Category: state-news

  • कोविड केयर सेंटरों को बंद करने पर कमलनाथ ने

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    भोपाल । मध्य प्रदेश में कोरोनावायरस के सामान्य लक्षण पाए जाने वाले मरीजों के उपचार के लिए स्थापित किए गए भोपाल के अलावा सभी कोविड केयर सेंटरों को स्वास्थ्य संचालनालय ने बंद कर दिया है। अब इस पर पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने सवाल उठाए हैं। राज्य की राजधानी के अलावा अन्य स्थानों पर स्थापित कोविड केयर सेंटरों को बंद करने का सरकार ने फैसला लिया है। इस फैसले पर पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा, शिवराज जी, मध्यप्रदेश में कोरोना संक्रमण का आंकड़ा ढ़ाई लाख के करीब पहुंच चुका है, अभी तक घोषित मौतों का आंकड़ा 3,641 पर पहुंच चुका है। प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले भी बढ़ रहे हैं और रोज मौतें भी हो रही हैं, ऐसे में कोविड केयर सेंटर को बंद करना बेहद ही अविवेकपूर्ण निर्णय है।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा, जब तक कोरोना संक्रमण खत्म नहीं हो जाता है तब तक प्रदेश में कोविड केयर सेंटर चालू ही रहना चाहिये। यह सही है कि शिवराज जी आप और भाजपा अपनी सुविधानुसार कोरोना को कभी मामूली सर्दी-खांसी और कभी डरोना व भयावह बताते आये हैं।

    राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा, जब आपको प्रदेश में उप चुनाव करवाना हो, अपनी पार्टी के कार्यक्रम, रैलियां, सभाएं, कार्यालय उद्घाटन करवाना हो, शराब की दुकानें खुलवाना हो, कोरोना वारियर्स को नौकरी से निकालना हो, कोविड केयर सेंटर बंद करना हो, तब कोरोना पूरी तरह से नियंत्रण में आ जाता है और जब जनहित के मुद्दों से बचना हो, विधानसभा का सत्र स्थगित करना हो, विपक्ष के कार्यक्रम रोकना हो, नगरीय निकाय के चुनाव को अभी नहीं करवाना हो, प्रदेश में धार्मिक आयोजन, शादियां या अन्य आयोजन रोकना हो, तो यही कोरोना डरोना व भयावह हो जाता है।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा, आप (शिवराज) कोरोना को अपनी सुविधानुसार परिभाषित करते हैं। आपका यह दोहरा चरित्र प्रदेश की जनता खुली आंखो से देख रही है।

    ज्ञात हो कि राज्य में लक्षण रहित या बहुत हल्के लक्षणों वाले कोविड-19 के मरीजों के ठहरने और उपचार के लिए स्कूलों, कॉलेजों एवं लोगों के निजी भवनों में कोविड केयर सेंटर स्थापित किए गये थे। इस तरह के केंद्र पूरे राज्य में संचालित रहे। इनमें से भोपाल को छोड़कर अन्य सभी केंद्रों को बंद करने का स्वास्थ्य संचालनालय ने फैसला लिया है।

  • केरल हाईकोर्ट ने जमानत रद्द की यूएपीए मामले में त्वाहा फैसल की

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    तिरुवनंतपुरम। केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार को एनआईए की विशेष अदालत द्वारा त्वाहा फैसल के लिए जमानत के आदेश को रद्द कर दिया। उसे साल 2019 में कथित माओवादी लिंक के कारण पंथीरनकावू यूएपीए मामले में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि उच्च न्यायालय ने एलन शुहैब को दी गई जमानत को रद्द नहीं किया, जिसे फैसल के साथ ही गिरफ्तार किया गया था।

    उच्च न्यायालय की खंडपीठ में जस्टिस ए. हरिप्रसाद और के. हरिपाल शामिल थे। उन्होंने 9 सितंबर, 2020 को एनआईए की विशेष अदालत द्वारा दी गई त्वाहा फैसल की जमानत रद्द कर दी।

    उच्च न्यायालय ने हालांकि इस मामले में सह-अभियुक्त एलन शुहैब की जमानत जारी रखने की अनुमति दी, जब तक कि मुकदमा पूरा नहीं हो जाता। फैसल पत्रकारिता का छात्र था, जबकि शुहैब कानून की पढ़ाई कर रहा था।

    अदालत ने शुहैब को एनआईए द्वारा दायर की गई उनकी उम्र, उनकी पिछली स्वास्थ्य स्थिति और विभिन्न स्तरों के आरोपों पर विचार करते हुए जमानत जारी रखने की अनुमति दी।

  • मध्यप्रदेश में अलग से थाने बनेंगे बिजली चोरी रोकने के लिए

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    भोपाल । मध्यप्रदेश में बिजली चोरी को रोकने के लिए विद्युत पुलिस थानों की स्थापना की कवायद तेज हो गई है। राज्य में अब बिजली चोरी रोकने के लिए भी अलग से पुलिस होगी। राज्य में बिजली चोरी रोकने के अरसे से प्रयास चल रहे हैं, बिजली कंपनियों ने इसके लिए प्लास्टिक या रबर के कवर वाले बिजली तार बिछाए। इसके साथ ही ट्रांसफार्मर या बिजली खंभों पर मीटर भी लगाए। इसके बावजूद भी बिजली चोरी की घटनाएं रुक नहीं रही है।

    विद्युत विभाग के सूत्रों का कहना है कि एक तरफ जहां बिजली चोरी होती है तो वहीं दूसरी ओर कार्रवाई करने वाले बिजली विभाग के अमले पर उपद्रवी लोग हमला बोल देते हैं और इन स्थितियों में बिजली विभाग के अमले को पुलिस महकमे का साथ नहीं मिलता, इसके चलते बिजली विभाग अपने सुरक्षा बल की जरूरत महसूस कर कर रहा है जो बिजली विभाग के लिए ही हो।

    राज्य में वर्तमान में तीन विद्युत वितरण कंपनियां कार्यरत हैं जिनके मुख्यालय भोपाल, इंदौर और जबलपुर में है। इन तीनों विद्युत वितरण कंपनियों को ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे ने अपने-अपने क्षेत्र में इन थानों की स्थापना के संबंध में परीक्षण करने तथा इसके लिए कितनी भूमि की जरूरत होगी इसका ब्यौरा तैयार करने को कहा है।

    मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुजरात, पंजाब और राजस्थान में बिजली चोरी को रोकने के लिए बनाए गए विद्युत पुलिस थानों की तर्ज पर ही राज्य में विद्युत पुलिस थानों की स्थापना पर जोर दिया था, इसका मकसद उपभोक्ताओं में बिजली चोरी की प्रवृत्ति को रोकना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राज्य के गृहमंत्री नरेात्तम मिश्रा का कहना है कि बिजली विभाग की ओर से यह प्रस्ताव आ रहा है कि बिजली विभाग की अलग से पुलिस हो, जिस तरह से बिजली विभाग के कर्मचारियों पर हमले हो जाते हैं, उनके सामने जो दिक्कतें आती हैं, इसके चलते कई जगह से प्रस्ताव आ रहे है, अभी विचाराधीन है।

  • मिग-21 हुआ राजस्थान में दुर्घटनाग्रस्त , पायलट सुरक्षित

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    नई दिल्ली । भारतीय वायुसेना का एक मिग-21 बाइसन विमान उड़ाने के तुरंत बाद राजस्थान के सूरतगढ़ एयर बेस पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने कहा कि पायलट सुरक्षित है और जांच शुरू कर दी गई है। घटना रात 8.15 बजे हुई।

    विमान के उड़ान संभालते ही इसमें तकनीकी गड़बड़ी हुई, जिसके बाद पायलट को बाहर निकाला गया। पायलट सुरक्षित उतरा और उसके बाद इमरजेंसी उपाय किए गए।

    यह साल की पहली घटना है।

    भारत ने 1961 में रूसी मिकोयान-गुरेविच डिजाइन ब्यूरो निर्मित मिग-21 को खरीदा था। हाल के दिनों में कई घातक घटनाओं के बाद भी भारतीय वायुसेना अभी भी यह विमान उड़ा रही है।

  • बिहार कांग्रेस में विधायकों के टूटने का खतरा, घमासान मचा

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    पटना। कांग्रेस पार्टी के हाईकमान द्वारा बिहार में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए पार्टी की गुटबंदी समाप्त हो, इसके लिए हर पहल की जा रही है, लेकिन कांग्रेस पांच कदम आगे बढ़ती है तो छह कदम पीछे खिसकती नजर आती है।

    पार्टी ने वरिष्ठ नेता और राजयसभा सांसद शक्ति सिंह गोहिल के अनुरोध को स्वीकार करते हुए उन्हें बिहार के प्रभारी से मुक्त करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री भक्त चरण दास को बिहार का प्रभारी बनाया है, लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस के नेता पार्टी के विधायकों के टूटने का दावा कर रहे हैं।

    कांग्रेस के पूर्व विधायक भरत सिंह ने कांग्रेस के विधायकों के टूटने का दावा कर बिहार के कांग्रेस की हकीकत बयां कर दी। कांग्रेस नेता भरत सिंह ने दावा किया है कि पार्टी में जल्द ही बड़ी टूट होने वाली है। पार्टी के आधे से ज्यादा विधायक कांग्रेस का साथ छोड़ सकते हैं। उन्होंने दावा किया है कि पार्टी के 11 विधायक जल्द ही पार्टी छोड़ देंगे।

    कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक भरत सिंह का कहना है कि इस बार कांग्रेस के टिकट से 19 विधायक जीते हैं लेकिन इनमें 11 विधायक ऐसे हैं जो भले ही कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते हों, लेकिन वो कांग्रेस के नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इन लोगों ने पैसे देकर टिकट खरीदे और विधायक बन गए।

    पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस महागठबंधन में शामिल होकर राज्य के 243 विधानसभा सीटों में से 70 सीटों पर चुनाव लड़ी और उसके मात्र 19 प्रत्याशी ही विजयी हो सके। चुनाव के बाद महागठबंधन में शामिल दल ने भी कांग्रेस के कारण महागठबंधन की सरकार नहीं बनने की बात कही थी।

    भाकपा माले के नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि महागठबंधन में सीटों का बंटवारा यथार्थवादी होना चाहिए था। कांग्रेस की सफलता दर काफी कम रही। उन्होंने तो यहां तक कहा कि कांग्रेस के कारण ही बिहार में महागठबंधन की सरकार नहीं बन सकी।

    चुनाव के दौरान ही कांग्रेस में गुटबंदी दिखाई देने लगी थी। चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस में गुटबंदी धरातल पर पहुंच गई जब कांग्रेस के कार्यकर्ता कार्यालय तक पहुंच कर प्रदर्शन करने लगे। कई नेताओं ने तो खुले तौर पर राज्य के वरिष्ठ नेताओं पर पैसे लेकर टिकट देने का भी आरोप लगाया है।

    कांग्रेस के नेता भरत सिंह कहते हैं राजग अपने संख्या बल को बढाना चाहता है, ऐसे में वह कांग्रेस के विधायकों के संपर्क में हैं। हालांकि कांग्रेस के कई नेता इसे नकार रहे हैं। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अखिलेश सिंह कहते हैं कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने कहा ऐसे लोगों के बयान का कोई मतलब ही नहीं है।

    उन्होंने दूसरी ओर दावा करते हुए कहा कि अगर बिहार में कोई टूट हो रहा है तो यह है राजग। इधर, युवक कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ललन कुमार भी कहते हैं कि पार्टी के सभी 19 विधायक पार्टी के साथ हैं। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि पार्टी एकजुट है और किसान आंदोलन को लेकर लगातार किसानों के समर्थन में खड़ी है।

    गौरतलब है कि पिछले दिनों कांग्रेस के चेनारी क्षेत्र के विधायक मुरारी गौतम जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह से मिले थे। इसकी सूचना मीडिया में आने के बाद दोनों नेताओं ने क्षेत्र की समस्या को लेकर मुलाकात करने का दावा किया था।

    इधर, कांग्रेस के एक नेता ने नाम नहीं प्रकाशित होने की शर्त पर कहते हैं कि बिहार में प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा को हटाए बिना पार्टी को यहां मजबूत नहीं किया जा सकता है। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि चुनाव भी हो गए लेकिन अब तक प्रदेश कमिटि का गठन तक नहीं हो पाया है। कांग्रेस के सूत्रों का भी कहना है कि पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी फिलहाल जदयू में हैं और सरकार में मंत्री हैं। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के कई विधायकों के साथ इनके अच्छे रिश्ते हैं।

  • असंतोष के स्वर मुखर आखिर क्यों मध्यप्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार पर

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    भोपाल। मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में दो मंत्रियों को शपथ दिलाए जाने के बाद भाजपा में असंतोष के स्वर मुखर होने लगे है। पूर्व मंत्री और जबलपुर से विधायक अजय विश्नोई ने महाकौशल और विंध्य की उपेक्षा को लेकर तंज कसा है और कहा है कि यह दोनों इलाके उड़ नहीं सकते, सिर्फ फड़फड़ा सकते हैं। इस पर कांग्रेस ने भी चुटकी ली है। मंत्रिमंडल का तीसरा विस्तार रविवार को हुआ और दो विधायकों — गोविंद सिंह राजपूत व तुलसी सिलावट को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। कई और दावेदार थे मगर वे जगह नहीं हासिल कर पाए। इसी को लेकर पूर्व मंत्री विश्नेाई ने ट्वीट करते हुए कहा, महाकौशल अब उड़ नहीं सकता, फड़फड़ा सकता है! मध्यप्रदेश में सरकार का पूर्ण विस्तार हो गया है। ग्वालियर, चंबल, भोपाल, मालवा क्षेत्र का हर दूसरा भाजपा विधायक मंत्री है। सागर, शहडोल संभाग का हर तीसरा भाजपा विधायक मंत्री है।

    उन्होंने इस ट्वीट में महाकौशल और विंध्य क्षेत्र की उपेक्षा की ओर इशारा करते हुए आगे लिखा है, महाकौशल के 13 भाजपा विधायकों में से एक को तथा रीवा संभाग में 18 भाजपा विधायकों में से एक को राज्य मंत्री बनने का सौभाग्य मिला है। महाकौशल और विंध्य अब फड़फड़ा सकते हैं उड़ नहीं सकते। महाकौशल और विंध्य को अब खुश रहना होगा। खुशामद करते रहना होगा। बधाई।

    पूर्व मंत्री विश्नोई के इन ट्वीट पर कांग्रेस के पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा ने भी चुटकी लेते हुए रिट्वीट किया और लिखा है, उसूलों पे जहां आंच आये, टकराना जरूरी है, जो जिन्दा हों तो फिर जिन्दा नजर आना जरूरी है। नई उम्रों की खुदमुख्तारियों को कौन समझाये, कहां से बच के चलना है कहां जाना जरूरी है।

    ज्ञात हो कि राज्य में पिछले साल मार्च महीने में भाजपा की सत्ता में वापसी हुई थी, तब मुख्यमंत्री के तौर पर चौथी बार शिवराज सिंह चैहान ने शपथ ली थी। उसके बाद अप्रैल में पांच मंत्रियों के शपथ लेने पर पहला विस्तार हुआ था, फिर दूसरा विस्तार जुलाई में हुआ था और 28 मंत्रियों ने शपथ ली थी। हाल ही में हुए विधानसभा के उप-चुनाव में तीन मंत्री को हार मिली और उन्हें पद छोड़ना पड़ा, वहीं तुलसी राम सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत बगैर विधायक रहते छह माह तक मंत्री रहे और उसके बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अब इन दोनों को मंत्री पद की शपथ दिलाकर शिवराज ने अपने मंत्रिमंडल का तीसरा विस्तार किया है।

  • बलबीर सिद्धू ने कहा- बिना किसी भेदभाव के केंद्र सरकार सभी के लिए मुफ्त कोविड वैक्सीन उपलब्ध करवाए

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    चंडीगढ़ । मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के दूरदर्शी नेतृत्व में पंजाब राज्य ने कोविड-19 महामारी के प्रतिदिन के प्रबंधन के संबंध में तुरंत निर्णय लेने में बहुत ही सक्रियता दिखाई है और केंद्र सरकार को चाहिए कि यह पंजाब में निर्धारित समय में कोरोना वैक्सीन मुफ्त प्रदान करवाए। यह बात स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने यहां चंडीगढ़ के पंजाब भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही।

    बलबीर सिद्धू ने कहा कि महामारी को नियंत्रित करने के लिए समय-समय पर कड़े कदम उठाए गए। अब, मोदी सरकार कोरोना वैक्सीन की आपूर्ति करने के अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हट सकती। उन्होंने कहा कि राज्य में अब तक 5364 कोविड से संबंधित दुर्भाग्यपूर्ण मौतें हुई हैं, जो प्रति मिलियन लगभग 178 मौतें हैं। दिल्ली में कुल 10,577 कोविड-19 से संबंधित मौतें हुईं हैं और इसकी प्रति मिलियन दर 528 मौतें हैं जो काफी अधिक है। हमारी स्थिति दूसरे राज्य की तुलना में काफी बेहतर है। पंजाब में स्वस्थ होने की दर 95 प्रतिशत है और सक्रिय मामलों में दिन-प्रतिदिन गिरावट आ रही है।
    राज्य में टीकाकरण की तैयारियों के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब टीकाकरण अभियान के लिए पूरी तरह से तैयार है और राज्य में एक दिन में 4 लाख लोगों को टीका लगाने की क्षमता है। इसके बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि राज्य ने अपने कोल्ड चेन सेंटरों में 1 करोड़ टीकों की मजबूत भंडारण क्षमता स्थापित की है। उन्होंने कहा कि पंजाब ने बच्चों के नियमित टीकाकरण के 95 प्रतिशत से अधिक लक्ष्य को भी हासिल किया है जो देश में सबसे अधिक है।

    स्वास्थ्य विभाग में की गई प्रमुख भर्ती पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री पंजाब के घर-घर रोजगार योजना के तहत पिछले 3 वर्षों में कुल 10,049 भर्तियाँ की गई हैं। उन्होंने कहा कि 649 विशेषज्ञ, 875 चिकित्सा अधिकारी, 960 स्टाफ नर्स और 2250 अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ को नियमित आधार पर भर्ती किया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 833 विशेषज्ञों और चिकित्सा अधिकारियों और 4212 पैरा मेडिकल, 205 मंत्रालयिक कर्मचारियों और 14 वर्ग चार की भर्ती की गई है। इसके अलावा स्टेट हैल्थ एजेंसी के तहत 51 स्टाफ सदस्यों की भर्ती की गई है।
    बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा कि भारत सरकार की मूल योजना आयुष्मान भारत के दायरे को एसईसीसी डेटा-2011 के अनुसार केवल 14 लाख परिवारों तक सीमित रखा गया था, जबकि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने इन परिवारों की संख्या को लगभग 40 लाख तक बढ़ाने का फैसला किया। अब तक 4,99,593 लाभार्थियों को 574.86 करोड़ रुपये की इलाज सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं जिसका 418 करोड़ रूपए के प्रीमियम का भुगतान बीमा कंपनी को किया गया जा चुका है। 6246 हार्ट सर्जरी, 95,122 डायलिसिस, 9164 कैंसर का इलाज, 7497 नियो नटल और 3532 जॉइंट्स रिप्लेसमेंट निशुल्क किए गए हैं।

    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि महामारी के दौरान नशा पीडि़तों के लिए उपचार सेवाओं को सुनिश्चित करने के लिए राज्य के विभिन्न नशामुक्ति केंद्रों में 2 लाख से अधिक नए रोगियों (नशा पीडि़तों) ने महामारी के दौरान दाखिला लिया।
    इस अवसर पर बोलते हुए प्रमुख सचिव स्वास्थ्य हुसन लाल ने कहा कि राज्य में लगभग 70 लाख लोगों का चरणबद्ध तरीके से टीकाकारण किया जाएगा, जिसमें 1.6 लाख स्वास्थ्य कर्मी, अन्य फ्रंटलाइन कर्मी, 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग और सह-रोगों वाले 50 से कम आयु के लोग शामिल हैं। आयु के मानदंड 1 जनवरी, 2021 से माने जाएंगे। पहले चरण में सभी 1.6 लाख स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों का प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण किया जाएगा।

  • गुरुग्राम में मुठभेड़ पुलिस-बदमाशों के बीच, दो गिरफ्तार

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    गुरुग्राम। गुरुग्राम पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट ने सोमवार तड़के मुठभेड़ के बाद दो खूंखार अपराधियों को गिरफ्तार किया। हालांकि, गिरोह के तीन अन्य लोग जो राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में अपराधों में शामिल थे, वे अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। यह घटना रिथोज गांव में हुई, जहां सेक्टर 39 की क्राइम टीम बदमाशों को पकड़ने के लिए दोनों के पैर में गोली मार दी। उनके कब्जे से एक एसयूवी और दो पिस्टल बरामद की गई है।

    एक अधिकारी ने कहा कि गोलीबारी में दो पुलिसकर्मियों को भी गोली लगी है।

    सभी घायलों का इलाज गुरुग्राम के सेक्टर 10 ए स्थित सिविल अस्पताल में हो रहा है।

    गिरफ्तार बदमाशों की पहचान चरखी दादरी के सुनील कुमार उर्फ सोनू और राजस्थान के हनुमान जिले के निवासी संदीप के रूप में हुई है।

    भागने वालों की पहचान रोहतक के श्रीभगवान, बीकानेर के अमित और पंजाब के बठिंडा के राहुल बरार के रूप में हुई है।

    पुलिस के अनुसार, सभी अपराधी राजस्थान और पंजाब में किए गए जघन्य अपराधों में शामिल थे।

    यह मुठभेड़ करीब 4 बजे हुई।

    महिंद्रा स्कॉर्पियो में सवार सभी पांच अपराधियों को सब-इंस्पेक्टर राजकुमार के नेतृत्व वाली पुलिस टीम ने उन्हें सोहना रोड पर बादशाहपुर सरकारी स्कूल के पास रोका।

    स्कॉर्पियो सवार को जैसे ही पता चला कि पुलिस उनका पीछा कर रही है, फौरन बदमाशों ने पुलिस टीम पर गोलीबारी करना शुरू कर दी।

    एसीपी (अपराध) प्रीत पाल सांगवान ने कहा, “पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में कई राउंड फायर किए, जिसमें दो बदमाशों के पैरो में गोली जा लगी, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें धर दबोचा।”

    सांगवान ने कहा, “पुलिस द्वारा जवाबी कार्रवाई में बदमाश — सुनील और संदीप दोनों के पैरों में गोली लग गई, बाकी बचे अन्य बदमाश अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। घायल बदमाशों को हिरासत में लेकर गुरुग्राम के सिविल अस्पताल में इलाज कराया जा रहा है।

    एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि पुलिसकर्मी कपिल के कंधे में और संदीप के पैर में गोली लग गई है, उन्हें भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    सांगवान ने कहा कि फरार लोगों की छानबीन की जा रही है।

  • महाराष्ट्र के किसान नेता पर संघ प्रमुख को धमकी देने के आरोप में बैतूल में केस दर्ज

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    बैतूल। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत सहित आरएसएस मुख्यालय नागपुर को बम से उड़ा देने की धमकी देने वाले महाराष्ट्र के किसान सभा के सचिव अरूण बनकर के खिलाफ मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में प्रकरण दर्ज किया गया है। भाजपा जिलाध्यक्ष आदित्य बबला शुक्ला की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज किया है। कोतवाली थाने के प्रभारी संतोष पंद्रे ने बताया है कि भाजपा जिलाध्यक्ष आदित्य बबला शुक्ला ने कोतवाली में महाराष्ट्र के किसान सभा के सचिव अरूण बनकर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है जिसमें कहा गया है कि बनकर ने खुलेआम यह धमकी दी है कि यदि मोदी ने किसानों पर गोलियां चलाई तो आरएसएस का मुख्यालय और मोहन भागवत को उड़ा देंगे। इस शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। बनकर के बयान का एक कथित वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

    संतोष पंद्र ने बताया कि नागपुर महाराष्ट्र से दिल्ली जाते समय सोमवार को मुलताई में शहीद किसान स्तंभ पर श्रद्धांजलि किसान जत्था रुका था जहां किसान नेता अरुण बनकर ने कथित तौर पर कहा कि मोदी को सबक सिखाने के लिए महाराष्ट्र के किसान दिल्ली जा रहे हैं। कृषि कानून वापस नहीं लिया गया तो आत्महत्या करना पड़ेगा और यदि मोदी किसानों पर गोली चलाएगें तो हम नागपुर में मोहन भागवत को और पूरा आरएसएस कार्यालय को भी उड़ा देंगे।

    इधर भाजपा जिलाध्यक्ष बैतूल आदित्य बबला शुक्ला ने किसान नेता के इस धमकी वाले बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि किसान और सरकार की बात बहुत ही सौहाद्र्रपूर्ण तरीके से चल रही है, इस माहौल को यह नेता खराब कर रहे हैं। खुलेआम मोहन भागवत और आरएसएस कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी दे रहे हैं इसकी जांच होनी चाहिए, इसलिए किसान नेता के खिलाफ कोतवाली में मामला दर्ज कराया है। साथ ही इस तरह से संगठन की जांच होनी चाहिए कि इनके पास बम कहां से आ रहे हैं।

  • स्कूल, शिक्षण संस्थान बिहार में खुले करीब 9 महीने बाद

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    पटना । बिहार में कोरोना महामारी आने के बाद से बंद स्कूल और शिक्षण संस्थानें सोमवार को खोल दिए गए हैं। फिलहाल राज्य के नौवीं से 12 वीं तक के स्कूल खोले गए हैं, जिससे राज्य के स्कूलों में करीब नौ महीने के बाद चहल-पहल देखी गई। बिहार सरकार से अनुमति मिलने के बाद पटना समेत राज्य के अन्य जिलों में सोमवार से सरकारी तथा निजी विद्यालयों, कोचिंग सहित अन्य शिक्षण संस्थानों में पठन-पाठन का कार्य शुरू हो गया है।

    फिलहाल सरकार ने नौंवीं से 12वीं कक्षा तक के संचालन की अनुमति दी है, जिसमें 50 प्रतिशत छात्रों के ही आने की उपस्थिति रखने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि सोमवार को कई स्कूलों में 50 प्रतिशत की भी उपस्थिति नहीं देखी गई है।

    शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक स्कूलों के वर्गों में अभी आधी क्षमता की ही उपस्थिति रहेगी। स्कूल प्रशासन को कोरोना के गाइडलाइन को पूरी तरह पालन करना हेागा। स्कूल में प्रवेश के समय थर्मल स्कैनिंग से बच्चों के शरीर के तापमान की जांच की जा रही है। इसके साथ ही शारीरिक दूरी का भी ख्याल रखा जा रहा है।