Category: state-news

  • सात हजार से अधिक गंगासागर तीर्थयात्रियों का कोरोना काल में नि:शुल्क इलाज किया

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    कोलकाता। मानव सेवा को वे परम धर्म मानते हैं और इस ध्येय के साथ हर साल कोलकाता के आउट्राम घाट पर आकर ठहरने वाले गंगासागर तीर्थयात्रियों की सेवा में पूरे समर्पण भाव से जुटे रहते हैं। संयुक्त नेपाली केंद्रीय सेवा संघ के पदाधिकारियों से लेकर सदस्य-सदस्याओं तक की सेवा भावना वाकई प्रशंसनीय है। इस बार कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए जहां कई संस्थाओं ने अपने सेवा शिविर नहीं लगाए, वहीं संयुक्त नेपाली केंद्रीय सेवा संघ अपना दायित्व नहीं भूला और गंगासागर जाने वाले तीर्थयात्रियों की सेवा में तन-मन-धन से लगा रहा।

    संस्था के अध्यक्ष गुंज दास श्रेष्ठ ने बताया-‘हमारे निःशुल्क चिकित्सा शिविर का यह 32वां साल था, जो 10 से 16 जनवरी तक चला। इस दौरान हमने सात हजार से अधिक तीर्थयात्रियों का इलाज किया। हमारी दो डॉक्टरों और चार नर्स की टीम थी। इसके साथ ही हमने गंभीर हालत वाले मरीजों को अस्पताल पहुंचाने कै लिए दो एंबुलेंस की भी व्यवस्था की थी। हमारे चिकित्सा शिविर में आठ बेड की व्यवस्था थी।’

    उन्होंने आगे कहा-‘कोरोना महामारी को देखते हुए हमने पूरी व्यवस्था के साथ चिकित्सा शिविर लगाया था और इसे लेकर सरकार की तरफ से जारी समस्त दिशानिर्देशों का अक्षरशः पालन किया। हमने आउट्राम घाट में आकर ठहरे तीर्थयात्रियों में मास्क और सैनिटाइजर भी बांटे। हमारे चिकित्सा शिविर को नियमित रूप से सैनिटाइज भी किया जाता था।’ कोलकाता में नेपाल के महा वाणिज्यदूत ईश्वर राज पौड़ेल ने चिकित्सा शिविर का उद्घाटन किया था।

    उद्घाटन समारोह में कर्नल महेश सिंह गुरुंग विशेष अतिथि के तौर पर उपस्थित थे। चिकित्सा शिविर के सफल आयोजन में संस्था के महासचिव राम प्रसाद उपाध्याय, प्रधान सलाहकार नरविक्रम थापा, आयोजन समिति के अध्यक्ष खिमराज बराल, सचिव राम बहादुर कार्की, संयुक्त कोषाध्यक्ष हित बहादुर खड़का व चंद्र बहादुर श्रेष्ठ के अलावा सदस्यगण केशव अधिकारी छेत्री, बाबूराम शर्मा, बद्री विक्रम थापा, नेत्र बहादुर छेत्री, डंबर बहादुर श्रेष्ठ, राजू प्रधान, माइला राई, चूड़ामणि महत, मोहन सिंह, राजू पोखरैल, धन बहादुर भूसाल व जगत प्रसाद श्रेष्ठ की अहम भूमिका रही। महिला सदस्याओं में गंगा बुद्धा, रमा शर्मा पौड़ेल, रमिता कार्की, गीता शर्मा, रीता शर्मा, पद्मा गुरुंग, गीता श्रेष्ठ और संतोषी सिंह का उल्लेखनीय योगदान रहा।

     

  • प्रदर्शन के चलते कर्मचारियों की तनख्वाह पर असर, पेट्रोल पंप ठप

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    सिंघु बॉर्डर। केंद्र सरकार द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों पर पिछले 52 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का धरना जारी है। लेकिन अब दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर स्थित कई पेट्रोल पंप को इस आंदोलन की मार झेलनी पड़ रही है। सिंघु बॉर्डर पर बीते साल 26 नवंबर से बॉर्डर के आसपास के पेट्रोल पंप बंद हैं जिसके कारण पंपों को हर दिन लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है। साथ ही पंप पर कार्यरत कर्मचारियों की तनख्वाह पर भी इसका असर हो रहा है।

    सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन के चलते मार्ग को बंद कर दिया गया है। गाड़ियों के आवागमन पर पूरी तरह रोक लग चुकी है। लोगों को अपने गंतव्यों तक जाने के लिए दूसरे रास्तों का प्रयोग करना पड़ रहा है। आंदोलन के चलते पुलिस विभाग द्वारा मार्गों को डाइवर्ट कर दिया है।

    मार्गों पर गाड़ियों के न चलने से पेट्रोल पंप खाली पड़े हैं। पेट्रोल पंप के स्टाफ द्वारा जानकारी दी गई कि, फिलहाल पंप बिल्कुल बंद है, 26 नवंबर से ही पंप को बंद कर दिया गया। गाड़ियां आ नहीं पा रही। पंप कर्मचारी इस आंदोलन के जल्द खत्म होने की उम्मीद में बैठे हैं।

    दरअसल पेट्रोल पंप बंद होने के कारण कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ने लगा है। कुछ पेट्रोल पंप पर पिछले महीने की आधी ही सैलरी दी जा सकी है। यदि बातचीत से मामला जल्द नहीं सुलझा तो ऐसी स्थिति में और भी पेट्रोल पंपों को इस तरह की कठिनाईयों का सामना करना पड़ सकता है।

    हालांकि सरकार और किसानों के बीच में 9 दौर की बातचीत के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल सका है।

    सिंघु बॉर्डर स्थित ओम सर्विस स्टेशन पेट्रोल पंप के मैनेजर राजेन्द्र सिंह ने आईएएनएस को बताया, 52 दिनों में अब तक करीब 40 लाख रुपए का नुकसान हो चुका है। भविष्य में जब तक ये रास्ता नहीं खुला तो हमारे सामने चुनोतियां ही चुनोतियां हैं।

    हमारे इस पंप पर करीब 35 कर्मचारी है, इनकी सैलरी पर भी असर पड़ने लगा है। अभी तो तनख्वाह दे दी है यदि ऐसा ही रहा तो आगे तनख्वाह इन्हें मिलेगी या नहीं मिलेगी कह नहीं सकते।

    उन्होंने आगे बताया, हमारे पंप पर अभी 70 हजार लीटर डीजल का स्टॉक है और 30 हजार लीटर पेट्रोल का स्टॉक है।

    बॉर्डर स्थित हर एक पंप पर करीब पेट्रोल 6 हजार लीटर, डीजल 12 हजार लीटर और 9 हजार किलो सीएनजी हर दिन गाड़ियों में डलती थी, जो कि अब शून्य हो चुकी है।

    भारत सर्विस स्टेशन के सुपरवाइजर राम प्रसाद ने बताया, 26 नवंबर से अब तक एक लीटर तेल नहीं बिका है। गाडियों को नहीं आने देंगे तो तेल बिकेगा कहां से? जब तेल नहीं बिकेगा तो मालिक तनख्वाह कहां से देंगे?

    44 कर्मचारी फिलहाल पंप पर काम कर रहें हैं। सभी इसी उम्मीद में है कि जल्द कोई रास्ता निकले और पंप फिर से शुरू हो जाए।

    सिंघु बॉर्डर पर एक साथ 6 पेट्रोल पंप मौजूद हैं, जो कि पूरी तरह से बंद पड़े हैं। इन 52 दिन में सभी पेट्रोल पंप को मिलाकर करोड़ो रुपए का नुकसान हो चुका है।

    दूसरी ओर पंप पर काम कर रहे कर्मचारियों को भी मन मे डर सताने लगा है कि कहीं उनका मालिक उन्हें नौकरी से न निकाल दें। सभी कर्मचारी बस उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ये रास्ता खुले और जिंदगी फिर से पटरी पर लौट आए।

    दरअसल नये कृषि कानूनों को लेकर किसानों के मन में पैदा हुई आशंकाओं का समाधान तलाशने के लिए किसान यूनियनों के नेताओं के साथ शुक्रवार को करीब पांच घंटे मंथन के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल सका। अब 19 जनवरी को फिर अगले दौर की वार्ता होगी।

    कृषि और संबद्ध क्षेत्र में सुधार लाने के मकसद से केंद्र सरकार ने कोरोना काल में कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) कानून 2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार कानून 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून 2020 लाए।

    हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने बहरहाल इन कानूनों के अमल पर रोक लगा दी है और मसले के समाधान के लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी का गठन कर दिया।

  • 103 वर्षीय बुजुर्ग ने हिमाचल के पंचायत चुनाव में मतदान किया

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    शिमला। भीषण ठंड में भारत के सबसे बुजुर्ग मतदाता माने जा रहे श्याम शरण नेगी (103) ने हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनावों के पहले चरण में कल्पा में रविवार को मतदान किया। उन्होंने 1951-52 के आम चुनाव में भी भाग लिया था। राज्य की राजधानी से लगभग 275 किलोमीटर दूर कल्पा में वोट डालने के बाद नेगी ने कहा, “मैंने कभी भी वोट देने का मौका नहीं छोड़ा और मैं इस चुनाव में वोट देने से खुश हूं।”

    उन्होंने युवा मतदाताओं से हमेशा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का अनुरोध किया।

    लोकतंत्र में कट्टर आस्था रखने वाले बुजुर्ग ने कभी भी किसी भी चुनाव में, चाहे वह लोकसभा हो, विधानसभा हो या पंचायत हो, अपना वोट डालने से नहीं चूके हैं।

    सेवानिवृत्त स्कूल शिक्षक नेगी साल 1951 में चुनाव ड्यूटी पर थे और उन्होंने चिनी निर्वाचन क्षेत्र में अपने मताधिकार का प्रयोग किया, बाद में क्षेत्र का नाम बदलकर किन्नौर रखा गया।

    उस समय देश में अन्य स्थानों से आगे पर्वतीय राज्य के बफीर्ले क्षेत्रों में मतदान होता था।

    उपायुक्त हेमराज बैरवा ने नेगी का उनके घर से 400 मीटर दूर स्थापित किए गए बर्फ से ढके मतदान केंद्र पर जोरदार स्वागत किया।

    बैरवा ने मीडिया से कहा, “नेगी को भारत का सबसे बुजुर्ग मतदाता माना जाता है। यह महत्वपूर्ण अवसर है कि वह वोट डालने के लिए बिना किसी सहायता के मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए अपने घर से पूरे रास्ते पैदल आए। वोट डालने के बाद, उन्होंने समझाया कि मतदान करना क्यों महत्वपूर्ण है।”

    उन्होंने कहा कि, स्थानीय अधिकारियों को उनसे मिलकर खुशी महसूस हुई।

    नेगी अपने पोते और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मतदान केंद्र पर आए। उन्होंने मतदान के बाद अपने उंगली पर लगा इंक दिखाया।

    राज्य में त्रिस्तरीय पंचायती राज चुनाव के पहले चरण में 1,200 से अधिक पंचायतों में चुनाव हो रहे हैं।

    बाकी दो चरण के मतदान 19 और 21 जनवरी को होंगे।

  • बंगाल की जनता का तृणमूल सरकार ने केवल शोषण किया: भाजपा उपाध्यक्ष भारती घोष

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    कोलकाता। प्रदेश भाजपा की उपाध्यक्ष व पूर्व आइपीएस अधिकारी भारती घोष ने तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एवं उनके सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी पर शनिवार को करारा हमला बोला। घोष ने कहा कि तृणमूल सरकार ने केवल बंगाल की जनता का शोषण किया। ममता व अभिषेक का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि पीसी व भाइपो ने मिल कर बंगाल में कटमनी और सिंडिकेट राज को बढ़ावा दिया। पुलिस को दलाली के लिए मैदान में उतार दिया है।

    घोष पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना थाना अंतर्गत खेजुरडांगा इलाके में भाजपा की जनसभा को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। घोष ने तृणमूल पर निशाना साधते हुए कहा कि चंद्रकोना में तीन लाख लोग निवास करते हैं, लेकिन इलाके में केवल एक ही अस्पताल है, जिसकी स्थिति ठीक नहीं है। स्थानीय लोगों के बच्चों की शिक्षा के लिए एक ही कॉलेज है। चंद्रकोना मंदिरों के शहर के नाम से विख्यात है, लेकिन न तो तृणमूल कांग्रेस ने मंदिरों की मरम्मत कराई और न ही शिक्षा के लिए कॉलेज का निर्माण करवाया। अस्पताल में स्वास्थ्य परिसेवा को भी दुरुस्त नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि 10 वर्षों के शासन में ममता बनर्जी ने सिर्फ लोगों को बेवकूफ बनाया है।

    प्रशासनिक सभा करके तृणमूल कांग्रेस अपना खजाना भर रही : सुवेंदु

    वहीं, इस सभा में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी निशाना साधते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस और पार्टी सुप्रीमो सबसे ज्यादा सुविधावादी हैं। पहले बंगाल में अस्तित्व के लिए जूझने के दौरान भाजपा से हाथ मिलाया। रेल मंत्री और कोयला मंत्री बनीं। जैसे ही तृणमूल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में तब्दील हो गई, भाजपा पर निशान साध रही हैं। कृषकों का शोषण कर रही हैं। किसान सम्मान निधि योजना से बंगाल के लाखों गरीब किसानों को वंचित रखा गया है। आयुष्मान भारत योजना से भी लाखों लोगों को वंचित रखा गया है। केवल प्रशासनिक सभा करके तृणमूल कांग्रेस अपना खजाना भर रही है।

    उन्होंने कहा कि मैंने तृणमूल कांग्रेस को इसलिए छोड़ दिया कि तृणमूल अब राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि कंपनी में तब्दील हो गई है और मैं एक कार्यकर्ता हूं, किसी का कर्मचारी बन कर नहीं रह सकता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया केंद्र सरकार की योजनाओं का राज्य सरकार नाम बदल रही है।

     

  • बिहार ‘क्राइम कैपिटल ऑफ द कंट्री’ बनती जा रही है- तेजस्वी यादव

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    पटना। बिहार में कानून व्यवस्था को लेकर लगातार निशाना साध रहे विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने शनिवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक पत्र लिखकर कहा है कि कुछ दिनों में लूट चोरी, डकैती, रंगदारी, दुष्कर्म, हत्या और अपहरण की घटनाओं में बेतहाशा वृद्घि हुई है। तेजस्वी ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि, “निष्पक्षता और प्राथमिकता के आधार कानून व्यवस्था की स्थिति सुदृढ़ कर राज्यवासियों को भयमुक्त करें अन्यथा यहां की जनता आपको कभी माफ नहीं करेगी।”

    राजद नेता ने अपने पत्र में कहा है कि अपराध के लिए केंद्र के आंकड़े भी बिहार की दयनीय कानून व्यवस्था को प्रमाणित करते हैं।

    पत्र में आगे लिखा गया है, “दुर्भाग्यपूर्ण है कि आप जितनी उर्जा एवं समय दशकों पुराने इतिहास खोदने में जाया करते हैं, उसका अगर अंश मात्र भी तत्परता से विधि व्यवस्था को सुदृढ करने में निवेश करते तो कुछ सकारात्मक परिणाम दिखाई देता। आप अपने प्रशासन को जवाबदेह बनाने की बजाय सारा ठिकरा इतिहास पर फोड़ते हैं।”

    उन्होंने आगे लिखा, “बिहार की अवाम कह रही है कि आपके 15 वर्ष के कुशसन से कई ज्यादा सुनहरा अतीत था।”

    पत्र में यह आरोप भी लगाया गया है कि मुख्यमंत्री के अधीन ही गृह विभाग अपराध सृजन का मुख्य केंद्र है। सत्तासंपोषित और संरक्षित अपराधी आपके ताज की शोभा बढ़ा रहे हैं। प्रशासन में आम आदमी की क्या, जनप्रतिनिधियों की भी कहीं कोई सुनवाई नहीं होती।

    पत्र में तेजस्वी ने भरोसा देते हुए कहा है कि अपराधमुक्त बिहार बनाने के लिए विपक्ष सरकार को हर तरह से सकारात्मक सहयोग प्रदान करने के लिए तैयार है। उन्होंने आगे लिखा है कि भले ही आप जबरन मुख्यमंत्री बनाए गए हैं, लेकिन आप संवैधानिक जिम्मेदारियों से नहीं भाग सकते हैं।

  • मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने के बयान पर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत अडिग

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    हल्द्वानी: पूर्व सीएम व कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने के बयान पर अडिग हैं। शनिवार को दमुवाढूंगा में बैडमिंटन प्रतियोगिता का शुभारंभ करने पहुंचे हरीश रावत ने कहा कि पार्टी जिसका भी नाम तय करेगी, मैं उसके पीछे खड़ा हो जाऊंगा। यह निर्णय राज्य की जनता के साथ पार्टी के हित में भी होगा। वहीं, चेहरे पर पार्टी में एक राय नहीं होने को लेकर सवाल करने पर पूर्व सीएम ने कहा कि स्थानीय तौर पर बहस और चर्चा करना अच्छा है। कांग्रेसियों के इस मंथन से अमृत ही निकलेगा।

    बतौर विपक्ष पिछले चार साल में प्रदेश कांग्रेस व पूर्व सीएम में तालमेल नहीं बन सका। बड़े नेताओं के अलग-अलग बयानों ने कई बार कार्यकर्ताओं को असहज कर दिया। वहीं, अब ताजा मामला विधानसभा चुनाव से पूर्व सीएम का चेहरा तय करने का है। प्रदेश कांग्रेस जहां सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लडऩे की बात कर रही है, वहीं हरदा चेहरा तय करने की रणनीति आगे बढ़ा रहे हैं। बैडमिंटन प्रतियोगिता के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि घोषणा को लेकर पार्टी को संकोच नहीं करना चाहिए।

    बता दें कि 2022 विधानसभा चुनाव को लेकर हरदा ने पिछले दिनों पार्टी का चेहरा घोषित करने मांग सोशल मीडिया में उठाकर पार्टी में भूचाल ला दिया है। उनका कहना है कि पार्टी जिसे भी उम्मीदवार घोषित करेगी, उसके पीछे मैं पूरी तरह से खड़ा रहूंगा। हालांकि बागेश्वर में हरदा ने खुद के दोबारा मुख्यमंत्री बनने पर दो अधूरे कामों को पूरा करने की ख्वाहिश जताई है।

     

  • भोपाल में कर्फ्यू लगा तीन थाना क्षेत्रों में

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    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के तीन थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाया गया है। यह कर्फ्यू एक निर्माण कार्य के चलते अशंति फैलने की आशंका के चलते लगाया गया है। मौके पर भारी सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। जिलाधिकारी अविनाश लवानिया ने रविवार की सुबह एक आदेश जारी कर पुराना भोपाल के हनुमानगंज, टीला जमालपुरा और गौतम नगर थाना क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया है। इस आदेश में कहा गया है कि एक समुदाय द्वारा निर्माण कार्य प्रारंभ किया जा रहा है, जिसका स्थानीय लोगों और अन्य समुदाय द्वारा विरोध किया जाना संभावित है, जिससे शांति व्यवस्था, कानून व्यवस्था खतरा होने के साथ मानव जीवन एवं लोक संपत्ति को क्षति और संकट का भय बना हुआ है।

    बताया गया है कि मामला कबाड़खाना इलाके में एक जमीन पर बाउंड्री निर्माण से जुड़ा है। इस जमीन को कुछ लोगों ने वक्फ बोर्ड की बताकर आपत्ति दर्ज कराई थी। मामला न्यायालय में पहुंचा और दूसरे पक्ष में फैसला आया। उसी आधार पर निर्माण कार्य कराया जा रहा है।

    जिलाधिकारी द्वारा जारी किए गए कर्फ्यू आदेश में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति अत्यावश्यक कार्य मेडिकल इत्यादि को छोड़कर घर से बाहर नहीं निकलेंगे। सभी व्यवसायिक संस्थान दुकानें, उद्योग इत्यादि पूरी तरह बंद रहेंगे। केवल हॉस्पिटल मेडिकल दुकानें खुली रहेंगी। यह आदेश शासकीय सेवक पुलिसकर्मी सशस्त्र बल पर लागू नहीं होगा।यह आदेश शैक्षणिक या प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों पर लागू नहीं होगा। यह आदेश अगले निर्णय तक लागू रहेगा।

  • ऐतिहासिक गोरखा इंटर कॉलेज लड़ रहा वजूद की लड़ाई, अंग्रेज शासन के समय 1925 में डाली गई थी नींव

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    देहरादून। उत्तराखंड और देश को फुटबॉल और बॉक्सिंग के जाने-माने खिलाड़ी देने वाले ऐतहासिक गोरखा मिलिट्री इंटर कॉलेज आज अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहा है। सेना की जमीन पर बने स्कूल की लीज अवधि खत्म होने के बाद से स्कूल के लिए समस्याएं शुरू हो गई हैं। लीज अवधि न्यूनतम किराये में ही आगे बढ़ाने की कई कोशिशें स्कूल प्रशासन कर चुका है, लेकिन इसका कोई खास लाभ नहीं हुआ।

    गोरखा मिलिट्री इंटर कॉलेज की नींव अंग्रेज शासन के समय 1925 में डाली गई थी। तत्कालीन समय में कैंट क्षेत्र में तैनात सेना की टुकड़ी के बच्चों के लिए स्कूल बनाया गया था। सेना की जमीन पर बने स्कूल के लिए उस समय 90 साल की लीज तैयार कर न्यूनतम दरों पर किराया तय किया गया। समय-समय पर सेना के अफसरों ने ही स्कूल की कमान भी संभाली।

    कुछ समय तक यह व्यवस्था चलने के बाद स्कूल संचालन के लिए सोसायटी बनाई गई। वर्तमान समय में स्कूल सहायता प्राप्त अशासकीय विद्यालय की श्रेणी में है। स्कूल का संचालन स्कूल की चयनित सोसायटी करती है। सरकार के नियमानुसार हर तीन साल में सोसायटी के लिए चुनाव भी आयोजित होते हैं, लेकिन साल 2015 में 90 साल की लीज की अवधि खत्म होने के बाद से स्कूल को रक्षा संपदा अधिकारी, मेरठ की ओर से किराया बढ़ाने और स्कूल खाली करने तक के नोटिस आ चुके हैं।

    विद्यालय के प्रधानाचार्य ज्योति प्रसाद जगूड़ी ने बताया कि स्कूल में कक्षा छह से कक्षा 12 तक कक्षाएं संचालित हो रही हैं। यहांं सैनिकों, पूर्व सैनिकों, अल्पवेतन भोगी कर्मचारियों के बच्चों को नाममात्र के शिक्षण शुल्क पर शिक्षा दी जा रही है। कक्षा छह से नौ तक के विद्यार्थियों को निश्शुल्क शिक्षा और पाठ्य पुस्तकें भी प्रदान की जा रही हैं।

    मुख्यमंत्री भी कर चुके हैं पैरवी

    गोरखा मिलिट्री इंटर कॉलेज की पैरवी मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से कर चुके हैं। उन्होंने पिछले साल जुलाई महीने में रक्षा मंत्री को पत्र लिखकर गोरखा मिलिट्री इंटरमीडिएट कॉलेज के भवन और भूमि को न्यूनतम दरों पर पुन: लीज पर देने की अपील की थी।

    लीज रिन्यू नहीं होना है समस्या

    विद्यालय के प्रधानाचार्य ज्योति प्रसाद जगूड़ी ने बताया कि विद्यालय को रक्षा विभाग द्वारा लीज पर दी गई भूमि अवधि नहीं बढ़ सकी है। इस क्रम में रक्षा संपदा अधिकारी, मेरठ ने पट्टा सृजन के पश्चात् निर्धारित दरों पर भाड़ा जमा करने का उल्लेख करते हुए इसविद्यालय भूमि की लीज अवधि बढ़ाने पर निर्णय नहीं लिया है। विद्यालय भवन और भूमि को खाली करने के लिए विद्यालय प्रबंधन को नोटिस दे दिया गया है। विद्यालय प्रबंध समिति के पास आय के अत्यंत सीमित संसाधन हैं। इस कारण बढ़ी हुई दरों पर लीज की धनराशि का भुगतान करने में प्रबंध समिति असमर्थ है।

    फुटबॉल और बॉक्सिंग में कमाया नाम

    अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर श्याम थापा और अमर बहादुर गुरूंग ने इसी स्कूल से पढ़ाई की है। इसके अलावा एशियन गेम्स में भारत को बॉक्सिंग में पहला गोल्ड दिलाने वाले पदम बहादुर मल्ल और भारतीय सेना में पहले अफसर पद पर भर्ती होने वाले सैनिक का गौरव हासिल करने वाले शहीद मेजर दुर्गा मल्ल भी इसी स्कूल से पढ़े हैं। प्रधानाचार्य बताते हैं कि आज भी फुटबॉल और बाक्सिंग में राज्य का नाम रोशन करने वाले कई खिलाड़ी गोरखा मिलिट्री इंटर कॉलेज से ही हैं।

     

  • 17 साल की नाबालिग लड़की का 38 पुरुषों ने किया यौन शोषण…

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    केरल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है,जहां 17 साल की एक नाबालिग लड़की का एक या दो नहीं बल्कि कुल 38 पुरुषों ने यौन शोषण किया।पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि पिछले कुछ महीनों के दौरानन ने उसका यौन शोषण किया।
    पुलिस ने जानकारी दी कि महिला से 38 पुरुषों द्वारा यौन शोषण की बात तब सामने आई।जब निर्भया सेंटर में उसका काउंसिलिंग सेशन चल रहा था।

    साल 2016 में हुई थी यौन शोषण की पहली घटना

    जानकारी के मुताबिक, पीड़िता के साथ यौन शोषण की पहली घटना साल 2016 में हुई थी।तब वह महज 13 साल की थी,पीड़िता ने बताया कि इसके एक साल बाद ही फिर से उसे इसी तरह की यातना का सामना करना पड़ा।दूसरी घटना के बाद उसे बाल गृह भेजा गया और करीब एक साल पहले उसे अपनी मां और भाई के साथ रहने की इजाजत दी गई।

    काउंसिलिंग सेशन में सुनाई आपबीती

    सर्किल पुलिस इंस्पेक्टर मोहम्मद हनीफा ने बताया, ‘पीड़िता बाल गृह से निकलने के बाद कुछ समय तक लापता थी और पिछले दिसंबर में पलक्कड़ में उसके होने की जानकारी मिली,जहां से उसे निर्भया केंद्र लाया गया।पुलिस अधिकारी ने बताया कि काउंसिलिंग सेशन के दौरान पीड़िता ने निर्भया सेंटर में अपने साथ हुए यौन शोषण और छेड़छाड़ की घटनाओं की जानकारी अधिकारियों को दी।

    पुलिस ने 33 आरोपियों को गिरफ्तार किया

    अधिकारियों ने बताया,38 आरोपियों में से 33 आरोपियों के खिलाफ यौन शोषण सहित कई आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और उनकी गिरफ्तारी भी कर ली गई है।फिलहाल गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।मलाप्पुरम बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष शाजेश भास्कर ने कहा, ‘समिति ने एक साल पहले नाबालिग लड़की को बाहर भेजने से पहले सभी कानूनी और सुरक्षा कदमों को उठाया था।

  • Mamata Banerjee को पचास हजार वोटों से नहीं हराया तो राजनीति छोड़ दूंगा…: Suvendu Adhikari

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    पश्चिम बंगाल में सत्ता की लड़ाई दिलचस्प बनती जा रही है।तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थमने वाले शुवेंदु अधिकारी ने ऐलान किया है कि वो विधान सभा चुनाव में ममता बनर्जी को हराएंगे अन्यथा राजनीति छोड़ देंगे।अधिकारी ने यह ऐलान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उस घोषणा के बाद किया,जिसमें उन्होंने नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ने की बात कही थी।अधिकारी ने कहा कि वो ममता बनर्जी को हर हाल में हराएंगे और यदि इसमें सफल नहीं हो पाते तो राजनीति छोड़ देंगे,बता दें कि नंदीग्राम को अधिकारी का गढ़ माना जाता है।
    शुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें नंदीग्राम की याद सिर्फ चुनाव के समय आती है,उन्होंने आगे कहा, ‘मुख्यमंत्री 15 दिसंबर, 2015 को नंदीग्राम गईं थीं और उम्मीदवार के रूप में मेरे नाम की घोषणा की थी। मैं पूछना चाहता हूं कि नंदीग्राम के लोगों के लिए आपने क्या किया है? जो लोग पीड़ित थे, आपने उनके लिए क्या किया? कक्षा 8 की किताब में सिंगूर का उल्लेख है लेकिन नंदीग्राम की सामूहिक हत्या का कोई उल्लेख नहीं है।