Category: state-news

  • अब आठवीं कक्षा तक होगी पढ़ाई, हुआ अपग्रेड चंडीगढ़ के सेक्टर-49 का सरकारी स्कूल

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    चंडीगढ़। गवर्नमेंट मॉडल प्राइमरी स्कूल सेक्टर-49 के स्टूडेंट्स के लिए राहत की खबर है कि अब उन्हें छठी क्लास में एडमिशन के लिए दूसरे स्कूलों का रुख नहीं करना पड़ेगा। स्कूल को मिडिल बनाने की फाइल पर वीरवार को मुहर लग गई। नए शिक्षा सत्र 2021-2022 से स्कूल में छठी क्लास शुरू हो जाएगी।

    दैनिक जागरण ने स्टूडेंट्स की समस्या को प्रमुखता से उठाया था। पांचवी कक्षा के बाद इस स्कूल के स्टूडेंट्स को आगे की पढ़ाई के लिए अब दूसरे स्कूलों में नहीं जाना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि सेक्टर-49 में दो सरकारी स्कूल हैं, जिसमें से एक स्कूल हाई और एक प्राइमरी था। प्राइमरी स्कूल में सेक्टर-49 के अलावा साथ लगते मोहाली के विभिन्न गांवों से स्टूडेंट्स पढ़ाई करते हैं।

    स्कूल में नर्सरी से पांचवी कक्षा तक पांच सौ से भी ज्यादा स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं। पांचवी कक्षा तक स्टूडेंट्स इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई कर रहते हैं, लेकिन पांचवी में पास होने के बाद छठी कक्षा में एडमिशन के लिए दूसरे स्कूलों में जाना पड़ता था। राइट टू एजुकेशन नार्म्स के मुताबिक आठवीं कक्षा तक के बच्चों को घर से तीन किमी के दायरे में स्कूल होना चाहिए, लेकिन यहां मिडिल तक स्कूल न होने के चलते स्टूडेंट्स को पांच से छह किलोमीटर दूर बने स्कूल जाना पड़ता था।

    तीन साल पहले बनी थी स्कूल की इमारत

    स्टूडेंट्स की परेशानी को देखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन ने स्कूल को अपग्रेड बनाने के लिए तीन साल पहले नया भवन बनवाया था। वर्ष 2020 के दौरान कोरोना महामारी के चलते स्कूल को अपग्रेड करने पर मुहर नहीं लगी थी, उस समय भी स्टूडेंट्स के छठी क्लास में एडमिशन जुलाई 2020 में विभिन्न स्कूलों में हुए थे। इस बार स्कूल स्टूडेंट्स के अभिभावक फिर से परेशान थे। स्थानीय अभिभावकों के अनुसार स्कूल बंद हैं ऐसे में कहीं पर जाकर एडमिशन की बात करनी संभव नहीं है। वहीं ऑनलाइन पढ़ाई के चलते स्कूल नए सत्र से पढ़ाई शुरू करवा देंगे जिससे बच्चे पढ़ाई में पिछड़ जाएंगे।

    स्थानीय पार्षद ने स्कूल को अपग्रेड करने की प्रशासन से लगाई थी गुहार

    अभिभावकों की परेशानी को देखते हुए स्थानीय पार्षद हीरा नेगी लंबे समय से स्कूल को अपग्रेड कराने की डिमांड कर रही थी। जनवरी 2021 में हीरा नेगी ने सलाहकार से मिलकर स्कूल को अपग्रेड करने की सिफारिश की थी।

  • ओडिशा राज्य समिति ने अप्रैल -2015 को सीपीआई (माओवादी) संगठन को पार्टी सदस्य (पीएम) के रूप में प्रतिबंधित कर दिया

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    उसके बाद वह 2015 से केकेबीएन और बीजीएन डिवीजन के तहत कोडांग एसी और कालाहांडी एलओएस में काम कर रहे हैं। बाद में वह एसपी रायगडा के सामने अपने आत्मसमर्पण से ठीक पहले बीजीएन डिवीजन के कालाहांडी एलओएस में काम कर रहे थे। वह 1 लाख का नकद इनाम ले जा रहा था।

  • वन महकमा बेबस है, धधक रहे हैं वन

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    देहरादून। पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील 71.05 फीसद वन भूभाग वाले उत्तराखंड में वनों की आग धीरे-धीरे भयावह रूप धारण करती जा रही है। ये अब घरों के नजदीक तक आने लगी है। फिर चाहे वह पौड़ी जिले के लैंसडौन क्षेत्र का पुंडेरगांव हो अथवा चमोली के विभिन्न गांव, तस्वीर सब जगह एक जैसी है। जंगलों की सीमा से सटे गांवों के निवासी वनों को बचाने को भरसक यत्न कर रहे हैं। बावजूद इसके चिंता भी कम होने का नाम ले रही। जंगल लगातार सुलग रहे हैं और वन महकमा बेबस है। यह ठीक है कि पहाड़ का भूगोल ऐसा है कि आग पर नियंत्रण किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। वनकर्मी भी मुस्तैद हैं और वे ग्रामीणों के सहयोग से जंगल बचाने में जुटे हुए हैं। बावजूद इसके मौसम के मिजाज के हिसाब से रणनीतिक कमी भी झलक रही है। सूरतेहाल, जल्द बारिश न हुई तो दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

    प्लांटेशन राख, दरख्त भी जख्मी

    फिजां में भले ही फाग के रंग घुले हों, मगर आग की गिरफ्त में आए जंगल बेहाल हैं। आग से नए पौधे तिल-तिल कर दम तोड़ रहे तो दरख्त भी लगातार जख्मी हो रहे हैं। उत्तराखंड के जंगलों का यह परिदृश्य हर किसी को कचोट रहा हैं। बीते छह माह के दौरान ही वनों की आग ने लगभग 41 हेक्टेयर प्लांटेशन को तबाह कर दिया, जहां पिछले तीन-चार वर्षों में हजारों की संख्या में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे गए थे। विभागीय आंकड़े बताते हैं कि इन क्षेत्रों में खड़े 25 हजार से अधिक पौधे पेड़ बनने से पहले ही मर गए। यही नहीं, 8950 बड़े पेड़ों को क्षति पहुंची है। मौसम के साथ न देने के कारण वर्तमान में भी वनों के धधकने का क्रम बदस्तूर जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में जंगलों को ज्यादा हानि हो सकती है। यह चिंता हर किसी को सता रही है।

    झांपा ही है कारगर हथियार

    दुनिया कहां से कहां पहुंच गई, मगर उत्तराखंड में वनों में आग पर काबू पाने के लिए आज भी झांपा ही कारगर हथियार है। झांपा यानी, पेड़ों की पत्तियोंयुक्त टहनियों को तोड़कर बनाया जाने वाला झाड़ू। विषम भूगोल के कारण आग बुझाने में सहायक भारी उपकरणों को लाने-ले जाने में आने वाली दिक्कतों के मद्देनजर झांपे से ही आग बुझाई जाती है। ठीक है कि यह परंपरागत तरीका कारगर है, मगर वन महकमे ने इससे आगे बढ़ने की दिशा में अब तक कारगर कदम उठाए हों, ऐसा नजर नहीं आता। हालांकि, मैदानी क्षेत्रों के जंगलों के लिहाज से विभिन्न उपकरण विभाग के पास उपलब्ध हैं, मगर पहाड़ की परिस्थितियों के अनुरूप हल्के उपकरणों को लेकर उदासीनता का आलम है। ये बात अलग है कि पूर्व में आग बुझाने के लिए हल्के उपकरणों को लेकर चर्चा जरूर हुई, मगर अब इस कड़ी में अब गंभीरता से कदम उठाने की दरकार है।

    नमी बरकरार रखने की चुनौती

    जंगलों में आग की बड़ी वजह वन क्षेत्रों में नमी कम होना है। इस मर्तबा सर्दियों से जंगलों के सुलगने का क्रम शुरू होने पर वन महकमे ने प्रारंभिक पड़ताल कराई तो उसमें भी यह बात सामने आई। यही नहीं, वर्ष 2016 में करीब 4500 हेक्टेयर जंगल तबाह हो गया था। तब संसदीय कमेटी ने इसके कारणों की पड़ताल की तो तब यही सुझाव दिया गया था कि जंगलों में नमी बरकरार रखने पर खास फोकस किया जाए। इस बार भी भूमि में नमी के अभाव के कारण जंगलों में आग फैल रही है। वजह ये कि पिछले छह माह से बारिश बेहद कम है। ऐसे में जंगलों में बारिश की बूंदों को गंभीरता से कदम उठाने की जरूरत है। इससे जहां जंगलों में नमी बरकरार रहेगी, वहीं जलस्रोत रीचार्ज होंगे। इस मुहिम पर पूरी गंभीरता से धरातल पर उतारने की जरूरत है। आखिर, सवाल वनों को बचाने का है।

  • दोनों पक्षों के वकीलों की बहस पूरी, दोपहर बाद हत्यारों को सुनाई जाएगी सजा

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    फरीदाबाद [हरेंद्र नागर]। हरियाणा के फरीदाबाद में चर्चित निकिता तोमर हत्याकांड में गुरूवार को सजा देने पर दोनों पक्षों की बहस शुरू हुई। इससे पहले बुधवार को कोर्ट ने तौशीफ़ और रेहान दोषी क़रार दिया था। वहीं इस मामले में अजरू को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। यह मामला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सरताज बासवाना की फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रहा है।

    तौशीफ की तरफ से एडवोकेट पीएल गोयल ने अपना पक्ष रखा। आरोपितों की उम्र कम होने, उनके ख़िलाफ़ पुराना कोई मामला ना होने और उनके स्टूडेंट होने के आधार पर फाँसी की सज़ा ना करने का निवेदन किया। अदालत ने फ़ैसला सुरक्षित रखा। दोपहर बाद साढ़े तीन बजे सजा सुनाई जाएगी।

    निकिता तोमर पक्ष के अधिवक्ता ऐदल सिंह ने बताया कि इस मामले में कुल 57 गवाहों की गवाही हो चुकी है। बचाव पक्ष की ओर से वकील अनवर खान, अनीस खान, पीएल गोयल ने आरोपितों के बचाव में विभिन्न पक्ष रखे। 26 मार्च को इस मामले को पूरे पांच माह हो जाएंगे। हत्याकांड के 11 दिन बाद पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दायर कर दी थी।

    बीकॉम ऑनर्स की छात्रा निकिता की 26 अक्टूबर-2020 को अग्रवाल कॉलेज के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या की साजिश का आरोप सोहना निवासी तौशीफ, नूंह निवासी रेयान और अजरू पर है। तीनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इस घटना के बाद काफी हंगामा हुआ था। यह मामला फास्ट ट्रैक अदालत में चलाने की मांग उठी थी, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया था।

    मिर्जापुर-2 वेबसीरीज से प्रभावित है आरोपित तौशीफ

    जांच के दौरान फरीदाबाद पुलिस क्राइम ब्रांच को आरोपित से पूछताछ में पता चला है कि हाल में रिलीज हुई मिर्जापुर-2 वेबसीरीज देखकर वह बेहद प्रभावित हुआ। इस वेबसीरीज का खलनायक मुन्ना अपनी प्रेमिका की गोली मारकर हत्या कर देता है। आरोपित ने बताया है कि निकिता को लेकर उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे। यह वेबसीरीज देखने के बाद उसने ठान लिया कि अब या तो निकिता उसके साथ रहेगी या वह उसकी हत्या कर देगा। इसके बाद ही उसने वारदात को अंजाम दिया।

  • सुबह से ही रेल पटरियों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर जमे किसान, पंजाब, हरियाणा में भारत बंद का अच्छा खासा असर

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    चंडीगढ़ । पार्टी और ट्रेड यूनियनों से ऊपर उठकर शुक्रवार को किसानों द्वारा किए जा रहे 12 घंटे लंबे राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन को पंजाब और हरियाणा में अच्छी खासी प्रतिक्रिया मिली है। यहां सामान्य जन-जीवन प्रभावित रहा। वहीं चंडीगढ़ में स्थिति लगभग सामान्य रही। किसानों, खेत के मजदूरों, कमीशन एजेंटों, ट्रेड यूनियनों और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं द्वारा रेल की पटरियों पर जमा होने और राष्ट्रीय राजमार्गों पर चक्काजाम करने से यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वैसे इस दौरान दोनों राज्यों में कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है। इसके अलावा विरोध और चक्काजाम के चलते आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया गया।

    विरोध के दौरान कई किसान संघों के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस शासित पंजाब में कई जगहों पर दुकानदारों-व्यापारियों से अपना काम बंद करने को कहा।

    एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि विरोध को देखते हुए किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए दोनों राज्यों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

    भारतीय किसान यूनियन (एकता-उग्रहण) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरी कलां ने कहा कि किसान रेल और सड़क आंदोलन को पूरी तरह से रोकेंगे। साथ ही टैक्सी और अन्य वाहनों को भी अनुमति नहीं दी जाएगी। ट्रक यूनियन ने भी किसानों को अपना समर्थन दिया है।

    वहीं किसानों के साथ एकजुटता दिखाते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) ने भी अपने सभी कार्यालय बंद करने की घोषणा की है। समिति अमृतसर के स्वर्ण मंदिर समेत पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के सभी गुरुद्वारों के मामलों का प्रबंधन करती है। एसजीपीसी अध्यक्ष बीबी जागीर कौर ने कहा कि केंद्र को कृषि कानूनों को निरस्त करना चाहिए।

  • दुष्कर्म का मामला दर्ज गुरुग्राम में सीआरपीएफ के जवान के खिलाफ

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    गुरुग्राम। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के एक जवान पर 28 वर्षीय एक महिला के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, अमेठी की रहने वाली महिला 2012 में अपने पारिवारिक संबंधों के माध्यम से सुल्तानपुर निवासी आरोपी भास्कर तिवारी के संपर्क में आई थी।

    गुरुग्राम पुलिस के प्रवक्ता सुभान बोकेन ने कहा, “जवान ने 2012 में महिला से दोस्ती की और शादी करने का झांसा देकर उसका यौन शोषण किया। महिला की शिायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। अभी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।”

  • क्रांति की ज्‍वाला सन 1921 से ही धधक रही थी वीरों की भूमि सल्ट में

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    मानिला : कुमाऊं की बारदोली यानी वीरों की भूमि सल्ट में क्रांति की ज्‍वाला सन 1921 से ही धधक रही थी। 1930 में महात्मा गांधी के आह्वान पर यहां के क्रांतिकारियों ने ब्रितानी हुकूमत को लगान देना बंद तो किया ही गोरों के खिलाफ जो जंग का ऐलान किया उसकी गूंज नैनीताल कमिश्नरी से होकर दिल्ली तक जा पहुंची। देश के तमाम राज्‍यों सल्ट के वीरों की हुंकार ने स्वतंत्रता सेनानियों खासकर युवा क्रांतिवीरों का जगाने का काम किया ।

    स्वतंत्रता आंदोलन दबाने के लिए तत्कालीन पाली पछाऊं परगना (रानीखेत) के एसडीएम जॉनसन ने निहत्थे क्रांतिवीरों पर पहले लाठीचार्ज फिर दो बार गोलियां बरसाने का फरमान दिया। कई क्रांतिकारी शहीद हुए, मगर आजादी के आंदोलन की धार पैनी होती गई। कुली बेगार प्रथा के खात्मे को कुमाऊं केसरी बद्रीदत्त पांडे, हरगोविंद पंत व विक्टर मोहन जोशी की अगुआई में युवा क्रांतिकारियों को ब्रितानी हुकुमत के खिलाफ तैयार किया जा रहा था।

    आजादी के दीवानों की फौज खड़ी करने में सल्ट के पं. पुरुषोत्तम उपाध्याय व लक्ष्मण ङ्क्षसह अधिकारी की बड़ी भूमिका रही। सन 1930 में पं. पुरुषोत्तम, लक्ष्मण सिंह व पं. हरगोविंद पंत ने महात्मा गांधी के फरमान पर लगान बंदी, जंगलात सत्याग्रह व सविनय अवज्ञा आंदोलन के जरिये सल्ट से गोरों के खिलाफ बिगुल फूंक ब्रितानी हुकूमत की चूलें हिला दीं।

    तब बापू ने छुड़वाए थे सत्याग्रही

    सल्ट क्षेत्र से लगान मिलना बंद हुआ तो बौखलाए इलाकाई हाकिम अब्दुल रहमान ने लगभग सौ पुलिस कर्मियों के साथ तल्ली पोखरी में अचानक घुसपैठ कर दी। लूटपाट भी की। क्रांतिकारी पं. पुरुषोत्तम उपाध्याय व उनके कई साथियों को पाली पछाऊं पगना मुख्यालय (रानीखेत) ले गए। वहां से अल्मोड़ा जेल भेजे गए। वहीं जंगलात सत्याग्रह में मोहान पर बैठे निहत्थे सत्याग्रहियों पर लाठीचार्ज कर जुल्म ढाया। कुमाऊं यात्रा के दौरान 1931 में जब गांधीजी सल्ट पहुंचे तो उन्होंने इसे कुमाऊं की बारदोली नाम दिया। गांधी इरविन समझौते के बाद हालांकि सभी सत्याग्रहियों को रिहा कर दिया गया। मगर गोरों के खिलाफ सल्ट में आंदोलन की ङ्क्षचगारी सुलगती रही।

    पहले गोलीकांड में हीरामणि व हरिकृष्ण शहीद

    नौ अगस्त 1942 को गांधीजी के आह्वान पर अंग्रेजो भारत छोड़ो व करो या मरो प्रस्ताव पारित होने के बाद सल्ट में संदेश पहुंचते ही खुमाड़ व देघाट (वर्तमान स्याल्दे ब्लॉक) में क्रांति की च्वाला भड़क उठी। रानीखेत के तत्कालीन परगनाधिकारी जॉनसन के नेतृत्व में पहुंची अंग्रेज पुलिस ने 19 अगस्त को देघाट पटवारी चौकी में क्रांतिवीरों को कैद कर लिया। भनक लगने पर क्रांतिकारियों ने चौकी घेर दी। जान पर आफत देख जॉनसन ने निहत्थे स्वतंत्रता सेनानियों पर गोलियां बरसाने का हुक्म दे दिया। क्रांतिकारी हरिकृष्ण उप्रेती व हीरामणि बडोला शहीद हो गए। पांच सितंबर को सल्ट के खुमाड़ में क्रांतिवीर जुटे। आंदोलन की रणनीति बनाई जा रही थी। किसी मुखबिर की सूचना पर एसडीएम जॉनसन 200 सशस्त्र पुलिस र्किमयों को लेकर रानीखेत से भिकियासैंण से चौकोट और देघाट के रास्ते खुमाड़ की ओर बढ़ा।

    दूसरे विद्रोह में दो सगे भाइयों समेत चार क्रांतिवीर शहीद

    क्रांतिकारियों ने ब्रितानी पुलिस को रास्ते में ही रोक दिया। जबर्दस्त विरोध के बीच अंग्रेजो भारत छोड़ो के नारे गूंजने लगे। जॉनसन ने फिर गोलियां चलवा दीं। क्रांतिकारी सगे भाई गंगाराम व खीमराम शहीद हुए। गोली लगने से घायल चूड़ामणी व बहादुर ङ्क्षसह भी चार दिन तक ङ्क्षजदगी की जंग लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। भयंकर जनाक्रोश के बीच जॉनसन मय पुलिस बल बैरंग लौट गया। मगर कुमाऊं की इस बारदोली की क्रांति की गूंज नैनीताल कमिश्नरी से होकर दिल्ली तक सुनाई दी थी। तब महात्मा गांधी ने भी कहा था कि बारदोली के क्रांतिकारियों की शहादत बेकार नहीं जाने दी जाएगी।

  • नकली नोटों के साथ 2 युवक गिरफ्तार ऊधमसिंह नगर में

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    बाजपुर (ऊधमसिंह नगर) : उत्तर प्रदेश के रामपुर जिला निवासी दो युवकों से पुलिस ने 100, 200 व 500 के जाली नोट सहित कुल 41 हजार 200 रुपये बरामद किए हैं। उनकी कार सीज कर दोनों को कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस का पक्ष सुनने के बाद न्यायालय ने दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

    बाजपुर कोतवाल संजय पांडेय के मुताबिक दोराहा-बाजपुर के नजदीक नामधारी ढाबा के पास से बुधवार देर रात दो युवकों को रोका गया। पूछताछ में उनकी शिनाख्त ग्राम शराबा, पोस्ट सैदनगर, थाना टांडा बादली, रामपुर (उप्र) निवासी इंतेखाब अली पुत्र नूर मोहम्मद व ग्राम मिर्जापुर, पोस्ट महुआ घाट, थाना मिलक खानम, जिला रामपुर निवासी आलमगीर पुत्र नजाकत अली के रूप में हुई। तलाशी में उनके पास से 41 हजार के नकली नोट बरामद हुए।

    तो सितारगंज से हुई थी नोटों की सप्लाई

    पुलिस के अनुसार आलमगीर व इंतेखाब ने बताया कि नकली नोट उन्होंने सितारगंज निवासी तौसीफ नामक व्यक्ति से खरीदा है। अब पुलिस तौसीफ की तलाश में दबिश दे रही है।

    30 में खरीदे 100 के नकली नोट 

    आरोपितों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि वह 100 रुपये का नकली नोट 30 रुपये में खरीदते हैं। बाजपुर व रामपुर के साथ ही आसपास के भीड़भाड़ वाले इलाके में नकली नोटों को चलाते थे।

    100, 200 व 500 के नोट

    नकली नोटों के साथ पकड़े गए आरोपितों से 100 रुपये के 400 नोट, 500 रुपये के दो नोट व 200 रुपये का एक नोट बरामद हुआ है।

  • भारत बंद ओरिसंस के समर्थन में: किसान संघर्ष समन्वय समिति

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    इस हड़ताल को नबीरमान युवशत्र संगठन और ओडिशा में नबनिरमन कृषक संगठन ने समर्थन दिया, जिसने विभिन्न स्थानों में दुकानों, सरकारी कार्यालयों और सड़कों को अवरुद्ध कर दिया। भुवनेश्वर में आज सुबह 7 बजे केकड़ों का एक जुलूस राज्य समन्वयक गाय गभवांगबोक्स एक्सएक्सएक्स के नेतृत्व में, 10 बजे मवेशियों का एक विशाल झुंड कल्पना से बाहर निकला और भुवनेश्वर के आसपास बंद हो गया। सुरेश पाणिग्रही, ओडिशा कृषक सभा के राज्य सचिव, यमेश्वर सामंतराय, अभिराम बेहरा, प्रमोदिनी साहू, ए.आई. क। क्षीरोद कुमार सिंहदेव, एस के राज्य सचिव, रवीन्द्र टुडू, आदिवासी नेता, निरंजन मोहंती, AIKKMS के राज्य नेता, राजेंद्र कुमार बर्मा, AIKMKS राज्य के मेजबान श्रीकांत मोहंती, इंसाफ मेजबान नरेंद्र मोहंती, समाजवादी किसान मोर्चा के सलाहकार सुदर्शन प्रधान, विजय बेरा , अखिल भारतीय कृषक महासभा बंशीधर परिड़ा के राज्य सलाहकार ने समारोह की अध्यक्षता की। राज्य के 14 प्रमुख किसान संगठनों की ओडिशा शाखा की अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने आज से राज्य भर में आंदोलन को गति देने और समन्वय करने का काम किया है।

    ओडिशा में चार वामपंथी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक राजनीतिक दलों, सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, स्वतंत्र महासंघ और विभिन्न स्तरों के श्रमिक, युवा, छात्र, महिला और कृषि श्रमिक संगठन विरोध में हड़ताल में शामिल हुए। मजदूर नेता दुसमंत दास, सामाजिक कार्यकर्ता देव प्रसाद रॉय, राजा सुरेश, महिला नेता तपसी प्रहराज, बनलता जेना, प्रभाती दास, मिनाती पाणिग्रही, प्रणति साहू, सईद बेगम, बोनी परिदा, युवा नेता यतिन मोहंती, मंजरंजन साहू, छात्र नेता संघमित्रा जेना आज आंदोलन में अग्रणी आंदोलनों में से कई में नेतृत्व। पिकेटिंग कार्यक्रम के अंत में, सभी किसान संगठनों, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, जन संगठनों और राजनीतिक दलों के संयुक्त जुलूस ने मास्टर कैंटीन स्क्वायर को छोड़ दिया और महात्मा गांधी मार्ग तक पहुंचने के लिए रजत महल स्क्वायर पहुंचे। ओडिशा के तुंग राजनीतिक नेताओं और श्रमिक आंदोलन के राज्य नेताओं को मार्च और सत्याग्रह आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किया गया था।

    रैली में निरंजन पटनायक, सुरेश राउतराय, आशीष कानूनगो, युधिष्ठिर महापात्र और अन्य प्रमुख राजनीतिक नेताओं ने भाग लिया। मास्टर कैंटीन स्क्वायर पर होने वाले बहिष्कार के विरोध में प्रमुख नेता रैली में शामिल हुए।

  • उद्यमियों को रिझाने के लिए दी बड़ी सौगातें हरियाणा सरकार ने

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    हरियाणा सरकार ने उद्यमियों को रिझाने के लिए बड़ी सौगातें दी हैं। विवादों का समाधान योजना के तहत हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एचएसआईआईडीसी) के भूखंडों की बकाया राशि पर ब्याज और दंडस्वरूप ब्याज में बड़ी छूट दी गई है। दंडस्वरूप ब्याज तो 100 फीसदी माफ कर दिया है, जबकि ओवरडयू ब्याज पर 25 फीसदी छूट मिलेगी।

    मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने गुरुवार देर शाम औद्योगिक संघों, उद्यमियों और अन्य हितधारकों के साथ बैठक में इसकी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्लॉट की लागत और बढ़ी हुई लागत के एकमुश्त भुगतान के लिए योजना लाई जाएगी। इससे 2250 उद्योगपति लाभान्वित होंगे। योजना के तहत 31 मार्च 2021 तक की देनदारियों के लिए ओवरडयू ब्याज पर 25 प्रतिशत और दंडस्वरूप ब्याज पर 100 प्रतिशत माफी मिलेगी। बशर्ते, शेष पूरी राशि का भुगतान 30 जून 2021 तक एक बार में ही करना होगा। इससे 1500 करोड़ रुपये की बकाया राशि में से 225 करोड़ रुपये का लाभ होने की संभावना है।

    मुख्यमंत्री ने पहली अप्रैल 2021 से एक्सटेंशन फीस स्ट्रक्चर को और अधिक तर्कसंगत व सरल बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि तीन वर्ष की प्रारंभिक अवधि के बाद परियोजना के पूरा होने तक श्रेणी ए, बी और सी के प्लॉट के लिए निर्धारित एक्सटेंशन फीस का भुगतान करना होगा। इससे लाइसेंस को आगे तीन साल तक के लिए विस्तारित माना जाएगा। श्रेणी ए संपदा के लिए चौथे और पांचवें वर्ष की एक्सटेंशन फीस 50 रुपये प्रति वर्ग मीटर, श्रेणी बी संपदा के लिए 25 रुपये प्रति वर्ग मीटर और श्रेणी सी संपदा के लिए 10 रुपये प्रति वर्ग मीटर होगी।
    अब यदि ओसी (आक्यूपेंसी सर्टिफिकेट) के आवेदन करने की तिथि से छह महीने के भीतर विभाग निरीक्षण कर लेता है तो उस तिथि तक ही फीस ली जाएगी। यदि विभाग छह महीने के बाद निरीक्षण करता है या नहीं करता है तो आवेदन करने की तिथि तक ही फीस ली जाएगी। यह प्रावधान तब लागू होगा जब आवेदक बकाया राशि का भुगतान कर देगा।

    330 आवंटियों को होगा लाभ

    मुख्यमंत्री ने कहा कि एक्सटेंशन फीस के मद में 330 आवंटियों की करीब 636 करोड़ रुपये की राशि बकाया है। एचएसआईआईडीसी एक्सटेंशन फीस के मद में बकाया राशि का 50 प्रतिशत माफ करेगा। संशोधित मानदंडों के अनुसार 31 मार्च 2021 तक की एक्सटेंशन फीस जमा करने के बाद आवंटी आगे के एक्सटेंशन का हकदार होगा। मौजूदा अलॉटी के लिए जहां एक्सटेंशन छह साल से अधिक है, वहां आवंटी को पांच वें वर्ष के लिए एक्सटेंशन फीस पर परियोजना पूरा करने के लिए एक अतिरिक्त वर्ष का लाभ मिल सकता है। इसे नई एक्सटेंशन पॉलिसी के तहत कवर किया जाएगा।

    छह वर्ष से अधिक की कोई भी एक्सटेंशन मान्य नहीं होगी

    उद्योगपतियों को राहत देते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि छह वर्ष से अधिक की कोई भी एक्सटेंशन मान्य नहीं होगी। प्लॉट की अनिवार्य रूप से नीलामी की जाएगी। यदि आवंटी अपनी परियोजनाओं को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं तो 6वें वर्ष के प्रारंभ से पहले आवंटी प्लॉट की बिक्री के लिए एचएसआईआईडीसी के माध्यम से नीलामी द्वारा आवेदन कर सकता है। एचएसआईआईडीसी प्लॉट की नीलामी करेगा और अपने शुल्क की कटौती के बाद बिक्री पर हुआ लाभ आवंटी के साथ समान रूप से बांटेगा। यदि प्लॉट नीलामी में नहीं बिकता तो एचएसआईआईडीसी की नीति के अनुसार प्लॉट रिज्यूम किया जाएगा।

    बकाया राशि का भुगतान करने पर एमनेस्टी योजना का लाभ

    मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि प्रतिष्ठित परियोजनाओं के मामले में यदि आवंटी एकमुश्त भुगतान योजना का लाभ उठाकर बकाया राशि का भुगतान करता है तो ऐसी प्रतिष्ठित परियोजनाओं को अगस्त 2019 की एचएसआईआईडीसी में घोषित पहली एमनेस्टी स्कीम का लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा एग्जिट रूट का चुनाव करने के लिए प्रस्तावित तय पूंजीगत निवेश का कम से कम 25 प्रतिशत वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया हो। मुख्यमंत्री ने प्लॉट छोड़ने के लिए धन वापसी नियमों को युक्तिसंगत बनाने की भी घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह 25 मार्च 2021 से लागू किए गए आत्मसमर्पण आवेदनों पर लागू होगा।