Category: state-news

  • शहर जम के झाम में फंसने लगा

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    फरीदाबाद : प्रशासनिक अधिकारियों के उदासीन रवैये के चलते पूरा शहर इस समय जाम से जूझ रहा है। पहले तो नीलम पुल के क्षतिग्रस्त पिलर्स की मरम्मत का काम समय पर शुरू नहीं हुआ, जब शुरू हुआ तो अब इसे पूरा होने में देरी हो रही है। नीलम पुल बंद होने से एनआइटी और राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर करने वाले वाहन चालक बेहद परेशान हो गए हैं। बाटा रेलवे पुल और ओल्ड फरीदाबाद अंडरपास पर तो दिनभर जाम लगा रहता है। बड़खल और बल्लभगढ़-सोहना रेलवे पुल भी जाम से अछूते नहीं रहे हैं।

    एनआइटी की ओर से बाटा पुल को पार कर राजमार्ग की ओर जाने वालों कों अजरौंदा चौक वाला यू टर्न लेना पड़ेगा। पहले वह सीधे बल्लभगढ़ की ओर निकल जाते थे। अब यहां बैरिकेडिग कर दी गई है। मंगलवार को थोड़ी देर के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग से सेक्टर-11-12 की विभाज्य मार्ग की ओर जाने वाले कट को बंद किया था, लेकिन बाद में इसे खोल दिया गया। शहर में जाम की वजह से हालात ऐसे हो गए हैं कि आमजन को घर से निकलने के बाद यह पता नहीं लगता कि कौन सा रास्ता डायवर्ट किया हुआ मिलेगा या फिर कहां जाम। बता दें नीलम पुल को शनिवार तक बंद रखा जाएगा। दो मुख्य चौराहों पर पुलिसकर्मी गायब

    एक ओर शहर इस समय जाम के झाम में फंसा हुआ है तो दूसरी ओर मंगलवार को ओल्ड फरीदाबाद और बड़खल चौराहे पर पुलिसकर्मी नजर नहीं आए। ऐसे समय में तो कई पुलिसकर्मियों का चौराहों पर मौजूद रहना बेहद जरूरी है। शादियों की वजह से रही ज्यादा दिक्कत

    मंगलवार को शहर में काफी शादियां थी। इस वजह से शाम होते-होते इसका असर सड़कों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। बराती जाम में फंसे हुए नजर आए। 15 मिनट का सफर आधा-पौने घंटे में तय हुआ। शहर में वैवाहिक स्थल के सामने सड़क किनारे वाहन खड़ा होने से भी मुख्य मार्गों पर जाम लगा रहा। -इतने महत्वपूर्ण पुल को छह दिन के लिए बंद करना कोई तुक की बात नहीं है। चारों ओर जाम लग रहा है, सभी परेशान हो रहे हैं, इसलिए पुल जल्द चालू होना चाहिए।

    हरिओम -मैं किसी काम से एनआइटी आया था लेकिन अब वापस में अजरौंदा चौक से यू टर्न लेना पड़ रहा है। 20 मिनट से जाम में फंसा हुआ हूं।

    -राजेश गौड़ वाहन चालकों की सुविधा के लिए ही नए प्रयोग किए जा रहे हैं। सेक्टर-11-12 विभज्य मार्ग के कट को बंद करना जरूरी है, वरना अजरौंदा चौक तक जाम लग जाता है। इस मार्ग पर बैरिकेडिग कर सर्विस रोड पर आवागमन चालू है।

    -राजीव कुमार, यातायात थाना प्रभारी नीलम पुल की मरम्मत पूरी करने के लिए इस पर आवागमन बंद करना जरूरी था। पूरी कोशिश कर रहे हैं कि इसकी मरम्मत जल्द पूरी हो जाए। इस बाबत मरम्मत करने वाली एजेंसी के अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं।

    -यशपाल यादव, जिला उपायुक्त

  • वाटर एटीएम केदारनाथ धाम व सरस्वती नदी के समीप में स्थापित होगा

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    रुद्रप्रयाग। रुद्रप्रयाग जनपद में आयल नेचुरल गैस कारपोरेशन व नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन के सामुदायिक सामाजिक उत्तरदायित्व कोष से केदारनाथ धाम व सरस्वती नदी के समीप वाटर एटीएम स्थापित किया जा रहा है। अधिशासी अभियंता डीडीएमए प्रवीन कर्णवाल ने बताया कि जिलाधिकारी के व्यक्तिगत प्रयासों व रुचि से धाम और सरस्वती नदी के समीप में महारत्न कंपनियों के सीएसआर फंड से दो वाटर एटीएम स्थापित किए जा रहे है। 15 x 7.5 मीटर के कक्ष में वॉटर एटीएम निर्मित किया जाएगा, जिसमें बैठने की भी व्यवस्था रहेगी।

    प्रत्येक एक घंटे में 500 लीटर शोधन क्षमता अर्थात एक दिन में 12 हजार लीटर क्षमता व लगभग 85 लाख की लागत से मशीन वाटर एटीएम स्थापित किया जा रहा है। वाटर एटीएम एक सामुदायिक रिवर्स ओसमोसिस (आरओ) है जिससे एक समय में एक वॉटर एटीएम से 15 लोग निश्‍शुल्क पानी पी पाएंगे।

    सिद्धिवर्धन चुने गए डिजिटल वालंटियर ऑफ दि मंथ

    पुलिस की ओर से नारायणबगड़ के युवक सिद्धिवर्धन कंडवाल को डिजिटल वालंटियर ऑफ दि मंथ चुना गया है। पुलिस अधीक्षक ने उन्हें मोमेंटो व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया। विभिन्न इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैलने वाली झूठी अफवाहों का खंडन करने, भ्रामक खबरों को फैलने से रोकने, इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर आम नागरिकों को साइबर अपराधों, कोरोना आदि के संबंध में जागरूक करने के लिए पुलिस मुख्यालय स्तर पर डिजिटल वालंटियर्स वाट्सएप ग्रुप बनाया गया है। जिसमें उत्तराखंड के सभी जनपदों से ऐसे व्यक्तियों को जोड़ा गया है, जो सभी इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर हैं। जिसकी मानीटरिंग खुद पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था अशोक कुमार कर रहे हैं। इंटरनेट मीडिया पर बेहतर कार्य करने पर चमोली पुलिस ने सिद्धिवर्धन कंडवाल निवासी कंडवालगांव, नारायणबगड़ को सम्मानित किया है। पुलिस अधीक्षक यशवंत ङ्क्षसह चौहान ने बताया कि इस युवक ने इंटरनेट मीडिया पर सक्रिय रहते हुए आम व्यक्तियों को कोरोना समेत अन्य कानून व्यवस्थाओं को लेकर जागरूक किया गया।

  • विशेषज्ञ दल हेलीपैड न होने के चलते ऋषिगंगा नहीं जा सका

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    देहरादून। जलप्रलय के बाद ऋषिगंगा नदी पर मलबे के चलते बनी झील में तीन और धाराएं सेटेलाइट चित्रों के माध्यम से देखी गई हैं। एक धारा पहले ही झील में बन गई थी और सभी से धीरे-धीरे पानी का रिसाव भी हो रहा है। मंगलवार को शासन में हुई बैठक में निर्णय लिया गया था कि एक विशेषज्ञ दल बुधवार सुबह झील के धरातलीय निरीक्षण के लिए रवाना होगा। हालांकि, झील के आसपास हेलीपैड न होने के चलते दल रवाना नहीं हो पाया।

    आइटीबीपी ने ट्वीट के माध्यम से जानकारी दी है कि उनका दल ऋषिगंगा नदी पर मुरेंडा के पास बनी झील तक पहुंच गया है। दल के सदस्यों ने झील का निरीक्षण किया और उसके बाद झील से करीब तीन किलोमीटर पहले पैंगांव के पास अस्थायी हेलीपैड बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। गुरुवार सुबह तक हेलीपैड तैयार कर दिया जाएगा। इसके बाद उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) निदेशक डॉ. एमपीएस बिष्ट समेत एनआइम, एसडीआरएफ आदि के प्रतिनिधि झील के निरीक्षण को देहरादून से रवाना हो जाएंगे। वहीं, तपोवन क्षेत्र में ही मौजूद डीआरडीओ के टेरेन रिसर्च लैबोरेटरी व स्नो एंड एवलांच इस्टेबिल्शमेंट के विज्ञानी भी झील स्थल के लिए रवाना हो चुके हैं, जो गुरुवार सुबह तक पहुंच जाएंगे। विशेषज्ञ दल झील में बनी धाराओं का अवलोकन करेगा। जिसके बाद धाराओं को और चौड़ा करने का निर्णय किया जा सकता है।

  • जिस जंगल से पकड़ा गया था वहीं पहुंचा, पहाड़ पर एक दिन में रिकॉर्ड 216 किमी चल गया तेंदुआ

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    हल्द्वानी : आमतौर पर जंगल में एक तेंदुआ भोजन की तलाश में रोजाना अधिकतम 40 किमी तक का सफर तय करता है। मगर कुमाऊं में एक तेंदुआ ने एक दिन में चलने का रिकार्ड बना दिया है। पर्वतीय क्षेत्र के जंगल में उसने 216 किमी की दूरी तय कर ली। वह चलते-चलते उस जगह पहुंच गया जिस जंगल से उसे पकड़ा गया था। रेडियो कालर के जरिए वन विभाग ने उसकी हर मूवमेंट पर नजर भी रखी। तेंदुआ को लेकर अक्सर कहा जाता है कि शिकार की तलाश में वह नदी के आसपास भटकता है। लेकिन पानी में घुसने से बचता है। मगर हरिद्वार में एक तेंदुआ ने कई बार गंगा नदी को भी पार किया।

    उत्तराखंड के तेंदुआ आबादी क्षेत्र में आतंक का पर्याय बन चुके हैं। व्यवहार में आ रहे परिवर्तन पर विस्तृत रिसर्च के लिए पिछले साल सितंबर से अब तक चार तेंदुआ पर महकमा रेडियो कालर फिट कर चुका है। हरिद्वार, टिहरी व बागेश्वर का तेंदुआ इसमें शामिल है। इसके अलावा कार्बेट से राजाजी पार्क में शिफ्ट किए दो बाघों और मैदानी एरिया में तीन हाथियों की भी रेडियो कालर से निगरानी की जा रही है। वन महकमे के पास रेडियो कालर लगे इन वन्यजीवों के हर मूवमेंट का पूरा रिकार्ड है। दावा है कि अभी तक इनमें से किसी ने भी आबादी क्षेत्र में कोई नुकसान नहीं किया।

    अफसरों के मुताबिक नवंबर में बागेश्वर से एक तेंदुआ को रानीबाग स्थित रेस्क्यू सेंटर में लाकर रेडियो कालङ्क्षरग की गई थी। जिसके  बाद सेंटर से 50 किमी दूर एक जंगल में छोड़ा गया। लेकिन 13 जनवरी को इस तेंदुआ ने एक दिन में लगातार सफर करते हुए 216 किमी की दूरी तय कर ली। जो कि अपने आप में हैरानी करने वाली बात है। क्योंकि, शिकार की तलाश के दौरान भी तेंदुआ द्वारा तय की गई यह दूरी पांच गुना अधिक थी। वहीं, रेडियो कालर बाघ ने एक दिन में 42 और हाथी ने अधिकतम 22 किमी का जंगल सफर किया।

    घर वापसी की प्रवृत्ति

    वन विभाग द्वारा जिन तेंदुआ व बाघ पर रेडियो कालर लगाया गया था। उनमें एक चीज सामान्य निकली। भले एक बार लेकिन सभी ने घर वापसी भी की। यानी रेडियो कालर लगाने के लिए उसे जिस जगह से रेस्क्यू किया गया था। वह घूमते-घूमते दोबारा उस जंगल में पहुंचा था। कुछ देर आसपास मूवमेंट करने के बाद फिर आगे बढ़ गए।

    टाइगर 40 और तेंदुआ का 20 वर्ग किमी दायरा

    वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक 40 वर्ग किमी यानी 160 किमी टाइगर की जंगल में टेरीटरी अधिकार क्षेत्र माना जाता है। जबकि तेंदुआ के लिए 20 वर्ग किमी (80) किमी होती है। तेंदुआ पूरी कोशिश करता है कि वह बाघ से उसका सामना न हो। खतरा समझते ही वह साइड हो जाता है।

    लगातार हो रही है मॉनीटरिंग

    मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग ने बताया कि 13 जनवरी को गुलदार ने अब तक की अधिकतम दूरी तय की थी। रेडियो कालर लगे हाथी, बाघ व तेंदुए की लगातार मानीटरिंग की जा रही है। फारेस्ट के पास एक्सपर्ट स्टाफ की पूरी टीम है। व्यवहार में आ रहे परिवर्तन को लेकर किसी निष्कर्ष में पहुंचने पर अभी समय लगेगा।

  • दहेज दानवों की करतूत, पहले जीभ काटी फिर जिंदा जला डाला, सबूत छिपाने के लिए लाश को भी दफना डाला

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    दहेज दानवों की करतूत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहले विवाहिता की जुबान काट दी गई उसके बाद उसे जिंदा जला दिया गया जिससे घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई। घटना को अंजाम देने के बाद सबूत मिटाने की भी कोशिश की गई। साक्ष्य मिटाने के उद्धेश्य से शव को जमीन में दफना दिया गया। मृतका के परिजनों ने ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की है।

    इस घटना के बाद परिजनों ने इसी सूचना पुलिस को दी जिसके बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई। तभी जांच में जुटी चौतरवा थाने की पुलिस पहाड़ी मझौला गांव स्थित एक नहर के पास पहुंची जहां जमीन को खोदकर शव को बाहर निकाला गया। जिसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए बगहा अनुमंडलीय अस्पताल भेजा गया। घटना की सूचना के बाद परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। परिजन ससुरालवालों पर दहेज हत्या का आरोप लगा रहे है। वही पुलिस आरोपी ससुराल वालों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है फिलहाल पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी है।

  • इस साल उत्‍तराखंड में कार्मिकों के सिर्फ 10 फीसद होंगे तबादले

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    देहरादून। प्रदेश में नए सत्र 2021-22 में कार्मिकों के प्रत्येक संवर्ग में मात्र 10 फीसद या आदर्श चुनाव आचार संहिता के मुताबिक जरूरी तबादले किए जाएंगे। मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने इस संबंध में शुक्रवार को आदेश जारी किए।

    प्रदेश में नए सत्र में कार्मिकों के तबादले स्थानांतरण एक्ट-2017 के मुताबिक होंगे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव को अनुमोदन मिलने के बाद शुक्रवार को मुख्य सचिव ने इस संबंध में आदेश जारी किए। आदेश में सभी विभागों से अगले सत्र के लिए तबादला प्रक्रिया प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं। एक्ट के मुताबिक तबादलों को हरी झंडी दिखाई जा चुकी है। इस साल अनिवार्य तबादलों को हरी झंडी दिखाई गई है। हालांकि अनिवार्य तबादले की जद में बड़ी संख्या में कार्मिक आ सकते हैं, लेकिन सरकार ने इसे सीमित कर दिया है।

    अनिवार्य तबादलों में कार्मिकों को यात्रा भत्ता देने का प्रविधान है। इस वजह से सरकार पर वित्तीय भार बढऩा तय है। मुख्य सचिव ने आदेश में प्रत्येक संवर्ग में सिर्फ 10 फीसद तबादले होंगे। साथ ही आदर्श चुनाव आचार संहिता की जद में आने वाले कार्मिकों को भी तबादलों की जद में लाया जाएगा। मुख्य सचिव ने कहा कि वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम के अनुसार सभी समयबद्ध व्यवस्थाओं को अंजाम दिया जाएगा। सामान्य तबादलों में किसी विभाग को परेशानी होने की स्थिति में एक्ट की धारा-27 के तहत उक्त कठिनाइयों का निवारण किया जाएगा। विभागों से उक्त संबंध में औचित्यपूर्ण प्रस्ताव तैयार कर स्थानांतरण समिति को मुहैया कराने के निर्देश दिए गए हैं।

  • आरके सिन्हा ने की नीतीश की प्रशंसा, मुखिया पर कार्रवाई को उचित ठहराया

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    आरके सिन्हा ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जो यह निर्णय लिया है कि जो जनप्रतिनिधि विशेष कर पंचायतों के मुखिया या नगर निगम/नगर परिषद् के वार्ड पार्षद इत्यादि जिनको नल-जल का काम पूरा करने का दायित्व दिया गया है, यदि वे घर-घर नल-जल पहुंचाने में सफल नहीं हो पाये हैं तो उनको चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी जायेगी. यह एक अच्छा निर्णय है.

    क्योंकि, जनप्रतिनिधियों का काम सिर्फ नेतागिरी करना और बातें बनाना ही नहीं होना चाहिए. यदि उनको कुछ प्रशासनिक अधिकार दिये गये है तो पर्याप्त फंड भी दिया गया है. निश्चित काम बताया गया है तो उसे पूरा करना भी उनका कर्तव्य है. यही तो जनता का काम है. जनप्रतिनिधि इसी के लिए होता है. अतः जो जनता का काम पूरा न करे उसे चुनाव लड़ने से रोकने का मुख्यमंत्री का यह निर्णय सराहनीय है.

  • नरभक्षी बाघिन का जहां जिम कार्बेट ने किया था शिकार पर्यावरणविद बीसी मुरारी का उस जगह को खोजने का दावा

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    चम्‍पावत। वर्ष 1907 में प्रसिद्ध शिकारी जिम कार्र्बेेट ने काली कुमाऊं में खौफनाक आतंक मचाने वाली जिस नरभक्षी बाघिन का शिकार किया था उस जगह की सटीक पहचान कर ली गई है। जिस स्थान पर बाघिन की मौत हुई थी उसे अब बाघ बरूड़ी के नाम से जाना जाता है। बाघ बरूड़ी के एक टीले और नदी के बीच में ही बाघिन की मौत हुई थी। लोहाघाट निवासी पर्यावरणविद बीसी मुरारी का दावा है कि गहन शोध के बाद उन्होंने नरभक्षी बाघिन के मारे जाने की सटीक जगह खोज निकाली है। उन्होंने बताया कि प्रशासन अनुमति दे तो वह उस स्थान पर स्मारक बनाना चाहते हैं।

    जिम कार्बेट युग का अंत होने के बाद से अब तक उस स्पॉट को नहीं खोजा जा सका था जहां गोली लगने के  बाद नरभक्षी बाघिन ने अंतिम सांस ली थी। सर्वविदित है कि जिम कार्बेट ने खूनी बाघिन का शिकार चम्पावत जिले से पांच किमी दूर गौड़ी नदी के किनारे बसे चौड़ा गांव के  जंगल में किया था। इस स्थान को अब बाघ बरूड़ी नाम से जाना जाता है। जहां बाघिन मारी गई थी उस स्थान पर 100 मीटर का दायरा ही अब तक चिन्हित किया गया था। लेकिन कहां बाघिन ने अंतिम सांस ली थी यह स्पष्ट नहीं हो पाया था।

    जिम कार्बेट की विश्व प्रसिद्ध पुस्तक मैन इटर्स ऑफ कुमाऊं का गहन अध्ययन करने के बाद बीसी मुरारी ने सटीक जगह की पहचान करने का दावा किया है। उन्होंने बताया कि बाघ बरूड़ी के जंगल में जिम कार्बेट की गोली लगने से एक दिन पूर्व बाघिन ने एक 16 वर्षीय युवती को अपना आखिरी और 436वां शिकार बनाया था। अगले ही दिन बाघिन जिम कार्बेट का शिकार बन गई थी। नरभक्षी बाघ की लोकेशन जानने के लिए तब जिम कॉर्बेट ने चौड़ा गांव निवासी डुंगर सिंह से मदद मांगी थी। गाइड डुंगर सिंह की निशानदेही पर ही जिम कॉर्बेट ने चम्पावत के गौड़ी रोड में बाघ बरुड़ी नामक जंगल में उस खतरनाक नरभक्षी बाघिन का खात्म कर लोगों को उसके आतंक से निजात दिलाई थी। बीसी मुरारी के शोध में स्व. डुंगर सिंह के पुत्र गोपाल सिहं ने काफी मदद की। जब भी मुरारी को विद्यालय के कार्यों से समय मिलता है तो वह अपने शेष समय जंगलों व वन्य जीवों के बारे में अध्ययन करते हैं। इस दौरान वे बुर्जुग व्यक्तियों से मिलकर उनके  अनुभवों को एकत्रित करते हैं। उन्होंने बताया कि जिम कार्बेट को लेकर अभी उनका शोध जारी है।

    बाघिन ने 436 लोगों को उतारा था मौत के घाट

    नरभक्षी बाघिन ने 1904 से 1907 तक 436 लोगों को मौत के घाट उतारा था। इनमें से 236 चम्पावत जिले के काली कुमाऊं तथा 200 नागरिक नेपाल के थे। बाघिन का सबसे अधिक आतंक पाटी व चम्पावत के बीच में था। वर्ष 1907 में जिम कार्बेट ने नरभक्षी को अपनी गोलियों से छलनी कर मौत के घाट उतार दिया।

    पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा हवा हवाई

    विश्व की सबसे खूंखार नरभक्षी बाघिन का जहां जिम कॉर्बेट ने शिकार किया था उस स्थान को चम्पावत जिला प्रशासन ने 13 डिस्ट्रिक्ट 13 डेस्टिनेशन योजना के तहत जिम कॉर्बेट ट्रेल के नाम से विकसित करने का निर्णय लिया था। करीब दो साल पहले प्रशासन ने उस खुकरी और तलवार को खोज निकाला था। जिसे जिम कॉर्बेट ने बाघ का शिकार करने के बाद डुंगर सिंह को दी थी। लेकिन उनके परिजनों को उसकी जानकारी नहीं थी। परिजनों ने जब घर की छानबीन की तो उन्हें यह खुकरी व तलवार मिल गई। लेकिन उन्होंने उसे प्रशासन को देने से मना कर दिया। जिसके बाद परिजनों ने प्रशासन से उस स्थान को विकसित करने की मांग की थी ताकि लोगों को उस स्थान के महत्व के बारे में पता चल सके।

    जिला पर्यटन अधिकारी लता ब‍िष्‍ट ने बताया कि बाघ बरूड़ी नामक जगह को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की जा रही है। जिम कार्बेट से संबंधित जिले के अन्य स्थानों की सूची तैयार की जा रही है। उन्हें भी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है।

  • देर शाम धनोल्टी में बारिश, मौसम ने बदली करवट

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     मसूरी। मौसम के अजीबो-गरीब मिजाज के बीच उत्तराखंड में दिन गर्म और रातें सर्द हो रही हैं। सुबह से चटख धूप खिली रहने के बाद गुरुवार देर शाम मौसम ने करवट बदली। धनोल्टी-बुरांशखंडा में हल्की बारिश शुरू हुई। जबकि, मसूरी और दून में सर्द हवाओं ने ठिठुरन लौटा दी।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के उलट दून समेत आसपास के इलाकों में मौसम का मिजाज शाम को बदल गया। मौसम विभाग ने गुरुवार को प्रदेशभर में मौसम साफ रहने की संभावना जताई थी। जबकि, सीमांत जिलों में कहीं-कहीं ओलावृष्टि की चेतावनी दी थी, लेकिन सुबह से आसमान साफ रहने के बाद शाम को हल्के बादलों ने डेरा डाल लिया था। मसूरी में बादल तो छाये रहे, लेकिन बारिश नहीं हुई। जबकि, धनोल्टी, बुरांशखंडा व सुरकंडा में मेघ बरसने लगे। करीब आधा घंटे की बारिश के बाद मौसम फिर साफ हो गया। बारिश के बाद मसूरी-देहरादून समेत आसपास के इलाकों में रात को ठंड महसूस की गई।

    मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह के मुताबिक, अगले दो दिन प्रदेश में मौसम सामान्य रहने की संभावना है। जबकि, रविवार से मौसम फिर करवट बदल सकता है। पश्चिमी विक्षोभ के शनिवार तक हिमालयी क्षेत्र में पहुंचने की आशंका है।

  • 10वें सूर्य मंदिर स्थापना दिवस पर छाया भक्तिभाव

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    रायपुर। हीरापुर स्थित छुइयां छठ तालाब के किनारे सूर्य मंदिर का 10वां स्थापना दिवस श्रद्धा उल्लास से मनाया गया। सूर्यदेव का अभिषेक करके हवन पूजन और महाआरती की गई। साथ ही नवीन मंदिर का भूमि पूजन समारोह सम्पन्न हुआ। महाभंडारे में प्रसाद ग्रहण करने भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी।

    कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रायपुर ग्रामीण के विधायक सत्यनारायण शर्मा, पूर्व मंत्री राजेश मूणत, पार्षद कमलेश्वरी वसंत वर्मा, नगर निगम जोन 2 के अध्यक्ष राधेश्याम क्षत्रिय, पार्षद सुनील चंद्राकर, रायपुर नगर निगम के पूर्व सभापति प्रफुल्ल विश्वकर्मा, अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के प्रदेश अध्यक्ष मुक्ति नाथ पांडे , उत्तर भारत समाज के संरक्षक रविंद्र सिंह, संस्थापक राजकुमार चौधरी , संस्थापक सदस्य दिवाकर अवस्थी, हिरदेश शर्मा, कामेश्वर तिवारी, भोला सिंह, अध्यक्ष चंद्र भूषण शर्मा, नारी शक्ति की अध्यक्षा कुमकुम झा आदि मौजूद थीं।

    श्रीमद्भागवत कथा पर तुलसी वर्षा

    मंदिर स्थापना दिवस समारोह के मौके पर पिछले सात दिनों से चल रहे श्रीमद्भागवत कथा की विश्रांति हुई। कथावाचिका वृंदावन से पधारी कृष्ण प्रिया ने सात दिनों तक विविध कथा प्रसंगों के माध्यम से भक्ति भाव जगाया। अंतिम दिन तुलसी वर्षा की गई। इस मौके पर तुलसीजी की महिमा में बताया कि भगवान को अर्पित किए जाने वाले भोग में तुलसी पत्ता अवश्य रखना चाहिए। बिना तुलसी के कोई भी भोग भगवान स्वीकार नहीं करते।

    महाभंडारे में हजारों ने प्रसादी ग्रहण की

    हवन के पश्चात महाभंडारे में प्रसादी ग्रहण करने के लिए हजारों भक्त उमड़ पड़े। सभी को बैठाकर भोजन करवाया गया। आस्‍थावानों ने प्रसाद ग्रहण करने के लिए लाइन तक लगाई।