मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष नाना एफ. पटोले ने गुरुवार को यहां अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा उप सभापति नरहरि एस. झिरवाल को सौंप दिया। उन्होंने करीब 14 महीने तक अपना कार्यभार संभाला। पार्टी सूत्रों के अनुसार, 58 वर्षीय पटोले ने यह कदम उन्हें महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नए अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना के बीच उठाया है।
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चंडीगढ़ होम सेक्रेटरी के लिए हरियाणा ने भेजा पैनल
[object Promise]चंडीगढ़ फाइनेंस सेक्रेटरी के लिए पंजाब सरकार ने जो पैनल भेजा था, उसमें से नाम चयन के बाद भी चंडीगढ़ को नया अधिकारी नहीं मिल पाया है। छह महीने से होम सेक्रेटरी अरुण कुमार गुप्ता ही फाइनेंस सेक्रेटरी का कार्यभार भी संभाल रहे हैं।
अब होम सेक्रेटरी अरुण कुमार गुप्ता का कार्यकाल मई महीने में समाप्त हो रहा है। उनके लिए हरियाणा सरकार ने तीन अधिकारियों का पैनल भेज दिया है। लेकिन जो पैनल भेजा है उसमें एक ऐसे अधिकारी का नाम भी शामिल है। जिनकी सर्विस ही डेढ़ साल की बची है। जबकि चंडीगढ़ में होम सेक्रेटरी डेपुटेशन पर तीन साल के लिए आते हैं।
अब चिंता इस बात की है कि कहीं फाइनेंस सेक्रेटरी की तरह होम सेक्रेटरी का नाम भी फाइनल न हो पाए। जिससे चंडीगढ़ को बिना फाइनेंस और होम सेक्रेटरी के ही काम रहना पड़े। होम सेक्रेटरी के लिए हरियाणा ने जिन अधिकारियों का नाम भेजा है उनमें 2000 बैच के नितिन कुमार यादव, 2000 बैच के ही पंकज अग्रवाल और 2003 बैच के विनय सिंह का नाम शामिल है। हालांकि विनय सिंह की रिटायरमेंट में डेढ़ साल का समय ही बचा है। इसलिए प्रशासन ने उनके नाम पर आपत्ति जताते हुए उनकी जगह दूसरे अधिकारी का नाम भेजने के लिए हरियाणा सरकार को लिखा है।
अब देखना यह है कि उनकी जगह दूसरा नाम समय से आता है या नहीं। पंजाब की तरफ हमेशा लेटलतीफी का खामियाजा चंडीगढ़ को उठाना पड़ता है। फाइनेंस सेक्रेटरी नहीं होने से होम सेक्रेटरी के पास इन दिनों 20 से अधिक विभाग का कार्यभार है। ऐसे में काम की गुणवत्ता कहीं पीछे छूट जाती है। चंडीगढ़ का बजट तक इस बार बिना फाइनेंस सेक्रेटरी के बना है।
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विपक्ष की तमाम कोशिशों के बाद भी बिहार में आंदोलन से नहीं जुडे किसान!
[object Promise]पटना। दिल्ली की सीमा पर जारी किसान आंदोलन के समर्थन में बिहार के विपक्षी दलों के नेता मानव श्रृंखला, ट्रैक्टर रैली, राजभवन मार्च, धरना और प्रदर्शन भले ही आयोजित कर चुके हैं, लेकिन इन आयोजनों से वो अब तक बिहार के किसानों को आंदेालन से जोड़ने में कामयाब नहीं हो सके हैं। बिहार के किसान आज भी आंदोलन से दूर हैं।
बिहार विधानसभा में विपक्षी दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव किसानों से आंदोलन में शामिल होने की अपील कर चुके हैं। यही नहीं दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन में शामिल संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी भी बिहार आकर यहां के किसानों को आंदोलन से जोड़ने का प्रयास कर चुके हैं, लेकिन अब तक यहां के किसान आंदोलन को लेकर मुखर नहीं हैं। कई क्षेत्र के किसान तो इस आंदेालन को जानते तक नहीं हैं।
अखिल भारतीय किसान महासभा के सचिव रामधार सिंह कहते हैं कि बिहार के किसानों मंे चेतना की कमी है। उन्होंने कहा कि आज भी यहां के किसान अपने उत्पाद औने-पौने दामों में बेच रहे हैं, लेकिन जागरूकता के अभाव में वे आंदोलन से नहीं जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि महासभा के लोग 10 फरवरी से 10 मार्च तक गांव-गांव जाकर पंचायत लगाएंगे और किसानों को जागृत करेंगे।
पिछले 30 जनवरी को राजद के आह्वान पर सभी विपक्षी दलों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार द्वारा हाल में बनाए गए तीन कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर राज्य में मानव श्रृंखला आयोजित की गई थी। इस मानव श्रृंखला में भी राजनीतिक दल के नेता तो सड़कों पर नजर आए थे, लेकिन किसान नहीं के बराबर सड़कों पर उतरे।
केंद्र सरकार के हाल में बनाए गए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन से जुड़े संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी भी बिहार की राजधानी पटना पहुंचे और यहां के किसानों से किसान आंदोलन में साथ देने की अपील की, इसके बावजूद भी यहां के किसान सड़कों पर नहीं उतरे।
बिहार में दाल उत्पादन के लिए चर्चित टाल क्षेत्र के किसान और टाल विकास समिति के संयोजक आंनद मुरारी कहते हैं कि यहां के किसान मुख्य रूप से पारंपरिक खेती करते हैं और कृषि कानूनों से उनको ज्यादा मतलब नहीं है।
इधर, पटना के समीप बिहटा के किसान राम प्रवेश राय बेबाक शब्दों में कहते हैं कि अभी कौन किसान होगा जो आंदोलन के लिए सडकों पर उतरेगा। उन्होंने कहा कि यहां के किसान खेतों में काम नहीं करेगें, तो साल भर खाएंगें क्या? उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि सबको अपनी राजनीति चमकानी है और चमका रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि बिहार में एपीएमसी एक्ट साल 2006 में ही समाप्त कर दिया गया है। इधर, सत्तापक्ष के नेता कहते रहे हैं कि बिहार के किसान राजग के साथ हैं। उन्हें मालूम है कि किसानों के साथ पहले क्या होता था? भाजपा के प्रवक्ता निखिल आनंद कहते हैं कि केंद्र सरकार किसानों की आय को दोगुना करने के लिए ²ढसंकल्पित है और लगातार इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बिहार का कृषि मॉडल की प्रशंसा चारों तरफ की जा रही है। आज यहां जलवायु परिवर्तन को देखते हुए मौसम अनुकूल खेती की जा रही है।
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झटका लगा भाजपा को, शिव सेना का दामन थामा कृष्णा हेगड़े ने
[object Promise]मुंबई। महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी को तगड़ा झटका देते हुए पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष व पूर्व विधायक कृष्णा हेगड़े सत्तारूढ़ शिव सेना में शामिल हो गए। जब उनसे सम्पर्क साधा तो उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के आवास पर बैठक के बाद इस खबर की पुष्टि की।
उन्होंने कहा कि मैंने शिव सेना ज्वाइन कर लिया है। मुख्यमंत्री ने मुझसे पार्टी के प्रसार के लिए विशेषकर विले पार्ले इलाके में और मुंबई की प्रगति के लिए मदद करने का आग्रह किया है।
54-वर्षीय हेगड़े विले पार्ले से कांग्रेस के विधायक रहे हैं। उन्होंने पार्टी में अर्न्तकलह का हवाला देते हुए 2017 में कांग्रेस छोड़ भाजपा के साथ नाता जोड़ लिया। भाजपा के साथ उनका चार साल का नाता रहा, लेकिन शुक्रवार को वह भाजपा को छोड़ शिव सेना में शामिल हो गए।
पिछले महीने वह उस वक्त सुर्खियों में आए जब उन्होंने एक महिला के खिलाफ जबरन वसूली के लिए हनी ट्रैप करने की कोशिश की शिकायत दर्ज कराई थी।
उस महिला ने महाराष्ट्र के मंत्री धनंजय मुंडे पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था, हालांकि बाद में उसने अपनी शिकायत वापस ले ली थी।
हेगड़े 2009 में विले पार्ले विधानसभा सीट से कांग्रेस की ओर से निर्वाचित हुए थे। लेकिन, 2014 के चुनाव में उन्हें भाजपा के पराग अल्वानी के हाथों पराजय मिली।
हेगड़े ने मुंबई के आईटी इंजीनियर भवेश परमार की रिहाई में अहम भूमिका निभाई थी। 2005 में वह अमृतसर गए थे और वहां से समझौता एक्सप्रेस पकड़कर पाकिस्तान चले गए थे। बिना पासपोर्ट, वीजा अथवा किसी भी वैध दस्तावेज के बगैर पड़ोसी देश पहुंचने के कारण उन्हें पकड़ लिया गया। उन्हें सात साल तक वहां की जेल में बिताना पड़ा। इसके बाद 2012 में उन्हें वापस भारत प्रत्यर्पित किया गया।
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CBI ने पंजाब पुलिस को सौंपी बेअदबी से जुड़े मामलों की फाइल
[object Promise]चंडीगढ़। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने आखिरकार पंजाब पुलिस को बेअदबी (पवित्र वस्तुओं का अनादर या चोरी) से संबंधित कागजात सौंप दिए हैं। इस बीच पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने गुरुवार को कहा, यह शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की मामले का खुलासा करने की प्रक्रिया को बाधित करने के प्रयास का पदार्फाश करता है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, धार्मिक बेअदबी से जुड़े मामलों की फाइल और दस्तावेज पंजाब पुलिस को सौंप दिए गए हैं। मामले से जुड़ी फाइल एवं दस्तावेज पंजाब ए़वं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा सीबीआई के लिए तय समयसीमा से कुछ घंटों पहले ही पंजाब पुलिस को सौंपे गए हैं।
जांच ब्यूरो के निदेशक ने 18 जनवरी 2021 को सीबीआई निदेशक को समस्त रिकॉर्ड राज्य पुलिस को बिना देरी सौंपने को कहा था। यह कदम सीबीआई से बेअदबी का मामला वापस लेने पर उठाया गया, जिसके परिणाम में दो नवंबर 2015 को सीबीआई को सौंपे गए मामले में एकत्र सबूत सहित तमाम दस्तावेज वापस मांगे गए।
मुख्यमंत्री ने इसे राज्य सरकार और उसके उस रुख की जीत करार दिया, जिसके तहत उसने आरोप लगाया था कि सीबीआई गत महीनों में पंजाब पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) की जांच को शिरोमणि अकाली दल की ओर से बाधित करने का प्रयास कर रही थी, जो सितंबर 2020 तक केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का हिस्सा थी।
सिंह ने अपने बयान में आरोप लगाते हुए कहा, अब स्पष्ट है कि केंद्रीय मंत्री के तौर पर हरसिमरत कौर केंद्रीय एजेंसी पर दबाव बना रही थीं कि वह मामले से जुड़ी फाइल नहीं सौंपकर एसआईटी की जांच को बाधित करे, क्योंकि वह जानती थीं कि अगर पुलिस की जांच निर्णायक मोड़ पर पहुंची तो उनकी पार्टी की इस मामले में संलिप्तता का खुलासा हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस मामले के किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, भले ही उनकी राजनीतिक संबद्धता या स्थिति कोई भी हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईटी का गठन इसलिए किया गया है, ताकि जांच सही तरीके से हो सके।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसी ने दो साल से अधिक समय तक लगातार मामले की फाइलों को राज्य को सौंपने से इनकार कर दिया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, चौंकाने वाली बात तो यह रही कि सीबीआई ने जनवरी 2019 में हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी केस डायरी सौंपने से इनकार कर दिया था।
यह मामला फरीदकोट जिले के बुर्ज जवाहरसिंहवाला में एक गुरुद्वारे से पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब की चोरी से जुड़ा है। बता दें कि हाईकोर्ट ने पिछले महीने सीबीआई को निर्देश दिया था कि वह वर्ष 2015 में गुरु ग्रंथ साहिब के विभिन्न धार्मिक चिह्नें के बेअदबी के मामले से जुड़ी फाइल एक महीने के भीतर पंजाब पुलिस को सौंपे। पंजाब सरकार ने सितंबर 2018 में विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें मामले की जांच राज्य पुलिस की एसआईटी से कराने की बात की गई थी।
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कई चरणों में हों बंगाल में चुनाव, ममता के करीबी अफसर हटाए जाएं : BJP
[object Promise]नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कहना है कि वर्तमान हालात में पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराना संभव नहीं है, ऐसे में निर्वाचन आयोग को कड़े कदम उठाने होंगे।
भाजपा नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को चुनाव आयोग से मिलकर पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के रवैये की शिकायत करते हुए ‘फ्री एंड फेयर इलेक्शन’ के लिए ज्ञापन दिया।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव, पश्चिम बंगाल के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, राज्यसभा सांसद स्वपन्न दास गुप्ता आदि प्रमुख नेताओं ने शुक्रवार को चुनाव आयोग के मुख्यालय पहुंचकर ममता बनर्जी सरकार पर कई तरह के आरोप लगाए।
इन सबने कहा कि विपक्ष को राज्य सरकार परेशान कर रही है और कार्यक्रमों के आयोजन की अनुमति देने में आनाकानी की जाती है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि बंगाल की तृणमूल सरकार के दबाव में सरकारी अफसर कार्य कर रहे हैं। निष्पक्ष चुनाव के लिए कई चरणों में इलेक्शन होना चाहिए। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव में काम करने वाले अफसरों को हटाए बगैर निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकता।
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राजस्थान में किसानों को किसान सम्मेलन के जरिए जोड़ेंगे पायलट
[object Promise]जयपुर| राजस्थान के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के मद्देनजर राज्य के किसानों को इकट्ठा करने के लिए किसान सम्मेलन कर रहे हैं। इसके तहत शुक्रवार को दौसा में पहला आयोजन किया गया। अब अगले किसान सम्मेलन 9 फरवरी को भरतपुर में और 17 फरवरी को चाकसू में होने हैं। यह सम्मेलन 2 महीने से विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए किए जा रहे हैं। पायलट ने कहा, “हम चाहते हैं कि भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार किसानों की शिकायतों को सुने और तीनों कृषि कानूनों को वापस ले। साथ ही मैं चाहता हूं कि राज्य में कांग्रेस मजबूत हो और प्रधानमंत्री तक किसानों का संदेश पहुंचाकर हम उनकी मदद करें।”
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि 2020 में हुए वाकये के बाद से पायलट साइडलाइन हैं और वे इस मुद्दे के जरिए राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही किसान सम्मेलन के जरिए वे अपने राजनीतिक समर्थन को लेकर पार्टी नेतृत्व को संदेश भी भेजना चाह रहे हैं।
बता दें कि राजस्थान में पार्टी मामलों के प्रभारी अजय माकन मंगलवार और बुधवार को जयपुर में थे लेकिन उन्होंने इस दौरान ना तो राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर कोई घोषणा की और ना ही राज्य में मंत्रिमंडल के विस्तार पर कुछ कहा। जाहिर है, इससे पायलट समर्थकों को निराशा हुई है। पायलट कैंप के ये नेता राज्य के नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह करने के बाद से ही विभाग पाने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इन नेताओं को उम्मीद है कि उन्हें मंत्रिमंडल में जगह दी जाएगी।
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शिमला, मनाली में भारी बर्फबारी के बीच उमड़े पर्यटक
[object Promise]शिमला । बहुत देरी के बाद, हिमाचल प्रदेश की राजधानी में मौसम की सबसे भारी बर्फबारी देखी गई, जिसने कई आंतरिक सड़क संपर्क और बिजली और पानी की आपूर्ति को रोक दिया, लेकिन पर्यटकों को शुक्रवार को एक-दूसरे पर बर्फ के गोले फेंककर मौज-मस्ती करते देखा गया। यही नजारा मनाली में भी देखने को मिला। मौसम विभाग के एक अधिकारी ने यहां आईएएनएस को बताया, “कुफरी और नारकंडा जैसे आस-पास के इलाकों में पिछले 24 घंटों में भारी बर्फबारी हुई।”
गुरुवार को बर्फबारी की खबर फैलते ही शिमला में पर्यटकों का हुजूम उमड़ पड़ा।
दिल्ली से आईं एक पर्यटक निकिता गुप्ता ने कहा, “हम खुशकिस्मत है कि हमें फरवरी में बर्फबारी देखने को मिली।” वह अपने दोस्तों के साथ शिमला में मौजूद थीं।
उनकी दोस्त रेणुका कौल ने कहा, “इससे पहले, हमने बर्फबारी देखने के लिए दिसंबर और जनवरी में कई बार इस हिल स्टेशन का दौरा किया था, लेकिन इस बार की तरह खुशकिस्मत नहीं थे। अब हम दो-तीन दिनों के लिए छुट्टियों को बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।”
शिमला में शून्य से एक डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान दर्ज किया गया, जबकि 57 सेंटीमीटर से अधिक बर्फबारी दर्ज की गई, वहीं कुफरी और मशोबरा में भी अच्छी-खासी बर्फबारी हुई।
मौसम विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि शिमला में इसी तरह बर्फीला परिदृश्य दो-तीन दिनों तक बना रहेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि शिमला जिले के जुब्बल, नारकंडा और खड़ापत्थर के कई इलाकों में मध्यम से भारी हिमपात हुआ।
अधिकारियों ने कहा कि किन्नौर, शिमला, चंबा, मंडी, कुल्लू और सिरमौर जिलों में ऊंचे पहाड़ी इलाकों की सड़कें भारी बर्फबारी से प्रभावित थीं और उन्हें फिर से खोलने का काम चल रहा था।
राज्य की राजधानी में, आंतरिक सड़कें यातायात के लिए बहुत फिसलन भरी थीं क्योंकि ये बर्फ से ढकी हुई थीं, यहां तक कि सड़कों पर चलना जोखिम भरा था।
हालांकि, शिमला नगर निगम ने कार्ट रोड और कुछ वीआईपी सड़कों पर बर्फ को साफ कर दिया है, लेकिन अधिकांश अन्य सड़कों को अभी तक साफ नहीं किया गया है।
शिमला में सड़कों और मार्गों की फिसलन भरी परिस्थितियों के कारण, कई पैदल यात्री, जिनमें से अधिकांश पर्यटक हैं, चोटिल हो रहे थे।
शिमला, कुफरी, कसौली और मनाली में पर्यटकों को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि अधिकांश लॉट फिसलन भरे हैं और अच्छी-खासी मात्रा में बर्फ से ढके हैं।
इस बीच, मनाली, जहां 5 सेंटीमीटर बर्फ देखी गई, में जीरो डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। कल्पा और लाहौल और स्पीति जिले के केलांग में बर्फबारी हुई।
इन शहरों में रात का तापमान क्रमश: शून्य से 4.3 डिग्री और शून्य से 7.2 डिग्री सेल्सियस नीचे देखा गया।
मौसम कार्यालय ने शनिवार से शुष्क मौसम होने की भविष्यवाणी की है।
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अमरिंदर ने किया खारिज, पंजाब में मोंटेक कमेटी ने की कांट्रैक्ट फार्मिग को बढ़ावा देने की सिफारिश
[object Promise]चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने पिछले साल अप्रैल में राज्य की आíथक स्थिति को पटरी पर लाने के लिए विशेषज्ञ कमेटी बनाई थी। कैप्टन ने योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया को इस कमेटी अध्यक्ष बनाया था। कमेटी ने कृषि संबंधी सिफारिशें कीं। कमेटी ने पंजाब में कांट्रैक्ट फार्मिग को बढ़ावा देने की सिफारिश की है। इन सिफारिशों को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि इन सिफारिशों और संसदीय कमेटी की सिफारिशों में कोई अंतर नहीं है।
सीएम ने कहा, कमेटी का काम सिफारिशें देना, मानना या न मानना सरकार का फैसला
इस कमेटी में देश के कई प्रसिद्ध अर्थशास्त्री शामिल हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘कृषि सेक्टर को लेकर मोंटेक सिंह आहलूवालिया कमेटी की सिफारिशों को खारिज करके मैंने अपनी सरकार का स्टैंड स्पष्ट कर दिया है। ऐसी कोई भी सिफारिश जो किसानों के हित में नहीं है, उसे पंजाब में लागू नहीं किया जाएगा।’
कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि कमेटी का काम अपनी सिफारिशें देना है, लेकिन यह मेरी सरकार की जिम्मेदारी है कि इन्हें स्वीकार किया जाए या नहीं। मैं जमीनी हकीकत जानता हूं और यह भी जानता हूं कि किसानों के लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा। मैं उनके हितों के साथ कभी समझौता नहीं कर सकता।’
कैप्टन अमरिंदर ने आगे कहा, ‘कमेटी की वास्तविक रिपोर्ट आने में अभी वक्त लगेगा। कृषि ही एकमात्र ऐसा सेक्टर नहीं है, जिसमें कोविड के बाद सुधार की जरूरत है। संसदीय रिपोर्ट में से ही कुछ सिफारिशों लेने से कमेटी का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।’
कमेटी ने एपीएमसी की ज्यादा लाइसेंस फीस पर उठाया था सवाल
कमेटी ने पिछले साल जुलाई में सौंपी 80 पन्नों की रिपोर्ट में कहा था कि पंजाब की कृषि उपज विपणन समितियां (एपीएमसी) ‘सीमित’ हैं और इनमें लाइसेंस शुल्क भी ज्यादा है। इसलिए कृषि विपणन को इससे आगे ले जाने की जरूरत है। इस रिपोर्ट ने किसानों को मुफ्त बिजली देने के सरकार के कानून का भी विरोध किया है। साथ ही कांट्रैक्ट फार्मिग को बढ़ावा देने और निजी कंपनियों को कृषि में एक बड़ी हिस्सेदारी देने की अनुमति की भी सिफारिश की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले चार दशकों में कैसे कृषि क्षेत्र में अग्रणी रहे पंजाब की कृषि विकास दर आधी हो गई है।
क्या है कमेटी का काम
यह कमेटी पंजाब की आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने के लिए पंजाब सरकार को तीन चरणों में अपनी सिफारिशें देगी। कमेटी पहले साल में उठाए जाने वाले कदम, मध्यम अवधि एक्शन प्लान और दीर्घ अवधि वाली नीतियों पर अपनी रिपोर्ट देगी।
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19 फीसदी अभिवावक ही ऑनलाइन क्लास को मानते हैं जबकि 67 फीसदी अप्रैल से स्कूल खोलने के पक्ष में हैं
[object Promise]नई दिल्ली। कोरोना काल से बंद शिक्षण संस्थानों को खोलने को लेकर छिड़ी चर्चा के बाद कुछ राज्यों में स्कूल खोलने के आदेश दे दिए गए हैं। कुछ अभिभावक अगले दो महीने में इस फैसले को लागू करने के पक्ष में हैं, तो कुछ ऐसे हैं जो सावधानी बरतते हुए इसके लिए जून या जुलाई का समय बेहतर मानते हैं। यह जानकारी लोकल सर्कल्स द्वारा किए गए एक सर्वे में सामने आई है। इसके मुताबिक, सिर्फ 19 फीसद अभिभावक ही ऑनलाइन क्लास को बेहतर मानते हैं, शेष को परंपरागत शिक्षण तरीकों पर ही भरोसा है। 24 राज्यों में हुए इस सर्वे के अनुसार ऑनलाइन शिक्षा को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में काफी बाधाएं सामने आई हैं। आइए जानते हैं इस सर्वे में क्या बातें सामने आई हैं? ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर लोगों का अनुभव कैसा रहा?
32 फीसद को जुलाई का इंतजार
बीते साल 24 मार्च से लगे देशव्यापी लॉकडाउन के बाद से बच्चे ऑनलाइन क्लास के जरिए ही पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूलों को खोलने को लेकर तरह-तरह की चर्चा है, लेकिन ज्यादातर अभिभावक चाहते हैं कि अप्रैल से स्कूल खोल दिए जाएं। लोकल सर्कल्स द्वारा 24 राज्यों के 294 जिलों में किए सर्वे में सामने आया है कि 67 फीसद अभिभावक अगले दो महीनों में स्कूल खोलने के पक्ष में हैं जबकि 32 फीसद इस कदम को जून या जुलाई में उठाने के पक्षधर हैं।
79 फीसद को परंपरागत शिक्षण पसंद
सर्वे के मुताबिक,ऑनलाइन शिक्षा को लेकर तमाम बाधाएं सामने आईं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट संबंधी समस्याएं थीं, तो कुछ स्कूलों में नियमित वीडियो क्लास कराई ही नहीं जा सकी। कहीं ऑडियो से काम चलाया गया तो कई बार बच्चों ने क्लास का समय दोस्तों के साथ चैटिंग में बिताया। इसी के चलते सिर्फ 19 फीसद अभिभावकों ने ही ऑनलाइन क्लास को बेहतर बताया है, जबकि बाकी का विश्वास परंपरागत तरीकों पर रहा।