Category: state-news

  • फिर मिलेगी पेंशन भोपाल गैस पीड़ित विधवाओं को , बनेगा स्मारक

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    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल गैस हादसे की 36वीं बरसी के मौके पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान किया है कि इस हादसे में मारे गए लोगों की विधवाओं को मिलने वाली पेंशन फिर शुरु की जाएगी और एक स्मारक भी बनाया जाएगा ताकि लोग इस हादसे से सबक लें। राजधानी के बरकतउल्ला भवन में (सेन्ट्रल लायब्रेरी) में आयोजित प्रार्थना सभा में दो-तीन दिसंबर 1984 की दरम्यानी रात को यूनियन कार्बाइड संयंत्र से रिसी गैस में मारे गए हजारों लोगों को श्रृद्धांजलि दी गई। इस मौके पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि गैस हादसे में मारे गए लोगों की विधवाओं को मिलने वाली एक हजार रुपये की पेंशन वर्ष 2019 से बंद है, इसे फिर शुरु किया जाएगा।

    चौहान ने कहा कि भोपाल में इस हादसे की याद में स्मारक बनाया जाएगा ताकि लोगों को सबक मिले। नागासाकी और हिरोशिमा में हुए हादसे के बाद वहां स्मारक बनाया गया था, यह हमें सीख देता है कि अब और परमाणु हमला न हेा। भोपाल हादसा भी लोगों को सीख दे, इसके लिए यहां स्मारक बनाया जाएगा।

  • राज्यपाल ने राजस्थान सरकार की ओर से पारित 3 विधेयकों पर लगाई रोक

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    जयपुर । राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने केंद्रीय कृषि कानूनों को दरकिनार करने के लिए राजस्थान सरकार की ओर से दो नवंबर को पारित किए गए तीन कृषि विधेयकों पर रोक लगा दी। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने कहा कि तीनों विधेयकों को अनिश्चित काल के लिए रोक दिया गया है।

    राज्य सरकार ने सितंबर में संसद द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों में केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए ‘विवादित’ प्रावधानों को बदलने के लिए तीन कृषि विधेयकों को पारित किया है। अब ये तीन विधान राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही कानून बन सकते हैं। सूत्रों ने कहा कि राज्यपाल जब तक चाहें, तब तक इन विधेयकों को रोक सकते हैं।

    कांग्रेस देशभर में तीन केंद्रीय कृषि कानूनों पर आपत्ति जता रही है। इन कानूनों के खिलाफ राजस्थान में भी विरोध जताया गया है। दो नवंबर को राज्य सरकार की ओर से पहले से ही केंद्र द्वारा पारित कृषि कानूनों के प्रावधानों को बदलने के लिए विधानसभा में तीन कृषि विधेयक पारित किए।

    हैरानी की बात यह है कि पिछले एक महीने से इन विधेयकों को लेकर ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया, मगर महामारी विधेयक को हाल ही में राज्यपाल की मंजूरी मिली और साथ ही उन्होंने तीन कृषि विधेयकों को रोक दिया।

    इनमें पहला विधयेक कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) राजस्थान संशोधन विधेयक 2020 है, जिसमें किसान के उत्पीड़न पर सात साल जेल की सजा और पांच लाख जुर्माने का प्रावधान है।

    दूसरा विधेयक कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार राजस्थान संशोधन विधेयक है। इस विधेयक में संविदा खेती को लेकर कड़े प्रावधान है और किसान से एमएसपी से कम पर संविदा खेती का करार मान्य नहीं होने और एमएसपी से कम पर करार करने को बाध्य करने पर सात साल तक सजा और पांच लाख जुर्माने का प्रावधान किया है।

    इसके अलावा तीसरा विधेयक आवश्यक वस्तु (विशेष उपबंध और राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 है, जो सरकार को कृषि वस्तुओं पर स्टॉक सीमा लगाने का अधिकार देता है। इस प्रावधान को केंद्र ने हटा दिया था।

  • पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस की कीमतें बढ़ाना जनता के साथ विश्वासघात: गहलोत

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    जयपुर । राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस की कीमतों में बढोतरी को आम आदमी के साथ ‘विश्वासघात’ बताते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि इन्हें कम किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा कि कोरोना वायरस महामारी के दौर में केंद्र सरकार द्वारा डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस के दामों में बढ़ोतरी करना आम आदमी के साथ ‘विश्वासघात’ है।

    गहलोत ने कहा, ‘‘संप्रग सरकार के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल थीं लेकिन पेट्रोल, डीजल के दाम 70 रुपये प्रति लीटर थे। नरेंद्र मोदी सरकार के दौर में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 50 डॉलर प्रति बैरल से भी कम हो गई है लेकिन सरकार डीजल, पेट्रोल के दाम लगातार बढ़ा ही रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब किसी राज्य में चुनाव होते हैं तो केंद्र सरकार डीजल, पेट्रोल के दामों को स्थिर कर देती है लेकिन चुनाव खत्म होते ही पुन: दाम बढ़ा देती है।

    रसोई गैस के दाम में हालिया बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए गहलोत ने लिखा, ‘‘कल रसोई गैस के दाम में 50 रुपये की बढ़ोतरी कर मोदी सरकार ने आमजन का बजट बिगाड़ दिया है। केंद्र सरकार ने रसोई गैस सब्सिडी को खत्म कर दी है जिससे उज्ज्वला योजना में कनेक्शन पाने वाले गरीब लोग अपना सिलेंडर नहीं भरा पा रहे हैं।’’ गहलोत ने कहा कि कोरोना काल में जब सरकार को लोगों की मदद करनी चाहिये थी, तब मोदी सरकार लोगों को महंगाई के बोझ तले दबा रही है। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार को कच्चे तेल की कीमतों में कमी का फायदा आमजन को देने के लिये डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस के दाम कम करने चाहिये।

  • 5 दिसंबर को बंगाल फतह करने के लिए एक करोड़ घरों तक पहुंचेगी बीजेपी

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    कोलकाता । भाजपा पश्चिम बंगाल में एक करोड़ से अधिक परिवारों तक पहुंचकर ममता बनर्जी नीत राज्य सरकार की कथित नाकामियों के बारे में बताएगी। पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस सरकार के द्वारे सरकार कार्यक्रम के जवाब में यह अभियान चलाने का फैसला किया है। यह अभियान पांच दिसंबर से शुरू होगा। घोष ने दावा किया कि ममता बनर्जी की सरकार द्वारे सरकार (घर-घर सरकार) को सफल बनाने के लिये सरकारी अधिकारियों और पार्टी कार्यकर्ताओं का इस्तेमाल कर रही है।

    उन्होंने कहा, हम आर नोए अन्याय (अब और अन्याय नहीं) नाम से अभियान शुरू करेगें और तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में अन्याय का सामना कर रहे लोगों से उनके घर जाकर मिलेंगे। घोष ने कहा कि यह कार्यक्रम का दूसरा चरण होगा। पहले चरण में भाजपा कार्यकर्ता जून-जुलाई में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पत्र लेकर एक करोड़ परिवारों के पास गए थे। इस पत्र में भाजपा नीत केन्द्र सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित किया गया था।

  • जन सुझाव दर्ज होंगे सीएम डैशबोर्ड पर, जानिए बैठक में और क्या लिए गए फैसले

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    देहरादून। सीएम मॉनीटरिंग डैशबोर्ड को अधिक जन केंद्रित बनाया जाएगा। इसके लिए तमाम विभागों की ओर से दी जाने वाली सेवाओं पर नागरिकों से फीडबैक प्राप्त करने की सुविधा डैश बोर्ड पर उपलब्ध कराई जाएगी। जन सुझावों और फीडबैक का जवाब 15 दिन में दिया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक विभाग में कर्मचारियों की प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कमेटी गठित की जाएगी।

    मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने शुक्रवार को सचिवालय में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में सीएम मॉनीटरिंग डैशबोर्ड ‘उत्कर्ष’ की समीक्षा की। उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों को प्रत्येक पखवाड़े डैशबोर्ड की मॉनीटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही सीएम डैश बोर्ड को जिला स्तर पर भी क्रियान्वित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी विभागों (गोपन एवं विधायी को छोड़कर) को 25 दिसंबर से ई-आफिस के माध्यम से अनिवार्य रूप से कार्य करने होंगे। इसमें पेश आने वाली अड़चन दूर करने को प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए।

    सचिव मुख्यमंत्री राधिका झा ने बताया कि वर्ष 2017 में सीएम डैशबोर्ड लांच किया गया था। इसे वर्ष 2021 में जिला स्तर तक क्रियान्वित किया जाएगा। डैश बोर्ड पर ग्राम्य विकास, वित्त, उद्यान, उद्योग, ऊर्जा, कृषि ,खेल, स्वास्थ्य, पशुपालन, परिवहन, समाज कल्याण, महिला कल्याण एवं बाल विकास, शहरी विभाग, पेयजल विभागों ने जन आकांक्षा केंद्रित 205 केपीआइ (की परफॉरमेंस इंडीकेटर), 86 राज्यस्तरीय प्राथमिकताएं और 48 प्राथमिकता कार्यक्रम निर्धारित किए हैं। बैठक में मुख्यमंत्री के आइटी सलाहकार रवींद्र दत्त पेटवाल, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी व मनीषा पंवार, सचिव आरके सुधांशु, सौजन्या, सुशील कुमार व अमित सिन्हा समेत विभागीय उच्चाधिकारी मौजूद थे।

    बैठक में लिए गए फैसले

    • 20 दिसंबर से आईटीडीए में विभागीय नोडल अधिकारियों का होगा प्रशिक्षण
    • 50 फीसद से कम प्रगति वाले विभागों को डैश बोर्ड से स्वत: पत्र जारी किए जाने को व्यवस्था बनाई जाएगी
    • सचिव स्तर से लेकर नोडल अधिकारी स्तर तक तथा जनपद स्तर पर जिलाधिकारी डैश बोर्ड पर डाटा का नियमित अनुश्रवण करेंगे, प्रत्येक माह की 10 तारीख तक अपडेट डाटा अपलोड किया जाएगा
    • प्रदर्शन के आधार पर अधिकारियों की एसीआर में दर्ज होंगी प्रविष्टियां
    • सीएम मॉनीटरिंग डैश बोर्ड को सीएम हेल्प लाइन से जोड़ा जाएगा

  • उलटफेर के आसार ओवैसी के गढ़ में , भाजपा और AIMIM में कांटे की टक्कर

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    हैदराबाद(तेलंगाना) । ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) चुनाव के तहत शुक्रवार को हो रही मतगणना में विपक्षी भाजपा को शुरूआती रूझानों में मिली बढ़त का कोई खास फायदा नहीं मिलता नजर आ रहा है। वहीं, सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) तेजी से बढ़त बना रही है और नगर निकाय पर कब्जा करने के भगवा पार्टी के सपने को संभवत: पूरा होने से रोक सकती है। मतगणना के ताजा रूझानों के मुताबिक टीआरएस और असदुद्दीन ओवैसी नीत एआईएमआईएम ने सात-सात वार्डों में जीत दर्ज की।

    टीआरएस करीब 61 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, भाजपा 43 सीटों पर आगे है। चुनाव एक दिसंबर को हुए थे। राज्य निर्वाचन आयुक्त (एसईसी) ने बताया कि कांग्रेस ने एक वार्ड में जीत दर्ज की है।  ओवैसी की पार्टी 43 सीटों पर आगे चल रही है। यदि मौजूदा रूझान जारी रहता है तो भाजपा 2016 के चुनाव में मिली सिर्फ चार सीटों पर जीत की तुलना में इस बार बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। भगवा पार्टी ने वह चुनाव तेलुगू देशम पार्टी (तेदपा) के साथ गठबंधन कर लड़ा था। के. चंद्रशेखर राव नीत टीआरएस ने 2016 के चुनाव में 150 वार्डों में से 99 में जीत दर्ज की थी। मंगलवार को हुए जीएचएमसी चुनाव में मतपत्रों का इस्तेमाल किया गया था।

    मतगणना सुबह आठ बजे शुरू हुई और पहले डाक मतपत्रों की गिनती की गई। भाजपा डाक मतपत्रों की गिनती में अपने प्रतिद्वंद्वियों से करीब 80 वार्डों में आगे चल रही थी। चुनाव परिणाम स्पष्ट रूप से शाम तक आने की उम्मीद है। भाजपा ने इस चुनाव के लिए काफी जोरशोर से प्रचार किया था। पार्टी के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने चुनाव प्रचार किया था। वहीं, टीआरएस राव के करिश्मे और मुख्यमंत्री के तौर पर उनके कामकाज पर निर्भर है।

  • अब नई ई-मेल पर राजस्थान के सीएम को भेज सकेंगे, शिकायत और सुझाव

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    जयपुर । मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तक आमजन अब अपना संदेश, शिकायत या सुझाव और सुगमता के साथ पहुंचा सकेंगे। मुख्यमंत्री के निर्देश पर इसके लिए एक नई ई-मेल आईडी writetocm@rajasthan.gov.in बनाई गई है। इस पर भेजे गए ई-मेल सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचेंगे।

    मुख्यमंत्री गहलोत तक आमजन की पहुंच को आसान और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से बनाई गई इस नई ई-मेल आईडी पर प्रदेशवासी व्यक्तिगत संदेश भेजने के साथ ही गम्भीर आपराधिक प्रकरणों तथा किसी भी अन्याय के संबंध में शिकायत या अन्य समस्याओं से मुख्यमंत्री को अवगत करा सकेंगे। इन प्रकरणों, शिकायतों एवं समस्याओं पर मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

    कोरोना महामारी के कारण आमजन अपने संदेश, शिकायत और सुझाव पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री महोदय से व्यक्तिशः मुलाकात नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही, संक्रमण के फैलाव के खतरे एवं सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए मुख्यमंत्री निवास पर होने वाली नियमित जनसुनवाई भी संभव नहीं हो पा रही है। ऎसे में, आमजन की मुख्यमंत्री तक सहजता के साथ पहुंच सुनिश्चित करने की दृष्टि से यह पहल की गई है।

    उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने गुड गवर्नेंस के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से हमेशा ही आमजन की प्रभावी सुनवाई सुनिश्चित करने का प्रयास किया है। अपने पिछले दोनों कार्यकाल के साथ ही वर्तमान कार्यकाल में भी मुख्यमंत्री अपने राजकीय निवास पर स्वयं जनसुनवाई करते रहे हैं, लेकिन कोविड-19 महामारी के इस दौर में व्यक्तिशः जनसुनवाई संभव नहीं हो पा रही है। इसे देखते हुए उन्होंने तकनीकी नवाचारों के जरिए आमजन की सुनवाई सुनिश्चित करने का प्रयास किया है।

  • राम मंदिर के लिए बिहार में भाजपा के धन इकट्ठा करने के फैसले पर सियासत तेज

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    पटना । अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बिहार में गांव-गांव से चंदा इकट्ठा करने के फैसले पर अब राजनीति शुरू हो गई है। वैसे, भाजपा ने कहा कि ट्रस्ट और श्रद्धालुओं के बीच वह सेतु का काम करेगी। इस बीच, यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा इसके बहाने गांवों में अपने आधार को और मजबूत करने में जुटी है। बिहार भाजपा की दो दिन पहले हुए एक बैठक में फैसला हुआ है कि पार्टी अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए धन जुटाएगी, जिसे बाद में राम मंदिर ट्रस्ट को सौंप दिया जाएगा।

    भाजपा के प्रवक्ता अरविंद सिंह कहते हैं कि भाजपा श्रद्धालुओं तथा दानकर्ताओं और राम मंदिर ट्रस्ट के बीच सेतु का काम करेगी।

    पार्टी के छोटे-बड़े सभी नेता राम मंदिर निर्माण में अपनी ओर से राशि देकर सहयोग करेंगे। साथ ही अपने-अपने इलाके में लोगों से भी जनसहयोग लेंगे। पार्टी की निचली इकाई यानी बूथ व मंडल स्तर के नेता-कार्यकर्ता लोगों से इस काम के लिए राशि मांगेंगे।

    सिंह ने बताया कि भगवान राम आस्था और स्वभिमान के प्रतीक हैं। राम की कल्पना को चरितार्थ कर लोग उनके आदशरें पर चलने की कोशिश करते है। उन्होंने कहा कि अगर कोई स्वेच्छा से अयोध्या में बन रहे श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए दान देना चाहता है तो उसे लेकर ट्रस्ट तक पहुंचा देने में क्या बुराई है।

    उन्होंने कहा कि राम मंदिर जनभावना का प्रतीक है। तमाम बाधाओं के बाद राममंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ है।

    इधर, राजद के प्रवक्ता भाजपा के इस फैसले पर कटाक्ष कर रही है। राजद के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी कहते हैं कि भगवान राम सभी के आराध्य हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा राम के नाम पर हमेशा राजनीति करती है।

    उन्होंने कहा कि भाजपा बेरोजगारी दूर करने की बात नहीं करती, रोजगार निर्माण कब होगा इसकी बात नहीं करती। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेताओं को पहले राम के आदशरें का पालन करना चाहिए।

    इधर, कहा जा रहा है कि अगले साल होने वाले पंचायत चुनाव के मद्देनजर भाजपा गांवों में अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहती है, जिस कारण इसी बहाने वह पंचायतों के घर-घर तक पहुंचने के प्रयास में जुटी हैं।

  • नया टर्न बिहार की सियासत में, नीतीश कुमार को BJP ने कानून व्यवस्था के मसले पर घेरा

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    बिहार में कानून-व्‍यवस्‍था की स्थिति पर चिंता प्रकट करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्‍यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने अपने ही राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की नीतीश कुमार की सरकार को घेरा है। उन्‍होंने राज्‍य के पूर्वी चंपारण जिले में कानून-व्‍यवस्‍था की स्थिति पर सवाल उठाया है। बीजेपी के प्रदेश अध्‍यक्ष द्वारा अपनी ही सरकार में कानून-व्‍यवस्‍था पर सवाल उठाने के कारण विपक्ष हमलावर है तो सत्‍ता पक्ष सफाई दे रहा है। विपक्ष इसे नई सरकार में बीजेपी की दबाव की रणनीति के रूप में भी देख रहा है।

    जनता ने बीजेपी प्रदेश अध्‍यक्ष बताया अपराध का हाल

    डॉ. संजय जायसवाल ने अपने फेसबुक पोस्‍ट में आज सुबह बेतिया से पटना की यात्रा का जिक्र करते हुए बताया है कि रास्ते में पूर्वी चंपारण के सेमरा में जनता ने सड़क जाम कर दिया था। पता चला कि वहां में आए दिन चोरियां हो रही हैं। आज गांव वालों ने चोर को पकड़ने की कोशिश की तो वह अपनी बाइक छोड़कर भागने में सफल रहा। स्‍थानीय तुरकौलिया थाना प्रभारी को फोन करने पर वह उल्टे गांव वालों को धमकाने लगा कि पुलिस आई तो उन्‍हें ही गिरफ्तार करेग

     

    अब डीजीपी से मिलकर जानकारी देंगे संजय जायसवाल

    बीजेपी प्रदेश अध्‍यक्ष ने आगे लिखा है कि पूर्वी चंपारण के थानों में अव्यवस्था के हालात हैं। रक्सौल से लेकर मोतिहारी तक लगातार अपराध हो रहे हैं। मोतिहारी पुलिस प्रशासन अक्षम सिद्ध हो रहा है। उन्‍होंने इस संदर्भ में रक्सौल हत्याकांड का भी जिक्र करते हुए लिखा है कि इसमें भी अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है।

    डॉ. जायसवाल ले आगे लिखा है कि वे पटना पहुंचने पर खुद पुलिस महानिदेशक से मिलकर पूर्वी चंपारण की कानून व्यवस्था के बारे में बात करेंगे।

    बयान पर गरमाई सियासत, पक्ष-विपक्ष ने कही ये बात

    बीजेपी के इस बयान को विपक्ष मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार पर दबाव की राजनीति बता रहा है। साथ ही यह सवाल खड़ा कर रहा है कि जब उनकी ही सरकार है तो कानून-व्‍यवस्‍था ठीक करने में आखिर क्‍या मजबूरी है?

    विपक्ष ने खड़े किए सवाल: कांग्रेस नेता प्रेमचंद्र मिश्रा ने कहा है कि बिहार में कानून का राज नहीं रहा। बीजेपी प्रदेश अध्‍यक्ष डीजीपी से मिलने की बात करते हैं। उन्‍हें तो अपने मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार से मिलना चाहिए। बीजेपी के दो-दो उपमुख्‍यमंत्री भी हैं। उन्‍होंने कहा कि बिहार कानून के राज के लिए बीजेपी भी समान रूप से जिम्मेदार है। राष्‍ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा तेजस्वी यादव के बिहार में अपराधियों के राज की बात की पुष्टि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने भी कर दी है। उन्‍होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास गृह विभाग रहने के कारण बीजेपी सोची-समझी रणनीति के तहत ऐसी बात कर रही है। बात तो सही की जा रही है, लेकिन यह दबाव की राजनीति भी है।

    बीजेपी ने दी सफाई: उधर, बीजेपी के प्रवक्‍ता प्रेमरंजन पटेल सफाई देते हुए कहते हैं कि सरकार कानून व्‍यवस्‍था को लेकर गंभीर है। उसकी चिंता अपनी नीतियों के कार्यान्‍वयन को लेकर है।

  • फोन पर ममता बनर्जी ने प्रदर्शनकारी किसानों से की बात, समर्थन का दिया आश्वासन

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    नयी दिल्ली । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केन्द्र के कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे विभिन्न किसान संगठनों से शुक्रवार को फोन पर बात की और उन्हें आश्वासन दिया कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) उनके साथ खड़ी है। पार्टी के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने यह जानकारी दी। आंदोलनकारी किसानों के साथ लगभग चार घंटे रहने वाले ब्रायन ने फोन पर यह बातचीत कराई। ब्रायन ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने किसानों से बात की, हरियाणा और पंजाब से अलग-अलग समूहों को चार टेलीफोन कॉल की। किसानों ने अपनी मांगों को साझा किया और वे चाहते थे कि कृषि विधेयक (कानून) निरस्त हों।’’

    उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने उनके साथ एकजुटता दिखाने के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद भी दिया। उन्होंने पहले भी किसानों और भूमि आंदोलनों को लेकर उनके समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।’’ राज्यसभा सांसद ने किसानों को बताया कि वह (बनर्जी) और तृणमूल कांग्रेस ‘‘किसान विरोधी’’ कानूनों को निरस्त किये जाने की मांग को लेकर इस आंदोलन में उनके साथ खड़ी रहेंगी। ब्रायन ने कहा कि यह बहुत भावुक बैठक थी। किसानों के संगठन कानूनों के बारे में जानते थे और वे चाहते थे कि इन कानूनों को निरस्त किया जाये।

    उन्होंने कहा कि वास्तव में, आज के दिन, 14 साल पहले बनर्जी ने सिंगुर में किसानों के लिए अपनी भूख हड़ताल शुरू की थी। दिल्ली के बॉर्डर पर प्रदर्शन करने के लिए किसान पिछले सप्ताह पहुंचे थे और उनके नेता इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए सरकार के साथ दो दौर की वार्ता कर चुके हैं। अगले दौर की वार्ता शनिवार को प्रस्तावित है।