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  • धरती के सबसे प्राचीन जीव डिकिनसोनिया का 5700 लाख वर्ष पुराना जीवाश्म भीमबैठका में मिला

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    भोपाल । मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित विश्व धरोहर भीमबैठका एक बार भी फिर चर्चा में है। बीते साल यहां भ्रमण करने पहुंचे अंतरराष्ट्रीय भू विज्ञानियों की नजर एक जीवाश्म पर पड़ी तो उन्होंने इसकी तस्वीर लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परीक्षण किया। पता चला कि यह जीवाश्म पृथ्वी के पहले जीव का है। हाल ही में गोंडवाना शोध पत्रिका में इसका प्रकाशन हुआ।

    अंतरराष्ट्रीय भू विज्ञानी दल का नेतृत्व करने वाले नागपुर स्थित भारतीय भूविज्ञान सर्वेक्षण विभाग (जीएसआइ) के निदेशक रंजीत खंगार ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय 36वीं भूविज्ञान कांग्रेस मप्र की राजधानी भोपाल के नजदीक विश्व धरोहर भीमबैठका में आयोजित होनी थी जो कि स्थगित हो गई। अंतरराष्ट्रीय भूविज्ञानियों के दल के साथ वे 25 फरवरी से 25 मार्च 2020 में भीमबैठका का भ्रमण करने गए थे। इस दल में वे स्वयं व उनके साथी समन्वयक मेराजुद्दीन तथा डेव नकर्सन (कनाडा), ग्रेगरी रिटालैक (अमेरिका), इयान राइन, पामेला चेस्टर (न्यूजीलैंड) व शरद मास्टर (दक्षिण अफ्रीका) शामिल थे। सभी ने मप्र में सांची और भीमबैठका की यात्र की थी।

    ऑस्ट्रेलिया में मिला था 5410 लाख वर्ष पुराना जीवाश्म

    भीमबैठका में मिला यह जीवाश्म पृथ्वी के सबसे प्राचीन जानवर डिकिनसोनिया का होने की पुष्टि दक्षिण आस्ट्रेलिया में इसी जानवर के 5410 लाख वर्ष पुराने जीवाश्म से मिलान करने पर हुई है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि भीमबैठका में मौजूद डिकिनसोनिया का जीवाश्म विश्व का सबसे पुराना है।

    जीवाश्म का आकार है 17 इंच

    यह जीवाश्म जमीन से 11 फीट ऊंची सभागारनुमा गुफा की छत पर मौजूद है। जीवाश्म की आकृति पत्ते की तरह है जो 17 इंच तक दिखाई दे रही है जो कि 4 फीट तक हो सकती है।

    वसा से बना पृथ्वी का पहला प्राणी

    विशाल पत्ते या टेबल जितने बड़े अंगुलियों के निशान की तरह नजर आने वाले यह जीवाश्म डिकिनसोनिया कहलाता है। विज्ञानियों का मानना है कि इसे जीवों की उत्पत्ति के दौर का पृथ्वी पर पैदा हुआ सबसे पहला ज्ञात प्राणी कहा जा सकता है। यह एक तरह की वसा यानी कोलेस्ट्रॉल जैसा है। हालांकि अभी भी इसकी कई गुत्थियां सुलझाना बाकी है।

    55.8 करोड़ साल पहले बड़ी संख्या में थे मौजूद  

    इस संबंध में ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी में रिसर्च स्कूल ऑफ अर्थ साइंसेज के एसोसिएट प्रोफेसर्स 75 साल से दुनिया में मिले जीवों की गुत्थियां सुलझाने में लगे हैं। उनके अनुसार 55.8 करोड़ साल पहले पृथ्वी पर भारी संख्या में डिकिनसोनिया मौजूद थे।

    आधुनिक जीवन शुरू होने के दो करोड़ साल पहले  

    यह जीव एडियाकारा बायोटा का हिस्सा है। बैक्टीरिया के दौर में यह जीव पृथ्वी पर थे। इसका मतलब यह कि आधुनिक जीवन शुरू होने के लगभग दो करोड़ साल पहले ये मौजूद थे। वैज्ञानिकों के लिए कार्बनिक पदार्थ से लैस डिकिनसोनिया जीवाश्मों को ढूंढना काफी मुश्किल काम रहा।

    एक अवधारणा : ऑक्सीजन की कमी से हुआ

    विज्ञानियों का मानना है कि मोबिलिटी पर जो विकासवादी प्रयोग चल रहा था वे गैबॉन जीवों के आने के बाद कुछ समय के लिए रुक गया होगा। संभव है कि ऐसा करीब 2.08 अरब साल पहले धरती के वायुमंडल में अचानक ऑक्सीजन की कमी आने की वजह से ऐसा हुआ हो।

    ऑस्ट्रेलिया और रूस था घर 

    ऑस्ट्रेलिया में ऐसे बहुत से जीवों का पता चला था। उत्तर पश्चिम रूस में व्हाइट सी के पास एक टीले से मिला था। इस सुदूर इलाके में जहां अभी भालुओं और मच्छरों का घर है, वहीं टीले के ऊपर बड़ी मात्र में डिकिनसोनिया के जीवाश्म मिले थे।

    खास पर्यावरणीय स्थितियों से उत्पन्न  

    विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ खास पर्यावरण की स्थितियों में 2.5 से 1.6 अरब साल पहले इन जीवों की उत्पत्ति हुई थी। उस समय जीव केवल बैक्टीरिया के रूप में ही नहीं थे, बल्कि जटिल जीव भी पैदा हुए थे।

    सैंपल विशेष रूप से संरक्षित किया जाएगा

    नागपुर के जीएसआइ निदेशक रंजीत खंगार ने कहा कि अभी सैंपल नहीं लिए गए हैं। सरकारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमों के तहत सभी प्रक्रिया पूरी करेंगे। विभाग की ओर से सैंपल लेने संबंधी कार्य के साथ विशेष रूप से संरक्षित किया जाएगा।

    विश्व संरक्षित धरोहर

    भोपाल के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के विज्ञानी डॉ. टीकम तेनवार ने कहा कि भीमबैठका की गुफाएं और शैलचित्र विश्व संरक्षित धरोहर हैं। यहां पर हजारों लोग शोध के लिए आते हैं। लगातार शोध कार्य चल रहा है। डिकिनसोनिया के जिस जीवाश्म को यहां होना बताया गया है उसका भी पूरी तरह संरक्षण किया गया है।

    पुरातत्व अवशेषों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार संरक्षित किया गया

    रायसेन के कलेक्टर उमाशंकर भार्गव ने कहा कि भीमबैठका में मौजूद सभी पुरातत्व अवशेषों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार संरक्षित किया गया है। यहां 5700 लाख वर्ष पुराने जीवाश्म मिलने की बात सामने आई है ।

    भीमबैठका क्षेत्र तार फेंसिंग से सुरक्षित किया गया

    भीमबैठका के प्रभारी विजय शर्मा ने कहा कि  संपूर्ण भीमबैठका क्षेत्र तार फेंसिंग से सुरक्षित किया गया है। प्राचीन धारोहरों को किसी तरह का नुकसान नहीं हो इसका ध्यान रखा जाता है। इसके संरक्षण में अंतरराष्ट्रीय दिशा निर्देशों का पालन किया जाता है।

  • केदारनाथ के पीछे चोटी पर भी हैं ऐसे ही ग्लेशियर, चमोली में तबाही की वजह बना हैंगिंग ग्लेशियर

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    देहरादून। ऋषिगंगा कैचमेंट क्षेत्र से निकली तबाही की वजह रौंथी पर्वत के हैंगिंग ग्लेशियर को माना गया है। यह ग्लेशियर अचानक से टूटकर नीचे आ गिरा था। जिसके चलते उसके साथ बड़े बोल्डर व भारी मलबा भी खिसक गया था। उत्तराखंड में तमाम ग्लेशियरों में इस तरह के हैंगिंग ग्लेशियर मौजूद हैं। प्राकृतिक घटनाओं व भौगोलिक परिस्थितियों के चलते ये ग्लेशियर बनते हैं और कुछ समय बाद स्वयं टूट भी जाते हैं। इस तरह के ग्लेशियरों के प्रति वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के पूर्व विज्ञानी हिमनद विशेषज्ञ डॉ. डीपी डोभाल ने आगाह किया है।

    बुधवार को ‘दैनिक जागरण’ से बातचीत में हिमनद विशेषज्ञ डॉ. डीपी डोभाल ने कहा कि केदारनाथ मंदिर के पीछे की चोटी पर भी हैंगिंग ग्लेशियर हैं। कई सालों से इन्हें देखा जा रहा है। वर्ष 2007 में जब वह चौराबाड़ी ग्लेशियर पर अध्ययन पर रहे थे, तब हैंगिंग ग्लेशियर की तरफ से एवलांच भी आया था। जहां भी यू-शेप की वैली होती हैं, वहां इन्हें बनने में मदद मिलती है। इसके साथ ही ढालदार पत्थरों पर भी हैंगिंग ग्लेशियर तेजी से बनने लगते हैं।

    उत्तराखंड में ग्लेशियर 3800 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर स्थित हैं और हैंगिंग ग्लेशियर करीब चार हजार मीटर की ऊंचाई पर बनने लगते हैं। इनकी लंबाई उसके आधार या सपोर्ट के कारण कितनी भी हो सकती है, जबकि मोटाई 20 से 60 मीटर तक हो जाती है। निचले आधार के बाद भी यह बाहर की तरफ बढ़ने लगते हैं। जब इनकी मोटाई बढ़ती है, या अधिक बर्फ इनके ऊपर जमा होने लगती है तो यह अधिक भार सहन नहीं कर पाते और टूट जाते हैं।

    आबादी से दूर हैं अधिकतर हैंगिंग ग्लेशियर

    अधिक ऊंचाई पर बनने के चलते हैंकिंग ग्लेशियर आबादी क्षेत्रों से कई किलोमीटर दूर होते हैं। सीधे तौर पर यह आबादी को नुकसान नहीं पहुंचा सकते हैं। मगर, किसी गदरे या नदी में गिरने के चलते यह कृत्रिम झील का निर्माण कर सकते हैं। ऋषिगंगा कैचमेंट क्षेत्र में भी यही स्थिति बनी। यदि ऐसा होता है तो यह बड़ा खतरा भी बन सकते हैं।

    सेंटर फॉर ग्लेशियोलॉजी की जरूरत महसूस हो रही

    ऋषिगंगा व तपोवन क्षेत्र में आई जलप्रलय के बाद एक बार फिर ग्लेशियरों पर अध्ययन बढ़ाने की जरूरत महसूस होने लगी है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. कालाचांद साईं भी कहते हैं कि हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए ग्लेशियरों की सेहत को नजरंदाज नहीं किया जा सकता। इसी बात को देखते हुए वर्ष 2003 में वाडिया में सेंटर फॉर ग्लेशियोलॉजी प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। इसके लिए 23 करोड़ रुपये भी दिए गए थे। इसके अलावा ग्लेशियरों पर शोध के लिए समर्पित एक अलग एजेंसी की स्थापना दून में करने की बात भी केंद्र सरकार ने की थी। हालांकि, कोरोनाकाल में अचानक इस प्रोजेक्ट को ही बंद कर दिया गया। वाडिया संस्थान के निदेशक डॉ. कालाचांद का कहना है कि ग्लेशियोलॉजी सेंटर की उम्मीद अभी भी बाकी है। संस्थान की ओर से इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

  • जल स्तर की टनल के अंदर जांच कर रही रेस्क्यू टीम, फंसे हैं 34 लोग

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    देहरादून। चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने से बीते रोज आई तबाही के बाद तपोवन-विष्णुगाड परियोजना की एक सुरंग में फंसे करीब 34 व्यक्तियों को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। आइटीबीपी, एसडीआरएफ, सेना, जिला प्रशासन की टीम आपरेशन में जुटी हैं। रातभर चले ऑपरेशन में सुरंग से 130 मीटर तक मलबा हटाया जा चुका है। वहीं, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर रहे हैं। बता दें कि अब भी 173 लोग लापता हैं, जबकि अभी तक 26 के शव बरामद किए जा चुके हैं। कुल लापता 202 व्यक्तियों में से और पांच व्यक्ति सोमवार को सुरक्षित लौट आए। दूसरी ओर वायुसेना ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री बांटने का काम प्रारंभ कर दिया।

    LIVE UPDATES of Uttarakhand Chamoli Glacier Burst

    • आइटीबीपी, सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की एक संयुक्त टीम ने तपोवन सुरंग में प्रवेश किया। यहां वे सुरंग के अंदर जल स्तर की जांच करेंगे।
    • मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत चमोली में ग्लेशियर आपदा के कारण प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायजा ले रहे हैं।
    • सात फरवरी को सुरंग से निकाले गए 12 लोगों से सीएम त्रिवेंद्र रावत ने अस्पताल में मुलाकात की। सीएम ने बताया कि उन्होंने शरीर में दर्द की शिकायत की है, क्योंकि वे पानी और मलबे के डर से 3-4 घंटे के लिए लोहे की पट्टी पर लटके हुए थे। डॉक्टरों ने कहा कि वे जल्द ठीक हो जाएंगे।
    • भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवानों ने 7 फरवरी को चमोली में सुरंग में फंसे लोगों को बचाया।
    • सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चमोली के जोशीमठ में आइटीबीपी अस्पताल का दौरा कर घायलों का हालचाल जाना।
    • सुरंग में बचाव अभियान चल रहा है, हमें उम्मीद है कि हम दोपहर तक रास्ता साफ कर पाएंगे- अशोक कुमार, डीजीपी
    • रेस्क्यू ऑपरेशन पूरी रात चला और अब भी जारी है। काफी मलबे को हटा दिया गया है। हम अब तक कोई संपर्क स्थापित नहीं कर पाए हैं- अपर्णा कुमार, डीआइजी सेक्टर मुख्यालय, आइटीबीपी देहरादून

    ग्रामीणों का हालचाल जानने लाता पहुंचे सीएम 

    मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जोशीमठ आर्मी हेलीपैड से सीमांत गांव क्षेत्र लाता के लिए रवाना हुए। आपदा से सीमांत क्षेत्र के रैणी पल्ली, पैंग, लाता, सुराईथोटा, सुकी, भलगांव, तोलमा, फगरासु, लोंग सेगडी, गहर, भंग्यूल, जुवाग्वाड, जुगजू गांवों से सडक संपर्क अभी कटा है। ग्रामीणों का हालचाल जानने आज स्वयं मुख्यमंत्री लाता पहुंचे।

    प्रभावित गांवों में पहुंचाई राहत सामग्री 

    राहत अभियान के लिए लाता गांव में एक अस्थायी हेलीपैड बनाया गया है। इसकी मदद से नागरिक प्रशासन ने आइटीबीपी को लाता से सात किमी दूर आपदा प्रभावित गांवों जुगाजू, जुवाग्व को वितरित करने के लिए राशन के पैकेट उपलब्ध कराए। इसके बाद टीम ने पैदल गांवों में पहुंचकर राहत सामग्री ग्रामीणों को बांटी।

    गांवों में किया जा रहा राहत सामग्री का वितरण

    जोशीमठ-मलारी हाइवे पर मोटरपुल टूटने से कट गए गांवों में भी राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है। राहत व बचाव कार्यों को तेज करने के लिए चमोली जिले को 20 करोड़ की राशि जारी की गई। केंद्रीय मंत्रियों डा रमेश पोखरियाल निशंक और आरके सिंह ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। वहीं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोमवार को सचिवालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपदा राहत कार्यों की समीक्षा। शाम देर शाम मुख्यमंत्री ने तपोवन पहुंचकर राहत व बचाव कार्यों का मुआयना किया। मुख्यमंत्री रात्रि विश्राम वहीं करेंगे।

    चीन सीमा से सटे चमोली जिले के रैणी गांव के समीप बीते रविवार को ग्लेशियर टूटने से ऋषिगंगा और धौलीगंगा में उफान आ गया था। केदारनाथ जल प्रलय के बाद ये दूसरी बड़ी दुर्घटना है जिसमें मलबायुक्त पानी ने भारी तबाही मचाई। इसमें 13 मेगावाट का ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट तबाह हो गया, जबकि 520 मेगावाट का तपोवन-विष्णुगाड प्रोजेक्ट का बैराज क्षतिग्रस्त हो गया।

    इसके अतिरिक्त जोशीमठ-मलारी हाइवे पर रैणी स्थित चीन सीमा को जोड़ने वाले पुल समेत पांच पुल टूट गए थे। इस आपदा में बीते रोज 13 व्यक्तियों के शव मिले थे, जबकि एक तपोवन-विष्णुगाड प्रोजेक्ट की एक सुरंग में फंसे 12 व्यक्तियों को सुरक्षित बचा लिया था। दूसरी सुरंग में करीब 34 व्यक्तियों के फंसे होने का अंदेशा है। इन्हें बचाने के लिए बीते रोज से ही आपरेशन चलाया जा रहा है। बीते रोज 13 शव बरामद किए गए थे। सोमवार को 11 और शव बरामद किए गए। अब तक मिले 26 शवों की शिनाख्त नहीं हो पाई है।

    राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि बीते रोज आपदा से बचने को इधर उधर गए पांच व्यक्ति सोमवार को सुरक्षित मिले। सुरंग से बचाए गए 12 व्यक्तियों समेत अब तक कुल 32 व्यक्तियों के सुरक्षित होने की जानकारी मिल चुकी है।

    लापता व्यक्तियों का ब्योरा

    लापता व्यक्तियों में रैणी गांव के छह, तपोवन ऋत्विक कंपनी के 115, करछौ गांव के दो, रिंगी गांव के दो, ऋषिगंगा कंपनी के 46, ओम मैटल कंपनी के 21, एचसीसी के तीन, तपोवन गांव के दो लोग शामिल हैं।

  • ड्रिलिंग का काम रोका, टनल में फंसे लोगों के रेस्‍क्‍यू में पल-पल बढ़ रही है चुनौती

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    देहरादून। चमोली में तपोवन विष्‍णुगाड परियोजना की टनल में फंसे लोगों को रेस्‍क्‍यू करने में पल-पल नई चुनौती पेश आ रही है। बुधवार मध्‍यरात्रि ड्रिल करके काम कर रही टीम का पता लगाने की जिस रणनीति पर काम शुरू किया गया था, सुबह ग्‍यारह बजे उसे बदलना पड़ा। अब फिर से मुख्‍य टनल की सफाई कर टी प्‍वाइंट की तरफ बढ़ने की रणनीति पर काम करने का फैसला किया गया है। छह मीटर ड्रिल के बाद लोहे का जाल और कंक्रीट की मजबूत सतह मिलने के चलते और गहराई में ड्रिलिंग संभव नहीं हो पा रही है। इसीलिए ड्रिलिंग रोककर अब फिर से मुख्‍य टनल से मलबा हटाने का काम शुरू किया जा रहा है। टनल के भीतर रविवार से 34 लोग फंसे हुए हैं। ये सभी फलशिंग टनल में काम करने गए थे। डीजीपी अशोक कुमार ने कहा कि बचाव अभियान के तहत हम कल तक सुरंग में मलबा हटाने का काम कर रहे थे। अंदर देखने के लिए हमने छोटी सुरंग में ड्रिलिंग भी शुरू की थी, लेकिन मशीन के टूटते ही इसे अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।

    LIVE UPDATES 

    • उत्तराखंड राज्यपाल बेबी रानी मौर्य हैलि‍कॉप्टर से जोशीमठ हैलीपैड पहुंची। इसके बाद यहां से कार द्वारा तपोवन पहुंचकर आपदा प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करेंगी।
    • आइटीबीपी के डीआइजी अपर्णा कुमार ने बताया कि ऐसी संभावना है कि सुरंग के अंदर कुछ और लोग फंस सकते हैं, एनटीपीसी की टीम वर्टिकल ड्रिलिंग का इस्तेमाल कर रही है।
    • चमोली में पुल बह जाने के बाद 13 सीमांत गांवों का संपर्क कट गया है। इसके बाद से गांवों को जोड़ने के लिए आइटीबीपी के जवान झूला पुल का निमार्ण कर रहे हैं। इसका उपयोग ब्रिज के एक तरफ से दूसरी तरफ राशन पहुंचाने के लिए किया जाएगा।
    • प्रशासन के अनुसार, अब तक 34 शव बरामद हुए हैं। इनमें से 10 की शिनाख्‍त हो गई। वहीं, 170 लोग अभी लापता हैं।
    • टनल में फंसे करीब 34 लोगों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन पांचवें दिन गुरुवार को भी जारी है।
    • गुरुवार सुबह करीब दो बजे रेस्‍क्‍यू टीम ने मुख्य टनल में ही करीब 12 मीटर तक ड्रि‍लिंग का काम शुरू कर दिया गया है। ड्रि‍लिंग कर कैमरे के जरिये फंसे व्यक्तियों का पता लगाया जाएगा।
    • बुधवार को नेवी के माकरेस ने श्रीनगर के समीप कोटेश्वर झील में सर्च आपरेशन चलाया।
    • एनटीपीसी से प्राप्त सूचना के आधार पर अब तक ये माना जा रहा था कि टनल में टी-प्वाइंट पर उक्त व्यक्ति फंसे हैं।
    • तपोवन-विष्णुगाड हाइड्रो प्रोजेक्ट की टनल में फंसे 34 व्यक्तियों को बचाने के लिए रेस्क्यू आपरेशन की रणनीति को चौथे दिन बदलना पड़ा।

  • बसारी में घूम रहे दो बच्चो को ग्रामीणों ने किया 100 डायल के हवाले

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    छतरपुर-राजनगर बमीठा थाना अंतर्गत ग्राम बसारी के पास दो अज्ञात बच्चो को ग्रामीणों ने 100 डायल के हवाले किया दरअसल मामला कल 5 बजे शाम का है जहां दो अज्ञात बच्चे बसारी के पास घूमते नजर आ रहे थे बच्चो को देख कर ग्रामीणों ने 100 डायल को कॉल किया

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    Sad boy and girl crying 

    तो 100 डायल बमीठा ने बच्चो को बमीठा थाना लेकर आ गए जहाँ बच्चो ने अपना नाम उमा उम्र 7 वर्ष ओर नरेंद्र उम्र 4 वर्ष बताया उमा ने बताता की हमारे घर के लोग बसारी रेलवे स्टेशन पर मजदूरी करते है उमा ने बताया कि मम्मी द्वारा मारे जाने पर वो दोनों घर से कल दुपहर 12 बजे करीब निकल आये थे बमीठा थाना पुलिस ने बच्चो के घर वालो को सूचना दी तो घर वाले बमीठा थाना आकर बच्चो की पहचान कराई तो बात सही निकली बमीठा पुलिस ने सुपुर्दगी नामा बना कर बच्चो को उनके परिजनों को सही सलामत सॉप दिया ।

  • एकतरफा प्रेम में युवक ने युवती को सरेराह दिनदहाड़े गोली मार दी

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    महासमुंद| महासमुंद जिला मुख्यालय से मात्र चार किलोमीटर दूर ग्राम बेलसोंडा में गुरूवार दोपहर एक युवक ने एक युवती की सरेराह दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद वह खुद थाने पहुंचकर कर आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस के अनुसार मामला एकतरफा प्रेम प्रसंग का बताया गया है|

    महासमुन्द पुलिस मौके पर पहुंच जांच में जुट गई है। पुलिस के अनुसार मामला एकतरफा प्रेम प्रसंग का बताया गया है|

    पुलिस के मुताबिक घटना की प्रत्यक्षदर्शी मृतिका की बहन है जो उसके साथ दवाई खरीदने मेडिकल स्टोर्स गई थी। घटना दोपहर करीब साढ़े 12 से 1 बजे के बीच की बताई जा रही है।

    मृतका की बहन हेमलता के मुताबिक वे और रुपा दवाई खरीदने के लिए मेडिकल स्टोर्स गई थी। वहां से वापस लौट रही थी तभी घर से करीब 100 मीटर दूर जगेश्वर देवांगन के घर के सामने उनके पीछे से एक बाइक सवार तीन युवक अचानक पहुंचे। जिसमें सवार एक युवक उनके नजदीक आया और रुपा की कनपटी के पास गोली चलाकर बाइक से ही फरार हो गया।

    गोली की आवाज सुनकर परिवार के साथ ही आसपास के लोग पहुंच गए और रुपा को घायल अवस्था में उपचार के लिए जिला अस्पताल ले गए। माना जा रहा है कि सिर पर गोली लगने से उनकी रास्ते में ही मौत हो गई होगी।

    घटना के बाद आरोपी ने थाने पहुंचकर आत्म समर्पण कर दिया|

    एएसपी श्रीमती मेघा टेम्भूरकर ने बताया कि मामले का मुख्य आरोपी नदीमोड़ घोड़ारी निवासी 22 साल के चंद्रशेखर परमार घटना को अंजाम देने के बाद थाने पहुंचकर सरेंडर कर दिया है। जबकि घटना के दो सहआरोपी भरत निषाद व एक अन्य फरार है|

    आरोपी ने बताया कि वह भरत निषाद की बाइक से घटना को अंजाम देने के लिए पहुंचा था। इसके लिए उसने दिल्ली और मेरठ के बीच कही से देशी कट्टा खरीदा था।

    जानकारी के मुताबिक मृतका रुपा बीएड की छात्रा थी| उनका गांव के ही सुंदरनगर भाठापारा में मकान है। उनकी माता जमुना धीवर पंच हैं।बहरहाल महासमुन्द पुलिस मामले में धारा 302 के तहत जुर्म दर्ज किया है| मामले की जाँच जारी है|

  • कृषि कानून भाजपा की राजनीतिक मौत का बिगुल – कैप्टन अमरिन्दर सिंह, भाजपा के राजनीतिक पतन का कारण बनेगा पंजाब

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    चंडीगढ़ । पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने भारतीय जनता पार्टी को घेरते हुए कहा कि किसानों के गुस्से का बुरी तरह से शिकार हुई भाजपा ने कांग्रेस के सर दोष मढऩे की कोशिश की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा को यह बात दीवार पर लिखी हुई पढ़ लेनी चाहिए कि पंजाब उसके पतन का कारण बनेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा को अपनी राजनैतिक गुमनामी में जाने की तैयारियाँ शुरू कर देनी चाहीए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा का अंत अब न सिफऱ् पंजाब में तय है, बल्कि केंद्र में भी अंत होना ही है, क्योंकि केंद्र के अत्याचारी राज का ख़ात्मा होने की कगार पर है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा, ‘‘लगभग 7 सालों में भाजपा ने हर हथियार इस्तेमाल कर मानवीय हकों के साथ-साथ देशवासियों के गौरव और इच्छाओं को भी बुरी तरह लताड़ा है, और अब लोगों की बारी आई है।’’

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि तथाकथित शहरी पार्टी राज्य के स्थानीय निकाय चुनाव के लिए आधी से अधिक सीटों के लिए चुनाव लडऩे के लिए उम्मीदवार ही नहीं ढूँढ सकती, उससे यह कल्पना की जा सकती है कि यदि इन्होंने पंजाब के ग्रामीण क्षेत्र में चुनाव लडऩे का फ़ैसला कर लिया तो इनका हश्र कैसा होगा। उन्होंने कहा, ‘‘जो कुछ आप सडक़ों पर देख रहे हो और जिसका दोष आप कांग्रेस के सिर मढ़ते हो, वास्तव में यह आपके किसान विरोधी अहंकारी रवैए के विरुद्ध किसानों में पैदा हुआ रोष है।’’ मुख्यमंत्री ने पंजाब भाजपा के उस दावे को भी रद्द किया कि आगामी नगर काउंसिल मतदान के लिए चुनाव मुहिम में विरोध करने वाले प्रदर्शनकारी किसान नहीं बल्कि कांग्रेसी वर्कर हैं।

    मुख्यमंत्री ने पंजाब की भाजपा लीडरशिप को पूछा, ‘‘क्या आप सचमुच यह सोचते हो कि पिछले कई महीनों से बिना किसी बात के किसानों के प्रति बदज़ुबानी करें और उनके लोकतांत्रिक और संवैधानिक हकों को मलियामेट करने के साथ आप बच सकते हो।’’ उन्होंने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि अब भी सत्ता के नशे में डूबी भाजपा सत्य का शीशा देखने से आनाकानी कर रही है और किसानों की चिंताओं के हल के लिए बुरी तरह नाकाम रहने से अपनी, कमज़ोरियों पर पर्दा डालने के लिए बेतुकी बहानेबाज़ी का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया में कोई भी राजनैतिक लीडरशिप अपने ही नागरिकों के हितों को नकार कर लम्बा समय टिकी नहीं रही और काले कृषि कानूनों के रूप में भाजपा ने अपनी होनी आप ही बनाई है।’’

    कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने चुटकी लेते हुए कहा ‘‘आप (बीजेपी), अपने सहयोगी और अकालियों जैसी पूर्व सहयोगी पार्टी के साथ मिलकर उन्होंने किसानों के मुँह में से निवाला छीनने की साजि़श रची, जो आपका पेट भरते हैं और अब आप चाहते हो कि यह किसान हार पहनाकर आपका स्वागत करें?’’ उन्होंने कहा कि स्वभाविक तौर पर किसान भाजपा से नाराज़ हैं और भाजपा नेताओं पर अपना गुस्सा निकालने के लिए हरेक मौका देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन नेताओं के दौरे के दौरान पुलिस की ज़्यादा तैनाती न की जाती तो हालात सचमुच घतरनाक हो सकते थे। उन्होंने कहा कि भाजपा के खि़लाफ़ किसानों की नाराजग़ी के मद्देनजऱ जब भी भाजपा के नेता चुनाव प्रचार के लिए जाते हैं तो पंजाब पुलिस द्वारा बड़ी संख्या में मुलाजि़म तैनात किये जाते हैं। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ख़ुद प्रबंधों की निगरानी कर रहे हैं।

    भाजपा द्वारा चुनाव प्रचार के लिए चुनावी हलकों में उनके नेताओं को जाने से रोकते समय पुलिस पर मूक दर्शक बने रहने के दोषों को रद्द करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की तरफ से ख़ुद पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने की शिकायत को देखते हुए यह बहुत हास्यप्रद है। किसी भी स्थिति में, अगर ऐसा होता तो भाजपा के मनोहर लाल खट्टर, जो हरियाणा सरकार और पुलिस को कंट्रोल करते हैं, को अपने मीटिंग वाले स्थान पर इस तरह के विरोध प्रदर्शन का सामना न करना पड़ता। उन्होंने कहा, ‘‘तथ्य यह है कि न सिफऱ् पंजाब पुलिस, बल्कि चुनाव आयोग (ई.सी.), जिस पर आप लगातार अपने मनघड़ंत और बेतुके इल्ज़ाम लगाते रहे हो, अपना काम सौहृदयता के साथ कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि भाजपा के झूठों और निराधार दोषों में उनकी निराशा साफ़ ज़ाहिर हो रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी गड़बड़ी के लिए ख़ुद को छोडक़र बाकियों को दोषी ठहराने की भाजपा की निराशा से यह संकेत मिलता है कि भाजपा न सिफऱ् यह मतदान, बल्कि 2022 की पंजाब विधानसभा की मतदान कितनी बुरी तरह से हारने वाली है। पार्टी लीडरशिप के यह दावे कि पार्टी विधानसभा चंनाव में हैरानीजनक कारगुज़ारी दिखाएगी पर व्यंग्य कसते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि ‘‘हाँ, 2022 में बड़ी हैरानीजनक बात होगी, जब पंजाब के राजनैतिक अखाड़े से भाजपा का बिस्तर गोल हो जाएगा।

  • कोविड वैक्सीन कौन से कैंसर रोगी ना लगाए, यहां पढ़ें

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    जयपुर। कोविड वैक्सीन लगने की शुरूआत हो चुकी है, लेकिन वैक्सीन लगवाने को लेकर लोगों के मन में अभी भी डर और भ्रम बना हुआ है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीजों में मन में इस वैैक्सीन को लेकर कई सवाल है। वहीं कैंसर रोग विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लड कैंसर सहित कुछ कैंसर रोगियों को कोविड वैक्सीन लगवाने के लिए विशेषज्ञ सावधानी रखनी होगी। भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ अजय बापना ने बताया कि कोविड वैक्सीन (कोविशिल्ड) की मौजूदा जानकारियों के अनुसार यह वैक्सीन कैंसर रोगियों के लिए सुरक्षित है।

    डॉ बापना ने बताया कि एनसीसीएन के वर्तमान दिशा-निर्देश के अनुसार जिन रोगियों का ब्लड कैंसर का उपचार चल रहा है, उन रोगियों के ब्लड काउंट अगर कम हो तो इस इंजेक्शन को ना लगवाए। ब्लड काउंट जब तक नॉर्मल स्थिति में होने के बाद ही वह वैक्सीन लगवा सकते है। जिन रोगियों में बोन मेरा ट्रांसप्लांट किया गया है वह रोगी ट्रांसप्लांट के तीन माह तक यह वैक्सीन नही लगावा सकते है। साथ ही जिन रोगियों की हाल ही में सर्जरी हुई है, वह दो से तीन सप्ताह के बाद रिकवरी होने पर ही यह वैक्सीन लगवा सकेंगे।

    कीमो के दौरान लग सकती हैं वैक्सीन

    सोलिड टयूमर से ग्रसित रोगी जैसे मुंह एवं गले, ओवरी का कैंसर, स्तन कैंसर के रोगी का अगर उपचार चल रहा है तो वह रोगी अपने दो कीमो साइकल के बीच में या कीमो थैरेपी की शुरूआत से कुछ दिन पहले इस वैक्सीन को लगवा सकते है। जिन रोगियों का उपचार सफलता पूर्वक पूर्ण हो चुका है एवं कैंसर सरवाइवर्स को वैक्सीन बगैर किसी डर के लगाया जा सकता है।

    रेडिएशन थैरेपी ले रहे रोगी सुरक्षित

    रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग की निदेशक डॉ निधि पाटनी ने बताया कि रेडिएशन थैरेपी ले रहे कैंसर रोगियों के लिए यह वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है। इस थैरेपी के दौरान भी कैंसर रोगियों को वैक्सीन लगाया जा सकता है।

    देश में तेजी से बढ रहे कैंसर रोगी

    बीएमसीएचआरसी के डॉ अरविन्द ठाकुरिया ने बताया कि देश में 2.5 मिलियन लोग कैंसर के साथ अपनी जिंदगी बिता रहे हैं। इसके साथ ही देश में हर साल 11 लाख 57 हजार 294 कैंसर रोगी सामने आ रहे हैं। वहीं 7 लाख 84 हजार 821 लोग इस रोग की वजह से अकाल मौत का शिकार हो रहे हैं। पुरूषों में मुंह, फेफडे और पेट के कैंसर तेजी से बढ रहे हैं, जबकि महिलाओं में स्तन और गर्भाशय के कैंसर सर्वाधिक सामने आ रहे हैं।
    डॉ. ठाकुरिया का कहना है जागरूकता की कमी के चलते आज भी कैंसर रोगी रोग की बढ़ी हुई अवस्था में चिकित्सक के पास पहुंचते है, जिसकी वजह से उपचार के दौरान रोगी के मन में हमेेशा यह भय रहता है कि वह पूरी तरह ठीक हो पाएगा भी या नहीं। चिंता और भय का रोगी के उपचार पर नकारात्मक प्रभाव पडता है।

  • कैबिनेट विस्तार से वीआईपी प्रमुख निराश, अमित शाह से मुलाकात करेंगे

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    पटना । बिहार में दूसरे कैबिनेट विस्तार में विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) को शामिल नहीं किया गया। इस वजह से पार्टी प्रमुख मुकेश साहनी खुश नहीं हैं और बुधवार शाम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर सकते हैं। सूत्रों ने यह जानकारी दी। साहनी के करीबी सूत्रों ने कहा कि वीआईपी प्रमुख अपनी पार्टी के लिए कम से कम एक और मंत्री पद की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंत्रिमंडल में 10 और भाजपा विधायकों, जेडी-यू के 5, पूर्व बसपा नेता जामा खान और एक निर्दलीय को शामिल किया।

    साहनी भी कथित तौर पर एक और मंत्री पद नहीं मिलने की स्थिति में अपने पोर्टफोलियो में ‘अपग्रेड’ की उम्मीद कर रहे थे। कहा जाता है कि साहनी की नजर लोक निर्माण विभाग पर थी। वर्तमान में उनके पास पशुपालन और मत्स्य पालन विभाग है।

    साहनी 2020 का विधानसभा चुनाव हार गए थे, लेकिन हाल ही में विधान परिषद सदस्य के रूप में चुने गए हैं।

    वीआईपी बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा है और एक और कार्यकाल के लिए नीतीश कुमार सरकार के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    विधानसभा चुनाव में, भाजपा ने 74 सीटों पर जीत हासिल की थी, जेडी-यू ने 43, हम ने 4 और वीआईपी ने भी 4 सीट हासिल की थी। पार्टी के पास बहुमत के लिए जरूरी 122 सीट से केवल तीन सीट ही ज्यादा है। अगर साहनी सरकार से बाहर जाने का फैसला करते हैं, तो एनडीए को मुश्किल हो सकती है।

  • शहर में जगह जगह लगाए गए सांसद के लापता होने के पोस्टर..जानिए क्या है पूरा मामला

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    इस अधिसूचना के मुताबिक, श्री लिंगराज मंदिर और श्री ब्रह्मेश्वर मंदिर के 100 मीटर के दायरे में किसी भी तरह की गतिविधियों पर रोक लगाई गई थी। पुलिस को इस बात का कोई सुराग नहीं लग सका है कि आखिर किसने दीवारों पर सांसद के ”लापता” होने के पोस्टर लगाए।

    इस बीच, सारंगी ने पलटवार करते हुए कहा, ”मैं दिल्ली में चल रहे बजट सत्र में हिस्सा ले रही हूं और मुझे खुशी है कि भुवनेश्वर मुझे याद कर रहा है। मैं 15 फरवरी को वापस लौटूंगी और मसौदा अधिनियम के संबंध में आवश्यक कदम उठाऊंगी।”