Category: state-news

  • लोगों ने शराब पीते देखा था दोनों को, जींद के खोखरी गांव में दो युवकों की हत्या, खेत में मिले शव;

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    हरियाणा के जींद जिले के सदर थाना अंतर्गत खोखरी गांव में रविवार को यानी होलिका दहन की रात दो लोगों की हत्या कर दी गई। दोनों के शव खून से लथपथ खेत में मिले हैं। एक का शव पानी की हौद में पड़ा था तो दूसरे का उससे कुछ दूरी पर। सूचना मिलने के बाद पहुंची पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। घटना के बाद ही दोनों परिवार में होली की खुशियों की जगह मातम पसर गया।

    सदर थाना प्रभारी दिनेश कुमार के अनुसार गांव खोखरी निवासी संदीप (29) और रोहताश (47) के शव रविवार रात आठ बजे खेत में पड़े मिले। संदीप का शव पानी की हौद में पड़ा हुआ था तो रोहताश का उससे कुछ दूरी पर। पुलिस के अनुसार संदीप के शरीर पर चोट के निशान भी हैं। हत्या की सूचना मिलते ही काफी संख्या में ग्रामीण खेत में पहुंचे।

    वारदात की सूचना पर फॉरेंसिक एक्सपर्ट की टीम ने भी मौके से सुबूत जुटाए। पुलिस के अनुसार मरने वाले दोनों रविवार शाम के समय गांव के ही दो लोगों के साथ शराब पीते देखे गए थे। माना जा रहा है कि शराब पीने के दौरान किसी बात को लेकर उनके बीच झगड़ा हो गया। जिसमें संदीप और रोहताश की हत्या कर दी गई। जिन लोगों पर हत्या का शक जताया जा रहा है उनकी मृतकों के साथ अच्छी दोस्ती थी।

    चारों अकसर साथ रहते थे। रविवार शाम को चार बजे के बाद चारों को एक साथ देखा गया था। सदर थाना प्रभारी दिनेश कुमार ने बताया कि संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद ही पता चल पाएगा कि हत्या उन्होंने की है या किसी और ने। दोनों की हत्या किन कारणों से की गई है।

  • बढ़ाई गई सुरक्षा, राफेल भी यहां तैनात, अंबाला कैंट के डोमेस्टिक जोन से पकड़ा गया संदिग्ध

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    अंबाला। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन के पास संदिग्ध पकड़ा गया है। अधिकारियों ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया है। संदिग्ध पकड़े जाने के बाद वायुसेना स्टेशन के पास सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

    जानकारी के मुताबिक, अति संवेदनशील अंबाला कैंट के वायुसेना स्टेशन से थोड़ा आगे डोमेस्टिक जोन (जहां क्वार्टर बने हैं) में घुसे एक संदिग्ध घुस आया। उसे अधिकारियों ने दबोच लिया है। उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया है। अंबाला कैंट थाना पुलिस ने इस मामले में फ्लाइट लेफ्टिनेंट विदिशा की शिकायत पर केस दर्ज किया है।

    उल्लेखनीय है कि अंबाला कैंट वायुसेना स्टेशन में पहले भी कई बार संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है। राफेल की तैनाती के कारण वायुसेना स्टेशन और भी अधिक संवेदनशील हो चुका है। ऐसे में वायुसेना स्टेशन की सुरक्षा को और कड़ा किया गया है।

    उत्तर प्रदेश के गोंडा का रहने वाला है संदिग्ध

    शिकायत में विदिशा ने बताया कि वह वायुसेना स्टेशन अंबाला कैंट में बतौर सुरक्षा अधिकारी तैनात हैं। उन्होंने बताया कि 29 मार्च को वह और अन्य अधिकारी व जवान अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। सुबह करीब पौने नौ बजे एक युवक संदिग्ध हालात में वायुसेना स्टेशन के डोमेस्टिक जोन में घुसने लगा। उसे अधिकारियों ने देखा और पकड़ लिया। उससे प्रारंभिक पूछताछ की तो उसकी पहचान सुनील कुमार निवासी गांव बिरथिया पुलिस स्टेशन कटरा, तहसील कंडेलगज, जिला गोंडा उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है।

    संदिग्ध दस्तावेज या सामान नहीं मिला

    उसकी तलाशी ली गई, तो उसके पास से संदिग्ध दस्तावेज अथवा अन्य सामान बरामद नहीं हुआ। इसकी सूचना बीसी बाजार पुलिस चौकी को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपित को अपने कब्जे में ले लिया। इसकी सूचना युवक के स्वजनों को दी गई, जो मौके पर पहुंचे।

    डोमेस्टिक जोन में घुसने का नहीं बता पाया कारण

    पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि युवक अपने जीजा के पास शहर के प्रेम नगर में रहता है। वह पेंटिंग का काम करता है। जांच अधिकारी सुशील कुमार ने बताया कि आरोपित के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। वह डोमेस्टिक जोन में क्यों घुसा था, उसके बारे में अभी पूछताछ की जा रही है। एयरफोर्स अधिकारियों से भी बातचीत की जाएगी।

  • खिलाफ आवाज उठाने वाली अतिया साबरी को गुजारा भत्ता देने के आदेश अदालत ने जरी किये तीन तलाक के

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    हरिद्वार। अदालत ने तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठाने वाली अतिया साबरी को 21 हजार रुपये महीना और दो बेटियों को सात-सात हजार रुपये गुजारा भत्ता देने के आदेश दिए हैं। हरिद्वार की लक्सर कोतवाली क्षेत्र के सुल्तानपुर निवासी अतिया साबरी को उसके पति वाजिद ने वर्ष 2016 में तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया था।

    अतिया साबरी ने हरिद्वार में नवंबर 2016 में इसके खिलाफ आवाज उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। जिसके बाद केंद्र सरकार ने तीन तलाक के खिलाफ कानून भी बनाया। अतिया तभी से अपनी दोनों बच्चियों के साथ पिता के पास सहारनपुर उत्तर प्रदेश रहती आ रही हैं। अतिया ने अपनी दो बच्चियों और अपना गुजारा भत्ता के लिए सहारनपुर के परिवार न्यायालय में एक केस दायर किया था। सहारनपुर के जिला परिवार न्यायाधीश नरेंद्र कुमार ने सुनवाई करते हुए अतिया और उनकी दोनों बेटियों के गुजारा भत्ता के तौर पर 2015 से सात-सात हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं। अतिया के परिवार ने इसे सच की जीत बताया है।

  • भाजपा ने महेश जीना को उतारा सेल्ट विधानसभा सीट पर, कांग्रेस उम्मीदवार भी तय

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    सल्ट विधानसभा सीट से आखिरकार भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने होली के दिन अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए। भाजपा में जहां महेश जीना को उम्मीदवार बनाया है वहीं कांग्रेस ने गंगा पंचोली पर दांव खेला है। बता दें कि महेश जीना दिवंगत विधायक सुरेंद्र सिंह जीना के भाई हैं। जबकि कांग्रेस की गंगा पंचोली पूर्व में भी यहां से अपनी किस्मत आजमा चुकी हैं।

    गौरतलब है कि सल्ट सीट भाजपा के ही खाते में थी और यहां से सुरेंद्र सिंह जीना विधायक थे। बीते दिनों बीमारी के चलते उनकी मौत होने से ये सीट खाली चल रही है। भाजपा जहां अपने दबदबे वाली इस सीट पर फिर से काबिज़ होना चाहती है, वहीं कांग्रेस इस सीट को किसी भी तरह अपनी झोली में डालना चाहती है।

    हालांकि ये पहले से ही अनुमान लगाया जा रहा था कि राज्य में अब तक हुए अन्य उपचुनाव की तरह इस बार भी सहानुभूति का दांव खेलेगी, लेकिन इसी सीट से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को चुनाव लड़ाने तक की चर्चाएं आम रहीं।

    वहीं कांग्रेस ने सिम्बके फाइनल होने के बावजूद प्रत्याशी घोषित नहीं किया और भाजपा के पत्ते खोलने का इंतज़ार किया। आखिरकार होली के दिन इंतज़ार खत्म हुआ और भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने अपने-अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए। बता दें कि सल्ट विधानसभा सीट पर 17 अप्रैल को चुनाव होगा।

    आपको बता दें कि इस सीट से गंगा 2017 में भी कांग्रेस की प्रत्याशी थी। उन्होंने भाजपा प्रतयाशी को कड़ी टक्कर दी थी और केवल करीब 3000 वोटों के अंतर से चुनाव हारीं थीं। सुरेंद्र जीना को तब 21,581 वोट मिले थे, जबकि गंगा पंचोली ने 18671 वोट लिए थे। वह 2904 वोटों से चुनाव हार गई थीं।

    सल्ट उपचुनाव को 2022 विधानसभा का लिटमस टेस्ट माना जा रहा है। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के कार्यकाल के यह पहला उपचुनाव है। इसलिए इसे उनकी परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।

    सल्ट उपचुनाव 2021: उत्तराखंड में पहली बार ग्लव्स पहनकर वोट डालेंगे मतदाता

    उत्तराखंड में सल्ट विधानसभा के मतदाता ग्लव्स पहनकर वोटिंग करेंगे। पहली बार ऐसा होगा कि चुनाव में मतदाताओं को वोटिंग और रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने से पहले हाथों में दस्ताने पहनने होंगे। निर्वाचन आयोग ने यह प्रावधान कोविड-19 महामारी के संक्रमण से रोकथाम करने के उद्देश्य से किया है।

    विधायक सुरेंद्र सिंह जीना के असामयिक निधन से खाली हुई सल्ट विधानसभा के उपचुनाव के लिए 17 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। चुनाव के लिए नामांकन भरने की प्रक्रिया आरंभ हो गई है जो 30 मार्च तक चलेगी। 31 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी और तीन अप्रैल तक नाम वापस लिए जा सकेंगे।

    यह उपचुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब एक बार फिर कोविड-19 महामारी के संक्रमण फैलाव का खतरा बढ़ रहा है। यही वजह है कि निर्वाचन आयोग उपचुनाव के दौरान कोविड-19 महामारी रोकथाम की मानक प्रचालन प्रक्रिया को कड़ाई से लागू कर रहा है। सहायक निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास के मुताबिक, जिन बूथों में एक हजार से अधिक मतदाता हैं, उन्हें दो बूथों में बदला गया है। सल्ट विधानसभा में 1000 मतदाता वाले 15 बूथ हैं।

    बूथों की संख्या बढ़ाई

    2017 के विधानसभा चुनाव में बूथों की संख्या 136 थी, जिसे बढ़ाकर 151 किया गया है। बूथों की संख्या बढ़ने से सामाजिक दूरी का पालन कराने में सहजता रहेगी।

    वोटिंग के लिए एक घंटा बढ़ाया गया

    वोटिंग का समय भी एक घंटा बढ़ाया गया है। उपचुनाव के लिए सुबह आठ बजे के स्थान पर सुबह सात बजे से वोटिंग होगी जो शाम पांच बजे तक जारी रहेगी। पोलिंग बूथ की कतारों में मतदाता को मास्क और सैनिटाइजर तथा सामाजिक दूरी का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा।

  • प्रत्‍याशियों की आय व देनदारी का ब्यौरा सामने आ गई सल्‍ट उपचुनाव के 

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    अल्मोड़ा : सल्ट उपचुनाव में ताल ठोक रहे प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र में अपनी आय व देनदारी का ब्यौरा भी दिया है। इस लिहाज से भाजपा प्रत्याशी महेश जीना सबसे मालदार प्रत्याशी हैं। वहीं कांग्रेस की गंगा पंचोली दूसरे नंबर पर हैं तो निर्दल पान सिंह राज्य आंदोलनकारी पेंशन के बूते चुनाव मैदान में हैं।

    चार करोड़ के मालिक हैं व्यवसायी जीना

    भाजपा प्रत्याशी महेश जीना व्यवसायी हैं। उनके पास एक लाख रुपये नकद व बैंक खाते में 92107 रुपये हैं। जेवरात के शौकीन हैं। उन्होंने शपथ पत्र में खुद के पास 20 ग्राम सोना (90 हजार रुपया) दर्शाया है। रिवॉल्वर रखते हैं। एक्मे व श्रीसाईं रमेश प्राइवेट लिमिटेड तथा बेतालघाट एसोसिएट बेतालेश्वर स्टोन में उनका शेयर हैं। पांच लाख रुपये कीमत का चौपहिया वाहन है। सकल कुल मूल्य 21,03,823 रुपये दर्शाया गया है। पत्नी अंजू जीना के पास नकद 40 हजार रुपये हैं। 1.35 लाख रुपये कीमत का 300 ग्राम सोना व 500 ग्राम चांदी है। एक बेटे के पास 30 ग्राम सोना (1.35 लाख रुपये) व दूसरे के पास 20 ग्राम सोना (90 हजार रुपये) दर्शाया है। धरकोट, मंगरूखाल, भिकियासैंण, तुराचौरा व रुडोली गांव में 0.925 एकड़ कृषि भूमि है। वर्तमान कीमत 75 लाख रुपये दर्शाई है। दिल्ली में फ्लैट समेत महेश जीना 2.85 करोड़ की परिसंपत्तियों के मालिक हैं। पत्नी व बच्चों को मिलाकर भाजपा प्रत्याशी के पास चार करोड़ से ज्यादा की परिसंपत्तियां हैं।

    पैदल या पति की बाइक से घूमती हैं शिक्षिका गंगा पंचोली

    पेशे से शिक्षिका कांग्रेस प्रत्याशी गंगा पंचोली के पास नकद 40 हजार व नेवी से अवकाश प्राप्त पति चंद्रप्रकाश पंचोली के पास 30 हजार रुपये हैं। एसबीआइ शाखा के बचत खाते में 13,80,256 रुपये हैं। पति के दो अलग अलग खातों में करीब 50 हजार जमा हैं। परिवार के पास एक बाइक है। गंगा पंचोली के पास बीमा आदि समेत कुल जमा राशि 7,47,524 रुपये हैं। 7.50 लाख रुपये कीमत का 150 ग्राम सोना आदि जेवरात हैं। भूमि व आवासीय भवन की वर्तमान कीमत 40 लाख रुपये है। पेंशनधारक पति के नाम जसपुर गांव में 0.2 एकड़ कृषि भूमि है। वर्तमान कीमत 29.12 लाख रुपये है। कुल मिलाकर गंगा पंचोली करीब 30 लाख रुपये की परिसंपत्तियों की मालकिन हैं। पति के साथ करीब 37 लाख की परिसंपत्तियां हैं।

    1.30 लाख के कर्जदार हैं पान सिंह 

    निर्दलीय प्रत्याशी पान सिंह राज्य आंदोलनकारी हैं। 3100 रुपये प्रतिमाह पेंशन से गुजारा करते हैं। उनके पास नकद 5000 रुपये हैं। बैंक में बचत खाता नहीं है। 0.004 हेक्टेयर कृषि भूमि है। 5वीं पास पान सिंह की पत्नी को वृद्धावस्था पेंशन के तौर पर 1200 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। निर्दल प्रत्याशी पर ग्रामीण बैंक देघाट शाखा का एक लाख व ओबीसी बैंक शाखा का 30 हजार रुपये बकाया चल रहा है।

    उपपा प्रत्याशी जगदीश पर फसली ऋण 

    उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) प्रत्याशी जगदीश चंद्र एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। जीआइसी भिकियासैंण से 2014 में 12वीं पास की। उन पर 30 हजार रुपये का फसली ऋण है। पनुवानौला में एक एकड़ कृषि भूमि के मालिक हैं। उनके पास दस हजार रुपये नकद व बैंक के बचत खाते में दो हजार रुपये हैं।

  • ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर 30 वर्षीय युवक की हत्या, होली के दिन दुजाना गांव में खूनी खेल

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    झज्‍जर। हाेली के दिन दुजाना गांव में एक युवक की हत्‍या करने का मामला सामने आया है। युवक की हत्‍या गोलियां मार कर की गई है। मृतक अनिल उम्र करीब 30 वर्ष दिल्ली में गेस्ट टीचर के पद पर लगा हुआ था । जो की कल ही अपने घर पर आया था। कुछ समय पहले तक चिकन कॉर्नर बलजीत की दुकान पर बैठा था।

    इसी दौरान अपाचे बाइक पर सवार तीन नौजवान लड़के आए। जिसमें से एक बाइक पर रह गया और दो ने चिकन कॉर्नर मैं आकर अनिल को दो गोली मारी। अनिल अपने बचाव के लिए चिकन कॉर्नर से बाहर निकलकर पीछे की ओर भाग गया। वहां पर पहुंच उसको कई गोलियां मारी गई। जिस की मौके पर ही मौत हो गई।

    अज्ञात बाइक सवार तीनों मौके से भाग गए। पुलिस की विभिन्न टीम मौके पर मौजूद है। अभी तक हत्‍या करने का कारण स्‍पष्‍ट नहीं हो सका है। पुलिस जांच में जुटी हुई है। युवक के शव को पोस्‍टमार्टम के लिए अस्‍पताल ले जाने की तैयारी चल रही है और गांव में हत्‍या किए जाने से तनाव की स्थिति बनी हुई है।

    प्रारम्भिक रूप से सामने आया कि मृतक के परिवार का गांव में किसी एक परिवार से जमीनी विवाद चल रहा है । जिसमें दूसरे पक्ष के लोग जेल में भी है। उधर, पीड़ित पक्ष की ओर से पुलिस में पहले भी शिकायत देते रहे हैं और इस तरह के हमले की आशांका व्यक्त की गई थी। वहीं आगामी जांच और दी जाने वाली शिकायत के आधार पर ही स्थिति स्पष्‍ट हो पाएगी। मृतक का एक बड़ा भाई भी है। जो जमींदारा करता है।

    वहीं होली के दिन ग्रामीण जहां खुशियां मनाने की तैयारी कर रहे थे और गांव में शांत वातावरण था, वहीं हत्‍या जैसी वारदात होने के बाद शोर शराबा हो गया। कल भाग यानि रंगों से खेलने का त्‍योहार है मगर इससे पहले ही गांव में खून की होली खेली गई। 30 वर्षीय युवक की इस तरह से हत्‍या किए जाने से सभी लोग सकते में है और हर ओर इसी बात की चर्चा हो रही है।

  • पकड़ी कार हूटर बजाने पर पुलिस ने

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    देहरादून: हूटर लगाकर वाहन दौड़ा रहे वाहन चालक को वसंत विहार थाना पुलिस ने पकड़ लिया है। वाहन को सीज किया गया है। इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि दून पुलिस के फेसबुक पेज पर किसी व्यक्ति ने शिकायत  दर्ज कराई कि वसंत विहार चौक क्षेत्र में पर एक कार को पुलिस सायरन का प्रयोग करते हुए चलाया जा रहा है। कार चालक की ओर से वसंत विहार चौक पर लगी लाल बत्ती को जंप कर यातायात नियमों का उल्लंघन किया गया है।

    इंटरनेट  मीडिया फेसबुक पर दून पुलिस के पेज पर की गई शिकायत पर तत्काल संज्ञान लेकर पुलिस टीम ने वाहन की रजिस्ट्रेशन की जांच की वाहन इंद्रानगर निवासी ज्योति विक्रम रावत के नाम पर पंजीकृत होना पाया। वसंत विहार चौक के सीसीटीवी फुटेज की जांच व भौतिक सत्यापन में पाया कि कार पर सायरन लगा हुआ था।ज्योति विक्रम रावत वाहन को अवैध सायरन का प्रयोग कर व वाहन के वैध कागजात व ड्राईविंग लाईसेंस के बिना चलाया जा रहा था।

    मंगलवार को पुलिस ने वाहन को पुलिस ने कब्जे मे लेकर सीज कर दिया है। पुलिस के मुताबिक इस तरह हूटर का प्रयोग नहीं किया जा सकता। यह यातायात नियमों का उल्‍लंघन के तहत है। इसलिए संबंधित वाहन को सीज किया गया है। पुलिस अभियान के तहत भी इस ओर जागरुक करती है।

  • ऐसे बने शांति के पुजारी ‘महाकाल’ के उपासक

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    देहरादून। कुंभ पर्व क्या है और कैसे यह मेले में परिवर्तित हुआ, इस संबंध पौराणिक मान्यताओं की जानकारी कमोबेश सभी को है, लेकिन इस बात को शायद कम ही लोग जानते होंगे कि देश के कोने-कोने से साधु-संत क्यों कुंभ के निमित्त एक स्थान पर जुटते हैं। क्या उनका ध्येय महज स्नान करनाभर है। अगर अगर आप ऐसा ही मानते हैं तो यकीनन आपकी जानकारी अधूरी है। असल में कुंभ पर्वों पर देशभर से दशनामी संन्यासी व सनातन धर्म के विद्वान हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन व नासिक में एकत्र होकर बीते तीन वर्षों की धार्मिक गतिविधियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हैं। अखिल भारतीय स्तर पर संतों के सम्मेलन का यही सर्वोत्तम मौका होता है। इस परंपरा का निर्वाह संतजन सदियों से करते आ रहे हैं।

    इतिहास के पन्ने पलटें तो पता चलता है कि 14वीं सदी के आरंभ में आततायी शासकों ने सनातनी परंपरा को आघात पहुंचाना शुरू कर दिया था। तब परमहंस संन्यासियों को लगने लगा कि उनकी इस राक्षसी प्रवृत्ति पर शास्त्रीय मर्यादा के अनुकूल विवेक शक्ति से विजय पाना असंभव है। सो, एक कुंभ पर्व में दशनामी संन्यासियों और सनातन धर्म के ज्ञाता विद्वानों ने तय किया कि क्यों न शस्त्र का जवाब शस्त्र से ही दिया जाए। नतीजा, दशनामी संन्यासियों के संगठन की सामरिक संरचना फील्ड फॉरमेशन आरंभ हुई।

    असल में स्थिति भी ऐसी ही थी। सनातनी परंपरा की रक्षा के लिए शस्त्र धारण करना ही एकमात्र विकल्प शेष रह गया था। लिहाजा, ऐसा निश्चय हो जाने पर सर्वानुमति से निर्णय लिया गया कि आगामी कुंभ पर्व के सम्मेलन में पूर्वोक्त चारों आम्नायों (शृंगेरी, गोवर्द्धन, ज्योतिष व शारदा मठ) से संबंधित दसों पदों के संन्यासियों की मढ़ि‍यों के समस्त मठ संचालकों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाए।

    इस निर्णय के अनुसार उससे अग्रिम कुंभ पर्व के सम्मेलन में देश के समस्त भागों से हजारों मठों के संचालक, विशिष्ट संत-संन्यासी व सनातन धर्म के ज्ञाता विद्वान इकट्ठा हुए। उन्होंने एकमत से फैसला लिया कि अब परमात्मा के कल्याणकारी शिव स्वरूप की उपासना करते हुए सनातन धर्म की रक्षा नहीं हो सकती। इसलिए परमात्मा रुद्र के संहारक भैरव स्वरूप की उपासना करते हुए हाथों में शस्त्र धारण कर दुष्टों का संहार किया जाए। ऐसा निश्चिय हो जाने के बाद शस्त्रों से सज्जित होने के लिए समस्त दशनामी पदों का आह्वान किया गया। इनमें विरक्त संन्यासियों के अलावा ऐसे सहस्त्रों नवयुवक भी सम्मिलित हुए, जिनके हृदय में सनातन धर्म की रक्षा के लिए सर्वस्व बलिदान करने की प्रबल भावना थी। हजारों की संख्या में नवयुवक संन्यास दीक्षा लेकर धर्म रक्षा के लिए कटिबद्ध हो गए।

    परमात्मा के भैरव स्वरूप की अविच्छिन्न शक्ति प्रचंड भैरवी (मां दुर्गा) का आह्वान कर उनके प्रतीक के रूप में भालों की संरचना हुई। इन्हीं भालों के सानिध्य में दशनाम संन्यासियों को युद्धकला का प्रशिक्षण देकर शस्त्रों से सज्जित किया गया। इसके बाद प्रशिक्षित एवं शस्त्र सज्जित संन्यासियों ने वस्त्र आदि साधनों का परित्याग कर दिया। आदि शंकराचार्य से पूर्व जैसे परमहंस संन्यासी वस्त्र त्यागकर दिगंबर अवस्था में रहते थे, वैसे भी वे भी शरीर में भस्म लगाए दिगंबर अवस्था में रहने लगे। इसी दिगंबर रूप ने उन्हें नागा संन्यासी के रूप में प्रतिष्ठित किया। कालांतर में नागा संन्यासी संज्ञा ही उनकी पहचान हो गई। ज्योतिषाचार्य डॉ. सुशांत राज कहते हैं कि आज भी इसी परंपरा का निर्वाह करते हुए संतजन प्रत्येक तीन वर्षों के अंतराल में होने वाले कुंभपर्वों में एकत्र होकर भविष्य की कार्ययोजना तैयार करने को हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन व नासिक में जुटते हैं।

    इतिहास के पन्ने पलटें तो पता चलता है कि 14वीं सदी के आरंभ में आततायी शासकों ने सनातनी परंपरा को आघात पहुंचाना शुरू कर दिया था। तब परमहंस संन्यासियों को लगने लगा कि उनकी इस राक्षसी प्रवृत्ति पर शास्त्रीय मर्यादा के अनुकूल विवेक शक्ति से विजय पाना असंभव है। सो, एक कुंभ पर्व में दशनामी संन्यासियों और सनातन धर्म के ज्ञाता विद्वानों ने तय किया कि क्यों न शस्त्र का जवाब शस्त्र से ही दिया जाए। नतीजा, दशनामी संन्यासियों के संगठन की सामरिक संरचना फील्ड फॉरमेशन आरंभ हुई।

    असल में स्थिति भी ऐसी ही थी। सनातनी परंपरा की रक्षा के लिए शस्त्र धारण करना ही एकमात्र विकल्प शेष रह गया था। लिहाजा, ऐसा निश्चय हो जाने पर सर्वानुमति से निर्णय लिया गया कि आगामी कुंभ पर्व के सम्मेलन में पूर्वोक्त चारों आम्नायों (शृंगेरी, गोवर्द्धन, ज्योतिष व शारदा मठ) से संबंधित दसों पदों के संन्यासियों की मढ़ि‍यों के समस्त मठ संचालकों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाए।

    इस निर्णय के अनुसार उससे अग्रिम कुंभ पर्व के सम्मेलन में देश के समस्त भागों से हजारों मठों के संचालक, विशिष्ट संत-संन्यासी व सनातन धर्म के ज्ञाता विद्वान इकट्ठा हुए। उन्होंने एकमत से फैसला लिया कि अब परमात्मा के कल्याणकारी शिव स्वरूप की उपासना करते हुए सनातन धर्म की रक्षा नहीं हो सकती। इसलिए परमात्मा रुद्र के संहारक भैरव स्वरूप की उपासना करते हुए हाथों में शस्त्र धारण कर दुष्टों का संहार किया जाए। ऐसा निश्चिय हो जाने के बाद शस्त्रों से सज्जित होने के लिए समस्त दशनामी पदों का आह्वान किया गया। इनमें विरक्त संन्यासियों के अलावा ऐसे सहस्त्रों नवयुवक भी सम्मिलित हुए, जिनके हृदय में सनातन धर्म की रक्षा के लिए सर्वस्व बलिदान करने की प्रबल भावना थी। हजारों की संख्या में नवयुवक संन्यास दीक्षा लेकर धर्म रक्षा के लिए कटिबद्ध हो गए।

    परमात्मा के भैरव स्वरूप की अविच्छिन्न शक्ति प्रचंड भैरवी (मां दुर्गा) का आह्वान कर उनके प्रतीक के रूप में भालों की संरचना हुई। इन्हीं भालों के सानिध्य में दशनाम संन्यासियों को युद्धकला का प्रशिक्षण देकर शस्त्रों से सज्जित किया गया। इसके बाद प्रशिक्षित एवं शस्त्र सज्जित संन्यासियों ने वस्त्र आदि साधनों का परित्याग कर दिया। आदि शंकराचार्य से पूर्व जैसे परमहंस संन्यासी वस्त्र त्यागकर दिगंबर अवस्था में रहते थे, वैसे भी वे भी शरीर में भस्म लगाए दिगंबर अवस्था में रहने लगे। इसी दिगंबर रूप ने उन्हें नागा संन्यासी के रूप में प्रतिष्ठित किया। कालांतर में नागा संन्यासी संज्ञा ही उनकी पहचान हो गई। ज्योतिषाचार्य डॉ. सुशांत राज कहते हैं कि आज भी इसी परंपरा का निर्वाह करते हुए संतजन प्रत्येक तीन वर्षों के अंतराल में होने वाले कुंभपर्वों में एकत्र होकर भविष्य की कार्ययोजना तैयार करने को हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन व नासिक में जुटते हैं।

  • एक की मौत, आठ गंभीर किसानों के समर्थन में धरने पर बैठेे लोगों को कार ने कुचला

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    पटियाला। थापर कालेज नजदीक भादसो रोड पर किसानों के समर्थन में धरने पर बैठे लोगों को तेज रफ्तार कार ने कुचल दिया। हादसे में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि आठ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। घटना सोमवार देर सायं की है। बता दें, इससे अमृतसर में भी ऐसा ही हादसा हुआ था। 26 जनवरी को किसानों के समर्थन में धरना देने जा रहे लोगों को टैंकर ने कुचल दिया था। इस हादसे में दो महिलाओं की मौत हो गई थी और पांच लोग घायल हुए थे।

    बताया जा रहा है कि भादसों की ओर से तेज रफ्तार फार्च्यूनर ने सामने से आ रही कार को टक्कर मार दी। इससे कारण बेकाबू हो गई और धरने पर बैठे लोग इसकी चपेेट में आ गए। उधर, दूसरी तरफ हादसे से गुस्साए किसानों ने भादसों रोड पर जाम लगाकर धरना शुरू कर दिया है। मृतक की पहचान इंद्रजीत सिंह 65 साल निवासी रणजीत नगर पटियाला के तौर पर हुई है, जबकि गंभीर रूप से घायलों की पहचान ऋतु रानी, राहुल कुमार, नायरा, परमवीर सिंह, दीपू, जस, गुरप्रीत सिंह और परमवीर सिंह के तौर पर हुई है।

    पोस्टमार्टम करवाने के लिए पहुंचे मृतक इंद्रपाल सिंह के पुत्र हरिंदर सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि सुधार कानूनों के विरोध में पिछले 20-25 दिनों से उनके पिता अन्य लोगों के साथ शांतिपूर्वक भादसों रोड पर धरना दे रहे थे। सोमवार देर शाम को जब वह धरने पर बैठे हुए थे तो भादसों रोड से तेज रफ्तार के साथ आ रही बेकाबू कार ने प्रदर्शनकारियों को कुचल दिया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार की रफ्तार इतनी तेज थी कि दुर्घटना के बाद उनके पिता की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि आठ के करीब व्यक्ति जख्मी हो गए। हादसे में कार चालक और उसकी पत्नी और बच्चा भी जख्मी हो गया है। जिनको मौके पर पहुंची पुलिस ने निजी अस्पताल में भर्ती करवा दिया। धरने पर बैठे लोगों ने आरोप लगाया कि कार चालक नशे की हालत में था जिस कारण यह दुर्घटना हुई है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है।

    कार चालक के खिलाफ मामला दर्ज: एसएचओ

    थाना त्रिपड़ी इंचार्ज हैरी बोपाराय ने बताया कि मृतक के वारिसों और जख्मियों के बयानों के आधार पर कार चालक प्रितपाल सिंह निवासी गांव चप्पड़ हाल किरायेदार अर्बन अस्टेट के खिलाफ लापरवाही से कार चलाने के आरोपों के तहत केस दर्ज कर लिया है। उक्त आरोपित एक्साइज में बतौर इंस्पेक्टर के तौर पर सेवाएं भी निभा रहा है।

  • शांति भंग करने वालों को कड़ी कार्यवाही की दी चेतावनी, कैप्टन ने भाजपा विधायक पर हमले की कड़ी निंदा की

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    चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिदर सिंह ने मलोट में अबोहर के भाजपा विधायक अरुण नारंग पर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों द्वारा किए गए हमले की निंदा की है। कैप्‍टन ने डीजीपी दिनकर गुप्ता को हमलावरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कैप्टन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि भविष्य में ऐसी स्थिति को रोकने के लिए कृषि कानूनों के कारण पैदा हुए संकट को जल्द हल करें।

    कहा, विरोध प्रदर्शन करना किसानों का हक लेकिन हिंसा बर्दाश्त नहीं

    वहीं, डीजीपी दिनकर गुप्ता ने कहा कि विधायकों और पुलिस अधिकारियों पर हमला करने वालों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे। विधायक अरुण नारंग के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और बयानों के आधार पर आपराधिक धाराएं लगाई जाएंगी। केंद्र सरकार और किसानों के बीच तनाव बढ़ने के कारण पंजाब के विभिन्न हिस्सों में भाजपा नेताओं के खिलाफ रोजाना प्रदर्शन की कई घटनाएं रिपोर्ट की गई हैं।

    इस्तीफा मांगने की बजाए केंद्रीय लीडरशिप पर कानून वापस लेने के लिए दबाव डालें भाजपाई

    मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसानों को ऐसी हिंसक कार्रवाई न करने की अपील भी की। उन्‍होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना किसानों का लोकतांत्रिक हक है लेकिन हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्य में अमन कानून की स्थिति को भंग करने की इजाजत किसी को भी नहीं दी जाएगी।

    कैप्टन ने कहा कि किसानों का मसला हल करने में देरी करने से स्थिति और बिगड़ जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि सीमा पार पाकिस्तान की हिमायत प्राप्त आतंकी संगठनों (जो पहले ही ऐसी स्थिति का फायदा उठाने की ताक में रहते हैं) से बढ़ रहे खतरे के साथ यह पंजाब और देश की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा हो सकता है।

    उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार को अडि़यल रवैया छोड़कर कृषि कानूनों को तुरंत रद कर दिया जाना चाहिए और किसानों के साथ विचार चर्चा करके नए कानून तैयार करने चाहिए। किसान पिछले चार महीनों से इन कानूनों के खिलाफ सड़कों पर हैं और केंद्र सरकार से पीछे हटने का कोई संकेत न मिलने के कारण किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है।भाजपा नेताओं की ओर से मुख्यमंत्री का इस्तीफा मांगे जाने पर कैप्टन ने कहा कि शनिवार की घटना पर रोटियां सेकने की कोशिश करने की बजाय उन्हें केंद्रीय लीडरशिप को विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए दबाव डालना चाहिए।

    जनप्रतिनिधि की गरिमा की रक्षा करने में पुलिस विफल: सुखबीर

    शिरोमणि अकाली दल के प्रधान और पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने भाजपा विधायक अरुण नारंग पर हुए हमले की निंदा की है। उन्होंने ट्वीट करके कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधि की गरिमा की रक्षा करने में पुलिस विफल रही है और इस मामले की राज्य पुलिस पर जिम्मेदारी तय करने के लिए घटना की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह शर्मनाक है कि कांग्रेस सरकार कानून और व्यवस्था बनाए रखने में विफल रही है।

    हिंसक हमले सही नहीं :अमन अरोड़ा

    आम आदमी पार्टी के नेता अमन अरोड़ा ने कहा है कि विधायक अरुण नारंग पर हुआ हमला किसी भी तरह से सही नहीं है। किसानों को यह समझना चाहिए कि इस तरह की हिंसक कार्रवाई किसान आंदोलन को कमजोर कर रही हैं। पहले भी किसान आंदोलन को बदनाम करने की कोशिशें हुई हैं। केंद्र सरकार को तीनों कृषि कानून रद करने चाहिए। किसान पिछले नौ महीने से दिल्ली के सीमाओं पर बैठे हैं लेकिन केंद्र सरकार ने अपनी आंख और कान दोनों बंद कर रखे हैं।