Category: state-news

  • सीआरपीएफ के दो जवान झारखंड में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में घायल

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    रांची। झारखंड के बोकारो जिले में नक्सली छापामारों के साथ मुठभेड़ में गुरुवार को सीआरपीएफ के दो जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की संयुक्त टीम ने एक गुप्त सूचना के बाद छापेमारी शुरू की। पुलिस को सूचना मिली थी कि प्रतिबंधित सीपीआई-माओवादी के सदस्य जागेश्वर बिहार पुलिस थाना क्षेत्राधिकार के तहत टुटी झरिया और झुमरा पहाड़ियों के जंगलों में मौजूद हैं और एक बड़ी योजना बना रहे हैं।
    पुलिस ने कहा कि घायल जवान सत्येंद्र सिंह और विष्णु सिंह को रांची के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाके में तलाशी अभियान जारी है।

  • कुछ इस तरह चला इन पांच दिनों का घटनाक्रम, आपदा के बाद उम्मीदों की डोर थामे कार्य में जुटी हैं सुरक्षा एजेंसियां

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    राज्य ब्यूरो, देहरादून: चमोली में आपदा आए 120 घंटे हो चुके हैं। सेना, वायुसेना, नौसेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ समेत दस एजेंसियां टनल में फंसी 34 जिदंगियों को बचाने की जिद्दोजहद में जुटी हैं। टनल के भीतर व बाहर पूरी मुस्तैदी के साथ काम चल रहा है। परिजनों को आस की डोर को सुरक्षा एजेंसियां लगातार सहारा दे रही हैं। पांच दिन से चल रहा यह रेस्क्यू आपरेशन भले ही अपने मकाम तक नहीं पहुंच पाया है लेकिन उम्मीदें बंधी हुई है, हौसला बरकरार है और प्रयास निरंतर जारी हैं।

    कुछ इस तरह चला इन पांच दिनों का घटनाक्रम

    • रविवार सात फरवरी: सीमांत चमोली जिले में रैणी गांव के समीप एवलांच आने से ऋषिगंगा व धौलीगंगा में आया उफान। ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट और एनटीपीसी का विष्णुगाड हाइड्रो प्रोजेक्ट का बैराज तबाह। एसडीआरएफ, सेना व पुलिस ने चलाया राहत व बचाव कार्य, 170 व्यक्तियों के लापता होने की आशंका, दो टनल में 50 व्यक्तियों के होने की सूचना। 12 किए गए रेस्क्यू, पहले दिन मिले 13 शव।
    • सोमवार आठ फरवरी: दूसरे दिन लापता व्यक्तियों की संख्या पहुंची 202, टनल में फंसे व्यक्तियों की सही संख्या आई सामने। कंपनी ने बताया 34 कार्मिक फंसे हुए हैं टनल के भीतर। टनल से मलबा निकालने का काम दिन रात रहा जारी। आसपास के क्षेत्र में सर्च अभियान में मिले शवों की संख्या पहुंची 26।
    • मंगलवार नौ फरवरी: टनल से मलबा हटाने का काम रहा जारी। 60 मीटर तक टनल की गई साफ। आसपास सर्च आपरेशन के दौरान बरामद शवों की संख्या पहुंची 32। वायुसेना और नौसेना भी बचाव अभियान से जुड़ी। फंसे 126 ग्रामीणों को पहुंचाया गया गांव। राहत सामग्री भी पहुंचाई।
    • बुधवार दस फरवरी: चौथे दिन बात सामने आई कि टनल के टी-प्वाइंट नहीं सिल्ट फ्लशिंग टनल में फंसे हैं 34 कार्मिक। बचाव व राहत कार्यों को बदली गई रणनीति। मुख्य सुरंग के भीतर ही देर रात को 12 मीटर ड्रिलिंग का काम शुरू। आसपास सर्च अभियान में तीसरे दिन तक कुल मिले शवों की संख्या 34 हुई। 10 की हुई पहचान। किया गया दाह संस्कार, अज्ञात शवों के लिए गए डीएनए सैंपल। नौसेना ने कोटेश्वर बांध झील में चलाया खोज अभियान।
    • गुरुवार 11 फरवरी: टनल में ड्रिलिंग के दौरान कठोर चट्टान आने पर रोका गया कार्य। फिर बदली गई टनल में फंसे कार्मिकों को निकालने की रणनीति। मुख्य टनल में फिर से मलबा हटाने का काम हुआ शुरू। नदी में पानी बढऩे के कारण कुछ देर बाधित भी हुआ कार्य। पांचवें दिन तक मिले शवों की संख्या 36 हो गई।

     

  • बुजुर्ग शिक्षक मेले में जवान युवती को घुमा रहा था, पत्नी ने देखा फिर क्या हुआ देखिए पूरा मामला

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    इस पिटाई का पूरा वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। ये पूरा मामला डौंडी थाना क्षेत्र का है। जानकारी के मुताबिक जो बुजुर्ग युवती को मेले में ले गया था वह पेशे से शिक्षक है। पूरे गांव में ये बात कही जा रही है कि उक्त युवती उसकी कथित प्रेमिका है।

    बुजुर्ग शिक्षक को मड़ई मेले में एक युवती के साथ जाना भारी पड़ गया। इसकी सूचना किसी तरह उसकी पत्नी को मिली और वो भी मड़ई मेले में पहुंच गई। इतनी भीड़-भाड़ में भी पत्नी ने अपने पति और उक्त युवती को खोज निकाला और युवती की जमकर पिटाई शुरू कर दी। युवती कौन है नया भारत इसकी पुष्टि नहीं करता।

  • मौसम से जुड़ा है इस उत्सव का समय, एक साल में चार बार आती है नवरात्रि

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    • माघ-आषाढ़ मास में गुप्त नवरात्रि और चैत्र-आश्विन मास में आती है सामान्य नवरात्रि

    शुक्रवार, 12 फरवरी से माघ महीने की गुप्त नवरात्रि शुरू हो रही है। माघ मास के अलावा आषाढ़ मास में भी गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है। गुप्त नवरात्रि में गुप्त साधनाएं की जाती हैं। चैत्र और आश्विन मास की नवरात्रि में सभी भक्त देवी मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं।

    उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार एक साल में चार बार नवरात्रि आती है। देवी पूजा के इस उत्सव का संबंध मौसम से भी है। नवरात्रि दो ऋतुओं के संधिकाल में मनाई जाती है। संधिकाल यानी एक ऋतु के जाने का और दूसरी ऋतु के आने का समय। अभी ठंड खत्म हो रही है और गर्मी शुरू होने वाली है। ऐसे समय में माघ मास की गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है। नवरात्रि के दिनों में पूजा-पाठ के साथ ही भक्त व्रत-उपवास भी रखते हैं। ऋतुओं के संधिकाल में खान-पान से संबंधित सावधानी रखने से हम मौसमी बीमारियों से बच सकते हैं।

    नवरात्रि में व्रत करने से सेहत को मिलता है लाभ

    नवरात्रि के दिनों में व्रत-उपवास करने से सेहत को लाभ मिलते हैं। ये समय मौसम परिवर्तन का रहता है। ऐसे में काफी लोग मौसमी बीमारियों जैसे सर्दी-जुकाम, बुखार, पेट दर्द, अपच जैसी समस्याओं की चपेट में आ जाते हैं। आयुर्वेद में रोगों से बचाव के लिए लंघन नाम की एक विधि बताई गई है। इस विधि के अनुसार व्रत करने से भी रोगों से बचाव होता है।

    व्रत करने से भक्ति में बनी रहती है एकाग्रता

    अन्न का त्याग करने से अपच की समस्या नहीं होती है। फलाहार करने से शरीर को जरूरी ऊर्जा मिलती रहती है। फल आसानी से पच भी जाते हैं। देवी पूजा करने वाले भक्तों की दिनचर्या संयमित रहती है, जिससे आलस्य नहीं होता है। सुबह जल्दी उठना और पूजा-पाठ, ध्यान करने से मन शांत रहता है। क्रोध और अन्य बुरे विकार दूर रहते हैं। इन दिनों में अगर अन्न का सेवन किया जाता है तो आलस्य बढ़ सकता है, इस वजह से पूजा में एकाग्रता नहीं बन पाती है।

  • कालोनी वासी परेशान खारे पानी की आपूर्ति से

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    फरीदाबाद : गर्मी आने से पहले ही लोग पेयजल किल्लत को तरस रहे हैं। कई कालोनियों में ट्यूबवेलों से खारे पानी की आपूर्ति हो रही है। मजबूरी में लोगों को निजी टैंकर वालों से पानी खरीद कर पीना पड़ रहा है। वार्ड-8 के अंतर्गत आने वाली कपड़ा कालोनी बी ब्लाक तथा डबुआ कालोनी ई ब्लाक में खारे पानी की आपूर्ति हो रही है। हैरानी की बात है कि यहां शुद्ध पानी की आपूर्ति के लिए वार्ड की पार्षद ममता चौधरी ने पिछले वर्ष मार्च में हुई नगर निगम सदन की बैठक में भी मुद्दा उठाया था। फिर भी समस्या का समाधान नहीं किया गया। मैं निजी टैंकर से पानी भरती हूं। नगर निगम के ट्यूबवेल से खारा पानी आ रहा है। कई बार नगर निगम में शिकायत की है।

    -विमला देवी। कपड़ा कालोनी और डबुआ कालोनी ई ब्लाक में खारे पानी की आपूर्ति होती है। गर्मी में पानी की मांग बढ़ जाती है, तो परेशानी अधिक होती है।

    -दीपक त्रिपाठी। हैरानी की बात है कि एक तरफ तो नगर निगम बेहतर पेयजल आपूर्ति का दावा करता है, मगर हमारी कालोनी पर ध्यान ही नहीं है।

    -सोनू। डबुआ कालोनी ई ब्लाक और कपड़ा कालोनी में रेनीवेल की लाइन भी बिछी है, मगर रेनीवेल का पानी नहीं आ रहा है। मैंने सदन की बैठक में यह मुद्दा कई बार उठाया है। डबुआ कालोनी बूस्टिग स्टेशन से मेरे वार्ड में कम मात्रा में पानी आता है। वहां से अन्य वार्डों में पानी की आपूर्ति हो रही है। हर वार्ड में समान रूप से जरूरत के मुताबिक पानी मिलना चाहिए। अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे।

    -ममता चौधरी, पार्षद, वार्ड-8 हम गर्मी से पहले हर क्षेत्र की पेयजल संबंधी दिक्कतों को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। कई जगह नए ट्यूबवेल लगाए जाएंगे। रेनीवेल योजना के तहत पानी की आपूर्ति को दुरुस्त किया जा रहा है।

    -रामजी लाल, मुख्य अभियंता, नगर निगम।

  • समय रहते आपदा की जानकारी प्राप्त होने के मामले में बहुत कुछ किया जाना अभी शेष

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    उत्तराखंड इस बार फिर प्राकृतिक आपदा के कारण खबरों में रहा। राज्य के सीमांत जिले चमोली के रैणी गांव के समीप हैंगिंग ग्लेशियर के टूटने से आई आपदा में हुई जन-धन हानि का अभी तक सटीक आंकड़ा देना मुश्किल हो रहा है। राज्य प्रशासन के अनुसार मंगलवार संध्या तक 58 शव बरामद हुए हैं और 146 अब भी लापता हैं। एक अच्छी खबर यह रही कि इस आपदा से 12 लोगों को बचा लिया गया। राज्य के पुलिस महानिदेशक के अनुसार अब मलबे में या टनल के भीतर किसी के जीवित होने की उम्मीद नहीं बची है। तीन-चार दिनों बाद बचाव कार्य भी बंद कर दिया जाएगा।

    हमारे देश में करीब 10 हजार ग्लेशियर हैं और उत्तराखंड में इनकी संख्या 968 है। हिमालय विश्व की सबसे नवीनतम पर्वत श्रृंखला मानी जाती है, लिहाजा इसके बनने-बिगड़ने की प्रक्रिया अभी जारी है। यही कारण है कि समूचा हिमालय बेहद संवेदनशील है। ऐसे में उच्च पर्वत श्रृंखलाओं में मौजूद ग्लेशियरों की संवेदनशीलता और बढ़ जाती है। खासतौर पर जबकि इन क्षेत्रों में विकास कार्यो ने भी गति पकड़ी है और यह समय की मांग भी है। निरंतर भूगर्भीय हलचलों के साथ ग्लोबल वार्मिग से ग्लेशियरों के पिघलने की दर बढ़ गई है। परिणामस्वरूप ग्लेशियर में झीलों के फटने और एवलांच की घटनाएं सामने आ रही हैं।

    ऋषिगंगा कैचमेंट क्षेत्र में हैंगिंग ग्लेशियर के टूटने से हुई तबाही भी इसी का परिणाम है। बावजूद इसके आज तक भी ग्लेशियरों की मॉनीटरिंग का पुख्ता इंतजाम नहीं है। ग्लेशियरों की मॉनीटरिंग के लिए वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग जैसे गिने-चुने संस्थान ही हमारे पास हैं। ये संस्थान भी चुनिंदा ग्लेशियरों पर काम कर रहे हैं। विज्ञान जगत की बात करें तो तमाम विज्ञानी लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि ग्लेशियरों पर अध्ययन के लिए पृथक संस्थान की स्थापना आवश्यक है, क्योंकि विकास की चुनौतियों के बीच ग्लेशियरों से निकलने वाले खतरे भी बढ़ रहे हैं। यह सरकारों की समझ में आना चाहिए।

    उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड का प्राकृतिक आपदाओं से दुर्भाग्यपूर्ण रिश्ता रहा है। इन आपदाओं की जड़ में नदियों में बन रहे बांधों और विकास कार्यो को देख रहे लोगों को शायद यह भी मालूम होगा कि आपदाएं तब भी आती रही हैं, जब इस क्षेत्र में पगडंडियों से आना जाना होता था। हर आपदा के बाद बुद्धिजीवियों में अपने-अपने दृष्टिकोण से बहस ही नहीं होती है, बल्कि अपने दृष्टिकोण को सिद्ध करने के प्रयास भी होते हैं। इस बार की आपदा भी इस परंपरा का कोई अपवाद नहीं रही। कुछ लोग इसकी वजह ऋषिगंगा व तपोवन-विष्णुगाड़ पावर प्रोजेक्ट को बता रहे हैं, तो कुछ का दावा है कि इन परियोजनाओं के कारण बाढ़ के प्रभाव को सीमित किया जा सका। बावजूद इसके आमजन में इस बात पर तो सहमति ही दिख रही है कि नदियों पर बन रहे बांधों का इस तरह की आपदाओं के मद्देनजर गंभीरता से अध्ययन किया ही जाना चाहिए। विकास और पारिस्थितिकी संतुलन के बीच में ही रास्ता निकालना होगा और यह समन्वय व संवाद से ही संभव है, अतिवाद से नहीं।

    हिमालयी ग्लेशियरों से निकल रही नदियों पर बन रही अथवा प्रस्तावित जल विद्युत परियोजनाओं और गांवों तथा शहरों के बीच संबंधित अलार्मिग सिस्टम की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। इससे ग्लेशियर टूटने या झील के फटने से आने वाली तबाही को काफी हद तक सीमित किया जा सकता है। रैणी इलाके में तबाही आते ही यदि तपोवन में सायरन बज जाता तो कई जानें बच सकती थीं। इस बार की आपदा में केंद्र और प्रदेश की सरकारों व विभिन्न एजेंसियों की त्वरित सक्रियता उल्लेखनीय रही। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, बीआरओ, सेना, वायु सेना, नेवी, आइटीबीपी, राज्य की पुलिस जैसी एजेंसियों ने बेहद समन्वित और त्वरित अभियान चलाया।

    हालांकि प्रशासन, पुलिस और अभियान में जुटी एजेंसियों ने खुल कर यह नहीं कहा, लेकिन अनावश्यक वीआइपी मूवमेंट से परेशानी ही पैदा हुई। जमीन पर आपदा से मुकाबला कर रही फोर्स के लीडर जब वीआइपी के आगे पीछे खड़े होते हैं तो इस तरह के अभियान में व्यवधान ही पैदा होता है। इतनी सी बात वीआइपी जमात को समझ नहीं आई कि उनकी विशेषज्ञता और दक्षता उस विषय में नहीं है जिसकी जरूरत आपदा स्थल पर जिंदा लोगों व शवों को निकालने के लिए चाहिए। प्रदेश के लोग ही यह पूछ रहे हैं कि क्या कोई राजनीतिज्ञ यह बता सकता था कि मलबे में दबे लोगों को कैसे निकालें, कहां से अभियान शुरू करें। टनल से मलबा कैसे बाहर निकाला जाए या उसमें फंसे लोगों को आक्सीजन कैसे दिया जाए? कौन सी मशीन का उपयोग कहां और कैसे करें। आपदाग्रस्त क्षेत्र में इस तरह की वीआइपी सक्रियता को रोकने के लिए समझदारी विकसित करने की आवश्यकता इस आपदा में भी महसूस की गई।

  • हुई बहसबाजी बिना फास्टैग दोगुना टैक्स वसूली में

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    फरीदाबाद : सोमवार आधी रात 12 बजे के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के टोल पर बगैर फास्टैग वाले वाहन चालकों से दोगुना टैक्स लिया जाना शुरू कर दिया गया है। इसे लागू होते ही फास्टैग न लगवाने वाले वाहन चालकों की जेब ढीली हुई, साथ ही कई वाहन चालक ऐसे थे जो टोलकर्मियों से बहस करते हुए दिखाई दिए। कोई कुछ बहाना बना रहा था तो कोई कुछ। लेकिन एक भी बिना फास्टैग वाले वाहन को बिना दोगुना टैक्स दिए आगे नहीं जाने दिया गया। हालांकि सराय टोल से दिल्ली की ओर जाने वाले महज 10 फीसद ही वाहन चालकों के पास फास्टैग नहीं था। इससे टोल प्रबंधन की आमदनी बढ़ गई है। वैसे रोज करीब 50 हजार वाहन चालकों से टैक्स वसूली के रूप में करीब 10 लाख रुपये आते हैं। 150 से अधिक होना चाहिए बैलेंस

    टोल पर कई ऐसे वाहन चालक थे, जिनके वाहन पर फास्टैग लगा था लेकिन उसमें बैलेंस पर्याप्त नहीं था। टोल प्रबंधन के नियमानुसार फास्टैग में 150 रुपसे अधिक बैलेंस होना जरूरी है। इसी बात को लेकर कई वाहन चालक टोलकर्मियों से बहस करने लगे, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। इसके बाद ऐसे वाहन चालकों को भी दोगुना टैक्स अदा करना पड़ा। कई ऐसे भी वाहन चालक थे, जिनके फास्टैग में बैलेंस पूरा था, लेकिन टोल पर यह पूरा दर्शाया नहीं जा रहा था। ऐसे वाहन चालकों की वजह से टोल पर वाहनों की लंबी लेन भी दिखाई दी। फास्टैग लेने की ओर बढ़े कदम

    कई वाहन चालक ऐसे भी थे जिन्होंने टोल पर दोगुना टैक्स अदा तो कर दिया, लेकिन आगे जाकर फास्टैग भी ले लिया ताकि भविष्य में और अधिक नुकसान न हो। बता दें सराय टोल के दोनों ओर फास्टैग भी दिए जा रहे हैं। दोगुना टैक्स की सूचना मिलने पर मंगलवार को यहां अन्य दिनों के मुकाबले कुछ अधिक चालक दिखाई दिए। मुझे नए नियम के बारे में जानकारी नहीं थी। अब दोगुना टैक्स अदा करना बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा है। आज सबसे पहले फास्टैग लेकर गाड़ी पर लगवाऊंगा।

    -अजय मेरी कार पर फास्टैग लगा हुआ था, लेकिन आज दूसरी कार को लेकर आ गया। फास्टैग का ध्यान नहीं रखा गया। इसलिए दोगुना टैक्स देना पड़ा।

    -अमोल मेरे फास्टैग में 115 रुपये बैलेंस हैं, लेकिन टोल पर फिर भी मुझसे दोगुना टैक्स लिया गया। टोलकर्मी बता रहे हैं कि 150 रुपये से अधिक बैलेंस होना चाहिए था।

    -अरविद वाहन चालकों की सुविधा के लिए टोल पर फास्टैग दिए जा रहे हैं। यदि किसी ने अभी तक नहीं लिया है तो वह यहां से ले सकता है। वरना अब दोगुना टैक्स अदा करना ही होगा।

    -मनोज बंसल, परियोजना निदेशक, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण।

  • जुर्म दर्ज, मवेशी चोरी कर ले जा रहे युवक पकड़ाए

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    बिलासपुर। रतनपुर क्षेत्र के कर्रा से मवेशी चोरी कर ले जा रहे दो युवकों को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया है। वहीं, युवक के साथ आए लोग मौके से फरार हो गए। ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस ने जुर्म दर्ज कर आरोपित युवकों को गिरफ्तार कर लिया है।

    रतनपुर क्षेत्र के कर्रा निवासी दिनेश कुमार कैवर्त सब्जी का व्यवसाय करते हैं। सोमवार की शाम वे सब्जी बेचने आसपास के गांव गए थे। शाम सात बजे वे सब्जी बेचकर अपने घर लौट रहे थे। इस दौरान उन्होंने देखा कि उनके घर के एक बछड़े को दो युवक हांकते हुए लेकर जा रहे थे। इस पर दिनेश ने उनसे पूछताछ की। इस पर मवेशी ले जा रहे युवकों ने गांव से मवेशियों को खरीदकर ले जाने की बात कही।

    इस पर दिनेश ने गांव के नवदीप पांडेय, संदीप तिवारी और शैलेष तिवारी को बुलवा लिया। इसके बाद मवेशी ले जा रहे युवकों को पकड़कर पूछताछ की। इस दौरान युवकों ने अपना नाम छोटू बंजारे निवासी मौखार व भास्कर तिवारी ग्राम जाली बताया। युवकों के पकड़ाते ही कुछ दूरी पर पिकअप वाहन के साथ खड़े युवक भाग निकले। ग्रामीणों ने पकड़े गए युवकों को रतनपुर पुलिस के हवाले कर दिया है। दिनेश की शिकायत पर पुलिस ने युवकों के खिलाफ जुर्म दर्ज कर लिया है।

    पहले भी गांव से गायब हुए हैं मवेशी

    ग्रामीणों ने बताया कि पहले भी गांव से मवेशी गायब हुए हैं। ग्रामीणों ने इसमें आसपास के गांव के लोगों के भी शामिल होने की आशंका जताई है। इस पर पुलिस पकड़े गए युवकों से पूछताछ कर रही है। वहीं, पिकअप से भागे युवकों के संबंध में भी जानकारी ली जा रही है। पुलिस फरार आरोपित की तलाश कर रही है।