Category: state-news

  • चुनावी मोड में कुछ और दायित्व बांट सकते हैं त्रिवेंद्र

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    देहरादून:  पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के उत्तराखंड प्रवास से ठीक पहले भाजपा के 10 नेताओं को महत्वपूर्ण दायित्वों के साथ सत्ता में हिस्सेदारी का तोहफा मिल गया। इसके साथ ही अब राज्य में दायित्वधारियों की संख्या सौ से ज्यादा हो गई है। इनमें से कैबिनेट व राज्य मंत्री के दर्जे के साथ दायित्व पाने वाले लगभग 65 नेता हैं। सूत्रों के मुताबिक निकट भविष्य में कुछ और पार्टी नेताओं को दायित्व दिए जा सकते हैं।

    उत्तराखंड में अब अगले विधानसभा चुनाव को महज सवा साल का ही वक्त शेष है। सत्तारूढ़ भाजपा अब पूरी तरह चुनावी तैयारियों में जुटी नजर आ रही है। हाल ही में पार्टी के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम व सह प्रभारी रेखा वर्मा उत्तराखंड का दौरा कर लौटे हैं। अब आगामी चार दिसंबर से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा चार दिनी प्रवास पर उत्तराखंड आ रहे हैं। नड्डा इस दौरान हरिद्वार में संतों से भेंट तो करेंगे ही, देहरादून में तीन दिन में 14 कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगे।

    नड्डा के आगमन से पहले मंगलवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 10 पार्टी नेताओं की विभिन्न आयोग, निगम और परिषदों में नियुक्ति कर दी। मुख्यमंत्री के इस कदम को पार्टी नेताओं को सत्ता में भागीदारी देकर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए और ज्यादा सक्रिय करने से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके अलावा इनके जरिये आम जनता तक विभिन्न विभागों की जन कल्याणकारी योजनाओं और केंद्र तथा राज्य सरकार की उपलब्धियों को पहुंचाना भी सरकार का उद्देश्य है। उच्च पदस्थ सूत्रों की मानी जाए तो चुनाव से पहले पार्टी के कुछ अन्य नेताओं को भी सरकार से दायित्वों की सौगात मिल सकती है।

    दायित्वधारियों के रूप में लगभग 65 पार्टी नेता मंत्री पद का दर्जा तो पा गए, मगर मंत्रिमंडल में रिक्त चले आ रहे तीन पदों को लेकर अभी भी सत्ता के गलियारों में सुगबुगाहट महसूस नहीं की जा रही है। हालांकि मुख्यमंत्री गत फरवरी में मंत्रिमंडल विस्तार की बात कह चुके थे, लेकिन इसके बाद कोरोना संक्रमण ने उनके कदम थाम लिए। अब जबकि विधानसभा चुनाव के लिए कम ही समय बाकी है, माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना काफी क्षीण हो गई है।

     

  • PM मोदी के हनुमान कूदेंगे BJP के खिलाफ!…

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    पटना। Bihar Rjaya Sabha Election लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के संस्‍थापक व पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान (Ram Vilas Paswan) के निधन से खाली हुई राज्‍यसभा सीट (Rajya Sabha Seat) के लिए नामांकन (Nomination) की अंतिम तारीख तीन दिसंबर है। राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने इसके लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता व पूर्व उपमुख्‍यमंत्री सुशील मोदी (Ex Dy.CM Sushil Modi) का नाम फाइनल कर दिया है। महागठबंधन (Mahagathbandhan) ने भी किसी दलित नेता को मैदान में उतारने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि इसके लिए राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) ने राम विलास पासवान की पत्‍नी रीना पासवान (Rina Paswan) को मैदान में उतारने का ऑफर दिया है, जिसपर एलजेपी अध्‍यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) को अगले बुधवार तक फैसला लेना है। उन्‍होंने अपने पत्‍ते नहीं खोल कर सस्‍पेंस को बरकरार रखा है। ऐसे में सवाल यह है कि क्‍या खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का हुनमान (Hanuman) कहते रहे चिराग पासवान बीजेपी के खिलाफ जंग लड़ेंगे? लेकिन इससे भी बड़ा सवाल यह है कि आरजेडी क्‍या फैसला लेता है?

    एनडीए से सुशील मोदी बने राज्‍यसभा सीट के उम्‍मीदवार

    विदित हो कि एनडीए ने वैश्य समाज से आने वाले सुशील मोदी को राज्‍यसभा सीट के लिए उम्‍मीदवार बनाया है, जो बुधवार को नामांकन दाखिल करेंगे। उधर, आरजेडी चाहता है कि दलित नेता के निधन से खाली हुई इस सीट के लिए किसी दलित को ही मौका दिया जाए। लिस्‍ट में श्‍याम रजक जैसे कई नाम हैं, लेकिन आरजेडी ने राम विलास पासवान की पत्‍नी रीना पासवान के नाम का ऑफर देकर एक तीर से कई शिकार करने की कोशिश की है। इसपर फैसला चिराग पासवान को करना है। उनके फैसले के बाद आरजेडी नेतृत्व भी अपना अंतिम फैसला करेगा। हालांकि, आरजेडी को उम्‍मीद है कि चिराग पासवान इस ऑफर को स्वीकार कर लेंगे।

    विधानसभा चुनाव में विरोध के कारण चिराग से खफा जेडीयू

    रामविलास पासवान बतौर एनडीए उम्‍मीदवार पिछले वर्ष राज्‍यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। उन्‍हें बीजेपी के अलावा जनता दल यूनाइटेड (JDU) का भी समर्थन मिला था। लेकिन  बार हालात बदले हुए हैं। एलजेपी अध्‍यक्ष चिराग पासवान ने बिहार विधान सभा चुनाव में मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के नेतृत्‍व में चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। उन्‍होंने चुनाव के दौरान बीजेपी को वॉक ओवर दे दिया, लेकिन जेडीयू उम्‍मीदवारों के खिलाफ अपने उम्‍मीदवार खड़े कर उनके वोट काटने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। इससे एनडीए को नुकसान हुआ। लेकिन गठबंधन में जेडीयू की सीटें कम करने के अपने मकसद में चिराग कामयाब रहे। विधानसभा चुनाव के दौरान एनडीए में जेडीयू के खिलाफ मोर्चा खोले रहे चिराग पासवान ने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) का हनुमान बताते हुए बीजेपी का खुला समर्थन भी किया। खास बात यह भी है कि इस बगावत के लिए एनडीए में चिराग पासवान पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उनकी पार्टी अभी भी केंद्र में एनडीए का हिस्‍सा है। इससे जेडीयू में नाराजगी दिखती रही है।

    सुशील मोदी को उम्‍मीदवार बना डैमेज कंट्रोल की कोशिश

    बिहार में मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के निकट सहयोगी रहे सुशील मोदी को बीजेपी ने नई सरकार में फिर उपमुख्‍यमंत्री (Dy CM) नहीं बनाया है। बीजेपी ने उन्‍हें मैदान में उतार कर केंद्र की राजनीति में अहम जिममेदारी देने का संकेत भी दिया है। जेडीयू की नाराजगी के बीच बीजेपी ने एलजेपी से उम्‍मीदवार नहीं देकर डैमेज कंट्रोल की कोशिश भी की है। इससे चिराग पासवान की उम्‍मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

    पासवान की पत्‍नी को उम्‍मीदवार बनाने का दिया ऑफर

    यहीं पर इस मामले में राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी आरेजडी सुप्रीमो लालू प्रसाद (Lalu Prasad Yadav) यादव की एंट्री होती है। आरजेडी इस सीट पर कियी दलित नेता को मैदान में उतारने की योजना पर काम कर रहा है। उसने चिराग पासवान को अपनी मां रीना पासवान को मैदान में उतारने का ऑफर दिया है। ऐसा होता है तो एनडीए के खिलाफ महागठबंधन की गोलबंदी रीना पासवान के पक्ष में तय है। नामांकन की तारीख निकट आने के करण इसपर चिराग को बुधवार तक फैसला लेना है। हालांकि, महागठबंधन विकल्‍पों पर भी विचार कर रहा है।

    …अब कल तक अंतिम फैसला करेंगे मोदी के हनुमान करेंगे

    राज्यसभा चुनाव के नामांकन में फिलहाल तीन दिन शेष हैं। तीन दिसंबर तक नामांकन होगा तो सात दिसबंर नाम वापसी का अंतिम दिन है। 14 दिसंबर को मतदान और मतगणना होगा। अब मोदी के हनुमान किस पाले में जाते हैं, फैसला उन्‍हें कही करना है। आगे-आगे देखिए होता है क्‍या?

     

  • हरिद्वार-दून हाईवे चौड़ीकरण का कार्य अंतिम चरण में पहुंचा…

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    देहरादून। वर्ष 2010-11 से अधर में लटके हरिद्वार-दून राजमार्ग का चौड़ीकरण कार्य अब उम्मीद जगा रहा है। काम अंतिम चरण में है और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) के अधिकारी नए साल पर फोर लेन सड़क का तोहफा जनता को देने का दावा कर रहे हैं। राजमार्ग के चौड़ीकरण को चयनित की गई नई कंपिनयों (उत्तर प्रदेश सेतु निगम व एटलस) से पहले यह काम एरा इंफ्रा कंपनी के पास था।

    लंबे समय तक भी अधूरे काम को पूरा न करने के चलते राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने कंपनी को हटा दिया था। हालांकि तब तक कंपनी की तरफ से 300 करोड़ रुपये से अधिक के काम किए जा चुके थे। अवशेष 588 करोड़ रुपये से अधिक का काम (करीब 39 किमी भाग पर) नई कंपनियों ने वर्ष 2019 के आरंभ में शुरू किया। इस बीच काम ने रफ्तार पकड़ी ही थी कि कोरोना संक्रमण के चलते 22 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन ने रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। अप्रैल के अंत से काम शुरू हुआ तो श्रमिकों व निर्माण सामग्री की कमी के चलते मई अंत में ही चौड़ीकरण कार्य ने फिर रफ्तार पकड़ी।

    एनएचएआइ के परियोजना निदेशक विभव मित्तल का कहना है कि चौड़ीकरण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और जनवरी 2021 तक सभी काम पूरे कर दिए जाएंगे। हालांकि, मिट्टी की कमी के चलते मियांवाला अंडरपास व डिजाइन में बदलाव के चलते रायवाला में अंडरपास का निर्माण समय पर पूरा नहीं हो पाएगा। इससे पहले काम पूरा करने की डेडलाइन जनवरी 2020 तय की गई थी।

    फोरलेन हाईवे पर ये बड़े ढांचें करेंगे यातायात सुगम

    एलीफैंट अंडर पास (मोतीचूर, तीनपानी, लालतप्पड़ में)

    बड़े पुल (नेपाली फार्म के पास सुसवा नदी व सौंग नदी में, डोईवाला बाइपास और मियांवाला में)

    फ्लाईओवर (भानियावाला के पास)

    रेलवे अंडर ब्रिज (रायवाला में)

    खतरनाक रूप ले चुका था राजमार्ग

    अधूरे चौड़ीकरण कार्य के कारण हरिद्वार-देहरादून राजमार्ग खतरनाक रूप ले चुका था। कहीं पर सड़क और कच्चे भाग के बीच की गहराई काफी बढ़ गई थी, तो कहीं पर सड़क भूलभुलैये की तरह नजर आ रही थी। इस कारण तमाम स्थानों पर यातायात को दो लेन पर आगे बढ़ाने के बाद अचानक एक ही लेन पर आगे बढ़ाया जा रहा था। ऐसे में आए दिन दुर्घटनाएं भी होने लगी थी।

    राजमार्ग चौड़ीकरण इस तरह पिछड़ गया था

    चौड़ीकरण का कार्य एरा इंफ्रा कंपनी बिल्ट ऑपरेट एंड ट्रांसफर (बीओटी) मोड पर दिया गया था। इसके तहत कंपनी को अपने खर्च पर राजमार्ग का चौड़ीकरण करना था और 20 साल तक उसकी देखरेख भी करनी थी। टोलटैक्स के जरिए होने वाली आय संबंधित कंपनी को प्राप्त होनी थी। इसके चलते शुरुआत से ही एरा इंफ्रा ने काम में लापरवाही दिखानी शुरू कर दी थी। कंपनी को एक दिन में 1.5 करोड़ रुपये के काम का लक्ष्य दिया गया था, जबकि कंपनी 10 लाख रुपये का काम भी मुश्किल से कर पा रही थी। इसके चलते काम पूरा करने की अवधि कई दफा बढ़ाई गई।

    इसी लेटलतीफी के चलते केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने कंपनी से काम वापस लेने की तैयारी कर ली थी, मगर बैंकों के हस्तक्षेप के चलते इस कवायद को स्थगित कर दिया गया। दरअसल, परियोजना की कुल 1020 करोड़ की राशि में से कंपनी ने बैंकों से 736 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। यह धनराशि भी ब्याज के साथ बढ़ती चली गई और कंपनी ने हाथ खड़े करने शुरू कर दिए थे। एरा इंफ्रा ने सरकार ने 280 करोड़ रुपये की ग्रांट भी मांगी थी, मगर बीओटी में काम दिए जाने के चलते बात आगे नहीं बढ़ पाई। अंत में केंद्र सरकार को एरा इंफ्रा से काम छीनने में ही भलाई नजर आई।

    परियोजना और हालात पर एक नजर

    कार्य का नाम : हरिद्वार-देहरादून राजमार्ग चौड़ीकरण (डबल लेन से फोर लेन)

    लंबाई : 39 किलोमीटर (चौड़ीकरण के बाद यह लंबाई 36.5 किलोमीटर रह जाएगी)

    आरंभिक बजट: 1020 करोड़ रुपये

    कार्य शुरू :  नवंबर 2011

    लक्ष्य: कार्य समाप्ति का पहला लक्ष्य, 30 अक्टूबर 2013

    कार्य समाप्ति का दूसरा लक्ष्य, सितंबर 2016

    फिर कंपनी ने कार्य समाप्ति पर नया दावा किया, दिसंबर 2017

    2017 तक प्रगति: 50 से 54 फीसद

    2019 में कंपनी को कर दिया गया बाहर।

  • सूर्यकांत धस्माना ने कहा- ‘न पार्टी में बदलाव और न ही किसी सीएम का चेहरा’

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    देहरादून। प्रदेश कांग्रेस कमेटी उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि संगठन में न तो किसी प्रकार का फेरबदल हो रहा है और न ही पार्टी अभी किसी को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करने जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस महासचिव हरीश रावत के नेतृत्व में 2022 का चुनाव लड़ने को लेकर दो दिन पहले उनके समर्थक नेताओं की ओर से दिए गए बयान के बाद प्रदेश संगठन की ओर से धस्माना सामने आए। सोमवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि 2022 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बने, सभी पार्टी कार्यकर्त्‍ताओं की यही भावना होनी चाहिए। मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसकी चिंता पार्टी हाईकमान पर छोड़ देनी चाहिए। अभी से यह बहस छेड़कर जनता में गलत संदेश जा रहा है कि सारी चिंता मुख्यमंत्री बनने की हो रही है। धस्माना की टिप्पणी को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत खेमे पर पलटवार के रूप में देखा जा रहा है।

    धस्माना ने कहा कि इस समय पार्टी संगठन का पूरा ध्यान जनता से जुड़े अहम मुद्दों बेरोजगारी व महंगाई के खिलाफ व्यापक जन संघर्ष करने पर है। प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह इसी उद्देश्य से पूरे राज्य का दौरा कर रहे हैं। राज्य का हर वर्ग आज त्रिवेंद्र सरकार की युवा, छात्र, महिला व किसान विरोधी नीतियों से आक्रोशित है। सब कांग्रेस से उम्मीद बांधे हुए हैं। प्रीतम सिंह की पहली प्राथमिकता जन उम्मीदों के अनुरूप कांग्रेस सरकार बनाना है। उधर, इंटरनेट मीडिया पर अपनी पोस्ट में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने दिल्ली में किसानों के आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पार्टी केंद्रीय कृषि बिलों के विरोध में किसानों के साथ लामबंद है।

    गुटबंदी नहीं, पार्टी चुनाव को एकजुट: हरीश रावत

    पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि 2022 के चुनाव को लेकर कांग्रेस प्रदेश में पूरी तरह एकजुट है। चुनाव से पहले ही संगठन में वर्चस्व की जंग और गुटबंदी को लेकर मीडिया के सवालों के जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री ने गुटबाजी से इन्कार किया। उन्होंने कहा कि पार्टी मजबूती से चुनाव लड़ेगी। चुनाव में उन्हें नेतृत्व सौंपे जाने की उनके समर्थकों की मांग के बारे में उन्होंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। उनसे जुड़े हुए व्यक्तियों की भावना का वह सम्मान करते हैं।

     

  • राज्यसभा चुनाव के लिए सुशील मोदी ने किया नामांकन

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    पटना। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और भाजपा के नेता सुशील कुमार मोदी ने बुधवार को राज्यसभा उपचुनाव के लिए नामांकन का पर्चा दाखिल किया। नामांकन के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप-मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल, पूर्व मंत्री नंदकिशोर यादव समेत भाजपा के कई नेता मौजूद रहे।

    नामांकन का पर्चा दाखिल करने के बाद सुशील कुमार मोदी ने पार्टी के अध्यक्ष जे.पी. नड्डा को विशेष धन्यवाद देते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया, इसके लिए आभार और धन्यवाद है। उन्होंने इसके अलावा राजग के अन्य घटक दल के नेताओं — बिहार के मुख्यमंत्री, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी और विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी को भी धन्यवाद देते हुए कहा कि राजग के सभी घटक दलों के विधायकों का समर्थन उन्हें प्राप्त है।

    इस दौरान राजग के नेताओं ने ‘विक्टरी साइन’ दिखाते हुए जीत का दावा किया। राज्यसभा उपचुनाव के लिए नामांकन भरने का अंतिम दिन 3 दिसंबर है। अगर जरूरत पड़ी तो 14 दिसंबर को राज्यसभा उपचुनाव के लिए वोटिंग होगी। वैसे, विपक्ष की ओर से अब तक किसी भी उम्मीदवार का नाम सामने नहीं आया है। राजग उम्मीदवार सुशील कुमार मोदी के खिलाफ महागठबंधन प्रत्याशी नहीं तय कर पाया है। संख्या बल के हिसाब से मोदी की जीत तय मानी जा रही है।

    उल्लेखनीय है कि लोजपा के संस्थापक और पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के निधन के बाद यह सीट खाली हुई थी।

  • शादी के कार्ड से कोरोना संकट को लेकर कर रहे जागरूक, कार्ड में छपवाए जा रहे कोरोना से बचाव की कविता और श्लोक

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    देहरादून। कोरोना संकट के बीच इन दिनों विवाह व अन्य आयोजन हो रहे हैं। इनमें भी शासन की गाइडलाइन का पूरी तरह पालन हो, इसके लिए लोग निमंत्रण कार्ड के जरिये सगे-संबंधियों को पहले ही जागरूक कर रहे हैं। इन कार्ड में कोरोना से बचाव की कविता, श्लोक छपवाए जा रहे हैं।

    राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इन दिनों विवाह और अन्य समारोह भी हो रहे हैं। समारोह के लिए निमंत्रण कार्ड के माध्यम से कोरेाना से बचाव का संदेश दिया जा रहा है। बाजार में इन दिनों विवाह के कार्ड पर दो गज की दूरी और मास्क जरूरी, शादी में आने वाले मेहमानों से निवेदन है कि शारीरिक दूरी का पालन अवश्य करें, शादी में आए हैं तो कोरोना संक्रमण से सतर्क रहें आदि जागरूकता के संदेश के अलावा लोगो छपवा रहे हैं। इसके अलावा लोग कार्ड बांटने के दौरान सगे संबंधियों को जागरूक भी कर रहे हैं कि बाहर निकलते वक्त मास्क जरूर पहने, शारीरिक दूरी का जरूर ख्याल रखें, तभी हम कोरोना को हरा पाएंगे।

    पलटन बाजार स्थित कोतवाली के समीप कार्ड छापने वाले शुभम ने बताया कि हाल ही के दिनों में उनके पास कार्ड छपवाने के लिए जो भी ग्राहक आ रहे हैं वह कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर संदेश भी छपवाने को कह रहे हैं। रामा मार्केट स्थित दुकानदार रवि ने बताया कि शादी के समय पर जो भी भीड़ जुटेगी उसमें यदि कोई संक्रमित व्यक्ति शामिल होता है तो उसमें अन्य व्यक्तियों के संक्रमित होने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में मास्क लगाए रखना सबसे समझदारी रहती है, जो कार्ड के माध्यम से भी संदेश दिया जा रहा है।

     

  • BJP MLA के बिगड़े बोल: मज़हब सिखाता बैर रखना, दुष्‍कर्म करना…

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    पटना। मशहूर शायर अल्लामा इक़बाल (Iqbal) ने एक शेर लिखा था- मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना।’ लेकिन बिहार में भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक (BJP MLA) ने ऐसा कुछ कह दिया कि जन्‍नत में शायर की आत्‍मा रो रही होगी। दरभंगा में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मधुबनी के बिस्फी से बीजेपी विधायक हरिभूषण ठाकुर (BJP MLA Hari Bhushan Thakur) ने कहा कि ‘मज़हब खूब सिखाता है आपस में बैर रखना।’ वे इतने पर ही नहीं रुके। अपना ज्ञान बिखरते हुए कहा कि मज़हब दुष्‍कर्म करना भी सिखाता है। घटना के बाद बिहार में सियासत गरमा (Politics Boils) गई है। विपक्ष (Opposition) हमलावर है तो सत्‍ता पक्ष (Ruling Alliance) सफाई दे रहा है।

    बीजेपी विधायक ने क्‍या कहा था, जानिए

    दरभंगा में महाकवि विद्यापति की स्मृति में आयोजित मिथिला विभूति पर्व समारोह के दौरान अपने संबोधन में मधुबनी के बिस्फी से बीजेपी विधायक हरिभूषण ठाकुर ने जो कहा, उसने सियासी भूचाल खड़ा कर दिया है। उन्‍होंने कहा कि ‘मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना’ गलत बात है। कहा कि दरअसल, मज़हब आपस में बैर रखना खूब सिखाता है। खास समुदाय पर इशाराें में हमलावर विधायक ने यह भी कह डाला कि मज़हब यह भी सिखाता है कि कोई बात नहीं माने तो उसे काट दो, दुष्‍कर्म करो। आगे उन्‍होंने भारतीय संस्‍कृति पर भी अपना प्रवचन दिया। कहा कि हमारी संस्कृति सिखाती है हर चीज में भगवान का वास है। आज से पांच सौ साल पहले ही तुलसी दास ने लिखा था कि जड़-चेतन सबमें भगवान रहते हैं।

    बयान पर विपक्ष हमलावर ताे एनडीए ने दी सफाई

    बीजेपी विधायक के बयान के बाद बिहार में राजनीति गर्म हो गई है। विपक्ष हमलावर है ताे सत्ताधारी राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपनी सफाई में इसे उनका निजी बयान बता पल्‍ला झाड़ लिया है।

    महागठबंधन हमलावर: कांग्रेस (Congress) नेता प्रेमचंद मिश्रा ने बीजेपी विधायक के बयान को आपत्तिजनक बताते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है। उन्‍होंने कहा है कि बीजेपी नेता ही ऐसी बातें कर सकते हैं। राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) नेता शक्ति यादव ने भी बयान की निंदा करते हुए मजहब को एकता व प्रेम का मार्ग बताया है।

    बीजेपी-जेडीयू ने दी सफाई: मामले को तूल पकड़ते देख बीजेपी के प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि मज़हब बैर रखना नहीं सिखाता। इस संबंध में विधायक हरिभूषण ठाकुर के बयान से पार्टी का कोई वास्‍ता नहीं है, यह उनका निजी बयान है। उन्‍होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों द्वारा मज़हब की आड़ में नफरत फैलाने की कोशिश की जाती है, वह गलत है। इस मामले में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की हिमायती है। धर्म या जाति पर कोई टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। ऐसे में बीजेपी विधायक के बयान से जेडीयू का वास्‍ता नहीं है।

     

  • दक्षिण फिल्‍म इंडस्‍ट्री के कलाकारों से भी मिलें हैं योगी आदित्‍यनाथ , संजय राउत ने पूछा

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    मुंबई, एएनआइ। उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी के निर्माण को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है। शिवसेना नेता संजय राउत ने यूपी के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के मुंबई दौरे और उनके फिल्‍म उद्योग से जुड़े लोगों से मुलाकात पर सवाल उठाए हैं। बता दें कि लंबे समय तक भाजपा के साथ गठबंधन में रहने के बाद अब शिवसेना ने कांग्रेस का हाथ थाम कर महाराष्‍ट्र में सरकार बनाई है। ऐसे में भाजपा और शिवसेना के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्‍यारोप चलता रहा है।

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    सीएम योगी आदित्‍यनाथ मुंबई दौरे पर हैं। योगी मुंबई यात्रा में मनमोहन शेट्टी बोनी कपूर एवं सुभाष घई जैसे दिग्गज फिल्म निर्माताओं से मिलकर फिल्म सिटी निर्माण पर चर्चा करेंगे ताकि इस दिशा में आगे बढ़ा जा सके।

    संजय राउत का कहना है, ‘मुंबई फिल्‍म सिटी को किसी अन्‍य स्‍थान या राज्‍य में शिफ्ट करना आसान नहीं है।’ उन्‍होंने योगी आदित्‍यनाथ के मुंबई दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुंबई के अलावा दक्षिण की फिल्‍म इंडस्‍ट्री भी काफी बड़ी है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल और पंजाब में भी फिल्‍म सिटी हैं। क्‍या योगी जी इन जगहों पर भी गए और डायरेक्‍टर्स और एक्‍टर्स से बात की है या फिर वह सिर्फ मुंबई में ही आए हैं?

    महाराष्‍ट्र में धार्मिक स्‍थलों को खोलने के मुद्दे पर संजय राउत ने कहा कि राज्‍य के भाजपा नेता सिर्फ अजान के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा है कि कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए धार्मिक स्‍थलों पर भीड़ नहीं होनी चाहिए। वहीं, जो लोग ये कहते हैं कि शिवसेना ने हिंदुत्‍व का दामन छोड़ दिया है, उन्‍हें ये तमाशा बंद कर देना चाहिए। इस समय उन्‍हें बेरोजगारी और देश के सकल घरेलु उत्‍पाद (जीडीपी) के बारे में विचार करना चाहिए, उससे ही देश का विकास हो सकेगा।

    उल्‍लेखनीय है कि सीएम योगी आदित्‍यनाथ मुंबई दौरे पर हैं। योगी मुंबई यात्रा में मनमोहन शेट्टी, बोनी कपूर एवं सुभाष घई जैसे दिग्गज फिल्म निर्माताओं से मिलकर फिल्म सिटी निर्माण पर चर्चा करेंगे, ताकि, इस दिशा में आगे बढ़ा जा सके। मंगलवार को उन्‍होंने अभिनेता अक्षय कुमार से मुलाकात की है। इसकी जानकारी आदित्‍यनाथ ने खुद सोशल मीडिया के माध्‍यम से दी।

  • मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला

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    सिरसा: हरियाणा के पूर्व सीएम और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। बुधवार को उनकी जांच रिपोर्ट आई थी।

    चौटाला को मेदांता हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि उनमें कोई विशेष लक्षण नहीं मिले हैं, लेकिन उन्हें सांस लेने में दिक्कत है, इसलिए उन्हें आइसोलेशन में रखा गया है।

    चौटाला की देखभाल डॉक्टरों की एक विशेष टीम कर रही है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि चौटाला की उम्र ज्यादा है और एक-दो दिन में उनकी और भी जांचें की जाएंगी।

    बता दें कि बीते दिनों ही ओपी चौटाला के 2 पोतों की शादी हुई थी। अभय चौटाला के बेटे कर्ण चौटाला की गुरुग्राम में हुई शादी में तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी शामिल हुए थे।

    समारोह में दौरान वह बिना मास्क के दिखे थे। वहीं मंगलवार को सिरसा में अर्जुन चौटाला की शादी की पार्टी थी, इसमें भी कई राजनैतिक हस्तियां शामिल हुई थीं।

  • भोपाल गैस पीड़ितों की याद में बनाया जायेगा स्मारक: शिवराज चौहान

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    भोपाल । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बृहस्पतिवार को कहा कि वर्ष 1984 में हुई भोपाल गैस त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों की याद में एक स्मारक बनाया जायेगा। भोपाल गैस त्रासदी की बृहस्पतिवार को 36 वीं बरसी पर मुख्यमंत्री चौहान ने गैस त्रासदी में अपने पतियों को खोने वाली पीड़ित विधवाओं के लिये 1,000 रुपये प्रति माह पेंशन देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘आज भोपाल गैस त्रासदी को 36 वर्ष हो गये हैं, लेकिन आज भी उस त्रासदी का असर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। फिर कोई शहर भोपाल नहीं बने, आज यह संकल्प लेने का अवसर है। विकास के साथ पर्यावरण की रक्षा का भी हम प्रण लें, तभी यह संभव होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भोपाल में गैस त्रासदी के पीड़ितों की याद में स्मारक बनाया जायेगा, जो संकल्प पैदा करेगा कि फिर ऐसी गैस त्रासदी दुनिया में कहीं नहीं हो। हमारे भाई-बहन जो दो और तीन दिसंबर की रात इस त्रासदी के कारण नहीं रहे, मैं उनके चरणों में श्रद्धा के सुमन अर्पित करता हूं।’’

    इसके अलावा चौहान ने कहा कि गैस कांड की पीड़ित विधवाओं को 2019 में बंद कर दी गयी 1,000 रुपये प्रतिमाह की पेंशन आजीवन दी जायेगी। उन्होंने कहा कि अपने पतियों को खोने वाली ये महिलायें भी बीमारियों से पीड़ित हैं और इन्हें सहायता की जरुरत है। दुनिया की सबसे भीषणतम औद्योगिक त्रासदी की बरसी पर यहां सर्वधर्म सभायें आयोजित कर मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। पुराने शहर के बाहरी इलाके में स्थित यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) के कीटनाशक संयंत्र से 2-3 दिसंबर 1984 की रात को मिथाइल आसोसाइनाइट गैस के रिसाव के कारण 15,000 से अधिक लोग मारे गये थे। इस विषाक्त गैस के रिसाव के कारण पांच लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए थे। प्रदेश सरकार ने बुधवार को बताया कि कोरोना वायरस की महामारी से भोपाल में 102 गैस पीड़ितों की मौत हो चुकी है। दो दिसंबर तक कोविड-19 से भोपाल जिले में 518 लोग दम तोड़ चुके हैं।

    भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास के निदेशक बसंत कुर्रे ने बताया कि इन 102 लोगों में से 69 लोगों की आयु 50 वर्ष से अधिक थी, जबकि शेष 33 लोगों की आयु 50 वर्ष से कम थी। इस बीच, कुछ गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) ने दावा किया है कि कोरोना वायरस के कारण अब तक 254 गैस प्रभावितों की मौत हो चुकी है। प्रदेश के स्वास्थ्य बुलेटिन के मुताबिक भोपाल जिले में संक्रमण से अब तक 518 लोगों की मौत हो चुकी है। भोपाल गैस पीड़ितों के हित में काम करने वाले एनजीओ भोपाल ग्रुप फॉर इफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना धींगरा ने दावा किया, ‘‘हमने इन 518 मृतकों में से 450 के घरों का दौरा किया है। इन 450 लोगों में से 254 भोपाल गैस प्रभावित थे।