर्ज किया जाता है। इस धारा के तहत अधिकतम आजीवन कारावास का प्रावधान है। वहीं अदालत अधिक से अधिक जुर्माना कर सकती है।

  • छत्तीसगढ़ : सुकमा-बीजापुर सीमा पर नक्सली हमले के स्थल से ज़मीनी दृश्य

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    अंतिम यात्रा के दौरान, बहादुर जवानों की माओवादियों के साथ लड़ाई में 22 जावानीस मारे गए थे। नक्सलियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच 4 घंटे तक गोलीबारी हुई थी।  नक्सलियों को भारी नुकसान हुआ है।  हमारे सुरक्षाकर्मियों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी: छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल सुकमा नक्सल हमले पर। पूरा देश आज शहीद जवान के गम में डूबा हुआ है।

    घायल हुए सुरक्षाकर्मी जो रायपुर शिफ्ट किए गए थे, खतरे से बाहर हैं।  21 कर्मी लापता हैं और बचाव दल उनकी तलाश कर रहा है।  मुझे एचएम अमित शाह का फोन आया।  उन्होंने सीआरपीएफ महानिदेशक को राज्य में भेजा है।  मैं छत्तीसगढ़ में भी वापस आ जाऊँगा…

  • चुनावी साल में एक झटके में उनकी कुर्सी चली गई तमाम प्रयासों के बाद भी

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    हल्द्वानी : तमाम प्रयासों के बाद सरकार का हिस्सा बने दायित्वधारी शासन के आदेश के बाद अब पदमुक्त हो चुके हैं। चुनावी साल में एक झटके में उनकी कुर्सी चली गई। इसमें सबसे कम कार्यकाल रामनगर निवासी हरीश दफौटी का रहा। एक मार्च को हरि राम टम्टा परंपरागत शिल्प उन्नयन संस्थान के अध्यक्ष का पद संभालने वाले दफौटी ने संस्थान के अफसरों संग अब तक सिर्फ एक बैठक की थी। वहीं, तीरथ राज में तैयार होने वाली नई लिस्ट में जगह बनाने के लिए निवर्तमान दायित्वधारियों के अलावा पूर्व में किसी वजह से चूक चुके भाजपा नेता भी खासे सक्रिय हो गए हैं। सूत्रों की माने तो लिस्ट आने से पहले इन्होंने हल्द्वानी से लेकर दून तक के संपर्कों को खंगालना शुरू कर दिया है।

    पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में दायित्व पाने वाले 120 नेताओं की कुर्सी जाने की चर्चाओं पर शुक्रवार को शासन के आदेश के बाद मुहर लग गई। नैनीताल जिले से कुल सात लोगों का दायित्व अब छीन लिया गया है। इसमें पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष से लेकर भाजपा में अलग-अलग पदों पर काम कर चुके पुराने नेता भी शामिल है। खास बात यह है कि पार्टी के अलग-अलग नेताओं संग नजदीकियां होने के कारण इन्हें उनका वरहदस्त हासिल था। अब इन्हीं पुराने कनेक्शन के सहारे यह लोग दोबारा माननीय का दर्जा पाने को लेकर जोड़-तोड़ में जुट गए हैं। हालांकि नई रेस में इनका मुकाबला उन लोगों से भी होगा जो कि पूर्व में तमाम प्रयासों के बावजूद सरकार में शामिल नहीं हो पाए थे।

    इनका दायित्व हट गया

    जिन दायित्वधारियों को पद मुक्त किया गया है, उनमें नैनीताल जिले से मंडी परिषद अध्यक्ष गजराज बिष्ट, नगरीय पर्यावरण संरक्षण परिषद के उपाध्यक्ष प्रकाश हर्बोला, केएमवीएन उपाध्यक्ष रेनू अधिकारी, समाज कल्याण अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष फकीर राम टम्टा, उच्च शिक्षा उन्नयन समिति उपाध्यक्ष बहादुर सिंह बिष्ट, उत्तराखंड आवास सलाहकार समिति उपाध्यक्ष तरुण बंसल, हरि राम टम्टा परंपरागत शिल्प उन्नयन संस्थान अध्यक्ष हरीश दफौटी शामिल हैं।

    आयोग के उपाध्यक्ष बने रहेंगे

    अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष मजहर नईम, अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष पीसी गोरखा व सफाई आयोग के उपाध्यक्ष अजय राजौर की कुर्सी अभी बची हुई है। संवैधानिक  पद होने की वजह से तीनों दायित्वधारी अपने कार्यकाल को पूरा करेंगे।

  • बगैर कोरोना टेस्ट के अल्मोड़ा से वापस लौटाया एनसीआर के 66 पर्यटकों को

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    अल्मोड़ा : कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर तेज होते ही जिले के बॉर्डर पर लॉकडाउन जैसे दिन लौट आए हैं। बगैर रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलिमर्स चेन रिएक्शन (आरटीपीसीआर) टेस्ट कराए बाहरी राज्यों से सैरसपाटे को 16 वाहनों से पहुंचे करीब 66 लोगों को बैरंग लौटा दिया गया। इनमें ज्यादातर दिल्ली व बरेली के साथ ही नोएडा, गाजियाबाद, हरियाणा, फरीदाबाद, हापुड़, गुरुग्राम आदि शहरों के पर्यटक थे। वहीं दूसरे राज्यों से पहुंचे 13 अन्य लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग व आरटीपीसीआर टेस्ट के बाद होम आइसोलेशन पर रहने की हिदायत दी गई।

    कोरोना संक्रमण के दोबारा रफ्तार पकडऩे से डीएम नितिन सिंह भदौरिया के निर्देश पर लोधिया बैरियर पर सख्ती शुरू हो गई है। बगैर आरटीपीसीआर टेस्ट के बाहरी राज्यों व शहरों के लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। शुक्रवार को बैरियर पर स्वास्थ्य विभाग के साथ ही पुलिस का दल मुस्तैद रहा। जागेश्वरधाम, कौसानी, अल्मोड़ा, बागनाथ आदि पर्यटन स्थलों की सैर को पहुंचे विभिन्न राज्यों से पहुंचे 66 लोगों को वापस लौटा दिया गया। ये लोग आरटीपीसीआर टेस्ट कराए बगैर उत्तराखंड पहुंचे थे। इधर, पुलिस की मौजूदगी में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शाम तक 80 वाहनों को रोक यात्रियों की कोरोना रिपोर्ट जांची। जिनके पास आरटीपीसीआर टेस्ट रिपोर्ट नहीं थी, उन्हें लौटा दिया गया।

    अल्मोड़ा में निर्वाचन आयोग के पर्यवेक्षक कोरोना संक्रमित 

    पहाड़ में कोरोना संक्रमण का सामुदायिक प्रसार फिर डराने लगा है। यहां सल्ट उपचुनाव के लिए पुणे से पहुंचे भारत निर्वाचन आयोग के व्यय पर्यवेक्षक कोरोना संक्रमित पाए गए। उन्हें सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय हल्द्वानी में आइसोलेट कर दिया गया है। हालांकि व्यय पर्यवेक्षक के संपर्क में रहे चार अन्य अधिकारियों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। जिले में 11 अन्य लोग भी संक्रमित मिले हैं।

  • 5 जवान शहीद, छत्तीसगढ़ में नक्सलियों और सुरक्षाकर्मियों की बीच मुठभेड़

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    रायपुर
    छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ होने की खबर आ रही है। बताया जा रहा है शनिवार को दोपहर बाद जवानों और नक्सलियों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ अभी भी जारी है। मुठभेड़ में पांच जवान शहीद हो गए हैं, जबकि कुछ के घायल होने की खबर है। कुछ नक्सलियों के भी मारे जाने की खबर है। शहीद होने वाले जवानों में DRG के 3 और CRPF का 2 जवान शामिल है। हालांकि घायलों के बारे में अभी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई है।

    नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी शुरू की: पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी
    राज्य के पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी ने बताया कि बीजापुर जिले के तर्रेम क्षेत्र में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में सुरक्षा बल के पांच जवान शहीद हो गए है। जबकि कुछ के घायल होने की भी सूचना है। अवस्थी ने बताया कि तर्रेम क्षेत्र में सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन, डीआरजी और एसटीएफ के जवानों को नक्सल विरोधी अभियान में रवाना किया गया था। दल जब क्षेत्र में था तब नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी शुरू कर दी।

    रायपुर में चल रही बैठक
    बीजापुर में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ पर डीजीपी डीएम अवस्थी, विशेष महानिदेशक (एंटी-नक्सल ऑपरेशंस) अशोक जुनेजा और अन्य अधिकारियों की एक आपात बैठक रायपुर में चल रही है।

    5 जवान शहीद, एक नक्सली भी ढेर
    वहीं सीआरपीएफ ने जानकारी देते हुए कहा, “छत्तीसगढ़ के बीजापुर में एक मुठभेड़ में प्रारंभिक रिपोर्टों से पता चलता है कि तीन जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और दो केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान शहीद हो गए हैं, एक नक्सली भी मारा गया है।”

    इससे पहले, 23 मार्च को नारायणपुर जिले में सुरक्षाकर्मियों को ले जा रही एक बस को नक्सलियों ने IED से उड़ा दिया था। उस हमले में 5 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे।

  • हरियाणा सहित देशभर में मृतकों के आश्रितों को देने पड़े 1288 करोड़ मुआवजा, रेलवे को लापरवाही पड़ी भारी

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    अंबाला। रेलवे की लापरवाही इस कदर भारी पड़ गई कि सरकारी खजाने से ही 1288 करोड़ से अधिक का मुआवजा मृतकों के आश्रितों को देना पड़ा। यह मुआवजा देने के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ी और रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल (आरसीटी) में साबित करना पड़ा कि रेलवे की लापरवाही से ही यात्री की जान गई है। हालांकि अधिकांश मामलों में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीफ) ने हादसों में हुई मौत का जिम्मेदारी से रेलवे को बचाने का प्रयास किया। आखिरकार रेलवे को साख बचाने के लिए आश्रितों को मुआवजा राशि देनी ही पड़ी।

    रेलवे ने चार साल में हादसों की समीक्षा की तो चौंकाने वाले तथ्य आए सामने

    हाल ही में रेलवे बोर्ड ने ऐसे मामलों की समीक्षा की तो पता चला कि पिछले चार सालों में 16 हजार 833 लोगों के मामलों का निपटान हुआ, जिसमें 1288 करोड़ 11 लाख रुपये मुआवजा राशि दी गई।

    रेलवे के सोलह जोन में सबसे अधिक राशि

    2018-19 में सबसे अधिक हादसे हुए, जिसमें 5062 लोगों की मौत हुई और इस कारण 378.68 करोड़ रुपये मुआवजा दिया गया। साल 2019-20 में 4947 हादसे हुए, जिसमें मुआवजे की राशि सबसे अधिक 384.31 करोड़ रुपये रही। साल 2017-18 में 4369 हादसे हुए, जबकि मुआवजा राशि 359.58 करोड़ रुपये रही। साल 2020-21 (दिसंबर 2020 तक) में 2455 हादसे हुए, जिनमें 173.54 करोड़ रुपये मुआवजा दिया गया। इन में मरने वालों के अलावा घायल, अंग भंग के आंकड़े भी शामिल हैं।

    यात्रा में खलल, तो भी मुआवजा मिलेगा

    रेल सफर के दौरान मौत ही नहीं बल्कि यात्रा में खलल पड़ने पर भी रेलवे को मुआवजा देना पड़ता। यात्री के पास टिकट होने के बाद ही वह कानूनी लड़ाई लड़ सकता है, चाहे मामला सीट से संबंधित हो या फिर रेल सेवा से। हाल ही में बुजुर्ग दंपती को इंसाफ देते तीन लाख रुपये का हर्जाना देने के आदेश दिए गए हैं। बुजुर्ग और दिव्यांग दंपती को लोअर बर्थ न मिलने और करीब 100 किलोमीटर पहले ही उतार देने पर रेलवे की लापरवाही उजागर हुई।

    राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में भी रेलवे का पक्ष खारिज कर दिया गया। यह दंपती 4 सितंबर 2010 को सोलापुर से बिरूर जाने के लिए टिकट बुक करवाई थी। इस तरह के कई मामले आते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव या फिर लंबी कानूनी लड़ाई के झंझट से बचकर अफसरों को ही शिकायत दे देते हैं।

    ——

    ” रेल सफर के दौरान यात्री की मौत के बाद आरपीएफ की लंबी प्रक्रिया होती है। चेक किया जाता है कि जिस व्यक्ति की मौत हुई है, उसका कारण क्या है। उसके पास टिकट था या नहीं। यदि टिकट था तो किस स्टेशन से कब लिया था। मुआवजे का अंतिम फैसला आरसीटी का होता है।

  • हरियाणा सहित देशभर में मृतकों के आश्रितों को देने पड़े 1288 करोड़ मुआवजा, रेलवे को लापरवाही पड़ी भारी

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    अंबाला। रेलवे की लापरवाही इस कदर भारी पड़ गई कि सरकारी खजाने से ही 1288 करोड़ से अधिक का मुआवजा मृतकों के आश्रितों को देना पड़ा। यह मुआवजा देने के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़नी पड़ी और रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल (आरसीटी) में साबित करना पड़ा कि रेलवे की लापरवाही से ही यात्री की जान गई है। हालांकि अधिकांश मामलों में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीफ) ने हादसों में हुई मौत का जिम्मेदारी से रेलवे को बचाने का प्रयास किया। आखिरकार रेलवे को साख बचाने के लिए आश्रितों को मुआवजा राशि देनी ही पड़ी।

    रेलवे ने चार साल में हादसों की समीक्षा की तो चौंकाने वाले तथ्य आए सामने

    हाल ही में रेलवे बोर्ड ने ऐसे मामलों की समीक्षा की तो पता चला कि पिछले चार सालों में 16 हजार 833 लोगों के मामलों का निपटान हुआ, जिसमें 1288 करोड़ 11 लाख रुपये मुआवजा राशि दी गई।

    रेलवे के सोलह जोन में सबसे अधिक राशि

    2018-19 में सबसे अधिक हादसे हुए, जिसमें 5062 लोगों की मौत हुई और इस कारण 378.68 करोड़ रुपये मुआवजा दिया गया। साल 2019-20 में 4947 हादसे हुए, जिसमें मुआवजे की राशि सबसे अधिक 384.31 करोड़ रुपये रही। साल 2017-18 में 4369 हादसे हुए, जबकि मुआवजा राशि 359.58 करोड़ रुपये रही। साल 2020-21 (दिसंबर 2020 तक) में 2455 हादसे हुए, जिनमें 173.54 करोड़ रुपये मुआवजा दिया गया। इन में मरने वालों के अलावा घायल, अंग भंग के आंकड़े भी शामिल हैं।

    यात्रा में खलल, तो भी मुआवजा मिलेगा

    रेल सफर के दौरान मौत ही नहीं बल्कि यात्रा में खलल पड़ने पर भी रेलवे को मुआवजा देना पड़ता। यात्री के पास टिकट होने के बाद ही वह कानूनी लड़ाई लड़ सकता है, चाहे मामला सीट से संबंधित हो या फिर रेल सेवा से। हाल ही में बुजुर्ग दंपती को इंसाफ देते तीन लाख रुपये का हर्जाना देने के आदेश दिए गए हैं। बुजुर्ग और दिव्यांग दंपती को लोअर बर्थ न मिलने और करीब 100 किलोमीटर पहले ही उतार देने पर रेलवे की लापरवाही उजागर हुई।

    राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में भी रेलवे का पक्ष खारिज कर दिया गया। यह दंपती 4 सितंबर 2010 को सोलापुर से बिरूर जाने के लिए टिकट बुक करवाई थी। इस तरह के कई मामले आते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव या फिर लंबी कानूनी लड़ाई के झंझट से बचकर अफसरों को ही शिकायत दे देते हैं।

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    ” रेल सफर के दौरान यात्री की मौत के बाद आरपीएफ की लंबी प्रक्रिया होती है। चेक किया जाता है कि जिस व्यक्ति की मौत हुई है, उसका कारण क्या है। उसके पास टिकट था या नहीं। यदि टिकट था तो किस स्टेशन से कब लिया था। मुआवजे का अंतिम फैसला आरसीटी का होता है।

  • असम पोल | दुर्भाग्यपूर्ण है कि सभी के लिए काम करना ‘सांप्रदायिकता’ कहलाता है: पीएम मोदी का कांग्रेस पर हमला

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    तमालपुर कांग्रेस के नेतृत्व वाले महाजोत गठबंधन के खिलाफ पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान असम के तमालपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए शनिवार को कहा कि यह “दुर्भाग्यपूर्ण” है कि समाज के सभी वर्गों के लिए काम करना “सांप्रदायिकता” कहलाता है। “कुछ लोगों द्वारा।

    विपक्ष पर निशाना साधते हुए, प्रधान मंत्री ने कहा कि महाजोत गठबंधन का “महाजोह” भी उजागर हुआ है, यह कहते हुए कि असम के लोग हिंसा के खिलाफ हैं और “विकास, शांति, एकता और स्थिरता चाहते हैं।”

    मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि असम में “डबल इंजन” वाली भाजपा सरकार ने राज्य के लोगों के लिए जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया है, यह कहते हुए कि यह वर्तमान समस्याओं के समाधान को खोजना जारी रखेगा।

    प्रधान मंत्री ने उन उग्रवादियों से भी आग्रह किया जो अभी भी असम में मुख्यधारा में लौटने के लिए आत्मसमर्पण कर रहे हैं क्योंकि उन्हें जरूरत है कि राज्य सरकार पूरी तरह से बोडो समझौते को लागू करने के लिए ईमानदारी से काम कर रही है।

    “पहली बार, एक सरकार 100 जिलों पर काम कर रही है, जो ‘एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स’ कार्यक्रम के तहत विकास की दौड़ में पीछे रह गए थे। ये जिले अब विकास के इच्छुक हैं और असम के 7 जिले इस कार्यक्रम के तहत हैं,” पीएम मोदी ने कहा

    पीएम मोदी ने राज्य के पहली बार मतदाताओं से आग्रह किया कि वे बड़ी संख्या में आएं और अपने अधिकारों का उपयोग करें, यह देखते हुए कि असम की जनता ने एनडीए सरकार बनाने का फैसला किया है।

    “मेरे पास उन युवा साथियों के लिए एक विशेष अनुरोध है जो पहली बार अपना वोट डालने जा रहे हैं। भारत के 75 वें वर्ष के जश्न के रूप में आप जो वोट डालेंगे, वह यह भी निर्धारित करेगा कि असम 100 साल पूरे होने पर कितना आगे होगा।” उन्होंने कहा कि भाजपा के संकल्प पत्र में इसके लिए स्पष्ट रोडमैप है।

    असम विधानसभा चुनाव 2021 का तीसरा और अंतिम चरण 3 अप्रैल को होगा। भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए कांग्रेस के ‘महाजोत’ महागठबंधन के खिलाफ है, जिसमें ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF), बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट, द अंचल शामिल हैं गण मोर्चा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), सीपीआई और सीपीआई-एमएल।

  • पेयजल लाइन जगदंबा नगर टैंक से बिछाई जाएगी हल्‍द्वानी में

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    हल्द्वानी : मुखानी क्षेत्र की कॉलोनियों में पेयजल की समस्या दूर नहीं होने पर जलसंस्थान ने जगदंबा नगर टैंक से 12 मीटर की बाइपास लाइन बिछाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा नहर कवङ्क्षरग रोड की कॉलोनी में बने नलकूप से भी मुखानी की मुख्य पेयजल लाइन को जोड़ा जा रहा है। जिससे जज फार्म क्षेत्र तक पर्याप्त पानी की आपूर्ति हो सके।

     

    मुखानी क्षेत्र के गणेश विहार, बसंत विहार बी व सी ब्लाक, जगन्नाथ विहार व अशोक विहार में एक महीने से जलापूर्ति ठप पड़ी है। इस क्षेत्र में नहर कवरि‍ंग रोड स्थित जगदंबा नगर टैंक से पानी आता है। शिवरात्रि के दिन मुख्य पाइप लाइन चोक हो गई थी। कई दिन मशक्कत के बाद जलसंस्थान ने काफी मलबा लाइन से निकाला। इसके बावजूद मुखानी क्षेत्र को पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। अफसरों के मुताबिक टैंक से मुख्य पेयजल लाइन में पानी छोडऩे पर प्रेशर बैक हो रहा है। इससे लाइन में और मलबा फंसा होने की संभावना है। इसी कारण पूरा पानी लाइन में नहीं जा रहा है और अंतिम छोर के इलाकों में समस्या आ रही है।

     

    इस समस्या के समाधान के लिए टैंक से 10 इंच की बाइपास पाइप लाइन बिछाई जा रही है। जिसे आगे ले जाकर फिर से मुख्य पेयजल लाइन में जोड़ दिया जाएगा। इसके साथ ही श्याम विहार में बने नलकूप से काफी कम क्षेत्र को जलापूर्ति होती है। इस नलकूप से भी मुखानी की मुख्य पाइप लाइन को जोड़ा जा रहा है। ये दोनों काम शनिवार शाम तक पूरे होने की उम्मीद है।

     

    ईई जल संस्थान संजय श्रीवास्तव ने बताया कि जगदंबा नगर टैंक से बाइपास लाइन बिछाकर आगे मुख्य पाइप लाइन में जोड़ी जा रही है। इसके साथ ही श्याम विहार स्थित नलकूप की लाइन को भी मुख्य लाइन में जोड़ा जा रहा है। इससे मुखानी क्षेत्र के अंतिम क्षेत्र तक के लोगों का जलसंकट दूर होगा।