Category: state-news

  • ऐसा रहा राजनीतिक सफर बिहार की डिप्टी सीएम बनीं रेणु देवी का

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    पश्चिम चंपारण। बेतिया शहर के सुप्रिया रोड निवासी और बेतिया से भाजपा विधायक रेणु देवी ने राजनीतिक सफर दुर्गावाहिनी से शुरू किया। इंटरमीडिएट और बीए अंतिम वर्ष तक शिक्षा ग्रहण करने वाली नोनिया समाज की रेणु देवी की हिन्दी, अंग्रेजी, भोजपुरी और बंगला भाषा पर अच्छी पकड़ है।

    01 नवंबर 1959 को जन्मी रेणु का बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव रहा है। 1981 में सामाजिक जीवन में पदार्पण हुआ। चंपारण और उत्तर बिहार को कार्यक्षेत्र बनाकर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के हक की लड़ाई शुरू की। 1988 में भाजपा दुर्गावाहिनी की जिला संयोजक बनीं। उस दौरान राम मंदिर आंदोलन में करीब 500 महिला कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तारी दी। 1989 में भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष चुनी गईं।  1990 में तिरहुत प्रमंडल में महिला मोर्चा की प्रभारी बनीं। 1991 में प्रदेश महिला मोर्चा की महामंत्री बनीं। 1992 में जम्मू कश्मीर तिरंगा यात्रा में शामिल हुई। 1993 भाजपा बिहार प्रदेश महिला मोर्चा की अध्यक्ष चुनी गई। 1996 में फिर महिला मोर्चा की अध्यक्ष बनीं। 2014 में भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चुनी गईं।

    1995 में नौतन से पहला चुनाव

    पहली बार 1995 में नौतन विधान सभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ी। 2000 में बेतिया विधान सभा सीट से चुनाव लड़ी और जीती। 2005 फरवरी व नवंबर में बेतिया से फिर विधायक बनीं। 2007 में बिहार की कला संस्कृति मंत्री बनीं। 2010 में भी विधायक बनीं। 2015 में कांग्रेस के मदन मोहन तिवारी से चुनाव हार गई। 2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर बेतिया से कांग्रेस के मदन मोहन तिवारी को हरा दिया। रेणु देवी बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओं अभियान के तहत सदस्य के रूप में कार्य कर रही है।

    माज को जोड़ा

    बिहार में नोनिया बिंद मल्लाह तुरहा आदि जाति को पार्टी की विचारधारा से जोड़ा। राष्ट्रीय स्तर पर अतिपिछड़ा की मजबूत जातियों नोनिया (चौहान) , उपहारा /सागरा , लबाना (पंजाब ), सदर समाज (गुजरात ) के बीच जाकर अलख जगाया और पार्टी से जोड़ा। 2007 में बिहार सरकार की ओर से मॉरिशस भेजे गए डेलिगेशन में भी शामिल रहीं।

    जीवन परिचय – रेणु देवी

    – 1981 में सामाजिक जीवन में पदार्पण। इस दौरान चम्पारण और उत्तर बिहार को कार्यक्षेत्र बना कर कई सामाजिक कार्य कीं। खासकर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के हक की लड़ाई लड़ी।

    – 1988 में दुर्गा वाहिनी की जिला संयोजक बनी। इस दौरान राममंदिर आंदोलन में लगभग 500 महिला कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ़्तारी दी।

    – 1989 में भाजपा, पश्चिम चम्पारण महिला मोर्चा की अध्यक्ष बनी।

    – 1990 में तिरहुत प्रमंडल में महिला मोर्चा का प्रभारी बनाया गया।

    – 1991 में भाजपा प्रदेश महिला मोर्चा की महामंत्री बनी।

    – 1992 जम्मू कश्मीर तिरंगा यात्रा में शामिल हुई।

    – 1993 में भाजपा बिहार प्रदेश महिला मोर्चा की अध्यक्ष बनी।

    – 1995 में  पहली बार नौतन विधान सभा क्षेत्र से  भाजपा ने उम्मीदवार बनाया।

    – 1996 में पुनः महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष बनी।

    – 1996 में राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य बनाया गया। बिहार के समीपवर्ती राज्यों की महिला मोर्चा की प्रभारी बनीं।

    – 2000 में बेतिया विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने टिकट दिया और  10500 मतों से जीती।

    – 2005 के फरवरी व नवंबर के विधानसभा चुनाव में बेतिया से विधायक चुनी गई।

    – 2007 में बिहार सरकार में कला एवं संस्कृति मंत्री बनी ।

    – 2010 के विधानसभा के चुनाव में बेतिया से पुनः विजय हासिल की।

    – 2015 में बिहार विधानसभा का चुनाव में बेतिया से लड़ी, चुनाव हार गई।

    – बिहार में नोनिया, बिंद, मल्लाह, तुरहा आदि जाति को पार्टी की विचारधारा से जोड़ा।

     

  • कांग्रेस को फिर भी बैर, जबकि गैरसैंण नहीं गैर

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    देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र गैरसैंण को लेकर एक के बाद एक, मास्टर स्ट्रोक ठोक रहे हैं और विपक्ष कांग्रेस हाथ मलने के अलावा कुछ नहीं कर पा रही है। गैरसैंण में राजधानी, अलग उत्तराखंड राज्य की अवधारणा के मूल में था, मगर इस पर 19 सालों तक कुछ नहीं हुआ, सिवा सियासत के। इसी साल मार्च में गैरसैंण में विधानसभा के सत्र के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अचानक गैरसैंण को राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया।

    कांग्रेस को काटो तो खून नहीं। गैरसैंण में कैबिनेट बैठक, विधानसभा सत्र की पहल कांग्रेस सरकार के समय हुई, मगर वह इससे आगे कदम बढ़ाने का साहस नहीं जुटा पाई। त्रिवेंद्र ने पहले गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया और हाल में राज्य स्थापना दिवस पर गैरसैंण में आधारभूत ढांचे के विकास के लिए 25 हजार करोड़ की योजना का एलान भी कर दिया। हाथ से मौका कैसे फिसलता है, कोई कांग्रेस से पूछे।

    ये क्या हो रहा, ये क्यों हो रहा

    सूबे में पिछले छह सालों में पूरी तरह भाजपा का वर्चस्व चला आ रहा है, जबकि कांग्रेस पूरी तरह हाशिए पर है। अब लग रहा कि कमजोर विपक्ष के बावजूद भाजपा को चुनौती मिल रही है, उसकी ही पार्टी के नेता मानों विपक्ष की भूमिका निभाने को आतुर हैं। एक विधायक को छह साल के लिए निष्कासित किया और सालभर बाद फिर गले लगा लिया। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के दावे पर सवाल उठाने वाले नेताजी का मामला फिलहाल पैंडिंग चल रहा है। एक कैबिनेट मंत्री के पर कतरे गए तो छटपटाहट सियासी परिदृश्य पर दिखनी ही थी। एक अन्य हैं, जिन्होंने अपने पुराने कप्तान पर कथित टिप्पणी को लेकर तूफान बरपाने में कोई कसर ही नहीं छोड़ी। ताजातरीन मामला एक पूर्व मंत्री लाखीराम जोशी का है, जो सरकार के खिलाफ सीधे पीएमओ में दस्तक दे बैठे। सूरतेहाल, सभी की जुबां पर यही है कि आखिर इसकी वजह क्या है।

    चुनावी वैतरणी में नैया के दो नए खेवनहार

    चुनाव हैं, तो हर कोई जीतना चाहता है। इसमें गलत कुछ भी नहीं। अब इसमें कौन कामयाब होगा, कैसे होगा, कब होगा, यह सब डिपेंड करता है मैदान में उतरने वाले राजनीतिक दलों के संगठन के नेटवर्क, नेतृत्व क्षमता और जनता पर पकड़ पर। अपने सूबे में सवा साल बाद विधानसभा चुनाव हैं, तो सत्तासीन भाजपा और विपक्ष कांग्रेस पूरी ताकत झोंकने को तैयार बैठे हैं। संगठन और पकड़ के पैमाने पर तो कांग्रेस फिलहाल भाजपा के मुकाबले बैकफुट पर ही दिख रही है, लेकिन नेतृत्व के पैमाने पर दोनों ने लगभग एक ही साथ एक जैसा कदम उठाया है। आलाकमान के नुमाइंदे के तौर पर प्रदेश प्रभारी का काफी अहम रोल होता है। भाजपा ने दुष्यंत कुमार गौतम, तो कांग्रेस ने देवेंद्र यादव पर दांव खेला है। अब चुनाव की कसौटी पर गौतम खरा उतरते हैं या फिर यादव, काफी कुछ तय करेगा कि मिशन 2022 कौन फतेह करेगा।

    बिहार में मोदी मैजिक, भाजपा उत्तराखंड में खुश

    तमाम तरह के वर्चुअल सर्वे पोल के नतीजों को दरकिनार करते हुए बिहार में फिर एनडीए को बहुमत हासिल हुआ। इसके साथ ही अन्य राज्यों में हुए उपचुनावों में भी भाजपा को जबर्दस्त सफलता मिली। हालांकि, अबकी बार बिहार में जेडीयू के मुकाबले भाजपा काफी आगे निकल गई। भाजपा की इस जबरदस्त कामयाबी का एकमात्र कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जादू को ही माना जा सकता है। बिहार के नतीजों से उत्तराखंड में भी भाजपा अब काफी कुछ निश्चिंतता में नजर आ रही है। हो भी क्यों न, पिछले दो लोकसभा चुनाव और एक विधानसभा चुनाव में नमो लहर में ही तो पार्टी को इस कदर कामयाबी मिली। लब्बोलुआब यह कि छह साल से जब लहर पर सवार हैं तो सवा साल बाद भी सवारी का मौका मिलेगा ही। फिर यहां तो वैसे ही कांग्रेस कोने में दुबकी बैठी है, बाकी कोई और चुनौती देने वाला भी तो है नहीं।

     

  • बिहार में उपचुनावों में कांग्रेस की हार और पार्टी नेताओं के बीच लड़ाई के बीच आज विशेष बैठक

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    नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव और उपचुनावों में हार का सामना करने के बाद कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में कांग्रेस की विशेष समिति की एक बैठक आज होने जा रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आज शाम 5 बजे बैठक होगी, लेकिन इसका एजेंडा स्पष्ट नहीं है।

    यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब चुनावों में हार के बाद कांग्रेस में समीक्षा का मुद्दा उभर रहा है। पार्टी में सुधार की मांग करने के लिए कुछ महीने पहले सोनिया गांधी को पत्र लिखने वाले 23 कांग्रेसी नेताओं में से एक कपिल सिब्बल ने हार की नए सिरे से समीक्षा करने की मांग की है, जिसके बाद वह साथी कांग्रेसी नेताओं के निशाने पर आ गए हैं।

    राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से लेकर दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अनिल चौधरी तक कांग्रेस नेता सिब्बल पर सवाल उठा रहे हैं। इस सब के बीच सोनिया गांधी की सलाहकार समिति की बैठक कई अटकलों को जन्म दे रही है। अगस्त में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष, सोनिया गांधी को संगठनात्मक और संचालन मामलों पर सहायता के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया था।

    अहमद पटेल, केसी वेणुगोपाल, एके एंटनी, अंबिका सोनी, मुकुल वासनिक, रणदीप सुरजेवाला इसके सदस्य हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि बीमार स्वास्थ्य के कारण अहमद पटेल अस्पताल में भर्ती हैं। इसके बावजूद, इस बात पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या कांग्रेस के अंदर एक नया तूफान आ रहा है।

    बिहार में हार का ठीकरा कांग्रेस के सिर फूटा

    हाल ही में संपन्न बिहार चुनावों में महागठबंधन (महागठबंधन) की हार के लिए कांग्रेस को दोषी ठहराया जा रहा है। महागठबंधन में राजद और वामपंथी दलों की सफलता की दर 50 फीसदी से अधिक थी, जबकि कांग्रेस 70 सीटों में से केवल 19 सीटें ही जीत सकी थी। मध्य प्रदेश उपचुनाव में कांग्रेस को 28 में से केवल नौ सीटें मिलीं। कर्नाटक की दो विधानसभा सीटों और गुजरात की आठ विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी। कांग्रेस का प्रदर्शन यूपी में भी निराशाजनक रहा जहां प्रियंका गांधी प्रभारी हैं।

    बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राजद नेताओं ने कांग्रेस पार्टी के रवैये पर भी सवाल उठाए हैं। राजद नेता शिवानंद तिवारी ने पार्टी नेतृत्व को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्होंने प्रचार अभियान में ध्यान नहीं दिया क्योंकि प्रियंका गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ। मनमोहन सिंह और कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी जैसे कई वरिष्ठ नेताओं ने मतदान तक नहीं किया।

     

  • ‘अर्थ गंगा’ गंगा के साथ ही संवारेगी गांवों की आर्थिकी भी…

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    देहरादून। राष्ट्रीय नदी गंगा से संबंधित आर्थिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही नमामि गंगे परियोजना को ‘अर्थ गंगा’ जैसे सतत विकास मॉडल में परिवर्तित करने की मुहिम को लेकर केंद्र सरकार सक्रिय हो गई है। इसके तहत देशभर में गंगा की सहायक नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने के साथ ही गंगा किनारे बसे करीब 4500 गांवों की आर्थिकी संवारने को कदम उठाए जाएंगे। इसमें हिमालयी पर्यावरण अध्ययन एवं संरक्षण संगठन (हेस्को) तकनीकी सहयोग देगा। इस सिलसिले में जल्द ही राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) और हेस्को के मध्य समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत वर्ष दिसंबर में हुई राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक में अर्थ गंगा का सुझाव दिया था। इस प्रोजेक्ट को अब मूर्त रूप दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत गंगा की सहायक नदियों के संरक्षण-संवर्धन के साथ ही इनके जलसमेट क्षेत्रों (कैचमेंट एरिया) के उपचार के अलावा गंगा किनारे बसे गांवों को भी बेहतर लाभ पहुंचाने का इरादा है। यानी पारिस्थितिकी और आर्थिकी दोनों को ही सशक्त बनाया जाना है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन अब हेस्को से हाथ मिलाने जा रहा है।

    असल में हेस्को उत्तराखंड समेत विभिन्न राज्यों में नदी, जंगल, ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के साथ ही गांवों के विकास के मद्देनजर ग्रामीण तकनीकी को लेकर कार्य कर रहा है। पिछले वर्ष अप्रैल में मिशन के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा ने देहरादून के शुक्लापुर पहुंचकर हेस्को की तकनीकी का अवलोकन किया था। साथ ही संकेत दिए थे कि नमामि गंगे परियोजना के तहत पारिस्थितिकी और आर्थिकी संवारने के लिए हेस्को की तकनीकी का उपयोग किया जाएगा।

    स्को के संस्थापक पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के अनुसार अर्थ गंगा की मुहिम को तेजी से बढ़ाने के लिए एनएमसीजी और हेस्को के मध्य होने वाले समझौते का मसौदा तैयार हो चुका है। जल्द ही इस पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके बाद हेस्को की ओर से गंगा किनारे के गांवों की आर्थिकी सशक्त बनाने के मद्देनजर संदर्भव्यक्ति (रिसोर्स पर्सन) तैयार किए जाएंगे। ये ग्राम्य विकास से जुड़ी हेस्को की तकनीकी ग्रामीणों से साझा करने के साथ ही इन्हें धरातल पर उतारने में मदद करेंगे। इसके अलावा गंगा की सहायक नदियों के जलसमेट क्षेत्रों में वर्षा जल संरक्षण समेत अन्य कदम उठाए जाएंगे।

     

  • मंत्रियों को मिला प्रभार, नीतीश के पास गृह मंत्रालय, तारकिशोर को वित्त

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    पटना । बिहार में नवगठित सरकार में मंगलवार को मंत्रियों में विभागों का बंटवारा कर दिया गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास गृह विभाग के अलावा मंत्रिमंडल सचिवालय, सामान्य प्रशासन, निगरानी, निर्वाचन सहित कई विभाग रहेंगे। भाजपा के तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी को उपमुख्यमंत्री का दायित्व सौंपा गया है। तारकिशोर प्रसाद के पास वित्त विभाग, वाणिज्य कर विभाग, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, सूचना प्रावैधिकी, आपदा प्रबंधन, नगर विकास एवं आवास विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा उपमुख्यमंत्री रेणु देवी के जिम्मे पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, पंचायती राज और उद्योग विभाग होगा।

    बिहार सरकार में नवगठित मंत्रियों में जदयू कोटे से मंत्री बने विजय कुमार चौधरी को ग्रामीण कार्य, संसदीय कार्य, ग्रामीण विकास, जलसंसाधन, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि बिजेंद्र प्रसाद यादव को ऊर्जा, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन, योजना एवं विकास, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग सौंपा गया है।

    इसके अलावा अशोक चौधरी को भवन निर्माण, समाज कल्याण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा अल्पसंख्यक कल्याण जैसे विभागों का दायित्व सौंपा गया है। जदयू के ही मेवा लाल चौधरी को शिक्षा विभाग का जिम्मा दिया गया है। शीला कुमारी को परिवहन विभाग मिला है।

    हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा कोटे से बने संतोष कुमार सुमन को लघु जल संसाधन तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग दिया गया है। विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी को मत्स्य पालन और पशुपालन विभाग सौंपा गया है।

    भाजपा कोटे से बने मंत्रियों में मंगल पांडेय को स्वास्थ्य, कला संस्कृति एवं युवा तथा पथ निर्माण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि अमरेंद्र प्रताप सिंह को कृषि, सहकारिता एवं गन्ना उद्योग, रामप्रीत पासवान को लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

    इसके अलावा जीवेश कुमार मिश्रा को श्रम संसाधन, पर्यटन, खान एवं भूतत्व की जिम्मेदारी दी गई है। रामसूरत कुमार को राजस्व एवं भूमि सुधार तथा विधि विभाग सौंपा गया है।

    उल्लेखनीय है कि सोमवार को नीतीश कुमार ने सातवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके अलावा इन लोगों ने भी मंत्री पद की शपथ ली थी।

  • सौमित्र चटर्जी के शव के साथ पश्चिम बंगाल सरकार ने की ‘ओछी राजनीति’: अधीर रंजन

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    कोलकाता । पश्चिम बंगाल के कांग्रेस प्रमुख अधीर रंजन चौधरी ने बुधवार को आरोप लगाया कि राज्य में तृणमूल कांग्रेस सरकार ने प्रसिद्ध अभिनेता सौमित्र चटर्जी के शव पर ‘‘ओछी राजनीति’’ की और जब वह जिंदा थे तो कभी उनका सम्मान नहीं किया। चौधरी ने सौमित्र की बेटी पॉलोमी बसु से दक्षिण कोलकाता में उनके गोल्फ ग्रीन आवास पर मुलाकात की। कांग्रेस नेता ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘तृणमूल कांग्रेस ने 2011 में राज्य में सत्ता में आने के बाद से कभी उनका सम्मान नहीं किया। उन्हें विभिन्न कमेटियों से बाहर कर दिया गया। लेकिन 15 नवंबर को उनकी मौत के बाद उनके शव पर ओछी राजनीति की।’’

    लोगों के अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए चटर्जी के पार्थिव शरीर को मध्य कोलकाता के रवींद्र सदन में रखा गया था। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को केओरातला शवदाह गृह ले जाया गया और इस दौरान शव के साथ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और वाम दलों के वरिष्ठ नेताओं समेत हजारों लोग साथ गए। पूरे राजकीय सम्मान से चटर्जी का अंतिम संस्कार किया गया।

    चौधरी ने कहा, ‘‘हमें लगा था कि सौमित्र बाबू के व्यापक अनुभवों का यह सरकार अच्छे तरीके से इस्तेमाल करेगी लेकिन कला और संस्कृति पर विभिन्न महत्वपूर्ण कमेटियों से उन्हें बाहर रखा गया।’’ कांग्रेस नेता चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार विजेता चटर्जी के जीवन से जुड़े और कार्यों को संग्रहित करने के लिए पहल करनी चाहिए। चौधरी द्वारा राज्य सरकार की आलोचना के बारे में पूछे जाने पर बसु ने कहा, ‘‘हमें इन सब चीजों में नहीं पड़ना है।’’ बहरहाल तृणमूल कांग्रेस के एक नेता ने चौधरी की आलोचना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

  • नहाय-खाय के साथ कोरोना काल का पहला छठ शुरु, राज्‍यपाल व CM नीतीश ने दी बधाई

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    पटना। Chhath Puja 2020 लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ (Chhath) बुधवार को नहाय-खाय (Nahai-Khay) के साथ शुरू हो गया है। इसका समापन शनिवार को उगते सूर्य को अर्घ्‍य (Morning Arghya) देने के साथ होगा। इसके पहले गुरुवार को खरना (Kharna) व्रत होगा तथा शुक्रवार को भगवान भास्‍कर को सायंकालीन अर्घ्‍य (Evening Arghya) दिया जाएगा। छठ व्रत को लेकर बिहार के नदी घाटों पर सुरक्षा व कोरोना संक्रमण (CoronaVirus Infection) से बचाव को लेकर कड़े इंतजाम किए गए हैं। महापर्व को लेकर राज्‍यपाल फागू चौहान (Governor Fagu Chauhan) तथा मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) सहित कई जनप्रतिनिधियों ने जनता को बधाई दी है।

    नहाय-खाय के लिए घाटों पर आ रहे श्रद्धालु

    चार दिवसीय छठ व्रत का आज पहला दिन है। इस दिन व्रती अरवा चावल, दूध और गुड़ से बने खीर का प्रसाद बना कर सूर्य देव को अर्पित करते हैं। व्रती व अन्‍य श्रद्धालु गंगा जल या आपपास के अन्‍य नदियों के जल से स्‍नान करते हैं, फिर वहां से जल लाकर प्रसाद बनाते हैं। इस बार कोरोना संक्रमण के कारण नदी घाटों पर पहले वाली भीड़ तो नहीं दिख रही, लेकिन व्रतियों का आना जारी है। पटना की बात करें तो गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी है।

    कोरोना गाइडलाइन के साथ मनाया जा रहा पर्व

    छठ पर्व नदियों-तालाबों के किनारे घाट बनाकर मनाने की परंपरा है। इसके लिए नदी-घाटों पर तैयारियां की गईं हैं, लेकिन कड़े एहतियात के साथ। प्रशासन ने कोरोना संक्रमण को लेकर नदी घाटों पर नहीं जाने की अपील की है, लेकिन जाने वालों को रोका भी नहीं है। हां, कोरोना संक्रमण की गाइडलाइन जारी करते हुए उनसे पैदल जाने, शारीरिक दूरी का पालन करने तथा मास्‍क पहनने को कहा है। बीमार तथा 10 साल से कम व 60 साल से अधिक के लोगों को घाटों पर जाने की अनुमति नहीं दी गई है। व्रत कि दौरान पानी में डुबकी भी नहीं लगानी है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए छठ के दौरान मेला व सांस्कृतिक व भक्ति के कार्यक्रम का आयोजन भी नहीं किया जाएगा।

  • उत्‍तराखंड कड़ाके की ठंड की चपेट में,,,,

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    देहरादून। सोमवार को हुई बर्फबारी और बारिश के बाद समूचा उत्तराखंड कड़ाके की ठंड की चपेट में है। हालांकि मंगलवार को दून, मसूरी सहित प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में चटख धूप रही, लेकिन सर्द हवा बेचैन कर रही है। सुबह और शाम तापमान तेजी से गिर रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार आने वाले दिनों में मौसम साफ रहेगा, लेकिन तापमान में गिरावट हो सकती है। चमोली जिले के रानीचौंरी में तापमान सबसे कम 1.6 डिग्री सेल्सियस रहा। दून, मसूरी, डोईवाला व ऋषिकेश में दिनभर चटख धूप खिली रही लेकिन जैसे ही धूप छिपी एकाएक सर्द हवाएं चलने लग गई हैं। मसूरी का न्यूनतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री नीचे दर्ज किया गया।

    देहरादून स्थित राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि न्यूनतम तापमान में औसतन दो से तीन डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान में करीब दो डिग्री सेल्सियस की कमी आई है। प्रदेश में चमोली जिले का जोशीमठ भी ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान 2.1 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। मसूरी, अल्मोड़ा और मुक्तेश्वर में भी न्यूनतम तापमान पांच डिग्री सेल्सियस से कम रहा। मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी के आसार हैं।

    केदारनाथ में दिनभर हटाई गई बर्फ

    मंगलवार को केदारनाथ में दिनभर बर्फ हटाने का कार्य जारी रहा। धाम में सोमवार को लगातार 12 घंट बर्फबारी हुई। इससे परिसर में करीब दो से ढाई फीट बर्फ जमा हो गई। बदरीनाथ के निकट सड़क पर पसरी बर्फ को साफ कर लिया गया है। अब धाम तक वाहनों की आवाजाही हो रही है। मौसम में आए बदलाव से पारे ने भी गोता लगाया है।

    शीतलहर से पहले अलाव को चिह्नित करें स्थान 

    सर्दियां शुरू हो चुकी हैं और विभिन्न समय पर शीतलहर से भी रूबरू होना पड़ेगा। इसके लिए अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) बीर सिंह बुदियाल ने देहरादून नगर निगम समेत अन्य नगर निकायों और जिला पंचायत अधिकारियों को अलाव जलाने के लिए स्थान चिह्निनत करने को कहा है। मंगलवार को जारी प्रेस बयान में अपर जिलाधिकारी बुदियाल ने कहा कि शीतलहर के दौरान अलाव की पुख्ता व्यवस्था करना जरूरी है। ताकि कोई भी बेसहारा व्यक्ति या रात्रि गश्त करने वाले कार्मिकों को दिक्कत का सामना न करना पड़े।

    इसके अलावा उन्होंने विभिन्न रैनबसेरों में भी पुख्ता तैयारी करने के निर्देश जारी किए। अपर जिलाधिकारी ने कहा कि रैनबसेरों में सैनिटाइजेशन करा दिया जाए और कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए शारीरिक दूरी के नियमों के हिसाब से इंतजाम किए जाएं। सभी तरह की व्यवस्थाओं और चिह्नित स्थलों की सूचना जिला आपदा परिचालन केंद्र को भी मुहैया कराई जाए।

    विभिन्न शहरों में तापमान

    शहर, अधि. न्यून.

    देहरादून 26.7 09.8

    उत्तरकाशी 17.6 05.8

    मसूरी 16.5 04.4

    टिहरी 16.8 04.2

    हरिद्वार 27.3 11.9

    जोशीमठ 09.1 02.1

    पिथौरागढ़ 19.8 05.6

    अल्मोड़ा 22.4 04.4

    मुक्तेश्वर 15.0 04.8

    नैनीताल 16.6 07.0

    यूएसनगर 28.0 08.5

    चम्पावत 17.9 03.1

     

  • शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा गर्म सिंधिया के भोपाल दौरे से

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    भोपाल ।  मध्य प्रदेश में विधानसभा के उप-चुनाव होने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया के भोपाल दौरे से एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।

    राज्य में विधानसभा के 28 क्षेत्रों में उपचुनाव हुए और उनमें से 19 पर भाजपा और नौ क्षेत्रों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की। उपचुनाव में शिवराज सरकार के तीन मंत्रियों को भी हार का सामना करना पड़ा है, वहीं दो मंत्रियों को बगैर विधायक के छह माह का कार्यकाल पूरा करने पर पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इस तरह राज्य में छह मंत्रियों के पद रिक्त हैं और इसके लिए दावेदार कई हैं।

    राजनीतिक हलकों में एक तरफ मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना जताई जा रही है तो वहीं निगम व मंडलों में भी नियुक्तियां संभावित हैं। इसी बीच सिंधिया का भोपाल दौरा हुआ। उन्होंने इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भोपाल स्थित कार्यालय समिधा में जाकर पदाधिकारियों से चर्चा की और अपने समर्थक मंत्रियों व पूर्व मंत्रियों से उनकी मुलाकात भी कराई। वहीं सिंधिया ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती के निवास पर जाकर उनसे मुलाकात भी की।

    मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाओं को लेकर सिंधिया का कहना है कि, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सही समय पर सही फैसला करेंगे। वहीं हारे हुए मंत्रियों को लेकर उनका कहना है कि मुख्यमंत्री चौहान से इसके संदर्भ में भी चर्चा हो चुकी है।

    राजनीतिक विश्लेषक साजी थामस का कहना है कि राज्य में भाजपा ने 19 स्थानों पर जीत दर्ज कर अपनी सरकार को आगामी तीन साल के लिए स्थाई कर लिया है, मगर पार्टी के सामने सिंधिया समर्थकों और पार्टी के असंतुष्टों को भी संतुष्ट करने की चुनौती है। अब देखना होगा कि पार्टी सबको संतुष्ट कैसे करती है। पार्टी के लिए आगामी कुछ माह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में नगरीय निकाय और पंचायतों के चुनाव भी होने वाले हैं इसलिए पार्टी की यही कोशिश होगी कि किसी तरह का असंतोष न रहे।

    राज्य में विधानसभा के सदस्यों की संख्या के आधार पर अधिकतम 34 मंत्री बनाए जा सकते हैं। राज्य में कुल 230 विधानसभा सदस्य हैं और 15 प्रतिशत सदस्यों को ही मंत्री बनाया जा सकता है। इस तरह कुल 34 मंत्री बन सकते हैं। वर्तमान में कुल 28 मंत्री हैं। इस तरह छह नए मंत्री बनाए जाने हैं। जो तीन मंत्री चुनाव हारे है उन्हें निगम-मंडलों में समायोजित करने की तैयारी है।

  • सांयकालीन अर्घ्य देंगे छठ महापर्व के तीसरे दिन भगवान सूर्य को, राज्यपाल और सीएम ने दीं शुभकामनाएं

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    देहरादून। चार दिवसीय पर्व छठ के तीसरे दिन शुक्रवार को सूर्य भगवान को सायंकालीन अर्घ्‍य दिया जाएगा। इससे पहले गुरुवार शाम को व्रतियों ने रसियाव यानि गुड़ और गाय के दूध से बनी खीर का प्रसाद तैयार कर छठी माई के साथ ही अपने कुल देव को भोग लगाया। सूर्यदेव को भोग और अर्घ्य चढ़ाकर निर्जला व्रत धारण किया। आपको बता दें कि बुधवार को नहाय-खाय के साथ छठ महापर्व की शुरुआत हुई। वहीं, राज्यपाल बेबी रानी मौर्य और सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत प्रदेशवासियों को छठ पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

    छठ महापर्व नहाय खाय के साथ शुरू हुआ है। इसके बाद कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर खरना होता है। छठ पर्व में खरना के दिन व्रत रखा जाता है। व्रती अपने कुल देवता और छठ माई की आराधना करते हैं। खरना का मतलब है शुद्धिकरण, जो व्यक्ति छठ का व्रत करता है, उसे इस पर्व के पहले दिन यानी खरना वाले दिन उपवास रखना होता है।

    इस दिन केवल एक ही समय भोजन किया जाता है। यह शरीर से लेकर मन तक सभी को शुद्ध करने का प्रयास होता है। इसकी पूर्णता अगले दिन होती है। शुक्रवार को षष्टी तिथि छठ महापर्व का सबसे खास दिन होता है। इस दिन व्रती महिलाएं ढलते सूर्य को अघ्र्य अर्पित कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। इस दिन सूर्यास्त का समय शाम पांच बजकर 26 मिनट है। इस समय सूर्य को अर्घ्य देना शुभ मना जाता है। शनिवार को सूर्योदय का समय सुबह छह बजकर 48 मिनट रहेगा। इसी समय सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाएगा।

    राज्यपाल और सीएम ने दी शुभकामनाएं 

    राज्यपाल बेबी रानी मौर्य और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेशवासियों को छठ पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रकृति की पूजा का पर्व है। राज्यपाल ने अपने संदेश में कहा कि छठ पर्व भगवान सूर्य की उपासना के साथ नदियों और जल स्रोतों की साफ-सफाई और उनके संरक्षण के लिए भी प्रेरित करता है। यह पर्व समाज के सभी व्यक्तियों को एक साथ लाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में विभिन्न त्योहार और पर्व आपसी भाईचारे और प्रेम का प्रतीक होते हैं। इस अवसर पर उन्होंने भगवान सूर्य से प्रदेशवासियों की खुशहाली व समृद्धि की प्रार्थना की। राज्यपाल ने सभी प्रदेशवासियों से कोविड-19 के लिए जारी दिशा-निर्देशों का पालन कर पर्व मनाने की अपील की। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने संदेश में कहा कि लोक आस्था से जुड़ा यह महापर्व हमें सात्विकता और स्वच्छता का संदेश देता है। उन्होंने इस पर्व पर सभी की सुख व समृद्धि की भी कामना की है।