Category: state-news

  • मंत्रियों का फीडबैक बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा ने मांगा 20 दिन में

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    देहरादून। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राज्य सरकार की उपलब्धियों पर संतोष जताते हुए जिलों के प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने जिलों में प्रवास के निर्देश दिए हैं। इस दौरान वे पार्टी संगठन से समन्वय बनाते हुए कार्यकर्त्‍ताओं के साथ विमर्श करेंगे। साथ ही सरकार की पांच-पांच उपलब्धियों के अलावा केंद्र पोषित योजनाओं के संबंध में आमजन से चर्चा करेंगे। ऐसा ही क्रम विधायकों, दायित्वधारियों का भी चलेगा। नड्डा ने यह भी कहा कि मंत्रियों के प्रवास कार्यक्रमों के संबंध में वह 20 दिन में फीडबैक देखेंगे, जो पार्टी संगठन के माध्यम से उन्हें उपलब्ध कराया जाएगा।

    उत्तराखंड प्रवास के अंतिम दिन भाजपा अध्यक्ष नड्डा ने सोमवार को बीजापुर गेस्ट हाउस में मुख्यमंत्री एवं उनके मंत्रिमंडल के साथ सरकार के कामकाज की समीक्षा की। इस दौरान सरकार के प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने सरकार के अब तक के कार्यकाल की उपलब्धियों को लेकर प्रस्तुतीकरण दिया। नड्डा ने उपलब्धियों पर संतोष जताया और कहा कि उपलब्धियां और सरकार की योजनाएं आमजन के बीच जानी चाहिए। इसके लिए मंत्रियों को भी पहल करनी होगी।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि पार्टी संगठन से समन्वय के साथ सभी जिलों के प्रभारी मंत्री अपने-अपने जिलों में प्रवास करें। इस दौरान कम से कम पांच बड़ी उपलब्धियों के साथ ही केंद्र की योजनाओं के बारे में जनता को अवगत कराएं। उन्होंने कहा कि मंत्रियों की भांति दायित्वधारी जिलों और विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में प्रवास करें।

    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देशों के अनुसार सभी प्रभारी मंत्री जिलों में प्रवास के दौरान रात्रि विश्राम करेंगे और एक कार्यकर्त्‍ता के घर भोजन करेंगे। साथ ही भ्रमण में पार्टी पदाधिकारियोंको भी साथ लेंगे। सरकार की उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण भी किया जाएगा। भगत ने बताया कि मुख्यमंत्री के प्रवास के दौरान वह उनके साथ रहेंगे, जबकि मंत्रियों के दौरों में प्रांतीय उपाध्यक्ष, महामंत्री व अन्य प्रांतीय पदाधिकारी। उन्होंने बताया कि 26 दिसंबर को पार्टी की कोर कमेटी की बैठक होगी, जिसमें मंत्रियों के प्रवास कार्यक्रम के संबंध में फीडबैक लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजा जाएगा।

  • टिकट मशीन से रोडवेज ने सांसद-विधायक हटाए; अब ये हैं मुफ्त यात्रा की श्रेणी में

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    देहरादून। सांसद और विधायक कोटे की मुफ्त यात्रा के नाम पर हुए टिकट घपले के बाद अब रोडवेज मुख्यालय ने अपनी टिकट मशीन से सांसद, विधायक और पूर्व विधायक की श्रेणी को हटा दिया है। मुफ्त यात्रा की श्रेणी में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी हटा दिए गए हैं। टिकट मशीन में जनकल्याणकारी मुफ्त यात्रा की पहले 16 श्रेणी थीं, जिन्हें घटाकर अब नौ कर दिया गया है। कोरोना काल के दौरान हटाई गई छात्राओं की मुफ्त यात्रा की श्रेणी को फिर से मशीन में जोड़ लिया गया है। सभी परिचालक को आदेश दिए गए हैं कि मुफ्त यात्रा कर रहे यात्री के पहचान पत्र की संख्या टिकट मशीन में निर्धारित श्रेणी में दर्ज की जाए।

    सांसद और विधायक रोडवेज की बस में अमूमन यात्रा नहीं करते। इसके बावजूद दो साल पहले इनकी यात्रा के नाम पर रोडवेज के रुड़की, देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी आदि डिपो ने लाखों रुपये के बिल बना दिए थे। मामले ने तूल पकड़ा और जांच हुई तो 35 परिचालक को बर्खास्त कर दिया गया था। कुछ मामलों में गलती टिकट मशीन की भी पाई गई थी। यह पता चला था कि प्रविष्टि दर्ज करने के दौरान परिचालकों से चूक हुई है।

    रोडवेज ने इस घटनाक्रम से कुछ समय पहले ही मुफ्त यात्रा की श्रेणी के क्रमांक में बदलाव किया था। सांसद व विधायक की श्रेणी के क्रमांक भी बदल गए थे, मगर कईं परिचालक पुराने क्रमांक पर ही मुफ्त यात्रा की प्रविष्टि दर्ज कर गए थे, जो नए क्रमांक में तहत सांसद और विधायक श्रेणी के थे। वहीं, कुछ परिचालक ने पता होने के बाद भी बेटिकट यात्रा कराने के लिए मशीन में गलत प्रविष्टि दर्ज की थी।

    इस घपले के बाद रोडवेज मुख्यालय ने टिकट सॉफ्वेयर में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी थी। इस साल बीच में कोरोना काल के चलते यह तैयारी ठप पड़ गई थी, लेकिन अब रोडवेज मुख्यालय ने अपने सॉफ्टवेयर और टिकट मशीन में बदलाव कर दिए हैं। इसमें ऐसी सभी श्रेणी हटा दी गई हैं, जिनमें यात्रा की संभावना नामुमकिन रहती है। इन श्रेणी के लिए नई व्यवस्था की गई है।

    सांसद-विधायक के लिए नई व्यवस्था

    रोडवेज में सांसद, विधायक और पूर्व विधायक को मुफ्त यात्रा का प्रावधान खत्म नहीं किया गया है। एक सहयात्री भी इनके साथ मुफ्त यात्रा कर सकता है, लेकिन शर्त है कि सांसद, विधायक, पूर्व विधायक खुद बस में मौजूद हों। नई व्यवस्था में यदि यह बस में यात्रा करने आते हैं तो टिकट-मशीन के बदले इनकी प्रविष्टि मार्ग-प्रपत्र में दर्ज की जाएगी।

    15 अंक हो सकते हैं दर्ज

    पहले टिकट मशीन में पहचान पत्र का अधिकतम नौ अंक का नंबर ही दर्ज किया जा सकता था, जबकि आधार कार्ड में 12 अंक होते हैं। कईं अन्य पहचान पत्र आधार कार्ड जैसे होते हैं, जिनमें अंक की संख्या ज्यादा होती है। नए बदलाव के बाद टिकट मशीन में पहचान पत्र के 15 अंक दर्ज हो सकते हैं।

    बदलाव के बाद टिकट मशीन में मुफ्त यात्रा की श्रेणी

    1: छात्राएं

    2: सौ फीसद दिव्यांग व एक सहवर्ती

    3: अन्य दिव्यांग

    4: मान्यता प्राप्त जिला स्तरीय पत्रकार

    5: मान्यता प्राप्त प्रदेश स्तरीय पत्रकार

    6: वरिष्ठ नागरिक

    7: मासिक पास

    8: राज्य आंदोलनकारी

    9: राज्य आंदोलनकारी की विधवा

    ये श्रेणी हटाई गईं

    सांसद, विधायक, पूर्व विधायक, सांसद के एक सहयात्री, विधायक के एक सहयात्री, पूर्व विधायक के एक सहयात्री, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी।

    रोडवेज महाप्रबंधक दीपक जैन ने बताया कि अमूमन सांसद, विधायक या फिर पूर्व विधायक बस में यात्रा नहीं करते। इसलिए टिकट मशीन में दर्ज मुफ्त यात्रा की श्रेणी से इनकी श्रेणी हटा दी गई है। यदि यह यात्रा करेंगे तो उसी समय मार्ग-प्रपत्र में प्रविष्टि दर्ज कर दी जाएगी।

  • तोमर ने कहा- घोर निंदनीय बंगाल में नड्डा के काफिले पर हमला…

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    कोलकाता/भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीजेपी काफिले पर हुए हमले के बाद ममता सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने कहा ममता दीदी ने बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी.नड्डा के कार पर हमला करवाया है। यह लोकतंत्र की हत्या का प्रयास है जिसे पश्चिम बंगाल की जनता सहन नहीं करेगी। ममता दीदी नड्डा जी की गाड़ी पर फेका गया पत्थर बंगाल में टीएमसी के कफन में अंतिम कील साबित होगा।

    तोमर ने बोला ममता सरकार पर हमला, कहा- ये घटना निंदनीय है, सरकार

    केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने ममता सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने कहा, कल भी समाचार आया था कि जैसी सुरक्षा नड्डा जी को अपेक्षित थी वो उन्हें नहीं दी गई। सामान्यतः मतभिन्नता लोकतंत्र में स्वाभाविक है पर ऐसी घटनाएं देखने को नहीं मिलती थी। इस घटना पर सरकार की अनदेखी घोर निंदनीय है। मैं संबंधित लोगों पर कार्रवाई की मांग करता हूं।

    अनुराग ठाकुर ने बोला ममता सरकार हमला

    केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बीजेपी काफिले पर हुए हमले के बाद ममता सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने कहा सैकड़ों बीजेपी कार्यकर्ताओं की जान पिछले कुछ सालों में पश्चिम बंगाल में गई हैं। हिंसा और हत्या का दौर लगातार जारी है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर जिस तरह से पथराव किया गया है लोकतंत्र में इससे बड़ी हत्या कुछ नहीं हो सकती है।

    बुलेट प्रूफ गाड़ी की वजह से हूं सुरक्षित : जे.पी.नड्डा

    कोलकाता से 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर जाते समय तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हुए हमले पर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि वे इसलिए सुरक्षित रहे, क्योंकि उनके पास बुलेट प्रूफ गाड़ी थी। जबकि पथराव के कारण अन्य भाजपा नेताओं के वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी काफिले पर हुए हमले के दौरान घायल हुए हैं। पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे के आखिरी दिन दक्षिण 24 परगना जिला में गुरुवार को कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने कहा, आज मैं यहां आया हूं, तो रास्ते में मुझे जो ²श्य देखने को मिला, वो इस बात को बताता है कि ममता बनर्जी के राज में बंगाल अराजकता और असहिष्णुता का पर्यायवाची बन चुका है। आज मैं यहां पहुंचा हूं तो मां दुर्गा के आशीर्वाद से पहुंचा हूं। टीएमसी के गुंडों ने प्रजातंत्र का गला घोंटने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

    भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, कैलाश विजयवर्गीय, राहुल सिन्हा को देखिए, इनकी गाड़ियों को देखिए। मैं तो इसलिए सुरक्षित हूं क्योंकि मेरे पास बुलेट प्रूफ गाड़ी थी। वरना आज कोई ऐसी गाड़ी नहीं थी जिस पर हमला न हुआ हो। ये अराजकता ज्यादा दिन नहीं चलने वाली है, ममता जी की सरकार यहां से जाने वाली है, और बंगाल में कमल खिलने वाला है।

    भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पश्चिम बंगाल में पुलिस और प्रशासन के राजनीतिकरण का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, यहां पुलिस और प्रशासन का राजनीतिकरण हो रहा है। हमें इसे रोकना है और यहां कमल खिलाना है।

  • केंद्र सरकार तैयार किसानों की 5-6 मांगों को मानने के लिए- हरियाणा सीएम

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    चंडीगढ़ । हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्‌टर ने कहा कि संतोष का विषय ये है कि केंद्र और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद उनकी बहुत सी मांगों पर सरकार ने मानने के संकेत दिए हैं। उनकी 5-6 मांगों को मानने के लिए केंद्र सरकार ने कहा है। किसानों से अपील है कि जो समाधान किया जा रहा है ये उचित है इसे मानकर धरना समाप्त करें ।

  • DSP ने ” International Anti Corruption Day ” पर दिया भाषण, कोई घूस मांगे तो 1064 पर काॅल करें, खुद एक घंटे बाद ₹ 80 हजार घूस लेते गिरफ्तार

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    राजस्थान में बुधवार को एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस पर भाषण देने वाले डीएसपी को महज एक घंटे बाद ही घूस लेते हुए पकड़ा गया दरअसल, सवाई माधोपुर में एसीबी कार्यालय में अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार दिवस पर समारोह आयोजित किया गया। इसमें डीएसपी मीणा बतौर मुख्य वक्ता मौजूद थे। वहां उन्होंने भाषण दिया-

    ‘हमें पूरी ईमानदारी के साथ भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त करना है। केंद्र और राज्य सरकार का कोई भी कर्मचारी घूस मांगे तो टोल फ्री 1064 या हेल्पलाइन नंबर 9413502834 पर किसी भी समय पर कॉल या व्हाट्सएप कर सकते हैं।’

    क्या है सवाई माधोपुर मासिक बंधी कांड?
    बता दें कि बुधवार को राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो मुख्यालय जयपुर की टीम ने सवाई माधोपुर एसीबी चौकी में कार्रवाई की है। यहां पर एसीबी के डीएसपी भैरूलाल मीणा को अस्सी हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था। रिश्वत की यह राशि सवाई माधोपुर जिला परिवहन अधिकारी (डीटीओ) महेश चंद मीणा से बतौर मासिक बंधी ली गई थी।

    पहली बार पकड़ा गया ACB का डीएसपी 
    राजस्थान एसीबी ने एंटी करप्शन डे पर दो अनूठे मामले पकड़े हैं। बारां जिला कलेक्टर इंद्रसिंह राव के पीए महावीर नागर को एक लाख 40 हजार की घूस लेते पकड़ा है। मामले में जिला कलेक्टर इंद्रसिंह राव का भी नाम आने के कारण राज्य सरकार ने उन्हें एपीओ कर दिया है। कलेक्टर पद पर रहते हुए रिश्वत कांड में एपीओ होने वाले राव राजस्थान के पहले अफसर हैं। इधर, सवाई मोधापुर एसीबी के डीएसपी को पकड़ा है। यह भी अपने आप पहला केस है जब एसीबी के ही डीएसपी स्तर के अधिकारी को घूस लेते धरा गया है।

    कौन है रिश्वतखोर डीएसपी भैरूलाल मीणा?
    एसीबी के डीजी बीएल सोनी ने बताया कि आरोपी डीएसपी भैरूलाल मीणा कोटा की आकाशवाणी कॉलोनी का रहने वाला है। सवाईमाधोपुर एसीबी चौकी में बतौर प्रभारी कार्यरत था। उसके खिलाफ बीते दो-तीन माह से लगातार मासिक बंधी की शिकायत मिल रही थी। बंधी भी वह एसीबी चौकी अफसरों को बुलाकर लेता था। इसलिए टीम लगातार उस पर नजर रख रही थी।

    एसीबी के डीएसपी को मासिक बंधी देने आया था डीटीओ
    जयपुर से भ्रष्टाचारा निरोधक ब्यूरो की टीम सवाई माधोपुर एसीबी कार्यालय पहुंची तो वहां करौली जिले के दलपुरा निवासी सवाई माधोपुर डीटीओ महेश चंद मीणा मासिक बंधी के 80 हजार रुपए देने आए हुए थे। जयपुर एसीबी टीम ने डीटीओ को रिश्वत देते और डीएसपी को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। डीटीओ सवाई माधोपुर में किराए के मकान में रहते हैं। एसीबी की तलाशी में उनके आवास से 1.61 लाख रुपए नकद मिले हैं।

  • एक ही सवाल उठ रहा बार-बार, आखिर कब अस्तित्व में आएगा ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’

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    देहरादून। ‘दुविधा में दोऊ गए, माया मिली न राम’। उत्तराखंड के वन्यजीव महकमे पर यह पंक्तियां एकदम सटीक बैठती हैं। ज्यादा वक्त नहीं बीता, जब राजाजी टाइगर रिजर्व से सटे हरिद्वार क्षेत्र में हाथियों के उत्पात को थामने के मद्देनजर ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ विकसित करने पर जोर दिया गया। इसके तहत चिह्नित किए गए उत्पाती हाथियों पर नजर रखने को उन पर रेडियो कॉलर लगाने का निर्णय लिया गया। इससे हाथियों के मूवमेंट का पता चलने पर संबंधित क्षेत्र में तैनात टीम को अलर्ट करने की बात थी। अक्टूबर में एक हाथी पर रेडियो कॉलर लगाया गया, मगर नवंबर में करंट से उसकी मौत हो गई। इसके बाद तो महकमा सहम ही गया। नतीजतन, हाथियों पर रेडियो कॉलर की मुहिम भी थम गई, जबकि हरिद्वार क्षेत्र में हाथियों का खौफ निरंतर बना हुआ है। उस पर अगले साल वहां कुंभ का भी आयोजन है। ऐसे में चिंता ज्यादा बढ़ गई है।

    पता चले, जंगलों में कैसे लगी आग

    मौसम भले ही सर्दियों का हो, मगर उत्तराखंड में जंगलों की आग इन दिनों चर्चा में है। फायर सीजन (15 फरवरी से 15 जून ) में तो हर साल जंगल धधकते हैं, लेकिन इस मर्तबा सर्दी की दस्तक के साथ ही ये सुलग रहे हैं। लिहाजा, अब तय हुआ है कि फायर सीजन वर्षभर रहेगा। बावजूद इसके सवाल अपनी जगह खड़ा है कि आखिर सर्दियों में जंगल क्यों झुलस रहे हैं। वन महकमे के मुताबिक इस बार अक्टूबर से बारिश न होने से जंगलों में नमी घटी है। पर गौर करने वाली बात ये है आग का प्रमुख कारण तापमान होता है। तो क्या यह माना जाए कि सर्दियों में भी तापमान में कुछ असामान्य परिवर्तन आया है। यही नहीं, वनों में आग के पीछे कुदरती कारण व मानवीय चूक हैं। ये कभी भी भारी पड़ सकते हैं। ऐसे में जंगलों में आग की वजह का पता लगना जरूरी है।

    उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भी निरंतर सक्रियता

    उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में वन महकमे की बढ़ी सक्रियता कुछ सुकून देने वाली है। अभी तक दुरूह परिस्थितियों वाले इस क्षेत्र में वनकर्मियों की गश्त आदि के दावों को संदेह की दृष्टि से देखा जाता था, मगर अब परिस्थितियां बदली हैं। कार्मिकों की लगातार गश्त और सक्रियता का ही परिणाम है कि हाल में नंदादेवी बायोस्फीयर रिजर्व, गोविंद वन्यजीव विहार जैसे क्षेत्रों में शिकारियों व तस्करों को पकड़ा गया है। यह साबित करता है कि वहां व्यवस्था चाक-चौबंद हुई हैं और ये होनी भी चाहिए। साथ ही ये अवधारणा भी टूटी है कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा रामभरोसे है, जिसका शिकारी व तस्कर फायदा उठाते आए हैं। वन महकमे की इस पहल को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। साथ ही स्थानीय निवासियों का भी दायित्व है कि वे वन क्षेत्रों के इर्द-गिर्द किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के नजर आने पर तुरंत इसकी सूचना वनकर्मियों को दें।

    कार्बेट में महिला नेचर गाइडों की तैनाती

    वन्यजीव विविधता के लिए मशहूर उत्तराखंड के छह राष्ट्रीय पार्क, सात अभयारण्य और चार कंजर्वेशन रिजर्व अब रोजगार के क्षेत्र में भी नई इबारत लिखने जा रहे हैं। इस लिहाज से कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान की पहल सराहनीय है। वहां गाइडों की तैनाती में पहली मर्तबा महिलाओं को भी स्थान मिला है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की घोषणा के बाद कार्बेट उद्यान प्रशासन ने 50 नए गाइडों की तैनाती की है, जिनमें सात महिलाएं हैं। अब यह महिला गाइड भी कार्बेट आने वाले सैलानियों को गाइड करने लगी हैं। जाहिर है कि इस पहल से कार्बेट में महिलाओं के लिए एक नया फ्रंट खुला है। हालांकि, राष्ट्रीय उद्यान में फॉरेस्ट गार्ड से लेकर ऊपर के विभिन्न पदों पर महिला कार्मिकों की तैनाती है, लेकिन अब वे गाइड के तौर पर पर्यटन के क्षेत्र में भी आगे आई हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि अन्य संरक्षित क्षेत्रों में भी ऐसी पहल होगी।

     

  • रूठे मानसून की ‘गर्मी’ दिसंबर की ठंड पर, पिछले चार सालों के मुकाबले इस बार ये महीना सबसे ज्यादा गरम…

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    देहरादून। मानसून का सीजन सितंबर में विदा हो चुका है, लेकिन इसकी बेरुखी का असर अब तक है। दिसंबर में भी तापमान कुलांचे भर रहा है। वातावरण में नमी न होने के कारण उत्तराखंड में अब तक तापमान में गिरावट नहीं आई है। जबकि, सामान्यत: दिसंबर के प्रथम पखवाड़े में तापमान सामान्य से नीचे पहुंच जाता है, लेकिन इस बार अभी तक ज्यादातर शहरों का अधिकतम तापमान सामान्य से तीन से पांच डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान सामान्य से दो से तीन डिग्री सेल्सियस अधिक बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, तापमान चढ़ने का एक कारण पश्चिमी विक्षोभ की कम सक्रियता भी है।

    दिसंबर आधा बीतने को है और चंद दिनों में पूस का महीना शुरू हो जाएगा, जिसमें कड़ाके की ठंड हाड़ कंपा देती है, लेकिन इस बार मौसम के बदले रंग विशेषज्ञों को भी हैरान कर रहे हैं। दरअसल, मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह के मुताबिक उत्तराखंड से इस बार मानसून समय से पहले लौट गया। वहीं, पूरे सीजन में बारिश भी 20 फीसद कम हुई।

    इस दौरान कुछ ऐसे भी जिले रहे, जहां सामान्य से 40 फीसद कम बारिश रिकॉर्ड की गई। यही वहज रही कि अक्टूबर से ही वातावरण और भूमि में नमी कम रही। अब दिसंबर में भी मौसम शुष्क बना हुआ है, जिससे तापमान में खासा इजाफा हुआ। इसके अलावा हिमालय की ओर पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता भी कम रही। यही वजह है कि इस साल दिसंबर बीते चार सालों के मुकाबले ज्यादा गरम है।

    दून में दिसंबर में सर्वाधिक तापमान

    वर्ष, दिनांक, अधिकतम तापमान

    2020, 10, 27.8

    2019, 06, 26.4

    2018, 15, 25.5

    2017, 08, 26.7

    2016, 11, 29.2

     

  • 100 तक सीमित की इनडोर समारोहों में पंजाब के मुख्यमंत्री ने लोगों की संख्या

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    चंडीगढ़। शादियों और पार्टियों में कोविड -19 में बड़े पैमाने पर उल्लंघन की शिकायतों के बीच, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार को सभी शहरों में रात के कर्फ्यू के विस्तार के साथ इनडोर में 100 और बाहरी सभाओं में 250 लोगों को प्रतिबंधित करने का आदेश दिया। उन्होंने पुलिस महानिदेशक दिनकर गुप्ता को निर्देश दिया कि वे प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करें।

    राज्य में उच्च मामले की मृत्यु दर का संज्ञान लेते हुए, उन्होंने 1 जनवरी तक कर्फ्यू प्रतिबंध ( रात 10 बजे से सुबह 5 बजे) भी बढ़ाया।

    हालांकि पिछले तीन हफ्तों में पंजाब में कोरोना के मामलो में गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन मृत्यु दर चिंता का विषय बनी हुई थी, अमरिंदर सिंह ने डीजीपी को निर्देश दिया कि वे सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें, जिसमें मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग जैसी बातें शामिल हैं।

  • 80 की उम्र में शरद पवार की राजनीतिक गलियारे में मजबूत धाक बरकरार…

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    मुंबई। यह 30 सितंबर, 1993 को सुबह की ठंडी सुबह थी, जब लातूर भूकंप ने सोए हुए महाराष्ट्रवासियों को तड़के 3.56 बजे बुरी तरह झकझोर दिया था।

    उसी शाम, इस संवाददाता (तब इंडियन एक्सप्रेस, मुंबई के साथ) को उसके चीफ रिपोर्टर डी. के. रायकर ने सोलापुर के लिए एक ईस्ट वेस्ट एयरलाइंस की कार्गो फ्लाइट से भेजा था, जिससे वह जल्द ही प्रभावित क्षेत्र में पहुंच गया।

    उस रात उसे पता चला कि बगल में सर्किट हाउस बंगले में तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार के अलावा कोई भी नहीं आया था और बाद में कुछ शिष्टाचार दिखाते हुए यह रिपोर्टर अगले दिन सुबह में अपने वाहन को सीएम के काफिले के वाहनों की जमात में शामिल करने में कामयाब रहा।

    यह पवार के साथ एक शैक्षिक, तेजी से की गई यात्रा थी, क्योंकि वह गांव-गांव घूमते थे, भूकंप प्रभावित लोगों से मिलते थे, लोगों के आंसू पोंछते थे, सांत्वना देते थे। धीरे से अपने साथ मौजूद अधिकारियों को निर्देश देते जाते थे।

    सफेद शर्ट और ट्राउजर, गमबूट्स पहने हुए वह मलबे, खून और कीचड़, पानी में चले जाते और गलती से शवों पर उनके पैर पड़ जाते और जब मोटर साइकिल शाम को लौटती है, तो पवार की वेशभूषा दिन भर की दास्तां को बयां कर देती।

    देर रात, जब वह वापस आए तो वह एक साक्षात्कार अनुरोध पर सहमत देर रात लगभग 1 बजे उन्होंने सादा भोजन किया। उन्होंने दो घंटे से अधिक समय तक इस संवाददाता के सवालों के जवाब दिए, इस दौरान मदद के संबंध में हॉटलाइन पर उनकी प्रिंस ऑफ वेल्स, नेपाल सेना प्रमुख और अन्य वैश्विक दिग्गजों से बात हुई।

    आज, उनके 80 वें जन्मदिन (12 दिसंबर) की पूर्व संध्या पर, महाराष्ट्र के लोगों के लिए पवार का उत्साह कम नहीं हुआ है और उन्होंने उसी उत्साह के साथ राज्य की सेवा करना जारी रखा है, जिसे इस संवाददाता ने पहली बार उस बड़ी प्राकृतिक आपदा के दौरान देखा था।

    तब से, गोदावरी नदी का बहुत सारा पानी बह चुका है, पवार ने कांग्रेस से अलग होकर 1999 में अपनी खुद की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) बना ली और उनके और अधिक दोस्त और प्रशंसक बन गए।

    आलोचकों का मुंह बंद करते हुए उन्होंने राज्य और केंद्र दोनों में एक ही साल में सुर्खियां बटोरीं – शायद किसी भी नए राजनीतिक संगठन को सत्ता में लाने की यह सबसे तेज प्रगति थी।

    वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए, भारतीय राजनीति अभी भी पवार के बिना अधूरी है जो संभवत: भारत के अभी तक के सर्वश्रेष्ठ पीएम होंगे जिन्हें अभी भारत द्वारा चुनाव करना है।

    अपनी बेल्ट के तहत 55 वर्षों के राजनीतिक अनुभव के साथ, वह 1967 से एक भी विधानसभा या लोकसभा चुनाव नहीं हारे, तीन बार सीएम बने, साथ ही तीन बार केंद्रीय मंत्री बने, राज्य और केंद्र में विपक्ष के नेता, संसदीय दल के नेता के रूप में कार्य किया, और अन्य शीर्ष पदों पर सेवाएं दी।

    महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी या अटल बिहारी वाजपेयी के कद के कई महान नेताओं की तरह, पवार का शीर्ष राजनीतिक नेताओं के साथ व्यक्तिगत रूप से अच्छा तालमेल है। पार्टी लाइनों में कटौती करते हैं – जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं, जिन्होंने कभी उन्हें ‘राजनीतिक गुरु’ कहा था और कई लोग कठिन राजनीतिक मुद्दों पर उनकी सलाह लेते हैं।

    पवार ने 27 साल पहले लातूर की तरह ही अक्टूबर 2019 में सतारा में एक लोकसभा उपचुनाव में बारिश के बीच एक रैली को संबोधित किया था।

    नवंबर 2019 में, पवार ने एक और मिशन इम्पॉसिबल हासिल किया – मोदी, भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जैसे भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष कद्दावर नेताओं की नाक के नीचे से सत्ता छीनकर उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज कर दिखाया।

    अपने राजनीतिक करियर में, अप्रत्याशित पवार ने ‘चाणक्य’, ‘भीष्म पितामह’, ‘विली फॉक्स’, ‘मैकियावेली’, आदि कई उपाधियां हासिल की हैं।

    अप्रैल में महामारी के दौरान, उनकी बेटी, सुप्रिया सुले, सांसद, ने अपने पिता का एक वीडियो साझा किया जिसमें वह रामायण भजन गाते नजर आए लेकिन बमुश्किल चार महीने बाद उन्होंने पीएम पर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर जल्दबाजी दिखाने को लेकर निशाना साधा लेकिन उनकी (पवार की) अपनी साख बरकरार रही।

    14 नवंबर को अपनी दिवंगत मां शारदाबाई को लिखे पत्र में पवार ने उनके प्रेरणादायक यादों को याद करते हुए कहा कि कैसे उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में संतोषजनक रूप से प्रदर्शन करने के लिए नई युवा ऊर्जा के जोश को महसूस किया, जो उन्हें राजनीति का अबाध इंजन बना रहा है, जो अभी भी एक लंबी दौड़ में है।

  • रिपब्लिक टीवी के सीईओ टीआरपी घोटाले में गिरफ्तार

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    मुंबई। टीआरपी घोटाले के मामले की जांच के सिलसिले में रिपब्लिक टीवी के सीईओ विकास खानचंदानी को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। कथित टीआरपी घोटाले में गिरफ्तार होने वाले वह 13 वें व्यक्ति हैं जिसमें रिपब्लिक टीवी समेत कम से कम 3 टेलीविजन चैनलों को पुलिस ने नामजद किया था।
    हालांकि, रिपब्लिक टीवी ने रविवार को गिरफ्तारी को ‘अवैध’ करार दिया। चैनल ने कहा कि बिना सही दस्तावेजों के उन्हें उनके घर से सुबह 3 बजे गिरफ्तार किया गया है। खानचंदानी को हॉलीडे कोर्ट में पेश किए जाने की संभावना है। उनकी गिरफ्तारी के तत्काल बाद रिपब्लिक टीवी ने उनकी रिहाई की मांग करते हुए एक अभियान शुरू कर दिया है।
    चैनल ने हैशटैग फ्रीरिपब्लिकसीईओनाउ के साथ कहा, “रिपब्लिक टीवी एक स्वतंत्र समाचार संगठन पर हमलों को रोकने के लिए अदालतों के लिए राष्ट्रीय अपील करता है।”
    चैनल ने कहा कि खानचंदानी को पहले ही समन भेजा जा चुका है और मुंबई पुलिस 100 घंटे से अधिक पूछताछ कर चुकी है। साथ ही कहा कि रिपब्लिक टीवी को निशाना बनाया जा रहा है।