Category: state-news

  • आधुनिक शिक्षा से वंचित हो रहे छात्र पर्वतीय क्षेत्र के स्कूलों में

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    देहरादून। प्रदेश में तमाम दावों के बावजूद अभी तक पर्वतीय क्षेत्र के स्कूलों में विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा से वंचित हैं। इसका मुख्य कारण स्कूलों में विद्युत व्यवस्था न होना है। प्रदेश के पर्वतीय व ग्रामीण क्षेत्रों में दो हजार से अधिक स्कूल ऐसे हैं, जिनमें विद्युत कनेक्शन नहीं हैं। इस कारण इन स्कूलों के छात्र कंप्यूटर शिक्षा व विज्ञान सीखने के लिए बुनियादी प्रयोग की सुविधा भी नहीं ले पा रहे हैं। अचरज यह कि इन स्कूलों के लिए कंप्यूटर तक खरीद लिए गए हैं। स्कूलों में बिजली पहुंचाने के तमाम जतन किए गए, लेकिन ये अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाए। इसकी वजह यहां की भौगोलिक स्थिति है। पर्वतीय क्षेत्रों में स्कूलों तक कनेक्शन पहुंचाने में विभाग ने काफी परेशानियां गिनाईं। ऐसे में यहां सोलर ऊर्जा पैनल लगाने का निर्णय लिया गया। बंदरों द्वारा इसे तोड़ने के खतरे को देखते हुए इस पर भी बात आगे नहीं बढ़ पाई।

    परवान नहीं चढ़ पाई स्मार्ट मीटर योजना

    प्रदेश में बिजली की कमी का एक मुख्य कारण लाइन लॉस है। इसे देखते हुए प्रदेश सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हर घर में स्मार्ट लीटर लगाने का फैसला लिया। शुरुआत में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कुछ स्थानों पर ये मीटर लगाए भी गए। इनकी खूबी यह थी कि इसमें आसानी से पता चल सकता था कि बिजली की खपत कितनी हुई और बिलिंग कितनी बिजली की हुई। इसकी एक बड़ा खासियत यह भी थी कि निश्चित अवधि में बिल जमा न होने, मीटर से छेड़छाड़ होने और कनेक्शन की क्षमता से अधिक बिजली खर्च होने पर विद्युत आपूर्ति स्वत: बंद हो जाती है। बिजली की कमी होने पर कंट्रोल रूम से ही उपभोक्ता का लोड कम किया जा सकता है। इस मीटर का इस्तेमाल प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों तरह से किया जा सकेगा। यह योजना खासी बेहतर है, लेकिन अभी तक यह परवान नहीं चढ़ पाई है।

    सेवा नियमावली के इंतजार में कई महकमे

    प्रदेश के सरकारी विभागों में से तकरीबन 60 फीसद की अभी तक सेवा नियमावली नहीं बन पाई है। राज्य गठन को 20 वर्ष हो चुके हैं, इस अवधि में विभागों की संख्या 75 पहुंच चुकी है। जो कुछ नए विभाग बनाए गए, उनका अपना प्रशासनिक ढांचा व सेवा नियमावली है। शेष विभाग अभी तक उत्तर प्रदेश की पुरानी नियमावली और ढांचे के अनुसार ही चल रहे हैं। स्थिति यह है कि राज्य गठन के दौरान की विभागीय नियमावलियों में उत्तर प्रदेश सरकार कई बदलाव कर चुकी है, लेकिन यहां ऐसा नहीं हो पाया है। कर्मचारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वरिष्ठता के मामले कोर्ट कचहरी तक पहुंच रहे हैं। नतीजतन विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया लंबित हो रही हैं। इस समय पर्यटन, लेखा परीक्षा, टाउन प्लानिंग आदि कई ऐसे विभाग हैं, जहां पुराने विभागीय ढांचे के अनुसार ही काम हो रहा है। इससे विभागीय कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

    सड़कों से दूर ऋण की इलेक्ट्रिक बस

    प्रदेश सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक बसों के लिए शुरू की गई ऋण योजना के बावजूद एक भी इलेक्ट्रिक बस अभी तक सड़क पर नहीं उतर पाई। दरअसल, प्रदेश सरकार ने वीर चंद्रसिंह गढ़वाली योजना के अंतर्गत इलेक्ट्रिक व अन्य महंगी बस खरीदने वालों को 50 फीसद तक की सब्सिडी देने का निर्णय लिया। यह भी व्यवस्था की गई कि इलेक्ट्रिक बसों की खरीद करने पर इन्हें परिवहन निगम में लगाया जाएगा। उम्मीद जताई गई कि इसमें काफी युवा आगे आएंगे। योजना फरवरी में शुरू की गई। मार्च में कोरोना के कारण लॉकडाउन हो गया। अनलॉक हुआ तो यात्रियों ने बसों से दूरी बनाए रखी। अब संचालन शुरू हुआ है, लेकिन दूसरे राज्यों के लिए अभी तक बसों को चलाने की अनुमति नहीं मिल पाई है। परिवहन कारोबार बुरी तरह प्रभावित है। इन परिस्थितियों में सरकार की इस योजना के अंतर्गत एक भी बस फिलहाल सड़क पर नहीं उतर पा रही है।

     

  • सवाल खड़े किए विधायक ममता राकेश ने सत्र पर, कहा- तीन दिन में कैसे होगा समस्याओं का समाधान

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    भगवानपुर(हरिद्वार)। हरिद्वार जिले की भगवानपुर सीट से विधायक ममता राकेश ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सत्र सिर्फ तीन दिन के लिए बुलाया गया है। भला इतने कम वक्त में पूरे उत्तराखंड की समस्याओं का समाधान कैसे हो पाएगा।

    उत्तराखंड विधानसभा का तीन दिवसीय शीतकालीन सत्र 21 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है। सत्र के शुरू होने से पहले ही कई सवाल खड़े होने लगे हैं। भगवानपुर विधायक ममता राकेश ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विधायक के पास अपनी-अपनी समस्याएं हैं, जिनको वह सिर्फ तीन दिन में कैसे उठाएंगे।

    किसान परेशान, सरकार को नहीं चिंता 

    ममता राकेश ने किसानों के मुद्दे पर भी सरकार को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि देश का किसान परेशान और बदहाल है, लेकिन प्रदेश की सरकार किसानों के हित में सोचने को तैयार नहीं है। ऐसे में सरकार के खिलाफ देश के किसान दिल्ली बॉर्डर पर अनशन कर रहे हैं, जिनमें लगभग 16 किसानों की मौत हो चुकी है। विधायक ममता राकेश ने इन 16 लोगों को शहीद का दर्जा दिलाने की भी मांग की।

    कुंभ को लेकर नहीं दिख रही तैयारी 

    वहीं, कुंभ को लेकर उन्होंने कहा कि हरिद्वार महाकुंभ में कुछ ही समय बचा है, लेकिन अभी तक कुंभ की कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है और न ही कोई विकास कार्य किया गया है। एक विधायक को विकास कार्य के लिए 10 करोड रुपए प्रदेश सरकार ने देने का वादा किया था, लेकिन वो अभी तक नहीं दिया गया। विधानसभा में सड़कें टूटी हैं, विकास कार्य ठप हैं। ऐसे में जनता हताश और परेशान दिखाई दे रही है। प्रदेश सरकार को अपना वादा पूरा करना चाहिए। इस मौके पर सेठ पाल परमार, आबाद अली, सुशील पैगोवाल, उदय त्यागी, बृजपाल प्रधान, जहीर अहमद, सलीम अहमद, गौरव चौधरी, उदय त्यागी, शाहजेब राणा, अनुज, मुनव्वर ,विनय सैनी, फारुख प्रधान, आदि मौजूद रहे।

     

  • उपभोक्ताओं को लगा अब मध्यप्रदेश में बिजली का झटका

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    भोपाल । पेट्रोलियम पदार्थों में हो रही बढ़ोत्तरी के बीच मध्य प्रदेश की जनता को अब बिजली का झटका लगा है। विद्युत नियामक आयोग ने बिजली दरों में 1.98 (एक दशमलव 98) प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की है। नई दरें 26 दिसंबर से लागू होंगी। विद्युत विनियामक आयोग ने गुरुवार की रात को नई टैरिफ जारी की। इसके मुताबिक, 30 यूनिट तक की बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं पर किसी तरह का असर नहीं होगा। वहीं उपभोक्ताओं को मीटर किराया नहीं देना होगा। पहले सिंगल फेस में 10 रुपए, थ्री-फेस में 25 रुपए और 10 किलोवाट से ऊपर भार के उपभोक्ताओं को 125 रुपए महीने मीटर किराया लगता था।

    नए टैरिफ के अनुसार, घरेलू उपभोक्ताओं पर प्रति यूनिट आठ पैसे से 15 पैसे की बढ़ोतरी की गई है, इसके अलावा फिक्स चार्ज में भी एक से दो रुपए की बढ़ोतरी की गई है। 50 यूनिट तक बिजली खर्च करने पर पांच रुपए अतिरिक्त देना होगा। इसी तरह 100 यूनिट पर 12 रुपए, 150 यूनिट पर 22.50 रुपए का असर पड़ेगा।

    वहीं किसानों को 10 एचपी विद्युत भार तक 750 रुपए प्रति एचपी प्रतिवर्ष और इससे अधिक विद्युत भार पर 1500 रुपए प्रति एचपी की दर से बिल देना होगा। पहले किसानों को 10 एचपी तक 700 रुपए प्रति एचपी की दर से भुगतान करना पड़ता था। वहीं 10 एचपी से ऊपर 1400 रुपये प्रति एचपी प्रतिवर्ष देना होता था।

    बिजली दरों के नए टैरिफ को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा, अबकी बार महंगाई से राहत देने वाली सरकार का नारा देने वाली भाजपा जनता को महंगाई की आग में निरंतर झोंक रही है। पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों के बाद रसोई गैस सिलेंडर के दामों में भारी वृद्घि और अब बिजली की दरो में वृद्घि।

    उन्होने आगे कहा, महंगाई डायन खाय जात है का नारा देने वाले कोरोना काल में भी जनता को महंगाई की मार के बोझ तले कुचल रहे है। कांग्रेस सरकार ने जनता को 100 रुपए में 100 यूनिट बिजली देकर राहत प्रदान की थी लेकिन भाजपा सरकार ने बिजली महंगी कर जनता के साथ बड़ा धोखा किया है।

  • आजादी के 73 साल बाद भी इस प्रसिद्ध पर्यटक स्थल के एक गांव में नहीं पहुंची सड़क

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    मसूरी(देहरादून)। आजादी के 73 साल बाद भी जौनपुर विकासखंड के खरक और मेलगढ गांव तक सड़क नहीं पहुंच पाई है। वैसे तो सुमनक्यारी-बणगांव-सुरांसू-खरकगांव तक 12 किमी लंबी सड़क बनाने के लिए वित्तीय स्वीकृति 17 वर्ष पहले ही मिल गई थी। लेकिन, 10 किमी सड़क बनाने के बाद काम बंद कर दिया गया। बाकी के दो किमी हिस्से में सड़क बनाया जाना अभी भी बाकी है। स्थानीय निवासी इसको लेकर कई बार अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन खरक गांव तक सड़क नहीं पहुंची।

    वर्ष 2003 में सुमनक्यारी से खरक गांव तक 12 किमी लंबी सड़क के निर्माण का जिम्मा लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) थत्यूड़ डिविजन को दिया गया था। 2004 में इस सड़क का निर्माण शुरू हुआ। सुरांसू गांव तक 10 किमी सड़क वर्ष 2007 में बनकर तैयार हो गई। इसके बाद अचानक काम रोक दिया गया। खरक और सुरांसू गांव के बीच सड़क की एक जॉब की कटिंग होने के बावजूद बीते 13 साल में इस सड़क का निर्माण पूरा नहीं किया गया। इसकी वजह जानने और खरक तक सड़क पहुंचाने के लिए ग्रामीणों ने कई बार लोनिवि के अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर काटे, मगर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

    खरक गांव के श्याम सिंह रावत, शूरवीर सिंह तोमर, दीवान सिंह रावत, कुंवर सिंह रावत, बिरेंद्र सिंह रावत, नरेंद्र सिंह रावत, सुरेश रावत, सुनील रावत, ज्ञानदास, सोबनी लाल, मनोज वर्मा आदि का कहना है कि गांव तक सड़क नहीं होने से काश्तकारों की फसल समय पर बाजार नहीं पहुंच पाती है। सड़क न होने से कई बार मरीजों की भी जान पर बन आती है। उधर, लोनिवि के अधिशासी अभियंता थत्यूड़ डिविजन रजनीश सैनी का कहना है कि उन्होंने सुरांसू से खरक तक दो किमी सड़क निर्माण के लिए दोबारा एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा है।

    जिलाधिकारी का आदेश भी नहीं माना

    खरक गांव के ही सूरत सिंह खरकाई ने बताया कि वर्ष 2018 में टिहरी की तत्कालीन जिलाधिकारी ने कैंपटी में चौपाल कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस दौरान जिलाधिकारी से मुलाकात कर सड़क का निर्माण पूरा कराने की गुहार लगाई गई थी। इसपर जिलाधिकारी ने लोनिवि थत्यूड़ डिविजन को इस संबंध में तत्काल कार्यवाही के लिए आदेशित किया। बावजूद इसके मामले में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया। अगस्त 2020 में जिला पंचायत सदस्य कविता रौंछेला ने भी इस बाबत जिलाधिकारी टिहरी मंगलेश घिल्डियाल को आवेदन पत्र दिया था। जिलाधिकारी घिल्डियाल ने भी लोनिवि थत्यूड़ को तत्काल कार्यवाही का आदेश दिया, लेकिन हालात जस के तस हैं।

     

  • जदयू, ‘हम’ तैयार पश्चिम बंगाल चुनाव में जोर आज़माइस के लिए

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    पटना। अगले साल में बिहार के सियासत का रंग पश्चिम बंगाल में भी देखने को मिलेगा। बिहार में जदयू के साथ सरकार चला रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अगले साल बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में पूरे दमखम के साथ तो उतरेगी ही, बिहार में उसकी सहयोगी जदयू भी वहां 75 सीटों पर अपनी तैयारी कर रही है। इसके अलावा बिहार सरकार में शामिल हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) की राजनीति भी पश्चिम बंगाल चुनाव में दिखेगी।

    पश्चिम बंगाल में अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए बिहार के राजनीतिक दलों की तैयारियां शुरू हो गईं हैं। बिहार में भाजपा की सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाइटेड भी पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में कूदने की तैयारी में है।

    जदयू के पश्चिम बंगाल प्रभारी और विधान पार्षद गुलाम रसूल बलियावी ने स्पष्ट किया कि जदयू पश्चिम बंगाल की 75 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रही है।

    सूत्रों का कहना है कि भाजपा और जदयू के बीच बात नहीं बनी तो दोनों दल अलग-अलग चुनाव मैदान में नजर आ सकते हैं।

    जदयू के महासचिव के. सी. त्यागी भी कहते हैं कि उनकी पश्चिम बंगाल चुनाव की तैयारी चल रही है। हालांकि अभी सीटों की संख्या तय नहीं है।

    विधान पार्षद बलियावी कहते हैं कि पश्चिम बंगाल इकाई पिछले तीन सालों से सक्रिय है और 75 सीटों को चुनाव लड़ने के लिए चिन्हित किया गया है। बंगाल इकाई के नेताओं के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद अंतिम फैसला कर लिया जाएगा।

    जदयू और भाजपा के आपसी टकराव के संबंध में पूछे जाने पर बलियावी कहते हैं, दोनों दलों के नेतृत्व के बीच इस बाबत बातचीत होगी। अगर दोनों दलों में सहमति बनी तो साथ लड़ेंगे।

    उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि भाजपा के साथ केवल बिहार में गठबंधन है, इसके पहले भी जदयू बंगाल में अकेले चुनाव लड़ चुकी है।

    इधर, सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल के कई नेता गुरुवार को यहां जदयू प्रदेश कार्यालय में नीतीश कुमार से मुलााकत कर चुके हैं और वहां के होने वाले चुनाव को लेकर चर्चा भी हुई है।

    इधर, बिहार में मुख्य विपक्षी पाार्टी राजद भी पश्चिम बंगाल के चुनाव में नजर आएगी। राजद नेता श्याम रजक ने कहा कि पश्चिम बंगाल में राजद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को फिर से मुख्यमंत्री बनाने के लिए प्रयास करेगी। उन्होंने हालांकि चुनाव लड़ने के प्रश्न को टाल दिया।

    इधर, बिहार चुनाव में जदयू, भाजपा के साथ चुनाव मैदान में उतरे पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा ने भी पश्चिम बंगाल चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारने की घोषणा की है।

    ‘हम’ के प्रवक्ता दानिश रिजवान ने कहा कि अभी कई पार्टियों से बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि अगर किसी अन्य दल से समझौता नहीं भी होता है तो बंगाल चुनाव में ‘हम’ उतरेगी।

  • जानिए क्‍या बोले आप प्रदेश प्रभारी दिनेश मोहनिया 2022 की चुनावी जंग के बारे में

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    देहरादून: आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश प्रभारी दिनेश मोहनिया का कहना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया के उत्तराखंड दौरे से विपक्षी पार्टियों में खौफ का माहौल है। उन्होंने वर्ष 2022 में प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा और आप के बीच सीधी जंग बताते हुए कहा कि आगामी चुनाव में कांग्रेस कहीं खड़ी नजर नहीं आ रही है।

    प्रेस बयान जारी कर दिनेश मोहनिया ने पार्टी और मनीष सिसोदिया पर कटाक्ष करने पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को आड़े हाथों लिया। मोहनिया ने कहा कि जो गलती कांग्रेस की दिवंगत नेता शीला दीक्षित ने दिल्ली में की थी। वही गलती अब उत्तराखंड में प्रीतम सिंह कर रहे हैैं। बकौल मोहनिया, उस दौरान शीला दीक्षित ने भी कहा था कि आप का कोई जनाधर और अस्तित्व नहीं है, लेकिन नतीजा सामने है। उन्होंने कहा कि प्रीतम सिंह कांग्रेस की चिंता करें। वह एक डूबे हुए जहाज के कप्तान हैैं। आम आदमी पार्टी का भविष्य उत्तराखंड की जनता खुद तय करेगी। उन्होंने कहा, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की इस तरह की बयानबाजी इशारा करती है कि कांग्रेस को अपना वोट बैंक खिसकने का डर सताने लगा है। उन्होंने मनीष सिसोदिया के दौरे को लेकर कहा कि कुमाऊं में कार्यकत्र्ताओं में काफी जोश देखने को मिला। वही जोश अब गढ़वाल में भी देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि जब कोई पार्टी चुनाव लड़ती है तो उसका शीर्ष नेतृत्व अपनी पूर्ण भागीदारी चुनाव में निभाता है।

    पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने का सिलसिला जारी

    आप की नीतियों से प्रभावित होकर हर वर्ग के व्यक्तियों का पार्टी से जुडऩे का सिलसिला जारी है। गुरुवार को प्रदेश कार्यालय में प्रदेश प्रवक्ता उमा सिसोदिया के नेतृत्व में नवाब सिद्दीकी, उजाला अंसारी, शायर शौहर जलालाबदी, फिगार साहब समेत 60 व्यक्तियों ने आप का दामन थामा।

    कार्यकर्त्‍ताओं को किसान बनाकर रैली निकलवा रही त्रिवेंद्र सरकार: आनंद

    आप के प्रदेश प्रवक्ता रविंद्र आनंद ने बयान जारी कर कहा कि पहले हरिद्वार और फिर ऊधमसिंह नगर में त्रिवेंद्र सरकार ने भाजपा कार्यकत्र्ताओं को किसान बनाकर किसान रैली निकाली। आप प्रवक्ता ने कहा कि पहले तो त्रिवेंद्र सरकार के मंत्री किसानों को खालिस्तानी और उग्रवादी कह रहे हैं। उसके बाद अपने ही कार्यकत्र्ताओं को किसान बनाकर उनसे रैली निकलवाकर भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। इससे साफ है कि केंद्र और राज्य सरकार किसान आंदोलन से डरी हुई है और नकाब पहनकर जनता में भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है।

     

  • पीएम मोदी : आज करेंगे मध्य प्रदेश के किसानों से बातचीत, नए कृषि कानूनों को लेकर करेंगे संवाद

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    भोपाल, देश में जारी किसान आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज मध्य प्रदेश के किसानों से बातचीत करेंगे। देश के कुछ किसानों और संगठनों की ओर से दिल्ली में किए जा रहे आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दोपहर दो बजे मध्य प्रदेश के किसानों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बात करेंगे। इस दौरान पीएम मोदी नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों से संवाद करेंगे।

    इस दौरान वह कृषि कानूनों को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर एक बार फिर स्थिति साफ कर सकते हैं। किसान सम्मेलन पूरे प्रदेश में आयोजित किए जाएंगे, लेकिन राज्य स्तरीय कार्यक्रम रायसेन में होगा, जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी हिस्सा लेंगे।

    यहां से प्रदेश के करीब 35.50 लाख किसानों के बैंक खातों में अतिवृष्टि और कीट व्याधि से हुए खरीफ फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए 1,600 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता ट्रांसफर की जाएगी। इस दौरान शिवराज सिंह भी किसानों को संबोधित करेंगे। सम्मेलनों की तैयारी को लेकर उन्होंने गुरुवार को सभी कलेक्टरों के साथ वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिये बैठक करके आवश्यक निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को बताया कि प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले किसानों के खातों में राशि ट्रांसफर की जाएगी। सम्मेलन में किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड देने के साथ अन्य योजनाओं का लाभ भी दिलाया जाएगा। रायसेन में होने वाले राज्य स्तरीय सम्मेलन में 20 हजार किसान हिस्सा लेंगे। वहीं, जिला और ब्लाक स्तर पर भी सम्मेलन होंगे।

    इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को अपने एक संबोधन में कहा था कि किसानों को साजिश के तहत गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने बिना कांग्रेस का नाम लिए कहा कि विपक्ष किसानों के कंधों पर रखकर बंदूक चला रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के आसपास जमा हुए किसानों को साजिश के तहत गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो लोग सत्ता में रहते हुए किसानों का भला नहीं कर पाए वे अब उन्हें गुमराह कर भ्रमित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं दोहराना चाहता हूं कि मेरी सरकार किसानों की सभी आशंकाओं का समाधान करने के लिए 24 घंटे तैयार है।

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज मध्य प्रदेश के किसानों को संबोधित करेंगे। आज प्रदेश में 35 लाख किसानों को 16 सौ करोड़ रुपये की राहत राशि भी दी जाएगी। पीएम मोदी वीडियो कांफ्रेंसिंग से किसानों को संबोधित करेंगे। इस दौरान कई मुद्दों पर वह किसानों से बातचीत करेंगे।

  • कांग्रेस बंटी बिहार में शराबबंदी को लेकर, बहस का दौर शुरू

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    पटना। बिहार में विपक्षी दलों के महागठबंधन में शामिल कांग्रेस विधायक दल के नेता अजीत शर्मा के बिहार में लागू शराबबंदी कानून को समाप्त करने की मांग को लेकर उनकी ही पार्टी में विरोध प्रारंभ हो गया। उनकी मांग के विरोध में कदवा के कांग्रेस विधायक शकील अहमद ही खड़े हो गए। इसके बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ने सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग तक कर डाली, जिससे पार्टी में ही मतभेद उभरकर सामने आ गया। कांग्रेस के विधायक अजीत शर्मा ने शराबबंदी कानून को समाप्त करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक पत्र लिखा। तीन दिन पहले लिखे पत्र में शर्मा ने कहा कि, “शराबबंदी पूरी तरह असफल है। अन्य राज्यों से अवैध नकली शराब की सप्लाई से लोगों की सेहत खराब हो रही है।”

    शर्मा ने स्वीकार किया कि 2016 में जब राज्य में शराबबंदी लागू हुई, कांग्रेस उस सरकार में शामिल थी। कांग्रेस ने समर्थन भी किया था। लेकिन, अब लगता है कि यह कानून अपने मकसद में कामयाब नहीं हुआ। उन्होंने दो सुझाव देते हुए कहा कि शराब के मूल्यों में वृद्धि की जाए और उससे हासिल धन को विकास योजनाओं पर खर्च किया जाए।

    शर्मा के इस बयान के बाद उनकी ही पार्टी के विधायक शकील अहमद ने विधायक दल के नेता अजीत शर्मा के शराबबंदी हटाने की मांग को अनुचित ठहराया है। उन्होंने कहा है कि यह पार्टी की राय नहीं है, उनकी व्यक्तिगत राय हो सकती है।

    उन्होंने कहा, शराबबंदी कानून सबकी सहमति से लागू हुआ था। कांग्रेस भी उस वक्त महागठबंधनकी नीतीश सरकार में शामिल थी। कानून को सख्ती से लागू करने की मांग हो सकती है, मगर कानून खत्म करने की मांग जायज नहीं है।

    इधर, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ने इसके लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून के लागू हुए चार साल गुजर गए हैं, इस कारण इसको लेकर समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को इसके लिए सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए।

    बहरहाल, कांग्रेस विधायक दल के नेता शर्मा की शराबबंदी को समाप्त करने की मांग को लेकर राज्य में नई बहस का दौर प्रारंभ हो गया है। अब देखना है कि सरकार क्या फैसला लेती है।

  • बेरोजगारी और किसानों के मुद्दों पर बनाएंगे दबाव: नेता प्रतिपक्ष हृदयेश

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    देहरादून। कांग्रेस विधानसभा सत्र में बेरोजगारी और किसानों के मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाएगी। नेता प्रतिपक्ष डॉ इंदिरा हृदयेश ने कहा कि पार्टी विधायक जन सरोकारों को लेकर सदन में सक्रिय रहेंगे। प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव के निर्देश पर नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने सभी पार्टी विधायकों के साथ वर्चुअल बैठक की।

    बैठक में तय किया गया कि किसान बिल के विरोध में आंदोलनरत किसानों के मुद्दे को सदन में प्रमुखता से उठाया जाएगा।  21 दिसंबर को एनएसयूआई और युवा कांग्रेस बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर विधानसभा का घेराव करेगी। सदन में इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाने का निर्णय लिया गया। डॉ. हृदयेश ने कहा कि प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त है। अब तक कई मामले सामने आ चुके हैं।

    मुख्यमंत्री के स्टिंग से जुड़े मामले के साथ ही श्रम विभाग में कर्मकार कल्याण बोर्ड में करोड़ों रुपये के घोटाले लगातार सामने आ रहे हैं। विकास प्राधिकरणों में भ्रष्टाचार से जनता त्रस्त है। सरकार लगातार इन मुद्दों से बचने की कोशिश करती रही है। उन्होंने बताया कि सभी विधायकों ने क्षेत्रीय समस्याओं के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इन सुझावों को लेकर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। प्रदेश की जनता सरकार की अकर्मण्यता से परेशान है।

    बड़ी तादाद में लोग सेवा से निकाले गए हैं। जो शेष हैं, उन्हें वेतन की दिक्कत पेश आ रही है। सरकार नई नौकरियां सृजित करने में विफल रही है। कांग्रेस इन सभी मुद्दों पर सदन के भीतर सरकार से जवाब मांगेगी। उन्होंने कहा कि विधानसभा सत्र की अवधि काफी कम है। इसे बढ़ाने के लिए भी दबाव बनाया जाएगा।

     

  • पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से सुवेंदु अधिकारी ने दिया इस्तीफा, तृणमूल कांग्रेस से तोड़ा नाता

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    कोलकाता। पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुवेंदु अधकारी ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। अधिकारी ने तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी को संबोधित करते हुए एक आधिकारिक पत्र लिखा और अपना इस्तीफा दे दिया।

    उन्होंने कहा, “मैं अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) के सदस्य के रूप में और साथ ही पार्टी में अन्य पदों से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं। मैं उनके द्वारा दी गई सभी चुनौतियों और अवसरों के लिए आभारी हूं। पार्टी के सदस्य के रूप में बिताए गया समय मेरे लिए महत्वपूर्ण रहेगा।”

    अधिकारी पहले ही राज्य विधानसभा से इस्तीफा दे चुके हैं। वह विधानसभा भवन गए और सचिवालय में एक हस्तलिखित पत्र दाखिल किया, क्योंकि स्पीकर बिमान बनर्जी उनके कार्यालय में मौजूद नहीं थे।

    इससे पहले, अधिकारी ने पिछले महीने 27 नवंबर को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले राज्य मंत्रिमंडल से मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने इससे दो दिन पहले हुगली रिवर ब्रिज कमिश्नर (एचआरबीसी) के अध्यक्ष पद को भी छोड़ दिया था।

    सूत्रों ने कहा कि अभिषेक बनर्जी और राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर द्वारा लिए गए संगठनात्मक फैसलों से अधिकारी दुखी थे।