Category: state-news

  • किसानों का हरियाणा के बाद यूपी बॉर्डर से भी कूच, दिल्‍ली-देहरादून हाइवे जाम

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    लखनऊ /बागपत । कृषि कानून वापस लेने की मांग के साथ शुरू हुए किसान आंदोलन में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में भी कुछ स्थानों पर चक्‍का जाम और विरोध प्रदर्शन हुए। लखनऊ में भारतीय किसान यूनियन ने अहिमामऊ-सुल्‍तानपुर रोड पर चक्‍का जाम की तैयारी की थी लेकिन प्रशासनिक मुस्‍तैदी से यह संभव नहीं हो सका। लखनऊ में शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्‍यक्ष हरनाम सिंह वर्मा के नेतृत्‍व में किसानों ने चिनहट थाना क्षेत्र के नौबस्‍ता कला में प्रदर्शन किया।

    हरनाम सिंह वर्मा ने बताया कि कृषि कानूनों को वापस लेने और किसानों पर हुए लाठी चार्ज के विरोध में उनके नेतृत्‍व में किसानों का दल सदर तहसील में प्रदर्शन करने जा रहा है। वर्मा ने कहा, ‘‘हम आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे और अगर पुलिस हमें गिरफ़्तार करेगी तो गिरफ़्तारी देंगे।’’ अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्‍यवस्‍था प्रशांत कुमार ने लखनऊ में प्रदर्शन को बेअसर बताया है। उन्‍होंने कहा कि किसानों की चेतावनी को देखते हुए पूरे प्रदेश में कानून-व्‍यवस्‍था के दृष्टिगत व्‍यापक तैयारी की गई है। उधर बागपत से मिली खबर के मुताबिक भारतीय किसान यूनियन ने कृषि कानूनों को वापस लेने और किसानों पर हुए लाठी चार्ज के विरोध में शुक्रवार को बागपत जिले में निवाड़ा पुल पर शुक्रवार को सोनीपत हाइवे को जाम किया।

    पंजाब और हरियाणा के किसानों पर किये गये लाठी चार्ज पर आक्रोश जताते हुए भाकियू ने पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में जाम का एलान किया था। वहीं भाकियू के जाम को देखते हुए पुलिस ने मार्ग बदले हैं। पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह ने बताया कि बागपत जिले में निवाड़ा पुल हरियाणा और उत्तर प्रदेश का बार्डर है। यहां किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मजिस्ट्रेट मौजूद हैं व भारी संख्या में पुलिस बल लगाया गया है। इसके साथ ही स्थानीय किसान नेताओं से पुलिस सम्पर्क बनाए हुए है।

  • मुख्यमंत्री ने सॉफ्टवेयर लॉन्च किया अब हेलीकॉप्टर सेवाओं की लैंडिंग और पार्किंग की अनुमति होगी ऑनलाइन

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    शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की छटवीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के वाणिज्यिक कार्यों के लिए एवं सिविल एविएशन के व्यवस्थित एवं सर्वांगीण विकास के लिए एक कंपनी का गठन किया जाएगा। सिविल एविएशन के वाणिज्यिक कार्यों के संपादन, नियंत्रण एवं नियामक की भूमिका निदेशालय स्तर से संपादित की जाएंगी। राज्य में पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा एवं मेडिकल इमरजेंसी (हैली एंबुलेंस) की सुविधा के दृष्टिगत राजकीय वायुयान बी-200 के स्थान पर एक डबल इंजन एवं एक सिंगल इंजन हेलीकॉप्टर क्रय करने पर सहमति बनी। सहस्रधारा हैलीड्रोम का सौन्दर्यीकरण किया जाएगा।

    बैठक में मुख्य सचिव ओम प्रकाश, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव सचिन कुर्वे, दिलीप जावलकर, सौजन्या, मुख्य कार्यकारी अधिकारी उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण आशीष चौहान एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी और सह प्रभारी, डोईवाला में हुआ जोरदार स्वागत

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    देहरादून। भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम और सह प्रभारी रेखा वर्मा उत्तराखंड के दो दिवसीय दौरे पर हैं। उनके आगमन पर डोईवाला और माजरी ग्रांट मंडल के कार्यकर्ताओं ने भानियावाला तिराहे पर फूल माला और नारेबाजी के बीच उनका जोरदार स्वागत किया।

    हरिद्वार मार्ग से भानियावाला पहुंचे उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार और सह प्रभारी रेखा वर्मा ने कार्यकर्ताओं का अभिवादन स्वीकार करते हुए उनका उत्साह वर्धन भी किया। स्वागत कार्यक्रम के बाद दोनों शीर्ष नेता जौलीग्रांट स्थित एक होटल में जलपान के लिए रुके हुए हैं। वहां से वह देहरादून के लिए रवाना होंगे। इस दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता भी उपस्थित हैं।

    आपको बता दें कि दो दिवसीय दौरे के दौरान वे प्रदेश कार्यालय में पार्टी के प्रांतीय पदाधिकारियों, दायित्वधारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। उनका जिला स्तरीय पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात का कार्यक्रम भी है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने ये जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश प्रभारी और सह प्रभारी का उत्तराखंड की सीमा में पहुंचने से लेकर देहरादून पहुंचने तक विभिन्न स्थानों पर पार्टीजन स्वागत करेंगे।

    देहरादून में प्रदेश कार्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात के बाद वह पांच बैठकें लेंगे। भगत के अनुसार रविवार को प्रदेश कार्यालय में प्रदेश प्रभारी और सह प्रभारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के पांच दिसंबर से प्रस्तावित तीन दिवसीय उत्तराखंड दौरे की तैयारियों की समीक्षा करेंगे। इसी दिन दोपहर में वह पत्रकारों से बातचीत भी करेंगे।

     

  • उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने डेढ़ साल के लंबे इंतजार के बाद नियुक्त किया चेयरमैन

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    देहरादून। तकरीबन डेढ़ साल के लंबे इंतजार के बाद उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग को अध्यक्ष मिल गया। सरकार ने इस पद पर पांच साल के लिए पूर्व आइएएस भगवती प्रसाद पांडे की नियुक्ति की है। भगवती प्रसाद पांडे प्रदेश में ऊर्जा सचिव का पदभार संभाल चुके हैं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में भी उनका लंबा कार्यकाल बीता।

    बीते रोज सचिवालय में मुख्य सचिव सभागार में न्यायमूर्ति बीएम वर्मा की अध्यक्षता में चयन समिति की बैठक में आयोग अध्यक्ष पद के पैनल पर मुहर लगी थी। चयन समिति की बैठक में मुख्य सचिव ओमप्रकाश, ऊर्जा सचिव राधिका झा शामिल रहे, जबकि केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग अध्यक्ष ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शिरकत की। आयोग अध्यक्ष पद के लिए कुल 79 आवेदन सरकार को मिले थे।

    उत्तराखंड के साथ ही अन्य राज्यों से कई पूर्व आइएएस अधिकारियों ने दावेदारी पेश की थी। चयन समिति ने तीन नामों का पैनल तैयार किया। इस पैनल को शुक्रवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के समक्ष रखा गया। चयन समिति की सिफारिश पर मुख्यमंत्री की मुहर लगते ही आयोग अध्यक्ष पद पर बीपी पांडेय की नियुक्ति का आदेश ऊर्जा सचिव राधिका झा ने जारी कर दिया। पांडे की नियुक्ति पांच साल या 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक, जो भी पहले हो, अवधि तक की गई है।

    वीसी के लिए नया पैनल पुराने आवेदनों से बनेगा

    दून विश्वविद्यालय के कुलपति के चयन को पैनल नए सिरे से तैयार होगा, लेकिन इसके लिए सरकार को नए सिरे से आवेदन नहीं मंगाने होंगे। राजभवन ने सरकार को राहत देते हुए पुराने 153 आवेदनों में से ही दोबारा चयन को हरी झंडी दिखा दी है। सरकार की ओर से बीते माह अक्टूबर में कुलपति के चयन के लिए भेजे गए पैनल को राजभवन ने हाल ही में लौटा दिया था। इस पैनल में शामिल किए गए नामों पर आपत्ति जताते हुए उनके खिलाफ राजभवन को शिकायत की गई थी। राजभवन ने इसे गंभीरता से लिया था।

    इसके बाद शासन ने राजभवन को पत्र भेजकर पूछा था कि नए पैनल के लिए नए सिरे से आवेदन मांगें जाएं अथवा पहले से प्राप्त तकरीबन 153 आवेदनों में से ही नए सिरे से चयन किया जाए। राजभवन ने नए सिरे से आवेदन मांगने के स्थान पर पहले से ही बड़ी संख्या में प्राप्त आवेदनों में से ही पात्रों के चयन की अनुमति दे दी है। इससे सरकार को नए सिरे से आवेदन मंगाने की परेशानी से निजात मिल गई, साथ में इस वजह से दून विश्वविद्यालय के कुलपति के चयन में ज्यादा वक्त भी नहीं लगेगा। उच्च शिक्षा प्रमुख सचिव आनंद बद्र्धन ने राजभवन से शासन को उक्त मंजूरी मिलने की पुष्टि की।

     

  • हरकी पैड़ी की नाकेबंदी; होगी कार्रवाई बाहरी श्रद्धालु यहां पहुंचता है तो…

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    हरिद्वार। कार्तिक पूर्णिमा स्नान पर रोक लगने पर श्रद्धालुओं की आवाजाही रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने कमर कस ली है। तीर्थयात्रियों के लिए 29 और 30 नवंबर को जनपद की सीमाएं सील रहेंगी। इसके साथ ही हरकी पैड़ी की नाकेबंदी कर पीएसी तैनात की जाएगी। इसके बावजूद कोई बाहरी श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

    कई राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामले बढऩे का हवाला देते हुए 30 नवंबर को होने वाला कार्तिक पूर्णिमा स्नान स्थगित कर दिया गया है। पुलिस का ध्यान इस बात पर है कि दूसरे राज्यों से कोई श्रद्धालु जनपद की सीमा में प्रवेश न कर पाए। इसके लिए 29 और 30 नवंबर को सीमाएं सील कर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा।

    वहीं, हरकी पैड़ी क्षेत्र में भी एहतियात बरती जाएगी। एक दिन पहले ही गंगा घाटों की बैरिकेडिंग कर पीएसी के जवान तैनात कर दिए जाएंगे। शहर कोतवाल अमरजीत सिंह ने बताया कि स्नान पर रोक के चलते हरकी पैड़ी क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। इसके लिए दो प्लाटून पीएसी और कुछ अन्य फोर्स की मांग की गई है।

    गौरतलब है कि जिलाधाकिरी ने हरिद्वार के जिलाधिकारी सी. रविशंकर ने कहा, दिल्ली के साथ ही दूसरे राज्यों में कोरोना वायरस संक्रमण का फैलाव तेजी से हो रहा है। ऐसे में जिले में कोविड-19 संक्रमण फैलने से रोकने के लिए भीड़ को रोकना भी जरूरी है। इसलिए कार्तिक पूर्णिमा स्नान पर रोक लगाई गई है। आपको बता दें कि कार्तिक पूर्णिमा स्नान और गुरुनानक देव जयंती पर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं।

     

  • राजद भी उम्मीदवार उतारेगा बिहार राज्यसभा की एक सीट के लिए होने वाले उपचुनाव में!

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    पटना । बिहार विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव में राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की रणनीति भले ही असफल हो गई हो लेकिन राजद किसी भी हाल में सियासत के खेल में सत्ता पक्ष को खुला मैदान देना नहीं चाहती है। राजद राज्यसभा के लिए भी अलग रणनीति बनाने में जुटी है। राजद राज्यसभा उपचुनाव में अपना उम्मीदवार उतारने पर विचार कर रही है। दीगर बात है कि विधानसभा में संख्या बल के द्वारा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रत्याशी के रूप में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का नाम घोषित कर दिया है।

    केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के निधन से खाली हुई राज्यसभा सीट से भाजपा ने सुशील मोदी का नाम तय कर उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में लाने के कयासों पर अपनी मुहर लगा दी है। संख्या बल को देखते हुए सुशील मोदी का चुना जाना भी तय माना जा रहा है। इस रिक्त हुए सीट के लिए तीन दिसंबर तक नामांकन होगा। वहीं 14 दिसंबर को चुनाव होगा।

    राजद के सूत्रों का कहना है कि राजद में राज्यसभा के लिए दो नामों की चर्चा तेज है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह और वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दिकी को पार्टी राज्यसभा भेजना चाहती है। सिद्दिकी हाल ही में विधानसभा चुनाव हार गए थे। दोनों नेता राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के विश्वास पात्र माने जाते हैं। वैसे सूत्र यह भी कह रहे हैं राजद दिग्गज नेताओं के अलावा, अन्य नेता को भी चुनाव मैदान में उतार सकती है, जिससे हारने की स्थिति में आलोचना से बचा जा सके।

    वैसे, राजद ने अभी पत्ते नहीं खोले हैं। संख्या बल के हिसाब से देखा जाए राजग का पलड़ा भारी है। राजग के पास जहां 125 विधायक हैं वहीं राजद नेतृत्व वाले महागठबंधन के पास 110 विधायक है। दो दिन पूर्व बिहार विधानसभा अध्यक्ष के पद पर भी महागठबंधन ने अपना उम्मीदवार खड़ा किया था, जिसे हार का मुंह देखना पड़ा था।

    इधर, भाजपा के प्रवक्ता मनोज शर्मा कहते हैं, “सुशील कुमार मोदी अनुभवी नेता रहे हैं। बिहार की उन्होंने काफी दिनों तक सेवा दी है अब पार्टी उनके अनुभव को राष्ट्रीय स्तर पर लेना चाहती है। उन्होंने कहा कि विपक्ष लाख कोशिश कर ले, लेकिन उसे कुछ मिलने वाला नहीं है, उनकी हार तय है।”

    इधर, राजद के एक नेता कहते हैं कि पार्टी इस मामले पर विचार कर रही है। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के निधन के बाद इस खाली हुई सीट पर लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) पासवान की पत्नी रीना पासवावन को भेजने की मांग की गई थी। बिहार चुनाव में लोजपा के अकेले चुनाव मैदान में उतर जाने के बाद इस स्थिति में लोजपा के बदले भाजपा ने मोदी को भेजने का निर्णय लिया है।

  • कोई जगह नहीं है संसद और विधानसभाओं में व्यवधान के लिये: बिरला

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    जयपुर । लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि यह बेहद चिंता की बात है कि संसद और राज्यों की विधानसभाओं में विधेयक व्यवधान के बीच पारित होते हैं। बिरला ने कहा, संसद हो या विधानसभा व्यवधान के लिए कोई जगह नहीं है। यहां बहस, चर्चा और संवाद होना चाहिए।

    यह पूछे जाने पर कि सदन में बिना बहस के हंगामे के बीच विधेयक पारित हो जाते हैं, बिरला ने कहा, यह सही है और चिंता का विषय है कि संसद और विधानसभाओं में व्यवधान के बीच विधेयक पारित हो जाते है। व्यवधान के लिये कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि कम से कम व्यवधान हो इसके प्रयास किये जा रहे है। उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष के नेतृत्व में एक कमेटी गठित की गई है जो इस पर चर्चा कर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी ताकि एक सामान्य कार्यक्रम बने और जनप्रतिनिधि आदर्श रूप से अपनी भूमिका निभाएं।

  • 1 दिसंबर से हाई कोर्ट और निचली अदालतों में सामान्य कामकाज होगा बहाल

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    मुंबई । बंबई उच्च न्यायालय ने कहा कि महाराष्ट्र में पुणे को छोड़कर बाकी अन्य स्थानों पर एक दिसंबर से दो पालियों में उसके साथ साथ जिला सत्र एवं मजिस्ट्रेट अदालतों में कामकाज सामान्य रूप से बहाल हो जाएगा। उच्च न्यायालय हर दूसरे दिन व्यक्तिगत तौर पर एक महीने तक ‘प्रायोगिक रूप में’ सुनवाई करेगा। उच्च न्यायालय के महापंजीयक एस जी दिगे ने बताया कि सभी अधीनस्थ अदालतों के न्यायाधीश और कर्मचारी अपनी पूरी क्षमता संख्या के साथ सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजकर 30 मिनट तक और दोपहर दो बजे से शाम चार बजकर तीस मिनट तक काम करेंगे।

    उच्च न्यायालय की ओर से जारी एक अन्य नोटिस में बताया गया कि खंड पीठों और एकल पीठों के दो समूह एक एक दिन के अंतराल में दिन में चार घंटे के लिए जमा होंगे और व्यक्तिगत तौर पर सुनवाई करेंगे। फिलहाल अभी उच्च न्यायालय में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई हो रही है। नोटिस में बताया गया कि मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता व्यक्तिगत तौर पर ऑनलाइन माध्यम से मामलों की सुनवाई करेंगे। नोटिस में बताया गया कि पुणे न्यायिक जिले की अदालतों को छोड़कर बाकी सभी अदालतों में एक दिसंबर से दो पालियों में सामान्य रूप से कामकाज शुरू होगा। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और प्रशासनिक कमेटी के अन्य न्यायाधीशों द्वारा राज्य में कोविड-19 की स्थिति को नजर में रखते हुए यह निर्णय लिया गया। वहीं इसमें यह भी कहा गया कि अगर महामारी की स्थिति बिगड़ती है तो जिला प्रधान न्यायाधीश इस संबंध में उच्च न्यायालय से दिशानिर्देश ले सकते हैं।

  • जल्द करेंगे बिहार में नीतीश मंत्रिमंडल विस्तार!

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    पटना । बिहार में पिछले महीने नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार गठन के बाद विधानसभा का पहला सत्र संपन्न हो गया। इस दौरान विपक्षी दलों का आक्रामक रवैया भी देखने को मिला। अब, नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना जताई जा रही है। चर्चा है कि दिसंबर महीने में ही नीतीश कुमार मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकते हैं।

    नीतीश की नई सरकार में एक भी मुस्लिम को मंत्री नहीं बनाए जाने को लेकर सियासत में खूब चर्चा भी रही, ऐसे में मंत्रिमंडल के विस्तार में मुस्लिम को स्थान दिया जाएगा या नहीं, यह बड़ा सवाल है। बिहार चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का एक भी मुस्लिम प्रत्याशी जीतकर विधानसभा नहीं पहुंच सका है, ऐसे में तय है कि अगर नीतीश कुमार किसी मुस्लिम चेहरे को अपने मंत्रिमंडल में स्थान देना चाहेंगे, तो वह विधान परिषद का ही सदस्य होगा।

    उल्लेखनीय है कि भाजपा ने इस चुनाव में एक भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया था वहीं जदयू ने 11 मुस्लिम उम्मीदवार जरूर उतारे थे। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, राज्य में कुल 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं, जिनमें फिलहाल मुख्यमंत्री के अलावा 13 मंत्री हैं और मुख्यमंत्री को छोड़कर जदयू के सिर्फ चार मंत्री हैं। 22 और मंत्री की नियुक्ति अभी बाकी है।

    नीतीश मंत्रिमंडल में मेवालाल चौधरी को भी शामिल किया गया था, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपी होने के कारण बाद में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। फिलहाल मंत्रियों के पास पांच-पांच विभागों का दायित्व है। इस कारण नीतीश कुमार जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार कर सकते हैं। दो दिन पहले जदयू के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक भी की थी।

    सूत्रों का कहना है कि नीतीश मंत्रिमंडल का जल्द ही विस्तार हो सकता है। सूत्रों की मानें तो इसके लिए जल्द ही राजग की बैठक बुलाकर मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल विस्तार के लिए नामों पर मंथन करेंगे। इस विस्तार में भाजपा के कम से कम 10 नए चेहरों को मौका मिल सकता है, जिनमें युवा और अति पिछड़े व दलित वर्ग से आने वाले विधायकों को भी मंत्री पद की जिम्मेवारी मिल सकती है। जदयू भी इस मंत्रिमंडल में अपने नए लोगों को मौका दे सकती है। ऐसे में यह भी तय माना जा रहा है कि इस मंत्रिमंडल विस्तार में जदयू किसी मुस्लिम चेहरे को मंत्री बना सकती है।

    इस चुनाव में जदयू, भाजपा से कम सीटें लाकर राजग में ‘छोटे भाई’ की भूमिका में है, जिसे लेकर जदयू संजीदा है। जदयू भविष्य को लेकर अभी से ही मंथन में जुट गई है। जदयू के एक नेता भी मानते हैं कि सीटों की संख्या तो कम हो ही गई है, उम्मीद के मुताबिक मुस्लिमों का समर्थन भी पार्टी को नहीं मिला है, जिसका खामियाजा पार्टी को इस चुनाव में उठाना पड़ा है। ऐसे में तय है कि नीतीश कुमार किसी मुस्लिम को मंत्री बना कर मुस्लिम वोटर को बड़ा मैसेज देने की कोशिश कर सकते हैं।

  • उद्धव ठाकरे की मौजूदगी में अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर हुईं शिवसेना में शामिल

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    बॉलीवुड अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर आज यानी मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की मौजूदगी में शिवसेना में शामिल हुईं। इस तरह से उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़ अब एक नई राजनीतिक पारी का आगाज किया है। उन्होंने 2019 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा था और बाद में पार्टी छोड़ दी थी।

    बताया जा रहा है कि शिवसेना ने राज्यपाल बी एस कोश्यारी के पास उर्मिला मांतोंडकर का नाम विधान परिषद में राज्यपाल कोटा से नामित करने के लिए भेजा है। इसके अलावा इस कोटे के लिए महा विकास अघाडी ने 11 और नाम भेजे हैं। हालांकि राज्यपाल ने अभी इन 12 नामों को मंजूरी नहीं दी है।
    मातोंडकर 2019 के लोकसभा चुनाव में मुंबई उत्तरी सीट से कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ी थीं। हालांकि उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। बाद में उन्होंने कांग्रेस की मुंबई इकाई के कामकाज के तरीकों को लेकर पार्टी छोड़ दी। हाल में उन्होंने मुंबई की तुलना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से करने के लिए कंगना रनौत की आलोचना की थी।

    उर्मिला मातोंडकर का जन्म 4 फरवरी 1974 को मुंबई में हुआ था। उर्मिला ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत बतौर चाइल्ड एक्ट्रेस मराठी फिल्म ‘झाकोला’ (1980) से की थी। ‘कलयुग’ (1981) उनकी पहली हिंदी फिल्म थी। उर्मिला ने 1983 में फिल्म ‘मासूम’ से चाइल्ड आर्टिस्ट के रुप में बॉलीवुड में डेब्यू किया था।