Category: state-news

  • एक ही नारा… : कोई भूखा न सोए, अशिक्षित न रहे, लुधियाना के 11 दोस्तों ने आसान की कई लोगों की जिंदगी

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    जगराओं दूसरों के दर्द को अपना समझ कर जरूरतमंदों की सेवा करने में जो आनंद है, वो किसी और चीज में नहीं। समाज में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो अपना दुख भूलकर दूसरों की जिंदगी संवारने में जुट जाते हैं। ऐसा ही एक नाम है ‘दाना-पानी सेवा सोसायटी।’ सोसायटी के संचालक मुनीश भारद्वाज व नितेश भोला कहते हैं, ‘हमारी संस्था का एक ही नारा है- कोई भूखा न सोए, अशिक्षित न रहे, दवा से महरूम न रहे। हमारा मकसद जरूरतमंद मरीजों, अनाथ बच्चों व बुजुर्गों की मदद करना है।’

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    लुधियाना की दाना-पानी सेवा सोसायटी पांच वर्षों से जरूरतमंद मरीजों व अनाथ बच्चों की मदद कर रही हैैै। 11 दोस्तों द्वारा बनाई गई इस सोसायटी का एक ही नारा है कि कोई भूखा न रहे अशिक्षित न रहे और इलाज के बिना न रहे।

    वे कहते हैं कि चाहे सरकारी अस्पताल हों या प्राइवेट, अगर आपकी पहचान नहीं है तो दाखिले की पर्ची बनाने से लेकर डाक्टर के चेकअप तक आपको कई परेशानियों से जूझना पड़ता है। इसी परेशानी को दूर करने के लिए ‘दाना-पानी सेवा सोसायटी’ का निर्माण किया था। मुनीश कहते हैं, आज से पांच साल पहले सिविल अस्पताल लुधियाना में हमने देखा कि जरूरतमंद लोगों को छोटे-छोटे काम में बहुत परेशानी आती थी। उनसे पूछने पर उनकी परेशानियों का पता चला। इसके बाद अपने 11 दोस्तों को साथ लेकर दाना-पानी सेवा सोसायटी बनाई।

     

    संस्था ने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से लोगों की मदद के लिए प्रचार शुरू किया। फेसबुक व वाट्सएप पर संदेश डाला कि किसी को भी इलाज, राशन व शिक्षा संबंधी सहायता की जरूरत है तो वे हमसे संपर्क कर सकते हैं। सोसायटी ने सीएमसी अस्पताल लुधियाना के साथ संपर्क किया। पांच सालों में करीब 1000 से अधिक गरीब व जरूरतमंद बच्चों का इलाज व सर्जरी करवा चुके हैं।

     

    दान से मिला मुहिम को बल

    संस्था के लोग मरीजों की बीमारी की पूरी जानकारी लेने के बाद सीएमसी अस्पताल के डाक्टरों से चर्चा करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति का आकलन कर राशि जुटाते हैं। लोग खुलकर सहयोग करते हैं। एनआरआइ दानी-सज्जनों का भी सहयोग मिलता है। सोसायटी बड़ी संख्या में बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठा रही है, ताकि पैसे की कमी के कारण कोई शिक्षा से वंचित न रहे। जगराओं के रहने वाले नितेश भोला ने बताया कि हम जरूरतमंद लोगों को राशन उपलब्ध करवाते हैं। कोरोना काल में लगातर तीन-चार महीने तक गरीबों तक भोजन पहुंचाया।

    रक्तदान के लिए 200 स्वयंसेवकों का ग्रुप

    दाना-पानी सेवा सोसायटी यूथ ब्लड डोनेशन आर्गेनाइजेशन के साथ मिलकर जरूरतमंदों के लिए रक्तदान के कैंप लगाती। थैलेसीमिया से पीडि़त बच्चों का विशेष ध्यान रखा जाता है। संस्था में नितेश भोला, सरबजीत सिंह, निर्मल सिंह, सुखजीत सिंह, हरचंद सिंह, मनजिंदर सिंह, मनजिंदर सिंह सहित 200 स्वयंसेवक जुड़े हैं। गरीब व जरूरतमंदों को संस्था की ओर से निश्शुल्क दवाइयां भी उपलब्ध करवाई जाती हैं।

     

  • पीएमसी बैंक धोखाधड़ी मामले में ED ने संजय राउत की पत्नी को समन भेजा

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    मुंबई। एक बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वरिष्ठ शिवसेना नेता संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत को पीएमसी बैंक धोखाधड़ी मामले के संबंध में पूछताछ के लिए तलब किया है, अधिकारियों ने यह जानकारी दी। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी के नाम न बताए जाने की शर्त पर कहा कि “हमने इस वर्ष राउत को 29 दिसंबर को एजेंसी के समक्ष पेश होने के लिए कहा है।”

    अधिकारी ने कहा कि उन्हें मुंबई कार्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया है।

    अधिकारी ने कहा कि इससे पहले, वित्तीय जांच एजेंसी ने उन्हें 11 दिसंबर को पेश होने के लिए तलब किया था, लेकिन उन्होने कोई जवाब नहीं दिया।

  • पीएम मोदी : मन की बात में गढ़वा के हीरामण का किया जिक्र, जानिए इनकी उपलब्धि

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    रांची, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रविवार को मन की बात की। इसमें उन्‍होंने झारखंड के गढ़वा जिले के हीरामण का जिक्र किया। उन्‍होंने बताया कि हीरामण ने झारखंड की संस्‍कृति और पहचान के संरक्षण के लिए एक सराहनीय प्रयास किया है। हीरामण ने यहां की विलुप्‍त होती कोरवा जनजाति के संरक्षण के लिए एक शब्‍दकोश बनाया है। हीरामण ने 12 सालों की अथक मेहनत के बाद कोरवा भाषा का शब्‍दकोश तैयार किया है।

    मोदी ने बताया कि हीरामण ने इस शब्‍दकोश में घर-गृहस्‍थ में प्रयोग होने वाले शब्‍दों से लेकर दैनिक जीवन में इस्‍तेमाल होने वाले कोरवा भाषा के ढेर सारे शब्‍दों को अर्थ के साथ लिखा है। पीएम नरेंद्र मोदी ने मन की बात में कहा कि हीरामण ने कोरवा समुदाय के लिए जो कर दिखाया है, वह देश के लिए एक मिसाल है। हीरामण कोरवा जनजाति के हैं। वे गढ़वा जिले के रंका प्रखंड के सिंजो गांव के रहने वाले हैं।

    पीएम मोदी ने बताया कि कोरवा जनजाति की आबादी महज 6 हजार है। यह समुदाय शहरों से दूर पहाड़ों और जंगलों में निवास करती है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी के दूसरे कार्यकाल के दौरान का यह 19वां मन की बात है। आज 27 दिसंबर का मन की बात इस साल 2020 के आखिरी मन की बात थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महीने के आखिरी रविवार को मन की बात कार्यक्रम के माध्‍यम से आम जनता से जुड़ते हैं।

     

    गांव में पारा शिक्षक हैं हीरामण

    हीरामण प्राथमिक विद्यालय सिंजो में पारा शिक्षक हैं। उनका कहना है कि शब्दकोष के तैयार हो जाने के बाद कोरवा भाषा को संरक्षित एवं समृद्ध करने में मदद मिलेगी। कोरवा भाषा में गांव को ऊंगा, राख को तोरोज, खाना खाएंगे को लेटे जोमाउह, आग को मड़ंग कहते हैं। हीरामन कहते हैं कि शब्दकोष कोरवा भाषा के ऐसे ही शब्दों से आम लोगों का परिचय कराता है।

    उन्होंने कहा कि जब से उन्होंने होश संभाला है, तब से कोरवा भाषा के शब्दों को एक डायरी में लिखकर सुरक्षित करने का प्रयास शुरू कर दिया। समय के साथ लोग कोरवा भाषा को भुलने लगे। यह उन्हें बचपन से ही कटोचना शुरू कर दिया। यहीं से उनके मन में कोरवा भाषा को संरक्षित करने की भावना जगी। वह आज भी जारी है। जैसे-जैसे इनकी उम्र बढ़ती गई, उनकी यह इच्छा और भी प्रबल होती गई।

    50 पन्‍नों का है शब्‍दकोश

    इनकी प्रारंभिक शिक्षा उसी विद्यालय में हुई जिसमें आज वे पारा शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि 12 वर्ष तक एक डायरी में सहेजे कोरवा भाषा के शब्दों का शब्दकोष बनाने की जब सोची तब इसमें आर्थिक तंगी आड़े आ गई। ऐसे में उनका सहयोग पलामू के मल्टी आर्ट एसोसिएशन ने किया और इस संस्थान ने कोरवा भाषा के शब्दकोष को छपवाने में हीरामण को आर्थिक मदद की।

    कुल 50 पन्नों के छपे इस शब्दकोष में कोरवा भाषा में प्रयुक्त होने वाले शब्द, पशु-पक्षियों से लेकर सब्जी, रंग, दिन, महीना समेत घर-गृहस्थी से जुड़े शब्द शमिल हैं। प्रधानमंत्री द्वारा मन की बात में अपना जिक्र किए जाने की जानकारी मिलने के बाद हीरामण कोरवा अचानक से ही जिले में चर्चा का विषय बन गए हैं।

  • ‘काला जीरा’ : खेती से महक रही किसानों की जिंदगी, जैविक तरीके से उपजाई जा रही बासमती धान की कई किस्‍में

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    रांची, विकास भारती के प्रयास से गुमला जिले के नक्सल प्रभावित इलाके बानालात के किसानों की जिंदगी संवर रही है। यहां बासमती धान की किस्म ‘काला जीरा’ की खेती से दर्जनों किसान परिवारों की जिंदगी महक रही है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए रासायनिक खाद के उपयोग की बजाय जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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    विकास भारती के प्रयास से गुमला के नक्सल प्रभावित इलाके में बासमती धान की कई किस्में उपजाई जा रहीं हैं। किसानों की आय बढ़ाने के लिए संस्था बाजार भी उपलब्ध करा रही है। इसका दायरा लगातार बढ़ रहा है।

    विकास भारती के माध्यम से संचालित कृषि विज्ञान केंद्र के विज्ञानी संजय पांडेय के प्रयास से पिछले वर्ष शुरू की गई सामूहिक खेती ने अब रंग दिखाना शुरू किया है।

    अब किसानों को बासमती चावल बेचकर अच्छी-खासी आमदनी हो रही है। विकास भारती के सचिव पद्मश्री अशोक भगत कहते हैं कि उनका उद्देश्य किसानों को स्वावलंबी बनाना और लोगों को रोजगार के लिए बाहर जाने से रोकना है। संस्था की ओर से धान से चावल निकालने तक की व्यवस्था कर किसानों को इसका बाजार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के विज्ञानी संजय पांडेय के प्रयास से पिछले वर्ष शुरू की गई सामूहिक खेती अब इतनी सफल हो रही है कि उस इलाके के किसान अब चावल का निर्यात करने की तैयारी में लग गए हैं।

     

    किसानों को मिल रही दोगुनी कीमत

    कृषि विज्ञानी संजय पांडेय ने कहा कि बानालात के किसान पहले मोटा धान व गेहूं की खेती करते थे। उसमें उतनी आमदनी नहीं हो रही थी। बातचीत में पता चला कि इस इलाके में काला जीरा व जीरा फुल धान की खेती पहले खूब होती थी। अभी स्थिति ऐसी थी कि उसका बीज भी उपलब्ध नहीं था। कई गांवों में घुमने के बाद बीज मिला। पिछले वर्ष 56 किसानों के साथ 25 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती शुरू की। इससे 200 क्विंटल धान का उत्पादन हुआ। वहीं इस वर्ष 400 क्विंटल से अधिक का उत्पादन हुआ है।

    विकास भारती ने 3500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों से धान खरीद लिया। किसान यदि अपने से बाजार में इस धान को बेचते तो 2000 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा मूल्य नहीं मिलता। धान से चावल निकालने के बाद उसकी प्रोसेसिंग कर बाजार में उतारने की तैयारी कर ली गई है। खेती कर रहे किसान बाबूराम उरांव, मलखन उरांव, कुंती देवी, रामवृक्ष खेरवार का कहना है कि इस खेती से बहुत ज्यादा लाभ मिल रहा है। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधर रही है। नए कृषि कानून के बारे में कहना था कि यह ज्यादा लाभदायक है। अब अपनी उपज को कहीं भी ले जाकर बेच सकते हैं।

     

    लुप्त हो रही थी परंपरागत किस्म

    डाॅ. संजय पांडेय ने कहा कि बासमती धान की यह प्रजाति विलुप्त हो रही थी। उस प्रजाति को फिर से जीवित रखने का काम किया। इस धान में पानी की ज्यादा जरूरत होती है। इस लिए घाघरा नदी के किनारे इसकी खेती करवाई गई। वहीं किसानों को पंपसेट उपलब्ध कराया गया।

  • संजय राउत के साथ एमवीए के सहयोगी पत्नी को मिले ईडी नोटिस पर

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    मुंबई। शिवसेना के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा समन जारी होने के एक दिन बाद महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महा विकास अघाड़ी की सहयोगी पार्टियां भारतीय जनता पार्टी के विरोध में उतर गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और कांग्रेस ने शिव सेना नेताओं के साथ मिलकर विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए भाजपा पर हमला बोला और कहा कि भाजपा की नीतियों के खिलाफ बोलने वालों को टारगेट किया जाता है।

    राउत ने एक ट्वीट किया, जो 1981 के एक लोकप्रिय बॉलीवुड गीत, आ देखें जरा, किसमे कितना है दम, जम के रखना कदम, मेरे साथिया पर आधारित था।

    यह कहते हुए कि उन्हें इस तरह के नोटिस के बारे में परवाह नहीं है, राउत ने स्पष्ट किया कि अगर ईडी अपना काम कर रहा है तो यह कानूनी होना चाहिए, लेकिन अगर अवैध है, तो उसे (ईडी) अधिक सावधान रहना चाहिए।

    यह कहते हुए कि कोई ईडी नोटिस नहीं मिला है, राउत ने भाजपा पर निशाना साधा – मैंने अपने आदमी को बीजेपी कार्यालय में भेजा है। अगर ईडी नोटिस वहां भेजा गया है, तो हमें पता चल जाएगा।

    राकांपा नेता और गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि केंद्र में भाजपा राजनीतिक विरोधियों के बीच भय पैदा करने के लिए ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है, जो एक शर्मनाक बात है।

    देशमुख ने कहा, जो भी भाजपा या उसकी नीतियों के खिलाफ बोलने की हिम्मत करता है, उसे ईडी-सीबीआई द्वारा निशाना बनाया जाता है। हमने इस तरह की राजनीति कभी नहीं देखी।

    कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट ने कहा कि जब से भाजपा ने केंद्र में सत्ता संभाली है, केंद्रीय एजेंसियों को विपक्षी दलों पर इस तरह से निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन हमारी सरकार इस तरह की धमकी से डरने वाली नहीं है।

    शिवसेना के पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे ने भी ईडी नोटिस को राजनीति बताया, जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री और राकांपा नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा, ईडी के नोटिसों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है।

    पटेल ने कहा कि ऐसे कई लोग हैं, जिन्हें ऐसे व्यक्तियों की संलिप्तता के बिना ईडी नोटिस मिलता है। अगर कोई वास्तव में दोषी है, तो यह सामने आएगा और यहां तक कि इसके पीछे की राजनीति भी पहचानी जाएगी।

    मुंबई के गार्डियन मंत्री असलम खान ने कहा कि इससे पहले कि कोई भी भाजपा के खिलाफ बोले तो उसे ईडी-सीबीआई से ऐसे नोटिस के लिए तैयार रहना चाहिए। ये सब भाजपा के शासन में पिछले कुछ वर्षों में आदर्श बन गए हैं।

    बता दें कि ईडी ने वर्षा राऊत को पूछताछ के लिए 29 दिसंबर को बुलाया है, जिसके बाद 30 दिसंबर को वरिष्ठ राकांपा नेता एकनाथ खडसे को नोटिस दिया गया – जिन्होंने पिछले अक्टूबर में भाजपा छोड़ दी। इसके अलावा एक अन्य वरिष्ठ नेता प्रताप सरनायक और उनके परिवार के खिलाफ भी जांच चल रही है।

    खडसे को पुणे भूमि सौदे के बारे में समन भेजा गया है जबकि वर्षा राउत को पीएमसी बैंक से संबंधित एक मामले में पेश होना है।

    भाजपा की ओर से, महाराष्ट्र के नेता किरीट सोमैया ने राउत को इस मामले में निर्दोष साबित करने को कहा और पूछा कि क्या उनका परिवार पीएमसी बैंक घोटाले में लाभार्थी है?

    सोमैया ने रविवार देर रात सोशल मीडिया पर एक ट्वीट और वीडियो में कहा, मैंने संजय राउत परिवार को ईडी के नोटिस के बारे में सुना। क्या श्री राउत हमें बताएंगे कि उनका परिवार लाभार्थी है? क्या इससे पहले उन्हें किसी भी जांच में नोटिस मिले हैं? पीएमसी बैंक घोटाले में 10 लाख जमाकर्ता पीड़ित हैं। अगर ईडी को कोई जानकारी चाहिए तो राजनीतिक संरक्षण एक स्वस्थ विचार नहीं है। सभी पीएमसी बैंक के पुनरुद्धार चाहते हैं।

  • BJP और सहयोगी AIADMK के रिश्तों में क्यों पड़ रही दरार?

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    नई दिल्ली । दक्षिण भारत के प्रमुख राज्यों में गिने जाने वाले तमिलनाडु में भाजपा और उसकी सहयोगी एआईएडीएमके (ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) के रिश्तों में दरार पड़ती दिख रही है। वजह कि सत्ताधारी एआईएडीएमके ने भाजपा के सामने ऐसी शर्तें रखनी शुरू की हैं, जिसे भाजपा मानने को तैयार नहीं है। रिश्तों के असहज होने के पीछे राज्य की भाजपा इकाई की ओर से बीते नवंबर में निकाली गई उस यात्रा को भी जिम्मेदार माना जा रहा है, जिसे भएआईएडीएमक की सरकार ने अनुमति नहीं दी थी। सहयोगी एआईएडीएमके ने भाजपा की इस यात्रा को बांटने वाली करार दिया था। बावजूद इसके भाजपा के यात्रा निकालने पर सरकार ने नेताओं को गिरफ्तार करा दिया था।

    ताजा मामला क्या है?

    तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेता और डिप्टी कोआर्डिनेटर के.पी. मुनुसामी ने रविवार को सहयोगी दल भाजपा को लेकर आक्रामक बयानबाजी कर दी। उन्होंने कहा है कि एआईएडीएमके की शर्तें पूरी न करने पर भाजपा को 2021 के विधानसभा चुनाव को लेकर नए विकल्पों पर विचार करना होगा।

    दरअसल, रविवार को हुई एआईएडीएमके की पहली चुनावी रैली में मुनुसामी ने भाजपा के सामने दो शर्तें रखीं। उन्होंने कहा कि भाजपा को एआईएडीएमके की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के पलानीस्वामी का समर्थन करना होगा और दूसरी शर्त है कि जीत होने पर राज्य सरकार में कोई भागादारी भी नहीं मिलेगी। हालांकि, अभी भाजपा ने आधिकारिक रूप से एआईएडीएमके नेता मुनुसामी के बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन माना जा रहा है कि उनका यह बयान विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के रिश्तों की खाई को और चौड़ा करने वाला है।

    भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “चुनाव पूर्व अगर कोई गठबंधन बनता है और फिर जीत दर्ज कर सत्ता मिलती है तो फिर उसमें से एक दल को सत्ता की भागीदारी से दूर रहने की शर्त समझ से परे है। जहां तक एआईएडीएमके की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पलानीस्वामी के समर्थन की बात है तो इस पर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व विचार-विमर्श कर फैसला करेगा। हालांकि रिश्तों में दरार जैसी कोई बात नहीं है। राजनीति में बयान होते रहते हैं। तमिलनाडु में फिलहाल हमारा गठबंधन कायम है।”

    भाजपा ने सीएम फेस पर नहीं खोले पत्ते :

    बीते दिनों तमिलनाडु के दौरे पर केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर पहुंचे थे। उनकी मौजूदगी में कमल हासन की पार्टी मक्कल निधि मय्यम के संस्थापक महासचिव ए. अरुणाचलम भाजपा में शामिल हुए थे। इस दौरान स्थानीय मीडिया ने एनडीए की तरफ से मुख्यमंत्री पद से जुड़े सवाल पूछे तो उन्होंने इस सवाल को टाल दिया था। इससे पूर्व भी भाजपा तमिलनाडु में मुख्यमंत्री के चेहरे पर जवाब देने से बचती रही है। जबकि एआईएडीएमके की तरफ से के पलानीस्वामी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया जा चुका है।

    भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पार्टी अभी वेट एंड वॉच की स्थिति में है। माहौल देखकर मुख्यमंत्री के चेहरे पर बात करना चाहती है। हालांकि, फिलहाल पार्टी ने एआईएडीएमके की तरफ से मुख्यमंत्री पद के दावेदार पलानीस्वामी का समर्थन न करने का फैसला किया है।

    काबिलेगौर है कि गृहमंत्री अमित शाह के बीते 21 नवंबर को हुए तमिलनाडु दौरे के दौरान एआईएडीएमके ने भाजपा के साथ गठबंधन जारी रखने का बयान दिया था। बता दें कि मई 2016 में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी एआईएडीएमके को 134 सीटें मिलीं थीं, जबकि 89 सीटों के साथ डीएमके दूसरे स्थान पर रही थी। 232 सदस्यीय विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ आठ सीटें मिलीं थीं।

  • बस-ट्रक की टक्कर में असम में 7 लोगो की मौत

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    गुवाहाटी। पुलिस ने कहा कि असम के कोकराझार जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-17 पर एक ट्रक से खचाखच भरी यात्री बस की टक्कर में सात लोगों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए। यह दुर्घटना बोगरीबाड़ी थाना अंतर्गत चतागुड़ी में उस समय हुई जब सप्तग्राम से धुपगुड़ी जा रही यात्री बस गुवाहाटी जा रहे ट्रक से सिर पर टकरा गई।

    घायलों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

    मुख्यमंत्री सबार्नंद सोनोवाल ने शोक व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने कोकराझार उपायुक्त को उनके इलाज के लिए सभी कदम उठाने का निर्देश दिया।

  • मध्य प्रदेश : लव जिहाद के खिलाफ विधेयक को मिली शिवराज कैबिनेट की मंजूरी, जानें इसके प्रावधान

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    भोपाल, एएनआइ। मध्‍य प्रदेश की कैबिनेट ने शनिवार को लव जिहाद के खिलाफ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी। अब यह विधानसभा के शीतसत्र में मंजूरी के लिए राज्‍य की शिवराज सरकार की ओर से पेश की जाएगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज हुई कैबिनेट की बैठक में इस विधेयक को मंजूरी दी गई। बैठक में गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा मौजूद रहे। एक दिन पहले उन्‍होंने ने बताया था कि अधिनियम में सख्त प्रविधान किए गए हैं। इसका उल्लंघन करने पर अधिकतम 10 साल की कैद के साथ जुर्माने के तहत एक लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।

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    मध्‍य प्रदेश की कैबिनेट ने लव जिहाद के खिलाफ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है जिसके बाद अब यह विधानसभा के शीतसत्र में जाएगा जहां इसे मंजूरी का इंतजार है। इस विधेयक के अनुसार10 साल की कैद के साथ जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है।

    जानें इसके प्रावधान:- 

    • महिला नाबालिग अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के धर्म  परिवर्तन किए जाने पर 2-10 साल का कारावास व 50,000 रुपये जुर्माना होगा

    –  अपना धर्म  छिपा धर्म परिवर्तन कराए जाने पर 3-10 साल का कारावास व 50000 रुपये का जुर्माना

    • एक बार से अधिक अपराध दोहराने पर 5-10 वर्ष का कारावास

    • जो भी धर्म परिवर्तन अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत होगा, उस धर्म परिवर्तन को शून्य माने जाने का प्रावधान किया गया है।

    • पैतृक धर्म में वापसी को इस अधिनियम में धर्म परिवर्तन नहीं माना गया है। पैतृक धर्म वह माना गया है जो व्यक्ति के जन्म के समय उसके पिता का धर्म था।

    • परिवाद के माध्यम से न्यायालय से आदेश प्राप्त कर मत परिवर्तित व्यक्ति के अभिभावक भी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।

    • अधिनियम के तहत दर्ज अपराध संज्ञय तथा गैर जमानती होगा और सत्र न्यायालय में ही इसकी सुनवाई हो सकेगी।

    • मामले की जांच उपनिरीक्षक स्तर से नीचे का अधिकारी नहीं कर सकेगा।

    • अधिनियम में निर्दोष होने के सबूत प्रस्तुत करने की बाध्यता अभियुक्त पर रखी गई है।

    • अधिनियम के प्रविधानों के विपरीत किए गए विभाग को शून्य मानने का प्रविधान किया गया है।

    • अपराध में पीड़ित महिला एवं पैदा हुए बच्चे को भरण पोषण प्राप्त करने का अधिकार होगा।

    • बच्चे को पिता की संपत्ति में उत्तराधिकारी के रूप में अधिकार बरकरार रखे जाने का प्रविधान भी शामिल किया गया है।

    • अधिनियम के प्रविधानों के विरुद्ध मत परिवर्तन कराने वाली संस्था या संगठन के विरुद्ध भी व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध पर दिए जाने वाले कारावास तथा अर्थदंड के समकक्ष प्रविधान किए गए हैं।

    • ऐसी संस्थाओं तथा संगठनों के पंजीयन को निरस्त कर दिया जा सकेगा।

  • भाजपा दे रही आम लोगों को बंगाल विस चुनाव में पार्टी उम्मीदवार बनने का मौका

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    कोलकाता। भाजपा बंगाल में अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव में आम लोगों को भी पार्टी उम्मीदवार बनने का मौका दे रही है। इस बाबत कोलकाता के मुरलीधर सेन लेन में स्थित बंगाल भाजपा मुख्यालय में एक ड्रॉप बॉक्स लगाया गया है, जिसमें भाजपा उम्मीदवार बनने के इच्छुक अपने आवेदन पत्र डाल सकते हैं। वे बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से किसी पर भी अपनी उम्मीदवारी पेश कर सकते हैं।

    आवेदन पत्र में उन्हें अपना नाम, पता व अन्य विवरण देना होगा। नौकरीपेशा लोगों से लेकर व्यवसायी व आम गृहिणी तक उम्मीदवार के तौर पर आवेदन कर सकते हैं। ड्रॉप बॉक्स के भर जाने पर आवेदन पत्रों को आगे की कार्यवाही के लिए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के पास दिल्ली भेज दिया जाएगा। उनमें से योग्य उम्मीदवारों का  चयन किया जाएगा। भाजपा नेता शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल में भाजपा की लोकप्रियता बढ़ रही है और समाज के विभिन्न  तबके के लोग पार्टी से जुड़ना चाहते हैं।

    ऐसे बहुत से लोग हैं, जो अभी सक्रिय राजनीति में नहीं हैं लेकिन अगले विधानसभा चुनाव में पार्टी उम्मीदवार बनने के इच्छुक हैं। उन्हें मौका देने के लिए ही यह कदम उठाया गया है। इससे जनसंपर्क भी बढ़ेगा। गौरतलब है कि भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान भी यह पहल की थी, हालांकि उस समय करीब 1,000 आवेदन पत्र ही जमा पड़े थे। योग्य उम्मीदवार नहीं मिल पाने के कारण किसी का चयन नहीं किया गया था। चूंकि बंगाल में 294 विधानसभा सीटें हैं इसलिए इस बार कुछ आम लोगों को मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है।

     

  • किसानों के ‘राजभवन मार्च’ के दौरान पुलिस ने किया लाठीचार्ज

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    पटना। केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के बाहरी हिस्से में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में मंगलवार को पटना में अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले किसानों ने ‘राजभवन मार्च’ निकाला। इस दौरान प्रदर्शनकारी किसानों और पुलिस में झड़प हो गई। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले कई संगठनों के नेता और कार्यकर्ता इस कार्यक्रम में शामिल हुए। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग झंडा, बैनर, पोस्टर हाथ में लिए हुए थे और केंद्र सरकार के विरोध में नारे लगा रहे थे।

    गांधी मैदान से निकाले गए इस ‘राजभवन मार्च’ को पुलिस प्रशासन ने कई स्थानों पर रोकने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं रूके और डाक बंगला चौराहा पहुंच गए। यहां पुलिस बैरिकेडिंग कर पहले से ही तैनात थी। यहां भी प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोडकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, तब पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पडा।

    इस मार्च को वामदलों का भी समर्थन प्राप्त है।

    प्रदर्शनकारी किसानों को पुलिस समझाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वे मानने को तैयार नहीं हुए। इस दौरान पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की धक्का-मुक्की भी हुई।

    अखिल भारतीय किसान महासभा के बिहार प्रदेश सचिव रामाधार सिंह ने कहा कि सरकार विरोध प्रदर्शन को खत्म करना चाहती है। राजभवन मार्च नहीं करने देना किसानों पर अन्याय है। उन्होंने कहा कि हमलोग राजभवन जाकर राज्यपाल को ज्ञापन देना चाहते हैं।

    इधर, पुलिस प्रदर्शन के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र का हवाला देकर उन्हें रोक रही है।